RBSE Class 10th 2011 )-S-74-2011 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2011 |
| Subject | )-S-74-2011 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2011 )-S-74-2011
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Rajasthan Board Class 10th )-S-74-2011 2011 solved Previous Year Question Papers
S—74—Sindhi (T.L.)
Roll No.
No. of Questions — 2
No. of Printed Pages — 7
SECONDARY EXAMINATION, 2011
SINDHI
(Third Language)
Time : 3 Hours
Maximum Marks : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
S—74—Sindhi (T.L.) S-8 [ Turn over
प्रश्न 2: निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए (3+3=6)
-
“पराओ पैसो घर में टिकणो न आहे, बरकत पवन्दी पघर जे पोरिहिये”
भावार्थ: इस पंक्ति में कहा गया है कि पराया धन घर में नहीं टिकता। बरकत (समृद्धि) उसी घर में आती है जहाँ अपने परिश्रम से कमाया हुआ धन होता है। यह नैतिक शिक्षा देती है कि ईमानदारी और मेहनत से कमाया गया धन ही सुख और समृद्धि लाता है।
-
“केरु रंजाए ईज़ाउ रसाए, हाजी पहुंचाए त दुखी थियण जे बदिरां, बदिले चुकाइण बदिरां, दर गुज़र करे बिसारे छड॒णि”
भावार्थ: इस पंक्ति में बताया गया है कि जो व्यक्ति दूसरों को कष्ट पहुँचाता है, उसे स्वयं भी दुख भोगना पड़ता है। बुराई का बदला बुराई से चुकाने वाले व्यक्ति को अंततः पछताना पड़ता है। यह उपदेश देता है कि हमें क्षमाशील होना चाहिए और बुराई का बदला भलाई से देना चाहिए।
-
“मुहिंजे महलात खां हीअ झूपिड़ी लख भाडा वधीक सुठी आहे, जिते 'इन्सानियत' आहे।”
भावार्थ: इस पंक्ति में कहा गया है कि मेरे महलों से यह झोपड़ी लाख गुना बेहतर है, क्योंकि इसमें इंसानियत (मानवता) बसती है। यह संदेश देता है कि भौतिक सुख-सुविधाओं से अधिक महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य और सद्भावना है।
-
“मुल्क माण्हुनि खां महान आहे, इनकरे नौजवाननि खे मुल्क जी तरकौअ लाइ हिम्मत करण घुरिजे।”
भावार्थ: इस पंक्ति में कहा गया है कि देश अपने नागरिकों से महान है, इसलिए युवाओं को देश की तरक्की के लिए हिम्मत से काम करना चाहिए। यह युवाओं को देश के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है और उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।
(पृष्ठ 2 का शेष भाग स्पष्ट रूप से पठनीय नहीं है।)
प्रश्न 2: किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए (4+4+4+4=16)
-
डॉ. कलाम गीता के किस श्लोक पर अधिक आस्था रखते थे?
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम गीता के उस श्लोक पर अधिक आस्था रखते थे जो मनुष्य को निष्काम कर्म (बिना फल की चिंता किए कर्म करने) की प्रेरणा देता है। यह श्लोक भगवद्गीता के दूसरे अध्याय (सांख्य योग) में आता है। -
कुंदन, सुहराब खान और शेर अली के खून का राज किसने खोला?
इस प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार दिया जाना चाहिए। (पाठ्यपुस्तक के संदर्भ में सही उत्तर देखें।) -
अस्पताल में नर्स को देखकर डाकू अधीर क्यों हो रहा था?
अस्पताल में नर्स को देखकर डाकू अधीर इसलिए हो रहा था क्योंकि वह दर्द से कराह रहा था और नर्स के आने पर उसे इलाज मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन वह अपनी पीड़ा को सहन नहीं कर पा रहा था। -
अजीतु डेती-लेती के खिलाफ क्या है?
अजीतु डेती-लेती (लेन-देन) के खिलाफ है क्योंकि वह इसे अनैतिक और गलत मानता है। वह सीधे-सादे तरीके से जीवन जीने में विश्वास रखता है। -
पीरसन शाहूकार से क्यों नहीं मिलना चाहिए?
पीरसन शाहूकार से इसलिए नहीं मिलना चाहिए क्योंकि वह एक लालची और धोखेबाज व्यक्ति है जो गरीबों का शोषण करता है और उन्हें ब्याज के जाल में फंसाता है।
प्रश्न 3: 'सफर जो' पाठ का सार लिखिए, 'साथियों' की हालत पर रोशनी डालिए।
सारांश: 'सफर जो' पाठ यात्रा के अनुभवों और साथियों की स्थिति पर आधारित है। इसमें लेखक ने यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों और साथियों के व्यवहार का वर्णन किया है। साथियों की हालत दयनीय थी - वे थके हुए, भूखे और निराश थे। लेखक ने दिखाया है कि कैसे यात्रा में साथियों का सहयोग और आपसी समझ महत्वपूर्ण होती है। पाठ में मानवीय संवेदनाओं और सहानुभूति पर जोर दिया गया है।
प्रश्न 4: मूल पाप क्या है? स्वामी विवेकानंद ने इसमें क्या कहा है?
मूल पाप: मूल पाप का अर्थ है वह मूलभूत दोष या कमजोरी जो मनुष्य को गलत कार्यों की ओर ले जाती है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार, मूल पाप अज्ञानता (अविद्या) है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपनी वास्तविक प्रकृति (आत्मा) को भूल जाता है और शरीर, मन तथा बाहरी वस्तुओं से तादात्म्य स्थापित कर लेता है। यही अज्ञानता सभी पापों और दुखों का मूल कारण है। स्वामी विवेकानंद ने इससे मुक्ति के लिए आत्मज्ञान और निष्काम कर्म पर बल दिया।
प्रश्न 4: किन्हीं तीन का मतलब लिखो : 3+3+3=9
(0) “पाणीअ मथे झूपिड़ा मूर्ख उज मरनि
साहां आडो सुपिरी, लोचे तां न लहनि
दमु न सुआणनि, दांहूं कनि मुठनि”
अर्थ: पानी के ऊपर बुलबुले के समान यह मूर्ख मनुष्य जीवन है। साँसों का आड़ा (रुकना) सुंदर है, परंतु इच्छा करने पर भी वह नहीं मिलता। दम (साँस) सुहानी नहीं लगती, और दोनों हाथों से मुठ्ठी बंद हो जाती है (अर्थात मृत्यु निकट आ जाती है)।
(i) “माक मोतियुनि हार थी, सींगार सब्ज़ीअ जो करीं,
तू जवाहर में झलक, लालनि अन्दर लालाणि तूं।”
अर्थ: माँ के मोतियों के हार से, सब्जियों का श्रृंगार किया जाता है। तू जवाहरात में झलकती है, लाल रंगों के अंदर तू ही लालिमा है। (यहाँ सिंधी भाषा में प्रकृति या प्रियतम की सुंदरता का वर्णन है।)
(ii) “वण जियां डे फलु ज़माने खे न लेकिन माणु करि,
सबुर ऐं निष्काम आदत खे सदाई साणु”
अर्थ: वन जैसे फल देता है, संसार को नहीं लेकिन मानव करता है। धैर्य और निष्काम आदत को सदा साथ रखना चाहिए। (अर्थात निस्वार्थ भाव से कर्म करने और धैर्य रखने का संदेश।)
(iii) “पहिरियाई हीअ राति त कटिजे,
सुबुह जी गणिती 'श्याम' सुभाणे।”
अर्थ: पहरेदारी की हुई रात कट जाती है, सुबह की गणित (गिनती) 'श्याम' सुहानी लगती है। (अर्थात कठिन समय बीत जाने पर सुखद अनुभव होता है।)
(iv) “ART गुलज़ार बणाईनि जितिबि वजनि उति पाणु वणाईनि
जरकाइनि जहानु fait, आहे कौम महानु सिन्धी।”
अर्थ: कला (ART) ने गुलज़ार (बाग) बनाया, जितने वजन से उतना पानी बनाया। जगमगाया जहान (संसार) को, यह कौम महान है सिंधी। (सिंधी समुदाय की कला और संस्कृति की महानता का बखान।)
(नोट: उपरोक्त पंक्तियाँ सिंधी भाषा की कविता/साहित्य से ली गई हैं। प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से किन्हीं तीन का अर्थ लिखना है।)
प्रश्न 5: किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 4+4=8
(i) "SR ही संसार गुण अवगुण जो रूप आ' जो मतलबु समुझायो।" – इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि संसार में गुण और अवगुण दोनों का रूप विद्यमान है। 'SR' (संभवतः 'सत्' या 'सार') का तात्पर्य है कि जो वास्तविक या शाश्वत है, वही गुण और अवगुण के रूप में प्रकट होता है। मनुष्य को इन दोनों को पहचानकर सत्य की ओर अग्रसर होना चाहिए।
(ii) वण वियनि लाइ कींअ जीअनि था?
उत्तर: वण (वन) और वियनि (व्यक्ति) के लिए जीवन का अर्थ भिन्न-भिन्न होता है। वन में जीवन प्राकृतिक और सादा होता है, जबकि व्यक्ति का जीवन सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में बंधा होता है। दोनों का उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार और संतुलन बनाए रखना है।
(iii) सिज ऐं चण्ड मां ईश्वर कहिड़े रूप में नज़र अचे थो?
उत्तर: सिज (सृष्टि) और चण्ड (चंडी या शक्ति) में ईश्वर का रूप सर्वव्यापी और शक्तिशाली के रूप में दिखाई देता है। ईश्वर यहाँ सृजनकर्ता और संहारक दोनों रूपों में प्रकट होता है, जो ब्रह्मांड के नियमों को संचालित करता है।
(iv) शाह साहिब पुन्हूंअ जो आस्थान feet at gee – (अस्पष्ट पाठ, संभवतः 'शाह साहिब का पुनर्जन्म में आस्था' से संबंधित)
उत्तर: शाह साहिब (शाह अब्दुल लतीफ भिट्टाई) का पुनर्जन्म (पुन्हूंअ) में आस्था उनकी आध्यात्मिक दृष्टि को दर्शाती है। उनके अनुसार, आत्मा अमर है और विभिन्न योनियों में जन्म लेती है, जब तक मोक्ष प्राप्त न हो।
प्रश्न 6: स्वामी टेऊँराम कहिड़ी रहिनी रहण लाइ चयो आहे? खोले समुझायो।
प्रश्न: स्वामी टेऊँराम ने किस प्रकार की जीवन शैली (रहिनी) अपनाने का सुझाव दिया है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: स्वामी टेऊँराम ने सादा और संयमित जीवन (रहिनी) अपनाने पर बल दिया। उनके अनुसार, मनुष्य को इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए, सत्य बोलना चाहिए, और ईश्वर की भक्ति में लीन रहना चाहिए। उन्होंने भौतिक सुखों से दूर रहकर आध्यात्मिक उन्नति पर जोर दिया। उनकी शिक्षा है कि जीवन में संतोष और करुणा का भाव रखना चाहिए, तथा सभी प्राणियों से प्रेम करना चाहिए।
प्रश्न 7: 'मिटीअ जी महक' में श्री खीमन मूलाणीअ, foxes खां पोइ सिन्धु जो कहिड़ो चिटु चिटियो आहे।
प्रश्न: 'मिटीअ जी महक' (मिट्टी की महक) कविता में श्री खीमन मूलाणी ने 'foxes खां पोइ सिन्धु' (सिंधु नदी के तट पर) किस चित्र (चिटु) का वर्णन किया है?
उत्तर: इस कविता में कवि ने सिंधु नदी के तट पर बसे गाँवों और वहाँ की मिट्टी की सुगंध का वर्णन किया है। 'foxes खां पोइ' (लोमड़ियों के समान) रूपक के माध्यम से उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य और सादगी को चित्रित किया है। यह चित्र ग्रामीण जीवन की सरलता, मिट्टी से जुड़ाव, और प्रकृति के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
प्रश्न 8: 'Wak' जी परिभाषा लिखो। पंजनि मिसालनि खे जुमलनि में कमु आणियो।
प्रश्न: 'Wak' (वाक्य) की परिभाषा लिखिए। पाँच उदाहरणों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: 'Wak' (वाक्य) शब्दों का सार्थक समूह है जो पूर्ण अर्थ व्यक्त करता है। इसमें कर्ता, क्रिया और कर्म का सही क्रम होता है।
पाँच उदाहरण:
- राम पुस्तक पढ़ता है। (कर्ता + कर्म + क्रिया)
- सूर्य पूर्व में उगता है। (कर्ता + स्थान + क्रिया)
- बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। (कर्ता + स्थान + क्रिया)
- मोहन ने फल खाया। (कर्ता + कर्म + क्रिया)
- गाय घास चरती है। (कर्ता + कर्म + क्रिया)
प्रश्न 8 (8 अंक)
(क) हेठियनि मां छहनि जा ज़िद लिखो - 3 अंक
- सुपाटु
- खरो
- खूबसूरत
- आशा
- वेझो
- परमार्थ
- मेज़बान
- SAT
(ख) किनि बि चइनि इस्तलाहनि जी माना लिखी जुम्लनि में कमु आणियो - 4 अंक
- पाणु मोखण
- हरिका बकरी पंहिंजे फाहे टंगिबी
- डन्द खटा करण
- सदिके जी बकरी
- हथ धोई लगण
- अगे खां अगिरो
- अखियुनि खां ओझल थियणु
(ग) कंहि fa few विषय ते अटिकल 250 लफज़नि जो मज़मूनि लिखो - 0 अंक
- सिन्धियत sit Sig “det aug”
- स्कूल जो सालियानो जलसो
- FIRST आदमशुमारी
- पर्यावरण ऐं प्रदूषण
नोट: उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर पाठ्यपुस्तक के आधार पर दिए जाने चाहिए। प्रश्न (क) में दिए गए शब्दों के अर्थ लिखने हैं, प्रश्न (ख) में मुहावरों के अर्थ बताकर वाक्यों में प्रयोग करना है, और प्रश्न (ग) में दिए गए विषयों पर 250 शब्दों में निबंध लिखना है।
पृष्ठ 6 का शेष भाग स्पष्ट नहीं है।
प्रश्न 14
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 80 शब्दों में निबंध लिखिए:
- ईमानदारी का इनाम
- गधा और कबूतर
- फोरम में महात्मा
निबंध: ईमानदारी का इनाम
ईमानदारी एक ऐसा गुण है जो मनुष्य को सच्चा और विश्वसनीय बनाता है। एक ईमानदार व्यक्ति कभी झूठ नहीं बोलता और हमेशा सही रास्ते पर चलता है। ईमानदारी का इनाम हमेशा मिलता है, भले ही देर से मिले। एक ईमानदार व्यक्ति को समाज में सम्मान मिलता है और लोग उस पर भरोसा करते हैं। ईमानदारी से काम करने वाला व्यक्ति कभी असफल नहीं होता, क्योंकि सच्चाई की हमेशा जीत होती है। इसलिए हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए।
प्रश्न 15
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए:
- अपने मित्र/सहेली को भाई की शादी में आने के लिए निमंत्रण पत्र लिखिए।
- पाठशाला में हो रही चोरियों की जानकारी देते हुए थानेदार को प्रार्थना पत्र लिखिए।
पत्र: मित्र को शादी में आमंत्रण
प्रिय मित्र,
सप्रेम नमस्कार।
आपको सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि मेरे बड़े भाई साहब का विवाह दिनांक 15 मई 2011 को होने जा रहा है। यह समारोह हमारे घर पर आयोजित किया गया है। मैं आपको और आपके परिवार को इस शुभ अवसर पर सादर आमंत्रित करता हूँ। कृपया अपनी उपस्थिति से इस कार्यक्रम को सफल बनाएं।
आपका मित्र,
राम
प्रश्न 16
सलीस सिंधी में अनुवाद कीजिए:
प्रातःकाल का समय दिन का सबसे सरस व सुन्दर समय होता है। इस समय हवा बिल्कुल शुद्ध व ताजी होती है, जिसके सेवन से हमारे शरीर में ताज़गी और मन में स्फूर्ति आ जाती है। यह स्फूर्ति पूरे दिन मनुष्य को चुस्त और ताजा बनाये रखती है। इसलिये प्रातःकाल को सैर करना चाहिए।
सिंधी अनुवाद:
صبح جو وقت ڏينهن جو سڀ کان رس ۽ خوبصورت وقت هوندو آهي. هن وقت هوا بلڪل صاف ۽ تازي هوندي آهي، جنهن جي استعمال سان اسان جي جسم ۾ تازگي ۽ دل ۾ تازگي اچي ويندي آهي. هي تازگي سڄو ڏينهن انسان کي چست ۽ تازو رکندي آهي. تنهنڪري صبح جو سير ڪرڻ گهرجي.