RBSE Class 10th 2019 Micro Irrigation Agriculture-V-110-2019 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2019
Subject Micro Irrigation Agriculture-V-110-2019
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 10th 2019 Micro Irrigation Agriculture-V-110-2019

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Rajasthan Board Class 10th Micro Irrigation Agriculture-V-110-2019 2019 solved Previous Year Question Papers

व्यावसायिक शिक्षा (कक्षा – X) परीक्षा, 2019

लेवल – द्वितीय वर्ष

विषय – माइक्रो इरिगेशन टेक्नीशियन (एग्रीकल्चर)

समय : 2 घण्टे 5 मिनट   |   पूर्णांक : 30


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
  4. प्रश्न संख्या 1 से 10 तक (बहुविकल्पीय प्रश्नों) के उत्तर तालिका बनाकर उत्तर-पुस्तिका में लिखें।
  5. प्रश्न संख्या 11 से 30 तक एक पंक्ति में उत्तर लिखें।
  6. प्रश्न संख्या 31 से 36 तक दो से चार पंक्तियों में उत्तर लिखें।
  7. प्रश्न संख्या 37 एवं 38 के उत्तर दो पृष्ठों तक लिखें।

नामांक : ____________________   |   Roll No. : ____________________

No. of Questions : 38   |   No. of Printed Pages : 7

खण्ड - अ

प्रश्न संख्या 1 से 10 तक के सही उत्तरों को उत्तर पुस्तिका में लिखिए। [1×10=10]

  1. स्क्रीन फिल्टर आमतौर पर आकार के बने होते हैं-

    • (अ) चौकोर
    • (ब) बेलनाकार
    • (स) आयताकार
    • (द) त्रिभुजाकार

    सही उत्तर: (ब) बेलनाकार

    स्क्रीन फिल्टर आमतौर पर बेलनाकार आकार के बने होते हैं, जो पानी में मौजूद अशुद्धियों को छानने में प्रभावी होते हैं।

  2. फर्टिगेशन में उपयोगी है-

    • (अ) अघुलनशील उर्वरक
    • (ब) जैव उर्वरक
    • (स) घुलनशील उर्वरक
    • (द) वर्मीकम्पोस्ट

    सही उत्तर: (स) घुलनशील उर्वरक

    फर्टिगेशन में घुलनशील उर्वरकों का उपयोग किया जाता है क्योंकि ये पानी में आसानी से घुल जाते हैं और सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पौधों तक पहुँचाए जा सकते हैं।

  3. पी.वी.सी. पाइपों में छेद बनाने में काम आता है-

    • (अ) स्क्रू ड्राइवर
    • (ब) ड्रिल मशीन
    • (स) पाइप रिंच
    • (द) प्लायर

    सही उत्तर: (ब) ड्रिल मशीन

    पी.वी.सी. पाइपों में छेद बनाने के लिए ड्रिल मशीन का उपयोग किया जाता है, जो सटीक और समान छेद बनाने में सहायक होती है।

  4. उर्वरक घोल के स्रोत में पुनः प्रवेश को रोकने के लिए उपयोग किया जाता है-

    • (अ) वॉल्व
    • (ब) डिस्क फिल्टर
    • (स) नॉन रिटर्न वॉल्व
    • (द) बाईपास वॉल्व

    सही उत्तर: (स) नॉन रिटर्न वॉल्व

    नॉन रिटर्न वॉल्व उर्वरक घोल को स्रोत में वापस जाने से रोकता है, जिससे संदूषण और दबाव की समस्या नहीं होती।

5) सामान्यतौर पर एमिटर द्वारा उपयोग की एकरूपता के लिए पाइप के अंत में दबाव पर ड्रिपर्स को संचालित किया जाता है-

  • (अ) 2.0 किग्रा/सेमी²
  • (ब) 2.5 किग्रा/सेमी²
  • (स) 3.0 किग्रा/सेमी²
  • (द) 4.0 किग्रा/सेमी²

व्याख्या: ड्रिप सिंचाई में एकरूपता बनाए रखने के लिए पाइप के अंत में दबाव सामान्यतः 3.0 किग्रा/सेमी² रखा जाता है, जिससे सभी एमिटर समान रूप से जल वितरित कर सकें।

6) ड्रिप सिंचाई प्रणाली में उर्वरीकरण (फर्टिगेशन) हेतु नाइट्रोजन का सबसे पसंदीदा उर्वरक है-

  • (अ) यूरिया
  • (ब) अमोनियम नाइट्रेट
  • (स) कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट
  • (द) सोडियम नाइट्रेट

व्याख्या: यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक (46%) होती है, यह जल में आसानी से घुल जाता है और ड्रिप सिंचाई में फर्टिगेशन के लिए सबसे उपयुक्त एवं किफायती उर्वरक है।

7) पी.वी.सी. का पूरा नाम है-

  • (अ) पम्प विनाइल सेल्स
  • (ब) पॉली वॉइस क्लोराइड
  • (स) पॉली विनाइल क्लोराइड
  • (द) पाइप विनाइल एंज

व्याख्या: PVC का पूरा नाम पॉली विनाइल क्लोराइड (Polyvinyl Chloride) है, जो सिंचाई पाइपों में व्यापक रूप से उपयोग होने वाला प्लास्टिक पदार्थ है।

8) दो पाइपों को जल्दी एवं आसानी से आपस में जोड़ने या अलग करने की डिवाइस है-

  • (अ) युम्मित पाइप
  • (ब) कप्लर
  • (स) वाल्व
  • (द) नट

व्याख्या: कप्लर (Coupler) एक यांत्रिक उपकरण है जो दो पाइपों को बिना किसी विशेष उपकरण के जल्दी और आसानी से जोड़ने या अलग करने में सहायक होता है।

9) फव्वारा सिंचाई का चयन भूमि के लिए उपयुक्त है -

  • (अ) बहुत अधिक उथलि भूमि
  • (ब) भूमि का ढाल अधिक होने पर
  • (स) मृदा बहुत रेतीली होने पर
  • (द) उपर्युक्त सभी

व्याख्या: फव्वारा सिंचाई (स्प्रिंकलर सिंचाई) उथली, ढाल वाली और रेतीली मृदा के लिए उपयुक्त होती है, क्योंकि यह जल का समान वितरण करती है और अपवाह को कम करती है।

0) मिनी स्प्रिंकलर में जल का प्रवाह होता है -

  • (अ) 200 से 800 लीटर प्रति घंटा
  • (ब) 50 से 150 लीटर प्रति घंटा
  • (स) 50 से 100 लीटर प्रति घंटा
  • (द) 20 से 50 लीटर प्रति घंटा

व्याख्या: मिनी स्प्रिंकलर में जल का प्रवाह सामान्यतः 20 से 50 लीटर प्रति घंटा होता है, जो छोटे क्षेत्रों में सूक्ष्म सिंचाई के लिए उपयुक्त है।


खण्ड - 4

प्रश्न संख्या 11 से 30 तक के प्रश्नों के अपेक्षित उत्तर/रिक्त स्थान की पूर्ति कर उत्तर, उत्तरपुस्तिका में लिखिए।

  1. पम्प एक विद्युत उपकरण है जिससे पानी को एक स्तर से दूसरे स्तर तक ले जाया जाता है।

    उत्तर: दूसरे स्तर
  2. हा के रिकार्ड दिखाएँगे कि फसल के मौसम में कब और कितनी बार सिंचाई की आवश्यकता होती है।

    उत्तर: सिंचाई
  3. प्लायर एक हाथ उपकरण है जो वस्तुओं को दबाकर पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

    उत्तर: दबाकर
  4. ड्रिपर /एमिटर्स आमतौर पर प्लास्टिक सामग्री से निर्मित होते हैं।

    उत्तर: प्लास्टिक
  5. स्क्रीन फिल्टर के रखरखाव के लिए निर्धारित दैनिक अन्तराल पर सफाई करना आवश्यक है।

    उत्तर: सफाई
  6. एमिटर को जाम होने से बचाने के लिए क्लोरीन से रासायनिक उपचार किया जाता है।

    उत्तर: क्लोरीन

रिक्त स्थान भरिए

  1. स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली में खेतों के ऊपर फुहार डालकर जल वितरित किया जाता है।
  2. परम्परागत फव्वारों की तरह स्प्रिंकलर प्रणाली भी स्थायी, अर्द्ध स्थायी होती है।
  3. स्क्रीन फिल्टर आमतौर पर गैर संक्षारक धातु या प्लास्टिक सामग्री से बने होते हैं।
  4. ड्रिप सिंचाई प्रणाली में रिड्यूसर का उपयोग उपमुख्य पाइप के साथ मुख्य पाइप को जोड़ने के लिए किया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. पाइप के जोड़ों को जोड़ने के लिए किस घोल का प्रयोग किया जाता है?

    उत्तर: पाइप के जोड़ों को जोड़ने के लिए PVC सीमेंट (सॉल्वेंट सीमेंट) का प्रयोग किया जाता है। यह एक विशेष प्रकार का चिपकाने वाला घोल है जो पाइप और फिटिंग को रासायनिक रूप से जोड़ता है।

  2. पाइप को कसने या निकालने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?

    उत्तर: पाइप को कसने या निकालने के लिए पाइप रिंच (Pipe Wrench) या स्टिल्सन रिंच का उपयोग किया जाता है। यह उपकरण पाइप को मजबूती से पकड़कर घुमाने में सहायता करता है।

  3. हॉट प्लेट उपकरण का एक उपयोग लिखिए।

    उत्तर: हॉट प्लेट उपकरण का उपयोग पॉलीथीन पाइपों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इसे गर्म करके पाइप के सिरों को पिघलाकर जोड़ा जाता है, जिससे एक मजबूत और रिसाव रहित जोड़ बनता है।

  4. ड्रिप सिंचाई में पाइप के अन्त में लगे दबाव सिरे को किस विधि से समायोजित किया जा सकता है?

    उत्तर: ड्रिप सिंचाई में पाइप के अन्त में लगे दबाव सिरे को दबाव नियामक (Pressure Regulator) या फ्लश वाल्व की सहायता से समायोजित किया जा सकता है। इससे पाइप में उचित दबाव बना रहता है।

  5. सिंचाई प्रक्रिया जिसमें जल के प्रवाह की दिशा को उलटकर गंदगी को साफ किया जाता है, उसे क्या कहते हैं?

    उत्तर: इस प्रक्रिया को बैक फ्लशिंग (Back Flushing) कहते हैं। इसमें पानी के प्रवाह की दिशा को उलटकर फिल्टर या पाइप में जमी गंदगी को बाहर निकाला जाता है।

  6. स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली में पाइप नेटवर्क कितने प्रकार का होता है?

    उत्तर: स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली में पाइप नेटवर्क तीन प्रकार का होता है:

    • स्थायी (Permanent)
    • अर्द्ध स्थायी (Semi-permanent)
    • अस्थायी (Temporary/Portable)
  7. एक गोल सतह के साथ नरम लोहे के पाइप और फिटिंग को बदलने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?

    उत्तर: इसके लिए पाइप कटर (Pipe Cutter) या हैक्सॉ (Hacksaw) का उपयोग किया जाता है। पाइप कटर गोल सतह पर समान रूप से काटने में सहायक होता है।

28) ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पाइप नेटवर्क की स्थापना हेतु ट्रेंच की गहराई कितनी होती है?

ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पाइप नेटवर्क की स्थापना के लिए ट्रेंच की गहराई सामान्यतः 30 से 45 सेमी (लगभग 12 से 18 इंच) होती है। यह गहराई पाइपों को कृषि कार्यों और मौसम से सुरक्षा प्रदान करती है।

29) ड्रिप सिंचाई प्रणाली में अम्लीय उपचार किस प्रयोजन हेतु किया जाता है?

ड्रिप सिंचाई प्रणाली में अम्लीय उपचार मुख्यतः ड्रिपर्स और पाइपों में जमा कैल्शियम कार्बोनेट (चूना) और अन्य खनिज जमाव को हटाने के लिए किया जाता है। यह उपचार प्रणाली में रुकावट को दूर करता है और जल प्रवाह को सुचारू बनाए रखता है।

30) रेनगन फव्वारे आमतौर पर किसके बने होते हैं?

रेनगन फव्वारे आमतौर पर पीतल (ब्रास) या उच्च गुणवत्ता वाले प्लास्टिक से बने होते हैं। ये सामग्री जंग प्रतिरोधी और टिकाऊ होती है, जो लंबे समय तक उपयोग के लिए उपयुक्त है।

31) वेंचुरी इंजेक्टर की कार्य विधि लिखिए।

वेंचुरी इंजेक्टर बर्नौली के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब पानी इंजेक्टर के संकीर्ण भाग (थ्रोट) से गुजरता है, तो उसका वेग बढ़ जाता है और दबाव कम हो जाता है। इस कम दबाव के कारण उर्वरक या रसायन का घोल सक्शन पाइप के माध्यम से खिंचकर पानी में मिल जाता है। इस प्रकार, यह सिंचाई जल में उर्वरकों को समान रूप से मिलाने का कार्य करता है।

32) स्प्रिंकलर हेड के रखरखाव हेतु तीन सावधानियाँ लिखिए।

  1. नियमित सफाई: स्प्रिंकलर हेड को नियमित रूप से साफ करें ताकि गंदगी या मलबा नोजल को बंद न करे।
  2. क्षति की जाँच: स्प्रिंकलर हेड में किसी भी प्रकार की दरार या टूट-फूट की जाँच करें और आवश्यकतानुसार बदलें।
  3. उचित संरेखण: सुनिश्चित करें कि स्प्रिंकलर हेड सही ऊंचाई और कोण पर लगा हो ताकि पानी का छिड़काव समान रूप से हो सके।

33) आपके फार्म पर सेंट्रीफ्यूगल पम्प से पर्याप्त दबाव से पानी नहीं आ रहा है, इसके तीन कारण लिखिए।

  1. पम्प में एयर लॉक (वायु अवरोध): पम्प के सक्शन पाइप में हवा भर जाने से पानी का प्रवाह रुक जाता है, जिससे दबाव कम हो जाता है।
  2. इम्पेलर का घिस जाना: लंबे समय तक उपयोग से इम्पेलर घिस सकता है, जिससे पानी को दबाव देने की क्षमता कम हो जाती है।
  3. सक्शन पाइप में रिसाव: सक्शन पाइप में छेद या ढीले जोड़ों के कारण हवा अंदर आ जाती है, जिससे पम्प का प्रदर्शन प्रभावित होता है।

34) ड्रिप सिंचाई प्रणाली में दबाव व प्रवाह में अन्तर की जाँच के तीन बिन्दु लिखिए।

  1. मुख्य लाइन के अंत में: मुख्य पाइप लाइन के अंतिम छोर पर दबाव और प्रवाह की जाँच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे सिस्टम में समान दबाव बना रहे।
  2. उप-मुख्य लाइनों पर: प्रत्येक उप-मुख्य लाइन के शुरुआत और अंत में दबाव की जाँच करें ताकि किसी भी अवरोध का पता लग सके।
  3. ड्रिपर्स पर: कुछ चुनिंदा ड्रिपर्स पर प्रवाह दर की जाँच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी ड्रिपर्स समान रूप से पानी दे रहे हैं।

35) निम्नलिखित उपकरणों के चित्र बनाइये-

i) फ्लश वॉल्व

    _______
   |       |
   |   O   |  (हैंडल)
   |_______|
      |
      | (पाइप कनेक्शन)

फ्लश वॉल्व का सरल चित्र (हैंडल और पाइप कनेक्शन दर्शाया गया है)

ii) प्लॉय वॉल्व (प्लग वॉल्व)

    _______
   |       |
   |  ( )  |  (प्लग)
   |_______|
      |
      | (पाइप कनेक्शन)

प्लग वॉल्व का सरल चित्र (गोलाकार प्लग दर्शाया गया है)

iii) वाल्व (सामान्य वाल्व)

    _______
   |       |
   |   /   |  (हैंडल)
   |_______|
      |
      | (पाइप कनेक्शन)

सामान्य वाल्व का सरल चित्र (हैंडल और पाइप कनेक्शन दर्शाया गया है)

36) रेनगन का चित्र बनाकर इसके रखरखाव के बारे में लिखिए।

रेनगन का चित्र:

        /\
       /  \   (नोजल)
      /    \
     |      |
     |  O   |  (बॉडी)
     |______|
        |
        | (बेस/स्टैंड)

रेनगन का सरल चित्र (नोजल, बॉडी और बेस दर्शाया गया है)

रखरखाव:

  1. नियमित सफाई: रेनगन के नोजल और फिल्टर को नियमित रूप से साफ करें ताकि गंदगी या मलबा जमा न हो।
  2. स्नेहन: रेनगन के घूमने वाले भागों (बेयरिंग) को समय-समय पर ग्रीस या तेल लगाकर चिकना रखें।
  3. सील की जाँच: रेनगन के सील और गास्केट की जाँच करें और यदि वे घिस गए हों तो उन्हें बदल दें ताकि पानी का रिसाव न हो।
  4. सर्दियों में सुरक्षा: ठंड के मौसम में रेनगन को पानी से खाली करके सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि पाले से क्षति न हो।

खण्ड - द

IV. प्रश्न संख्या 37 एवं 38 के उत्तर दो पृष्ठों तक दीजिए। [2×3=6]

37) ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पाइप नेटवर्क स्थापना का रेखा चित्र बनाकर विस्तार से समझाइये।

ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पाइप नेटवर्क स्थापना:

ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पाइप नेटवर्क की स्थापना निम्नलिखित चरणों में की जाती है:

  1. मुख्य पाइप लाइन: सबसे पहले जल स्रोत (नलकूप/टैंक) से मुख्य पाइप लाइन बिछाई जाती है। यह आमतौर पर PVC या HDPE पाइप की होती है।
  2. उप-मुख्य पाइप लाइन: मुख्य पाइप से शाखाएँ निकालकर उप-मुख्य पाइप लाइनें बिछाई जाती हैं जो खेत के विभिन्न भागों में जाती हैं।
  3. लेटरल पाइप: उप-मुख्य पाइप से छोटी व्यास की लेटरल पाइप लाइनें बिछाई जाती हैं जो पौधों की पंक्तियों के समानांतर होती हैं।
  4. ड्रिपर्स/उत्सर्जक: लेटरल पाइप पर निश्चित दूरी पर ड्रिपर्स लगाए जाते हैं जो पानी की बूँदें पौधों की जड़ों में छोड़ते हैं।
  5. नियंत्रण वाल्व: मुख्य पाइप पर वाल्व, फिल्टर, प्रेशर गेज और उर्वरक इंजेक्टर लगाए जाते हैं।

रेखा चित्र: (एक सरल रेखा चित्र जिसमें जल स्रोत, मुख्य पाइप, उप-मुख्य पाइप, लेटरल पाइप और ड्रिपर्स दर्शाए गए हैं।)

अथवा

ड्रिप सिंचाई प्रणाली में उत्सर्जन उपकरणों की स्थापना को चित्र सहित विस्तार से समझाइये।

ड्रिप सिंचाई प्रणाली में उत्सर्जन उपकरणों की स्थापना:

उत्सर्जन उपकरण (ड्रिपर्स/एमिटर) निम्न प्रकार स्थापित किए जाते हैं:

  1. ड्रिपर्स के प्रकार: ऑनलाइन ड्रिपर्स (लेटरल पाइप पर बाहर लगाए जाते हैं) और इनलाइन ड्रिपर्स (पाइप के अंदर ही बने होते हैं)।
  2. स्थापना विधि: ऑनलाइन ड्रिपर्स को लेटरल पाइप में छेद करके फिट किया जाता है। इनलाइन ड्रिपर्स पाइप निर्माण के समय ही लगे होते हैं।
  3. दूरी: ड्रिपर्स की दूरी फसल और मिट्टी के प्रकार पर निर्भर करती है (आमतौर पर 30-60 सेमी)।
  4. ड्रिपर विशेषताएँ: प्रत्येक ड्रिपर 2-8 लीटर प्रति घंटा पानी छोड़ता है। इनमें दबाव नियंत्रण और स्व-सफाई की क्षमता होती है।

चित्र: (एक चित्र जिसमें लेटरल पाइप पर लगे ऑनलाइन ड्रिपर्स और इनलाइन ड्रिपर्स दर्शाए गए हैं।)

38) स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का ले आउट बनाकर विस्तार से समझाइये।

स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का ले आउट:

स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का ले आउट निम्न प्रकार होता है:

  1. जल स्रोत: नलकूप, टैंक या नहर से पानी लिया जाता है।
  2. पम्पिंग इकाई: पानी को दबाव देने के लिए पम्प लगाया जाता है।
  3. मुख्य पाइप लाइन: पम्प से मुख्य पाइप लाइन बिछाई जाती है जो खेत के मध्य तक जाती है।
  4. शाखा पाइप लाइन: मुख्य पाइप से शाखा पाइप लाइनें निकाली जाती हैं।
  5. स्प्रिंकलर हेड: शाखा पाइप पर निश्चित दूरी पर स्प्रिंकलर हेड लगाए जाते हैं जो पानी को बारिश की तरह छिड़कते हैं।
  6. ले आउट पैटर्न: स्प्रिंकलर हेड को वर्गाकार, आयताकार या त्रिकोणीय पैटर्न में लगाया जाता है ताकि पूरे क्षेत्र में समान वितरण हो।

ले आउट चित्र: (एक चित्र जिसमें जल स्रोत, पम्प, मुख्य पाइप, शाखा पाइप और स्प्रिंकलर हेड का ले आउट दर्शाया गया है।)

अथवा

उच्च दबाव स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के मुख्य घटकों को विस्तार से समझाइये।

उच्च दबाव स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के मुख्य घटक:

  1. पम्पिंग इकाई: उच्च दबाव (3-5 kg/cm²) उत्पन्न करने के लिए केन्द्रापसारक पम्प या सबमर्सिबल पम्प का उपयोग किया जाता है।
  2. मुख्य पाइप लाइन: उच्च दबाव सहने के लिए मोटी दीवार वाले PVC या GI पाइप का उपयोग किया जाता है।
  3. शाखा पाइप लाइन: मुख्य पाइप से छोटे व्यास की शाखा पाइप लाइनें निकाली जाती हैं।
  4. स्प्रिंकलर हेड: ये उच्च दबाव पर पानी को छोटी बूँदों में तोड़कर चारों ओर छिड़कते हैं। इनमें नोजल, आर्म और स्प्रिंग तंत्र होता है।
  5. नियंत्रण वाल्व: प्रत्येक शाखा पर वाल्व लगाए जाते हैं जिससे पानी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके।
  6. फिल्टर: पानी को छानने के लिए स्क्रीन फिल्टर या सैंड फिल्टर लगाए जाते हैं ताकि नोजल बंद न हों।
  7. प्रेशर गेज: दबाव मापने के लिए पम्प के पास और मुख्य पाइप पर प्रेशर गेज लगाए जाते हैं।
  8. कपलिंग और फिटिंग: पाइपों को जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के कपलिंग, एल्बो, टी और रिड्यूसर का उपयोग किया जाता है।