RBSE Class 10th 2024 Hindi-S-01-2024 Previous Year Papers
Class 10th students hunting authentic previous year papers for Hindi-S-01-2024 (2024) land here for a reason: the paper below matches how RBSE assessments are remembered from that year. RBSE Solution does not mix years on one page; each combination gets its own notes.
Skim the overview sections, then work through the scanned pages. Pair this practice with RBSE books and solutions when you need to relearn a concept a question exposed.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2024 |
| Subject | Hindi-S-01-2024 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 10th, year 2024, and subject Hindi-S-01-2024 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
How to practise with this question paper
Stage one: read the Hindi-S-01-2024 question paper from 2024 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.
Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.
RBSE Class 10th 2024 Hindi-S-01-2024
Scroll through the Previous Year Papers pages for Hindi-S-01-2024 (2024).
Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2024 2024 solved Previous Year Question Papers
SECONDARY EXAMINATION, 2024
हिन्दी
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य है।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।
खण्ड-अ
-
निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : 1×5=5
-
‘वार’ शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है
- (अ) एर
- (ब) इया
- (स) आर
- (द) ई
उत्तर: (अ) एर
‘वार’ शब्द में ‘एर’ प्रत्यय जुड़ा है, जैसे ‘वार’ + ‘एर’ = ‘वारियर’ (योद्धा) के समान। यहाँ ‘वार’ का अर्थ ‘आघात’ या ‘प्रहार’ है और ‘एर’ प्रत्यय कर्ता का बोध कराता है।
-
‘गुण स्वर सन्धि’ का सही उदाहरण है
- (अ) रमेश
- (ब) विद्यालय
- (स) मतैक्य
- (द) नीरोग
उत्तर: (अ) रमेश
‘रमेश’ शब्द ‘रमा’ + ‘ईश’ से बना है। यहाँ ‘अ’ + ‘ई’ = ‘ए’ (गुण स्वर सन्धि) हुआ है। गुण सन्धि में अ/आ के बाद इ/ई आए तो ‘ए’, उ/ऊ आए तो ‘ओ’, और ऋ आए तो ‘अर्’ होता है।
-
“उत्साह” कविता के कवि हैं
- (अ) नागार्जुन
- (ब) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
- (स) सूरदास
- (द) जयशंकर प्रसाद
उत्तर: (ब) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
‘उत्साह’ कविता सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित है, जो उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है। यह कविता देशभक्ति और उत्साह का संचार करती है।
-
“राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” की भाषा है
- (अ) खड़ी बोली
- (ब) ब्रज
- (स) राजस्थानी
- (द) अवधी
उत्तर: (द) अवधी
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ का एक अंश है, जिसकी भाषा अवधी है। यह संवाद परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुआ है।
-
गोपियों ने भ्रमर के बहाने किस पर व्यंग्य बाण छोड़े हैं?
- (अ) उद्धव
- (ब) कृष्ण
- (स) नंद
- (द) कंस
उत्तर: (अ) उद्धव
सूरदास के ‘भ्रमर गीत’ में गोपियाँ भ्रमर (भौंरा) के बहाने उद्धव पर व्यंग्य करती हैं, क्योंकि उद्धव कृष्ण का संदेश लेकर आए थे और गोपियाँ उनके ज्ञान-उपदेश से असंतुष्ट थीं।
-
S-01-Hindi
बहुविकल्पीय प्रश्न
-
(vi) नागार्जुन का जन्म हुआ था
- (अ) बिहार
- (ब) बंगाल
- (स) राजस्थान
- (द) उत्तरप्रदेश
उत्तर: (अ) बिहार
नागार्जुन का जन्म बिहार राज्य में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे।
-
(vii) 'कैप्टन' किसका नाम था ?
- (अ) चश्मे वाला
- (ब) पान बाला
- (स) हालदार साहब
- (द) नेताजी
उत्तर: (द) नेताजी
'कैप्टन' नेताजी का नाम था, जो पाठ में एक पात्र के रूप में उल्लिखित है।
-
(viii) 'लखनबी अंदाज' व्यंग्य के लेखक हैं
- (अ) यशपाल
- (ब) मन्नू भंडारी
- (स) स्वयं प्रकाश
- (द) ads मिश्र
उत्तर: (अ) यशपाल
'लखनबी अंदाज' व्यंग्य के लेखक यशपाल हैं, जो हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं।
-
(ix) 'बालगोबिन भगत' पाठ की विधा है
- (अ) व्यंग्य
- (ब) कहानी
- (स) रेखाचित्र
- (द) निबंध
उत्तर: (स) रेखाचित्र
'बालगोबिन भगत' पाठ रेखाचित्र विधा में लिखा गया है, जो एक व्यक्ति के चरित्र का चित्रण करता है।
-
(x) संस्कृति का परिणाम है
- (अ) अपसंस्कृति
- (ब) सभ्यता
- (स) अशिष्टता
- (द) विभाजन
उत्तर: (ब) सभ्यता
संस्कृति का परिणाम सभ्यता है, क्योंकि संस्कृति के विकास से सभ्यता का निर्माण होता है।
-
(xi) हमारे समाज में “नाक' प्रतीक है
- (अ) सुंदरता का
- (ब) संस्कृति का
- (स) इज्जत का
- (द) समाज का
उत्तर: (स) इज्जत का
समाज में 'नाक' इज्जत का प्रतीक मानी जाती है, जैसे 'नाक कटना' का अर्थ अपमान होना।
-
(xii) हिन्दी का पहला आंचलिक उपन्यास माना जाता है
- (A) जॉर्ज पंचम की नाक
- (ब) देहाती दुनिया
- (स) आपका बंटी
- (द) रामचरितमानस
उत्तर: (ब) देहाती दुनिया
'देहाती दुनिया' को हिंदी का पहला आंचलिक उपन्यास माना जाता है, जो ग्रामीण जीवन पर आधारित है।
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए : 6×1=6
- ( ) किसी भाव, अवस्था, गुण अथवा दशा के नाम को भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
- ( ) जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।
- ( ) वे क्रियाएँ जिनके साथ कर्म प्रयुक्त नहीं होता, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।
- ( ) वे शब्द, जो दो शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं।
- ( ) वे शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में लगकर नया अर्थ का बोध करवाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।
- ( ) हिन्दी में उपसर्ग 22 प्रकार के होते हैं।
3. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : 6×1=6
वर्तमान में राष्ट्र को शारीरिक दृष्टि से मज़बूत, निर्भय तथा ऐसे नवयुवकों की आवश्यकता है जो अपने आप में, अपनी शक्ति में विश्वास करते हों। विवेकानन्द की दृष्टि से नास्तिक वह है जो अपने आप में विश्वास नहीं करता। भारत के राष्ट्रीय आदर्श त्याग और सेवा को अपनाकर ग़रीबों, भूखों और पीड़ितों की सेवा में अपने को अर्पित करना ही राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा है। राष्ट्र भक्ति कोरी भावना नहीं है, उसका आधार विवेक और प्रेम है जिसकी अभिव्यक्ति विवेकपूर्ण कार्य करते हुए बाहरी भेद-भाव को भूलकर हर एक मनुष्य से प्रेम करने में देखी जा सकती है। विवेकानन्द के उपदेश का ध्येय वाक्य है, “उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।”
- (क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका / विवेकानन्द के विचार - (ख) वर्तमान में कैसे युवाओं की आवश्यकता है?
उत्तर: वर्तमान में राष्ट्र को शारीरिक दृष्टि से मज़बूत, निर्भय तथा ऐसे नवयुवकों की आवश्यकता है जो अपने आप में और अपनी शक्ति में विश्वास करते हों। - (ग) राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा क्या है?
उत्तर: भारत के राष्ट्रीय आदर्श त्याग और सेवा को अपनाकर ग़रीबों, भूखों और पीड़ितों की सेवा में अपने को अर्पित करना ही राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा है। - (घ) विवेकानन्द के उपदेश का ध्येय वाक्य क्या है?
उत्तर: विवेकानन्द के उपदेश का ध्येय वाक्य है, “उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।” - (ङ) राष्ट्र भक्ति की भावना का आधार किसे माना गया है?
उत्तर: राष्ट्र भक्ति की भावना का आधार विवेक और प्रेम को माना गया है। - (च) ‘आस्तिक’ शब्द का विपरीतार्थक शब्द गद्यांश में से छाँटकर लिखिए।
उत्तर: ‘आस्तिक’ का विपरीतार्थक शब्द ‘नास्तिक’ है।
4. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (6×1=6)
है कौन ! विघ्न ऐसा जग में, टिक सके आदमी के मग में,
खम ठोक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़ |
मानव जब ज़ोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है |
गुण बड़े एक से एक प्रखर, हैं छिपे मानवों के भीतर,
मेंहदी में जैसे लाली हो, वर्तिका बीच उजियाली हो |
बत्ती जो नहीं जलाता है,
रोशनी नहीं वह पाता है |
-
(क) प्रस्तुत पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: मानव का साहस और परिश्रम (या "मानव की शक्ति")। -
(ख) आदमी के मग में कौन नहीं टिक सकता है?
उत्तर: कोई भी विघ्न (बाधा) आदमी के मार्ग में नहीं टिक सकता। -
(ग) पत्थर कब पानी बन जाता है?
उत्तर: जब मानव जोर लगाता है (अर्थात् कठोर परिश्रम करता है) तब पत्थर भी पानी बन जाता है। -
(घ) रोशनी किसे नहीं मिलती?
उत्तर: जो बत्ती नहीं जलाता (अर्थात् प्रयास नहीं करता), उसे रोशनी नहीं मिलती। -
(ङ) पर्वत के पाँव कब उखड़ जाते हैं?
उत्तर: जब नर (मनुष्य) खम ठोककर (पूरी ताकत से) ठेलता है, तब पर्वत के पाँव उखड़ जाते हैं। -
(च) मेंहदी के बीच क्या छिपा है?
उत्तर: मेंहदी के बीच लाली (रंग) छिपा है, जैसे मानवों के भीतर बड़े गुण छिपे हैं।
खण्ड-ब
निम्नलिखित लघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए : 2×2=4
-
शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए किस प्रकार उपयोगी हैं ? (2)
शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए इस प्रकार उपयोगी हैं कि डुमराँव शहनाई बनाने के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की नरकट से शहनाई बनाई जाती है, जो बहुत मधुर ध्वनि उत्पन्न करती है। इस प्रकार डुमराँव शहनाई को प्रसिद्धि देता है और शहनाई डुमराँव को पहचान देती है।
-
हालदार साहब ने जब नेताजी की मूर्ति को पहली बार देखा तो उनकी दृष्टि में क्या बात खटकती थी ? (2)
हालदार साहब ने जब नेताजी की मूर्ति को पहली बार देखा तो उनकी दृष्टि में यह बात खटकती थी कि मूर्ति पर चश्मा नहीं था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति पर चश्मा होना चाहिए था, लेकिन वहाँ चश्मा न होने से मूर्ति अधूरी लगती थी।
-
छोटे बच्चे की मनोहारी मुसकान देखकर कवि के मन में क्या भाव उमड़ते हैं ? - “यह दंतुरित मुसकान” कविता के आधार पर समझाइए। (2)
छोटे बच्चे की मनोहारी मुसकान देखकर कवि के मन में अनेक भाव उमड़ते हैं। कवि को बच्चे की मुसकान में अपने बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। वह बच्चे की मासूमियत और सरलता से प्रभावित होता है और उसकी मुसकान को सबसे सुंदर और निर्मल मानता है।
-
‘Sere’ कविता का मूल भाव लिखिए। (2)
‘Sere’ कविता का मूल भाव प्रकृति और मानव जीवन के बीच के गहरे संबंध को दर्शाना है। कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों और उनके मानव जीवन पर प्रभाव को चित्रित किया है। यह कविता प्रकृति की सुंदरता और उसके प्रति मनुष्य के लगाव को व्यक्त करती है।
-
गैंगटॉक शहर को देखकर लेखिका को क्या अनुभूति हुई ? (2)
गैंगटॉक शहर को देखकर लेखिका को यह अनुभूति हुई कि यह शहर बहुत सुंदर और शांत है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, हरी-भरी पहाड़ियाँ और स्वच्छ वातावरण देखकर लेखिका का मन प्रसन्न हो गया। उन्हें ऐसा लगा जैसे वे किसी स्वर्गीय स्थान पर आ गई हों।
-
साँप निकलने पर पानी फेंकते बच्चों की क्या प्रतिक्रिया हुई ? “माता का अँचल” पाठ के आधार पर समझाइए। (2)
साँप निकलने पर पानी फेंकते बच्चों की प्रतिक्रिया यह हुई कि वे डर के मारे चिल्लाने लगे और भागने लगे। कुछ बच्चे तो डर के कारण रोने भी लगे। वे सभी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था।
-
“नमक-मिर्च लगाना” मुहावरे का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए। (2)
अर्थ: किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना या उसमें रोचकता लाने के लिए अतिरंजना करना।
वाक्य: राम ने अपनी कहानी में नमक-मिर्च लगाकर सुनाई, जिससे सभी श्रोता हँसते-हँसते लोटपोट हो गए।
S-01-Hindi
खण्ड-स
12. निम्नलिखित पठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए; 4×1=4
आग के आविष्कार में कदाचित पेट की ज्वाला की प्रेरणा एक कारण रही | सूई-धागे के आविष्कार में शायद शीतोष्ण से बचने तथा शरीर को सजाने की प्रवृत्ति का विशेष हाथ रहा | अब कल्पना कीजिए उस आदमी की जिसका पेट भरा है, जिसका तन ढका है, लेकिन जब वह खुले आकाश के नीचे सोया हुआ रात के जगमगाते तारों को देखता है, तो उसको केवल इसलिए नींद नहीं आती क्योंकि वह यह जानने के लिए परेशान है कि आखिर यह मोती भरा थाल क्या है ? पेट भरने और तन ढँकने की इच्छा मनुष्य की संस्कृति की जननी नहीं है | पेट भरा और तन ढँका होने पर भी ऐसा मानव जो वास्तव में संस्कृत है, चुप नहीं बैठ सकता |
- आग के आविष्कार में क्या प्रेरणा रही होगी?
- शरीर को सजाने की प्रवृत्ति किसके आविष्कार का कारण बनी?
- खुले आकाश के नीचे सोए व्यक्ति को नींद क्यों नहीं आती?
- वास्तव में संस्कृत मानव क्या नहीं कर सकता?
उत्तर:
- आग के आविष्कार में पेट की ज्वाला (भूख) की प्रेरणा रही होगी।
- शरीर को सजाने की प्रवृत्ति सूई-धागे के आविष्कार का कारण बनी।
- खुले आकाश के नीचे सोए व्यक्ति को नींद इसलिए नहीं आती क्योंकि वह यह जानने के लिए परेशान है कि आखिर यह मोती भरा थाल (तारों से भरा आकाश) क्या है।
- वास्तव में संस्कृत मानव पेट भरा और तन ढका होने पर भी चुप नहीं बैठ सकता।
अथवा
आज़ाद हिंद फौज के मुकदमे का सिलसिला था | सभी कॉलिजों, स्कूलों, दुकानों के लिए हड़ताल का आह्वान था | जो-जो नहीं कर रहे थे, छात्रों का एक बहुत बड़ा समूह वहाँ जा-जाकर हड़ताल करवा रहा था | शाम को अजमेर का पूरा विद्यार्थी वर्ग चौपड़ (मुख्य बाज़ार का चौराहा) पर इकट्ठा हुआ और फिर हुई भाषणबाज़ी |
- हड़ताल का आह्वान किस सिलसिले में किया गया था?
- जो हड़ताल नहीं कर रहे थे उनके प्रति क्या प्रतिक्रिया थी?
- विद्यार्थी वर्ग कहाँ इकट्ठा हुआ?
- विद्यार्थियों के इकट्ठा होने के बाद क्या हुआ?
उत्तर:
- हड़ताल का आह्वान आज़ाद हिंद फौज के मुकदमे के सिलसिले में किया गया था।
- जो हड़ताल नहीं कर रहे थे, छात्रों का एक बहुत बड़ा समूह वहाँ जा-जाकर उनसे हड़ताल करवा रहा था।
- विद्यार्थी वर्ग अजमेर के चौपड़ (मुख्य बाज़ार का चौराहा) पर इकट्ठा हुआ।
- विद्यार्थियों के इकट्ठा होने के बाद भाषणबाज़ी हुई।
प्रस्तुत पठित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 4×1=4
पद्यांश:
ऊधौ, तुम हो अति बड़भागी |
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी |
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी |ज्यौं जल माँह तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी |
-
(i) गोपियों ने किसे बड़भागी कहा है ?
उत्तर: गोपियों ने उद्धव (ऊधौ) को बड़भागी कहा है।
व्याख्या: गोपियाँ उद्धव को बड़भागी इसलिए कहती हैं क्योंकि वे कृष्ण के संदेशवाहक हैं और उनके सान्निध्य में रहते हैं।
-
(ii) उसे बड़भागी क्यों कहा गया है ?
उत्तर: उद्धव को बड़भागी इसलिए कहा गया है क्योंकि वे कृष्ण के पास रहते हुए भी उनके प्रेम से अछूते हैं और उनका मन अनुरागी नहीं हुआ।
व्याख्या: गोपियाँ कहती हैं कि उद्धव कृष्ण के निकट रहकर भी उनके प्रेम से प्रभावित नहीं हुए, इसलिए वे भाग्यशाली हैं।
-
(iii) “पुरइनि पात” से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर: “पुरइनि पात” का अर्थ है कमल का पत्ता।
व्याख्या: कमल का पत्ता पानी में रहने पर भी गीला नहीं होता, उसी प्रकार उद्धव कृष्ण के समीप रहकर भी उनके प्रेम से अप्रभावित हैं।
-
(iv) तेल की गागरि पानी में डुबोने पर क्या होता है ?
उत्तर: तेल की गागरि को पानी में डुबोने पर उस पर पानी की एक बूँद भी नहीं चिपकती।
व्याख्या: जैसे तेल से भरी गागरि पानी में डूबी रहने पर भी पानी उस पर नहीं लगता, वैसे ही उद्धव कृष्ण के संसर्ग में रहकर भी उनके प्रेम से अलिप्त हैं।
अथवा
पद्यांश:
मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी ।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहासयह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास
-
(i) मधुप गुन-गुना कर क्या कह रहा है ?
उत्तर: मधुप (भौंरा) गुन-गुना कर अपनी कहानी कह रहा है।
व्याख्या: भौंरा अपनी गुंजन के माध्यम से अपने जीवन की कहानी सुनाता है।
-
(ii) पत्तियाँ क्यों गिर रही हैं ?
उत्तर: पत्तियाँ मुरझाकर गिर रही हैं क्योंकि शरद ऋतु आ गई है और पेड़ों की पत्तियाँ सूखकर झड़ने लगी हैं।
व्याख्या: यह प्रकृति का नियम है कि पुरानी पत्तियाँ मुरझाकर गिर जाती हैं, जो जीवन की नश्वरता को दर्शाता है।
-
(iii) अनंत नीलिमा में क्या छिपा है ?
उत्तर: अनंत नीलिमा (असीम नीले आकाश) में असंख्य जीवन-इतिहास छिपे हैं।
व्याख्या: आकाश की विशालता में अनगिनत प्राणियों के जीवन की कहानियाँ समाई हुई हैं।
-
(iv) 'व्यंग्य-मलिन उपहास' से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: 'व्यंग्य-मलिन उपहास' का तात्पर्य है कटु और अपमानजनक हँसी या मजाक।
व्याख्या: कवि कहता है कि जीवन-इतिहास एक-दूसरे का व्यंग्यपूर्ण और मलिन उपहास करते रहते हैं, जो जीवन की विडंबना को दर्शाता है।
प्रश्न 14.
“हालदार साहब भावुक हैं | इतनी-सी बात पर उनकी आँखें भर आईं ।" हालदार साहब की आँखें क्यों भर आईं ? "नेताजी का चश्मा' पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए | ( उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द )
उत्तर: हालदार साहब की आँखें इसलिए भर आईं क्योंकि उन्होंने देखा कि नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाने वाला बालक अब एक जवान हो गया था और वह स्वयं चश्मा पहने हुए था। उस बालक की निष्ठा और समर्पण ने हालदार साहब को भावुक कर दिया। वे यह सोचकर द्रवित हो गए कि बालक ने कितने वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के यह कार्य किया।
अथवा
“लखनबवी अंदाज' व्यंग्य में लेखक ने किस वर्ग पर कटाक्ष किया है ? ( उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द )
उत्तर: 'लखनबवी अंदाज' व्यंग्य में लेखक ने लखनऊ के उस तथाकथित सभ्य और शिष्ट वर्ग पर कटाक्ष किया है जो दिखावटी शिष्टाचार और बात-बात पर 'जी' 'हजूर' कहने की आदत के पीछे अपनी असली कमजोरियों और पाखंड को छिपाता है। यह वर्ग बाहरी तौर पर भले ही सभ्य दिखे, परंतु अंदर से स्वार्थी और संकीर्ण मानसिकता का होता है।
प्रश्न 15.
“Sap सो जो करै सेवकाई | अरि करनी करि करिअ लगाई ।” पंक्ति के आधार पर बताइए परशुराम ने राम के किस कार्य को शत्रु के कार्य के समान बताया है | ( उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द )
उत्तर: परशुराम ने राम के उस कार्य को शत्रु के कार्य के समान बताया जब राम ने शिवजी के धनुष को तोड़ दिया। परशुराम के अनुसार, एक सेवक (राम) को अपने स्वामी (शिव) के प्रति सेवा भाव रखना चाहिए, न कि उनके धनुष को तोड़कर शत्रुता का काम करना चाहिए। इसलिए उन्होंने राम के इस कृत्य को शत्रु के समान बताया।
अथवा
सूर्यकान्त त्रिपाठी “निराला' रचित कविता ‘ae नहीं रही है' में वर्णित फागुन की मादकता का वर्णन कीजिए । ( उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द )
उत्तर: 'अब नहीं रही है' कविता में निराला जी ने फागुन की मादकता का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है। फागुन के मौसम में प्रकृति पूरी तरह से मस्त और उन्मत्त हो जाती है। चारों ओर बहार छा जाती है, पेड़-पौधे नए पत्तों और फूलों से लद जाते हैं, और वातावरण में एक अलग ही उमंग और उल्लास का संचार होता है। यह मादकता मन को मोह लेने वाली होती है।
प्रश्न 16.
तुलसीदास जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व के बारे में लिखिए | ( उत्तर सीमा लगभग 60 शब्द )
उत्तर: तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के महान कवि थे। उनका व्यक्तित्व सरल, भक्त और दयालु था। वे राम भक्ति में लीन रहते थे। उनका कृतित्व अत्यंत विशाल है। उन्होंने 'रामचरितमानस', 'विनय पत्रिका', 'दोहावली' आदि अनेक ग्रंथों की रचना की। 'रामचरितमानस' को हिंदी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ माना जाता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति और नैतिकता का प्रचार किया।
अथवा
यशपाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्ब के बारे में लिखिए | ( उत्तर सीमा लगभग 60 शब्द )
उत्तर: यशपाल जी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कहानीकार और उपन्यासकार थे। उनका व्यक्तित्व विद्रोही और समाज सुधारक का था। वे सामाजिक रूढ़ियों और अन्याय के खिलाफ थे। उनके कृतित्व में 'दादा कॉमरेड', 'दिव्या', 'मेरी तेरी उसकी बात' जैसे उपन्यास और 'विश्वास', 'राजा का न्याय' जैसी कहानियाँ शामिल हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाया और समाज की विसंगतियों को उजागर किया।
खण्ड-द
7.
“जाने कितना ऋण है हम पर इन नदियों का, इन शिखरों का I” 'साना-साना हाथ जोड़ि' - पाठ के आधार पर बताइए कि मणि ने ऐसा क्यों कहा होगा । (उत्तर सीमा लगभग 60 शब्द)
उत्तर: मणि ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर रही थी। नदियाँ और शिखर हमें जीवनदायिनी संसाधन देते हैं—जल, हवा, और सौंदर्य। मणि को लगता है कि हम इनके ऋण को कभी चुका नहीं सकते, इसलिए उन्होंने यह भाव प्रकट किया।
अथवा
“एक दिन मैंने हिरोशिमा पर कविता लिखी - जापान में नहीं, भारत लौटकर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे ।” अज्ञेय ने हिरोशिमा में तत्काल कुछ न लिखकर, भारत लौटने पर कविता क्यों लिखी ? (उत्तर सीमा लगभग 60 शब्द)
उत्तर: अज्ञेय ने हिरोशिमा में तत्काल कविता नहीं लिखी क्योंकि वहाँ की भयावहता और पीड़ा को देखकर वे स्तब्ध थे। भारत लौटने पर, रेलगाड़ी में बैठे-बैठे उन्हें उस त्रासदी पर गहराई से विचार करने का समय मिला, जिससे उनकी भावनाएँ कविता के रूप में प्रकट हुईं।
8. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए :
(क) कन्या भ्रूण-हत्या - सामाजिक अभिशाप
- प्रस्तावना
- कन्या भ्रूण-हत्या के कारण
- कन्या भ्रूण-हत्या के दुष्परिणाम
- कन्या भ्रूण-हत्या रोकने के उपाय
- उपसंहार
(ख) शिक्षा के क्षेत्र में मोबाइल की उपयोगिता
- प्रस्तावना
- मोबाइल का शिक्षा के क्षेत्र में उपयोग
- मोबाइल प्रयोग के दुष्परिणाम
- छात्रों पर मोबाइल का प्रभाव
- उपसंहार
S-01-Hindi
प्रश्न 19: पत्र लेखन
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए:
विकल्प (क): पुस्तकालय सप्ताह मनाने हेतु प्रार्थना पत्र
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नाहरपुरा
विषय: विद्यालय में पुस्तकालय सप्ताह मनाने हेतु प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा दसवीं का छात्र राहुल हूँ। पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं और ज्ञान का भंडार हैं। पुस्तकों के प्रति छात्रों में रुचि जागृत करने तथा पठन-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हमारे विद्यालय में 'पुस्तकालय सप्ताह' मनाए जाने की अत्यंत आवश्यकता है।
इस सप्ताह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे निबंध लेखन, वाद-विवाद, पुस्तक समीक्षा, कहानी वाचन आदि का आयोजन किया जा सकता है। इससे छात्रों का बौद्धिक विकास होगा और उनमें पुस्तकों के प्रति लगाव बढ़ेगा।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारे विद्यालय में पुस्तकालय सप्ताह मनाने की कृपा करें।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
राहुल
कक्षा दसवीं
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नाहरपुरा
दिनांक: ...............
विकल्प (ख): अनुशासन का महत्व बताते हुए मित्र को पत्र
प्रिय मित्र राकेश,
सप्रेम नमस्ते।
कल ही तुम्हारा पत्र मिला। तुमने अपनी पढ़ाई में मन न लगने की बात लिखी है। मैं समझ गया हूँ कि तुम किस समस्या से गुज़र रहे हो। मैं तुम्हें जीवन में अनुशासन का महत्व समझाना चाहता हूँ।
अनुशासन का अर्थ है नियमों और मर्यादाओं में रहकर कार्य करना। यह जीवन की सफलता की कुंजी है। बिना अनुशासन के जीवन उस नाव के समान है जिसका कोई खेवैया न हो। अनुशासन ही हमें समय पर कार्य करना, लक्ष्य प्राप्त करना और एक सफल इंसान बनना सिखाता है।
यदि हम अपने दैनिक जीवन में अनुशासन का पालन करेंगे, तो हम अपने समय का सदुपयोग कर पाएंगे और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे। अनुशासन हमें आत्म-नियंत्रण, धैर्य और दृढ़ता जैसे गुण सिखाता है।
आशा है तुम मेरी बात समझोगे और अपने जीवन में अनुशासन को अपनाओगे।
तुम्हारा मित्र,
अर्जुन
रामगढ़
दिनांक: ...............
प्रश्न 20: विज्ञापन लेखन
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर विज्ञापन लिखिए:
विकल्प (क): महिला उद्यमिता केन्द्र द्वारा अचार और पापड़ की बिक्री हेतु विज्ञापन
महिला उद्यमिता केन्द्र
स्वादिष्ट अचार और पापड़
अब उपलब्ध!
✔ घर जैसा शुद्ध और स्वादिष्ट अचार
✔ विभिन्न प्रकार के पापड़ (आलू, मूंग, साबूदाना)
✔ बिना मिलावट के तैयार
✔ उचित मूल्य पर
संपर्क करें:
महिला उद्यमिता केन्द्र
दूरभाष: .....................
आओ, स्वाद का आनंद लें और महिला सशक्तिकरण में भागीदार बनें!
विकल्प (ख): अनुपयोगी वस्तुओं से निर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी हेतु विज्ञापन
आमंत्रण
अनुपयोगी वस्तुओं से निर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी
देखिए कैसे बेकार वस्तुएँ बनती हैं उपयोगी!
✔ पुराने अखबार से बनी वस्तुएँ
✔ प्लास्टिक की बोतलों से बने सजावटी सामान
✔ टूटे-फूटे बर्तनों से बनी कलाकृतियाँ
✔ और भी बहुत कुछ...
स्थान:
हमारे विद्यालय प्रांगण में
दिनांक:
.......................
समय:
प्रातः 10:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक
आप सभी का सादर स्वागत है!