RBSE Class 10th 2015 Hindi-S-01-2015 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2015 |
| Subject | Hindi-S-01-2015 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2015 Hindi-S-01-2015
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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2015 2015 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक परीक्षा, 2015
SECONDARY EXAMINATION, 2015
हिन्दी
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
नामांक : ____________________ Roll No. : ____________________
No. of Questions : 3 No. of Printed Pages : 7
प्रश्न पत्र कोड : S—O—Hindi प्रश्न पत्र संख्या : 5---07-साग्वां | S- 400 | - 400l
खण्ड-क
1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए
जिन्दगी के असली मजे उनके लिए नहीं है, जो फूलों की छाँह के नीचे खेलते और सोते हैं, बल्कि फूलों की छाँह के नीचे अगर जीवन का कोई स्वाद छिपा है, तो वह भी उनके लिए है, जो दूर रेगिस्तान से आ रहे हैं, जिनका कण्ठ सूखा हुआ, ओंठ फटे हुए और सारा बदन पसीने से तर है। पानी में जो अमृत वाला तत्त्व है, उसे वह जानता है जो धूप में सूख चुका है, वह नहीं जो रेगिस्तान में कभी पड़ा ही नहीं है।
सुख देने वाली चीजें पहले भी थीं और अब भी हैं, फर्क यह है कि जो सुखों का मूल्य पहले चुकाते हैं, और उनके मज़े बाद को लेते हैं, उन्हें स्वाद अधिक मिलता है। जिन्हें आराम आसानी से मिल जाता है, उनके लिए आराम ही मौत है।
बड़ी चीजें बड़े संकटों में विकास पाती हैं। अकबर ने 3 साल की उम्र में अपने बाप के दुश्मन को परास्त कर दिया था, जिसका एक मात्र कारण यह था कि अकबर का जन्म रेगिस्तान में हुआ था और वह भी उस समय जब उसके बाप के पास एक घोड़े को छोड़कर और कोई दौलत नहीं थी।
महाभारत में देश के अधिकांश वीर कौरवों के पक्ष में थे। मगर फिर भी जीत पाण्डवों की हुई, क्योंकि उन्होंने लाक्षागृह की मुसीबत झेली थी, क्योंकि उन्होंने वनवास की जोखिम को पार किया था।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
उत्तर: इस गद्यांश का उचित शीर्षक "संकटों में विकास" या "जीवन का सच्चा स्वाद" हो सकता है।
(ख) जिन्दगी के असली मज़े किन लोगों के लिए हैं?
उत्तर: जिन्दगी के असली मज़े उन लोगों के लिए हैं जो कठिनाइयों और संघर्षों से गुज़रे हैं, जैसे दूर रेगिस्तान से आने वाले जिनका कण्ठ सूखा हुआ, ओंठ फटे हुए और सारा बदन पसीने से तर है। वे ही पानी के अमृत तत्त्व को समझ सकते हैं।
(ग) “जिन्हें आराम आसानी से मिल जाता है, उनके लिए आराम ही मौत है।” इस पंक्ति का आशय लिखिए।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि जो लोग बिना किसी मेहनत या संघर्ष के आराम प्राप्त कर लेते हैं, उनके लिए वह आराम उनकी प्रगति और जीवन शक्ति को नष्ट कर देता है। आराम उनके लिए मृत्यु के समान है क्योंकि वे जीवन के सच्चे स्वाद और विकास से वंचित रह जाते हैं।
(घ) “बड़ी चीजें बड़े संकटों में विकास पाती हैं।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस कथन का अर्थ है कि महान व्यक्तित्व और उपलब्धियाँ बड़ी कठिनाइयों और संकटों के बीच ही जन्म लेती हैं। लेखक ने इसके लिए दो उदाहरण दिए हैं:
- अकबर ने मात्र 3 वर्ष की आयु में अपने पिता के शत्रु को पराजित किया, क्योंकि उसका जन्म रेगिस्तान में हुआ था और उसके पिता के पास केवल एक घोड़ा था।
- महाभारत में अधिकांश वीर कौरवों के पक्ष में थे, फिर भी पाण्डवों की जीत हुई क्योंकि उन्होंने लाक्षागृह और वनवास जैसे बड़े संकटों को झेला था।
2. निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना।
उसके सम्मुख स्वच्छ शिला पर, धीर, वीर, निर्भीक मना॥
जाग रहा वह कौन धनुर्धर, जबकि भुवन भर सोता है?
भोगी कुसुमायुध योगी-सा बना दृष्टिगत होता है॥
वन में है वीर यह, निद्रा का यों त्याग किए।
राजभोग के योग्य विपिन में, बैठा आज विराग लिए॥
बना हुआ है प्रहरी जिसका, उस कुटीर में क्या धन है।
जिसको रक्षा में रत इसका तन है, मन है, जीवन है॥
मर्त्यलोक मालिन्य मेटने, संग जो आई है।
तीन लोक की लक्ष्मी ने यह, कुटी आज अपनाई है॥
वीर वंश की लाज यही है, फिर क्यों वीर न हो वह।
विजन देश है निशा शेष है, निशाचरी माया ठहरी॥
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "लक्ष्मण का प्रहरी-धर्म" या "पंचवटी में लक्ष्मण" है।
(ख) लक्ष्मण को किसकी उपमा दी गई है? वह प्रहरी बन कर किस प्रकार रक्षा कर रहा है?
उत्तर: लक्ष्मण को भोगी कुसुमायुध (कामदेव) की उपमा दी गई है, पर वह योगी के समान दिखते हैं। वह प्रहरी बन कर पूरी रात जागते हुए, निद्रा का त्याग कर, अपने तन, मन और जीवन से उस कुटीर की रक्षा कर रहे हैं जिसमें सीता और राम विश्राम कर रहे हैं।
(ग) “तीन लोक की लक्ष्मी” किसे कहा है? वह वन में क्यों आई है?
उत्तर: "तीन लोक की लक्ष्मी" सीता जी को कहा गया है। वह वन में मर्त्यलोक (पृथ्वी) के मालिन्य (पाप और दुःख) को मिटाने के लिए आई हैं।
(घ) वनवास में क्या-क्या संकट हो सकते हैं?
उत्तर: वनवास में अनेक संकट हो सकते हैं, जैसे:
- जंगली जानवरों का भय
- राक्षसों और दुष्ट प्राणियों का आक्रमण
- भोजन और पानी की कमी
- कठोर जलवायु और मौसम
- अकेलापन और सुरक्षा का अभाव
- रात में निशाचरों (राक्षसों) का भय
अथवा
5---07-मापवां [5-400 | -4007
खण्ड - ख
प्रश्न 3. दिए गए बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए :
(क) इंटरनेट – वरदान या अभिशाप
- प्रस्तावना
- इंटरनेट से आशय
- इंटरनेट से लाभ
- सदुपयोग की समझ
- उपसंहार
(ख) यदि मैं प्रधानमंत्री होता
- प्रस्तावना
- देश के प्रति कर्त्तव्य
- जनता के प्रति कर्त्तव्य
- बुजुर्गों के प्रति कर्त्तव्य
- उपसंहार
(ग) ऋतुराज वसंत
- प्रस्तावना
- भारत में ऋतुएँ
- ऋतुराज कहलाने का कारण
- प्राकृतिक वातावरण
- उपसंहार
काव्यांश प्रश्न
काव्यांश:
उस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश
पल पल परिवर्तित प्रकृति-वेश !
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र-दृग-सुमन फार
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार
जिसके चरणों में पड़ा ताल
दर्पण-सा फैला है विशाल !
गिरि का गौरव गाकर झर-झर
मद में नस नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों से सुन्दर
झरते हैं झाग भरे निर्झर |
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए ।
उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "पर्वत प्रदेश" या "पर्वत का सौंदर्य" है।
(ख) पर्वत का आकार कैसा है ? वह अपने सहस्र नेत्रों से क्या देख रहा ?
उत्तर: पर्वत का आकार मेखलाकार (कमरबंद के समान गोलाकार) है। वह अपने सहस्र नेत्रों (अनेक फूलों) से नीचे जल में अपने विशाल आकार को बार-बार देख रहा है।
(ग) पर्वत के चरणों में क्या पड़ा है ? किसके समान लग रहा है ?
उत्तर: पर्वत के चरणों में एक ताल (झील) पड़ा है। वह दर्पण के समान विशाल और चमकीला लग रहा है।
(घ) रेखांकित पंक्तियों का भावार्थ लिखिए ।
उत्तर: रेखांकित पंक्तियाँ हैं: "मोती की लड़ियों से सुन्दर / झरते हैं झाग भरे निर्झर"।
भावार्थ: कवि कहता है कि पर्वत से झरने मोती की लड़ियों के समान सुंदर लगते हैं। ये झरने झाग से भरे हुए हैं और निरंतर बहते रहते हैं, जो पर्वत की शोभा को और बढ़ा देते हैं।
प्रश्न 4 (दीर्घ उत्तरीय)
पत्र-लेखन (विकल्प 1): स्वयं को बापू नगर निवासी हिमांशु मानकर शैक्षिक भ्रमण का वर्णन करते हुए अपने मित्र प्रियांशु को पत्र।
पत्र का प्रारूप:
बापू नगर,
दिनांक: 15 फरवरी, 2015
प्रिय मित्र प्रियांशु,
सप्रेम नमस्ते।
आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ। आज मैं तुम्हें अपने शैक्षिक भ्रमण के बारे में बताना चाहता हूँ, जो हमारी कक्षा द्वारा आयोजित किया गया था।
हमारा भ्रमण जयपुर के ऐतिहासिक स्थलों के लिए था। हमने सबसे पहले आमेर का किला देखा, जो अपनी भव्यता और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। वहाँ के दीवान-ए-आम और शीश महल ने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद हम जंतर-मंतर गए, जहाँ प्राचीन खगोलीय यंत्रों को देखकर हम सभी हैरान रह गए। हमारे शिक्षक ने वहाँ के इतिहास और विज्ञान के बारे में विस्तार से समझाया।
इस भ्रमण ने मेरे ज्ञान में बहुत वृद्धि की। मुझे अपने राज्य के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को निकट से देखने का अवसर मिला। तुम भी कभी ऐसे भ्रमण का आनंद लो।
तुम्हारा मित्र,
हिमांशु
पत्र-लेखन (विकल्प 2): स्वयं को शास्त्री नगर निवासी सुधांशु मानकर अपने छोटे भाई को धूम्रपान एवं नशे की लत से दूर रहने की समझाइश देते हुए पत्र।
पत्र का प्रारूप:
शास्त्री नगर,
दिनांक: 15 फरवरी, 2015
प्रिय अनुज,
स्नेहाशीष।
आशा है तुम पढ़ाई में मन लगाकर पढ़ रहे होगे। मैं यहाँ कुशल हूँ। आज मैं तुम्हें एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताना चाहता हूँ। मुझे पता चला है कि तुम धूम्रपान और नशे की लत की ओर आकर्षित हो रहे हो। यह बात मुझे बहुत चिंतित करती है।
धूम्रपान और नशा स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। यह न केवल तुम्हारे फेफड़ों और दिमाग को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि तुम्हारे भविष्य को भी अंधकारमय बना सकता है। कई युवा इस लत के कारण अपना जीवन बर्बाद कर बैठते हैं। तुम्हें अपने स्वास्थ्य और पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
मैं तुमसे विनम्र निवेदन करता हूँ कि तुम इन बुरी आदतों से दूर रहो। अपना समय खेलकूद, पढ़ाई और अच्छी संगति में बिताओ। यदि तुम्हें कोई समस्या हो तो मुझसे या माता-पिता से जरूर बात करो।
तुम्हारा अग्रज,
सुधांशु
प्रश्न 5 (लघु उत्तरीय)
(क) काल के अनुसार क्रिया कितने प्रकार की होती है? सोदाहरण समझाइए।
काल के अनुसार क्रिया के तीन प्रकार होते हैं:
- वर्तमान काल: जो क्रिया वर्तमान समय में हो रही हो। उदाहरण: राम खेलता है।
- भूतकाल: जो क्रिया बीते हुए समय में हुई हो। उदाहरण: राम खेला।
- भविष्यत काल: जो क्रिया आने वाले समय में होगी। उदाहरण: राम खेलेगा।
(ख) “भारत के वीर पुत्र प्रताप ने शत्रु के सब सैनिकों का वध कर दिया।” रेखांकित पदों के पद-परिचय के दो-दो बिन्दु लिखिए।
रेखांकित पद: वीर और शत्रु
- वीर: (i) विशेषण पद है। (ii) यह 'पुत्र' संज्ञा की विशेषता बताता है।
- शत्रु: (i) संज्ञा पद है। (ii) यह 'सैनिकों' का विशेषण है (शत्रु के सैनिक)।
(ग) “गाँधीजी ने कहा कि सदा सत्य बोलो।” यह वाक्य किस प्रकार का है? परिभाषा भी लिखिए।
यह वाक्य मिश्र वाक्य है।
परिभाषा: जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। यहाँ 'गाँधीजी ने कहा' प्रधान उपवाक्य है और 'कि सदा सत्य बोलो' आश्रित उपवाक्य है।
(घ) (i) “अपनी प्रशंसा स्वयं करना” – इस अर्थ से संबंधित मुहावरा लिखिए।
मुहावरा: अपनी खुदाई खोदना या अपनी बड़ाई करना। (सामान्यतः 'अपनी खुदाई खोदना' प्रचलित है।)
(ii) “पराधीन सुख नहीं” – लोकोक्ति का इस प्रकार से वाक्य में प्रयोग करें कि अर्थ स्पष्ट हो जाए।
वाक्य प्रयोग: राम ने नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू किया, क्योंकि उसने जान लिया था कि पराधीन सुख नहीं।
अर्थ: दूसरों के अधीन रहने से सुख नहीं मिलता।
(ङ) “हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए।” इस पंक्ति में प्रमुख अलंकार की पहचान कर उसकी परिभाषा लिखिए।
प्रमुख अलंकार: उपमा अलंकार
परिभाषा: जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी दूसरी वस्तु या व्यक्ति से 'सा', 'सी', 'समान' आदि शब्दों के प्रयोग से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। यहाँ 'पीर' (पीड़ा) की तुलना 'पर्वत' से 'सी' शब्द के प्रयोग से की गई है।
खण्ड-ग (गद्यांश/पद्यांश पर आधारित प्रश्न)
6. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
बादल, गरजो |
घेर घेर घोर गगन, धारा धर ओ |
ललित ललित, काले घुँघराले,
बाल कल्पना के-से पाले
विद्युत-छवि उर में, कवि, नवजीवन वाले |
...
बादल, गरजो |
विकल विकल, उन्मन थे सब,
विश्व के निदाघ के सकल जन,
आए अज्ञात दिशा से अनन्त के घन |
तप्त धरा, जल में फिर
शीतल कर दो --
बादल, गरजो |
(क) कवि ने बादल को 'नवजीवन वाले' क्यों कहा है?
कवि ने बादल को 'नवजीवन वाले' इसलिए कहा है क्योंकि बादल वर्षा करके सूखी और तपती धरती को शीतलता प्रदान करते हैं, जिससे प्रकृति में नई हरियाली और जीवन का संचार होता है। वे मानो धरती को नया जीवन देते हैं।
(ख) “तप्त धरा, जल से फिर शीतल कर दो” – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय है कि गर्मी से तपती हुई धरती को बादल अपनी वर्षा के जल से पुनः शीतल और हरी-भरी बना दें। यह प्रकृति की प्यास बुझाने और उसे राहत देने की प्रार्थना है।
7. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा प्रत्येक प्रश्न 40 शब्द)
-
(क) “आत्मकथ्य” कविता में कवि प्रसाद ने महान कवि की कल्पना किस प्रकार व्यक्त की है?
कवि प्रसाद ने महान कवि की कल्पना एक ऐसे व्यक्ति के रूप में की है जो अपनी वेदना और अनुभवों को शब्दों में पिरोकर अमर रचना करता है। वह कवि को संसार के दुखों को समझने वाला और उन्हें साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने वाला मानते हैं।
-
(ख) महाकवि देव ने बसंत का बालक के रूप में जो वर्णन किया है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
महाकवि देव ने बसंत को एक चंचल बालक के रूप में चित्रित किया है। यह बालक प्रकृति में नई हरियाली, फूलों की खुशबू और कोयल की कूक के रूप में खेलता है। उसकी मुस्कान बगीचों में खिले फूलों जैसी और उसकी चाल हवा के झोंकों जैसी मधुर है।
-
(ग) कवि को किसकी “दंतुरित मुस्कान” छविमान लगती है और क्यों?
कवि को अपने छोटे बच्चे की “दंतुरित मुस्कान” (दाँत निकलने पर हुई मुस्कान) छविमान लगती है। यह मुस्कान मासूमियत और निर्दोषता से भरी होती है, जो कवि के मन को छू लेती है और उसे अत्यंत सुंदर प्रतीत होती है।
-
(घ) “पीर” कविता में बेटी को “अंतिम पूँजी” क्यों कहा गया है?
“पीर” कविता में बेटी को “अंतिम पूँजी” इसलिए कहा गया है क्योंकि वह माता-पिता के लिए सबसे कीमती और अंतिम सहारा होती है। बेटी ही बुढ़ापे में माता-पिता की देखभाल करती है और उनके दुख-सुख में साथ देती है, इसलिए वह उनकी अंतिम पूँजी है।
8. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
हरि हैं राजनीति पढ़ि आए
समुझि बात कहत हैं, समाचार सब पाए |
इक अति चतुर हुते पहिलैं ही, अब गुरु ग्रंथ पढ़ाए ।
बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी, जोग सँदेस पठाए |
ऊधौ भले लोग आगे के, पर हित डोलत धाए ।
अब अपने मन फेर पाइहैं, चलत जु हुते ते |
ते क्यों अनीति करैं आपुन, जे और अनीति छुड़ाए |
राज धर्म तौ यहै सूर, जो प्रजा न जाहिं सताए ॥
-
(क) गोपियों ने कृष्ण को “राजनीति पढ़ि आए” क्यों कहा?
गोपियों ने कृष्ण को “राजनीति पढ़ि आए” इसलिए कहा क्योंकि वे समझती हैं कि कृष्ण ने राजनीति सीख ली है और अब वे चालाकी से बातें करते हैं। गोपियों के अनुसार, कृष्ण पहले से ही चतुर थे, अब उन्होंने गुरु ग्रंथ पढ़कर अपनी बुद्धि और बढ़ा ली है।
-
(ख) उपर्युक्त पद में गोपियों की कौन-सी विशेषता प्रकट हो रही है?
इस पद में गोपियों की सीधी-सादी और स्पष्टवादी विशेषता प्रकट हो रही है। वे बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात कहती हैं और कृष्ण की चालाकी पर व्यंग्य करती हैं। साथ ही, उनमें न्यायप्रियता और सच्चाई की भावना भी दिखती है।
-
(ग) “बढ़ी बुद्धि जानी जो उनकी” पंक्ति में क्या व्यंग्य किया है?
इस पंक्ति में गोपियों ने व्यंग्य किया है कि कृष्ण की बुद्धि पहले से ही तेज थी, अब गुरु ग्रंथ पढ़कर वह और बढ़ गई है। वे कहती हैं कि इसी बढ़ी हुई बुद्धि के कारण कृष्ण ने उन्हें योग का संदेश भेजा है, जो उनकी चालाकी को दर्शाता है।
-
(घ) गोपियों के अनुसार कृष्ण ने क्या अनीति की?
गोपियों के अनुसार, कृष्ण ने यह अनीति की कि वे स्वयं तो दूसरों को अनीति से छुड़ाने का उपदेश देते हैं, लेकिन स्वयं गोपियों को छोड़कर मथुरा चले गए और उन्हें योग का संदेश भेजा। यह उनके अपने सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि राजधर्म तो यही है कि प्रजा को सताया न जाए।
-
(ङ) रेखांकित पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
रेखांकित पंक्ति “राज धर्म तौ यहै सूर, जो प्रजा न जाहिं सताए” का भाव है कि राजा का सबसे बड़ा धर्म यही है कि वह अपनी प्रजा को कभी कष्ट न दे। गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण राजा हैं, इसलिए उनका कर्तव्य है कि वे गोपियों (प्रजा) को दुखी न करें, बल्कि उनकी रक्षा करें।
प्रश्न (क) यह संवाद किन-किन में हो रहा है?
यह संवाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच हो रहा है।
प्रश्न (ख) लक्ष्मण ने क्या व्यंग्य किया?
लक्ष्मण ने व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्होंने (परशुराम ने) अपने माता-पिता का ऋण तो चुका दिया, लेकिन गुरु का ऋण अभी बाकी है, जो उनके मन में चिंता का कारण है। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे उस ऋण को चुकाने के लिए तैयार हैं।
प्रश्न (ग) लक्ष्मण के संवाद सुनकर परशुराम ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?
लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण संवाद को सुनकर परशुराम क्रोधित हो गए। उन्होंने सभा में हाय-हाय करते हुए कहा कि लक्ष्मण ने उनका अपमान किया है। वे लक्ष्मण को राजद्रोही और दुष्ट कहते हैं और उन्हें युद्ध की चुनौती देते हैं।
प्रश्न (घ) उपर्युक्त पंक्तियों में परशुराम के स्वभाव को कौन सी विशेषता दृष्टिगोचर हुई?
इन पंक्तियों में परशुराम के स्वभाव की क्रोधी और प्रतिशोधी विशेषता दृष्टिगोचर होती है। वे तुरंत क्रोधित हो जाते हैं और अपने अपमान का बदला लेने के लिए उद्धत हो जाते हैं।
प्रश्न (ङ) रेखांकित पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
रेखांकित पंक्ति "सो जनु हमरेहि मे काढ़ा। दिन चलि गए, ब्याज बड़ बाढ़ा" का भाव है कि लक्ष्मण व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि परशुराम ने गुरु ऋण को ऐसे निकाला जैसे वह उन्हीं (लक्ष्मण) से लिया गया हो। दिन बीत गए और अब इस ऋण पर ब्याज बहुत बढ़ गया है, अर्थात अब इसका हिसाब चुकता करने का समय आ गया है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
'फादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है। उनको देखना करुणा के निर्मल जल में स्नान करने जैसा था और उनसे बात करना कर्म के संकल्प से भरना था। मुझे 'परिमल' के वे दिन याद आते हैं, जब हम सब एक पारिवारिक रिश्ते में बँधे जैसे थे, जिसके बड़े फादर बुल्के थे। हमारे हँसी-मजाक में वह निर्लिप्त शामिल रहते, हमारी गोष्ठियों में वह गंभीर बहस करते, हमारी रचनाओं पर बेबाक राय और सुझाव देते और हमारे घरों के किसी भी उत्सव और संस्कार में वह बड़े भाई और पुरोहित जैसे खड़े हो हमें अपने आशीषों से भर देते। मुझे अपना बच्चा और फादर का उसके मुख में पहली बार अन्न डालना याद आता है और नीली आँखों की चमक में तैरता वात्सल्य भी -- जैसे किसी ऊँचाई पर देवदारू की छाया में खड़े हों।'
(क) "हम सब एक पारिवारिक रिश्ते में बँधे जैसे थे।" -- लेखक ने ऐसा किस कारण कहा?
लेखक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि फादर बुल्के उन सबके साथ एक परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार करते थे। वे हँसी-मजाक में शामिल होते, गंभीर बहस करते, रचनाओं पर राय देते और घरों के उत्सवों व संस्कारों में बड़े भाई और पुरोहित की तरह उपस्थित रहते थे। इस प्रकार उन्होंने सबको एक पारिवारिक बंधन में बाँध लिया था।
(ख) लेखक ने फादर को याद करना "शांत संगीत" सुनने जैसा क्यों कहा?
लेखक ने फादर को याद करना "शांत संगीत" सुनने जैसा इसलिए कहा क्योंकि फादर की यादें मधुर और शांतिदायक होती हैं, लेकिन साथ ही उनके न रहने का दुख भी होता है। यह याद एक उदास शांति प्रदान करती है, जैसे कोई शांत संगीत सुनने पर मन को सुकून मिलता है, लेकिन उसमें एक हल्की उदासी भी होती है।
अथवा
काशी आनन्द कानन है। सबसे बड़ी बात है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा लय और सुर की तमीज सिखाने वाला नायाब हीरा रहा है, जो हमेशा से दो कौमों को एक होने व आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा। 'काशी' से लेकर इस देश के ढेरों विश्वविद्यालयों की मानद उपाधियों से अलंकृत व "संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार" एवं "पद्म-विभूषण" जैसे सम्मानों से नहीं, बल्कि अपनी अजेय संगीत यात्रा के लिए बिस्मिल्ला खाँ साहब भविष्य में हमेशा संगीत के नायक बने रहेंगे। नब्बे वर्ष की भरी-पूरी आयु में 27 अगस्त 2006 को संगीत रसिकों की हार्दिक सभा से विदा हुए खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिन्दा रखा।
प्रश्न 9
(क) उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि काशी को “आनन्द कानन” क्यों कहा गया है ? (2 अंक)
उत्तर: काशी को 'आनन्द कानन' इसलिए कहा गया है क्योंकि यह नगर आनंद और शांति का उपवन (बगीचा) है। यहाँ की गलियाँ, घाट और संगीतमय वातावरण मन को प्रसन्नता और आध्यात्मिक सुख प्रदान करते हैं। यह स्थान भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक समृद्धि का केंद्र है, जो इसे आनंद का स्रोत बनाता है।
(ख) बिस्मिल्ला खाँ साहब को कौन-कौन-सी उपाधियाँ प्रदान की गई थीं ? (2 अंक)
उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ साहब को 'भारत रत्न', 'पद्म भूषण', 'पद्म श्री' और 'तानसेन सम्मान' जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से सम्मानित किया गया था। वे शहनाई वादन में अद्वितीय थे और उन्हें 'शहनाई के जादूगर' के रूप में भी जाना जाता था।
प्रश्न 10
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (प्रत्येक प्रश्न की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) 'नेताजी का चश्मा' कहानी के अनुसार देश के निर्माण में बड़े ही नहीं बच्चे भी शामिल हैं। आप देश के नव निर्माण में किस प्रकार योगदान देंगे ? (2 अंक)
उत्तर: मैं देश के नव निर्माण में शिक्षा के प्रसार, स्वच्छता अभियान में भाग लेकर, और छोटे-छोटे कार्यों जैसे पौधारोपण, जल संरक्षण और नैतिक मूल्यों का पालन करके योगदान दूंगा। बच्चे भी जागरूक नागरिक बनकर देश की प्रगति में सहायक हो सकते हैं।
(ख) “संस्कृति' पाठ में सर्वस्व त्याग के कौन-से उदाहरण दिए गए हैं ? (2 अंक)
उत्तर: 'संस्कृति' पाठ में सर्वस्व त्याग के उदाहरण में राजा शिबि का कबूतर के लिए अपने शरीर का मांस काटकर देना और दधीचि ऋषि का अपनी हड्डियाँ दान करना शामिल है। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि सच्ची संस्कृति में परोपकार के लिए सब कुछ त्यागने की भावना होती है।
(ग) “बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया'' -- बालगोबिन भगत के जीवन में उस दिन कौन-सी घटना घट गई, जिससे उनकी संगीत साधना का चरम उत्कर्ष देखा गया ? (2 अंक)
उत्तर: उस दिन बालगोबिन भगत के पुत्र की मृत्यु हो गई थी। इस दुखद घटना के बावजूद, वे अपनी संगीत साधना में लीन रहे और शोक को भी भक्ति में बदल दिया। उन्होंने अपने पुत्र के अंतिम संस्कार के समय भी भजन गाए, जिससे उनकी संगीत साधना का चरम उत्कर्ष देखा गया।
(घ) “यशपाल ने पतनशील सामंती वर्ग पर कटाक्ष किया है।' -- इस कथन को 'लखनवी अंदाज' कहानी के आधार पर उदाहरण सहित समझाइए। (2 अंक)
उत्तर: 'लखनवी अंदाज' कहानी में यशपाल ने पतनशील सामंती वर्ग पर कटाक्ष किया है। उदाहरण के लिए, नवाब साहब अपनी बेरोजगारी और गरीबी छिपाने के लिए दिखावा करते हैं। वे खीरा खाने का नाटक करते हैं और अपनी पुरानी शान का बखान करते हैं, जो सामंती वर्ग के पतन को दर्शाता है।
प्रश्न 11
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(क) महावीर प्रसाद द्विवेदी ने स्त्री-शिक्षा का महत्त्व बताया है। वर्तमान में आप स्त्री शिक्षा में कौन-कौन सी बाधाएँ महसूस करते हैं ? अनुभव के आधार पर लिखिए। (उत्तर सीमा 40 शब्द) (2 अंक)
उत्तर: वर्तमान में स्त्री शिक्षा में मुख्य बाधाएँ हैं: गरीबी के कारण शिक्षा का खर्च वहन न कर पाना, सामाजिक रूढ़ियाँ जैसे लड़कियों को घर के कामों में लगाना, सुरक्षा संबंधी चिंताएँ, और कुछ क्षेत्रों में बाल विवाह जैसी कुरीतियाँ।
(ख) “एक कहानी यह भी” पाठ के आधार पर मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए। (उत्तर सीमा 60 शब्द) (3 अंक)
उत्तर: मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व की तीन विशेषताएँ हैं: (1) संघर्षशीलता - उन्होंने पारिवारिक और सामाजिक बाधाओं के बावजूद लेखन जारी रखा। (2) स्वतंत्र विचारधारा - वे परंपराओं के विरुद्ध अपनी बात कहने से नहीं डरती थीं। (3) संवेदनशीलता - वे स्त्री जीवन की पीड़ा और संघर्ष को गहराई से समझती थीं और उसे अपनी रचनाओं में उतारती थीं।
खण्ड - घ
प्रश्न 12
'साना-साना हाथ जोड़ि' ... पाठ में पीड़ा और सौंदर्य का अद्भुत मेल है।' उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द) (4 अंक)
उत्तर: 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में पीड़ा और सौंदर्य का अद्भुत मेल है। एक ओर प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य है - बर्फ से ढके पहाड़, हरी-भरी घाटियाँ, और शांत वातावरण। दूसरी ओर, वहाँ के लोगों की पीड़ा है - गरीबी, शोषण और कठोर जीवन। उदाहरण के लिए, लेखिका ने सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के बीच एक गरीब महिला को अपने बच्चे के लिए भोजन जुटाने के लिए संघर्ष करते देखा। यह विरोधाभास पीड़ा और सौंदर्य के मेल को दर्शाता है।
अथवा
“अपने सारे अन्तर्विरोध के साथ पलता गंत और टुन्नू का व्यक्तिगत प्रेम, अंततः देश प्रेम में परिणत हो जाता है।” -- कहानी में घटित घटना के आधार पर उक्त कथन को समझाइए। (उत्तर सीमा 80 शब्द) (4 अंक)
उत्तर: गंत और टुन्नू का प्रेम शुरू में व्यक्तिगत था, लेकिन बाद में देश प्रेम में बदल गया। जब देश पर संकट आया, तो गंत ने अपने व्यक्तिगत प्रेम को त्यागकर देश की सेवा करने का निर्णय लिया। टुन्नू ने भी उसका समर्थन किया। इस प्रकार, उनका प्रेम अंतर्विरोधों से भरा था, लेकिन अंततः देशभक्ति में परिणत हो गया। यह दर्शाता है कि सच्चा प्रेम व्यक्तिगत सीमाओं को पार कर राष्ट्रप्रेम का रूप ले सकता है।
प्रश्न 13
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (प्रत्येक की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) “कमलेश्वर ने 'राजा पंचम की नाक' कहानी में सारा व्यंग्य 'नाक' शब्द पर केन्द्रित किया है।” -- उक्त कथन को पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
उत्तर: कमलेश्वर ने 'राजा पंचम की नाक' कहानी में 'नाक' शब्द का प्रयोग व्यंग्य के लिए किया है। नाक यहाँ प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक है। कहानी में लोग अपनी नाक बचाने के लिए झूठ बोलते हैं और दिखावा करते हैं, जो समाज के पाखंड और झूठी प्रतिष्ठा पर व्यंग्य है।
(ख) दुलारी के व्यक्तित्व की कोई दो विशेषताएँ बताइए। (2 अंक)
उत्तर: दुलारी के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ हैं: (1) साहसी - वह सामाजिक बंधनों और रूढ़ियों के विरुद्ध खड़ी होती है। (2) स्वाभिमानी - वह अपने अधिकारों के लिए लड़ती है और किसी के सामने झुकना नहीं चाहती। वह एक मजबूत और स्वतंत्र स्त्री का प्रतिनिधित्व करती है।
(ग) “माता का अंचल' रचना में बाल मनोभावों की अभिव्यक्ति करते-करते लेखक ने तत्कालीन समाज के पारिवारिक परिवेश का चित्रण भी किया है।” — उदाहरण सहित समझाइए। (2 अंक)
उत्तर: 'माता का अंचल' में बाल मनोभावों के साथ-साथ पारिवारिक परिवेश का चित्रण भी है। उदाहरण के लिए, बच्चे का माँ की गोद में सुरक्षित महसूस करना, पिता का अनुशासन, और गाँव का सामूहिक जीवन दिखाया गया है। यह तत्कालीन समाज में परिवार के महत्व और बच्चों के पालन-पोषण के तरीके को दर्शाता है।
(घ) “एक दिन मैंने हिरोशिमा पर कविता लिखी।” -- लेखक की अनुभूति अपने शब्दों में लिखिए। (2 अंक)