RBSE Class 11th 2026 HINDI-1103 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 11th
Exam year 2026
Subject HINDI-1103
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 11th HINDI-1103 2026 solved Previous Year Question Papers

बहुविकल्पात्मक प्रश्न

  1. संगीत नृत्य एवं कलाओं को एक शास्त्रीय कला का स्वरूप किसने दिया?

    • (अ) कलाकार ने
    • (ब) संगीतकार ने
    • (स) चित्रकार ने
    • (द) शास्त्र ने

    व्याख्या: शास्त्र ही किसी भी कला को शास्त्रीय स्वरूप प्रदान करता है, क्योंकि शास्त्र में नियम, सिद्धांत और परंपरा निहित होती है।

  2. "गलता लोहा" कहानी में स्कूल का मॉनीटर था -

    • (अ) मोहन
    • (ब) धनराम
    • (स) जिलोक सिंह
    • (द) रमेश

    व्याख्या: 'गलता लोहा' कहानी में धनराम को स्कूल का मॉनीटर दिखाया गया है, जो अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहता है।

  3. "नमक का दरोगा" कहानी का संदेश है -

    • (अ) सूझबूझ से काम करने का
    • (ब) समाज की बुराइयां दूर करने का
    • (स) किसी के आगे हाथ न फैलाने का
    • (द) निर्भय होकर कर्तव्य पालन करने का

    व्याख्या: यह कहानी ईमानदारी और निर्भयता से अपने कर्तव्य का पालन करने का संदेश देती है, जैसा कि मुख्य पात्र वंशीधर करता है।

  4. 'पथेर पांचाली' फिल्म-निर्माण में सबसे बड़ी समस्या थी -

    • (अ) समय का अभाव
    • (ब) पात्रों का अभाव
    • (स) उचित स्थान का अभाव
    • (द) धन का अभाव

    व्याख्या: सत्यजित राय को 'पथेर पांचाली' बनाने में सबसे बड़ी बाधा वित्तीय संसाधनों की कमी थी, जिसके कारण उन्हें कई बार फिल्म बनाना स्थगित करना पड़ा।

  5. "पेड़ को हटाकर उसे जल्दी निकाल लेना चाहिए" यह कहा -

    • (अ) माली ने
    • (ब) चपरासी ने
    • (स) मनचले क्लर्क ने
    • (द) ज्वाइंट सेक्रेटरी ने

    व्याख्या: यह वाक्य मनचले क्लर्क द्वारा कहा गया है, जो पेड़ की समस्या को जल्दी और सरलता से हल करने का सुझाव देता है।

  6. मीरा अपने आराध्य कृष्ण की उपासना करती थीं -

    • (अ) सेवक-भाव से
    • (ब) दास्य-भाव से
    • (स) मधुरा-भाव से
    • (द) सख्य-भाव से

    व्याख्या: मीरा ने कृष्ण को अपना प्रेमी (मधुरा भाव) मानकर उनकी भक्ति की, जो उनकी कविताओं और भजनों में स्पष्ट झलकता है।

  7. "घर की याद" कविता में कवि ने संदेशवाहक बनाया है -

    • (अ) कोयल को
    • (ब) मोर को
    • (स) हंस को
    • (द) बरसात को

    व्याख्या: कवि ने बरसात को संदेशवाहक बनाकर अपने घर की याद और भावनाओं को व्यक्त किया है।

  8. "ठेका लिया है तुमने सारी दुनिया का?" रजनी के प्रति इस कथन में मूल भाव है -

    • (अ) लाचारी
    • (ब) आक्रोश
    • (स) करुणा
    • (द) उपेक्षा

    व्याख्या: यह कथन रजनी के प्रति आक्रोश और व्यंग्य को दर्शाता है, जहाँ वक्ता उसकी अत्यधिक जिम्मेदारी लेने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष कर रहा है।

  9. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को कहा है -

    • (अ) वाणी का जादूगर
    • (ब) वाणी का डिक्टेटर
    • (स) साखी का सर्जक
    • (द) कथनी का साधक

    व्याख्या: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर को 'वाणी का जादूगर' कहा, क्योंकि उनकी वाणी में अद्भुत प्रभाव और सामर्थ्य था।

  10. 'भारत माता' पाठ संकलित है -

    • (अ) मेरी कहानी
    • (ब) देश की कहानी
    • (स) हिन्दुस्तान की कहानी
    • (द) विश्व की कहानी

    व्याख्या: 'भारत माता' पाठ 'हिन्दुस्तान की कहानी' नामक पुस्तक से संकलित है, जो भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति का वर्णन करती है।

32. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. जिन शब्दों में लिंग, वचन, कारक आदि के कारण रूप परिवर्तन नहीं होता, वे अव्यय कहलाते हैं।
  2. वाक्य रचना में संज्ञा या सर्वनाम का संबंध दूसरे शब्द के साथ जिस रूप परिवर्तन के द्वारा प्रकट होता है, वह कारक कहलाता है।
  3. वे शब्द जिनका आगमन हिन्दी भाषा में संस्कृत भाषा से बिना किसी रूप परिवर्तन के हुआ है, वे तत्सम शब्द कहलाते हैं।
  4. रामचरितमानस एक श्रेष्ठ महाकाव्य है।

33. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए –

  1. प्रश्न: भोला दा ने बेची के घर की समस्या तातूश को बताई, तो उन्होंने क्या किया?

    उत्तर: तातूश ने बेची के घर की समस्या सुनकर उसे अपने घर बुला लिया और उसकी मदद की।
  2. प्रश्न: 'मियाँ नसीरुद्दीन' पाठ में आज के लोगों के संबंध में किस बात का अफसोस है?

    उत्तर: मियाँ नसीरुद्दीन को इस बात का अफसोस है कि आज के लोग अपने पारंपरिक हुनर और काम के प्रति समर्पण नहीं रखते।
  3. प्रश्न: 'अप्पू पात्र' के लिए सुबीर बनर्जी नामक बालक का चयन करने में किसने लेखक की सहायता की?

    उत्तर: लेखक की सहायता फिल्म निर्देशक सत्यजित राय ने की।
  4. प्रश्न: मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी क्यों नहीं समझ सकते?

    उत्तर: मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी इसलिए नहीं समझ सकते क्योंकि वह सरल, निष्कपट और मित्रभावी है।
  5. प्रश्न: कबीर के अनुसार कौन परमात्मा को नहीं जान पाते हैं? और क्यों?

    उत्तर: कबीर के अनुसार वे लोग परमात्मा को नहीं जान पाते जो अहंकार और माया में फँसे हैं, क्योंकि उनकी आँखों पर अज्ञान का पर्दा पड़ा है।

34. निम्नलिखित लघु उत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. प्रश्न: कविता में गाँधीजी का उल्लेख किस सिलसिले में आया और क्यों?

    उत्तर: कविता में गाँधीजी का उल्लेख सत्य और अहिंसा के संदर्भ में आया है, क्योंकि वे इन आदर्शों के प्रतीक हैं और उनके जीवन ने समाज को सही मार्ग दिखाया।
  2. प्रश्न: मियाँ नसीरुद्दीन ने नानबाई बनाने के इल्म के संबंध में क्या-क्या तर्क दिए?

    उत्तर: मियाँ नसीरुद्दीन ने तर्क दिया कि नानबाई बनाना कोई साधारण काम नहीं, बल्कि एक कला है जिसमें धैर्य, अनुभव और समर्पण चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हुनर पीढ़ियों से चला आ रहा है और इसे सीखने में समय लगता है।
  3. प्रश्न: दुष्यंत कुमार के गज़ल काव्य-संग्रह के अनुसार कवि के जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या है?

    उत्तर: दुष्यंत कुमार के अनुसार कवि के जीवन का अंतिम लक्ष्य सत्य और मानवता की सेवा करना है, तथा अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता लाना है।
  4. प्रश्न: रजनी के अनुसार विद्यालय में कैसा हेडमास्टर होना चाहिए?

    उत्तर: रजनी के अनुसार विद्यालय में हेडमास्टर को न्यायप्रिय, अनुशासनप्रिय और विद्यार्थियों के प्रति स्नेहशील होना चाहिए।
  5. प्रश्न: खानदानी गवैयों द्वारा 'चित्रपट संगीत' पर क्या आरोप लगाया जाता है?

    उत्तर: खानदानी गवैये चित्रपट संगीत पर यह आरोप लगाते हैं कि यह शास्त्रीय संगीत की गरिमा को कम करता है और केवल मनोरंजन के लिए बनाया जाता है।
  6. प्रश्न: मकान-मालिक के बेटे ने लेखिका (बेबी) के साथ कैसा व्यवहार किया?

    उत्तर: मकान-मालिक के बेटे ने लेखिका के साथ अभद्र और अनुचित व्यवहार किया, जिससे वह अपमानित महसूस करने लगीं।

35. निम्नलिखित दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए (अधिकतम शब्द सीमा 60 शब्द) –

  1. प्रश्न: “न्याय और विद्वता, लम्बी-चौड़ी उपाधियाँ, बड़ी-बड़ी दाढ़ियाँ और ढीले चोंगे एक भी सच्चे आदर के पात्र नहीं हैं।” वंशीधर के इस अनुभव का क्या आशय है?

    उत्तर: वंशीधर का आशय है कि बाहरी दिखावा, उपाधियाँ या वेशभूषा किसी को सच्चा सम्मान नहीं दिला सकते। सच्चा आदर तो व्यक्ति के आचरण, नैतिकता और कर्मों से मिलता है, न कि केवल दिखावटी चीजों से।
  2. प्रश्न: भारतीयों की आँखों में चमक कब एवं क्यों आ जाती थी? 'माता' पाठ के आधार पर बताइए।

    उत्तर: 'माता' पाठ के अनुसार, भारतीयों की आँखों में चमक तब आ जाती थी जब वे अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता और गौरव की बात करते थे। यह चमक देशभक्ति और आत्मसम्मान के कारण उत्पन्न होती थी।
  3. प्रश्न: कविता में चम्पा को किन स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करने वाली बताया गया है?

    उत्तर: कविता में चम्पा को उन स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करने वाली बताया गया है जो समाज के दबाव और रूढ़ियों के बावजूद अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष करती हैं, तथा अपनी पहचान बनाने का प्रयास करती हैं।

प्र. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

महामति बेकन का कथन है, “समूह का नाम संगत नहीं है। जहाँ प्रेम नहीं है, वहाँ लोगों की आकृतियाँ चित्रवत् हैं और उनकी बातचीत झनकार है।” पहचान करने अथवा संगति करने में कुछ स्वार्थ से काम लेना चाहिए। जान-पहचान के लोग वे हों, जिनसे हम कुछ लाभ उठा सकें, जो हमारे जीवन को उत्तम और आनन्दमय करने में कुछ सहायता दें, यद्यपि उतनी नहीं, जितनी गहरे मित्र दे सकते हैं। मनुष्य का जीवन थोड़ा है, उसमें खोने के लिए समय नहीं। आजकल जान-पहचान बढ़ाना कोई बड़ी बात नहीं है, कोई भी युवा पुरुष ऐसे अनेक युवा पुरुषों को पा सकता है, जो उसके साथ थियेटर देखने जाएँगे, नाच-रंग में जाएँगे, सैर-सपाटे में जाएँगे और भोजन का निमंत्रण स्वीकार करेंगे। परन्तु ऐसे लोगों की संगति से कुछ हानि न होगी, तो लाभ भी न होगा। पर यदि हानि होगी तो बड़ी भारी होगी। सोचिए तो, तुम्हारा जीवन कितना नष्ट होगा, यदि ये जान-पहचान के लोग उन मनचले युवकों में से निकले जो अमीरों की बुराइयों और मूर्खताओं की नकल किया करते हैं, दिन-रात बनाव-सिंगार में रहा करते हैं, कुलटा स्त्रियों की फोटो मोल लिया करते हैं, गलियों में ठट्ठा करते हैं और सिगरेट का धुआँ उड़ाते चलते हैं। ऐसे नवयुवकों से बढ़कर शून्य, निःसार और शोचनीय जीवन और किसका है? वे अच्छी बातों के सच्चे आनंद से कोसों दूर हैं। जिनकी नैतिकता इन्द्रिय-विषयों में लिप्त है, जिनका हृदय आशाओं और कुत्सित विचारों से कलुषित है, ऐसे अशुचि प्राणियों को दिन-दिन अंधकार में पतित होते देख कौन होगा जो तरस न खाएगा?

  1. प्रश्न: बेकन के अनुसार संगत कब सार्थक होती है?

    उत्तर: बेकन के अनुसार संगत तब सार्थक होती है जब उसमें प्रेम और सच्चाई हो, अन्यथा वह केवल दिखावा मात्र है।
  2. प्रश्न: लेखक के अनुसार जान-पहचान के लोग कैसे होने चाहिए?

    प्रश्न 5 – गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

    उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक "प्रेम का महत्व" या "प्रेमहीन जीवन" हो सकता है।

    प्रश्न 6 – गद्यांश पर आधारित प्रश्न

    1. प्रश्न: "जहाँ प्रेम नहीं वहाँ के लोगों की आकृति कैसी होती है?"
      उत्तर: जहाँ प्रेम नहीं, वहाँ के लोगों की आकृति बेढब (अनाकर्षक) होती है।
    2. प्रश्न: कैसे युवा पुरुष आसानी से नहीं मिलेंगे?
      उत्तर: प्रेम और सद्भावना से युक्त युवा पुरुष आसानी से नहीं मिलेंगे।
    3. प्रश्न: कैसे नवयुवकों का जीवन तुच्छ एवं शोचनीय है?
      उत्तर: जो नवयुवक इंद्रिय-विषयों में लिप्त हैं, उनका जीवन तुच्छ एवं शोचनीय है।
    4. प्रश्न: जिन नवयुवकों की आत्मा अपने इंद्रिय विषयों से लिप्त है, वे क्या कहलाते हैं?
      उत्तर: ऐसे नवयुवक इंद्रियलोलुप कहलाते हैं।
    5. प्रश्न: 'महामंत्री' शब्द में कौनसा समास है?
      उत्तर: 'महामंत्री' शब्द में कर्मधारय समास है (महान है जो मंत्री)।

    प्रश्न 7 – अपठित पद्यांश पर आधारित प्रश्न

    पद्यांश: फैली खेतों में दूर तलक, मखमल-सी कोमल हरियाली।
    लिपटी जिससे रवि की किरणें, चांदी की-सी उजली जाली।।
    तिनकों के हरे-हरे तन पर, हिल हरित रुचिर है रहा झलक
    पातस भूतल पर झुका हुआ, नभ का नीलम फलक
    रोमांचित सी लगती धरा, आई जौ-गेहूँ में बाली।
    सनई की सोने की, किंकिणियाँ हैं शोभाशाली।
    उड़ती सुगंध तैलाक्त, फूली सरसों पीली-पीली।
    लो, हरित धरा से झाँक रही, नीलम की कली, तीसी नीली।
    रंग-रंग के फूलों में हिलमिल, हँस रही सखियाँ मटर खड़ी।
    मखमली पेटियों से लटकीं, छीमियाँ छिपाये बीच लड़ी।।

    1. प्रश्न: प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
      उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "खेतों की शोभा" या "ग्रामीण सौंदर्य" है।
    2. प्रश्न: खेतों में दूर-दूर तक क्या फैली हुई है?
      उत्तर: खेतों में दूर-दूर तक मखमल-सी कोमल हरियाली फैली हुई है।
    3. प्रश्न: सोने की किंकिणियाँ किसे कहा गया है?
      उत्तर: सनई के पीले फूलों को सोने की किंकिणियाँ (घुँघरू) कहा गया है।
    4. प्रश्न: मखमली पेटियों से कौन लटकी हुई हैं?
      उत्तर: मखमली पेटियों से मटर की छीमियाँ लटकी हुई हैं।
    5. प्रश्न: जौ-गेहूँ में बाली आने से कौन रोमांचित है?
      उत्तर: जौ-गेहूँ में बाली आने से धरा (पृथ्वी) रोमांचित सी लगती है।
    6. प्रश्न: 'सरसों पीली-पीली' पंक्ति में कौनसा अलंकार है?
      उत्तर: 'सरसों पीली-पीली' पंक्ति में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है (पीली-पीली शब्द की आवृत्ति से विशेषता प्रकट होती है)।

    प्रश्न 8 – गद्यांश पर आधारित प्रश्न

    गद्यांश: दोपहर के खाने पर दबे हुए आदमी के चारों ओर बहुत भीड़ हो गई। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। कुछ मनचले क्लर्कों ने समस्या को खुद ही सुलझाना चाहा। वे अफसर के फैसले का इंतजार किए बिना पेड़ को अपने-आप हटा देने का निश्चय कर रहे थे कि इतने में सुपरिंटेंडेंट फाइल लिए भागा-भागा आया। बोला – "हम लोग खुद इस पेड़ को नहीं हटा सकते। हम लोग व्यापार-विभाग से संबंधित हैं, और यह पेड़ की समस्या है, जो कृषि-विभाग के अधीन है। मैं इस फाइल को अर्जेंट मार्क करके वहाँ भेज रहा हूँ – वहाँ से उत्तर आते ही इस पेड़ को हटवा दिया जाएगा।"

    1. प्रश्न: यहाँ भीड़ क्यों हो गई थी?
      उत्तर: दोपहर के खाने पर दबे हुए आदमी के चारों ओर भीड़ हो गई थी, क्योंकि लोग उसकी मदद करने या स्थिति देखने के लिए एकत्र हुए थे।
    2. प्रश्न: यहाँ मनचले क्लर्क कौन थे?
      उत्तर: मनचले क्लर्क वे उत्सुक और जल्दबाजी करने वाले कर्मचारी थे जो बिना अधिकार के समस्या सुलझाना चाहते थे।
    3. प्रश्न: मनचले क्लर्कों की इच्छा क्या थी? और क्यों?
      उत्तर: मनचले क्लर्कों की इच्छा पेड़ को अपने-आप हटा देने की थी, क्योंकि वे अफसर के फैसले का इंतजार किए बिना समस्या को जल्दी सुलझाना चाहते थे।
    4. प्रश्न: सुपरिंटेंडेंट ने आकर किससे, क्या और क्यों कहा?
      उत्तर: सुपरिंटेंडेंट ने आकर भीड़ और क्लर्कों से कहा कि वे स्वयं पेड़ नहीं हटा सकते, क्योंकि वे व्यापार-विभाग से हैं जबकि पेड़ की समस्या कृषि-विभाग के अधीन है। उन्होंने फाइल को अर्जेंट मार्क करके कृषि-विभाग को भेजने की बात कही ताकि उचित प्रक्रिया से पेड़ हटवाया जा सके।

प्रश्न-8

(क) कवि ने अपने आप को सोने पर सुहागा क्यों कहा है?

कवि ने अपने आप को 'सोने पर सुहागा' इसलिए कहा है क्योंकि वह पिता के प्यार और स्नेह का अधिकतम लाभ उठा रहा है। पिता उसे बहुत मानते हैं और उसकी हर बात को सुनते हैं, जैसे सोने पर सुहागा (मांग का टीका) शोभा बढ़ाता है, वैसे ही कवि पिता के जीवन में अतिरिक्त आनंद और गर्व का कारण है।

(ख) कवि ने अपने आप को अभागा क्यों कहा है?

कवि ने अपने आप को 'अभागा' इसलिए कहा है क्योंकि वह पिता के अत्यधिक प्यार और लाड़-दुलार के बावजूद उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता। वह पिता के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने में असमर्थ महसूस करता है, जिससे वह स्वयं को दुर्भाग्यशाली मानता है।

(ग) कवि के पिता को उनके बेटे हेटे क्यों लगे होंगे?

कवि के पिता को उनके बेटे 'हेटे' (अर्थात् नीचे या कमतर) इसलिए लगे होंगे क्योंकि कवि अपने पिता की उम्मीदों और मानकों पर खरा नहीं उतरता। पिता चाहते हैं कि उनका बेटा उन्नति करे और समाज में प्रतिष्ठा अर्जित करे, लेकिन कवि की स्थिति या व्यवहार से पिता को निराशा होती है, जिससे वे उसे हीन दृष्टि से देखते हैं।

(घ) कवि अपने पिता का आदर्श पुत्र किसके समान है?

कवि अपने पिता का आदर्श पुत्र उस 'स्वर्ण बेटे' के समान है जो पिता के सपनों को साकार करता है और उन्हें गर्व का अनुभव कराता है। कवि स्वयं को उस आदर्श से दूर पाता है, इसलिए वह अपनी तुलना एक अभागे व्यक्ति से करता है जो पिता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।


निबंध (कोई एक)

(क) मोबाइल फोन : वरदान या अभिशाप

मोबाइल फोन आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। यह संचार का सशक्त माध्यम है, जिससे हम दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से तुरंत जुड़ सकते हैं। शिक्षा, व्यवसाय, मनोरंजन और स्वास्थ्य सेवाओं में इसका योगदान अतुलनीय है। इंटरनेट की सुविधा ने ज्ञान के द्वार खोल दिए हैं।

लेकिन दूसरी ओर, मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग अभिशाप भी बन सकता है। इससे आँखों की समस्याएँ, नींद की कमी, मानसिक तनाव और सामाजिक अलगाव बढ़ रहा है। युवा पीढ़ी इसकी लत में फँसकर पढ़ाई और खेल-कूद से दूर हो रही है। साइबर अपराध और गोपनीयता का हनन भी गंभीर समस्याएँ हैं।

अतः मोबाइल फोन एक दोधारी तलवार है। इसका सीमित और समझदारी से उपयोग ही इसे वरदान बना सकता है, अन्यथा यह अभिशाप साबित होगा।

(ख) कम्प्यूटर शिक्षा का महत्त्व

आज का युग कम्प्यूटर का युग है। कम्प्यूटर शिक्षा ने ज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। इसके माध्यम से छात्र जटिल गणितीय समस्याओं को हल कर सकते हैं, डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं और नई तकनीकों को सीख सकते हैं। कम्प्यूटर ने शिक्षा को रोचक और इंटरैक्टिव बना दिया है।

व्यावसायिक दृष्टि से कम्प्यूटर शिक्षा रोजगार के अवसरों को बढ़ाती है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में करियर की अपार संभावनाएँ हैं। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में कम्प्यूटर ज्ञान अनिवार्य हो गया है।

इस प्रकार, कम्प्यूटर शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए बल्कि राष्ट्र की प्रगति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे हर छात्र के लिए अनिवार्य बनाना चाहिए।

(ग) भारतीय संस्कृति का अनुपम उपहार योग

योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पहले विकसित किया था। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा को जोड़ने की एक समग्र विधा है। योगासन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त कर सकता है।

आज पूरी दुनिया योग के महत्व को स्वीकार कर रही है। संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया है। योग तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और आंतरिक शांति प्राप्त करने में सहायक है।

भारतीय संस्कृति का यह अनुपम उपहार मानवता के कल्याण के लिए है। इसे अपनाकर हम स्वस्थ और सुखी जीवन जी सकते हैं।

(घ) जल-संरक्षण : हमारा दायित्व

जल जीवन का आधार है। इसके बिना मानव, पशु-पक्षी और वनस्पति का अस्तित्व संभव नहीं है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और जल के अंधाधुंध उपयोग के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और कई क्षेत्र सूखे की चपेट में हैं।

जल-संरक्षण हम सबका नैतिक दायित्व है। हमें वर्षा जल संचयन, नलों की मरम्मत, कम पानी वाली फसलों का चयन और जल का पुन: उपयोग जैसे उपाय अपनाने चाहिए। सरकार को भी जल संरक्षण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।

यदि हमने अभी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियों को पानी के लिए तरसना पड़ेगा। जल बचाएँ, जीवन बचाएँ।


प्रतिवेदन

शैक्षिक भ्रमण का प्रतिवेदन

दिनांक: [तिथि]

प्रस्तुतकर्ता: [आपका नाम], कक्षानायक, कक्षा 11

विषय: एक दिवसीय शैक्षिक भ्रमण का प्रतिवेदन

दिनांक [तिथि] को हमारी कक्षा के छात्र एक दिवसीय शैक्षिक भ्रमण हेतु बस द्वारा जयपुर गए। भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों से परिचित कराना था।

प्रातः 7 बजे विद्यालय से बस रवाना हुई। सबसे पहले हम आमेर किला गए, जहाँ छात्रों ने राजपूत वास्तुकला की बारीकियों को देखा। इसके बाद हवा महल और जंतर-मंतर का भ्रमण किया। दोपहर में सिटी पैलेस में भोजन किया और वहाँ के संग्रहालय का अवलोकन किया।

शाम 5 बजे वापसी के लिए बस रवाना हुई और रात 8 बजे सभी सुरक्षित विद्यालय पहुँच गए। यह भ्रमण अत्यंत ज्ञानवर्धक और आनंददायक रहा। सभी छात्रों ने अनुशासन का पालन किया।

धन्यवाद सहित,
[आपका नाम]
कक्षानायक, कक्षा 11


सम्पादकीय

"USAR का सर्वत्र बोलबाला"

आज के युग में USAR (United States of America's Resources) का प्रभाव हर क्षेत्र में देखा जा सकता है। चाहे वह तकनीक हो, शिक्षा हो, व्यापार हो या संस्कृति, अमेरिकी प्रभाव सर्वत्र व्याप्त है। अमेरिकी कंपनियाँ जैसे Google, Apple, Facebook और Amazon ने वैश्विक बाजार पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है।

भारत में भी USAR का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। युवा पीढ