RBSE Class 10th 2020 Hindi-S-01-2020 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2020 |
| Subject | Hindi-S-01-2020 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2020 Hindi-S-01-2020
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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2020 2020 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक परीक्षा, 2020
SECONDARY EXAMINATION, 2020
हिंदी
समय : 3¼ घंटे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
S—0-Hindi 530
S-0-Hindi
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खण्ड - |
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सामान्यतः ईश्वर के दो रूप माने गए हैं- सगुण एवम् निर्गुण। जब परमात्मा को निराकार, अज, अनादि, सर्वव्यापी, गुणातीत, अगोचर, सूक्ष्म मानकर उसकी विवेचना की जाती है तब उसे निर्गुण ब्रह्म कहा जाता है और जब वही ब्रह्म सगुण, साकार रूप धारण कर नर शरीर ग्रहण कर नाना प्रकार के कृत्य करता है तब उसे सगुण परमात्मा के रूप में जाना जाता है। सामाजिक उपयोगिता की दृष्टि से सगुण भक्ति को निर्गुण भक्ति की अपेक्षा महत्वपूर्ण माना जा सकता है, किंतु केवल इसी कारण से निर्गुण भक्ति की उपेक्षा नहीं की जा सकती। तत्कालीन परिस्थितियों में सगुणोपासक भक्त कवियों का सारा ध्यान इस ओर केन्द्रित था कि हिन्दू समाज को विघटन और उत्पीड़न से बचाया जा सके। इसलिए उन्होंने हिन्दू समाज के विभिन्न घटकों को संगठित करने का कार्य किया। दूसरी ओर निर्गुणोपासक कवियों की दृष्टि हिन्दू समाज को ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारतीय समाज को एकता के सूत्र में पिरोने की ओर लगी हुई थी। वे हिन्दू और मुसलमान का भेद भुलाकर मानवता के उदात्त मूल्यों की स्थापना में लगे हुए थे।
-
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। [4]
उत्तर: गद्यांश का उचित शीर्षक "सगुण और निर्गुण भक्ति" या "सगुण एवं निर्गुण भक्ति का तुलनात्मक विवेचन" हो सकता है।
-
निर्गुण ब्रह्म की दो विशेषताएँ लिखिए। [4]
उत्तर: निर्गुण ब्रह्म की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- निर्गुण ब्रह्म निराकार (बिना आकार का) होता है।
- निर्गुण ब्रह्म अज (जन्मरहित) और अनादि (जिसका कोई आदि न हो) होता है।
-
निर्गुण एवं सगुण भक्त कवियों में अंतर लिखिए। [2]
उत्तर: निर्गुण एवं सगुण भक्त कवियों में निम्नलिखित अंतर है:
- सगुण भक्त कवि: इनका ध्यान हिन्दू समाज को विघटन और उत्पीड़न से बचाने तथा हिन्दू समाज के विभिन्न घटकों को संगठित करने पर केन्द्रित था।
- निर्गुण भक्त कवि: इनकी दृष्टि सम्पूर्ण भारतीय समाज को एकता के सूत्र में पिरोने तथा हिन्दू-मुसलमान का भेद भुलाकर मानवता के उदात्त मूल्यों की स्थापना पर केन्द्रित थी।
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
फूलों की राह पुरानी है,
शूलों की राह नई साथी
सुमनों के पथ पर चरणों के
कितने ही चिह्न पड़े होंगे
लालायित फिर भी चलने को
कितने ही चरण खड़े होंगे
पर, गैल अछूती शूलों की
जो चूमे वही जवानी है,
जो लहू सींच कर बढ़ते हैं
उनका ही कूच रवानी है।
जीवन की चाह पुरानी है
मरने की चाह नई साथी
फूलों की राह पुरानी है
शूलों की राह नई साथी।
S_0l-Hindi 530I
4) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: पद्यांश का उचित शीर्षक 'अछूती राह' या 'नई राह' हो सकता है। (पद्यांश के भाव के अनुसार शीर्षक दिया जाना चाहिए।)
5) कौनसी राह अछूती रह जाती है?
उत्तर: वह राह अछूती रह जाती है जिस पर अब तक किसी ने कदम नहीं रखा हो, अर्थात् जो मार्ग अब तक अनजान और अनछुआ हो।
6) कौनसी राह को नई माना गया है और क्यों?
उत्तर: जिस राह पर पहले कभी किसी ने यात्रा नहीं की हो, उसे नई राह माना गया है, क्योंकि वह मार्ग अन्वेषण और नवीनता का प्रतीक होता है।
खण्ड - 2
दिए गए बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए। [8]
-
इंटरनेट : वरदान या अभिशाप
- प्रस्तावना : इंटरनेट व दैनिक जीवन
- इंटरनेट के विविध क्षेत्र
- इंटरनेट के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव
- उपसंहार
-
मेरा प्रिय कवि
- काव्य और समाज
- प्रिय कवि का सामान्य परिचय एवं विशेषताएँ
- प्रमुख रचनाएँ
- उपसंहार
-
पर्यावरण प्रदूषण
- प्रस्तावना : पर्यावरण प्रदूषण से तात्पर्य
- पर्यावरण प्रदूषण के कारण
- पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार
- उपसंहार : रोकने के उपाय
-
बेटी बचाओ : बेटी पढ़ाओ
- प्रस्तावना : बेटी बचाओ : बेटी पढ़ाओ की अवधारणा
- लिंगानुपात कम होने के कारण
- कन्या भ्रूण हत्या रोकने के उपाय
- स्त्री-शिक्षा का महत्व एवं उपाय
- उपसंहार
8) स्वयं को देवास निवासी पुस्तक विक्रेता मानते हुए मोहन राघव प्रकाशन नई दिल्ली से कुछ पुस्तकें मँगवाने हेतु पत्र लिखिए। [4]
सेवा में,
प्रबंधक,
मोहन राघव प्रकाशन,
नई दिल्ली।
विषय: पुस्तकें मँगवाने हेतु पत्र।
महोदय,
मैं देवास नगर का एक पुस्तक विक्रेता हूँ। मुझे आपके प्रकाशन की निम्नलिखित पुस्तकों की आवश्यकता है। कृपया ये पुस्तकें मेरे पते पर भेजने का कष्ट करें। पुस्तकों की सूची संलग्न है।
- हिंदी साहित्य का इतिहास – 10 प्रतियाँ
- विज्ञान की कक्षा 10 – 15 प्रतियाँ
- गणित अभ्यास पुस्तिका – 20 प्रतियाँ
पुस्तकों का मूल्य डाक व्यय सहित अग्रिम भेज रहा हूँ। कृपया शीघ्र प्रेषण का कष्ट करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
(आपका नाम)
पुस्तक विक्रेता, देवास
अथवा
स्वयं को जिलाधीश गया मानते हुए अपने जिले के समस्त राजकीय व गैर राजकीय विद्यालयों के संस्थाप्रधान को एक पत्र लिखिए जिसमें अपने विद्यालय में गाँधीजी की 50 वीं जयन्ती मनाने के आदेश दिए गए हैं।
सेवा में,
संस्थाप्रधान,
(विद्यालय का नाम),
गया।
विषय: गाँधीजी की 50 वीं जयन्ती मनाने के आदेश।
महोदय,
आपको सूचित किया जाता है कि आगामी 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 50 वीं जयन्ती मनाई जाएगी। इस अवसर पर आप अपने विद्यालय में निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित करना सुनिश्चित करें:
- प्रातः 8 बजे विद्यालय में गाँधीजी के चित्र पर माल्यार्पण।
- प्रार्थना सभा में गाँधीजी के जीवन पर प्रकाश डालना।
- विद्यार्थियों द्वारा भाषण, निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिताएँ।
- स्वच्छता अभियान का आयोजन।
कार्यक्रम की रिपोर्ट जिला कार्यालय को प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
धन्यवाद।
भवदीय,
जिलाधीश, गया
खण्ड - 3
9) विशेषण की परिभाषा देते हुए विशेषण के कोई दो भेद लिखिए। [1+2=3]
परिभाषा: विशेषण वे शब्द हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, परिमाण आदि) बताते हैं। जैसे – अच्छा लड़का, तीन पुस्तकें।
दो भेद:
- गुणवाचक विशेषण: जो संज्ञा के गुण-दोष का बोध कराए। जैसे – सुंदर फूल, बुद्धिमान छात्र।
- संख्यावाचक विशेषण: जो संज्ञा की संख्या का बोध कराए। जैसे – दो किताबें, पाँचवाँ दिन।
10) “प्रशान्त खेल रहा है” वाक्य में कारक, काल, वाच्य बताइए। [1+1+1=3]
- कारक: कर्ता कारक (प्रशान्त – कर्ता, ‘ने’ चिह्न नहीं है, अतः कर्ता कारक)।
- काल: वर्तमान काल (खेल रहा है – क्रिया का वर्तमान में जारी रहना)।
- वाच्य: कर्तृवाच्य (क्रिया का कर्ता प्रधान है)।
11) उपसर्ग को उदाहरण सहित समझाइए। [2]
उपसर्ग: वे शब्दांश जो किसी शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।
उदाहरण: ‘प्र’ + ‘हार’ = प्रहार (प्र उपसर्ग जुड़ने से ‘हार’ का अर्थ ‘आक्रमण’ हो गया)।
अन्य उदाहरण: ‘अ’ + ‘समाज’ = असामाजिक, ‘सु’ + ‘पुत्र’ = सुपुत्र।
12) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए। [1+1=2]
क) अशुद्ध: उसकी तो अक्ल मर गई है।
शुद्ध: उसकी तो बुद्धि मर गई है। (अक्ल का प्रयोग अशुद्ध है; बुद्धि शुद्ध शब्द है।)
ख) अशुद्ध: घर पर सब कुशल है।
शुद्ध: घर पर सब कुशल हैं। (कर्ता ‘सब’ बहुवचन है, अतः क्रिया ‘हैं’ होगी।)
13) निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए। [1+1=2]
क) आसमान सिर पर उठाना: बहुत अधिक शोर मचाना या हंगामा करना।
ख) ओखली में सिर देना: जान-बूझकर मुसीबत मोल लेना या खतरे में पड़ना।
14) ‘छोटा मुँह, बड़ी बात’ लोकोक्ति का अर्थ लिखिए। [1]
अर्थ: सामर्थ्य से अधिक बड़ी बात करना या अपनी हैसियत से बढ़कर दावा करना।
खण्ड - 4
15) निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए। [2+4=6]
मेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण
इसमें कहाँ मृत्यु?
है जीवन ही जीवन
अभी पड़ा है आगे सारा यौवन
स्वर्ण-किरण कल्लोलों पर बहता रे, बालक मन
मेरे ही अविकसित राग से
विकसित होगा अरु, दिगन्त,
अभी न होगा मेरा अन्त।
सन्दर्भ : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता 'अभी न होगा मेरा अन्त' से लिया गया है। इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन हैं।
प्रसंग : कवि अपने जीवन के प्रारंभिक चरण में हैं। वह जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं और मृत्यु को दूर मानते हैं। वह अपने अविकसित राग (प्रतिभा) से विश्व को विकसित करने की बात करते हैं।
व्याख्या : कवि कहते हैं कि मेरे जीवन का यह प्रथम चरण है, इसमें मृत्यु का कोई स्थान नहीं है। यहाँ तो केवल जीवन ही जीवन है। अभी मेरा पूरा यौवन आगे पड़ा हुआ है। मेरा बालक मन सुनहरी किरणों की लहरों पर बहता हुआ आगे बढ़ रहा है। मेरी अविकसित प्रतिभा से ही यह विश्व विकसित होगा। अतः अभी मेरा अंत नहीं होगा। कवि का यह कथन जीवन के प्रति उनके अटूट विश्वास और आशावाद को दर्शाता है।
अथवा
उषा की लाली में
अभी से गए निखर
हिमगिरि के कनक-शिखर
आगे बढ़ा शिशु-रवि
बदली छवि, बदली छवि
देखता रह गया अपलक कवि
सन्दर्भ : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता 'उषा' से लिया गया है। इसके रचयिता शमशेर बहादुर सिंह हैं।
प्रसंग : कवि प्रातःकालीन सूर्योदय के दृश्य का वर्णन कर रहे हैं। सूर्य की पहली किरणों से हिमालय के शिखर सुनहरे हो उठते हैं और सूर्य धीरे-धीरे ऊपर बढ़ता है।
व्याख्या : कवि कहते हैं कि उषा की लाली में हिमालय के सुनहरे शिखर पहले से ही निखर गए हैं। शिशु सूर्य आगे बढ़ता है और उसकी छवि बदलती जाती है। यह दृश्य इतना मनमोहक है कि कवि पलकें झपकाए बिना इसे देखता रह जाता है। यहाँ कवि ने प्रकृति के सौंदर्य और सूर्योदय के क्षणिक परिवर्तनों को बड़ी ही सजीवता से चित्रित किया है।
16) निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए। [2+4=6]
अफा की पत्नी-धर्म पर व्याख्यान देते समय घंटों पांडित्य प्रकट करे, गार्गी बड़े-बड़े ब्रह्मवादियों को हरा दे, मंडन मिश्र की सहधर्मचारिणी शंकराचार्य के वाह छुड़ा दे। गजब! इससे अधिक भयंकर बात और क्या हो सकेगी। यह सब पापी पढ़ने का अपराध है। न वे पढ़ती, न वे पूजनीय पुरुषों का मुकाबला करती। यह सारा दुराचार स्त्रियों को पढ़ाने ही का कुफल है। समझे। स्त्रियों के लिए पढ़ना कालकूट और पुरुषों के लिए पीयूष का घूँट। ऐसी ही दलीलों और दृष्टातों के आधार पर कुछ लोग स्त्रियों को अपढ़ रख कर भारतवर्ष का गौरव बढ़ाना चाहते हैं।
सन्दर्भ : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित निबंध 'स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्क' से लिया गया है। इसके लेखक महावीर प्रसाद द्विवेदी हैं।
प्रसंग : लेखक ने स्त्री-शिक्षा के विरोधियों के तर्कों का उल्लेख किया है। ये विरोधी स्त्रियों को पढ़ाने को पाप और दुराचार का कारण मानते हैं।
व्याख्या : लेखक व्यंग्यपूर्वक कहते हैं कि स्त्री-शिक्षा के विरोधियों के अनुसार, यदि कोई स्त्री पत्नी-धर्म पर घंटों विद्वत्तापूर्ण व्याख्यान दे, गार्गी की तरह बड़े-बड़े ब्रह्मवादियों को शास्त्रार्थ में हरा दे, या मंडन मिश्र की पत्नी की तरह शंकराचार्य को भी पराजित कर दे, तो यह अत्यंत भयंकर बात है। उनके अनुसार यह सब पढ़ने का अपराध है। यदि वे न पढ़तीं, तो पूजनीय पुरुषों का मुकाबला न करतीं। यह सारा दुराचार स्त्रियों को पढ़ाने का ही कुफल है। वे कहते हैं कि स्त्रियों के लिए पढ़ना विष के समान है, जबकि पुरुषों के लिए अमृत के समान। लेखक बताते हैं कि ऐसे ही कुतर्कों के आधार पर कुछ लोग स्त्रियों को अशिक्षित रखकर भारतवर्ष का गौरव बढ़ाना चाहते हैं। लेखक ने यहाँ स्त्री-शिक्षा के विरोधियों की संकीर्ण मानसिकता पर करारा व्यंग्य किया है।
अथवा
सूर्य का गोला पानी की सतह को छू गया। पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढुल आया। पर वह रंग इतनी जल्दी बदल रहा था कि किसी भी एक क्षण के लिए उसे एक नाम दे सकना असम्भव था। सूर्य का गोला जैसे एक बेबसी में पानी के लावे में डूबता जा रहा था। धीरे-धीरे वह पूरा डूब गया और कुछ क्षण पहले जहाँ सोना बह रहा था, वहाँ अब लहू बहता नजर आने लगा। कुछ और क्षण बीतने पर वह रंग भी धीरे-धीरे बैजनी और बैजनी से काला पड़ गया। मैंने फिर एक बार मुड़कर दायीं तरफ देख लिया।
सन्दर्भ : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित पाठ 'सूर्यास्त का दृश्य' से लिया गया है। इसके लेखक जैनेन्द्र कुमार हैं।
प्रसंग : लेखक सूर्यास्त के समय प्रकृति में होने वाले रंग-परिवर्तन का वर्णन कर रहे हैं। सूर्य धीरे-धीरे पानी में डूब रहा है और आकाश तथा पानी के रंग बदल रहे हैं।
व्याख्या : लेखक कहते हैं कि सूर्य का गोला पानी की सतह को छू गया। पानी पर दूर तक सोने जैसा पीला रंग फैल गया। लेकिन यह रंग इतनी तेजी से बदल रहा था कि किसी एक पल के लिए भी उसका कोई एक नाम रखना असंभव था। सूर्य का गोला मानो लाचारी में पानी के लावे (गर्म पानी) में डूबता जा रहा था। धीरे-धीरे वह पूरी तरह डूब गया और कुछ क्षण पहले जहाँ सोने का रंग बह रहा था, वहाँ अब लाल रंग (लहू) बहता दिखाई देने लगा। कुछ और क्षण बीतने पर वह लाल रंग भी धीरे-धीरे बैंगनी और फिर बैंगनी से काला हो गया। लेखक ने फिर एक बार मुड़कर दाहिनी ओर देखा। इस प्रकार लेखक ने सूर्यास्त के समय होने वाले रंग-परिवर्तन का अत्यंत सजीव और मार्मिक वर्णन किया है।
7) 'कन्यादान' कविता में स्त्री जीवन के प्रति ऋतुराज की गहरी संवेदना अभिव्यक्त हुई है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
'कन्यादान' कविता में ऋतुराज ने स्त्री के जीवन की पीड़ा, त्याग और संघर्ष को संवेदनशीलता से चित्रित किया है। कवि ने बेटी के विवाह के समय माँ की ममता और बेटी के भविष्य की चिंता को गहराई से व्यक्त किया है।
अथवा
सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित 'झाँसी की रानी' कविता का मूलभाव अपने शब्दों में लिखिए।
'झाँसी की रानी' कविता में सुभद्रा कुमारी चौहान ने रानी लक्ष्मीबाई के वीरता, साहस और देशभक्ति का वर्णन किया है। कविता में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके बलिदान और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को प्रमुखता से दर्शाया गया है।
8) संत दादू दयाल के जीवन चरित्र पर टिप्पणी लिखिए।
संत दादू दयाल एक महान संत और कवि थे। उन्होंने निर्गुण भक्ति पर बल दिया और समाज में व्याप्त कुरीतियों का विरोध किया। उनके उपदेश सरल और सारगर्भित थे, जो मानवता और प्रेम पर आधारित थे।
अथवा
मुंशी प्रेमचंद की 'बाल-मनोविज्ञान' को चरितार्थ करने वाली एक प्रतिनिधि कहानी है। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'बाल-मनोविज्ञान' बच्चों की मानसिकता और उनकी भावनाओं को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, कहानी में एक बच्चा अपने खिलौने से जुड़ाव और उसके खोने पर दुखी होता है, जो बाल मनोविज्ञान को स्पष्ट करता है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 40 से 50 शब्दों में दीजिए।
9) 'मधुबन कूप भरे' मथुरा के हाल को संदेशों से किसने भर दिया है और क्यों?
'मधुबन कूप भरे' में मथुरा के हाल को संदेशों से भरने वाले श्रीकृष्ण हैं। उन्होंने अपनी लीलाओं और प्रेम से मथुरा को आनंदित किया, जिससे वहाँ के लोगों के मन में प्रेम और भक्ति का संचार हुआ।
20) कवि 'परम खिड़िया' ने राजहंस पक्षी की क्या विशेषता बताई है?
कवि 'परम खिड़िया' ने राजहंस पक्षी की विशेषता बताई है कि वह केवल मोती चुनता है और कीचड़ में नहीं फँसता। यह पक्षी उच्च आदर्शों और पवित्रता का प्रतीक है।
21) 'प्रकृति-पद्मिनी के अंशु माली' कविता में 'अंशु माली' शब्द किसके लिए आया है और क्यों?
'प्रकृति-पद्मिनी के अंशु माली' कविता में 'अंशु माली' शब्द सूर्य के लिए आया है। सूर्य अपनी किरणों से प्रकृति को सींचता है और उसे सुंदर बनाता है, इसलिए उसे माली कहा गया है।
22) सागरमल गोपा को बंदी क्यों बनाया गया? 'अमर शहीद' पाठ के आधार पर लिखिए।
'अमर शहीद' पाठ के अनुसार, सागरमल गोपा को बंदी इसलिए बनाया गया क्योंकि उन्होंने अंग्रेजों के अत्याचारों का विरोध किया और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्हें देशभक्ति के कारण जेल में डाला गया।
23) रामधारी सिंह 'दिनकर' ने ईर्ष्या से बचने के क्या उपाय बताए हैं?
रामधारी सिंह 'दिनकर' ने ईर्ष्या से बचने के लिए आत्मसंयम, दूसरों की सफलता की सराहना और स्वयं को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करने के उपाय बताए हैं। उन्होंने ईर्ष्या को मानवीय कमजोरी बताया है।
24) 'मानव धर्म' के विषय में लोकसंत पीपा के क्या विचार थे?
लोकसंत पीपा के अनुसार, मानव धर्म सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और सेवा का भाव रखना है। उन्होंने जाति-पाति से ऊपर उठकर मानवता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए।
-
“ऋतु-वर्णन” कविता के रचयिता का नाम लिखिए।
उत्तर: “ऋतु-वर्णन” कविता के रचयिता देव हैं।
-
कवि देव के आराध्य भगवान कौन हैं?
उत्तर: कवि देव के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण हैं।
-
हामिद ने मेले में से क्या खरीदा और उसकी कीमत क्या थी?
उत्तर: हामिद ने मेले में से चिमटा खरीदा और उसकी कीमत बारह आने थी।
-
“आखिरी पड़ाव” पाठ में सूर्योदय व सूर्यास्त की भूमि किसे बताया गया है?
उत्तर: “आखिरी पड़ाव” पाठ में सूर्योदय व सूर्यास्त की भूमि जापान को बताया गया है।
निम्नलिखित रचनाकारों का संक्षिप्त परिचय लिखिए।
-
i) महाकवि तुलसीदास
उत्तर: महाकवि तुलसीदास का जन्म संवत् 1589 में राजापुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के महान कवि थे। इनकी प्रमुख रचनाएँ रामचरितमानस, विनय पत्रिका, दोहावली आदि हैं। ये रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि माने जाते हैं।
-
ii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
उत्तर: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का जन्म संवत् 1907 में काशी (वाराणसी) में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के युग प्रवर्तक माने जाते हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा, प्रेम सरोवर आदि हैं। ये हिंदी नवजागरण के जनक कहे जाते हैं।
शराब का सेवन कर वाहन चलाने के क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं? यदि आपका कोई दोस्त या रिश्तेदार ऐसा करता है तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
शराब का सेवन कर वाहन चलाने के दुष्परिणाम:
- शराब पीने से वाहन चालक का संतुलन बिगड़ जाता है और दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।
- इससे न केवल चालक बल्कि अन्य लोगों की जान को भी खतरा होता है।
- यह कानूनी अपराध है और इसके लिए जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है।
- शराब के नशे में वाहन चलाने से परिवार और समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
यदि कोई दोस्त या रिश्तेदार ऐसा करता है तो मैं निम्नलिखित कदम उठाऊँगा:
- मैं उसे शराब पीकर वाहन न चलाने की सलाह दूँगा और इसके दुष्परिणामों के बारे में समझाऊँगा।
- यदि वह फिर भी न माने तो मैं उसे रोकने के लिए परिवार के सदस्यों या पुलिस की मदद लूँगा।
- मैं उसे वैकल्पिक साधन जैसे टैक्सी या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का सुझाव दूँगा।
- मैं उसे यह समझाऊँगा कि शराब पीकर वाहन चलाना उसकी और दूसरों की जान के लिए खतरनाक है।