RBSE Class 11th 2023 Hindi-220523-2023 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 11th |
| Exam year | 2023 |
| Subject | Hindi-220523-2023 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 11th 2023 Hindi-220523-2023
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Rajasthan Board Class 11th Hindi-220523-2023 2023 solved Previous Year Question Papers
खण्ड -अ
अपठित गद्यांश
सम्पूर्ण सौरमण्डल में आज तक पृथ्वी ही ऐसा ज्ञात ग्रह है जहाँ जल का अपार भण्डार है। जल के बिना जीवन की कल्पना ही असम्भव है। जल ने ही पृथ्वी पर चर-अचर जीव-जगत को सम्भव बनाया है। मानव शरीर में सर्वाधिक मात्रा जल की है। जल की कमी हो जाने पर जीवन के लाले पड़ जाते हैं और कृत्रिम उपायों से शरीर में उसकी पूर्ति करनी पड़ती है। घर के अनेक कार्यों में जल की जरूरत होती है।
आज प्रकृति के इस निःशुल्क उपहार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नगरों एवं महानगरों के अबाध विस्तार ने तथा औद्योगिकीकरण के उन्माद ने भूगर्भीय जल के मनमाने दोहन और अपव्यय को प्रोत्साहित किया है। भारत के अनेक प्रदेश जिसमें राजस्थान भी सम्मिलित है, जल स्तर के निरन्तर गिरने से संकटग्रस्त है। इस संकट के लिए मनुष्य ही प्रधान रूप से उत्तरदायी है।
-
(i) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: जल का महत्व एवं संकट
-
(ii) मानव शरीर में सर्वाधिक मात्रा में पाये जाने वाला पदार्थ कौनसा है?
उत्तर: जल
-
(iii) सौरमण्डल में किस ज्ञात ग्रह पर जल का अपार भंडार है?
उत्तर: पृथ्वी
-
(iv) पृथ्वी पर जल संकट के लिए मुख्य रूप से कौन उत्तरदायी है?
उत्तर: मनुष्य
-
(v) शरीर में जल की कमी होने पर उसकी पूर्ति कैसे की जाती है?
उत्तर: कृत्रिम उपायों से शरीर में जल की पूर्ति की जाती है।
-
(vi) किसी एक जल संकटग्रस्त प्रदेश का नाम लिखिए।
उत्तर: राजस्थान
-
(vii) जल के अपव्यय को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। (सही / गलत)
उत्तर: गलत
-
(viii) जल प्रकृति से प्राप्त निःशुल्क उपहार है। (सही / गलत)
उत्तर: सही
-
(ix) जल के बिना जीवन की कल्पना __________ है। (संभव / असंभव)
उत्तर: असंभव
-
(x) जल की उपलब्धता में निरन्तर __________ हो रही है। (कमी / वृद्धि)
उत्तर: कमी
2. निम्नलिखित आपठित पद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए। (1×6=6)
क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो।
उसको यया, जो दंतहीन, विनीत सरल हो।
तीन दिन तक पंथ माँगते, रघुपति सिंधु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छंद, अनुनय के प्यारे प्यारे।
उत्तर में जब एक नाद भी, उठा नहीं सागर से,
उठी अधीर ध्वजा कपोरुंष की, आग राम के शर से।
सिंधु देह धर त्राहि त्राहि, करता आ गिरा शरण में,
चरण पूज दासता ग्रहण की, बंधा मूद, बंधन में।
सच पूछो तो शर में ही, बसती दीप्ति विनय की,
संधिवचन संपूज्य उसी का, जिसमें शक्ति विजय की।
-
(i) क्षमा किसको शोभा देती है?
- (अ) राम को
- (ब) रावण को
- (स) शक्तिशाली को
- (द) निर्बल को
व्याख्या: पद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार, क्षमा उस भुजंग (शक्तिशाली) को शोभा देती है जिसके पास गरल (विष) हो, अर्थात शक्तिशाली व्यक्ति को क्षमा शोभा देती है।
-
(ii) तीन दिन तक भगवान राम ने किससे मार्ग देने की प्रार्थना की?
- (अ) परशुराम से
- (ब) सागर से
- (स) नदी से
- (द) रावण से
व्याख्या: पद्यांश में 'तीन दिन तक पंथ माँगते, रघुपति सिंधु किनारे' से स्पष्ट है कि राम ने समुद्र (सागर) से मार्ग माँगा।
-
(iii) समुद्र किस वेश में आकर श्रीराम के चरणों में गिर पड़ा?
- (अ) राक्षस
- (ब) मनुष्य
- (स) पशु
- (द) पक्षी
व्याख्या: पद्यांश में 'सिंधु देह धर त्राहि त्राहि' का अर्थ है कि समुद्र ने मनुष्य का रूप धारण किया और राम की शरण में आ गिरा।
-
(iv) 'क्षमा' में कौनसा काव्य-गुण है?
- (अ) ओज
- (ब) प्रसाद
- (स) माधुर्य
- (द) करुण
व्याख्या: 'क्षमा' शब्द में प्रसाद गुण है, जो सरलता और स्पष्टता का गुण है।
-
(v) "क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो" का प्रतीकार्थ लिखिए।
उत्तर: इस पंक्ति का प्रतीकार्थ यह है कि क्षमा केवल उसी व्यक्ति को शोभा देती है जिसमें प्रतिशोध या दंड देने की शक्ति हो। जिस प्रकार सर्प के पास विष होने पर भी वह क्षमा दिखाए तो वह प्रशंसनीय है, उसी प्रकार शक्तिशाली व्यक्ति का क्षमा करना ही सार्थक है। निर्बल के लिए क्षमा का कोई अर्थ नहीं, क्योंकि उसके पास दंड देने की शक्ति ही नहीं है।
-
(vi) विनयता किसको शोभा देती है?
उत्तर: पद्यांश के अनुसार, विनयता उसी को शोभा देती है जिसमें विजय की शक्ति हो। अंतिम पंक्ति 'संधिवचन संपूज्य उसी का, जिसमें शक्ति विजय की' से स्पष्ट है कि विनय और संधि के वचन उसी के लिए पूजनीय हैं जो शक्तिशाली हो।
प्रश्न 2 (vii) – (x) (गद्यांश पर आधारित)
(vii) पद्यांश के अनुसार अनुनय विनय से ही शत्रु को जीता जा सकता है। (असत्य)
(viii) 'विषहीन विनीत सरल हो' – रेखांकित पंक्ति में अलंकार बताइये। (अनुप्रास अलंकार)
(x) 'भुजंग' का शाब्दिक अर्थ बताइये। (साँप)
(५) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक बताइये। (विनय की शक्ति / विनम्रता का महत्व)
3. निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सही या गलत बताइये
- संचार केवल मनोरंजन का साधन है। (गलत)
- केवल तकनीकी विकास के कारण संचार सम्भव हुआ, इससे पहले संचार सम्भव नहीं था। (गलत)
- समाचार-पत्र एवं पत्रिकायें इतने सशक्त संचार माध्यम हैं कि वे राष्ट्र का स्वरूप बदल सकते हैं। (सही)
- टेलीविजन सबसे प्रभावशाली एवं सशक्त संचार माध्यम है। (सही)
- इंटरनेट सभी संचार माध्यमों का मिलाजुला रूप है। (सही)
- कई बार संचार माध्यमों का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। (सही)
- समाचार लिखते समय छ: ककारों का प्रयोग किया जाता है। (सही)
- समाचार-पत्र के संपादक द्वारा लिखित संपादकीय लेख अस्थायी स्तम्भ होता है। (गलत)
- भारत का पहला समाचार-पत्र 'बंगाल गजट' सन् 1780 में जुगल किशोर शुक्ल ने संपादित किया। (गलत) (सही: जेम्स ऑगस्टस हिक्की)
खण्ड-ब
1. आशय स्पष्ट कीजिए
"तेरा निज़ाम है सिल दे, जुबान शायर की। ये एहतियात जरूरी है, इस बहर के लिए।"
आशय: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि कहता है कि शायर की जुबान (कविता/अभिव्यक्ति) को सिल देना (बंद कर देना) तेरे (शासन/तानाशाही) का नियम (स्वभाव) है। लेकिन कवि इस बहर (काव्य-लय/रचना) के लिए यह एहतियात (सावधानी) जरूरी मानता है, क्योंकि दमन के बावजूद कविता अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। यह शासकीय दमन के विरुद्ध कवि के अटूट संघर्ष और रचनात्मक प्रतिरोध को दर्शाता है।
2. धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वन्दी क्यों नहीं समझता था? (गलतालोहा)
धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वन्दी नहीं समझता था क्योंकि मोहन उसकी तुलना में बहुत कमजोर और अशिक्षित था। धनराम स्वयं को अधिक बलशाली, चालाक और समृद्ध मानता था, जबकि मोहन एक साधारण, भोला-भाला व्यक्ति था। इसलिए धनराम को मोहन से कोई खतरा या प्रतिस्पर्धा नहीं दिखती थी।
3. आजादी से पूर्व किसानों को कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता था? (भारतमाता)
आजादी से पूर्व किसानों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता था:
- जमींदारी शोषण: जमींदारों द्वारा अत्यधिक लगान वसूलना और बेगार करवाना।
- कर्ज का बोझ: साहूकारों से ऊँची ब्याज दरों पर कर्ज लेना, जिससे वे कर्ज के चक्कर में फँस जाते थे।
- भूख और गरीबी: फसल खराब होने पर अकाल और भुखमरी की स्थिति।
- शिक्षा का अभाव: किसान अशिक्षित थे, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं थे।
- सामाजिक भेदभाव: ऊँच-नीच और जातिगत भेदभाव का सामना।
4. "चित्रकला व्यवसाय नहीं अंतरात्मा की पुकार है।" 'आत्मा का ताप' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
प्रस्तुत कथन 'आत्मा का ताप' पाठ के अनुसार चित्रकला की आध्यात्मिक प्रकृति को रेखांकित करता है। लेखक के अनुसार, चित्रकला केवल पैसे कमाने का साधन (व्यवसाय) नहीं है, बल्कि यह कलाकार की अंतरात्मा की गहरी भावनाओं, पीड़ा और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। एक सच्चा चित्रकार अपने भीतर के ताप (दर्द, संघर्ष, प्रेम) को कैनवास पर उतारता है। यह उसकी आत्मा की पुकार है, जो बाहरी दबाव या लाभ के लिए नहीं, बल्कि आंतरिक प्रेरणा से जन्मती है।
5. 'धूप में' शीर्षक गजल में शायर ने क्या संदेश दिया है?
'धूप में' शीर्षक गजल में शायर ने संदेश दिया है कि जीवन में कठिनाइयाँ (धूप) और संघर्ष अपरिहार्य हैं, लेकिन इन्हीं से जीवन में ऊर्जा और सार्थकता आती है। शायर कहता है कि धूप (कष्ट) से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उसका सामना करना चाहिए। यह गजल मानवीय साहस, धैर्य और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है।
6. 'मुर्दा-शांति से भर जाना' एवं 'हमारे सपनों का मर जाना' को कवि अवतार सिंह पाश ने सबसे खतरनाक क्यों माना है?
कवि अवतार सिंह पाश के अनुसार, 'मुर्दा-शांति से भर जाना' (जड़ता और निष्क्रियता) और 'हमारे सपनों का मर जाना' (आकांक्षाओं का खत्म होना) सबसे खतरनाक है, क्योंकि यह मनुष्य को जीवित रहते हुए भी मृत बना देता है। जब व्यक्ति संघर्ष करना छोड़ देता है और अपने सपनों को मार देता है, तो वह सामाजिक बदलाव और प्रगति में बाधक बन जाता है। यह निष्क्रियता शोषण और अन्याय को बढ़ावा देती है, जो किसी भी समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
7. मुंशी प्रेमचन्द अथवा सुमित्रानन्दन पंत का साहित्यिक परिचय दीजिए।
मुंशी प्रेमचन्द का साहित्यिक परिचय:
- जन्म: 31 जुलाई 1880, लमही, वाराणसी
- मृत्यु: 8 अक्टूबर 1936
- युग: द्विवेदी युग के प्रमुख कथाकार, हिन्दी और उर्दू में लेखन।
- प्रमुख रचनाएँ: उपन्यास – गोदान, गबन, सेवासदन, रंगभूमि, कर्मभूमि; कहानी संग्रह – मानसरोवर (8 भाग), प्रेमचन्द की कहानियाँ।
- साहित्यिक विशेषताएँ: यथार्थवादी लेखन, ग्रामीण जीवन का चित्रण, सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार, किसानों और शोषितों की पीड़ा का मार्मिक वर्णन।
- भाषा शैली: सरल, सहज और प्रभावशाली हिन्दी; संवाद प्रधान शैली।
- उपनाम: नवाब राय (उर्दू में), प्रेमचन्द (हिन्दी में)।
अथवा
सुमित्रानन्दन पंत का साहित्यिक परिचय:
- जन्म: 20 मई 1900, कौसानी, अल्मोड़ा
- मृत्यु: 30 दिसम्बर 1977
- युग: छायावादी युग के प्रमुख कवि।
- प्रमुख रचनाएँ: पल्लव, ग्रन्थि, युगान्त, ग्राम्या, स्वर्णकिरण, लोकायतन।
- साहित्यिक विशेषताएँ: प्रकृति के सुकुमार चित्रण, सौंदर्य-चेतना, दार्शनिकता, प्रगतिशील विचारधारा।
- भाषा शैली: संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली, चित्रात्मक और संगीतमय शैली।
- सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (ग्रन्थि के लिए), पद्मभूषण (1961)।
8. "आओ, मिलकर बचाएँ" कविता में कवयित्री ने आदिवासी समाज की कौन-कौन सी जुराइयों की ओर संकेत किया है? आदिवासी समाज की वर्तमान स्थिति का भी विवेचन कीजिए।
कविता में संकेतित जुराइयाँ (समस्याएँ):
- भूमि अधिकारों का हनन: आदिवासियों की जमीन पर बाहरी लोगों का कब्जा।
- सांस्कृतिक पहचान का संकट: आधुनिकता के कारण उनकी परंपराएँ और रीति-रिवाज लुप्त हो रहे हैं।
- शोषण और भेदभाव: समाज में उनके साथ अन्याय और असमानता का व्य
खण्ड-स
75. आस-पड़ोस के लोग बेबी को किस प्रकार परेशान किया करते थे? (आलो-अंधकार)
आस-पड़ोस के लोग बेबी को उसकी गरीबी और सामाजिक स्थिति के कारण परेशान करते थे। वे उसका मजाक उड़ाते, उसे ताने देते और उसके काम में बाधा डालते थे। कुछ लोग उसके बच्चों को भी छेड़ते थे, जिससे बेबी को मानसिक कष्ट सहना पड़ता था।
46. चित्रपट संगीत एवं शास्त्रीय संगीत में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ - लता मंगेशकर)
चित्रपट संगीत (फिल्मी संगीत): यह फिल्मों के लिए रचा जाता है, इसमें लोकप्रियता और मनोरंजन पर जोर होता है। इसमें आधुनिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है और गीतों की शैली सरल व आकर्षक होती है।
शास्त्रीय संगीत: यह प्राचीन परंपरा पर आधारित होता है, इसमें राग-रागिनियों, ताल और लय का कठोर अनुशासन होता है। इसमें गायन की जटिल शैली और विस्तार होता है, जिसमें आलाप, तान, बंदिश आदि शामिल हैं।
7. पानी के विभिन्न रूपों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (राजस्थान की रजत बूंदें)
पानी के तीन मुख्य रूप हैं:
- ठोस (बर्फ): जब पानी जम जाता है तो बर्फ बनता है, जो ठोस अवस्था है।
- द्रव (पानी): सामान्य तापमान पर पानी द्रव अवस्था में होता है, जो पीने, सिंचाई आदि के काम आता है।
- गैस (जलवाष्प): गर्म होने पर पानी वाष्प बनकर वायु में मिल जाता है, जो बादलों का निर्माण करता है।
48. लता मंगेशकर की गायकी की प्रमुख विशेषताओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
लता मंगेशकर की गायकी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- मधुर स्वर: उनकी आवाज में अद्भुत मिठास और स्पष्टता थी, जो सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
- शास्त्रीय संगीत का ज्ञान: उन्होंने शास्त्रीय संगीत की गहरी समझ रखी, जिससे वे किसी भी राग को सहजता से गा सकती थीं।
- भावपूर्ण गायन: वे गीत के भाव को पूरी तरह से व्यक्त करती थीं, चाहे वह प्रेम, शोक या उल्लास का गीत हो।
- सुरीला अलाप: उनके अलाप और तानें बेहद सुरीली और सटीक होती थीं, जो उनकी गायकी को विशिष्ट बनाती थीं।
- बहुमुखी प्रतिभा: उन्होंने फिल्मी संगीत से लेकर शास्त्रीय और भक्ति संगीत तक सभी विधाओं में गाया।
आलो-अंधकार रचना बेबी हालदार की 'व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक मुद्दों को समेटे है' उपरोक्त कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
बेबी हालदार की रचना 'आलो-अंधकार' वास्तव में व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक मुद्दों को उजागर करती है। इसमें लेखिका ने अपने जीवन के संघर्षों, गरीबी, शोषण और सामाजिक भेदभाव को चित्रित किया है। व्यक्तिगत स्तर पर वह अपने परिवार की आर्थिक तंगी, पति के अत्याचार और बच्चों के पालन-पोषण की चुनौतियों से जूझती हैं। सामाजिक स्तर पर यह रचना महिलाओं की दयनीय स्थिति, शिक्षा की कमी, और समाज में व्याप्त असमानता को दर्शाती है। इस प्रकार यह रचना एक ओर व्यक्तिगत दुखों को व्यक्त करती है, वहीं दूसरी ओर समाज की कुरीतियों पर प्रहार करती है।
खण्ड-द
79. भीमान मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEEO) चूरू (चुरू) की ओर से एक कार्यालयी पत्र प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खण्डवा (चुरू) को लिखिए जिसमें कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों हेतु गणित एवं अंग्रेजी विषय में उपचारात्मक शिक्षण तथा अतिरिक्त कक्षाओं का प्रावधान सुनिश्चित किया गया हो।
कार्यालयी पत्र
दिनांक: [दिनांक]
सेवा में,
प्रधानाचार्य,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,
खण्डवा (चुरू)विषय: कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों हेतु गणित एवं अंग्रेजी विषय में उपचारात्मक शिक्षण तथा अतिरिक्त कक्षाओं के प्रावधान हेतु।
महोदय,
आपके विद्यालय में कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों की गणित एवं अंग्रेजी विषयों में शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा के उपरांत यह पाया गया है कि कुछ विद्यार्थियों को इन विषयों में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है। अतः आपको निर्देशित किया जाता है कि इन विद्यार्थियों हेतु उपचारात्मक शिक्षण (रिमेडियल टीचिंग) तथा अतिरिक्त कक्षाओं का प्रावधान सुनिश्चित करें।
इस हेतु निम्नलिखित कार्यवाही की जाए:
- गणित एवं अंग्रेजी विषयों में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान करें।
- प्रति सप्ताह कम से कम दो अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करें।
- उपचारात्मक शिक्षण हेतु योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करें।
- प्रगति की नियमित निगरानी रखें और रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
भीमान
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी
चूरू (चुरू)20. आपके विद्यालय में 25 फरवरी, 2023 को वार्षिक उत्सव, भामाशाह सम्मान एवं पूर्व विद्यार्थी संगम समारोह का आयोजन किया गया। इसका एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार कीजिए।
प्रतिवेदन (रिपोर्ट)
दिनांक: 25 फरवरी, 2023
स्थान: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, [विद्यालय का नाम]
आयोजन: वार्षिक उत्सव, भामाशाह सम्मान एवं पूर्व विद्यार्थी संगम समारोह
दिनांक 25 फरवरी, 2023 को हमारे विद्यालय में वार्षिक उत्सव, भामाशाह सम्मान एवं पूर्व विद्यार्थी संगम समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि [मुख्य अतिथि का नाम] द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें नृत्य, गीत, नाटिका आदि शामिल थे। भामाशाह सम्मान में उन दानदाताओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने विद्यालय के विकास में योगदान दिया। पूर्व विद्यार्थी संगम में पूर्व छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और विद्यालय के विकास में सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह आयोजन अत्यंत सफल रहा और सभी उपस्थित जनों ने इसकी सराहना की।
प्रस्तुतकर्ता:
[आपका नाम]
[पदनाम]21. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए (शब्द सीमा 300 शब्द):
(i) विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व
विद्यार्थी जीवन मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है। इसी समय व्यक्ति के चरित्र, आदतों और भविष्य की नींव रखी जाती है। अनुशासन विद्यार्थी जीवन की सबसे आवश्यक विशेषता है। अनुशासन का अर्थ है नियमों और मर्यादाओं का पालन करना।
अनुशासित विद्यार्थी अपने समय का सदुपयोग करता है, नियमित रूप से पढ़ाई करता है और शिक्षकों के निर्देशों का पालन करता है। इससे उसकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ बेहतर होती हैं। अनुशासन से विद्यार्थी में आत्म-नियंत्रण, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित होते हैं।
अनुशासन के अभाव में विद्यार्थी अपने लक्ष्य से भटक जाता है और समय का दुरुपयोग करता है। इसलिए विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल शैक्षणिक सफलता बल्कि जीवन की हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।