RBSE Class 10th 2019 Hindi-S-01-2019 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2019
Subject Hindi-S-01-2019
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2019 2019 solved Previous Year Question Papers

नामांक Roll No.

SLNo. : PTT EEL

No. of Questions — 30 S-01-Hindi

No. of Printed Pages — 7

माध्यमिक परीक्षा, 2019

SECONDARY EXAMINATION, 2019

हिंदी

समय : 3½ घंटे

पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।

S-01-Hindi 5001

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खण्ड - [

निम्नांकित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

आधुनिक काल में भी नारी एक बार फिर से अपनी पूरी क्षमता, शक्ति और साहस के साथ समाज में दिखाई देने लगी है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार से वह पूरी तरह आत्मविश्वास से भर गई। आप आज़ादी की लड़ाई का उदाहरण ही लीजिए। भीकाजी कामा, सरोजिनी नायडू, अरूणा आसफ अली, कैप्टन लक्ष्मी सहगल आदि बहुत सारे नाम आपके जेहन में आते जाएँगे। गाँधीजी के एक आह्वान पर न जाने कितनी महिलाएँ घर-बार छोड़कर देश की आजादी के लिए संघर्ष करने निकल पड़ी। चाहे वो गाँव की हों, छोटे कस्बे की हों, शहर की हों, या महानगर की हों, चाहे वे पढ़ी लिखी हों, चाहे गरीब हों या अमीर, सभी भारत की नारियाँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई में घर से बाहर निकल पड़ी थीं।

  1. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए। [1]

    उत्तर: गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक "आधुनिक नारी का आत्मविश्वास और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान" या "नारी शक्ति का पुनर्जागरण" हो सकता है।

  2. नारियाँ आत्मविश्वास से कैसे भर गईं? [1]

    उत्तर: शिक्षा के प्रचार-प्रसार से नारियाँ पूरी तरह आत्मविश्वास से भर गईं। शिक्षा ने उन्हें अपनी क्षमता, शक्ति और साहस को पहचानने का अवसर दिया, जिससे वे समाज में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं।

  3. आधुनिक नारी का आजादी में क्या योगदान रहा? [2]

    उत्तर: आधुनिक नारी ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भीकाजी कामा, सरोजिनी नायडू, अरूणा आसफ अली, कैप्टन लक्ष्मी सहगल जैसी महिलाओं ने देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया। गाँधीजी के आह्वान पर असंख्य महिलाएँ घर-बार छोड़कर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आज़ादी की लड़ाई में शामिल हुईं।

निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

भई, सूरज
ज़रा इस आदमी को जगाओ
भई, पवन
ज़रा इस आदमी को हिलाओ,
यह आदमी जो सोया पड़ा है,
जो सच से बेख़बर
सपनों में खोया पड़ा है।
वक़्त पर जगाओ,
नहीं तो जब बेवक़्त जागेगा यह
तो जो आगे निकल गए हैं
उन्हें पाने घबरा कर भागेगा यह।
घबरा के भागना अलग है
क्षिप्र गति अलग है
क्षिप्र तो वह है जो सही क्षण में सजग है
सूरज, इसे जगाओ,
पवन, इसे हिलाओ।

  1. कवि में कैसे आदमी को जगाने की बात कही गई है? [1]

    उत्तर: कवि उस आदमी को जगाने की बात कह रहा है जो सच से बेखबर है और सपनों में खोया हुआ है, अर्थात जो वास्तविकता से अनजान है और निष्क्रिय पड़ा है।

  2. आदमी को वक़्त पर क्यों जगाना आवश्यक है? [1]

    उत्तर: आदमी को वक़्त पर जगाना आवश्यक है क्योंकि यदि वह देर से जागेगा तो जो लोग आगे निकल गए हैं उन्हें पाने के लिए वह घबराकर भागेगा, जो सही नहीं है। समय पर जागकर वह सही दिशा में काम कर सकता है।

  3. घबरा के भागने व क्षिप्र गति में क्या अंतर है? [2]

    उत्तर: घबराकर भागना और क्षिप्र गति में अंतर यह है कि घबराकर भागना अव्यवस्थित और बिना सोचे-समझे किया गया कार्य है, जबकि क्षिप्र गति वह है जो सही समय पर सजग रहकर की जाती है। क्षिप्र गति में व्यक्ति समय का सदुपयोग करता है और सही निर्णय लेता है, जबकि घबराकर भागने में व्यक्ति गलतियाँ कर सकता है।

S_0]—Hindi 500I

खण्ड - 2

7) दिए गए बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए: [8]

क) विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व

  1. प्रस्तावना – अनुशासन का अर्थ
  2. अनुशासन से लाभ, अनुशासन हीनता से नुकसान
  3. अनुशासन में रहना कैसे सीखा जा सकता है?
  4. उपसंहार

ख) आतंकवाद : एक विश्वव्यापी समस्या

  1. प्रस्तावना – आतंकवाद की परिभाषा
  2. आतंकवाद के उद्देश्य
  3. आतंकवाद को नियंत्रित करने के उपाय
  4. उपसंहार

ग) यातायात सुरक्षा

  1. प्रस्तावना – यातायात सुरक्षा की महत्ता
  2. यातायात के सामान्य नियम
  3. यातायात नियमों के पालन से लाभ
  4. उपसंहार

घ) योग – व्यायाम से जीवन विकास

  1. प्रस्तावना – योग-व्यायाम का परिचय
  2. योग-व्यायाम के प्रकार
  3. योग-व्यायाम से होने वाले शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक लाभ
  4. उपसंहार

8) स्वयं को तहसीलदार (भीण्डर) मानते हुए अपनी तहसील में जलसंकट के कारण जल व्यवस्था हेतु अतिरिक्त बजट की मांग के लिए अपने जिलाधीश, उदयपुर को पत्र लिखिए। [4]

सेवा में,
श्रीमान जिलाधीश महोदय,
उदयपुर (राजस्थान)

विषय: तहसील भीण्डर में जलसंकट के कारण अतिरिक्त बजट की मांग हेतु प्रार्थना पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं तहसीलदार भीण्डर, आपके ध्यान में अपनी तहसील के गंभीर जलसंकट की स्थिति लाना चाहता हूँ। पिछले कई महीनों से वर्षा न होने के कारण तहसील के अधिकांश गाँवों में पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है। कुएँ और तालाब सूख गए हैं, और भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है।

इस समस्या के समाधान के लिए निम्नलिखित कार्य हेतु अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है:

  1. टैंकरों के माध्यम से दूरदराज के गाँवों में पानी की आपूर्ति हेतु ₹5,00,000
  2. नलकूपों की मरम्मत एवं नए नलकूपों की खुदाई हेतु ₹3,00,000
  3. जल संरक्षण हेतु तालाबों की सफाई एवं गहरीकरण हेतु ₹2,00,000

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि तहसील भीण्डर में जलसंकट से निपटने हेतु कुल ₹10,00,000 का अतिरिक्त बजट स्वीकृत करने की कृपा करें, ताकि आम जनता को राहत प्रदान की जा सके।

धन्यवाद।

भवदीय,
तहसीलदार, भीण्डर
दिनांक: 15 फरवरी, 2019

अथवा

सेवा में,
प्रबंधक महोदय,
[फार्मा कंपनी का नाम एवं पता]

विषय: दवाइयों की आपूर्ति हेतु ऑर्डर पत्र।

महोदय,

मैं हेमांग, चौमु निवासी दवा विक्रेता, आपकी कंपनी से निम्नलिखित दवाइयाँ मँगवाना चाहता हूँ। कृपया नीचे दी गई सूची के अनुसार दवाइयाँ शीघ्र उपलब्ध कराने का कष्ट करें।

  1. पैरासिटामोल 500mg – 100 पत्तियाँ
  2. एमोक्सिसिलिन 250mg – 50 पत्तियाँ
  3. ओमेप्राज़ोल 20mg – 30 पत्तियाँ
  4. लोराटाडिन 10mg – 40 पत्तियाँ
  5. विटामिन B कॉम्प्लेक्स – 25 पत्तियाँ

कृपया दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें और उचित बिल के साथ भेजें। भुगतान आपूर्ति प्राप्त होने पर तुरंत किया जाएगा।

धन्यवाद।

भवदीय,
हेमांग
दवा विक्रेता, चौमु
दिनांक: 15 फरवरी, 2019


खण्ड - 3

9) क्रिया किसे कहते हैं? कर्म के आधार पर क्रिया के भेद लिखिए। [2]

क्रिया: वह शब्द जिससे किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, क्रिया कहलाती है। जैसे – पढ़ना, खाना, दौड़ना आदि।

कर्म के आधार पर क्रिया के भेद: कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं:

  1. सकर्मक क्रिया: जिस क्रिया का कर्म वाक्य में विद्यमान हो, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे – राम ने फल खाया। (यहाँ 'फल' कर्म है।)
  2. अकर्मक क्रिया: जिस क्रिया का कर्म वाक्य में न हो, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे – बच्चा दौड़ता है। (यहाँ कोई कर्म नहीं है।)

10) 'पत्र मोहन के द्वारा लिखा गया'। वाक्य में निहित कारक, काल और वाच्य लिखिए। [3]

वाक्य: पत्र मोहन के द्वारा लिखा गया।

  • कारक: 'मोहन के द्वारा' – करण कारक (जिसके द्वारा कार्य होता है)
  • काल: भूतकाल (लिखा गया – कार्य पूर्ण हो चुका है)
  • वाच्य: कर्मवाच्य (कर्म 'पत्र' प्रधान है, कर्ता 'मोहन' गौण है)

11) “गजानन' शब्द में कौनसा समास है? निहित समास की विशेषताएँ बताएँ। [1+2]

समास: 'गजानन' शब्द में बहुव्रीहि समास है।

बहुव्रीहि समास की विशेषताएँ:

  1. इस समास में दोनों पदों का अर्थ प्रधान नहीं होता, बल्कि किसी तीसरे अर्थ की प्रधानता होती है।
  2. समस्त पद किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है।
  3. जैसे – गज (हाथी) + आनन (मुख) = गजानन (जिसका मुख हाथी जैसा हो – भगवान गणेश)
  4. यहाँ 'गज' और 'आनन' दोनों पद अपने मूल अर्थ में न होकर भगवान गणेश का बोध कराते हैं।

12) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: [1+1=2]

क) मेरे को अभी जाना है।

शुद्ध रूप: मुझे अभी जाना है।

स्पष्टीकरण: 'मेरे को' का शुद्ध रूप 'मुझे' होता है।

ख) मेरे पास केवल मात्र पचास रूपये हैं।

शुद्ध रूप: मेरे पास केवल पचास रुपये हैं।

स्पष्टीकरण: 'केवल' और 'मात्र' दोनों एक ही अर्थ के शब्द हैं, अतः एक का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही 'रूपये' का शुद्ध रूप 'रुपये' है।

13) निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए। [1+1=2]

क) अगर-मगर करना

अर्थ: बहाने बनाना या टाल-मटोल करना।

वाक्य प्रयोग: जब मैंने उससे पैसे माँगे तो वह अगर-मगर करने लगा।

ख) आपे से बाहर होना

अर्थ: क्रोध में आकर अपने पर नियंत्रण खो देना या बहुत अधिक गुस्सा होना।

वाक्य प्रयोग: बच्चे की शरारत देखकर पिता आपे से बाहर हो गए।

14) 'आधा नगरी चौपट राजा' लोकोक्ति का अर्थ लिखिए। [1]

अर्थ: जहाँ शासक या प्रभारी व्यक्ति अयोग्य या लापरवाह हो, वहाँ व्यवस्था चौपट हो जाती है। इसका तात्पर्य है कि यदि नेतृत्व कमजोर है तो पूरी व्यवस्था बिगड़ जाती है।

खण्ड - 4

15) निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [6]

बूझत स्याम कौन तू गोरी।
कहाँ रहति काकी है बेटी, देखी नहीं कबहूँ ब्रज-खोरी।।
काहे को हम ब्रज-तन आववति, खेलत रहतिं आपनी पोरी।
सुनत श्रवननि नंद ढोटा, करत फिरत माखन दि चोरी।।
तुम्हरों कहा हम लैहें, खेलन चलो संग मिलि जोरी।
सूरदास प्रभु रसिक सिरोमनि, बातनि भुरई राधिका भोरी।।

अथवा

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भूकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आयी फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन सत्तावन में,
वह तलवार पुरानी थी,
बुदेले हर बालों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी-
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।

प्रथम पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूरदास द्वारा रचित 'सूरसागर' से लिया गया है। इसमें श्रीकृष्ण और राधा के बीच प्रेमपूर्ण छल-बल का वर्णन है।

प्रसंग: श्रीकृष्ण राधा से उनका परिचय पूछते हुए उन्हें ब्रज की गोरी कहते हैं और उनके साथ खेलने का प्रस्ताव रखते हैं।

व्याख्या: श्रीकृष्ण राधा से पूछते हैं कि हे गोरी! तू कौन है? तू कहाँ रहती है और किसकी बेटी है? मैंने तुझे ब्रज में कभी नहीं देखा। तू ब्रज में क्यों आई है? तू अपनी सखियों के साथ खेलती रहती है। मैंने सुना है कि नंद का बेटा माखन चुराता फिरता है। तू मेरी बात मान ले, चल हमारे साथ खेलने। सूरदास कहते हैं कि प्रभु रसिकों के शिरोमणि हैं, उनकी बातों में राधिका मोहित हो गईं।

द्वितीय पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित कविता 'झाँसी की रानी' से लिया गया है। इसमें 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई के वीरतापूर्ण योगदान का वर्णन है।

प्रसंग: कवयित्री बताती हैं कि कैसे अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध पूरा देश जाग उठा और रानी लक्ष्मीबाई ने वीरता से युद्ध किया।

व्याख्या: अंग्रेजों के अत्याचारों से राजसिंहासन हिल गए और राजवंशों ने भौंहें तान लीं। बूढ़े भारत में भी नई जवानी आ गई। सबने गुमी हुई आजादी की कीमत पहचान ली और अंग्रेजों को दूर करने का मन बना लिया। सन् 1857 में वह पुरानी तलवार फिर चमक उठी। बुंदेलों के मुँह से हमने यह कहानी सुनी कि झाँसी वाली रानी ने बहुत वीरता से युद्ध किया।

6. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश स्वतंत्रता सेनानियों की त्याग और बलिदान की भावना को दर्शाता है। यह बताता है कि सेनानी अपने सुखों की चिंता किए बिना आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष करते हैं।

व्याख्या: लेखक कहता है कि स्वतंत्रता सेनानी आम का बाग लगाता है, भले ही उसे उसका फल न मिले। वह अपने प्राणों की बाजी लगाकर, अपने खून-पसीने से उस बाग को सींचता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उसका आनंद ले सकें। यही भावना स्वतंत्रता संग्राम में भी है। जैसे भगीरथ गंगा को अपने लिए नहीं लाए थे, बल्कि युगों-युगों तक लोग उससे अपनी प्यास बुझाते रहेंगे, वैसे ही स्वतंत्रता सेनानी भी अपने बलिदान से आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता का अमृत प्रदान करते हैं।

अथवा

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश ईर्ष्या से बचने के उपायों पर प्रकाश डालता है।

व्याख्या: लेखक के अनुसार, ईर्ष्या से बचने का सबसे अच्छा उपाय मानसिक अनुशासन है। ईर्ष्यालु व्यक्ति को फालतू बातों के बारे में सोचने की आदत छोड़ देनी चाहिए। उसे यह पता लगाना चाहिए कि जिस अभाव के कारण वह ईर्ष्यालु बना है, उसकी पूर्ति का रचनात्मक तरीका क्या है। जब वह इस जिज्ञासा को अपने भीतर जगाएगा, तब वह ईर्ष्या करना कम कर देगा।

7. लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर टिप्पणी

लक्ष्मण और परशुराम के संवाद 'लक्ष्मण-परशुराम संवाद' पाठ का मुख्य आकर्षण हैं। ये संवाद दो विपरीत स्वभावों के व्यक्तियों के बीच हुए हैं। परशुराम क्रोधी और तेजस्वी हैं, जबकि लक्ष्मण विनम्र और चतुर हैं। परशुराम शिव के धनुष के टूटने पर क्रोधित होते हैं, लेकिन लक्ष्मण अपनी बुद्धि और विनय से उन्हें शांत करते हैं। लक्ष्मण परशुराम की महिमा का गान करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि धनुष तो टूटा ही था। ये संवाद भक्ति, वीरता और बुद्धि का अद्भुत संगम हैं। इनमें परशुराम के क्रोध और लक्ष्मण की चतुराई का सुंदर चित्रण है।

अथवा

'आत्मकथा' कविता का सार: 'आत्मकथा' कविता में कवि ने अपने जीवन के अनुभवों और संघर्षों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया है। कवि कहता है कि उसने जीवन में बहुत कुछ देखा और सहा है, लेकिन उसकी आत्मकथा लिखने का कोई अर्थ नहीं है। वह अपने दुखों और सुखों को बाँटने के बजाय चुप रहना पसंद करता है। कविता में जीवन की कटु सच्चाइयों और मानवीय संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण है।

8. लोक संत पीपा के जीवन एवं शिक्षाएँ

लोक संत पीपा राजस्थान के प्रसिद्ध संत थे। वे मूलतः एक राजा थे, लेकिन संत रामानंद के शिष्य बनकर उन्होंने राजपाट त्याग दिया। उन्होंने भक्ति और समानता का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएँ सरल और व्यावहारिक थीं:

  • ईश्वर सबमें समान रूप से विद्यमान है, इसलिए किसी से भेदभाव न करें।
  • सच्ची भक्ति बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धता में है।
  • मनुष्य को अहंकार त्यागकर विनम्रता से रहना चाहिए।
  • सभी प्राणियों से प्रेम करना ही सच्चा धर्म है।

पीपा जी ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि सच्चा संत वही है जो समाज में समानता और प्रेम का प्रचार करे।

अथवा

स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन करते हुए लेखक कहता है कि शिक्षा-प्रणाली में कमियाँ होने का मतलब यह नहीं कि सारे स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए जाएँ। स्त्री शिक्षा के विरोधी कहते हैं कि शिक्षा से स्त्रियाँ बिगड़ जाती हैं, लेकिन यह गलत है। शिक्षा स्त्रियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है। यदि शिक्षा-प्रणाली में कमियाँ हैं, तो उन्हें सुधारा जाना चाहिए, न कि शिक्षा को ही बंद कर देना चाहिए। स्त्री शिक्षा समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है।

9. सोरठे का संदेश

इस सोरठे में कवि कहता है कि कोयल अपनी मीठी वाणी से सबका मन हर लेती है, जबकि कौआ अपनी कर्कश आवाज से अप्रिय लगता है। कवि का संदेश है कि मनुष्य को अपनी वाणी मीठी रखनी चाहिए, क्योंकि मीठी वाणी से ही सबका मन जीता जा सकता है। कड़वी बातें सुनने वाले को अच्छी नहीं लगतीं।

10. 'मातृ-वंदना' कविता में समर्पण

'मातृ-वंदना' कविता में कवि माँ के चरणों में अपना तन, मन, धन और सब कुछ समर्पित करना चाहता है। वह माँ को अपनी हर सफलता और हर खुशी अर्पित करना चाहता है, क्योंकि माँ ही उसके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।

11. 'कर चले हम फिदा' कविता की प्रासंगिकता

'कर चले हम फिदा' कविता वर्तमान में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता संग्राम के समय थी। यह कविता देशभक्ति, बलिदान और साहस की भावना को जागृत करती है। आज भी जब देश पर कोई संकट आता है, तो यह कविता हमें अपने कर्तव्यों का स्मरण कराती है और देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देती है। यह कविता हर उस व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है जो देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करना चाहता है।

प्रश्न 22

लेखक ने देवालय बनाने का विचार क्यों त्याग दिया?

लेखक ने देवालय बनाने का विचार इसलिए त्याग दिया क्योंकि उन्होंने महसूस किया कि ईश्वर मंदिरों में नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव सेवा में निवास करते हैं। वे मानते थे कि पत्थर का मंदिर बनाने की अपेक्षा मानवता की सेवा करना अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 23

"भारत प्रकृति का खूबसूरत उपहार है।" इस कथन को 'आख़िरी चट्टान' पाठ के आधार पर समझाइए।

'आख़िरी चट्टान' पाठ में लेखक ने भारत को प्रकृति का खूबसूरत उपहार बताया है क्योंकि भारत में प्राकृतिक सौंदर्य, विविधता और समृद्धि अद्वितीय है। यहाँ हिमालय जैसे पर्वत, गंगा जैसी नदियाँ, घने जंगल और उपजाऊ मैदान हैं। यह सब प्रकृति की अनमोल देन है, जो भारत को विशेष बनाती है।

प्रश्न 24

संत दादू ने अपने शिष्यों को क्या शिक्षा दी?

संत दादू ने अपने शिष्यों को प्रेम, भाईचारा और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि ईश्वर एक है और सभी मनुष्य समान हैं, इसलिए किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 25

दादू पंथ के 'पंचतीर्थ' का नाम लिखिए।

दादू पंथ के 'पंचतीर्थ' में निम्नलिखित पाँच स्थान शामिल हैं: नरैना, आमेर, सांभर, फतेहपुर और कालपी।

प्रश्न 26

संत पीपा का मन राज काज से क्यों हट गया?

संत पीपा का मन राज काज से इसलिए हट गया क्योंकि उन्हें सांसारिक ऐश्वर्य और राजसी जीवन में आध्यात्मिक संतोष नहीं मिला। वे ईश्वर की भक्ति और सच्चे ज्ञान की खोज में लग गए।

प्रश्न 27

श्याम ने झूला झूलने के लिए किसे आमंत्रित किया?

श्याम ने झूला झूलने के लिए राधा को आमंत्रित किया।

प्रश्न 28

खेतों की मिट्टी पथराई हुई क्यों थी?

खेतों की मिट्टी पथराई हुई इसलिए थी क्योंकि लंबे समय से वर्षा नहीं हुई थी और सूखे के कारण मिट्टी कठोर हो गई थी।

प्रश्न 29

निम्न रचनाकारों का संक्षिप्त परिचय लिखिए:

i) महाकवि निराला

महाकवि निराला (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि थे। उनका जन्म 1899 ई. में बंगाल के महिषादल में हुआ। वे छायावादी युग के स्तंभ माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'परिमल', 'गीतिका', 'अनामिका' आदि शामिल हैं। उनकी कविता में प्रकृति प्रेम, देशभक्ति और सामाजिक चेतना के भाव मिलते हैं।

ii) देव

देव (देवदत्त शर्मा) हिंदी साहित्य के रीतिकालीन कवि थे। उनका जन्म 1673 ई. में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में हुआ। वे श्रृंगार रस के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'देवसतसई', 'भावविलास', 'सुजानसागर' आदि शामिल हैं। उनकी रचनाओं में नायिका भेद और श्रृंगार का सुंदर वर्णन मिलता है।

प्रश्न 30

निम्नांकित यातायात संकेतों का क्या अर्थ है?

प्रश्न में यातायात संकेतों के चित्र नहीं दिए गए हैं। कृपया संकेतों के चित्र प्रदान करें ताकि उनका अर्थ बताया जा सके। सामान्यतः यातायात संकेत सड़क सुरक्षा के नियमों को दर्शाते हैं, जैसे स्टॉप, टर्न, स्पीड लिमिट आदि।