RBSE Class 10th 2019 Science-S-123-D&D-2019 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2019
Subject Science-S-123-D&D-2019
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 10th Science-S-123-D&D-2019 2019 solved Previous Year Question Papers

माध्यमिक (मूक-बधिर) परीक्षा, 2019

विज्ञान (SCIENCE)

समय : 44 घण्टे     पूर्णाक : 80

नामांक Roll No.     SLNo. : TTLLIL i


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न संख्या अंक प्रत्येक प्रश्न के लिए निर्धारित हैं:
    • प्रश्न 1-5 : 2 अंक
    • प्रश्न 6-25 : 3 अंक
    • प्रश्न 26-30 : 6 अंक
  6. प्रश्न संख्या 26 से 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।

No. of Questions — 30     S-23-Science (D & D)

No. of Printed Pages — 7

S-23-Science (D & D)     [ Turn Over

प्रश्न 5: निम्न प्रश्नों के उत्तरों का सही विकल्प का चयन करें :

  1. आयोडीन की कमी से रोग होता है-

    • क) रतौंधी
    • ख) घेंघा
    • ग) बांझपन
    • घ) मोटापा

    सही उत्तर: ख) घेंघा

    आयोडीन की कमी से थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है, जिसे घेंघा रोग कहते हैं।

  2. विरंजक चूर्ण को वायु में खुला रखने पर कौनसी गैस देता है-

    • क) H₂
    • ख) O₂
    • ग) Cl₂
    • घ) CO₂

    सही उत्तर: ग) Cl₂

    विरंजक चूर्ण (CaOCl₂) वायु में खुला रखने पर कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया कर क्लोरीन गैस (Cl₂) छोड़ता है।

  3. विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक है-

    • क) वाट
    • ख) वाट-सेकण्ड
    • ग) किलोवाट घण्टा
    • घ) किलोवाट प्रति घण्टा

    सही उत्तर: ग) किलोवाट घण्टा

    विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक किलोवाट घण्टा (kWh) है, जिसे बिजली के बिल में प्रयोग किया जाता है।

  4. पुष्पक्रम से प्राप्त सब्जी है-

    • क) आलू
    • ख) फूलगोभी
    • ग) भिण्डी
    • घ) टमाटर

    सही उत्तर: ख) फूलगोभी

    फूलगोभी का खाने योग्य भाग पुष्पक्रम (फूलों का समूह) होता है, जबकि आलू तना, भिण्डी फल और टमाटर फल है।

  5. अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस कब मनाया जाता है?

    • क) 22 मई
    • ख) 23 मई
    • ग) 24 मई
    • घ) 25 मई

    सही उत्तर: क) 22 मई

    अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस प्रतिवर्ष 22 मई को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है।

[5 × 1 = 5]

प्रश्न : 6–40 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए : [5×1=5]

  1. रक्तचाप मापने वाले यंत्र का क्या नाम है?
    स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer)।
  2. प्रभावी लक्षण किसे कहते हैं?
    वह लक्षण जो संतति में व्यक्त होता है, प्रभावी लक्षण कहलाता है।
  3. लाल चींटी के डंक में कौनसा अम्ल पाया जाता है?
    फॉर्मिक अम्ल (Formic acid)।
  4. आधुनिक आवर्त नियम क्या है?
    तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।
  5. भेड़ की एक देशी अच्छी नस्ल का नाम लिखिए।
    मेरिनो (Marwari या Chokla) – कोई भी एक देशी नस्ल जैसे मारवाड़ी, चोकला, नाली आदि।

प्रश्न : 11–15 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर शब्द-सीमा अधिकतम 30 शब्द है : [5×2=10]

  1. रेडॉक्स अभिक्रिया किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।
    वह अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों एक साथ होते हैं, रेडॉक्स अभिक्रिया कहलाती है। उदाहरण: Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu।
  2. जैव विविधता संरक्षण के प्रकार लिखिए।
    दो प्रकार: (1) इन-सीटू संरक्षण (प्राकृतिक आवास में) – जैसे राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य। (2) एक्स-सीटू संरक्षण (कृत्रिम आवास में) – जैसे बीज बैंक, चिड़ियाघर।
  3. CNG व LPG का पूरा नाम लिखिए।
    CNG: संपीडित प्राकृतिक गैस (Compressed Natural Gas)। LPG: द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (Liquefied Petroleum Gas)।

4. अवतल दर्पण के कोई दो उपयोग लिखिए।

अवतल दर्पण के दो उपयोग:

  1. दंत चिकित्सकों द्वारा दांतों की जांच करने के लिए (बड़ा प्रतिबिंब दिखाने के कारण)।
  2. सोलर कुकर में सूर्य की किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करने के लिए।

5. लक्षण प्रारूप व जीन प्रारूप में अन्तर लिखिए।

लक्षण प्रारूप (Phenotype) जीन प्रारूप (Genotype)
जीव के बाहरी दिखने वाले लक्षण (जैसे आंखों का रंग)। जीव के अंदर मौजूद जीनों का समूह (जैसे TT, Tt, tt)।
पर्यावरण से प्रभावित हो सकता है। पर्यावरण से प्रभावित नहीं होता, आनुवंशिक होता है।

प्रश्न 6-25: निम्नलिखित प्रश्नों की उत्तर शब्द-सीमा अधिकतम 50 शब्द है : [10 x 3 = 30]

6. जल संरक्षण व प्रबंधन के तीन सिद्धान्त लिखिए।

जल संरक्षण व प्रबंधन के तीन सिद्धांत:

  1. वर्षा जल संचयन: वर्षा के पानी को इकट्ठा करके भूजल स्तर बढ़ाना।
  2. जल का पुन: उपयोग: घरेलू और औद्योगिक जल को उपचारित कर पुन: उपयोग करना।
  3. जल स्रोतों का संरक्षण: नदियों, तालाबों और झीलों को प्रदूषण से बचाना।

7. आर एच (Rh) कारक क्या हैं? इसके महत्व को समझाइए।

Rh कारक: यह लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाया जाने वाला एक प्रोटीन (एंटीजन) है। यदि यह प्रोटीन मौजूद है तो Rh पॉजिटिव, अन्यथा Rh नेगेटिव।

महत्व: Rh नेगेटिव माँ और Rh पॉजिटिव बच्चे के बीच Rh असंगति होने पर गर्भावस्था में समस्या हो सकती है, जिससे नवजात शिशु में हीमोलिटिक रोग हो सकता है। रक्त चढ़ाने से पहले Rh कारक मिलान आवश्यक है।

8. दो प्रबल अम्ल एवं दो प्रबल क्षारों के नाम तथा उपयोग लिखिए।

प्रकार नाम उपयोग
प्रबल अम्ल हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) धातु साफ करने, PVC बनाने में
प्रबल अम्ल सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) बैटरी, उर्वरक बनाने में
प्रबल क्षार सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) साबुन, कागज बनाने में
प्रबल क्षार पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) बैटरी, उर्वरक बनाने में

9. नेत्र की समंजन क्षमता व दृष्टि परास से क्या अभिप्राय है?

समंजन क्षमता: नेत्र लेंस की फोकस दूरी को बदलने की क्षमता, जिससे निकट और दूर की वस्तुएं स्पष्ट दिखती हैं।

दृष्टि परास: वह अधिकतम दूरी जहाँ तक मानव नेत्र स्पष्ट देख सकता है (सामान्यतः अनंत तक) और न्यूनतम दूरी (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी लगभग 25 सेमी)।

20. प्रतिरोधों के श्रेणीक्रम संयोजन व समान्तर क्रम संयोजन में क्या अन्तर है?

श्रेणीक्रम संयोजन समान्तर क्रम संयोजन
प्रतिरोधों को एक के बाद एक जोड़ा जाता है। प्रतिरोधों को अलग-अलग पथों में जोड़ा जाता है।
कुल प्रतिरोध = R₁ + R₂ + R₃ (बढ़ता है)। कुल प्रतिरोध = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ (घटता है)।
धारा सभी में समान रहती है। विभवांतर सभी में समान रहता है।

21. औषधीय महत्त्व के दो पादपों के वैज्ञानिक नाम लिखिए।

  1. नीम: Azadirachta indica (एंटीसेप्टिक, त्वचा रोगों में उपयोगी)।
  2. तुलसी: Ocimum sanctum (खांसी, सर्दी, प्रतिरक्षा बढ़ाने में)।

22. अवशेषांग किसे कहते हैं? मानव शरीर के एक अवशेषांग का नाम लिखिए।

अवशेषांग: वे अंग जो विकास के दौरान अपना मूल कार्य खो चुके हैं और शरीर में बेकार रह गए हैं, उन्हें अवशेषांग कहते हैं।

उदाहरण: मानव शरीर में अपेंडिक्स (उंडुक) एक अवशेषांग है।

23) निम्न के IUPAC नाम लिखिए :-

  1. आइसोआक्टेन – 2,2,4-ट्राइमेथिलपेन्टेन
  2. (CH₃)₂C=CH₂ – 2-मेथिलप्रोपीन (या आइसोब्यूटीन)
  3. नियोपेन्टेन – 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन

24) डार्विन के अनुसार पृथ्वी पर पहले जीव की उत्पत्ति कैसे हुई होगी? स्पष्ट कीजिए।

डार्विन के अनुसार, पृथ्वी पर पहले जीव की उत्पत्ति एक सरल, अकार्बनिक पदार्थ से रासायनिक विकास के माध्यम से हुई। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रारंभिक पृथ्वी पर उपस्थित सरल रासायनिक यौगिक (जैसे मीथेन, अमोनिया, जल वाष्प) ऊर्जा (जैसे बिजली, पराबैंगनी किरण) के प्रभाव में जटिल कार्बनिक अणुओं में बदल गए। ये अणु धीरे-धीरे प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल जैसे जैव-अणुओं में संगठित हुए और अंततः पहले सरल जीव (प्रोटोसेल) का निर्माण हुआ। डार्विन ने इसे "रासायनिक उत्पत्ति" का सिद्धांत दिया, जिसे बाद में ओपेरिन और हाल्डेन ने विकसित किया।

25) उत्तल दर्पण का प्रयोग पीछे के दृश्य देखने हेतु क्यों करते हैं? कारण सहित समझाइए।

उत्तल दर्पण का प्रयोग वाहनों में पीछे के दृश्य देखने के लिए किया जाता है क्योंकि:

  • उत्तल दर्पण हमेशा सीधा, छोटा और आभासी प्रतिबिंब बनाता है।
  • इसका दृष्टि क्षेत्र (field of view) बहुत चौड़ा होता है, जिससे पीछे की बड़ी क्षेत्र को देखा जा सकता है।
  • यह वस्तुओं को छोटा दिखाता है, जिससे अधिक वस्तुएं दर्पण में समा जाती हैं, जिससे चालक को पीछे के यातायात की बेहतर जानकारी मिलती है और दुर्घटना की संभावना कम होती है।

26-30) निम्नलिखित प्रश्नों के विकल्प दिए गए हैं। उत्तर शब्द-सीमा अधिकतम 100 शब्द है : [5 × 6 = 30]

26) अ) अंतःस्रावी तंत्र में हाइपोथैलेमस की क्या भूमिका है? समझाइए।

हाइपोथैलेमस मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण भाग है जो अंतःस्रावी तंत्र को नियंत्रित करता है। इसकी भूमिकाएँ:

  • यह पिट्यूटरी ग्रंथि को नियंत्रित करने वाले हार्मोन (रीलीजिंग और इन्हिबिटिंग हार्मोन) स्रावित करता है।
  • यह शरीर के तापमान, भूख, प्यास, नींद और भावनाओं को नियंत्रित करता है।
  • यह अंतःस्रावी ग्रंथियों (जैसे थायरॉइड, अधिवृक्क) के कार्य को नियंत्रित करता है।
  • यह स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को भी नियंत्रित करता है, जो हार्मोन स्राव को प्रभावित करता है।

अथवा

अ) अग्न्याशय के बहिःस्रावी तथा अंतःस्रावी कार्यों को समझाइए।

अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि है जो दोनों प्रकार के कार्य करती है:

  • बहिःस्रावी कार्य: यह पाचक एंजाइम (ट्रिप्सिन, लाइपेज, एमाइलेज) और बाइकार्बोनेट युक्त अग्न्याशयी रस स्रावित करता है, जो छोटी आंत में भोजन के पाचन में सहायता करता है।
  • अंतःस्रावी कार्य: यह लैंगरहैंस द्वीपिकाओं से हार्मोन स्रावित करता है – इंसुलिन (रक्त शर्करा कम करता है) और ग्लूकागॉन (रक्त शर्करा बढ़ाता है), जो रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित करते हैं।

अथवा

अ) नाइट्रोजनी अपशिष्ट के तीनों प्रकारों को समझाइए।

नाइट्रोजनी अपशिष्ट के तीन प्रकार हैं:

  • अमोनिया (NH₃): अत्यधिक विषैला, जल में घुलनशील। जलीय जीव (मछली) इसे सीधे जल में छोड़ते हैं।
  • यूरिया: कम विषैला, जल में घुलनशील। स्तनधारी और मनुष्य इसे मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित करते हैं।
  • यूरिक अम्ल: कम विषैला, जल में अघुलनशील। पक्षी, सरीसृप और कीट इसे ठोस रूप में उत्सर्जित करते हैं, जिससे जल की बचत होती है।

ब) मूत्र निर्माण में बोमन संपुट की भूमिका समझाइए।

बोमन संपुट (Bowman's capsule) वृक्क में नेफ्रॉन का प्रारंभिक भाग है। इसकी भूमिका:

  • यह ग्लोमेरुलस (केशिकाओं का गुच्छा) को घेरे रहता है।
  • ग्लोमेरुलस में रक्त का निस्यंदन (filtration) होता है, जिसमें पानी, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण और यूरिया जैसे छोटे अणु बोमन संपुट में आ जाते हैं।
  • यह निस्यंद (filtrate) को एकत्र करके वृक्क नलिका में भेजता है, जहाँ पुनःअवशोषण और स्राव होता है, जिससे अंततः मूत्र बनता है।
  • बड़े अणु (जैसे प्रोटीन) और रक्त कोशिकाएं निस्यंदन में नहीं आतीं।

27. तत्वों के निम्नलिखित गुण आवर्त सारणी में किस प्रकार आवर्तितता दर्शाते हैं:

  1. परमाणु त्रिज्या – आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है, जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है।
  2. Se (सेलेनियम) के लिए – यहाँ संभवतः 'आयनन एन्थैल्पी' का अर्थ है। आयनन एन्थैल्पी आवर्त में बाएँ से दाएँ बढ़ती है और वर्ग में ऊपर से नीचे घटती है।
  3. विद्युत ऋणात्मकता – आवर्त में बाएँ से दाएँ बढ़ती है और वर्ग में ऊपर से नीचे घटती है।

28. बोर मॉडल की कमियाँ लिखिए।

  • यह केवल हाइड्रोजन जैसे एक-इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं की व्याख्या कर सकता है, बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए असफल रहता है।
  • यह ज़ीमन प्रभाव (चुंबकीय क्षेत्र में स्पेक्ट्रम रेखाओं का विभाजन) और स्टार्क प्रभाव (विद्युत क्षेत्र में विभाजन) की व्याख्या नहीं कर सकता।
  • यह इलेक्ट्रॉनों की तरंग प्रकृति (डी-ब्रॉग्ली सिद्धांत) को ध्यान में नहीं रखता।
  • यह हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की रेखाओं की तीव्रता और सूक्ष्म संरचना की व्याख्या नहीं कर सकता।
  • यह हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन के निश्चित पथ और स्थिति को मानता है।

अथवा

हीरा, ग्रेफाइट व फुलरीन की उपयोगिता लिखिए।

  • हीरा – आभूषणों में, कांच काटने और चट्टानों को काटने के औजारों में, तथा उच्च दाब वाले प्रयोगों में उपयोग होता है।
  • ग्रेफाइट – पेंसिल लेड में, स्नेहक (लुब्रिकेंट) के रूप में, विद्युत सेलों में इलेक्ट्रोड के रूप में, और परमाणु रिएक्टरों में मंदक के रूप में उपयोग होता है।
  • फुलरीन – नैनोटेक्नोलॉजी में, दवा वितरण प्रणालियों में, और उच्च तापमान अतिचालकों के निर्माण में उपयोग होता है।

29. निम्न पर टिप्पणी लिखिए:

  1. फ्रियॉन – यह क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) का एक समूह है, जिसका उपयोग प्रशीतक (रेफ्रिजरेंट) और एयरोसोल प्रणोदक के रूप में होता है। यह ओज़ोन परत को क्षति पहुँचाता है, जिससे पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  2. प्राकृतिक रबर – यह रबर के पेड़ (हेविया ब्रासिलिएन्सिस) के लेटेक्स से प्राप्त होता है। इसमें प्रत्यास्थता और जलरोधकता के गुण होते हैं, और इसका उपयोग टायर, जूते, और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में होता है।

30. प्रतिरोधों की पदार्थ पर निर्भरता को समझाइये।

किसी चालक का प्रतिरोध उसके पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है। विभिन्न पदार्थों में इलेक्ट्रॉनों की गति में भिन्नता होती है। चालकों (जैसे ताँबा, एल्युमिनियम) का प्रतिरोध कम होता है, जबकि कुचालकों (जैसे रबर, काँच) का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है। अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन) का प्रतिरोध चालकों और कुचालकों के बीच होता है। यह निर्भरता पदार्थ की प्रतिरोधकता (ρ) द्वारा व्यक्त की जाती है, जहाँ R = ρL/A (L = लंबाई, A = अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल)।

31. प्रतिरोधों की ताप पर निर्भरता को समझाइये।

धात्विक चालकों का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर बढ़ता है, क्योंकि ताप बढ़ने से आयनों का कंपन बढ़ता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों की गति में बाधा आती है। अर्धचालकों और कुचालकों का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर घटता है, क्योंकि अधिक इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में आ जाते हैं। कुछ मिश्र धातुओं (जैसे कॉन्स्टेंटन) का प्रतिरोध ताप के साथ लगभग स्थिर रहता है।

अथवा

विद्युत ऊर्जा के उत्पादन से लेकर घरों तक उपभोग होने तक ऊर्जा क्षय किस प्रकार होता है?

  • उत्पादन में – जनरेटर में यांत्रिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण 100% कुशल नहीं होता, कुछ ऊर्जा ऊष्मा के रूप में क्षय होती है।
  • संचरण में – लंबी दूरी की तारों में प्रतिरोध के कारण ऊष्मा के रूप में ऊर्जा क्षय (I²R हानि) होता है। उच्च वोल्टेज पर संचरण करके इसे कम किया जाता है।
  • वितरण में – ट्रांसफॉर्मरों में कोर हानि (हिस्टेरेसिस और एडी धाराएँ) और ताम्र हानि होती है।
  • घरों में उपभोग में – उपकरणों में प्रतिरोध के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है, और स्टैंडबाय मोड में भी ऊर्जा क्षय होता है।

32. टेर में चातानुकूलन को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है?

  • कमरे को अच्छी तरह से सील करें ताकि ठंडी हवा बाहर न निकले।
  • खिड़कियों पर पर्दे या ब्लाइंड्स लगाएँ ताकि सूर्य की सीधी किरणें कमरे में न आएँ।
  • एयर कंडीशनर का नियमित रखरखाव करें, जैसे फिल्टर साफ करना।
  • कमरे में पंखे का उपयोग करें ताकि ठंडी हवा का संचार बेहतर हो।
  • एयर कंडीशनर का थर्मोस्टेट उचित तापमान (लगभग 24-26°C) पर सेट करें।
  • कमरे में अतिरिक्त गर्मी उत्पन्न करने वाले उपकरणों (जैसे तंदूर, हीटर) का उपयोग कम करें।

प्रश्न 29

अ) मछली पालन तथा मुर्गीपालन के महत्व को समझाइए।

मछली पालन का महत्व:

  • प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है, जो मानव आहार के लिए आवश्यक है।
  • रोजगार के अवसर प्रदान करता है, विशेषकर तटीय क्षेत्रों में।
  • आर्थिक लाभ देता है और निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा अर्जित करता है।
  • जल संसाधनों का सदुपयोग करता है।

मुर्गीपालन का महत्व:

  • अंडे और मांस के रूप में पौष्टिक आहार प्रदान करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का स्रोत है।
  • कम लागत में अधिक उत्पादन देता है।
  • खाद्य सुरक्षा में योगदान देता है।

ब) लाख कीट संवर्धन एवं मोती (मुक्ता) संवर्धन को समझाइए।

लाख कीट संवर्धन: लाख कीट (लैसिफेर लक्का) एक सूक्ष्म कीट है जो पेड़ों की शाखाओं पर रहता है और लाख नामक राल का उत्पादन करता है। इसके संवर्धन में कीटों को बेर, पलास, कुसुम आदि वृक्षों पर पाला जाता है। लाख का उपयोग शेलैक, वार्निश, पॉलिश, आभूषण और दवाइयों में होता है।

मोती (मुक्ता) संवर्धन: मोती संवर्धन में सीपियों (जैसे पिंकटाडा प्रजाति) में कृत्रिम रूप से मोती उत्पन्न किए जाते हैं। इसमें सीप के अंदर एक विदेशी कण (नाभिक) डाला जाता है, जिसके चारों ओर सीप मोती की परत चढ़ाती है। मोती का उपयोग आभूषण और सजावट में होता है।


अथवा

अ) भूकम्प का क्या कारण हैं? समझाइए।

भूकम्प के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • प्लेट विवर्तनिकी: पृथ्वी की स्थलमंडलीय प्लेटों के आपस में टकराने, खिसकने या अलग होने से भूकम्प आते हैं।
  • ज्वालामुखी विस्फोट: ज्वालामुखी से निकलने वाले मैग्मा के दबाव से भूकम्प उत्पन्न हो सकते हैं।
  • भ्रंश (Fault) गतिविधि: पृथ्वी की पपड़ी में दरारों (भ्रंशों) के सहसा हिलने से भूकम्प आते हैं।
  • मानवीय कारण: बड़े पैमाने पर खनन, बांध निर्माण, भूमिगत परमाणु परीक्षण आदि भी भूकम्प का कारण बन सकते हैं।

ब) अपरदन शक्तियों का मानव जीवन में महत्व समझाइए।

अपरदन शक्तियाँ (जल, वायु, हिमनद, समुद्री लहरें) मानव जीवन में निम्नलिखित रूपों में महत्वपूर्ण हैं:

  • उपजाऊ मिट्टी का निर्माण: नदियाँ अपरदन द्वारा उपजाऊ मिट्टी को मैदानों में जमा करती हैं, जो कृषि के लिए आवश्यक है।
  • भू-आकृतियों का निर्माण: घाटियाँ, जलप्रपात, गुफाएँ आदि अपरदन से बनती हैं, जो पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं।
  • खनिज संसाधन: अपरदन से खनिज पदार्थ सतह पर आते हैं, जिनका खनन किया जाता है।
  • जल संसाधन: अपरदन से नदी घाटियाँ बनती हैं, जो जल संग्रह और सिंचाई में सहायक होती हैं।

प्रश्न 30

अ) डॉ. सलीम अली के जीवन एवं विज्ञान में उनके योगदान का वर्णन करों।

जीवन परिचय: डॉ. सलीम अली (1896-1987) भारत के प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी थे। उनका जन्म मुंबई में हुआ। उन्होंने बर्मा (म्यांमार) और जर्मनी में शिक्षा प्राप्त की।

विज्ञान में योगदान:

  • उन्होंने भारतीय पक्षियों का व्यापक अध्ययन किया और 'द बुक ऑफ इंडियन बर्ड्स' जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं।
  • उन्होंने भारत में पक्षी विज्ञान को एक व्यवस्थित विज्ञान के रूप में स्थापित किया।
  • उन्होंने केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) और साइलेंट वैली जैसे संरक्षण क्षेत्रों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उन्होंने पक्षियों के प्रवास, व्यवहार और पारिस्थितिकी पर गहन शोध किया।

ब) चरक के अनुसार आनुवांशिक दोष के क्या कारण थे?

चरक (प्राचीन आयुर्वेदाचार्य) के अनुसार आनुवांशिक दोषों के निम्नलिखित कारण थे:

  • बीज दोष (शुक्राणु या अंडाणु में दोष): माता-पिता के शुक्र और रज (अंडाणु) में दोष होने पर संतान में आनुवांशिक विकार उत्पन्न होते हैं।
  • गर्भाशय दोष: गर्भाशय की असामान्यता के कारण भ्रूण में दोष आ सकते हैं।
  • माता-पिता के आहार-विहार: माता-पिता के अनुचित आहार, व्यवहार और मानसिक स्थिति का प्रभाव संतान पर पड़ता है।
  • काल (समय) दोष: गर्भधारण के अनुपयुक्त समय या ऋतु के कारण भी दोष उत्पन्न हो सकते हैं।

अथवा

अ) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन परिचय एवं विज्ञान में उनके योगदान का वर्णन करों।

जीवन परिचय: डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (1931-2015) का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति थे और उन्हें 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' कहा जाता है।

विज्ञान में योगदान:

  • उन्होंने भारत के प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम (अग्नि, पृथ्वी मिसाइल) का नेतृत्व किया।
  • उन्होंने SLV-III रॉकेट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने रोहिणी उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया।
  • उन्होंने परमाणु परीक्षण (पोखरण-II) में योगदान दिया।
  • उन्होंने 'विजन 2020' के माध्यम से भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखा।
  • उन्होंने युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रेरित किया।

ब) रमन प्रभाव का महत्व लिखिए।

रमन प्रभाव (सर सी.वी. रमन द्वारा खोजा गया) का निम्नलिखित महत्व है:

  • पदार्थ की पहचान: रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी द्वारा विभिन्न पदार्थों की आणविक संरचना का पता लगाया जा सकता है।
  • रासायनिक विश्लेषण: इसका उपयोग रसायनों, दवाइयों और खनिजों के विश्लेषण में होता है।
  • चिकित्सा विज्ञान: कैंसर और अन्य रोगों के निदान में रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग किया जाता है।
  • सामग्री विज्ञान: नैनोमटेरियल और अर्धचालकों के अध्ययन में यह महत्वपूर्ण है।
  • पुरातत्व: प्राचीन वस्तुओं और चित्रों की प्रामाणिकता जांचने में सहायक है।