RBSE Class 10th 2017 Hindi-S-01-2017 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2017
Subject Hindi-S-01-2017
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 10th 2017 Hindi-S-01-2017

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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2017 2017 solved Previous Year Question Papers

माध्यमिक परीक्षा, 2017

SECONDARY EXAMINATION, 2017

हिन्दी

समय : 3 घण्टे       पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।

प्रश्नों की संख्या — 4       नामांक Roll No.       मुद्रित पृष्ठों की संख्या — 2

S-0-Hindi       [ Turn over ]

खण्ड-क

1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

मनुष्य का हृदय बड़ा ममत्व प्रेमी है। कैसी ही उपयोगी और कितनी ही सुंदर वस्तु क्यों न हो, जब तक मनुष्य उसको पराई समझता है, तब तक उससे प्रेम नहीं करता किंतु भद्दी और बिलकुल काम में न आने वाली वस्तु को यदि मनुष्य अपनी समझता है, तो उससे प्रेम करता है। पराई वस्तु कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, कितनी ही उपयोगी क्यों न हो, कितनी ही सुंदर क्यों न हो, उसके नष्ट होने पर मनुष्य कुछ भी दुःख का अनुभव नहीं करता, इसलिए कि वह वस्तु, उसकी नहीं, पराई है। अपनी वस्तु कितनी ही बेकार हो, काम में न आने वाली हो, नष्ट होने पर मनुष्य को दुःख होता है, इसलिए कि वह अपनी चीज है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि मनुष्य पराई चीज से प्रेम करने लगता है। ऐसी दशा में भी जब तक मनुष्य उस वस्तु को अपनाकर नहीं छोड़ता, अथवा अपने हृदय में यह विचार नहीं कर लेता कि वह वस्तु मेरी है, तब तक उसे संतोष नहीं मिलता। ममत्व से प्रेम उत्पन्न होता है, और प्रेम से ममत्व। इन दोनों का साथ चोली-दामन का साथ है। ये कभी पृथक् नहीं किए जा सकते।

  1. (क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

    उत्तर: ममत्व और प्रेम का संबंध

  2. (ख) मनुष्य का हृदय किस प्रकृति का है?

    उत्तर: मनुष्य का हृदय ममत्व प्रेमी प्रकृति का है, अर्थात वह अपनी वस्तुओं से ही प्रेम करता है और पराई वस्तुओं से प्रेम नहीं करता।

  3. (ग) मनुष्य को कब संतोष मिलता है?

    उत्तर: मनुष्य को तब संतोष मिलता है जब वह किसी पराई वस्तु को अपना लेता है या अपने हृदय में यह विचार कर लेता है कि वह वस्तु मेरी है।

  4. (घ) मनुष्य दुःख का अनुभव कब नहीं करता है?

    उत्तर: मनुष्य पराई वस्तु के नष्ट होने पर दुःख का अनुभव नहीं करता, चाहे वह वस्तु कितनी ही मूल्यवान, उपयोगी या सुंदर क्यों न हो।

2. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

स्वप्न आता स्वर्ग का, दृग कोरकों में दीप्ति आती,
पंख लग जाते पगों को ललकती SST छाती |
रास्ते का एक काटा पाँव का दिल चीर देता
रक्त की दो बूँद गिरती एक दुनिया डूब जाती
आँख में हो स्वर्ग लेकिन पाँव पृथ्वी पर टिके हों |
कंटकों को इस अनोखी सीख का सम्मान कर ले |
पूर्व चलने के बटोही बाट को पहचान कर ले ||

(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए ।

उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "बटोही" या "पथिक" है। (अथवा "स्वप्न और यथार्थ")

(ख) पैरों में पंख लगने से कवि का क्या आशय है ?

उत्तर: पैरों में पंख लगने का आशय है कि मनुष्य जब स्वर्ग के सुखों का स्वप्न देखता है तो उसके मन में उत्साह और तीव्र इच्छा जाग्रत हो जाती है। वह उन सुखों को पाने के लिए बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहता है, मानो उसके पैरों में पंख लग गए हों। यह मानव की महत्वाकांक्षा और लालसा को दर्शाता है।

(ग) राह (बाट) की पहचान करना क्यों आवश्यक है ?

उत्तर: राह (बाट) की पहचान करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि जीवन में आगे बढ़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि हम किस मार्ग पर चल रहे हैं। यदि मार्ग सही नहीं है तो हम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाएंगे और रास्ते में आने वाले कष्टों (कंटकों) का सामना करने में असफल रहेंगे। सही मार्ग की पहचान ही हमें सफलता दिला सकती है।

(घ) मार्ग के कंटक (काँटे) हमें क्या सीख देते हैं ?

उत्तर: मार्ग के कंटक (काँटे) हमें यह सीख देते हैं कि जीवन में सफलता पाने के लिए कष्टों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ये कष्ट हमें धैर्य, सहनशीलता और संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करते हैं। कंटक हमें यह भी सिखाते हैं कि हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते समय आने वाली कठिनाइयों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वे ही हमें मजबूत बनाती हैं।


अथवा

७-0]-प्रातां [ Turn over

प्रश्न 2 (क) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

उत्तर: 'मेरा देश' या 'भारत माता'

प्रश्न 2 (ख) नदियों में किसकी धारा बह रही है?

उत्तर: नदियों में 'सुधा' (अमृत) की धारा बह रही है।

प्रश्न 2 (ग) 'मनमोहिनी' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

उत्तर: 'मनमोहिनी' शब्द प्रकृति के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो मन को मोह लेने वाली है।

प्रश्न 2 (घ) उपर्युक्त पद्यांश का सार दो पंक्तियों में लिखिए।

सार: यह पद्यांश भारत देश की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालय, नदियों और उपजाऊ भूमि का वर्णन करता है। यह देश स्वर्ग के समान सुख देने वाला है।


खण्ड-ख

3. दिए गए बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए।

विषय: स्वच्छता का महत्त्व

प्रस्तावना: स्वच्छता का अर्थ है साफ-सफाई और स्वास्थ्य का ध्यान रखना। यह हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वच्छता क्या है? स्वच्छता का अर्थ है अपने आस-पास के वातावरण को साफ रखना, कूड़ा-कचरा न फैलाना, और व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना।

स्वच्छता के प्रकार:

  • व्यक्तिगत स्वच्छता: नियमित स्नान, दांतों की सफाई, हाथ धोना आदि।
  • सामुदायिक स्वच्छता: सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, पार्कों की सफाई।
  • पर्यावरणीय स्वच्छता: जल, वायु और मिट्टी को प्रदूषण से बचाना।

स्वच्छता के लाभ:

  • बीमारियों से बचाव: स्वच्छता से संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है।
  • स्वास्थ्य में सुधार: साफ-सफाई से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
  • सामाजिक प्रतिष्ठा: स्वच्छ स्थानों पर लोग आकर्षित होते हैं और समाज में सम्मान बढ़ता है।
  • आर्थिक लाभ: स्वच्छता से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

स्वच्छता: हमारा योगदान: हम सभी को स्वच्छता के प्रति जागरूक होना चाहिए। कूड़ा-कचरा डस्टबिन में डालें, पानी बचाएं, पेड़-पौधे लगाएं, और दूसरों को भी प्रेरित करें। 'स्वच्छ भारत मिशन' जैसे अभियानों में भाग लें।

उपसंहार: स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। स्वच्छ रहकर हम स्वस्थ रह सकते हैं और अपने देश को सुंदर बना सकते हैं।

निबंध विषय

(ख) जीवन की अविस्मरणीय घटना

  1. जीवन की अविस्मरणीय घटना क्या होती है?
  2. घटना के कारण
  3. घटना का प्रभाव/वर्णन
  4. सुझाव/उपसंहार

(ग) वृक्ष : हमारे सच्चे मित्र

  1. वृक्षों का महत्त्व
  2. वृक्षों के लाभ
  3. वृक्षों का विकास
  4. हमारा दायित्व/समेकन

(घ) खुला शौच मुक्त गाँव

  1. खुला शौच मुक्त से आशय
  2. सरकारी प्रयास
  3. जन जागरण
  4. हमारा योगदान
  5. महत्त्व/उपसंहार

७-0]-प्रातां [Turn over

4. पत्र लेखन

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए:

विकल्प (क): स्वयं को गजपुर निवासी मदन मानते हुए अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र, जिसमें विद्यालय में रिक्त पदों पर शिक्षक लगाने का निवेदन हो।

विकल्प (ख): स्वयं को रामपुर निवासी रतन मानते हुए जिला चिकित्सा अधिकारी को पत्र, जिसमें गाँव में अतिवृष्टि के कारण फैल रही मौसमी बीमारियों की रोकथाम का निवेदन हो।

5. व्याकरण प्रश्न

  1. "मोर उड़ गया।" वाक्य में कौन-सी क्रिया है? लिखिए।

    इस वाक्य में संयुक्त क्रिया है। 'उड़ गया' दो क्रियाओं (उड़ना + जाना) के मेल से बनी है, जो क्रिया के पूर्ण होने का बोध कराती है।

  2. "दुर्गा कक्षा की विदुषी छात्रा है।" रेखांकित पदों का पद परिचय दीजिए। (दो बिंदु)

    रेखांकित पद हैं: दुर्गा और विदुषी

    • दुर्गा: व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, स्त्रीलिंग, कर्ता कारक।
    • विदुषी: विशेषण (गुणवाचक), स्त्रीलिंग, एकवचन, 'छात्रा' शब्द की विशेषता बता रहा है।
  3. संयुक्त वाक्य किसे कहते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

    संयुक्त वाक्य: वह वाक्य जिसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय (जैसे: और, या, लेकिन, इसलिए) से जुड़े हों, संयुक्त वाक्य कहलाता है।

    उदाहरण: "राम ने खाना खाया और सो गया।" इसमें 'राम ने खाना खाया' और 'सो गया' दो स्वतंत्र उपवाक्य 'और' से जुड़े हैं।

  4. "रंग जमना" मुहावरे का अर्थ व वाक्य प्रयोग बताइए।

    अर्थ: अपना प्रभाव या धाक जमाना; छा जाना।

    वाक्य प्रयोग: "परीक्षा में प्रथम आकर रमेश ने पूरे स्कूल में अपना रंग जमा दिया।"

  5. "अधजल गगरी छलकत जाय" लोकोक्ति का वाक्य प्रयोग कीजिए जिससे इसका अर्थ स्पष्ट हो।

    अर्थ: थोड़ा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।

    वाक्य प्रयोग: "जो विद्यार्थी थोड़ा-बहुत पढ़ लेता है, वही सबसे अधिक बोलता है – सच ही कहा है अधजल गगरी छलकत जाय।"

  6. "कोटि कुलिस सम वचनु तुम्हारा" पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? स्पष्ट कीजिए।

    इस पंक्ति में उपमा अलंकार है।

    स्पष्टीकरण: यहाँ 'वचन' (बात) की तुलना 'कोटि कुलिस' (करोड़ों वज्रों) से की गई है। 'सम' शब्द उपमा का बोधक है। उपमान – कोटि कुलिस, उपमेय – वचन।

खण्ड-ग

6. पद्यांश पर आधारित प्रश्न

निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

सेल, तुम हो अति बड़भागी |
अपरस रहत सनेह तगा हैं, नाहिन मन अनुरागी ।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी ।
ज्यों जल माहँ तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी ।
प्रीति-नदी में ws न बौरयो, दृष्टि न रूप परागी |
"सूरदास" अबला हम भोरी, गुर चौँटी ज्यौं पागी ।।

  1. गोपियों ने उद्धव को बड़भागी क्यों कहा?

    गोपियों ने उद्धव को बड़भागी इसलिए कहा क्योंकि वे श्रीकृष्ण के साथ रहते हुए भी उनके प्रति आसक्त नहीं हुए। उनका मन प्रेम में नहीं डूबा, बल्कि वे योग-साधना में लीन रहे। गोपियाँ इसे उनका सौभाग्य मानती हैं कि वे कृष्ण के सान्निध्य में रहकर भी विरह-वेदना से मुक्त हैं।

  2. "प्रीति-नदी में ws न बौरयो।" पंक्ति से क्या आशय है?

    इस पंक्ति का आशय है कि उद्धव प्रेम-रूपी नदी में डूबे नहीं। 'बौरयो' का अर्थ है डूबना या भिगोना। गोपियाँ कहती हैं कि उद्धव श्रीकृष्ण के प्रेम में सराबोर नहीं हुए, उनकी आँखों ने कृष्ण के रूप का रस नहीं पिया। यह उनके वैराग्य और योग-मार्ग को दर्शाता है।

7. निम्नलिखित प्रश्नों (किन्हीं तीन) के उत्तर लिखिए |

(क) गोपियों ने कृष्ण को 'हारिल की लकड़ी” क्यों कहा ?

गोपियों ने कृष्ण को 'हारिल की लकड़ी' इसलिए कहा क्योंकि जिस प्रकार हारिल पक्षी अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए लकड़ी को कभी नहीं छोड़ता, उसी प्रकार गोपियाँ कृष्ण के प्रेम को कभी नहीं छोड़ सकतीं। यह उनके अटूट प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।

(ख) कवि नागार्जुन के अनुसार फसल क्या-क्या है ?

कवि नागार्जुन के अनुसार फसल केवल अन्न नहीं है, बल्कि यह हवा, पानी, मिट्टी, धूप, किसानों के पसीने और मेहनत का सम्मिलित परिणाम है। फसल में प्रकृति के तत्वों और मानव श्रम का योगदान होता है।

(ग) मंगलेश डबराल की कविता “संगतकार' में मुख्य गायक का साथ कौन देता है? स्पष्ट कीजिए ।

मंगलेश डबराल की कविता 'संगतकार' में मुख्य गायक का साथ संगतकार देता है। संगतकार मुख्य गायक की आवाज़ को सहारा देता है, उसकी कमियों को छुपाता है और उसकी प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। वह बिना किसी प्रसिद्धि की चाह के अपनी भूमिका निभाता है।

(घ) राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद में लक्ष्मण ने योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई हैं ?

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद में लक्ष्मण ने योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई हैं:

  • योद्धा को धैर्यवान और संयमी होना चाहिए।
  • उसे अपने बल का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
  • योद्धा को विनम्र और शांत स्वभाव का होना चाहिए।
  • उसे क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए और बिना सोचे-समझे हथियार नहीं उठाने चाहिए।

8. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

सुनि कटु वचन कुठार सुधारा
हाय-हाय सब सभा पुकारा |
परसु देखा बहु मोही
बिप्र बिचारि बचों नृपद्रोही ।
मिले न रन गाढ़े
द्विजदेवता घरहि के बाढ़े ।
अनुचित कहि सबु लोगु पुकारे
रघुपति सयनहि लखनु नेवारे ।।

(क) उपर्युक्त पद्यांश में 'कटु वचन' किसने और किससे कहे?

इस पद्यांश में 'कटु वचन' परशुराम ने लक्ष्मण से कहे थे। परशुराम ने लक्ष्मण की बातों से क्रोधित होकर कठोर शब्दों का प्रयोग किया।

(ख) 'बिप्र बिचारि बचों नृपद्रोही' का आशय स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति का आशय है कि परशुराम ने लक्ष्मण को ब्राह्मण समझकर (बिप्र = ब्राह्मण) उन्हें राजद्रोही नहीं कहा। वे लक्ष्मण को ब्राह्मण मानते थे, इसलिए उन्होंने उन्हें राजद्रोही कहने से बचा लिया।

(ग) 'रघुपति सयनहि लखनु नेवारे' का भाव स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति का भाव है कि लक्ष्मण ने रघुपति (राम) को शयन (सोने) से जगाया। जब सभा में हंगामा हुआ और परशुराम क्रोधित हुए, तब लक्ष्मण ने राम को सोने से उठाकर स्थिति को संभाला।

प्रश्न 6

(क) “द्विजदेवता घरहि के हैं” पंक्ति का भावार्थ लिखिए।

भावार्थ: इस पंक्ति में कहा गया है कि द्विज (ब्राह्मण) और देवता (देवी-देवता) घर के ही होते हैं, अर्थात वे घर में ही पूजे जाने योग्य हैं। यह संकेत करता है कि माता-पिता या गुरुजन ही सच्चे देवता हैं, जिनकी सेवा और सम्मान घर में ही किया जाना चाहिए।

(ख) 'भूगुबर' किसे कहा गया है?

उत्तर: 'भूगुबर' शब्द का अर्थ है 'पृथ्वी का स्वामी' या 'राजा'। यहाँ इस शब्द का प्रयोग किसी शक्तिशाली व्यक्ति या शासक के लिए किया गया है।

(ग) सभा में हाय-हाय को पुकार क्यों हुई?

उत्तर: सभा में हाय-हाय की पुकार इसलिए हुई क्योंकि वहाँ किसी अन्याय या अत्याचार का वर्णन किया गया था, जिससे सभी लोग दुखी और व्यथित हो गए। यह पुकार सहानुभूति और विरोध का प्रतीक है।

(घ) 'qe' का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'qe' शब्द का अर्थ 'क्या' है। यह प्रश्नवाचक शब्द है जो किसी बात को पूछने के लिए प्रयोग किया जाता है।


अथवा

कटि किंकिनि [amas]

पाँयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिनि कै धुनि को मधुराई।
Braz अंग लसे पट पीत, feat Eos बनमाल सुहाई।
माथे किरीट बड़े aT चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।
जै जग-मंदिर-दीपक सुंदर, श्री ब्रजदूलह “देव” सहाई।

(क) “जग-मंदिर-सुंदर” में कौन-सा अलंकार है?

उत्तर: “जग-मंदिर-सुंदर” में रूपक अलंकार है। यहाँ संसार को मंदिर के रूप में और सुंदरता को दीपक के रूप में दर्शाया गया है, जिससे एक वस्तु का दूसरी वस्तु पर आरोप होता है।

(ख) “श्री कृष्ण” को ब्रज का दूल्हा क्यों कहा गया है?

उत्तर: श्रीकृष्ण को ब्रज का दूल्हा इसलिए कहा गया है क्योंकि वे ब्रजभूमि के प्रिय और सुंदर हैं, जैसे दूल्हा अपनी दुल्हन के लिए होता है। यह उनके प्रति ब्रजवासियों के प्रेम और आकर्षण को दर्शाता है।

(ग) श्रीकृष्ण का रूप वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर: श्रीकृष्ण का रूप अत्यंत सुंदर और मनमोहक है। उनके पैरों में मंजुल नूपुर बजते हैं, कमर में किंकिनी की मधुर ध्वनि होती है। वे पीले वस्त्र धारण करते हैं और गले में वनमाला सुशोभित होती है। माथे पर बड़ा किरीट (मुकुट) है, और उनके मुख पर मंद हँसी चंद्रमा की चाँदनी के समान प्रकाशित होती है। वे संसार रूपी मंदिर के दीपक के समान सुंदर हैं।

(घ) 'fale' का क्या अर्थ है?

उत्तर: 'fale' शब्द का अर्थ 'फल' है, जो किसी कार्य के परिणाम या उपलब्धि को दर्शाता है।


प्रश्न 9

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

WL को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है। उनको देखना करुणा के जल में स्नान करने जैसा था और उनसे बात करना कर्म के संकल्प से भरना था। मुझे 'परिमल' के वे दिन याद आते हैं जब हम सब एक पारिवारिक रिश्ते में बँधे जैसे थे जिसके बड़े फादर बुल्के थे। हमारे हँसी-मजाक में वह निर्लिप्त शामिल रहते, हमारी गोष्ठियों में वह गंभीर बहस करते, हमारी रचनाओं पर बेबाक राय और सुझाव देते और हमारे घरों के किसी भी उत्सव और संस्कार में वह बड़े भाई और पुरोहित जैसे खड़े हो हमें अपने आशीषों से भर देते। मुझे अपना बच्चा और फादर का उसके मुख में पहली बार अन्न डालना याद आता है।

(क) फादर को याद करना, उदास संगीत सुनने जैसा क्यों था?

उत्तर: फादर को याद करना उदास संगीत सुनने जैसा इसलिए था क्योंकि उनकी यादें मधुर और भावुक होती थीं, लेकिन साथ ही उनके न होने का दुख भी होता था। यह यादें शांत और गंभीर होती थीं, जैसे उदास संगीत मन को छू जाता है।

(ख) “परिमल” की गोष्ठियों में क्या-क्या होता था?

उत्तर: “परिमल” की गोष्ठियों में फादर बुल्के गंभीर बहस करते थे, सभी की रचनाओं पर बेबाक राय और सुझाव देते थे, और हँसी-मजाक में निर्लिप्त भाव से शामिल रहते थे। यह एक पारिवारिक माहौल होता था जहाँ सब एक-दूसरे से जुड़े होते थे।


अथवा

५-(|- माता

प्रश्न 9 (गद्यांश पर आधारित)

गद्यांश: और सभ्यता ? सभ्यता है संस्कृति का परिणाम । हमारे खाने पीने के तरीके, हमारे ओढ़ने पहनने के तरीके, हमारे गमनागमन के साधन, सब हमारी सभ्यता हैं । मानव की जो योग्यता उससे आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराती है, हम उसे उसको संस्कृति कहें या असंस्कृति ? और जिन साधनों के बल पर वह दिन-रात आत्म-विनाश में जुटा हुआ है, उन्हें हम उसकी सभ्यता समझें या असभ्यता ? संस्कृति का यदि कल्याण को भावना से नाता टूट जाएगा तो वह असंस्कृति होकर ही रहेगी और ऐसी संस्कृति का अवश्यंभावी परिणाम असभ्यता के अतिरिक्त दूसरा क्या होगा ?

(क) उपर्युक्त गद्यांश में सभ्यता के कौन-कौन से लक्षण बताए गए हैं ? (2 अंक)

उत्तर: गद्यांश में सभ्यता के निम्नलिखित लक्षण बताए गए हैं:

  • खाने-पीने के तरीके
  • ओढ़ने-पहनने के तरीके
  • गमनागमन (आने-जाने) के साधन

लेखक के अनुसार ये सभी हमारी सभ्यता के अंग हैं।

(ख) संस्कृति का नाता किससे है ? (2 अंक)

उत्तर: संस्कृति का नाता कल्याण की भावना से है। लेखक के अनुसार यदि संस्कृति का कल्याण की भावना से नाता टूट जाएगा तो वह असंस्कृति बन जाएगी और उसका परिणाम असभ्यता होगा।

प्रश्न 10. निम्नलिखित प्रश्नों (कोई तीन) के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा - 40 शब्द)

(क) बालगोबिन भगत की तीन चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए । (2 अंक)

उत्तर: बालगोबिन भगत की तीन चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. सादगी और सरलता: वे बहुत सादा जीवन जीते थे और सरल स्वभाव के थे।
  2. ईश्वर भक्ति: वे परम भक्त थे और नियमित रूप से भजन-कीर्तन करते थे।
  3. दयालुता और परोपकार: वे दूसरों की सहायता करने में हमेशा तत्पर रहते थे और सभी से प्रेम करते थे।

(ख) “फादर कामिल बुल्के संकल्प से संन्यासी थे ।” स्पष्ट कीजिए । (2 अंक)

उत्तर: फादर कामिल बुल्के ने भारत आकर हिंदी साहित्य की सेवा का संकल्प लिया था। उन्होंने विवाह नहीं किया, सादा जीवन बिताया और पूरी तरह से हिंदी के अध्ययन-अध्यापन में समर्पित हो गए। उनका यह समर्पण और त्याग उन्हें सच्चे अर्थों में संन्यासी बनाता है।

(ग) “एक कहानी यह भी” के आधार पर सिद्ध कीजिए कि मन्नू भण्डारी बाल्यकाल से ही स्वतंत्र व विद्रोही स्वभाव की थीं । (2 अंक)

उत्तर: मन्नू भण्डारी बाल्यकाल से ही स्वतंत्र और विद्रोही स्वभाव की थीं। वे लड़कियों के लिए बनाए गए पारंपरिक नियमों का पालन नहीं करती थीं। वे खुलकर अपनी बात रखती थीं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती थीं। उनका यह स्वभाव उनके लेखन में भी स्पष्ट झलकता है।

(घ) शहनाई वादक बिस्मिल्ला खां का जीवन परिचय दीजिए । (2 अंक)

उत्तर: उस्ताद बिस्मिल्ला खां का जन्म 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमराँव में हुआ था। वे प्रसिद्ध शहनाई वादक थे। उन्होंने शहनाई को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें भारत रत्न, पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मान प्राप्त हुए। उनका निधन 21 अगस्त 2006 को हुआ।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा - 40 शब्द)

विकास द्विवेदी

(क) हिंदी के विकास में महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान को रेखांकित कीजिए।

महावीर प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी साहित्य में खड़ी बोली को स्थापित किया। उन्होंने निबंध, आलोचना और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे 'सरस्वती' पत्रिका के संपादक रहे और हिंदी गद्य को एक नई दिशा दी। उनके प्रयासों से हिंदी साहित्य का विकास हुआ।

(ख) “लखनवी अंदाज” कहानी की संवेदना को सार रूप में लिखिए।

“लखनवी अंदाज” कहानी में लखनऊ की तहज़ीब और नवाबी अंदाज को दर्शाया गया है। कहानी में एक नवाब साहब की दिखावटी शान और उनके अंदाज को व्यंग्यात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह कहानी मानवीय स्वभाव और सामाजिक विडंबना को उजागर करती है।

खण्ड-घ

2. “माता का आँचल” पाठ देहाती दुनिया का मनोरम दृश्य है।” स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा - 80 शब्द)

“माता का आँचल” पाठ में गाँव के जीवन का सजीव चित्रण है। इसमें बालक भोलानाथ के माध्यम से देहाती दुनिया के मनोरम दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। गाँव के खेत, खलिहान, पशु-पक्षी, त्योहार और मेले का वर्णन बहुत ही सुंदर है। माँ का आँचल बच्चे के लिए सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक है। यह पाठ ग्रामीण जीवन की सादगी और सौंदर्य को दर्शाता है।

अथवा

“मैं क्यों लिखता हूँ” पाठ में लेखक अज्ञेय ने लिखने के क्या-क्या कारण बताए हैं? विस्तार से समझाइए। (उत्तर सीमा - 80 शब्द)

अज्ञेय ने “मैं क्यों लिखता हूँ” में लिखने के कई कारण बताए हैं। वे लिखते हैं कि वे अपने अनुभवों और विचारों को व्यक्त करने के लिए लिखते हैं। लेखन उनके लिए आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है। वे समाज में व्याप्त समस्याओं को उजागर करने और पाठकों को जागरूक करने के लिए भी लिखते हैं। लेखन उनकी आंतरिक आवश्यकता है, जो उन्हें संतुष्टि प्रदान करता है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों में से तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा - 40 शब्द)

(क) जॉर्ज पंचम की नाक वापस लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या किया?

मूर्तिकार ने जॉर्ज पंचम की नाक वापस लगाने के लिए एक विशेष प्रकार का सीमेंट तैयार किया। उसने नाक को सावधानीपूर्वक जोड़ा और फिर उसे पॉलिश करके मूर्ति को पहले जैसा बना दिया। इस प्रक्रिया में उसने बहुत धैर्य और कौशल का परिचय दिया।

(ख) “चित्रलिखित-सी मैं “माया” और “छाया” के इस अनूठे खेल को भर-भर आँखों देखती जा रही थी।” “साना साना हाथ जोड़ि....!” पाठ के आधार पर यह खेल कौन-सा था? बताइए।

यह खेल बादलों और पहाड़ों के बीच होने वाला प्राकृतिक खेल था। लेखिका बादलों की परछाइयों को पहाड़ों पर देख रही थीं, जो माया और छाया का अनूठा खेल प्रतीत होता था। यह दृश्य बहुत ही मनमोहक और अद्भुत था।

(ग) “दुलारी का टुन्नू के प्रति पवित्र प्रेम था।” स्पष्ट कीजिए।

दुलारी का टुन्नू के प्रति प्रेम मातृत्व और वात्सल्य से भरा हुआ था। वह टुन्नू को अपने बच्चे की तरह प्यार करती थी और उसकी हर ज़रूरत का ध्यान रखती थी। उसका प्रेम निस्वार्थ और पवित्र था, जिसमें कोई स्वार्थ नहीं था।

(घ) “माता का आँचल” पाठ में बालक भोलानाथ व बाबूजी के मित्रवत प्रेम के साथ वात्सल्य भी उभरता है।” सोदाहरण समझाइए।

पाठ में भोलानाथ और उसके पिता बाबूजी के बीच मित्रवत प्रेम दिखाया गया है। बाबूजी भोलानाथ के साथ खेलते हैं और उसे प्यार करते हैं। उदाहरण के लिए, जब भोलानाथ रोता है, तो बाबूजी उसे गोद में उठाकर दुलारते हैं। साथ ही, वे उसकी शरारतों पर डाँटते भी हैं, जो वात्सल्य भाव को दर्शाता है।

4. (क) गाड़ी चलाने के लिए क्या आवश्यक है ?

गाड़ी चलाने के लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक हैं:

  • वैध ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License)
  • गाड़ी का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र (RC)
  • बीमा पॉलिसी (Insurance)
  • प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC)
  • यातायात नियमों का पालन करना
  • सतर्कता और ध्यान

4. (ख) शराब पीकर गाड़ी क्यों नहीं चलानी चाहिए ?

शराब पीकर गाड़ी चलाना निम्नलिखित कारणों से खतरनाक और गैरकानूनी है:

  • शराब के सेवन से मस्तिष्क की कार्यक्षमता कम हो जाती है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • प्रतिक्रिया समय (Reaction Time) धीमा हो जाता है, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है।
  • दृष्टि धुंधली हो सकती है और संतुलन बिगड़ सकता है।
  • यह कानूनी अपराध है और इसके लिए जुर्माना या कारावास हो सकता है।
  • इससे स्वयं और अन्य लोगों की जान को खतरा होता है।

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