RBSE Class 10th 2025 Hindi-S-01-2025 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2025
Subject Hindi-S-01-2025
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2025 2025 solved Previous Year Question Papers

माध्यमिक परीक्षा, 2025
SECONDARY EXAMINATION, 2025

हिन्दी

समय : 3 घण्टे 5 मिनट    पूर्णांक : 80

प्रश्न पुस्तिका क्रमांक : S-01-Hindi

प्रश्नों की संख्या : 20    मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 11


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।

[Turn Over]

खण्ड - अ

निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : (2×5=10)

  1. कर्म के आधार पर क्रिया के कितने भेद हैं ?

    • a) दो
    • b) तीन
    • c) चार
    • d) एक

    उत्तर: a) दो

    व्याख्या: कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं – सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया।

  2. निम्नांकित में से सर्वनाम है -

    • अ) वह
    • ब) क्रिया
    • स) ताल
    • द) गति

    उत्तर: अ) वह

    व्याख्या: 'वह' एक सर्वनाम शब्द है, जो किसी व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयुक्त होता है।

  3. अमीरुद्दीन का जन्म हुआ था-

    • अ) बंगाल में
    • ब) पला में
    • स) गया में
    • द) भोपाल में

    उत्तर: स) गया में

    व्याख्या: अमीरुद्दीन का जन्म बिहार के गया जिले में हुआ था।

  4. बालगोबिन भगत 'गुरु' किसे मानते थे ?

    • अ) राम को
    • ब) कबीर को
    • स) अपने पुत्र को
    • द) अपनी पतोह को

    उत्तर: ब) कबीर को

    व्याख्या: बालगोबिन भगत कबीर को अपना गुरु मानते थे और उनके आदर्शों पर चलते थे।

  5. 'नेताजी का चश्मा' पाठ की विधा है -

    • अ) कहानी
    • ब) कविता
    • स) नाटक
    • द) उपन्यास

    उत्तर: अ) कहानी

    व्याख्या: 'नेताजी का चश्मा' एक कहानी है, जो हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध रचना है।

  6. 'एक कहानी यह भी' के लेखक का नाम है -

    • अ) मुंशी प्रेमचंद
    • ब) हरिवंश राय बच्चन
    • स) गोपालदास 'नीरज'
    • द) मन्नू भंडारी

    उत्तर: द) मन्नू भंडारी

    व्याख्या: 'एक कहानी यह भी' मन्नू भंडारी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध आत्मकथात्मक कहानी है।


&-0-मांधवतां

vii) परशुराम आपे से बाहर क्यों हो गए?

  • अ) शिव-धनुष को खंडित देखकर ✓ सही उत्तर
  • ब) अकारण ही
  • स) राम के मोहक रूप को देखकर
  • द) राजा जनक को देखकर

व्याख्या: परशुराम शिव-धनुष के टूटने पर क्रोधित हुए क्योंकि वह शिव के भक्त थे और धनुष को पवित्र मानते थे।

viii) “उत्साह' कविता में कवि ने संबोधित किया है -

  • अ) पथिक को
  • ब) बादल को ✓ सही उत्तर
  • स) स्वयं को

व्याख्या: 'उत्साह' कविता में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ने बादल को संबोधित करते हुए उत्साह और क्रांति का आह्वान किया है।

ix) सूरदास के काव्य में किस भाषा का निखरा हुआ रूप है?

  • अ) ब्रजभाषा ✓ सही उत्तर
  • ब) संस्कृत
  • स) अवधी
  • द) प्राकृत

व्याख्या: सूरदास ने अपनी रचनाओं में ब्रजभाषा का प्रयोग किया, जो उनके काव्य में सर्वोत्तम रूप में निखरी है।

x) “मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी' उपर्युक्त पंक्तियों में अपनी कहानी कौन कह रहा है?

  • अ) भौंरा
  • ब) चिड़िया
  • स) तुलसीदास
  • द) पुष्प ✓ सही उत्तर

व्याख्या: ये पंक्तियाँ 'मधुप गुन-गुना कर कह जाता' कविता से हैं, जिसमें पुष्प अपनी कहानी कह रहा है।

xi) 'भोलानाथ' का असली नाम क्या था?

  • अ) कन्हैया
  • ब) तारकेश्वरनाथ
  • स) बम-भोला
  • द) राम ✓ सही उत्तर

व्याख्या: 'भोलानाथ' का असली नाम राम था, जैसा कि पाठ में वर्णित है।

xii) "मैं क्यों लिखता हूँ” पाठ के लेखक का नाम है -

  • अ) प्रसाद
  • ब) निराला
  • स) पंत
  • द) अज्ञेय ✓ सही उत्तर

व्याख्या: 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के लेखक अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) हैं।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए : [6×1=6]

  1. स्वर सन्धि तीन प्रकार की होती है।
  2. 'यथाशक्ति' शब्द में अव्ययीभाव समास है।
  3. 'विदेश' शब्द में वि उपसर्ग है।
  4. वे विशेषण, जो किसी पदार्थ की निश्चित या अनिश्चित मात्रा, परिमाण, नाप या तौल आदि को बोध कराते हैं, उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।
  5. किसी भाव, अवस्था, गुण अथवा दशा के नाम को भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
  6. 'पालनहार' शब्द में हार प्रत्यय है।

3. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : [6×1=6]

ऋतु के अनुसार ही त्योहारों का समावेश किया गया है। भारत में हर दो महीने बाद ऋतु परिवर्तन होता है। वसन्त के त्योहार में उद्यान और उपवनों में वृक्ष, लता और गुल्मों को देखकर किसका मन नहीं करेगी। वर्षा ऋतु भी कम मन-मोहक नहीं होती। वर्षा ऋतु में तीज, नागपंचमी और रक्षाबंधन के त्योहार खूब धूम-धाम से मनाए जाते हैं। वर्षा की ऋतु में तीज का त्योहार नारी मन को उद्देलित किए बिना नहीं रहता। वे सुख-सौभाग्य की कामना करते हुए यह त्योहार मनाती हैं। रक्षाबंधन भाई-बहिन के अटूट प्रेम का प्रतीक है।

  1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
    उत्तर: ऋतु और त्योहार
  2. भारत में ऋतु परिवर्तन कब होता है?
    उत्तर: भारत में हर दो महीने बाद ऋतु परिवर्तन होता है।
  3. वर्षा ऋतु में कौन-कौन से त्योहार आते हैं?
    उत्तर: वर्षा ऋतु में तीज, नागपंचमी और रक्षाबंधन के त्योहार आते हैं।
  4. रक्षाबंधन का त्योहार किसका प्रतीक है?
    उत्तर: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहिन के अटूट प्रेम का प्रतीक है।
  5. तीज का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
    उत्तर: तीज का त्योहार सुख-सौभाग्य की कामना करते हुए मनाया जाता है।
  6. 'दुर्भाग्य' शब्द का विपरीतार्थक शब्द गद्यांश में से छाँटकर लिखिए।
    उत्तर: 'सौभाग्य'

4. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।

तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये पत्थर ये चट्टाने
ये झूठे बंधन टूटे
तो धरती को हम जानें

सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है
अपने मन के मैदान पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे-आधे गाने

  1. उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

    उत्तर: "तोड़ो" या "बंधन मुक्ति"

  2. कवि क्या तोड़ने की बात कर रहा है?

    उत्तर: कवि पत्थरों, चट्टानों और झूठे बंधनों को तोड़ने की बात कर रहा है।

  3. कवि पत्थर और चट्टानें तोड़ने की बात क्यों कहता है?

    उत्तर: कवि पत्थर और चट्टानें तोड़ने की बात इसलिए कहता है क्योंकि ये रूढ़ियों, बाधाओं और झूठे बंधनों के प्रतीक हैं। इन्हें तोड़कर ही सत्य और स्वतंत्रता को जाना जा सकता है।

  4. अपने मन के मैदानों पर क्या व्याप्त है?

    उत्तर: अपने मन के मैदानों पर ऊब (उदासी या खालीपन) व्याप्त है।

  5. धरती को हम कब जानेंगे?

    उत्तर: जब झूठे बंधन टूट जाएंगे, तब हम धरती को (सच्चाई को) जानेंगे।

  6. रेखांकित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए। (पंक्तियाँ: "सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है / अपने मन के मैदान पर व्यापी कैसी ऊब है")

    उत्तर: इन पंक्तियों का आशय है कि मिट्टी में जीवन देने वाला रस (पोषण) होता है, जिससे घास उगती है। लेकिन मनुष्य के मन के मैदान (भावनाओं और विचारों) में ऊब (खालीपन या असंतोष) छाया हुआ है। कवि कहना चाहता है कि जैसे मिट्टी में रस है, वैसे ही जीवन में संभावनाएँ हैं, परंतु हम अपने मन को बंधनों में बाँधकर ऊब महसूस कर रहे हैं।

खण्ड - ब

निम्नलिखित लघुत्तरीय प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए।

  1. यह परंपरा कौन-सी है? "काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन और अद्भुत परंपरा है।" 'तौबतखाने में इबादत' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

    यह परंपरा काशी में संगीत आयोजन की प्राचीन परंपरा है, जिसमें हर साल सावन मास में बड़े पैमाने पर संगीत समारोह होते थे। इसमें देशभर के कलाकार भाग लेते थे और यह आयोजन पूरे एक महीने चलता था।

  2. मन्नू भंडारी ने अपनी माँ को धरती से ज्यादा धैर्यवान और सहनशील क्यों कहा है? 'एक कहानी यह भी' पाठ के आधार पर समझाइए।

    मन्नू भंडारी ने अपनी माँ को धरती से ज्यादा धैर्यवान और सहनशील इसलिए कहा क्योंकि उनकी माँ ने पिता के अत्याचार, गरीबी और सामाजिक बंधनों को चुपचाप सहन किया। वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर कठिनाई को मुस्कुराकर झेलती रहीं।

  3. 'संगतकार' कविता की मूल संवेदना लिखिए।

    'संगतकार' कविता की मूल संवेदना यह है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए पीछे कई लोगों का योगदान होता है। ये संगतकार बिना प्रसिद्धि की चाह के मुख्य कलाकार का साथ देते हैं और उनकी कला को निखारते हैं।

  4. 'बादल' कविता में निराला ने बादल को किसका प्रतीक बताया है?

    निराला ने 'बादल' कविता में बादल को क्रांति और विद्रोह का प्रतीक बताया है। बादल शोषण और अन्याय के खिलाफ विद्रोह का संदेश देता है तथा समाज में नवनिर्माण और परिवर्तन लाने वाली शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

  5. भोलानाथ को खाना खिलाने के लिए मइयाँ क्या-क्या उपक्रम करती थी? 'तीसरी कसम का अँचल' पाठ के आधार पर बताइए।

    मइयाँ भोलानाथ को खाना खिलाने के लिए तरह-तरह के उपक्रम करती थी। वह पहले उसे लाड़-प्यार करती, फिर डांटती-धमकाती, कभी झूठ-मूठ का रूठ जाती और कभी उसे कहानियाँ सुनाकर या खिलौने दिखाकर खाना खिलाती थी।

  6. अज्ञेय के अनुसार अनुभव और अनुभूति में क्या अंतर है? 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर समझाइए।

    अज्ञेय के अनुसार अनुभव बाहरी घटनाओं और परिस्थितियों से प्राप्त ज्ञान है, जो सभी को समान रूप से हो सकता है। जबकि अनुभूति उस अनुभव के प्रति व्यक्ति की आंतरिक प्रतिक्रिया है, जो व्यक्तिगत और गहरी होती है। अनुभूति में भावनाओं और संवेदनाओं का समावेश होता है।

  7. 'गणेश करना' मुहावरे का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।

    अर्थ: किसी काम को शुरू करने से पहले उसकी सफलता के लिए भगवान गणेश का स्मरण करना या शुभ मुहूर्त देखना।
    वाक्य: परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले उसने गणेश करना किया और फिर पढ़ाई में जुट गया।

खण्ड-स

2. निम्नलिखित पठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : [4×1=4]

अब हालदार साहब को बात कुछ-कुछ समझ में आई | एक चश्मेवाला है जिसका नाम कैप्टन है । उसे नेताजी की बिना चश्मेवाली मूर्ति बुरी लगती है । बल्कि आहत करती है, मानो चश्मे के बगैर नेताजी को असुविधा हो रही हो | इसलिए वह अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से एक नेताजी की मूर्ति पर फिट कर देता है । लेकिन जब कोई ग्राहक आता है और उसे वैसे ही फ्रेम की दरकार होती है जैसा मूर्ति पर लगा है तो कैप्टन चश्मेवाला मूर्ति पर लगा फ्रेम संभवतः नेताजी से क्षमा माँगते हुए-लाकर ग्राहक को दे देता है और बाद में नेताजी को दूसरा फ्रेम लौटा देता है ।
  1. i) चश्मेवाले का क्या नाम था ? [1]

    उत्तर: चश्मेवाले का नाम कैप्टन था।

  2. ii) चश्मेवाले को कौन सी चीज बुरी लगती थी ? [1]

    उत्तर: चश्मेवाले को नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति बुरी लगती थी।

  3. iii) नेताजी की असुविधा को कैप्टन ने किस प्रकार दूर किया ? [1]

    उत्तर: कैप्टन ने अपनी दुकान में उपलब्ध फ्रेमों में से एक फ्रेम नेताजी की मूर्ति पर फिट करके उनकी असुविधा दूर की।

  4. iv) चश्मेवाला मूर्ति पर लगा फ्रेम क्यों उतार लेता था ? [1]

    उत्तर: चश्मेवाला मूर्ति पर लगा फ्रेम इसलिए उतार लेता था क्योंकि जब कोई ग्राहक उसी प्रकार के फ्रेम की माँग करता था, तो वह उसे बेचने के लिए मूर्ति से उतार लेता था।


अथवा

जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता | एक आधुनिक उदाहरण लें । न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया | वह संस्कृत मानव था | आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही; लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान है जिनसे न्यूटन शायद अपरिचित ही रहा ।
  1. i) वास्तविक संस्कृत व्यक्ति कौन है ? [1]

    उत्तर: वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वह है जिसकी बुद्धि या विवेक ने किसी नए तथ्य का दर्शन किया हो।

  2. ii) संस्कृत व्यक्ति की संतान क्या नहीं कहला सकती ? [1]

    उत्तर: संस्कृत व्यक्ति की संतान संस्कृत नहीं कहला सकती, भले ही वह सभ्य बन जाए।

  3. iii) न्यूटन ने किसका आविष्कार किया था ? [1]

    उत्तर: न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया था।

  4. iv) भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी किससे परिचित है ? [1]

    उत्तर: भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत से परिचित है।

प्रस्तुत पठित पद्मांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होत एक दास तुम्हारा।
आयेसु कह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकसी करि करिअ लराई।
देखि तुम्हारि यह सठता। राम सिवधनु तोरा।
सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।

  1. उपर्युक्त पद्यांश के पाठ का नाम लिखिए।

    इस पद्यांश का पाठ का नाम रामचरितमानस (बालकाण्ड) है।

  2. सेवक का कार्य क्या है?

    सेवक का कार्य सेवा करना है, न कि स्वामी से लड़ाई करना।

  3. शिवधनुष तोड़ने वाले को परशुराम ने किसके समान बताया है?

    परशुराम ने शिवधनुष तोड़ने वाले (राम) को सहस्रबाहु के समान बताया है।

  4. राम ने परशुराम को अपना परिचय क्या कहकर दिया?

    राम ने परशुराम को अपना परिचय दास कहकर दिया।


अथवा

उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की।
अरे खिल-खिला कर हँसते होने वाली उन बातों की।
मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते वह सुख जो भाग गया।

  1. इन पंक्तियों की कविता का नाम लिखिए।

    इन पंक्तियों की कविता का नाम आत्मकथा है।

  2. कवि क्या गाने में असमर्थ है?

    कवि उज्ज्वल गाथा और मधुर चाँदनी रातों तथा खिल-खिला कर हँसने वाली बातों को गाने में असमर्थ है।

  3. कवि क्यों जाग गया?

    कवि सुख का स्वप्न देखकर जाग गया।

  4. कवि को क्या नहीं मिला?

    कवि को वह सुख नहीं मिला जिसका उसने स्वप्न देखा था और जो आलिंगन में आते-आते भाग गया।

प्रश्न 4: बालगोबिन भगत की मृत्यु कैसे हुई ? – पाठ के आधार पर समझाइए।

(उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द)

उत्तर: बालगोबिन भगत की मृत्यु बहुत ही सहज और शांतिपूर्ण ढंग से हुई। वे प्रतिदिन की तरह स्नान-ध्यान करके भजन गा रहे थे। अचानक वे भजन गाते-गाते ही धरती पर लेट गए और प्रभु के चरणों में लीन हो गए। उनकी मृत्यु में कोई कष्ट या व्याकुलता नहीं थी, बल्कि यह एक साधु की तरह समाधि लेने जैसी थी।

अथवा

प्रश्न 4: लेखक के सैकंड क्लास के डिब्बे में चढ़ने पर, पहले से वहाँ बैठे नवाब साहब पर क्या प्रतिक्रिया हुई ? 'नवाब का अंदाज' पाठ के आधार पर समझाइए।

(उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द)

उत्तर: जब लेखक सैकंड क्लास के डिब्बे में चढ़े, तो पहले से बैठे नवाब साहब ने उन्हें देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वे बिल्कुल उदासीन और तटस्थ रहे। उन्होंने न तो लेखक का स्वागत किया और न ही कोई बातचीत शुरू की। उनका यह अंदाज़ दिखाता था कि वे अपनी ही दुनिया में मग्न हैं और दूसरों से कोई मेल-जोल नहीं रखना चाहते।

प्रश्न 5: 'हरि हारिल की लकरी' – गोपियों ने हरि को 'हारिल की लकरी' क्यों कहा है ? पाठ के आधार पर समझाइए।

(उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द)

उत्तर: गोपियों ने श्रीकृष्ण को 'हारिल की लकरी' इसलिए कहा है क्योंकि जिस प्रकार हारिल पक्षी अपनी चोंच में एक लकड़ी लेकर उड़ता है और उसे कभी नहीं छोड़ता, उसी प्रकार गोपियाँ श्रीकृष्ण को अपने हृदय से कभी अलग नहीं कर सकतीं। श्रीकृष्ण उनके लिए उस लकड़ी के समान हैं, जिसे पकड़कर वे जीवन की डगर पार कर रही हैं।

अथवा

प्रश्न 5: 'दूसरी मुसकान' कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

(उत्तर सीमा लगभग 50-60 शब्द)

उत्तर: 'दूसरी मुसकान' कविता में कवि ने एक ऐसे व्यक्ति की मुस्कान का वर्णन किया है जो बाहरी रूप से सुखी दिखता है, लेकिन उसकी मुस्कान के पीछे गहरी पीड़ा और अकेलापन छिपा है। यह मुस्कान दिखावटी है, जो समाज को धोखा देने के लिए है। कवि कहते हैं कि यह दूसरी मुस्कान असली नहीं है, बल्कि एक मुखौटा है जो अंदर की टूटन को छुपाता है।

प्रश्न 6 (i): 'मंगलेश डबराल' अथवा 'सूर्यकांत त्रिपाठी निराला' के कृतित्व के बारे में लिखिए।

(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)

उत्तर: मंगलेश डबराल हिंदी के प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'हम जो देखते हैं', 'पहाड़ पर लालटेन', 'आवाज़ भी एक जगह है' आदि शामिल हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक यथार्थ और संवेदनशीलता का गहरा चित्रण मिलता है।

अथवा

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ 'राम की शक्ति पूजा', 'अनामिका', 'परिमल', 'कुकुरमुत्ता' आदि हैं। उन्होंने कविता, उपन्यास, कहानी और निबंध सभी विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 6 (ii): 'बटुकेश्वर मिश्र' अथवा 'भदंत आनंद कौसल्यायन' के कृतित्व का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)

उत्तर: बटुकेश्वर मिश्र हिंदी के प्रसिद्ध कवि और लेखक हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'पृथ्वीराज रासो', 'हिंदी साहित्य का इतिहास' आदि शामिल हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अथवा

भदंत आनंद कौसल्यायन बौद्ध धर्म के विद्वान और लेखक थे। उनकी प्रमुख कृतियों में 'बौद्ध धर्म और साहित्य', 'भारतीय संस्कृति और बौद्ध धर्म' आदि शामिल हैं। उन्होंने बौद्ध दर्शन और साहित्य के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

खण्ड - द

17. 'खेदुपम' के एक किलोमीटर के एरिये के बारे में जितेन ने लेखिका को क्या बताया? 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)

जितेन ने लेखिका को बताया कि 'खेदुपम' का एक किलोमीटर का एरिया बहुत ही सुंदर और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहाँ हरे-भरे पेड़-पौधे, फूल और शांत वातावरण है। यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है और यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता मन को मोह लेती है।

अथवा

"एक ही में मैं स्वयं हिरोशिमा के विस्फोट का stem बन गया।" लेखक को ऐसा कब अनुभव हुआ? 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर समझाइये। (उत्तर सीमा 80 शब्द)

लेखक को ऐसा अनुभव तब हुआ जब वह हिरोशिमा पर हुए परमाणु बम विस्फोट के बारे में लिख रहे थे। उन्होंने उस घटना को इतनी गहराई से महसूस किया कि वे स्वयं को उस विस्फोट का हिस्सा समझने लगे। लेखन के दौरान उनकी कल्पना और भावनाएँ इतनी प्रबल हो गईं कि वे उस दुखद घटना के साक्षी बन गए।

18. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए।

1) विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्त्व

प्रस्तावना

विद्यार्थी जीवन मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और निर्माण काल होता है। इस समय में सीखी गई बातें जीवन भर साथ रहती हैं। अनुशासन विद्यार्थी जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जो विद्यार्थी को सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है।

अनुशासन का अर्थ और आवश्यकता

अनुशासन का अर्थ है नियमों और मर्यादाओं का पालन करना। यह विद्यार्थी को समय का सदुपयोग करना, लक्ष्य प्राप्ति के लिए मेहनत करना और सामाजिक मूल्यों को समझना सिखाता है। अनुशासन के बिना विद्यार्थी जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्त्व

अनुशासन विद्यार्थी को समय प्रबंधन, आत्म-नियंत्रण और लक्ष्य प्राप्ति में सहायता करता है। यह उन्हें पढ़ाई, खेल और अन्य गतिविधियों में संतुलन बनाने में मदद करता है। अनुशासित विद्यार्थी ही जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

अनुशासन की उपयोगिता व लाभ

अनुशासन से विद्यार्थी में आत्मविश्वास बढ़ता है, वे समय का सदुपयोग करते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं। यह उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करता है और समाज में सम्मान दिलाता है।

उपसंहार

अतः विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है। यह विद्यार्थी को सफल और सार्थक जीवन जीने की कला सिखाता है। प्रत्येक विद्यार्थी को अनुशासन को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

2) स्वतंत्रता के 70 वर्ष-क्या खोया, क्या पाया?

प्रस्तावना

भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिली थी। स्वतंत्रता के 70 वर्षों में हमारे देश ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। इस अवधि में हमने कुछ खोया भी है और कुछ पाया भी है।

स्वतंत्रता का अर्थ

स्वतंत्रता का अर्थ केवल गुलामी से मुक्ति नहीं है, बल्कि अपने देश को अपने तरीके से चलाने का अधिकार है। यह हमें अपने विचारों को व्यक्त करने, अपने अधिकारों का उपयोग करने और अपने भविष्य का निर्माण करने की स्वतंत्रता देती है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् देश की स्थिति

स्वतंत्रता के बाद भारत को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता जैसी समस्याएँ आज भी मौजूद हैं। हमने अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को कुछ हद तक खोया है।

विकास की ओर बढ़ते कदम तथा भविष्य

इन 70 वर्षों में भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व प्रगति की है। हमने अंतरिक्ष में कदम रखा, आर्थिक शक्ति बने और डिजिटल क्रांति का नेतृत्व किया। हमारा भविष्य उज्ज्वल है और हम विकास की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

उपसंहार

स्वतंत्रता के 70 वर्षों में हमने बहुत कुछ पाया है, लेकिन कुछ खोया भी है। हमें अपनी कमियों को सुधारते हुए अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए और एक बेहतर भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए।

प्रश्न पत्र: हिंदी (S-01-2025) – पृष्ठ 11

खंड-द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए:

  1. सैनिक शिक्षा की आवश्यकता
    • प्रस्तावना
    • सैनिक शिक्षा की अवधारणा और आवश्यकता
    • भारत में प्रमुख सैनिक शिक्षण संस्थाएँ
    • व्यक्तित्व विकास में सैनिक शिक्षा का महत्त्व
    • उपसंहार
  2. यदि मैं प्रधानमंत्री होता
    • प्रस्तावना
    • प्रधानमंत्री के पद का महत्त्व, दायित्व और अधिकार
    • मैं प्रधानमंत्री क्यों बनना चाहता हूँ
    • प्रधानमंत्री के रूप में भविष्य की योजनाएँ
    • उपसंहार

खंड-इ: पत्र लेखन

  1. स्वयं को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पटना का छात्र नरेन्द्र मानते हुए अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाने हेतु एक प्रार्थना-पत्र लिखिए । [4]

    प्रार्थना-पत्र

    सेवा में,
    श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
    राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,
    पटना।

    विषय: शैक्षणिक भ्रमण हेतु प्रार्थना।

    महोदय,

    सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा दसवीं का छात्र हूँ। हमारी कक्षा के सभी विद्यार्थी शैक्षणिक भ्रमण पर जाना चाहते हैं। इस भ्रमण का उद्देश्य ऐतिहासिक और वैज्ञानिक स्थलों का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करना है, जिससे हमारा पाठ्यक्रम अधिक रोचक और व्यावहारिक बन सके।

    हमने पटना के निकटवर्ती क्षेत्रों में स्थित कुछ महत्वपूर्ण स्थलों का चयन किया है। इस भ्रमण से हमें अपने ज्ञान को बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

    अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमें शैक्षणिक भ्रमण पर जाने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें।

    आपका आज्ञाकारी शिष्य,
    नरेन्द्र
    कक्षा दसवीं

    अथवा

    स्वयं को लखनऊ निवासी बंदिता मानते हुये अपनी मित्र दिल्ली निवासी रानी को अवकाश में लखनऊ भ्रमण हेतु आमंत्रित करते हुए एक पत्र लिखिए । [4]

    पत्र

    परीक्षा भवन,
    लखनऊ
    दिनांक: 15 जनवरी, 2025

    प्रिय मित्र रानी,

    सप्रेम नमस्ते।

    आशा है तुम वहाँ दिल्ली में स्वस्थ और प्रसन्न होगी। मैं यहाँ लखनऊ में कुशल हूँ। तुम्हें यह जानकर खुशी होगी कि हमारी वार्षिक परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी हैं और अब हमारे विद्यालय में अवकाश चल रहा है।

    मैं चाहती हूँ कि तुम इस अवकाश में कुछ दिन लखनऊ आकर मेरे साथ बिताओ। हम यहाँ के ऐतिहासिक स्थलों जैसे भूल-भुलैया, बड़ा इमामबाड़ा और रूमी दरवाजा घूम सकते हैं। साथ ही, हम लखनऊ के प्रसिद्ध व्यंजनों का भी आनंद ले सकते हैं।

    मुझे तुम्हारे आने की प्रतीक्षा रहेगी। कृपया अपने आगमन की सूचना मुझे पहले ही दे देना ताकि मैं तुम्हें स्टेशन पर लेने आ सकूँ।

    तुम्हारी प्रिय सखी,
    बंदिता

    पता: बंदिता, लखनऊ

खंड-फ: विज्ञापन लेखन

  1. स्वयं को मथुरा निवासी सुरेश मानते हुए अपनी पुरानी साइकिल की बिक्री हेतु एक विज्ञापन उचित प्रारूप में लिखिए । [4]

    विज्ञापन

    बिक्री हेतु पुरानी साइकिल

    मथुरा निवासी सुरेश अपनी पुरानी साइकिल बेचना चाहता हूँ। साइकिल अच्छी स्थिति में है और सभी पार्ट्स कार्यशील हैं।

    विशेषताएँ:

    • ब्रांड: हीरो
    • रंग: काला
    • खरीद: 2 वर्ष पूर्व
    • कीमत: ₹2,500 (मोल-भाव संभव)

    रुचि रखने वाले कृपया संपर्क करें:
    सुरेश, मोबाइल नंबर: 9876543210, मथुरा।

    अथवा

    निगम हरिद्वार की ओर से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने हेतु एक विज्ञापन उचित प्रारूप में लिखिए । [4]

    विज्ञापन

    जल संरक्षण – हमारी जिम्मेदारी

    निगम हरिद्वार की ओर से सभी नागरिकों से अपील है कि जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहें। पानी की हर बूँद कीमती है, इसे व्यर्थ न बहाएँ।

    जल संरक्षण के उपाय:

    • नल को खुला न छोड़ें।
    • वर्षा जल संचयन करें।
    • पानी का पुन: उपयोग करें।
    • पाइपों की लीकेज तुरंत ठीक करवाएँ।

    आइए, हम सब मिलकर जल बचाएँ और एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण करें।

    – निगम हरिद्वार