RBSE Class 10th 2016 Hindi-S-01-2016 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2016 |
| Subject | Hindi-S-01-2016 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2016 Hindi-S-01-2016
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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2016 2016 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक परीक्षा, 2016
SECONDARY EXAMINATION, 2016
हिन्दी
समय : 3 घंटे 15 मिनट पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
प्रश्नों की संख्या : 44 मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 4
प्रश्न पत्र कोड : S-01-Hindi
खण्ड-क
प्रश्न 1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
जीवन की सच्ची प्रगति स्वावलम्बन के द्वारा ही संभव है। यदि हमारे मन में अपना कार्य करने का उत्साह नहीं है, अपने ऊपर विश्वास नहीं है, आलस्य ने हमारी कार्य शक्ति को पंगु बना दिया है तो फिर कैसे हमारे जीवन के कार्य पूरे हो सकेंगे? ऐसी स्थिति में हम अपने आपको किसी भी कार्य को करने में असमर्थ पाएंगे। समाज, राष्ट्र और संसार के लिए तो हम कर ही क्या सकेंगे, स्वयं अपने लिए भी भार स्वरूप हो जाएंगे। यह बात विचारणीय है कि संसार में जो इतने महान कार्य हुए हैं, क्या उनके पीछे स्वावलम्बन की सुदृढ़ शक्ति नहीं थी? यदि परावलम्बी पुरुषों की भांति सभी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते, अकर्मण्यता, आलस्य और दूसरों के सहारे जीने की भावना लिए रहते तो मानव समाज की इतनी प्रगति क्या संभव थी? इसीलिए तो संसार के सभी महापुरुष स्वावलंबन के पुजारी थे। अपने हाथों से ही उन्होंने अपने महान जीवन का द्वार खोला था। अब्राहम लिंकन, महात्मा गांधी, ईश्वर चन्द्र विद्या सागर आदि महापुरुषों से कौन अपरिचित है? उन्होंने स्वावलम्बन के अमृत को पीकर ही अमरता प्राप्त की थी। इसी कारण वे आज मर कर भी जीवित हैं।
-
(क) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
उत्तर: गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक 'स्वावलम्बन का महत्व' या 'स्वावलम्बन' है।
-
(ख) व्यक्ति समाज के लिए भार कब बन जाता है?
उत्तर: जब व्यक्ति में अपना कार्य करने का उत्साह नहीं होता, आत्मविश्वास नहीं होता और आलस्य उसकी कार्यशक्ति को पंगु बना देता है, तब वह न केवल समाज, राष्ट्र और संसार के लिए बल्कि स्वयं अपने लिए भी भार स्वरूप हो जाता है।
-
(ग) समाज की प्रगति किन बातों पर निर्भर करती है?
उत्तर: समाज की प्रगति स्वावलम्बन, कर्मशीलता, उत्साह, आत्मविश्वास और परिश्रम पर निर्भर करती है। यदि लोग परावलम्बी होकर आलस्य और अकर्मण्यता में जीवन बिताएंगे तो समाज की प्रगति संभव नहीं है।
-
(घ) महापुरुषों ने किस प्रकार अपने जीवन को सफल बनाया?
उत्तर: महापुरुषों ने स्वावलम्बन के बल पर अपने जीवन को सफल बनाया। उन्होंने अपने हाथों से ही अपने महान जीवन का द्वार खोला। अब्राहम लिंकन, महात्मा गांधी, ईश्वर चन्द्र विद्या सागर जैसे महापुरुषों ने स्वावलम्बन रूपी अमृत पीकर अमरता प्राप्त की और आज भी वे अपने कार्यों के कारण जीवित हैं।
प्रश्न 2. निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
सुन, कह 'विदा-विदा'
जब सैनिक पुलक रहे होंगे।
हाथों में कुमकुम थाल लिए
कुछ जल कण ढुलक रहे होंगे।
कर्तव्य-प्रेम की उलझन में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।।
प्रश्न 5
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
वेदी पर बैठा महाकाल,
जब नर बलि चढ़ा रहा होगा।
बलिदानी अपने ही कर से,
निज मस्तक बढ़ा रहा होगा।
उस बलिदान-प्रतिष्ठा में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।।
कुछ मस्तक कम पड़ते होंगे,
जब महाकाल की माला में।
अटल रही होगी आहुति,
जब स्वतन्त्रता की ज्वाला में।
पल भर भी पड़ असमंजस में,
पथ भूल न जाना पथिक कहीं।।
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "बलिदान का पथ" या "पथिक को सावधान" हो सकता है।
(ख) युद्ध की रणभेरी सुनकर सैनिकों की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर: युद्ध की रणभेरी सुनकर सैनिक उत्साहित हो जाते हैं और वे अपने प्राणों की बाजी लगाकर देश की रक्षा के लिए तत्पर हो जाते हैं। वे बलिदान देने में संकोच नहीं करते और अपने कर्तव्य का पालन करते हैं।
(ग) 'कर्तव्य-प्रेम की उलझन में' पंक्ति से आपका क्या आशय है?
उत्तर: 'कर्तव्य-प्रेम की उलझन में' का आशय है कि जब कोई व्यक्ति अपने कर्तव्य और प्रेम के बीच फंस जाता है, तो उसे निर्णय लेने में कठिनाई होती है। यहाँ यह संदर्भ है कि देश के प्रति कर्तव्य और परिवार के प्रति प्रेम के बीच उलझन हो सकती है, लेकिन देश के लिए बलिदान देना सर्वोपरि है।
(घ) जब स्वदेश बलिदान मांग रहा हो तो हमारा क्या कर्तव्य है?
उत्तर: जब स्वदेश बलिदान मांग रहा हो, तो हमारा कर्तव्य है कि हम बिना किसी संकोच या असमंजस के अपने प्राणों का बलिदान देने के लिए तैयार रहें। हमें अपने कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होना चाहिए और देश की रक्षा के लिए सब कुछ न्योछावर कर देना चाहिए।
अथवा
आज भी विश्वास मेरा, तुम बहुत हो काम के,
तुम बदल सकते हो नक्शे, आज फिर आवाम के।
पर जरा नीचे पधारो और पश्चाताप कर लो,
घर करो मजबूत पहले औ दिलों को साफ कर लो।।
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प्रश्न (क) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उचित शीर्षक: "देश के प्रति कर्तव्य" या "युवाओं को प्रेरणा" (कोई भी उपयुक्त शीर्षक स्वीकार्य)।
प्रश्न (ख) कवि क्या कह कर युवाओं को प्रोत्साहित कर रहा है?
कवि युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहता है कि वे कुर्सियों (सत्ता या आराम) के मोह को छोड़ दें, थोड़ा विश्राम लें, और फिर नई शक्ति जुटाकर देश का विश्वास जीतें। कवि उन्हें आश्वस्त करता है कि यह आस्था का देश है, इसलिए यदि वे देश के लिए काम करेंगे तो उन्हें सौ गुना फल मिलेगा।
प्रश्न (ग) पछताने की स्थिति से बचने के लिए कवि किस बात की प्रेरणा देता है?
पछताने की स्थिति से बचने के लिए कवि युवाओं को प्रेरणा देता है कि वे सही समय पर (इस मुहूरत में) देश के लिए कार्य करें। यदि वे इस अवसर को गँवा देंगे, तो बाद में पछताना पड़ेगा। इसलिए कवि कहता है कि महलों से नीचे उतरकर जनता के बीच आएँ, ताकि देश उनका वंदन, अर्चन और अभिनंदन करे।
प्रश्न (घ) रेखांकित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
(रेखांकित पंक्ति: "यह मुहूरत टल गया तो देखना पछताओगे")
आशय: कवि कहता है कि देश की सेवा का यह सुनहरा अवसर (मुहूरत) यदि बीत गया, तो तुम्हें बहुत पछताना पड़ेगा। इसका तात्पर्य है कि समय का सदुपयोग करना चाहिए; यदि हम देश के प्रति अपने कर्तव्यों को अभी नहीं निभाएँगे, तो बाद में पश्चाताप के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
खण्ड-ख
प्रश्न 3. दिए गए बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए: (9 अंक)
(क) पर्यावरण संरक्षण : हमारा दायित्व
- i) पर्यावरण: जीवन का मूल आधार – पर्यावरण में वायु, जल, भूमि, वनस्पति और जीव-जंतु शामिल हैं। यह सभी जीवों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
- ii) पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व – स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और उपजाऊ भूमि मानव जीवन के लिए अनिवार्य हैं। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती हैं।
- iii) पर्यावरण प्रदूषण के दुष्परिणाम – वायु प्रदूषण से बीमारियाँ, जल प्रदूषण से जलजनित रोग, और ध्वनि प्रदूषण से मानसिक तनाव बढ़ता है। ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु परिवर्तन हो रहा है।
- iv) जन चेतना : हमारा दायित्व – हमें पेड़ लगाने, पानी बचाने, प्लास्टिक का कम उपयोग करने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने जैसे कदम उठाने चाहिए। जागरूकता फैलाना भी हमारा कर्तव्य है।
- v) उपसंहार – पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। छोटे-छोटे प्रयासों से हम एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
(ख) राष्ट्र के प्रति हमारा दायित्व
- i) राष्ट्र का स्वरूप – राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और नागरिकों का समूह है। यह हमारी पहचान है।
- ii) नैतिक और कानूनी दायित्व – नैतिक रूप से हमें देश की एकता और अखंडता बनाए रखनी चाहिए। कानूनी रूप से कर चुकाना, नियमों का पालन करना और देश की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
- iii) राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा – हमें देश के प्रति गर्व रखना चाहिए और इसकी छवि को बिगाड़ने वाले कार्यों से बचना चाहिए। विदेशों में भी देश का नाम रोशन करना हमारा दायित्व है।
- iv) राष्ट्र : वर्तमान परिप्रेक्ष्य में – आज के समय में राष्ट्रवाद का अर्थ केवल झंडा फहराना नहीं, बल्कि विकास में योगदान देना, भ्रष्टाचार से लड़ना और सामाजिक समरसता बनाए रखना है।
- v) उपसंहार – राष्ट्र के प्रति हमारा दायित्व केवल अधिकार माँगना नहीं, बल्कि कर्तव्यों का पालन करना है। एक जिम्मेदार नागरिक ही देश को प्रगति की ओर ले जा सकता है।
(निबंध लगभग 300 शब्दों में लिखा जाना चाहिए। उपरोक्त बिंदुओं का विस्तार करते हुए छात्र स्वयं निबंध लिखें।)
प्रश्न 5 (ग) – बढ़ती महंगाई : दुखद जीवन
निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर एक निबंध लिखिए:
- महंगाई का तांडव
- महंगाई के कारण
- महंगाई के दुष्प्रभाव
- महंगाई रोकने के उपाय
- उपसंहार
प्रश्न 5 (घ) – राजस्थान में गहराता जल संकट
निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर एक निबंध लिखिए:
- जल का महत्त्व
- जलाभाव का परिणाम
- जल की उपलब्धता
- भावी जल संकट
- उपसंहार
प्रश्न 6 – पत्र लेखन
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए:
विकल्प (क): स्वयं को भरतपुर निवासी अविनाश मानते हुए भरतपुर के नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी को सड़कों पर बढ़ रहे अतिक्रमण को नियंत्रित करने हेतु पत्र लिखिए। (5 अंक)
विकल्प (ख): स्वयं को कपिल मानते हुए अपने क्षेत्र के पुलिस अधिकारी को मुहल्ले में आए दिन होने वाली चोरियों की शिकायत करते हुए एक पत्र लिखिए। (5 अंक)
प्रश्न 7 – व्याकरण
(क) "अमित ने अजय को अपना खिलौना दे दिया।" वाक्य में कौन सी क्रिया है? उसकी परिभाषा लिखिए। (2 अंक)
उत्तर: इस वाक्य में "दे दिया" क्रिया है। यह संयुक्त क्रिया है।
परिभाषा: जब दो या दो से अधिक धातुओं के मेल से बनी क्रिया एक ही कार्य को व्यक्त करे, उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे – दे दिया, खा लिया, चला गया।
(ख) 'महात्मा गांधी सदा सत्य बोलते थे।' रेखांकित पदों के पद-परिचय के दो-दो बिंदु लिखिए। (2 अंक)
उत्तर:
- महात्मा गांधी – यह संज्ञा पद है, व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- सदा – यह क्रियाविशेषण पद है, रीतिवाचक क्रियाविशेषण, 'बोलते थे' क्रिया की विशेषता बताता है।
(ग) रचना की दृष्टि से वाक्य के कितने भेद होते हैं? उदाहरण देकर समझाइए। (2 अंक)
उत्तर: रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन भेद होते हैं:
- सरल वाक्य: जिसमें एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो। जैसे – राम पढ़ता है।
- संयुक्त वाक्य: जो दो या दो से अधिक सरल वाक्यों के मेल से बने। जैसे – राम पढ़ता है और श्याम खेलता है।
- मिश्र वाक्य: जिसमें एक प्रधान वाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों। जैसे – जो लड़का मेहनत करता है, वह सफल होता है।
खण्ड-ग
प्र6. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
एक के नहीं,
दो के नहीं
ढेर सारी नदियों के पानी का जादू :
एक के नहीं,
दो के नहीं
लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा :
एक की नहीं,
दो की नहीं,
हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुणधर्म :
फसल क्या है?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह
हाथों के स्पर्श की महिमा है
भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुणधर्म है
रूपान्तर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का।
(घ) (i) “ननौ दो ग्यारह होना” मुहावरे का अर्थ बताते हुए स्वरचित वाक्य में प्रयोग कीजिए। (4)
अर्थ : एक या दो की संख्या से बढ़कर ग्यारह हो जाना – अर्थात् बहुत अधिक या असंख्य हो जाना। इस मुहावरे का प्रयोग किसी वस्तु या व्यक्ति की संख्या में अत्यधिक वृद्धि दर्शाने के लिए किया जाता है।
स्वरचित वाक्य : त्योहार के दिन बाजार में इतनी भीड़ थी कि लोगों की संख्या ननौ दो ग्यारह हो गई थी।
(ii) “काला अक्षर भैंस बराबर” लोकोक्ति का इस प्रकार से वाक्य में प्रयोग करें कि उसका अर्थ स्पष्ट हो जाए। ( )
अर्थ : अनपढ़ या अशिक्षित व्यक्ति के लिए अक्षरों का कोई मतलब नहीं होता; वह उन्हें भैंस के समान समझ नहीं पाता।
वाक्य प्रयोग : गाँव का बुजुर्ग किसी भी कागज पर हस्ताक्षर नहीं कर पाता था, क्योंकि उसके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर था।
(ड.) “सत्य सनेह सील सुख सागर” इस पंक्ति में प्रमुख अलंकार की पहचान कर उसकी परिभाषा लिखिए। (2)
प्रमुख अलंकार : अनुप्रास अलंकार
परिभाषा : जब किसी काव्य पंक्ति में एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। यहाँ 'स' वर्ण की आवृत्ति हुई है – सत्य, सनेह, सील, सुख, सागर।
प्रश्न:
(क) फसल पैदा करने में किन-किन तत्त्वों का योगदान होता है? (2)
(ख) खेतों में लहलहाती हुई फसल को देखकर मानव के मन में क्या चित्र उभरता है? कल्पना के आधार पर उत्तर लिखिए। (2)
अथवा
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान
धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!
चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य |
इस अतिथि से प्रिय तुम्हारा क्या रहा संपर्क
उंगलिया माँ की कराती हैं मधुपर्क
देखते तुम इधर कनखी मार
और होतीं जब कि आंखें चार
तब तुम्हारी दंतुरित मुस्कान
मुझे लगती बड़ी ही छविमान।
(क) उपर्युक्त पंक्तियों के आधार पर बताइए कि माँ को धन्य क्यों माना गया है? (2)
(ख) “और होतीं जब कि आँखें चार” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
(क) फसल पैदा करने में मिट्टी, पानी, धूप, हवा, बीज, खाद, और किसान की मेहनत जैसे तत्त्वों का योगदान होता है।
(ख) खेतों में लहलहाती फसल देखकर मानव के मन में समृद्धि, खुशहाली, और प्रकृति की सुंदरता का चित्र उभरता है। कल्पना से ऐसा लगता है कि फसल हरी चादर की तरह धरती को ढक रही है और हवा में लहराती हुई मानो नाच रही है।
(क) माँ को धन्य इसलिए माना गया है क्योंकि वह अपने बच्चे को दूध पिलाकर और उसकी उंगलियों को मीठा स्वाद देकर उसके साथ प्रेम का संपर्क स्थापित करती है। बच्चे की मुस्कान में माँ का प्यार झलकता है, जो उसे धन्य बनाता है।
(ख) “और होतीं जब कि आँखें चार” पंक्ति का भाव है कि जब माँ और बच्चे की आँखें एक-दूसरे से मिलती हैं, तो उस पल में प्रेम और आत्मीयता का गहरा संबंध बनता है। यह आँखों की चार होने की स्थिति को दर्शाता है, जो भावनाओं के आदान-प्रदान का प्रतीक है।
प्रश्न:
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर दीजिए: (उत्तर सीमा प्रत्येक प्रश्न 40 शब्द)
(क) कृष्ण ने मथुरा जाने के बाद उद्धव के माध्यम से गोपियों के पास जो संदेश भेजा, उसकी गोपियों ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की? (2)
(ख) 'आत्मकथ्य' कविता में कवि जयशंकर प्रसाद ने जीवन के यथार्थ एवं अभाव पक्ष की जो मार्मिक अभिव्यक्ति की है, उसे अपने शब्दों में लिखिए। (2)
(ग) कवि गिरिजा कुमार माथुर ने 'छाया छूना मत' कविता में क्या संदेश दिया है? (2)
(घ) राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद रचना के आधार पर बताइए कि मनुष्य को किन जीवन मूल्यों को अपनाने का संकेत किया गया है? (2)
उत्तर:
(क) कृष्ण के संदेश पर गोपियों ने नाराजगी और व्यथा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कृष्ण ने उन्हें भूलकर योग-साधना का उपदेश दिया, जबकि वे तो केवल कृष्ण-प्रेम में डूबी हैं। गोपियों ने उद्धव को भी उलाहना दिया कि वे कृष्ण के प्रेम को नहीं समझते।
(ख) 'आत्मकथ्य' कविता में प्रसाद जी ने जीवन के यथार्थ को दुख और अभाव से भरा बताया है। वे कहते हैं कि जीवन में सुख के क्षण क्षणिक हैं, जबकि दुख और निराशा स्थायी हैं। यह मार्मिक अभिव्यक्ति जीवन की कटु सच्चाई को उजागर करती है।
(ग) 'छाया छूना मत' कविता में कवि गिरिजा कुमार माथुर ने संदेश दिया है कि मनुष्य को भ्रम और मोह की छाया से दूर रहना चाहिए। वह सत्य और वास्तविकता को पहचाने, न कि झूठी आशाओं में उलझे। यह आत्म-साक्षात्कार और सावधानी का संदेश है।
(घ) राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद से मनुष्य को विनम्रता, धैर्य, सत्यनिष्ठा, और क्षमा जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने का संकेत मिलता है। राम का शांत व्यवहार और परशुराम के क्रोध पर संयम यह सिखाता है कि शक्ति का उपयोग न्याय और धर्म के लिए होना चाहिए।
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
फटिक सिलानि सौं सुधार्यौ सुधा मंदिर,
उदधि को सो अधिकाइ उमगे अमंद |
बाहर ते भीतर भीति न दिखैए ‘ea’,
दूध को सो फेन फैल्यौ आंगन फरसबंद |
तारा सी तरूनि तामें ठाढी झिलमिली होति,
मोतिन की जोति मिलयो मल्लिका को मकरंद |
आरसी से अंबर में आभा सी उजारी लगै,
प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद |
-
रेखांकित पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए? 'दूध को सो फेन' से कवि का क्या आशय है?
भाव स्पष्टीकरण: रेखांकित पंक्ति 'दूध को सो फेन फैल्यौ आंगन फरसबंद' का अर्थ है कि आंगन के फर्श पर चाँदनी इस प्रकार फैली हुई है जैसे दूध का झाग (फेन) फैला हो। कवि का आशय यह है कि चाँदनी की सफेदी और कोमलता दूध के झाग के समान है, जो आंगन को पूरी तरह से ढक लेती है और अत्यंत सुंदर दिखाई देती है।
-
'दूध को सो फेन' से कवि का क्या आशय है?
आशय: कवि ने चाँदनी की तुलना दूध के झाग (फेन) से की है। इसका आशय यह है कि चाँदनी अत्यंत श्वेत, कोमल, और फैली हुई है, जैसे दूध का झाग बिना किसी रुकावट के फैल जाता है। यह चाँदनी की सुंदरता और व्यापकता को दर्शाता है।
-
सुंदर चाँदनी के कारण आकाश का स्वरूप कैसा दिखाई दे रहा है?
उत्तर: सुंदर चाँदनी के कारण आकाश ऐसा दिखाई दे रहा है मानो वह दर्पण (आरसी) के समान चमक रहा हो और उसमें एक आभा सी उजागर हो रही हो। कवि के अनुसार, आकाश में चाँदनी की रोशनी से ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई प्रकाश फैल गया हो, जो अत्यंत सुंदर और मनोहर है।
-
'आरसी से अंबर में आभा सी उजारी' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर: यह पंक्ति 'प्यारी राधिका' के लिए प्रयुक्त हुई है। कवि कहता है कि चाँदनी के कारण आकाश में ऐसी आभा फैली है जैसे दर्पण में प्रतिबिंब दिखता है, और वह प्रतिबिंब प्यारी राधिका के समान सुंदर लगता है। अतः यहाँ राधिका की सुंदरता का वर्णन किया गया है।
अथवा
यश है या न वैभव है, मान है न सरमाया;
जितना ही तू दौड़ा तू उतना ही भरमाया।
प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चन्द्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजन-
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना।
दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं,
देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।
(इस भाग में कोई प्रश्न नहीं दिया गया है। यह केवल पद्यांश का वैकल्पिक भाग है।)
प्र.9.
दुख है न चाँद खिला शरत-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण।
- (क) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि मानव को क्या बोध कराना चाहता है?
कवि मानव को यह बोध कराना चाहता है कि जीवन में जो कुछ नहीं मिला, उसे भूलकर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। चाँद और फूल जैसी सुंदर चीजें भी दुख का कारण बन सकती हैं यदि उनके पीछे छिपी वास्तविकता को न समझा जाए।
- भौतिक वस्तुएं मानव को किस प्रकार भ्रमित करती हैं?
भौतिक वस्तुएं मानव को उनके बाहरी आकर्षण से भ्रमित करती हैं। जैसे चाँद की सुंदरता के पीछे रात का अंधकार छिपा होता है, वैसे ही भौतिक सुख-सुविधाएं मानव को स्थायी सुख का भ्रम देती हैं, जबकि वे क्षणिक और भ्रामक होती हैं।
- 'हर चंद्रिका में छिपी रात एक कृष्णा है' कहकर कवि क्या संदेश देता है?
कवि यह संदेश देता है कि हर सुखद और सुंदर चीज के पीछे कोई न कोई दुख या कठिनाई छिपी होती है। चाँदनी रात (चंद्रिका) में भी अंधकार (कृष्णा रात) छिपा है, अर्थात जीवन में सुख और दुख दोनों का साथ-साथ अस्तित्व है।
- कवि गिरिजा कुमार माथुर के अनुसार जीवन को किस प्रकार जीना चाहिए?
कवि गिरिजा कुमार माथुर के अनुसार जीवन को वर्तमान में जीना चाहिए। अतीत की असफलताओं और खोई हुई चीजों को भूलकर भविष्य की ओर देखना चाहिए। जीवन में आने वाले सुख-दुख को समान भाव से स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
और कुछ नहीं पूछ पाए हालदार साहब। कुछ पल चुपचाप खड़े रहे, फिर पान के पैसे चुकाकर जीप में आ बैठे और रवाना हो गए। बार बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिन्दगी सब कुछ होम देने वालों पर भी हंसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूंढती है। दुखी हो गए। पंद्रह दिन बाद फिर उसी कस्बे से गुजरे। कस्बे में घुसने से पहले ही ख्याल आया कि कस्बे की हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य ही प्रतिष्ठापित होगी, लेकिन सुभाष की आँखों पर चश्मा नहीं होगा, क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया। ........... और कैप्टन मर गया। सोचा, आज वहाँ रुकेंगे नहीं, पान भी नहीं खाएंगे, मूर्ति की तरफ देखेंगे भी नहीं, सीधे निकल जाएंगे।
- (क) हालदार साहब के दुखी होने का क्या कारण था? (2)
हालदार साहब के दुखी होने का कारण यह था कि वे यह सोचकर दुखी हुए कि जो लोग देश के लिए अपना सब कुछ त्याग देते हैं, उन पर भी समाज हंसता है, जबकि लोग अपने स्वार्थ के लिए बिकने के मौके ढूंढते रहते हैं। यह विडंबना उन्हें बहुत दुखी करती है।
- (@) हालदार साहब कस्बे में क्यों नहीं रुकना चाहते थे? (2)
हालदार साहब कस्बे में नहीं रुकना चाहते थे क्योंकि उन्हें पता था कि सुभाष की प्रतिमा पर चश्मा नहीं होगा (क्योंकि मास्टर चश्मा बनाना भूल गया था और कैप्टन मर गया था)। यह दृश्य उन्हें दुखी करता था, इसलिए वे उस जगह को देखने से बचना चाहते थे।
अथवा
पढ़ने लिखने में स्वयं कोई बात ऐसी नहीं जिससे अनर्थ हो सके। अनर्थ का बीज उसमें हरगिज नहीं। अनर्थ पुरुषों से भी होते हैं। अपढ़ों और पढ़े लिखों, दोनों से। अनर्थ, दुराचार और पापाचार के कारण और ही होते हैं और वे व्यक्ति विशेष का चाल-चलन देखकर जाने भी जा सकते हैं। अतएव स्त्रियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए।
इस गद्यांश में लेखक का तर्क है कि पढ़ने-लिखने से कोई अनर्थ नहीं होता। अनर्थ तो व्यक्ति के आचरण और चाल-चलन से होते हैं, चाहे वह पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़। इसलिए स्त्रियों को भी अवश्य पढ़ाना चाहिए, क्योंकि शिक्षा से अनर्थ नहीं, बल्कि समाज का कल्याण होता है।
खण्ड-ग
प्र42. जो लोग यह कहते हैं कि पुराने जमाने में यहाँ स्त्रियाँ न पढ़ती थीं अथवा उन्हें पढ़ने की मुमानियत थी वे या तो इतिहास से अभिज्ञता नहीं रखते या जान-बूझकर लोगों को धोखा देते हैं। समाज की दृष्टि में ऐसे लोग दण्डनीय हैं क्योंकि स्त्रियों को निरक्षर रखने का उपदेश देना समाज का अपकार और अपराध करना है, समाज की उन्नति में बाधा डालना है।
(क) समाज में अनर्थ होने के कारणों पर प्रकाश डालिए। (2)
समाज में अनर्थ होने का मुख्य कारण स्त्रियों को शिक्षा से वंचित रखना है। जब स्त्रियाँ अशिक्षित रहती हैं, तो वे समाज की उन्नति में योगदान नहीं दे पातीं। इससे समाज में अज्ञानता, रूढ़िवादिता और पिछड़ापन बढ़ता है, जो अनर्थ का कारण बनता है।
(ख) समाज की दृष्टि में कैसे लोग दण्डनीय होते हैं? (2)
समाज की दृष्टि में वे लोग दण्डनीय होते हैं जो स्त्रियों को निरक्षर रखने का उपदेश देते हैं। ऐसे लोग समाज का अपकार और अपराध करते हैं तथा समाज की उन्नति में बाधा डालते हैं। वे इतिहास से अनभिज्ञ होते हैं या जानबूझकर लोगों को धोखा देते हैं।
vio. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए। (प्रत्येक प्रश्न की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) बालगोबिन भगत रेखाचित्र सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार करता है। स्पष्ट कीजिए। (2)
बालगोबिन भगत रेखाचित्र में लेखक ने सामाजिक रूढ़ियों जैसे जाति-पाति, ऊँच-नीच और धार्मिक आडंबरों पर प्रहार किया है। भगत स्वयं इन रूढ़ियों से ऊपर उठकर सादगी और मानवता का जीवन जीते हैं, जो समाज को एक नई दिशा दिखाता है।
(ख) फादर बुल्के को भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग क्यों कहा गया है? (2)
फादर बुल्के ने भारतीय संस्कृति को अपनाकर हिंदी भाषा और साहित्य की सेवा की। उन्होंने भारतीय परंपराओं को सम्मान दिया और यहाँ के लोगों के साथ घुल-मिल गए। इसलिए उन्हें भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग कहा गया है।
(ग) “एक कहानी यह भी” के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि दकियानूसी विचारधारा जहाँ मन को हतोत्साहित करती है वहीं प्रगतिशील विचारधारा मानव मन को गर्वित करती है। (2)
दकियानूसी विचारधारा पुरानी रूढ़ियों को थोपती है, जिससे मन हतोत्साहित होता है। वहीं प्रगतिशील विचारधारा नए विचारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है, जिससे मानव मन गर्वित और आत्मविश्वास से भर जाता है।
(घ) लेखक महावीर प्रसाद द्विवेदी ने प्राचीन एवं वर्तमान शिक्षा प्रणाली में क्या अंतर बताया है? (2)
प्राचीन शिक्षा प्रणाली में नैतिकता और चरित्र निर्माण पर जोर था, जबकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल परीक्षा और अंकों पर केंद्रित है। प्राचीन शिक्षा जीवन मूल्यों को सिखाती थी, पर आज की शिक्षा रटने और प्रतियोगिता पर आधारित है।
44. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) “आचार्य जी का चश्मा” पाठ में निहित देशभक्ति के संदेश को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए। (2)
इस पाठ में देशभक्ति का संदेश यह है कि सच्चा देशभक्त वह है जो बिना किसी स्वार्थ के देश की सेवा करे। आचार्य जी अपने चश्मे के माध्यम से देश के प्रति समर्पण और त्याग की भावना दिखाते हैं, जो हर नागरिक को प्रेरित करती है।
(ख) “नियमित और सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फलदायी होती है।” फ़ारसी खाँ के आधार पर कथन की पुष्टि कीजिए। (2)
फ़ारसी खाँ नियमित रूप से सच्चे मन से प्रार्थना करते थे। उनकी प्रार्थना का प्रभाव यह था कि वे कठिनाइयों में भी धैर्य और शक्ति पाते थे। इससे सिद्ध होता है कि सच्ची प्रार्थना मन को शांति और सफलता देती है।
खण्ड-घ
प्र42. 'बच्चे बचपन में निर्दोष, सरल और मस्त होते हैं, उन्हें परिणाम की चिंता नहीं होती।' उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द) (4)
बच्चे बचपन में निर्दोष और सरल होते हैं, वे बिना किसी परिणाम की चिंता किए अपनी मस्ती में रहते हैं। उदाहरण के लिए, एक बच्चा बारिश में भीगने का आनंद लेता है, भले ही उसे सर्दी लग जाए। वह खेलते समय गिरता है, चोट खाता है, लेकिन तुरंत उठकर फिर से खेलने लगता है। उन्हें भविष्य का डर नहीं होता, वे वर्तमान में जीते हैं। यह निर्दोषता और मस्ती उनके बचपन की विशेषता है।
अथवा
हिरोशिमा पहुँचकर लेखक ने कैसा अनुभव किया? उनकी मनः स्थिति का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए। (4)
हिरोशिमा पहुँचकर लेखक ने अत्यंत दुखद और भयावह अनुभव किया। उन्होंने वहाँ परमाणु बम के विनाशकारी प्रभाव को देखा, जिससे उनका मन उदास और स्तब्ध हो गया। उन्हें मानवता के प्रति गहरी पीड़ा और क्रोध का अनुभव हुआ। वे सोच में पड़ गए कि कैसे मनुष्य ने मनुष्य को इतना कष्ट दिया। उनकी मनः स्थिति शोक, आक्रोश और शांति की कामना से भरी हुई थी।
प्रश्न 43. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (प्रत्येक की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) 'जार्ज पंचम की ATH' कहानी में भारत सरकार की किस मनोवृत्ति पर व्यंग्य किया गया है?
उत्तर: इस कहानी में भारत सरकार की अंग्रेजी शासन के प्रति चाटुकारिता और दासता की मनोवृत्ति पर व्यंग्य किया गया है। सरकार ने जार्ज पंचम की प्रतिमा को हटाने के बजाय उसे संरक्षित करने का निर्णय लिया, जो उनकी गुलाम मानसिकता को दर्शाता है।
(ख) "मन काव्यमय हो उठा, सत्य और सौन्दर्य को छूने लगा" – किस दृश्य को देखकर लेखिका का मन काव्यमय हो गया?
उत्तर: लेखिका का मन काव्यमय हो गया जब उसने बादलों के बीच से निकलती चाँदनी को देखा। चाँदनी की रोशनी में प्रकृति का सौन्दर्य और सत्यता उभरकर सामने आई, जिसने लेखिका के मन को भावुक और काव्यात्मक बना दिया।
(ग) LS मारे जाने का समाचार सुनकर दुलारी की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर: LS के मारे जाने का समाचार सुनकर दुलारी अत्यधिक दुखी और स्तब्ध हो गई। वह रोने लगी और उसका मन व्याकुल हो उठा। उसने अपने पति की मृत्यु की खबर को सहन नहीं कर पाई और शोक में डूब गई।
(घ) 'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ में लेखिका ने 'छाया' का खेल किसे कहा है?
उत्तर: लेखिका ने 'छाया' का खेल उस प्राकृतिक दृश्य को कहा है जहाँ बादलों की छाया पहाड़ों और घाटियों पर तेजी से बदलती है। यह छाया का खेल प्रकृति की सुंदरता और परिवर्तनशीलता को दर्शाता है, जो लेखिका को मोहित कर लेता है।
प्रश्न 44. (क) दुपहिया वाहन चलाते समय किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है?
उत्तर: दुपहिया वाहन चलाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- हमेशा हेलमेट पहनें।
- यातायात नियमों का पालन करें और सिग्नल का सम्मान करें।
- गति सीमा में रहें और तेज गति से बचें।
- वाहन की स्थिति (ब्रेक, टायर, लाइट) की जाँच करें।
- शराब या नशे में वाहन न चलाएँ।
- ध्यान भटकाने वाली चीजों (मोबाइल) से बचें।
(ख) एक अच्छे नागरिक होने के नाते सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की आप किस प्रकार सहायता करेंगे?
उत्तर: एक अच्छे नागरिक के रूप में मैं सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की निम्न प्रकार सहायता करूँगा:
- सबसे पहले घटनास्थल पर शांति बनाए रखूँगा और घायल को आश्वस्त करूँगा।
- तुरंत एम्बुलेंस (108) या पुलिस (100) को सूचित करूँगा।
- यदि संभव हो, तो प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करूँगा, जैसे खून बहना रोकना या सिर को सहारा देना।
- घायल को हिलाने से बचूँगा जब तक चिकित्सा सहायता न पहुँचे।
- अन्य लोगों से मदद माँगूँगा और यातायात को नियंत्रित करने में सहयोग करूँगा।
- घटना की जानकारी परिवार या पुलिस को दूँगा।