माध्यमिक परीक्षा, 2022
SECONDARY EXAMINATION, 2024
समय : 3¼ घंटे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों के आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।
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खण्ड - अ
निम्नांकित प्रश्नों में दिए गए सही विकल्प का चयन कर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए। (प्रत्येक प्रश्न एक अंक का है।)
-
'बाढ़पीड़ित' शब्द में कौन-सा समास है?
- (अ) कर्म तत्पुरुष समास
- (ब) अपादान तत्पुरुष समास
- (स) करण तत्पुरुष समास
- (द) संबंध तत्पुरुष समास
सही उत्तर: (अ) कर्म तत्पुरुष समास
स्पष्टीकरण: 'बाढ़पीड़ित' का समास विग्रह 'बाढ़ से पीड़ित' होता है, जिसमें 'से' कारक चिह्न है। यह करण कारक का बोध कराता है, अतः यह करण तत्पुरुष समास है। दिए गए विकल्पों में (स) करण तत्पुरुष समास सही है।
-
'नीलकंठ' शब्द में निम्नांकित में से कौन-सा समास है?
- (अ) कर्मधारय समास
- (ब) बहुब्रीहि समास
- (स) अव्ययीभाव समास
- (द) द्वंद्व समास
सही उत्तर: (ब) बहुब्रीहि समास
स्पष्टीकरण: 'नीलकंठ' का अर्थ है 'नीला कंठ जिसका है' (भगवान शिव या एक पक्षी)। यहाँ समस्त पद किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति का बोध कराता है, अतः यह बहुब्रीहि समास है।
-
जिस समास के पहले तथा दूसरे पद में विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का संबंध होता है, वह समास है
- (अ) अव्ययीभाव समास
- (ब) तत्पुरुष समास
- (स) कर्मधारय समास
- (द) द्विगु समास
सही उत्तर: (स) कर्मधारय समास
स्पष्टीकरण: कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है, या उपमान-उपमेय का संबंध होता है। जैसे: नीलकमल (नीला है जो कमल) – विशेषण-विशेष्य; चंद्रमुख (चंद्र के समान मुख) – उपमान-उपमेय।
-
जिस समास में पद का रूप (लिंग, वचन, कारक में) नहीं बदलता है, वह कहलाता है
- (अ) द्विगु समास
- (ब) अव्ययीभाव समास
- (स) बहुब्रीहि समास
- (द) तत्पुरुष समास
सही उत्तर: (ब) अव्ययीभाव समास
स्पष्टीकरण: अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होता है और समस्त पद का रूप (लिंग, वचन, कारक) नहीं बदलता, वह सदा एक समान रहता है। जैसे: यथाशक्ति, प्रतिदिन।
प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है:
- आधीन
- मूर्ती
- दांत
- a (अस्पष्ट)
सही उत्तर: (स) दांत
'दांत' शब्द शुद्ध वर्तनी में है। 'आधीन' अशुद्ध है (शुद्ध: आधीन), 'मूर्ती' अशुद्ध है (शुद्ध: मूर्ति)।
प्रश्न vi.
निम्नलिखित में से वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध शब्द है:
- अनुग्रह
- अगामी
- ae (अस्पष्ट)
- उज्बल
सही उत्तर: (अ) अनुग्रह
'अनुग्रह' शुद्ध वर्तनी है। 'अगामी' अशुद्ध (शुद्ध: आगामी), 'उज्बल' अशुद्ध (शुद्ध: उज्ज्वल)।
प्रश्न i.
निम्नलिखित में से अशुद्ध शब्द है:
- डुर्बस्था
- बेफिजूल
- अभयारण्य
सही उत्तर: (अ) डुर्बस्था
'डुर्बस्था' अशुद्ध है; शुद्ध रूप 'दुर्दशा' या 'दुर्बलता' हो सकता है। 'बेफिजूल' अशुद्ध है (शुद्ध: बेफ़िज़ूल), 'अभयारण्य' शुद्ध है।
प्रश्न Wii.
निम्नलिखित में से अशुद्ध शब्द है:
- ओद्योगिक
- eRe (अस्पष्ट)
- युवावस्था
- मर्यादा
सही उत्तर: (अ) ओद्योगिक
'ओद्योगिक' अशुद्ध है; शुद्ध रूप 'औद्योगिक' है। 'युवावस्था' और 'मर्यादा' शुद्ध हैं।
प्रश्न ७.
“सूरदास' के गुरु का नाम है:
- नरहरिंदास
- हरिकृष्ण आचार्य
- रामकृष्ण परमहंस
- बल्लभाचार्य
सही उत्तर: (अ) नरहरिंदास
सूरदास के गुरु नरहरिंदास थे, जिन्होंने उन्हें भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
प्रश्न ७0.
“आषाढ़ का एक दिन' नामक कृति है:
- उपन्यास
- नाटक
- कहानी संग्रह
- निबंध संग्रह
सही उत्तर: (ब) नाटक
'आषाढ़ का एक दिन' मोहन राकेश द्वारा रचित एक प्रसिद्ध नाटक है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द / एक पंक्ति में लिखिए:
प्रश्न क्रमांक 07 से 09 तक के सभी प्रश्नों के अंकभार प्रति प्रश्न एक अंक है। (7×1=7)
प्रश्न 2.
“लक्ष्मण-परशुराम संवाद” रामचरितमानस के किस 'काण्ड' से लिया गया है? 'काण्ड' का नाम लिखिए।
प्रश्न 3.
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की औपचारिक शिक्षा कौन-से स्तर तक हुई थी?
उत्तर: मिडिल स्कूल (आठवीं कक्षा) तक
प्रश्न 4.
जयशंकर प्रसाद जी ने कौन-सी मासिक पत्रिका का संपादन किया था?
प्रश्न 5.
हामिद के पिता की मृत्यु किस रोग से हुई थी?
6. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी द्वारा लिखित ग्रन्थों की संख्या लिखिए ।
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी द्वारा लिखित ग्रन्थों की संख्या लगभग 150 है।
7. 'ऊँची बातें करना' मुहावरे का अर्थ लिखिए ।
अर्थ: बड़ी-बड़ी बातें करना या शेखी बघारना।
8. 'आम बड़े और दर्शन छोटे' लोकोक्ति का अर्थ लिखिए ।
अर्थ: जहाँ वस्तु बड़ी हो और उसे देखने का अवसर छोटा हो, अर्थात् महत्वपूर्ण वस्तु को कम समय में देखना पड़े।
दिए गए प्रश्नों में रिक्त स्थान की पूर्ति कर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए । प्रत्येक प्रश्न एक अंक का है ।
9. 'यह दंतुरित मुस्कान' कविता में कवि नागार्जुन का प्रकृति प्रेम सहज रूप से मुखरित हुआ है ।
10. हामिद ने दो पैसे में रंग जमा लिया ।
11. “तुम्हारी चोरी वही करेगा, जिसकी तुमने चोरी की है।”
खण्ड - ब
निम्नलिखित अतिलघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर लिखिए । प्रत्येक प्रश्न दो अंक का है ।
12. 'झाँसी की रानी' कविता का केन्द्रीय भाव संक्षेप में लिखिए ।
इस कविता का केन्द्रीय भाव वीरता, स्वाभिमान और देशभक्ति है। इसमें रानी लक्ष्मीबाई के साहस, बलिदान और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का वर्णन किया गया है। कवि ने उन्हें एक आदर्श वीरांगना के रूप में प्रस्तुत किया है जो अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर थीं।
13. 'ऊधौ मन माने की बात' नामक पद में गोपियों ने 'विषकौड़ा' और 'चकोर' की कौन-सी विशेषताएँ बताई हैं ? संक्षेप में लिखिए ।
गोपियों ने बताया कि विषकौड़ा (एक प्रकार का कीड़ा) अपने शरीर में विष धारण करता है और दूसरों को काटकर मार डालता है, जबकि चकोर पक्षी केवल चाँदनी (प्रेम) पीकर जीवित रहता है। गोपियाँ स्वयं को चकोर के समान बताती हैं जो केवल कृष्ण-प्रेम में रमण करती हैं, और उद्धव को विषकौड़ा कहती हैं जो उन्हें प्रेम-विरह का विष दे रहे हैं।
14. “अनादि तेरी अनन्त माया” - 'प्रभो' नामक कविता के आधार पर प्रदत्त काव्य-पंक्ति को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए ।
इस पंक्ति का अर्थ है कि ईश्वर की माया (शक्ति) अनादि (जिसका कोई आदि न हो) और अनन्त (जिसका कोई अंत न हो) है। कवि कहता है कि प्रभु की यह माया इतनी विशाल और रहस्यमयी है कि मनुष्य इसे समझ नहीं सकता। यह सृष्टि के आरंभ से अंत तक व्याप्त है और इसका कोई पार नहीं है।
15. ईर्ष्या का कौन-सा पक्ष लाभदायक हो सकता है ?
ईर्ष्या का वह पक्ष लाभदायक हो सकता है जब यह व्यक्ति को प्रेरित करे कि वह दूसरों की सफलता से सीख ले और स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करे। यदि ईर्ष्या सकारात्मक रूप में हो, तो यह आत्म-सुधार और प्रतिस्पर्धा की भावना जगाकर व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।
16. लेखक 'मोहन राकेश' अपने कौन-से 'प्रयत्न की सार्थकता' से सन्तुष्ट हो गए ? 'आखिरी चिट्ठी' के आधार पर संक्षेप में लिखिए ।
लेखक मोहन राकेश उस प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट हो गए जब उन्होंने अपने पिता की अंतिम चिट्ठी को ढूँढ़ निकाला। यह चिट्ठी उनके पिता ने उनकी माँ को लिखी थी और इसे पाकर लेखक को अपने पिता के प्रति गहरा लगाव और उनके व्यक्तित्व की झलक मिली, जिससे उन्हें अपने प्रयास की सार्थकता का अनुभव हुआ।
17. हामिद ने अपने चिमटे को 'रुस्तमे-हिंद' क्यों कहा ?
हामिद ने अपने चिमटे को 'रुस्तमे-हिंद' (हिंदुस्तान का सबसे बड़ा योद्धा) इसलिए कहा क्योंकि वह चिमटा उसकी दृष्टि में बहुत मजबूत और उपयोगी था। हामिद ने इसे ईद के मेले में खिलौनों के बदले खरीदा था और उसे लगता था कि यह चिमटा किसी भी युद्ध में काम आ सकता है, इसलिए उसने इसे एक महान योद्धा का नाम दिया।
18. 'रंग चढ़ना' मुहावरे का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए ।
अर्थ: किसी चीज़ का प्रभाव या असर होना।
वाक्य: बच्चों पर अच्छी संगति का रंग चढ़ता है, इसलिए माता-पिता को सावधान रहना चाहिए।
19. 'जब तक जीवन तब तक आस' लोकोक्ति का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए ।
अर्थ: जब तक व्यक्ति जीवित रहता है, तब तक उसे आशा बनी रहती है।
वाक्य: बीमारी के बावजूद वह निराश नहीं हुआ, क्योंकि उसे पता था कि जब तक जीवन तब तक आस।
खण्ड - स
20. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (1+1+2=4)
हम दीवानों की क्या हस्ती,
हैं आज यहाँ कल वहाँ चले।
मस्ती का आलम साथ चला,
हम धूल उड़ाते जहाँ चले।
आए बनकर उल्लास अभी,
आँसू बनकर बह चले अभी।
सब कहते ही रह गए,
तुम कैसे आए, कहाँ चले?
(अ) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: 'दीवानों की हस्ती' या 'मस्ती का आलम' (कोई भी उचित शीर्षक स्वीकार्य)।
(ब) दीवाने अपने स्वभाव के संबंध में क्या बता रहे हैं?
उत्तर: दीवाने अपने स्वभाव के बारे में बता रहे हैं कि वे आज यहाँ और कल वहाँ चले जाते हैं। वे मस्ती में धूल उड़ाते हुए चलते हैं और कभी उल्लास बनकर आते हैं तो कभी आँसू बनकर बह जाते हैं। उनका जीवन अनिश्चित और स्वतंत्र है।
(स) 'आए बनकर उल्लास अभी, आँसू बनकर बह चले अभी' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि दीवाने (प्रेमी या स्वतंत्र व्यक्ति) क्षणभर में खुशी (उल्लास) लेकर आते हैं और तुरंत दुख (आँसू) बनकर बह जाते हैं। यह जीवन की नश्वरता और भावनाओं के बदलते स्वरूप को दर्शाता है।
अथवा
निम्नलिखित अपठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (1+1+2=4)
वीर से वीर घबराते नहीं,
आपदाएँ देख छिप जाते नहीं।
लग गए जिस काम में, पूरा किया,
काम करके व्यर्थ पछताते नहीं।
हो सरल अथवा कठिन हो रास्ता,
कर्मवीरों को न इससे वास्ता।
बढ़ चले तो अंत तक ही बढ़ चले,
कठिनतर गिरिशृंग ऊपर चढ़ चले।
(अ) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: 'कर्मवीरों की विशेषताएँ' या 'वीरों का स्वभाव' (कोई भी उचित शीर्षक स्वीकार्य)।
(ब) 'गिरिशृंग' शब्द का अर्थ लिखिए।
उत्तर: 'गिरिशृंग' का अर्थ है – पर्वत की चोटी (पहाड़ का शिखर)।
(स) दिए गए काव्यांश में से वीरों की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: वीरों की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- वे आपदाओं को देखकर घबराते या छिपते नहीं हैं, बल्कि उनका सामना करते हैं।
- वे किसी भी काम को शुरू करके उसे पूरा करते हैं और कठिन से कठिन रास्ते पर भी अंत तक बढ़ते रहते हैं।
निर्देश: निम्नलिखित लघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर निर्धारित शब्द-सीमा में लिखिए।
27. ‘कामायनी’ कविता के आधार पर “जयशंकर प्रसाद जी” की भाषा-शैली का विश्लेषण कीजिए। (शब्द-सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: जयशंकर प्रसाद जी की भाषा-शैली में संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है। उनकी भाषा में चित्रात्मकता, प्रवाह और गेयता है। वे भावों को गहराई से व्यक्त करने के लिए उपमा, रूपक जैसे अलंकारों का सुंदर प्रयोग करते हैं।
अथवा
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' जी की कविता 'अभी न होगा मेरा अंत' का केन्द्रीय भाव लिखिए। (शब्द-सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: इस कविता का केन्द्रीय भाव जीवन के प्रति अटूट विश्वास और संघर्षशीलता है। कवि कहता है कि चाहे कितनी भी विपत्तियाँ आएँ, वह हार नहीं मानेगा और अंत तक डटा रहेगा। यह कविता साहस और धैर्य का संदेश देती है।
22. भरत-हरिश्चन्द्र जी ने अपना यश चिरस्थायी रखने के लिए क्या उपाय सोचे और उनका परित्याग क्यों किया? (शब्द-सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: हरिश्चन्द्र ने अपना यश चिरस्थायी रखने के लिए सत्य और धर्म का पालन करने का उपाय सोचा। उन्होंने इसका परित्याग नहीं किया, बल्कि सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहे। वे जानते थे कि सत्य ही अमर यश दिलाता है, इसलिए उन्होंने कभी झूठ का सहारा नहीं लिया।
अथवा
'अमीना को हामिद पर क्यों क्रोध आया? क्रोध स्नेह में किस प्रकार परिवर्तित हो गया?'
उत्तर: अमीना को हामिद पर क्रोध इसलिए आया क्योंकि उसने बाजार से चिमटा खरीद लिया, जबकि वह उसके लिए कुछ खाने की चीज़ें लाने की उम्मीद कर रही थी। लेकिन जब हामिद ने चिमटे की उपयोगिता बताई और कहा कि वह उसकी माँ की जलती उँगलियों को बचाने के लिए लाया है, तो अमीना का क्रोध स्नेह में बदल गया।
23. निम्नलिखित साहित्यकारों में से किसी एक का जीवन व कृतित्व परिचय लगभग 40 शब्दों में लिखिए। (2+2=4)
सुभद्रा कुमारी चौहान
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान (1904-1948) हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। उनकी प्रमुख रचनाएँ 'मुकुल', 'बिखरे मोती' और 'सीधे-सादे चित्र' हैं। वे राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत थीं और उनकी कविता 'झाँसी की रानी' अत्यंत लोकप्रिय है।
अथवा
मोहन राकेश
उत्तर: मोहन राकेश (1925-1972) हिंदी के प्रमुख कहानीकार और नाटककार थे। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ 'आषाढ़ का एक दिन', 'लहरों के राजहंस' और 'अंडे के छिलके' हैं। वे नई कहानी आंदोलन के महत्वपूर्ण स्तंभ थे।
खण्ड - द
24. (i) (ii) (iii) (iv) (v) उपर्युक्त प्रदर्शित यातायात चिह्नों का सांकेतिक अर्थ लिखिए।
उत्तर: (i) स्टॉप (रुकें) – यह चिह्न वाहन को रोकने का संकेत देता है। (ii) यू-टर्न निषिद्ध – यहाँ मुड़ना मना है। (iii) पैदल यात्री क्रॉसिंग – पैदल चलने वालों के लिए सड़क पार करने का स्थान। (iv) स्पीड लिमिट – अधिकतम गति सीमा दर्शाता है। (v) हॉर्न बजाना निषिद्ध – यहाँ हॉर्न बजाना मना है।
अथवा
सड़क-सुरक्षा हेतु किन्हीं पाँच कर्तव्यों को लिखिए।
उत्तर: सड़क-सुरक्षा के पाँच कर्तव्य: (1) हमेशा सड़क के बाएँ ओर चलें। (2) लाल बत्ती पर रुकें और हरी बत्ती पर चलें। (3) वाहन चलाते समय हेलमेट या सीट बेल्ट का प्रयोग करें। (4) निर्धारित गति सीमा का पालन करें। (5) शराब पीकर वाहन न चलाएँ।
25. पत्र लेखन
पत्र 1: स्वयं को जिलाधीश मेरठ मानते हुए समस्त राजकीय एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के संस्था-प्रधानों को एक पत्र लिखिए, जिसमें कोविड-19 से बचाव हेतु समस्त आवश्यक कार्य प्रतिदिन विद्यालय में करने हेतु निर्देशित किया गया हो।
पत्र प्रारूप:
सेवा में,
समस्त राजकीय एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के संस्था-प्रधान,
जिला मेरठ।
विषय: कोविड-19 से बचाव हेतु आवश्यक कार्यों के संबंध में।
महोदय,
मैं, जिलाधीश मेरठ, आपको सूचित करना चाहता हूँ कि कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत विद्यालयों में छात्रों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। अतः आप सभी को निर्देशित किया जाता है कि प्रतिदिन विद्यालय में निम्नलिखित कार्य अनिवार्य रूप से करें:
- प्रवेश द्वार पर सभी का तापमान जाँचें और सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
- कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों एवं शौचालयों की नियमित सफाई एवं सैनिटाइज़ेशन करें।
- सभी छात्रों एवं कर्मचारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य करें।
- सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित करें तथा कक्षाओं में बैठने की व्यवस्था उचित अंतराल पर करें।
- कोविड-19 के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करें एवं संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
आपसे अपेक्षा है कि उपरोक्त निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा किसी भी लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
धन्यवाद।
भवदीय,
(जिलाधीश मेरठ)
पत्र 2 (अथवा): स्वयं को नागपुर निवासी राजेश मानते हुए यातायात पुलिस अधीक्षक, नागपुर को एक पत्र लिखिए, जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के बालक-बालिकाओं द्वारा वाहन-चालन को पूर्णतः प्रतिबन्धित करने की मांग हो।
पत्र प्रारूप:
सेवा में,
यातायात पुलिस अधीक्षक,
नागपुर।
विषय: 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा वाहन चलाने पर प्रतिबंध हेतु निवेदन।
महोदय,
मैं, राजेश, नागपुर निवासी, आपके ध्यान में एक गंभीर समस्या लाना चाहता हूँ। हमारे शहर में 18 वर्ष से कम उम्र के बालक-बालिकाएँ बिना लाइसेंस के वाहन चला रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। कई घटनाओं में इन बच्चों ने स्वयं को और अन्य लोगों को चोटिल किया है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि:
- 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा किसी भी प्रकार के वाहन (दोपहिया, चारपहिया) चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
- स्कूलों एवं कॉलेजों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाए।
- उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए, जैसे जुर्माना या वाहन जब्त करना।
- अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए कि वे अपने बच्चों को वाहन न चलाने दें।
आशा है कि आप इस गंभीर समस्या पर ध्यान देंगे और उचित कदम उठाएंगे।
धन्यवाद।
भवदीय,
राजेश
नागपुर
खण्ड - ख
26. निबंध लेखन
दिए गए बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए:
(अ) आँखों देखी दुर्घटना
भूमिका: दुर्घटनाएँ जीवन की अनिश्चितता को दर्शाती हैं। एक आँखों देखी दुर्घटना का अनुभव मन पर गहरी छाप छोड़ता है।
दुर्घटना: कब, कहाँ, कैसे? पिछले महीने, मैं अपने मित्र के साथ बाजार जा रहा था। अचानक एक तेज रफ्तार कार ने एक साइकिल सवार को टक्कर मार दी। वह व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
बचाव, राहत कार्य: आसपास के लोगों ने तुरंत घायल को अस्पताल पहुँचाया। पुलिस को सूचित किया गया और यातायात को नियंत्रित किया गया।
दुर्घटनाएँ कैसे रोकें? यातायात नियमों का पालन करके, वाहनों की गति सीमा में रखकर, और सड़कों पर सतर्कता बरतकर दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
उपसंहार: दुर्घटनाएँ हमें जीवन की कीमत सिखाती हैं। हमें सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।
(ब) बढ़ती तकनीक - सुविधा या समस्या
भूमिका: तकनीक ने मानव जीवन को सरल बनाया है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी हैं। यह प्रश्न उठता है कि क्या तकनीक सुविधा है या समस्या?
विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक से प्राप्त सुविधाएँ: चिकित्सा में नई मशीनों से इलाज आसान हुआ, शिक्षा में ऑनलाइन कक्षाओं ने ज्ञान को सुलभ बनाया, और संचार में मोबाइल ने दूरियाँ मिटाईं।
तकनीकों से उत्पन्न समस्याएँ: अत्यधिक स्क्रीन टाइम से स्वास्थ्य समस्याएँ, नौकरियों का खतरा, और गोपनीयता का हनन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं।
समस्याओं का उपयुक्त समाधान: तकनीक का संतुलित उपयोग, नियमों का पालन, और डिजिटल साक्षरता बढ़ाकर समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
उपसंहार: तकनीक स्वयं न तो अच्छी है और न बुरी; इसका उपयोग ही इसे सुविधा या समस्या बनाता है। हमें इसका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।
27. निम्नलिखित पठित पद्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(क) पद्यांश
कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु | कुटिल काल बस निजकुल घालकु ||
भानु उदय राकेस कलंकू | निपट निरंकुस अबुध असंकू ||
काल कराल होइहि छन माही | कहऊँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं ||
तुम्ह हटकहु जौं चहहु उबारा | कहि प्रतापु बलु रोष हमारा ||
लखन कहा मुनि सुजसु तुम्हारा | तुम्हहि अछत को बरने पारा ||
अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी | बार अनेक भाँति बहु बरनी ||
नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू | जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू ||
बीरब्रती करि करि अछोभा | गारी देते न पावहु सोभा ||
सूर समर करनी करहिं, कहि न जनावहिं आपु |
विद्यमान रन पाइ रिपु, कायर कहहिं प्रताप ||
सप्रसंग व्याख्या
संदर्भ : प्रस्तुत पद्यांश गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के बालकाण्ड से लिया गया है। इसमें लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का वर्णन है।
प्रसंग : जब परशुराम जी शिव-धनुष भंजन के कारण क्रोधित होकर अयोध्या आते हैं और लक्ष्मण को डाँटते हैं, तब लक्ष्मण उन्हें विनयपूर्वक उत्तर देते हैं। यहाँ लक्ष्मण परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास कर रहे हैं।
व्याख्या : लक्ष्मण कहते हैं — हे कौशिक (परशुराम)! सुनिए, यह बालक (राम) मंद नहीं है, बल्कि कुटिल काल के वश होकर अपने ही कुल का नाश करने वाला है। जैसे सूर्योदय होने पर चन्द्रमा का कलंक दिखाई देता है, वैसे ही यह बालक अत्यंत निरंकुश, मूर्ख और निडर है। यह क्षण भर में भयंकर काल बन जाएगा। मैं पुकार-पुकारकर कहता हूँ, इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। यदि आप इसे बचाना चाहते हैं तो इसे रोकिए, नहीं तो मेरे प्रताप, बल और क्रोध का परिणाम भुगतना पड़ेगा।
इस पर लक्ष्मण हँसकर कहते हैं — हे मुनि! आपका यश तो सर्वविदित है। आपके रहते हुए इस बालक का वर्णन कौन कर सकता है? आप तो स्वयं ही अपनी करनी का बखान कर रहे हैं। यदि आपको संतोष नहीं हुआ तो कुछ और कहिए, पर क्रोध को रोकिए और दुःख सहिए। वीर और ब्रतधारी व्यक्ति को क्रोध शोभा नहीं देता। गाली देने से आपकी शोभा नहीं बढ़ती। सूर्य युद्ध में अपनी करनी करते हैं, पर उसे प्रकट नहीं करते। शत्रु के सामने आने पर कायर ही अपना प्रताप बखानते हैं।
विशेष : इस पद्यांश में लक्ष्मण की विनयशीलता, बुद्धिमत्ता और परशुराम के प्रति सम्मान का सुंदर चित्रण है। तुलसीदास ने संवाद शैली में गहन भावों को सरलता से प्रस्तुत किया है।
(ख) अनुशासन (गद्यांश)
(पृष्ठ पर केवल शीर्षक और बिंदु उपलब्ध हैं, पूर्ण गद्यांश उपलब्ध नहीं है।)
सप्रसंग व्याख्या हेतु संकेत
संदर्भ : प्रस्तुत गद्यांश 'अनुशासन' विषय पर आधारित है।
प्रसंग : अनुशासन के महत्व और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।
व्याख्या : अनुशासन का अर्थ है नियमों का पालन करना। यह मानव जीवन का आधार है। अनुशासन के बिना समाज, परिवार और राष्ट्र अव्यवस्थित हो जाता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र — घर, विद्यालय, खेल का मैदान, सेना आदि — में अनुशासन का विशेष स्थान है। अनुशासनहीनता के दुष्परिणाम भयंकर होते हैं। इससे व्यक्ति और समाज दोनों का पतन होता है। अतः हमें जीवन में अनुशासन को अपनाना चाहिए।
विशेष : यह गद्यांश अनुशासन के महत्व को सरल भाषा में समझाता है। इसमें उपदेशात्मक शैली का प्रयोग किया गया है।
प्रश्न (ब)
जीवन के रथ पर चढ़कर
सदा मृत्यु पथ पर बढ़कर
महाकाल के खरतर शर सह
सकूँ, मुझे तू कर दृढ़तर;
जागे मेरे उर में तेरी
मूर्ति अश्रुजल धौत
दग जल से पा बल बलि कर दूँ
जननि, जन्म श्रम संचित फल।
व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि ने माँ को संबोधित करते हुए कहा है कि हे माँ! मैं जीवन रूपी रथ पर चढ़कर सदा मृत्यु के मार्ग पर बढ़ता रहूँ। महाकाल (समय) के तीखे बाणों को सह सकूँ, इसके लिए मुझे दृढ़ बना दे। मेरे हृदय में तेरी मूर्ति आँसुओं से धुली हुई जागृत रहे। मैं अग्नि जल से बल प्राप्त करके जन्म के संचित फलों की बलि दे दूँ।
प्रश्न (स)
ऊपर-ही-ऊपर तन गए हैं,
तुम्हारे तंबू,
और आज
छमका रही है पावस रानी
बूँदा-बूँदियों को अपनी पायल,
और आज
चालू हो गई है
झींगुरों की शहनाई अविराम,
और आज
जोरों से पड़े
नाचते मोर,
और आज
आ गई वापस जान
दूब की झुलसी शिराओं के अन्दर,
और आज बिदा हुआ चुपचाप ग्रीष्म,
समेटकर अपने लाव-लश्कर।
व्याख्या: इन पंक्तियों में वर्षा ऋतु के आगमन का वर्णन है। कवि कहते हैं कि बादलों के तंबू तन गए हैं। पावस रानी (वर्षा) बूँदों को पायल की तरह छमका रही है। झींगुरों की शहनाई लगातार बज रही है। मोर जोरों से नाच रहे हैं। झुलसी हुई दूब की शिराओं में फिर से जान आ गई है। ग्रीष्म ऋतु अपने सारे सामान समेटकर चुपचाप विदा हो गई है।
28. निम्नलिखित पठित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(a) पहला गद्यांश
पढ़ने-लिखने में स्वयं कोई बात ऐसी नहीं जिससे अनर्थ हो सके। अनर्थ का बीज उसमें हरगिज नहीं। अनर्थ पुरुषों से भी होते हैं और पढ़े-लिखों, दोनों से। अनर्थ, दुराचार और पापाचार के कारण और ही होते हैं और वे व्यक्ति-विशेष का चाल-चलन देखकर जाने भी जा सकते हैं। स्त्रियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए।
जो लोग यह कहते हैं कि पुराने जमाने में यहाँ स्त्रियाँ न पढ़ती थीं अथवा उन्हें पढ़ने की मुमानियत थी वे या तो इतिहास से अभिज्ञता नहीं रखते या जान-बूझकर लोगों को धोखा देते हैं। समाज की दृष्टि में ऐसे लोग दंडनीय हैं।
सप्रसंग व्याख्या
संदर्भ : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'नारी शिक्षा' शीर्षक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक महात्मा गांधी हैं।
प्रसंग : इस गद्यांश में लेखक ने स्त्री शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला है और उन लोगों की मानसिकता पर कटाक्ष किया है जो स्त्रियों को शिक्षा देने का विरोध करते हैं।
व्याख्या : लेखक कहते हैं कि पढ़ने-लिखने में स्वयं कोई ऐसी बात नहीं है जिससे अनर्थ (बुराई) हो सके। शिक्षा में बुराई का बीज बिल्कुल नहीं है। बुराइयाँ तो पुरुषों से भी होती हैं, चाहे वे पढ़े-लिखे हों या अनपढ़। बुराइयाँ दुराचार और पापाचार के कारण होती हैं, और उन्हें व्यक्ति के आचरण को देखकर ही पहचाना जा सकता है। इसलिए स्त्रियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए।
लेखक आगे कहते हैं कि जो लोग यह कहते हैं कि पुराने जमाने में स्त्रियाँ नहीं पढ़ती थीं या उन्हें पढ़ने की मनाही थी, वे या तो इतिहास नहीं जानते या जानबूझकर लोगों को धोखा देते हैं। ऐसे लोग समाज की दृष्टि में दंड के पात्र हैं।
सारांश : लेखक स्त्री शिक्षा का समर्थन करते हुए कहते हैं कि शिक्षा से कभी बुराई नहीं होती, बुराई तो आचरण से होती है। अतः स्त्रियों को शिक्षा देना आवश्यक है।
(b) दूसरा गद्यांश
ईर्ष्या की बेटी का नाम निंदा है। जो व्यक्ति ईर्ष्यालु होता है वही बुरे किस्म का निंदक भी होता है। दूसरों की वह इसलिए निंदा करता है कि इस प्रकार दूसरे लोग जनता अथवा समाज की आँखों से गिर जाएँगे और जो स्थान है उस पर मैं अनायास ही बैठा दिया जाऊँगा। मगर ऐसा न आज तक हुआ है और न होगा। दूसरों को गिराने की कोशिश तो अपने को बढ़ाने की कोशिश नहीं कही जा सकती। एक बात और है कि संसार में कोई भी मनुष्य दूसरों की निंदा करने से अपनी उन्नति नहीं कर सकता। उसकी उन्नति तभी होगी जब वह अपने भीतर छिपे हुए गुणों का विकास करे।
सप्रसंग व्याख्या
संदर्भ : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'निंदक' शीर्षक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक श्री रामचंद्र शुक्ल हैं।
प्रसंग : इस गद्यांश में लेखक ने ईर्ष्या और निंदा के संबंध को स्पष्ट करते हुए बताया है कि निंदा करने से किसी की उन्नति नहीं होती।
व्याख्या : लेखक कहते हैं कि ईर्ष्या की बेटी का नाम निंदा है। जो व्यक्ति ईर्ष्यालु होता है, वही बुरे किस्म का निंदक भी होता है। वह दूसरों की निंदा इसलिए करता है कि इस तरह दूसरे लोग जनता या समाज की नजरों में गिर जाएँगे और उनका स्थान वह आसानी से ले लेगा। लेकिन ऐसा न तो आज तक हुआ है और न ही भविष्य में होगा। दूसरों को गिराने की कोशिश को अपनी उन्नति की कोशिश नहीं कहा जा सकता।
लेखक आगे कहते हैं कि संसार में कोई भी मनुष्य दूसरों की निंदा करके अपनी उन्नति नहीं कर सकता। उसकी उन्नति तभी होगी जब वह अपने भीतर छिपे हुए गुणों का विकास करे।
सारांश : लेखक ने स्पष्ट किया है कि निंदा ईर्ष्या का परिणाम है और इससे किसी की उन्नति नहीं होती। सच्ची उन्नति तो आत्म-विकास से होती है।
(स) ग्रेजुएट नवयुवक मुझे बता रहा था कि कन्याकुमारी की आठ हजार की आबादी में कम-से-कम चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक ऐसे हैं जो बेकार हैं। उनमें से अधिकतर लगभग ग्रेजुएट हैं। उनका मुख्य धन्धा है नौकरियों के लिए अर्जियाँ देना और बैठकर आपस में बहस करना। वह खुद वहाँ फोटो-अलबम बेचता था। दूसरे नवयुवक भी उसी तरह के छोटे-मोटे काम करते थे। "हम लोग सीपियों का गुड़ा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धान्तों पर बहस करते हैं," वह कह रहा था।
2+4=6
S—01—Hindi |