RBSE Class 10th 2017 Supp.)-S-01-2017 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | Supp.)-S-01-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2017 Supp.)-S-01-2017
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Rajasthan Board Class 10th Supp.)-S-01-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक विशेष पूरक परीक्षा, 2017
SECONDARY SPECIAL SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2017
हिन्दी
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
No. of Questions — 4 S-0-Hindi (Sp. Supp.)
No. of Printed Pages — 2
खण्ड-क
1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
हमें विधायक विचार सामने रखने चाहिए। निषेधात्मक विचार लोगों को दुर्बल बना देते हैं। क्या तुमने यह नहीं देखा कि जहाँ माता-पिता पढ़ने-लिखने के लिए अपने बालकों के सदा पीछे लगे रहते हैं और कहा करते हैं कि तुम कभी कुछ सीख नहीं सकते, तुम गधे बने रहोगे – वहाँ बालक यथार्थ में वैसे ही हो जाते हैं। यदि तुम उनसे सहानुभूति-भरी बातें करो और उन्हें उत्साह दो, तो समय पाकर उनकी उन्नति होना निश्चित है। यदि तुम उनके सामने विधायक विचार रखो, तो उनमें मनुष्यत्व आएगा और वे अपने पैरों पर खड़ा होना सीखेंगे। भाषा और साहित्य, काव्य और कला, हर एक विषय में हमें मनुष्यों को उनके विचार और कार्य की भूलें नहीं बतानी चाहिए, वरन् उन्हें वह मार्ग दिखा देना चाहिए, जिससे वे इन बातों को और भी सुचारू रूप से कर सकें। विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुसार शिक्षा में परिवर्तन होना चाहिए। अतीत जीवनों ने हमारी प्रवृत्तियों को गढ़ा है, इसलिए विद्यार्थी को उसकी प्रवृत्तियों के अनुसार मार्ग दिखाना चाहिए। जो जहाँ पर है, उसे वहीं से आगे बढ़ाओ। हमने देखा है कि जिनको हम निकम्मा समझते थे, उनको भी श्रीरामकृष्ण देव ने किस प्रकार उत्साहित किया और उनके जीवन का प्रवाह बिलकुल बदल दिया। उन्होंने कभी भी किसी मनुष्य की विशेष प्रवृत्तियों को नष्ट नहीं किया। उन्होंने अत्यन्त पतित मनुष्यों के प्रति भी आशा और उत्साहपूर्ण वचन कहे और उन्हें ऊपर उठा दिया। स्वाधीनता ही विकास की पहली शर्त है। यदि कोई यह कहने का दुःसाहस करे कि "मैं इस नारी या इस बालक के उद्धार का उपाय करूँगा" तो वह गलत है। दूर हट जाओ, वे अपनी समस्याओं को स्वयं हल कर लेंगे। तुम सर्वज्ञता का दम्भ भरने वाले होते कौन हो? तुममें ऐसे दुःसाहस का विचार कैसे आया कि...
– 7-0-1-रशावा (Sp. Supp.)
(क) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए
शीर्षक: "सेवा ही पूजा है" या "प्रभु की संतान की सेवा"
(ख) निषेधात्मक विचारों से बालकों के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
निषेधात्मक विचारों से बालकों के मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वे आत्मविश्वास खो देते हैं, अपने आप को हीन समझने लगते हैं और उनमें भय तथा संकोच उत्पन्न हो जाता है। इससे उनका मानसिक विकास बाधित होता है और वे जीवन में आगे बढ़ने से डरने लगते हैं।
(ग) शिक्षा में कैसा परिवर्तन होना चाहिए?
शिक्षा में ऐसा परिवर्तन होना चाहिए कि वह बालकों को केवल जानकारी देने तक सीमित न रहे, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, सेवा भावना और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का विकास करे। शिक्षा को रटने की बजाय समझने और व्यवहार में लाने पर जोर देना चाहिए, ताकि बालक अपने कर्तव्यों को पूजा की भावना से कर सकें।
(घ) मनुष्य धन्य कब बन जाता है?
मनुष्य तब धन्य बन जाता है जब वह प्रभु की इच्छा से उनकी किसी संतान की सेवा कर सके। यह सौभाग्य प्राप्त होने पर वह धन्य होता है, क्योंकि दूसरे इस सेवा के अवसर से वंचित रह जाते हैं।
2. निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
और सकल अंगनि तें ऊधौ अँखियाँ अधिक दुखारी |
अतिहिं पिरातिं सिरातिं न कबहूँ बहुत जतन करि हारी |
मग जोबत पलकौ नहिं लावतिं बिरह बिकल भई भारी |
भरि गइ fare बयारि दरस बिनु fate दिन रहतिं उघारी |
ते अलि अब ये ग्यान सलाकैं क्यों सहि सकतिं तिहारी |
सूर सु अंजन आँजि रूप रस आरति we हमारी |
ऊधौ इतनी कहियौ बात |
(काव्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर यहाँ लिखे जाएंगे।)
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
शीर्षक: ब्रज में उत्पात एवं गोकुल की विपदा
(ख) सभी अंगों में अधिक दुःखी कौन सा अंग है?
सभी अंगों में अधिक दुःखी हृदय (मन) है, क्योंकि यह सभी सुख-दुःख का केंद्र होता है और कृष्ण के वियोग में यह सबसे अधिक व्याकुल होता है।
(ग) कृष्ण की अनुपस्थिति में ब्रज में क्या-क्या होने लगा?
कृष्ण की अनुपस्थिति में ब्रज में अनेक उत्पात (आपदाएँ) होने लगीं:
- तृणावर्त, बक, बकी, अघासुर, धेनुक जैसे राक्षस बार-बार आक्रमण करने लगे।
- व्योम (आकाश) से कंस प्राणों की घात करने लगा।
- काली (कालिया नाग) अपना काल रूप दिखाकर जल में डुबोने लगा।
- वरुण फाँसी (फंदा) डालने का प्रयास करने लगा, जिससे सब दुखी हो गए।
- इंद्र अपने अपमान के कारण बार-बार क्रोधित होने लगे।
(घ) थर-थर कौन काँपने लगा और क्यों?
गोपी, गाय, गोप और गोसुत (ग्वाल-बाल) सबके शरीर थर-थर काँपने लगे। इसका कारण यह था कि कृष्ण के बिना ब्रज में अनेक राक्षसों और विपत्तियों का आतंक छा गया था, जिससे सब भयभीत हो गए थे। माता यशोदा अंचल फाड़ रही थीं और पिता नंद पगड़ी लिए हुए थे, अर्थात् सब व्याकुल थे।
अथवा
प्रस्तुत पंक्तियों में एक गोपी कृष्ण के प्रति अपने प्रेम और विरह की व्यथा व्यक्त कर रही है। वह कहती है कि मैं पत्री (पत्र) कैसे लिखूँ, लिखा नहीं जाता। कलम हाथ में काँपती है और आँखों से आँसू झड़ रहे हैं। बात कहूँ तो कही नहीं जाती, डर लगता है। हमारी दशा देखकर तुम चले जाते हो, यह कहकर हरि (कृष्ण) के पास जाना। हे प्रभु गिरधर नागर, मैं आपके चरण कमलों में अपना मन रखती हूँ।
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उचित शीर्षक: "विरहिणी मीरा" या "मीरा का विरह"
(ख) मीरा पत्र क्यों नहीं लिख पा रही है?
मीरा पत्र इसलिए नहीं लिख पा रही है क्योंकि वह अपने प्रभु श्रीकृष्ण के विरह में इतनी व्याकुल और दुखी है कि उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे हैं। वह रात-दिन रोती रहती है और उसकी लेखनी भी आँसुओं से भीग जाती है, जिससे वह पत्र नहीं लिख पाती।
(ग) तारा गिन-गिन रात कौन बिता रही है और क्यों?
तारा गिन-गिन रात मीरा बिता रही है। वह ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के वियोग में दुखी है। वह रात भर जागती है और तारों को गिनती रहती है, ताकि रात कटे और सुबह हो, पर उसे सुख की घड़ी की प्रतीक्षा है जब वह अपने प्रभु से मिल सकेगी।
(घ) मीरा को सुख की प्राप्ति कब होगी?
मीरा को सुख की प्राप्ति तब होगी जब वह अपने प्रभु श्रीकृष्ण (गिरधर नागर) से मिल जाएगी। वह उनके मिलन की प्रतीक्षा में है और तब तक वह आनंद और मंगल के गीत गाती रहेगी। उसके लिए सुख का क्षण प्रभु के दर्शन और मिलन का ही क्षण है।
खण्ड-ख
3. दिए गए बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए:
(क) सामाजिक सद्भावना में त्योहारों का योगदान
- सामाजिक सद्भावना का अर्थ
- हमारे देश में मनाए जाने वाले त्योहार
- विविध धर्मों एवं जातियों में मेल-मिलाप
- त्योहारों से जीवन में पड़ने वाला प्रभाव
- उपसंहार
निबंध:
सामाजिक सद्भावना में त्योहारों का योगदान
सामाजिक सद्भावना का अर्थ है समाज के विभिन्न वर्गों, धर्मों, जातियों और समुदायों के बीच आपसी प्रेम, सम्मान और एकता की भावना। यह किसी भी समाज की मजबूती और विकास के लिए आवश्यक है। हमारे देश भारत में त्योहारों का इस सद्भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है।
हमारे देश में अनेक धर्मों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं, और यहाँ विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं। हिंदुओं के दीपावली, होली, दशहरा, जन्माष्टमी; मुसलमानों के ईद, बकरीद; सिखों के गुरुपर्व; ईसाइयों के क्रिसमस; जैनियों के पर्युषण; बौद्धों के बुद्ध पूर्णिमा आदि त्योहार सभी को एक साथ जोड़ते हैं। ये त्योहार विविधता में एकता का प्रतीक हैं।
त्योहारों के समय विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं, और एक-दूसरे को बधाई देते हैं। इससे आपसी मेल-मिलाप बढ़ता है और सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं। होली पर सब एक साथ रंग खेलते हैं, दीपावली पर दीप जलाते हैं, ईद पर सेवइयाँ बाँटते हैं – ये सब आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाते हैं।
त्योहारों का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ये हमें खुशी, उत्साह और नई ऊर्जा देते हैं। ये हमें सिखाते हैं कि हम सब एक हैं, चाहे हमारा धर्म या जाति कुछ भी हो। त्योहारों के माध्यम से हम एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं को समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं।
उपसंहार: इस प्रकार, त्योहार सामाजिक सद्भावना को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये हमें एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। हमें सभी त्योहारों को मिल-जुलकर मनाना चाहिए ताकि समाज में शांति और सद्भाव बना रहे।
(ख) स्वच्छ भारत में विद्यार्थियों का योगदान
- स्वच्छता का अर्थ
- संपूर्ण भारत स्वच्छ कैसे हो?
- विद्यार्थियों का योगदान
- स्वच्छता क्यों आवश्यक है?
- उपसंहार
(ग) राजस्थान के धार्मिक मेले
- मेले का अर्थ
- राजस्थान में कहाँ-कहाँ एवं कब मेले भरते हैं?
- प्रसिद्ध मेलों का वर्णन
- मानव जीवन में मेलों का महत्त्व
- उपसंहार
(घ) मेरे जीवन में शिक्षक का महत्त्व
- गुरु शिष्य का सम्बन्ध
- जीवन पर गुरु का प्रभाव
- शिक्षक जीवन का निर्माता
- शिक्षक द्वारा दी गई विविध प्रकार की शिक्षा
- उपसंहार
4. पत्र लेखन
स्वयं को 'टेग' निवासी हिमांशी मानते हुए आपकी सहेली गायत्री को एक पत्र लिखिए जिसमें आपके विद्यालय में मनाए गए स्वच्छता सप्ताह का वर्णन हो।
अथवा
स्वयं को 'लक्ष्यपुरा' निवासी मधुसूदन मानकर अपने क्षेत्र के विधायक को एक पत्र लिखिए जिसमें विद्यालय को हटाने का निवेदन किया गया हो।
७-0]-प्रावा (Sp. Supp.)
5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर निर्देशानुसार लिखिए :
(क) "मधु धीरे-धीरे लिखती है।" वाक्य में क्रिया-विशेषण लिखिए।
उत्तर: क्रिया-विशेषण: धीरे-धीरे (यह 'लिखती' क्रिया की विशेषता बताता है)।
(ख) "तृप्ति और नव्या भोजन पका रही हैं।" वाक्य में रेखांकित पदों का पद परिचय लिखिए (कोई दो-दो बिंदु)।
उत्तर:
- तृप्ति और नव्या – ये दोनों संज्ञा पद हैं; व्यक्तिवाचक संज्ञा; कर्ता कारक; बहुवचन; स्त्रीलिंग।
- भोजन – संज्ञा पद; जातिवाचक संज्ञा; कर्म कारक; एकवचन; पुल्लिंग।
- पका रही हैं – क्रिया पद; संयुक्त क्रिया; स्त्रीलिंग; बहुवचन; वर्तमान काल।
(ग) संयुक्त वाक्य की परिभाषा लिखते हुए एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर: संयुक्त वाक्य वह वाक्य होता है जिसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय (जैसे 'और', 'पर', 'इसलिए') से जुड़े हों। उदाहरण: "राम ने खाना खाया और सो गया।"
(घ) (i) 'बीड़ा उठाना' मुहावरे का अर्थ लिखते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: अर्थ: किसी कठिन कार्य या जिम्मेदारी को स्वीकार करना। वाक्य: "नेता ने गाँव के विकास का बीड़ा उठाया।"
(ii) 'हाथ कुत्ता खाय' लोकोक्ति का अर्थ लिखते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: अर्थ: जब कोई वस्तु हाथ से निकल जाए तो पछताना व्यर्थ है। वाक्य: "परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर वह समझ गया कि अब हाथ कुत्ता खाय।"
(ङ) यमक एवं श्लेष अलंकार का उदाहरण देकर अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- यमक अलंकार: जब एक ही शब्द एक से अधिक बार आए और उसका अर्थ हर बार भिन्न हो। उदाहरण: "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।" (पहला 'कनक' = धतूरा, दूसरा 'कनक' = सोना)
- श्लेष अलंकार: जब एक ही शब्द का प्रयोग एक बार हो, पर उसके एक से अधिक अर्थ निकलें। उदाहरण: "चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।" (चंदन = वृक्ष या लेप)
- अंतर: यमक में शब्द की पुनरावृत्ति होती है, श्लेष में नहीं।
खण्ड-ग
6. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीन काल से
गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँघकर
चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था
तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढ़स बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है।
(क) मुख्य गायक के जीवन में संगतकार का क्या महत्त्व है?
उत्तर: संगतकार मुख्य गायक को कठिन समय में सहारा देता है। जब मुख्य गायक तानों में खो जाता है या उसकी आवाज़ बैठ जाती है, तब संगतकार स्थायी को संभालता है, उसे ढाढ़स बँधाता है और उसके बचपन की याद दिलाकर आत्मविश्वास लौटाता है। वह मुख्य गायक को अकेलापन महसूस नहीं होने देता।
(ख) काव्यांश में संगतकार किस तरह के लोगों का प्रतिनिधित्व करता है?
उत्तर: संगतकार उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो पर्दे के पीछे रहकर दूसरों की सफलता में सहायक होते हैं। ये वे सहयोगी, मित्र या गुरु होते हैं जो मुख्य व्यक्ति के संकट के समय उसका साथ देते हैं, उसे प्रेरित करते हैं और उसकी कमियों को पूरा करते हैं।
काव्यांश पर आधारित प्रश्न
“प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।”
(क) “प्रभुता का शरण-बिम्ब केवल मृगतृष्णा है।” काव्य पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
आशय: इस पंक्ति में कवि कहता है कि सत्ता, ऐश्वर्य और प्रभुता का आश्रय (शरण-बिंब) केवल एक भ्रम (मृगतृष्णा) है, जो वास्तविक नहीं है। जिस प्रकार मृगतृष्णा प्यासे को पानी का भ्रम देती है, उसी प्रकार प्रभुता भी मनुष्य को सुख का झूठा आभास देती है, परंतु वह क्षणिक और नश्वर है।
(ख) उपलब्धियाँ मनुष्य को कब सुखदायी नहीं लगती?
उपलब्धियाँ मनुष्य को तब सुखदायी नहीं लगती जब वह उन्हें पाने के लिए अत्यधिक लालच और दौड़-धूप करता है। कवि के अनुसार, “जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया” – अर्थात जितना अधिक हम भौतिक सुखों के पीछे भागते हैं, उतना ही हम भ्रमित होते जाते हैं और वास्तविक सुख से दूर हो जाते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (उत्तर सीमा: प्रत्येक प्रश्न 40 शब्द)
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर दीजिए:
(क) गोपियों ने उद्धव को कृष्ण के द्वारा किस राजधर्म का पालन करने के लिए कहा?
गोपियों ने उद्धव से कहा कि वे कृष्ण को संदेश दें कि वे राजधर्म का पालन करें। राजधर्म के अनुसार राजा को प्रजा की रक्षा करनी चाहिए और उनके दुखों को दूर करना चाहिए। गोपियाँ स्वयं को कृष्ण की प्रजा मानती थीं, इसलिए उन्होंने कृष्ण से अपने प्रति करुणा दिखाने का आग्रह किया।
(ख) “अनु बंस राकेश कलंकू” काव्य पंक्ति किसके लिए किसने कही?
यह पंक्ति सूरदास ने श्रीकृष्ण के लिए कही है। इसका अर्थ है कि कृष्ण चंद्रमा के समान हैं, और उनके वंश (यदुवंश) में जन्म लेने वाले लोग चंद्रमा के कलंक के समान हैं, अर्थात वे कृष्ण की तुलना में नगण्य हैं।
(ग) चाँदनी रात की कान्ति को दर्शाने के लिए कवि ने क्या उदाहरण दिया है और क्यों?
कवि ने चाँदनी रात की कान्ति को दर्शाने के लिए “मोती” और “चाँदी” का उदाहरण दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि चाँदनी रात में चारों ओर फैली रोशनी मोती और चाँदी की चमक के समान श्वेत, कोमल और मनमोहक होती है, जो सौंदर्य को बढ़ाती है।
(घ) “आत्मकथ्य” कविता में कवि जयशंकर प्रसाद की विनम्रता को स्पष्ट कीजिए।
“आत्मकथ्य” कविता में कवि जयशंकर प्रसाद की विनम्रता इस प्रकार स्पष्ट होती है: वे अपनी कविताओं को केवल “अश्रु-बिंदु” (आँसू) कहते हैं, न कि कोई बड़ी रचना। वे स्वयं को सामान्य मानते हैं और अपनी भावनाओं को सरलता से व्यक्त करते हैं, बिना किसी अहंकार के।
8. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पद्यांश :
तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा | बार-बार मोहि लागि बोलावा |
सुनत लखन के बचन कठोरा | परसु सुधारि धरेउ कर घोरा ||
अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू | कटुबादी बालकु बधजोगू ||
बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा | अब अग मरनिहार भा साँचा |
कौसिक कहा छमिअ अपराधू | बाल दोष गुन-गनहिं न साधू ||
खर कुठार मैं अकरुन कोही | आगें अपराधी गुरुद्रोही ||
उतर देत बिलेस फल अक | केबल कौसिक सील तुम्हारे ||
न त एहि काटि कुठार हल्क | गुरहि उरिन मास श्रम अ ||
(क) उपर्युक्त काव्यांश में किसके कठोर वचन सुनकर किसने प्रतिक्रिया की ?
उत्तर : लक्ष्मण के कठोर वचन सुनकर परशुराम ने प्रतिक्रिया की। लक्ष्मण के कठोर वचन सुनकर परशुराम ने अपना परशु (कुल्हाड़ा) सुधारकर हाथ में ले लिया।
(ख) काव्यांश में गुरुद्रोही किसे कहा गया है ?
उत्तर : काव्यांश में लक्ष्मण को गुरुद्रोही कहा गया है। परशुराम ने लक्ष्मण को गुरुद्रोही बताया है क्योंकि वे गुरु (विश्वामित्र) के प्रति अविनयपूर्ण व्यवहार कर रहे थे।
(ग) “बधजोगू' कौन है, किसने कहा ?
उत्तर : “बधजोगू' (वध के योग्य) लक्ष्मण को कहा गया है। यह परशुराम ने कहा कि यह कटुवादी बालक वध के योग्य है।
(घ) रेखांकित पद का आशय स्पष्ट कीजिए |
उत्तर : रेखांकित पद “बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा | अब अग मरनिहार भा साँचा” का आशय है कि परशुराम कहते हैं कि मैंने इस बालक (लक्ष्मण) को देखकर बहुत बार छोड़ दिया, परंतु अब यह सचमुच मरने वाला हो गया है। अर्थात् अब मैं इसे नहीं छोड़ूंगा।
अथवा
पद्यांश :
डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,
सुमन झिंगूला अ तन छबि भारी दै |
पवन गर्द, केकी-कीर बतरावैं देव'
कोकिल हलाबै-हुलसावै कर तारी दे ||
पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन,
कंजकली नायिका लतान सिर सारी दै।
मदन महीप जू को बालक बसंत ताहि,
प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै |
(क) काव्यांश में कवि ने किस ऋतु का वर्णन किया है ?
उत्तर : काव्यांश में कवि ने वसंत ऋतु का वर्णन किया है।
(ख) काव्यांश में ऋतु को किस रूप में दिखाया है ?
उत्तर : काव्यांश में वसंत ऋतु को मदन महीप (कामदेव राजा) के बालक (पुत्र) के रूप में दिखाया गया है।
(ग) प्रातःकाल कौन किसको जगाता है ?
उत्तर : प्रातःकाल गुलाब का फूल वसंत को जगाता है। गुलाब चटकारी देकर (खिलखिलाकर) वसंत को जगाता है।
(घ) रेखांकित काव्य पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए |
उत्तर : रेखांकित पंक्ति “पूरित पराग सों उतारो करै राई नोन” का आशय है कि वसंत ऋतु में फूलों के पराग (रज) से भरी हुई पंखुड़ियाँ ऐसी लगती हैं मानो राई-नमक (मसाला) उतारा जा रहा हो। यह वसंत की सुंदरता का वर्णन है।
9. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
आज वह नहीं है | दिल्ली में बीमार रहे और पता नहीं चला | बाँहें खोलकर इस बार उन्होंने गले नहीं लगाया | जब देखा तब वे बाँहें दोनों हाथों की सूजी उँगलियों को उलझाए ताबूत में जिस्म पर पड़ी थी | जो शान्ति बरसती थी वह चेहरे पर थिर थी | तरलता जम गई थी | वह 8 अगस्त, 1982 की सुबह दस बजे का समय था | दिल्ली में कश्मीरी गेट के निकलसन कब्रगाह में उनका ताबूत एक छोटी-सी नीली गाड़ी में से उतारा गया | कुछ पादरी, वॉट जी का बेटा और उनके परिजन राजेश्वर सिंह उसे उतार रहे थे | फिर उसे उठाकर एक लंबी सँकरी, उदास पेड़ों की घनी वी वाली सड़क से कब्रगाह के आखिरी छोर तक ले जाया गया जहाँ धरती की गोद में सुलाने के लिए कब्र आवाक् मुँह खोले लेटी थी | ऊपर करील की घनी छाँह थी और चारों ओर सरल और तेज धूप के वृत्त |
(क) फ़ादर बुल्के ने लेखक को गले क्यों नहीं लगाया ?
उत्तर: फ़ादर बुल्के ने लेखक को गले नहीं लगाया क्योंकि वे मर चुके थे और उनका शव ताबूत में रखा हुआ था। उनकी बाँहें सूजी हुई उँगलियों के साथ ताबूत में पड़ी थीं, इसलिए वे गले लगाने में असमर्थ थे।
(ख) फादर के ताबूत को कहाँ उतारा गया ?
उत्तर: फादर के ताबूत को दिल्ली में कश्मीरी गेट के निकलसन कब्रगाह में एक छोटी-सी नीली गाड़ी से उतारा गया।
अथवा
‘शिक्षा’ बहुत व्यापक शब्द है | उसमें सीखने योग्य अनेक विषयों का समावेश हो सकता है | पढ़ना-लिखना भी उसी के अन्तर्गत है | इस देश की वर्तमान शिक्षा-प्रणाली अच्छी नहीं । इस कारण यदि कोई स्त्रियों को पढ़ाना अनर्थकारी समझे तो उसे उस प्रणाली का संशोधन करना या कराना चाहिए, खुद पढ़ने-लिखने को दोष न देना चाहिए | लड़कों ही की शिक्षा-प्रणाली कौन-सी बड़ी अच्छी है | प्रणाली बुरी होने के कारण क्या किसी ने यह राय दी है कि सारे स्कूल और कॉलिज बंद कर दिए जाएँ ? आप खुशी से लड़कियों और स्त्रियों की शिक्षा-प्रणाली का संशोधन कीजिए । उन्हें क्या पढ़ाना चाहिए, कितना पढ़ाना चाहिए, किस तरह की शिक्षा देना चाहिए, कहाँ देना चाहिए, विचार कीजिए |
(क) 'शिक्षा' शब्द की व्यापकता को समझाइए |
उत्तर: 'शिक्षा' शब्द बहुत व्यापक है। इसमें केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि सीखने योग्य अनेक विषयों का समावेश होता है। यह जीवन के हर पहलू से जुड़ी हुई है और मनुष्य के सर्वांगीण विकास का साधन है।
(ख) वर्तमान शिक्षा-प्रणाली में क्या संशोधन आवश्यक हैं ?
उत्तर: वर्तमान शिक्षा-प्रणाली में निम्नलिखित संशोधन आवश्यक हैं:
- शिक्षा-प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाना चाहिए।
- स्त्रियों और लड़कियों के लिए उपयुक्त शिक्षा का निर्धारण करना चाहिए कि उन्हें क्या, कितना और किस तरह पढ़ाया जाए।
- शिक्षा के उद्देश्यों और पाठ्यक्रम में सुधार करना आवश्यक है ताकि वह जीवनोपयोगी हो।
- स्कूल और कॉलेज बंद करने के बजाय प्रणाली में सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
0. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (प्रत्येक प्रश्न की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) “बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देने वालों पर हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है |” प्रस्तुत वाक्य किसने, क्यों कहा ? [2]
उत्तर: यह वाक्य ‘बालगोबिन भगत’ पाठ में लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी ने कहा है। उन्होंने यह इसलिए कहा क्योंकि बालगोबिन भगत जैसे देशभक्तों का बलिदान देखकर समाज उन पर हँसता है, जबकि स्वयं बिकने के अवसर ढूँढ़ता है।
(ख) “बालगोबिन भगत” पाठ में “ग्रामीण जीवन की सजीव झाँकी देखने को मिलती है।” आप कैसे कह सकते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। [2]
उत्तर: इस पाठ में गाँव के खेत-खलिहान, किसानों की दिनचर्या, सामूहिक गीत-संगीत और सादगीपूर्ण जीवन का चित्रण है। उदाहरण के लिए, बालगोबिन भगत का खेतों में काम करना और भजन गाना ग्रामीण जीवन की सजीव झाँकी प्रस्तुत करता है।
(ग) “लखनवी अंदाज़” पाठ “वास्तविकता से बेखबर एक बनावटी जीवन शैली पर आधारित है।” कैसे ? स्पष्ट कीजिए। [2]
उत्तर: इस पाठ में नवाब साहब दिखावटी ठाठ-बाठ और बनावटी शिष्टाचार का प्रदर्शन करते हैं। वे भूखे रहकर भी खीरा खाने का नाटक करते हैं, जो उनकी वास्तविकता से दूर बनावटी जीवनशैली को दर्शाता है।
(घ) “एक कहानी यह भी” पाठ के आधार पर बताइए कि स्वतंत्रता आन्दोलन का प्रभाव विद्यार्थियों पर कैसे पड़ा। [2]
उत्तर: स्वतंत्रता आन्दोलन का विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव पड़ा। वे पढ़ाई छोड़कर आन्दोलन में कूद पड़ते थे, जेल जाते थे, और देशभक्ति के गीत गाते थे। लेखिका मन्नू भंडारी ने भी इस भावना को अपने जीवन में अनुभव किया।
II. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) “प्राचीन काल में स्त्रियों के अध्ययन-अध्यापन की समुचित व्यवस्था थी।” उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। [2]
उत्तर: प्राचीन काल में स्त्रियाँ वेद-शास्त्रों का अध्ययन करती थीं और ऋषिकाएँ बनती थीं। उदाहरण के लिए, गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी स्त्रियों ने शास्त्रार्थ किए और ज्ञान का प्रसार किया। यह दर्शाता है कि स्त्री शिक्षा की उचित व्यवस्था थी।
(ख) मांगलिक विधि-विधानों में किस-किस वाद्य का प्रयोग करते हैं और क्यों ? जानकारी दीजिए। [2]
उत्तर: मांगलिक अवसरों पर शहनाई, ढोल, नगाड़ा, और घड़ियाल जैसे वाद्यों का प्रयोग किया जाता है। ये वाद्य शुभ माहौल बनाते हैं, उत्साह बढ़ाते हैं, और समारोह को आनंदमय बनाते हैं। शहनाई को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
खण्ड-घ
2. “जॉर्ज पंचम की नाक” कहानी “औपनिवेशक दौर की मानसिकता और विदेशी आकर्षण पर गहरी चोट है।” कैसे ? स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
यह कहानी औपनिवेशिक मानसिकता पर व्यंग्य करती है, जिसमें भारतीय अंग्रेजों की नकल करते थे और उनकी वस्तुओं को श्रेष्ठ मानते थे। जॉर्ज पंचम की नाक टूटने पर भी उसे बदलने के बजाय उसी नाक को बनाए रखने का प्रयास दर्शाता है कि विदेशी आकर्षण में लोग अपनी पहचान खो बैठते हैं। यह गुलामी की मानसिकता पर गहरी चोट है।
अथवा
“गैंगटॉक” शहर के प्राकृतिक सौन्दर्य को अपने शब्दों में लिखिए।
गैंगटॉक शहर हिमालय की गोद में बसा है, जहाँ चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियाँ, बर्फ से ढकी चोटियाँ और झरने हैं। यहाँ की शांत वादियाँ, रंग-बिरंगे फूल और ताजी हवा मन को मोह लेते हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य का यह अद्भुत नज़ारा पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।
3. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्रत्येक प्रश्न की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) “लेखक को प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति अधिक प्रेरित करती है”, कैसे ? स्पष्ट कीजिए।
लेखक के अनुसार, अनुभूति (भावनात्मक अनुभव) प्रत्यक्ष अनुभव से अधिक गहरी होती है क्योंकि यह मन और आत्मा को छूती है। प्रत्यक्ष अनुभव केवल बाहरी होता है, जबकि अनुभूति आंतरिक प्रेरणा देती है और लेखन को सजीव बनाती है।
(ख) “एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा” पाठ के आधार पर स्वतंत्रता आंदोलन के प्रभाव को समझाइए।
इस पाठ में स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव गाँव के लोगों पर दिखाया गया है। लोग अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त थे और आंदोलन ने उनमें जागरूकता और एकता पैदा की। वे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने को तैयार हो गए, जिससे समाज में बदलाव आया।
(ग) पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामाजिक जीवन एवं चरित्र को पाठ के आधार पर अपने शब्दों में लिखिए।
पहाड़ी लोग सरल, मेहनती और साहसी होते हैं। उनका सामाजिक जीवन प्रकृति से जुड़ा है, वे आपसी सहयोग और भाईचारे में विश्वास करते हैं। कठोर परिस्थितियों में रहने के कारण वे धैर्यवान और आत्मनिर्भर होते हैं, और अपनी संस्कृति को संजोए रखते हैं।
(घ) “माता का आँचल” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि दुःख या पीड़ा में माता ही अधिक सहायक होती है।
इस पाठ में माता का आँचल बच्चे के लिए सुरक्षा और सांत्वना का प्रतीक है। दुःख या पीड़ा में माता अपने स्नेह और आशीर्वाद से बच्चे को शांति देती है। वह बिना शर्त प्यार करती है और हर कठिनाई में साथ खड़ी रहती है, जिससे बच्चे को सहारा मिलता है।
4.
(क) चौराहा पार करते समय हमें किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
चौराहा पार करते समय हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- हरी बत्ती (ग्रीन सिग्नल) का इंतजार करें और लाल बत्ती पर न चलें।
- ज़ेबरा क्रॉसिंग का उपयोग करें।
- दाएँ-बाएँ देखकर ही सड़क पार करें।
- वाहनों की गति और दिशा पर ध्यान दें।
- जल्दबाजी न करें और शांति से पार करें।
(ख) सड़क पर दुर्घटना से बचाव के लिए वाहन चालक को क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए ?
सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए वाहन चालक को निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए:
- हमेशा सीट बेल्ट (कार) या हेलमेट (दोपहिया) पहनें।
- गति सीमा का पालन करें और तेज गति से न चलाएँ।
- शराब या नशे में वाहन न चलाएँ।
- मोबाइल फोन का उपयोग न करें।
- यातायात नियमों और सिग्नल का पालन करें।
- वाहन की नियमित जाँच कराएँ (ब्रेक, टायर, लाइट)।
७-०|-मरशावा (Sp. Supp.)