RBSE Class 10th 2013 Hindi-S-01-2013 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2013 |
| Subject | Hindi-S-01-2013 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2013 Hindi-S-01-2013
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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2013 2013 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक परीक्षा, 2013
SECONDARY EXAMINATION, 2013
हिन्दी
समय : 3½ घण्टे पूर्णांक : 80
नामांक : ____________________ Roll No. : ____________________
No. of Questions : 3 No. of Printed Pages : 1
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा रही है । यहाँ सभी ऋतुएँ अपने समय पर आती हैं और पर्याप्त काल तक ठहरती हैं । ऋतुएँ अपने अनुकूल फल-फूलों का सृजन करती हैं । धूप और वर्षा के समान अधिकार के कारण यह भूमि शस्यश्यामला हो जाती है । यहाँ का नगाधिराज हिमालय कवियों को सदा से प्रेरणा देता आ रहा है और यहाँ की नदियाँ मोक्षदायिनी समझी जाती रही हैं । यहाँ कृत्रिम धूप और रोशनी की आवश्यकता नहीं पड़ती । भारतीय मनीषी जंगल में रहना पसन्द करते थे । प्रकृति-प्रेम के ही कारण यहाँ के लोग पत्तों में खाना पसन्द करते हैं । वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं । सूर्य और चन्द्र दर्शन नित्य और नैमित्तिक कार्यों में शुभ माना जाता है ।
पारिवारिकता पर हमारी संस्कृति में विशेष बल दिया गया है । भारतीय संस्कृति में शोक की अपेक्षा आनन्द को अधिक महत्व दिया गया है । इसलिए हमारे यहाँ शोकान्त नाटकों का निषेध है । अतिथि को भी देवता माना गया है -- "अतिथि देवो भव:" ।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: भारतीय संस्कृति में प्रकृति-प्रेम एवं आतिथ्य
(ख) भारतवर्ष की भूमि शस्यश्यामला कैसे है?
उत्तर: भारतवर्ष में धूप और वर्षा का समान अधिकार होने के कारण यहाँ की भूमि शस्यश्यामला (हरी-भरी फसलों से युक्त) हो जाती है।
(ग) भारतीय प्रकृति-प्रेम किस प्रकार प्रकट करते हैं?
उत्तर: भारतीय प्रकृति-प्रेम निम्नलिखित प्रकार से प्रकट करते हैं:
- वे पत्तों में खाना पसंद करते हैं।
- वृक्षों में पानी देना एक धार्मिक कार्य समझते हैं।
- सूर्य और चन्द्र दर्शन को नित्य और नैमित्तिक कार्यों में शुभ मानते हैं।
(घ) भारत में आतिथ्य एवं अतिथि का क्या स्थान है?
उत्तर: भारत में अतिथि को देवता माना गया है। "अतिथि देवो भव:" का अर्थ है कि अतिथि को देवता के समान सम्मान देना चाहिए। आतिथ्य को एक धार्मिक और सांस्कृतिक कर्तव्य समझा जाता है।
2. निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
सबसे विराट जनतंत्र जगत का आ पहुँचा,
तैंतीस कोटि-हित सिंहासन तैयार करो;
अभिषेक आज राजा का नहीं, प्रजा का है,
तैंतीस कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो।
आरती लिए तू किसे ढूँढ़ता है मूरख
मंदिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में?
देवता कहीं सड़कों पर मिट्टी तोड़ रहे;
देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में।
हल राजदण्ड बनने को हैं,
धूसरता सोने से श्रृंगार सजाती है;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "जनता का राज्य" या "जनतंत्र का आगमन" है।
(ख) “तैंतीस कोटि-हित” से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: “तैंतीस कोटि-हित” का तात्पर्य है तीस करोड़ (33 करोड़) जनता के हित में। यहाँ कवि ने भारत की जनसंख्या को संकेत करते हुए कहा है कि सिंहासन जनता के हित के लिए तैयार किया जाए, अर्थात् शासन जनता के कल्याण के लिए हो।
(ग) देवता के यहाँ पर मिलने की क्या संभावना व्यक्त की गई है?
उत्तर: कवि के अनुसार, देवता मंदिरों, राजप्रासादों या तहखानों में नहीं, बल्कि सड़कों पर मिट्टी तोड़ते हुए, खेतों में और खलिहानों में मिलेंगे। इसका अर्थ है कि सच्चे देवता वे मेहनतकश लोग हैं जो श्रम करते हैं, न कि ऊँचे स्थानों पर बैठने वाले।
(घ) कवि सिंहासन किसके लिए व क्यों खाली कराना चाहता है?
उत्तर: कवि सिंहासन जनता के लिए खाली कराना चाहता है, क्योंकि वह मानता है कि अब जनतंत्र का युग आ गया है। राजा का अभिषेक नहीं, बल्कि प्रजा का अभिषेक होना चाहिए। जनता ही सच्ची शासक है, इसलिए सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
शब्दों की दुनिया में मैंने
हिन्दी के बल अलख जगाये ।
जैसे दीप-शिखा के बिरवे
कोई ठण्डी रात बिताये ॥
जो कुछ हूँ हिन्दी से हूँ मैं
जो हो लूँ हिन्दी से हो लूँ ।
हिन्दी सहज क्रान्ति की भाषा
यह विप्लव की अकथ कहानी ।
मैकॉले पर भारतेन्दु की
अमर विजय की अमिट निशानी ॥
शेष गुलामी के दागों को
जब धोलूँ हिन्दी में धोलूँ ॥
प्रश्न एवं उत्तर
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "हिन्दी की महिमा" या "हिन्दी के प्रति समर्पण" है।
(ख) कवि ने हिन्दी के बल पर अलख किस प्रकार जगाई है?
उत्तर: कवि ने हिन्दी के बल पर अलख जगाने का अर्थ है कि उन्होंने हिन्दी भाषा के माध्यम से जन-जागरण किया। जैसे कोई ठण्डी रात में दीपक की लौ को बचाकर रखता है, वैसे ही कवि ने हिन्दी के प्रकाश को संजोकर समाज में चेतना फैलाई।
(ग) हिन्दी को क्रान्ति की भाषा क्यों कहा गया है?
उत्तर: हिन्दी को क्रान्ति की भाषा इसलिए कहा गया है क्योंकि यह सहज और सरल है, फिर भी इसमें विप्लव (क्रांति) की अकथ कहानी छिपी है। यह भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की मैकॉले (अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली) पर विजय की निशानी है, जो देश की आजादी और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक है।
(घ) कवि किस बचे हुए कार्य को करना चाहता है?
उत्तर: कवि बचे हुए गुलामी के दागों को धोना चाहता है। वह हिन्दी के माध्यम से समाज में अब भी बची हुई गुलामी की मानसिकता और अंग्रेजी के प्रभाव को समाप्त करना चाहता है।
खण्ड - ख
3. दिए गए बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए :
(क) राष्ट्रीय एकता की सुरक्षा : हमारा कर्तव्य
- राष्ट्रीय एकता का अभिप्राय
- राष्ट्रीय एकता-अखण्डता की आवश्यकता
- राष्ट्रीय एकता-अखण्डता की सांस्कृतिक विरासत
- राष्ट्रीय एकता का वर्तमान स्वरूप
- राष्ट्रीय एकता की सुरक्षा और हमारा कर्तव्य
- उपसंहार
(ख) युवा वर्ग में असन्तोष : कारण और निराकरण
- युवा वर्ग से आशय
- युवावस्था – मानव जीवन का श्रेष्ठ समय
- युवा शक्ति का महत्व
- युवा वर्ग में बढ़ते असन्तोष के कारण
- युवा असंतोष को दूर करने के उपाय
- उपसंहार
(ग) आदर्श विद्यार्थी जीवन
- विद्यार्थी जीवन का आशय
- विद्यार्थी जीवन का आदर्श
- विद्यार्थी जीवन के विशेष गुण
- विद्यार्थी जीवन के उद्देश्य
- विद्यार्थियों से समाज व राष्ट्र को अपेक्षाएँ
- उपसंहार
(घ) बढ़ती महँगाई – एक ज्वलन्त समस्या
- महँगाई से आशय
- स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद की स्थिति
- मूल्य वृद्धि में तेजी
- महँगाई के विविध कारण
- महँगाई पर नियंत्रण के उपाय
- उपसंहार
4. पत्र लेखन
अथवा (दोनों में से कोई एक)
पत्र 1: स्वयं को जूनागढ़ का निवासी जितेन्द्र मानते हुए अहमदाबाद में रह रहे अपने पिताजी को पत्र – जिसमें हाथ-धुलाई कार्यक्रम एवं पेट में कीड़ों की बीमारियों से बचने हेतु गोली खिलाने के कार्यक्रम द्वारा बालकों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के प्रयासों का उल्लेख हो।
पत्र 2: स्वयं को रजनीश निवासी रतलाम मानकर अपने क्षेत्र के विद्युत अभियन्ता को बोर्ड परीक्षा तैयारी के कारण विद्युत पूर्ति नियमित एवं पर्याप्त रूप से कराने हेतु अनुरोध पत्र।
5. (क) 'विष्णुकान्ता भजन सुना रही है।' – वाक्य में कौन-सी क्रिया है? उसकी परिभाषा लिखिए।
उत्तर: इस वाक्य में प्रेरणार्थक क्रिया है।
परिभाषा: जिस क्रिया से यह पता चले कि कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे से कार्य करवा रहा है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। जैसे – 'सुना रही है' में 'सुनाना' क्रिया है, जो 'सुनना' से प्रेरणा का बोध कराती है।
(ख) मोहन कहता है कि मैं श्याम की पुस्तकें पढ़ूँगा।
रेखांकित पदों के पद-परिचय के दो-दो बिन्दु लिखिए।
पद 1: 'मोहन'
- यह एक संज्ञा पद है।
- यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है तथा वाक्य में कर्ता के रूप में प्रयुक्त हुआ है।
पद 2: 'श्याम की'
- यह एक सर्वनाम पद है।
- यह संबंध कारक का रूप है तथा 'पुस्तकें' की विशेषता बताता है।
(ग) संयुक्त वाक्य की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: संयुक्त वाक्य वह वाक्य होता है जिसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय (जैसे – और, या, लेकिन, इसलिए आदि) से जुड़े हों। प्रत्येक उपवाक्य का अपना अर्थ होता है और वे मिलकर एक पूर्ण विचार व्यक्त करते हैं। जैसे – 'राम ने खाना खाया और सो गया।'
(घ) 'मन में चकरी होना' मुहावरे का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
अर्थ: बहुत अधिक घबराना या चिंतित होना।
वाक्य प्रयोग: परीक्षा का परिणाम देखते ही उसके मन में चकरी होने लगी।
(ङ) 'सूर समर करनी करहि कहि न जनावहि आपु' लोकोक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
अर्थ: वीर पुरुष युद्ध में अपने कार्यों को करते हैं और अपनी वीरता का बखान स्वयं नहीं करते। अर्थात् सच्चे वीर अपने काम से पहचाने जाते हैं, शेखी बघारने से नहीं।
(च) 'गुर चाँटी ज्यौं पागी' में कौन-सा अलंकार है? प्रयुक्त अलंकार की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: इस पंक्ति में उपमा अलंकार है।
परिभाषा: जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी दूसरी वस्तु या व्यक्ति से 'ज्यों', 'सम', 'सा', 'सी' आदि शब्दों के माध्यम से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। यहाँ 'गुर चाँटी' (गुड़ की चाँटी) की तुलना 'पागी' (पगी हुई वस्तु) से की गई है।
6. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पद्यांश 1:
बादल, गरजो !
घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ !
ललित ललित, काले घुँघराले,
बाल कल्पना के-से पाले,
विद्युत-छबि उर में कवि, नवजीवन वाले ।
छिपा नूतन कविता
फिर भर दो --
बादल गरजो !
(क) कवि का बादलों के प्रति क्या दृष्टिकोण है ?
कवि बादलों को नवजीवन और नूतन कविता का स्रोत मानता है। वह बादलों से गरजने और आकाश को घेरने का आह्वान करता है, क्योंकि बादलों में विद्युत-छवि (बिजली की सुंदरता) और नवजीवन देने की शक्ति है। कवि का दृष्टिकोण सकारात्मक और प्रेरणादायक है – वह बादलों को सृजन और परिवर्तन का प्रतीक मानता है।
(ख) बादल किसका प्रतीक है और क्यों ?
बादल कवि की कल्पना और नवसृजन का प्रतीक है। कवि कहता है कि बादलों के भीतर 'नूतन कविता' छिपी है, जिसे वह फिर से भर देना चाहता है। बादलों का गरजना और घिरना कवि के मन में नए विचारों और रचनात्मक ऊर्जा के उदय को दर्शाता है। इसलिए बादल कवि की रचनात्मकता और नवजीवन का प्रतीक है।
पद्यांश 2 (अथवा):
कितना प्रामाणिक था उसका दुख
लड़की को दान में देते वक्त
जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो
लड़की अभी सयानी नहीं थी
अभी इतनी भोली सरल थी
कि उसे सुख का आभास तो होता था
लेकिन दुख बाँचना नहीं आता था
पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की
कुछ ताल और कुछ लय बद्ध पंक्तियों की ।
(क) माँ को अपनी बेटी अंतिम पूँजी क्यों लग रही थी ? (उत्तर सीमा 40 शब्द)
माँ को अपनी बेटी अंतिम पूँजी इसलिए लग रही थी क्योंकि वह उसे दान (विवाह) में देते समय अपना सब कुछ समझती थी। बेटी ही उसके जीवन की एकमात्र संपत्ति थी, जिसे वह बड़े दुख और प्रामाणिकता के साथ विदा कर रही थी।
(ख) कवि ने लड़की को 'धुँधले प्रकाश की पाठिका' क्यों कहा है ? (उत्तर सीमा 40 शब्द)
कवि ने लड़की को 'धुँधले प्रकाश की पाठिका' इसलिए कहा है क्योंकि वह अभी छोटी और भोली थी। उसे जीवन के सुख-दुख का पूरा ज्ञान नहीं था। वह केवल धुँधले प्रकाश (अस्पष्ट अनुभवों) और लयबद्ध पंक्तियों (जीवन की सीमित समझ) को ही पढ़ पाती थी, यानी वह जीवन की वास्तविकताओं को पूरी तरह नहीं समझती थी।
7. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) “मन की मन ही माँझ रही” – गोपियों की मन की इच्छा उनके मन में ही क्यों रह गई?
गोपियाँ श्रीकृष्ण से अत्यधिक प्रेम करती थीं, लेकिन वे अपनी इच्छाएँ व्यक्त नहीं कर पाती थीं क्योंकि समाज की मर्यादाएँ और लोक-लाज उन्हें रोकती थीं। इसलिए उनकी मन की बात मन में ही रह गई।
(ख) लक्ष्मण को परशुराम को मारने पर पाप और अपयश की संभावना क्यों थी?
परशुराम ब्राह्मण थे और लक्ष्मण क्षत्रिय। ब्राह्मण को मारना महापाप माना जाता था। साथ ही, परशुराम बड़े-बुजुर्ग और तपस्वी थे, इसलिए उन्हें मारने से लक्ष्मण को अपयश मिलता।
(ग) श्रीकृष्ण को जग मन्दिर का दीपक क्यों कहा गया है?
श्रीकृष्ण को जग मन्दिर का दीपक इसलिए कहा गया है क्योंकि वे संसार रूपी मंदिर को ज्ञान और प्रेम के प्रकाश से आलोकित करते हैं। वे अज्ञान के अंधकार को दूर कर भक्तों को सही मार्ग दिखाते हैं।
(a) स्मृति को पाथेय बनाने से कवि का क्या आशय है?
स्मृति को पाथेय बनाने का अर्थ है कि मनुष्य को अपनी यादों को जीवन की यात्रा में सहारा बनाना चाहिए। ये स्मृतियाँ कठिन समय में मार्गदर्शन और शक्ति प्रदान करती हैं।
8. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ ?
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ ?
सुनकर क्या तुम भला करोगे, मेरी भोली आत्म-कथा
अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा ।
(क) पद्यांश में प्रयुक्त भाषा कौन-सी है?
पद्यांश में प्रयुक्त भाषा खड़ी बोली (हिंदी) है।
(ख) पद्यांश में प्रयुक्त शैली का नाम लिखिए।
पद्यांश में प्रयुक्त शैली प्रश्नोत्तर शैली (संवादात्मक शैली) है।
(ग) “बड़ी कथाएँ” शब्द का प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?
“बड़ी कथाएँ” शब्द का प्रयोग जीवन के गहरे अनुभवों और महत्वपूर्ण घटनाओं के अर्थ में हुआ है।
(a) “थकी सोई है मेरी मौन व्यथा” में कौन-सा अलंकार है?
इसमें मानवीकरण अलंकार है, क्योंकि व्यथा (भावना) को मानवीय क्रिया (थकी सोई) दी गई है।
(ड) “छोटे से जीवन” का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
“छोटे से जीवन” का अर्थ है मनुष्य का अल्पकालिक और सीमित जीवन, जो क्षणभंगुर है।
अथवा
धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य
चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य
इस अतिथि से प्रिय तुम्हारा क्या रहा सम्पर्क
उँगलियाँ माँ की कराती रही हैं मधुपर्क
देखते तुम इधर कनखी मार
और होतीं जब कि आँखें चार
तब तुम्हारी दंतुरित मुसकान
मुझे लगती बड़ी ही छविमान
(क) पद्यांश में प्रयुक्त भाषा कौन-सी है?
पद्यांश में प्रयुक्त भाषा खड़ी बोली (हिंदी) है।
(ख) बच्चे की दंतुरित मुसकान कवि को कब अच्छी लगती है?
बच्चे की दंतुरित मुसकान कवि को तब अच्छी लगती है जब बच्चा कनखी मारकर देखता है और उनकी आँखें चार होती हैं।
(ग) “मधुपर्क” शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया गया है?
“मधुपर्क” शब्द का प्रयोग माँ की उँगलियों द्वारा दिए गए मीठे स्पर्श या प्रेमपूर्ण आहार के अर्थ में किया गया है।
(घ) “धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य / चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य” – इसमें कौन-सा अलंकार है?
इसमें अनुप्रास अलंकार है, क्योंकि ‘धन्य’ और ‘मैं’ शब्दों की पुनरावृत्ति हुई है।
(ड) “छविमान” शब्द का तत्सम रूप लिखिए।
“छविमान” शब्द का तत्सम रूप “छविमान्” है।
9. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
प्रथम गद्यांश:
प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस, भाषण हर शहर का चरित्र था और दमखम और जोश-खरोश के साथ इन सबसे जुड़ना हर युवा का सपना था। मैं भी युवा थी और शीला अग्रवाल की जोशीली बातों ने रगों में बहते खून को लावे में बदल दिया था। स्थिति यह हुई कि एक बवंडर शहर में मचा हुआ था और एक घर में।
पिताजी की आजादी की सीमा यहीं तक थी कि उनकी उपस्थिति में घर में आए लोगों के बीच उठूँ-बैठूँ, जानूँ-समझूँ। हाथ उठा-उठाकर नारे लगाती, हड़तालें करवाती, लड़कों के साथ शहर की सड़कें नापती लड़की को उनके लिए मुश्किल हो रहा था तो किसी की दी हुई आजादी के दायरे में चलना मेरे लिए।
(क) “एक बवंडर शहर में मचा हुआ था और एक घर में” कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस कथन का आशय है कि शहर में स्वतंत्रता आंदोलन और देशभक्ति की लहर के कारण हर ओर उत्साह और जोश का बवंडर मचा हुआ था। वहीं, दूसरी ओर लेखिका के घर में भी एक अलग तरह का बवंडर मचा हुआ था, क्योंकि वह स्वयं आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग ले रही थी, जबकि उसके पिता उसे सीमित स्वतंत्रता देते थे। इस प्रकार, बाहर का बवंडर देशभक्ति का था और घर का बवंडर पिता और पुत्री के बीच स्वतंत्रता को लेकर चल रहे संघर्ष का था।
(ख) लेखिका के लिए क्या मुश्किल हो रहा था? और क्यों?
उत्तर: लेखिका के लिए अपने पिता द्वारा दी गई सीमित आजादी के दायरे में चलना मुश्किल हो रहा था। इसका कारण यह था कि वह एक जोशीली युवती थी, जो शीला अग्रवाल की प्रेरणा से देशभक्ति के आंदोलनों में पूरी तरह से कूद पड़ी थी। वह हड़तालें करवाती, नारे लगाती और लड़कों के साथ सड़कों पर घूमती थी, जबकि उसके पिता चाहते थे कि वह घर की मर्यादा में रहकर सीमित स्वतंत्रता का उपयोग करे। इस प्रकार, उसकी स्वाभाविक इच्छा और पिता की अपेक्षाओं में टकराव के कारण यह स्थिति उसके लिए कठिन हो गई थी।
द्वितीय गद्यांश (अथवा):
अभी आसमान के तारों के दीपक बुझे नहीं थे। हाँ पूरब में लोही लग गई थी जिसकी लालिमा को शुक्रतारा और बढ़ा रहा था। खेत, बगीचा, घर -- सब पर कुहासा छा रहा था। सारा वातावरण अजीब रहस्य से आवृत मालूम पड़ता था।
उस रहस्यमय वातावरण में एक कुश की चटाई पर पूरब मुँह, काली कमली ओढ़े, बालगोबिन भगत अपनी खँजड़ी लिए बैठे थे। उनके मुँह से शब्दों का ताँता लगा था, उनकी अँगुलियाँ खँजड़ी पर लगातार चल रही थीं। गाते-गाते इतने मस्त हो जाते, इतने सुरुर में आते, उत्तेजित हो उठते कि मालूम होता, अब खड़े हो जाएँगे। कमली तो बार-बार सिर से नीचे सरक जाती। मैं जाड़े से कँपकँपा रहा था, किंतु तारे की छाँव में भी उनके मस्तक के श्रम बिंदु, जब तब चमक ही पड़ते।
(क) वातावरण को रहस्यमय क्यों कहा गया है?
उत्तर: वातावरण को रहस्यमय इसलिए कहा गया है क्योंकि उस समय न तो रात पूरी तरह समाप्त हुई थी और न ही दिन पूरी तरह से शुरू हुआ था। आसमान में तारे अभी भी चमक रहे थे, पूरब में हल्की लालिमा फैल रही थी, और चारों ओर कुहासा छाया हुआ था। इस अर्ध-अंधकार और कोहरे के मिश्रण ने पूरे वातावरण को एक अजीब, रहस्यमयी और अलौकिक बना दिया था, जो सामान्य दिनचर्या से हटकर था।
(ख) बालगोबिन के गाते-गाते क्या दशा हो जाती थी?
उत्तर: बालगोबिन भगत जब गाते थे तो वे इतने मस्त और सुरूर में आ जाते थे कि वे अत्यधिक उत्तेजित हो उठते थे। ऐसा लगता था मानो वे अब खड़े हो जाएँगे। उनके सिर से कमली बार-बार नीचे सरक जाती थी, लेकिन उन्हें इसका ध्यान नहीं रहता था। वे भक्ति और संगीत में इतने डूब जाते थे कि ठंड के मौसम में भी उनके मस्तक पर पसीने के बिंदु चमकने लगते थे, जो उनकी गहरी तन्मयता और आध्यात्मिक उत्साह को दर्शाता है।
खण्ड-ग
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
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(क) वास्तविक अर्थों में संस्कृत व्यक्ति किसे कहा जा सकता है? (2 अंक)
वास्तविक अर्थों में संस्कृत व्यक्ति वह है जिसने केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि सदाचार, विनम्रता, सहनशीलता और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में उतार लिया हो। ऐसा व्यक्ति सभी प्राणियों में समभाव रखता है और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करता है।
-
(ख) उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की काशी को क्या देन है? (2 अंक)
उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ ने काशी को शहनाई की अमूल्य देन दी। उन्होंने शहनाई को मंदिरों और शुभ अवसरों तक सीमित न रहने देकर, इसे विश्व संगीत के मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनकी शहनाई ने काशी की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध किया।
-
(ग) "प्राचीन काल में भारत में नारी शिक्षा का प्रचलन था" इस सम्बन्ध में लेखक द्वारा दिए गए दो प्रमाणों को लिखिए। (2 अंक)
लेखक द्वारा दिए गए दो प्रमाण हैं:
- प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि राजकुमारियाँ और उच्च वर्ग की स्त्रियाँ वेद, शास्त्र और कला की शिक्षा प्राप्त करती थीं।
- गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषी नारियों का उदाहरण है जो शास्त्रार्थ में भाग लेती थीं और उच्च कोटि की विद्वान थीं।
-
(घ) "फादर के मुख से निकले शब्द जादू का काम करते थे" कैसे? (2 अंक)
फादर के मुख से निकले शब्द जादू का काम करते थे क्योंकि उनकी वाणी में अद्भुत प्रभाव और स्नेह था। वे जब कुछ कहते थे, तो सुनने वालों के मन में आत्मविश्वास और शांति का संचार होता था। उनके शब्दों में ऐसी शक्ति थी कि वे लोगों के दुखों को दूर कर उन्हें सही मार्ग दिखाते थे।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
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(क) मूर्ति बनाने का काम मिलने पर कलाकार के क्या भाव रहे होंगे? (उत्तर सीमा 40 शब्द) (2 अंक)
मूर्ति बनाने का काम मिलने पर कलाकार के मन में अत्यधिक प्रसन्नता, उत्साह और गर्व के भाव रहे होंगे। उसे अपनी कला को प्रदर्शित करने का अवसर मिला, जिससे वह अपनी रचनात्मकता को मूर्त रूप दे सका। साथ ही, उसके मन में इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने की ललक और जिम्मेदारी का भाव भी रहा होगा।
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(ख) कबीर पंथ मानव को किस प्रकार जीने की प्रेरणा देता है? 'बालगोबिन भगत' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 60 शब्द) (3 अंक)
'बालगोबिन भगत' पाठ के अनुसार, कबीर पंथ मानव को सादगी, ईमानदारी और प्रेमपूर्वक जीने की प्रेरणा देता है। इस पंथ के अनुयायी ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं मानते, सत्य बोलते हैं, और ईश्वर की भक्ति में लीन रहते हैं। वे संसारिक मोह-माया से दूर रहकर सरल जीवन व्यतीत करते हैं और सभी प्राणियों से प्रेम करते हैं। बालगोबिन भगत स्वयं इस जीवन शैली के जीवंत उदाहरण थे।
खण्ड-घ
"बच्चे बचपन में निर्दोष, चंचल और मस्त होते हैं, उन्हें परिणाम की चिन्ता नहीं होती है।" 'माता का अँचल' पाठ के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द) (4 अंक)
'माता का अँचल' पाठ में बच्चों के इसी स्वभाव का सजीव चित्रण है। बच्चे निर्दोष होते हैं, उनमें किसी प्रकार का द्वेष या छल नहीं होता। वे चंचल होते हैं, हर पल किसी न किसी नई चीज़ में व्यस्त रहते हैं। वे मस्त रहते हैं, अपनी कल्पनाओं और खेलों में इतने डूबे होते हैं कि उन्हें अपने कार्यों के परिणामों की चिंता नहीं होती। पाठ में लेखक ने दिखाया है कि बच्चे माँ की गोद में सुरक्षित महसूस करते हैं और उनकी हर शरारत माँ के स्नेह में ढल जाती है। वे बिना किसी भय के अपनी इच्छाओं को पूरा करते हैं, क्योंकि उन्हें माँ का आँचल हमेशा अपने ऊपर मिलता है।
अथवा
"मेरे लिए यह यात्रा सचमुच ही खोज यात्रा थी!" लेखिका के इस कथन को 'साना साना हाथ जोड़ि' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द) (4 अंक)
'साना साना हाथ जोड़ि' पाठ में लेखिका ने सिक्किम की अपनी यात्रा को खोज यात्रा कहा है। यह यात्रा केवल भौगोलिक नहीं थी, बल्कि आत्मिक और सांस्कृतिक खोज की यात्रा थी। लेखिका ने इस यात्रा में प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य को देखा, वहाँ के लोगों की सादगी और उनकी संस्कृति को समझा। उन्होंने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों और वहाँ के रीति-रिवाजों को जाना। यह यात्रा उनके लिए एक नई दुनिया की खोज थी, जहाँ उन्होंने जीवन के नए अर्थ और मूल्यों को पहचाना। इसलिए उन्होंने इसे सचमुच खोज यात्रा कहा।
3. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) गोरे सैनिकों ने टुच्चू को अस्पताल जाने की बात क्यों कहीं?
गोरे सैनिकों ने टुच्चू को अस्पताल जाने की बात इसलिए कही क्योंकि वे उसे बहला-फुसलाकर पकड़ना चाहते थे। वे जानते थे कि टुच्चू घायल है और अस्पताल के बहाने उसे आसानी से गिरफ्तार किया जा सकता है।
(ख) “कितनी अद्भुत व्यवस्था है जल संचय की” – मणि ने प्रकृति की जल व्यवस्था के सम्बन्ध में यह क्यों कहा है?
मणि ने यह कथन इसलिए कहा क्योंकि प्रकृति ने जल संचय की अद्भुत व्यवस्था की है। बादलों से बारिश होती है, नदियाँ बहती हैं, और पानी जमीन में रिसकर भूमिगत जल का भंडार बनाता है। यह प्राकृतिक चक्र बिना किसी मानवीय प्रयास के जल को संरक्षित करता है।
(ग) “हथियार बन्द पहरेदार अपनी जगह तैनात रहे और लाट की नाक चली गई” – लेखक का यह कथन सरकारी तंत्र की किस कमजोरी पर व्यंग्य करता है?
यह कथन सरकारी तंत्र की उस कमजोरी पर व्यंग्य करता है जहाँ पहरेदार अपने कर्तव्य का पालन करते हुए भी बड़ी चीज़ों की रक्षा नहीं कर पाते। यह दर्शाता है कि सरकारी व्यवस्था में दिखावा तो होता है, लेकिन वास्तविक सुरक्षा और जिम्मेदारी में कमी रहती है।
(घ) “माता का अँचल” पाठ से बाल स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है?
“माता का अँचल” पाठ से बाल स्वभाव की मासूमियत, चंचलता और माँ पर अटूट विश्वास का पता चलता है। बच्चा हर परेशानी में माँ की गोद में शरण लेता है और उसे सबसे सुरक्षित स्थान मानता है। यह बाल मन की सरलता और निर्भरता को दर्शाता है।