RBSE Class 12th 2010 Agronomy-SS-86-2010 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | Agronomy-SS-86-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2010 Agronomy-SS-86-2010
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Rajasthan Board Class 12th Agronomy-SS-86-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010
वैकल्पिक वर्ग IV — कृषि (OPTIONAL GROUP IV — AGRICULTURE)
कृषि विज्ञान (AGRONOMY)
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 48
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें ।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं । प्रश्न क्रमांक 9 व 20 में आंतरिक विकल्प हैं |
All the questions are compulsory. There are internal choices in Question Nos. 9 and 20. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें ।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 20 SS—86—Agronomy
No. of Printed Pages — 7
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प्रश्न 6 (भाग i-iv)
प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii, iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स, द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
There are four parts (i, ii, iii, iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C, and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book by making a table as mentioned below:
| प्रश्न क्रमांक Question No. |
उत्तर का क्रमाक्षर Correct letter of the Answer |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
1. (i) किस प्रजाति के केचुओं का वर्मी-कम्पोस्ट बनाने में अधिक उपयोग किया जाता है?
Which species of earthworms is used mostly to prepare vermi-compost?
- (अ) इन्डोजिक (A) Endogeic
- (ब) डायोजिक (B) Diogeic
- (स) एपिजिक (C) Epigeic
- (द) इन्डोजिक एवं डायोजिक दोनों (D) both Endogeic and Diogeic
सही उत्तर: (स) एपिजिक (C) Epigeic
व्याख्या: एपिजिक केचुए (जैसे आइसेनिया फेटिडा) सतह पर रहते हैं और कार्बनिक पदार्थों को तेजी से विघटित करते हैं, इसलिए वर्मी-कम्पोस्ट बनाने में इनका सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। इन्डोजिक और डायोजिक केचुए मिट्टी में गहरे रहते हैं और कम्पोस्टिंग के लिए कम उपयुक्त होते हैं।
1. (ii) जब फसल की अन्य जाति का पौधा बिन बोये खेत में उग जाता है, वह कहलाता है
When other variety of plant of the crops is grown up in the field without sowing, it is called
- (अ) निरपेक्ष खरपतवार (A) Absolute weed
- (ब) नकलची खरपतवार (B) Mimicry weed
- (स) सापेक्ष खरपतवार (C) Relative weed
- (द) अवांछित (रोग्य) खरपतवार (D) Rogue weed
सही उत्तर: (द) अवांछित (रोग्य) खरपतवार (D) Rogue weed
व्याख्या: जब फसल की ही किसी अन्य किस्म का पौधा बिना बोए खेत में उग आता है, तो उसे 'रोग्य खरपतवार' (Rogue weed) कहते हैं। यह फसल की शुद्धता को प्रभावित करता है और इसे हटाना आवश्यक होता है।
प्रश्न 4 (iv)
कितने किलोग्राम डाइअमोनियम फास्फेट (D.A.P.) उर्वरक से 46 किलोग्राम फास्फोरस तत्व प्राप्त होता है?
- (अ) 50 किग्रा
- (ब) 100 किग्रा
- (स) 150 किग्रा
- (द) 200 किग्रा
How many kilograms of diammonium phosphate (D.A.P.) fertilizer can be used to produce 46 kilogram phosphorus?
- (A) 50 kg
- (B) 100 kg
- (C) 150 kg
- (D) 200 kg
सही उत्तर: (अ) 50 किग्रा / (A) 50 kg
व्याख्या: D.A.P. में फास्फोरस की मात्रा लगभग 46% होती है। अतः 46 किग्रा फास्फोरस प्राप्त करने के लिए 100 किग्रा D.A.P. की आवश्यकता होती है। (नोट: प्रश्न में दिए गए विकल्पों में 100 किग्रा नहीं है, अतः सही विकल्प 50 किग्रा नहीं है; वास्तविक उत्तर 100 किग्रा है।)
प्रश्न 4 (v)
गेहूँ की फसल के लिए कितनी बीज मात्रा प्रति हैक्टर चाहिए?
- (अ) 100 किग्रा
- (ब) 80 किग्रा
- (स) 60 किग्रा
- (द) 40 किग्रा
How much amount of seed is required per hectare for wheat crop?
- (A) 100 kg
- (B) 80 kg
- (C) 60 kg
- (D) 40 kg
सही उत्तर: (ब) 80 किग्रा / (B) 80 kg
व्याख्या: गेहूँ की फसल के लिए सामान्यतः 80-100 किग्रा बीज प्रति हैक्टर की आवश्यकता होती है। दिए गए विकल्पों में 80 किग्रा सबसे उपयुक्त है।
प्रश्न 2
कार्बनिक खाद (जीवांश खाद) का कोई एक उदाहरण लिखिए।
Give any one example of bulky organic manure.
उत्तर: गोबर की खाद (Farmyard Manure) कार्बनिक खाद का एक प्रमुख उदाहरण है।
Answer: Farmyard manure (FYM) is a common example of bulky organic manure.
प्रश्न 3
गाजर घास को नष्ट करने के लिए एक मित्र कीट का नाम लिखिए।
Write the name of ecofriendly insect to destroy Gajar grass.
उत्तर: गाजर घास (Parthenium) को नष्ट करने के लिए मित्र कीट ज़ाइग्रामा (Zygogramma bicolorata) का उपयोग किया जाता है।
Answer: The ecofriendly insect used to destroy Gajar grass (Parthenium) is Zygogramma bicolorata.
प्रश्न 4
मेथी का कोई एक औषधीय महत्व लिखिए।
Write any one medicinal use of Fenugreek (Methi).
उत्तर: मेथी के बीजों का उपयोग मधुमेह (Diabetes) के नियंत्रण में किया जाता है, क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं।
Answer: Fenugreek seeds are used to control diabetes as they help in reducing blood sugar levels.
प्रश्न 5
अलसी का कोई एक उपयोग लिखिए।
Write any one use of Linseed (Alsi).
उत्तर: अलसी के बीजों से तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग पेंट और वार्निश बनाने में किया जाता है।
Answer: Linseed oil, extracted from the seeds, is used in making paints and varnishes.
आलू की फसल में मिट्टी चढ़ाने का उपयुक्त समय लिखिए।
Write the appropriate time of mounting soil over potato crop.
आलू की फसल में मिट्टी चढ़ाने (earthing up) का उपयुक्त समय बुवाई के लगभग 30-40 दिन बाद होता है, जब पौधे 15-20 सेमी ऊँचे हो जाते हैं। यह कंदों के विकास को बढ़ावा देने और उन्हें सूर्य के प्रकाश से बचाने के लिए किया जाता है।
सोयाबीन की एक उन्नत किस्म तथा बीज मात्रा प्रति हैक्टर लिखिए।
Write an improved variety and seed rate of Soybean per hectare.
उन्नत किस्म: जेएस-335 (JS-335) या एनआरसी-7 (NRC-7) सोयाबीन की एक उन्नत किस्म है।
बीज मात्रा: प्रति हैक्टर लगभग 60-75 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है (बुवाई विधि और बीज के आकार पर निर्भर करता है)।
अम्लीय मृदा की परिभाषा लिखिए। अम्लीय मृदा के प्रकारों को लिखिए।
Define acidic soil. Write the types of acidic soil. (1+1=2)
परिभाषा: अम्लीय मृदा वह मृदा है जिसका pH मान 7.0 से कम होता है, जो हाइड्रोजन आयनों की अधिकता को दर्शाता है।
प्रकार: अम्लीय मृदा के दो मुख्य प्रकार हैं:
- सक्रिय अम्लता: मृदा के घोल में मौजूद हाइड्रोजन आयनों के कारण होती है।
- निष्क्रिय अम्लता: मृदा के कोलॉइडी कणों पर अधिशोषित हाइड्रोजन और एल्युमिनियम आयनों के कारण होती है, जो लवणों के संपर्क में आने पर सक्रिय हो जाती है।
फेरोमोन ट्रेप के उपयोग करने की विधि का वर्णन कीजिए।
Describe the method of using pheromone trap. (2)
फेरोमोन ट्रेप का उपयोग करने की विधि निम्नलिखित है:
- फेरोमोन ट्रेप को खेत में फसल की ऊँचाई के अनुसार स्थापित करें, आमतौर पर पौधों के शीर्ष से 15-20 सेमी ऊपर।
- ट्रेप में फेरोमोन कैप्सूल या ल्यूर लगाएं, जो कीटों को आकर्षित करने वाली गंध छोड़ता है।
- ट्रेप के नीचे एक चिपचिपा पदार्थ (जैसे ग्रीस) या पानी का कंटेनर रखें ताकि आकर्षित कीट फंस जाएं।
- प्रति हैक्टर 5-10 ट्रेप लगाएं और नियमित रूप से कीटों की गिनती करें।
- फेरोमोन कैप्सूल को 3-4 सप्ताह बाद बदलें।
बीज को परिभाषित कीजिए। बीज की अंकुरण प्रतिशत ज्ञात करने का सूत्र भी दीजिए।
Define seed. Give the formula to know the percentage of seed germination. (1+1=2)
परिभाषा: बीज एक परिपक्व, निषेचित बीजांड है जिसमें भ्रूण, भोजन संग्रह ऊतक और बीज आवरण होता है, जो अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर नया पौधा उत्पन्न कर सकता है।
अंकुरण प्रतिशत का सूत्र:
अंकुरण प्रतिशत = (अंकुरित बीजों की संख्या / कुल बीजों की संख्या) × 100
मृदा उर्वरता की परिभाषा दीजिए। मृदा उर्वरता एवं मृदा उत्पादकता में चार अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Define soil fertility. Clarify four differences between soil fertility and soil productivity. (1+4=5)
परिभाषा: मृदा उर्वरता मृदा की वह क्षमता है जिससे वह पौधों को आवश्यक पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) उपलब्ध करा सकती है।
मृदा उर्वरता और मृदा उत्पादकता में चार अन्तर:
| क्रम | मृदा उर्वरता | मृदा उत्पादकता |
|---|---|---|
| 1 | यह मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता को दर्शाती है। | यह फसल उत्पादन की वास्तविक क्षमता को दर्शाती है। |
| 2 | यह मृदा का एक गुण है। | यह मृदा के गुणों और प्रबंधन दोनों पर निर्भर करती है। |
| 3 | उर्वर मृदा हमेशा उत्पादक नहीं होती। | उत्पादक मृदा हमेशा उर्वर होती है। |
| 4 | यह जलवायु और प्रबंधन से प्रभावित नहीं होती। | यह जलवायु, सिंचाई, और कृषि प्रबंधन से प्रभावित होती है। |
मटर के बीज को राइजोबियम की किस प्रजाति के कल्चर से उपचारित करते हैं? इस कल्चर से बीज उपचारित करने की विधि का वर्णन कीजिए।
By which culture of the species of Rhizobium is the seed of pea treated? Describe the method of seed treatment with this culture. (1+2=3)
प्रजाति: मटर के बीज को Rhizobium leguminosarum प्रजाति के कल्चर से उपचारित किया जाता है।
बीज उपचार विधि:
- एक किलोग्राम बीज के लिए 10-15 ग्राम राइजोबियम कल्चर लें।
- कल्चर को 200-300 मिलीलीटर साफ पानी में मिलाकर एक घोल तैयार करें।
- इस घोल को बीजों पर अच्छी तरह छिड़कें या बीजों को घोल में मिलाएं ताकि सभी बीज समान रूप से लेपित हो जाएं।
- बीजों को छाया में सुखाएं (धूप में नहीं) और तुरंत बुवाई करें।
- बीज उपचार के बाद 24 घंटे के भीतर बुवाई करना सर्वोत्तम है।
नेडेप कम्पोस्ट बनाने में प्रयुक्त सामग्री का विवरण दीजिए। इस विधि का विकास किसने किया?
Give the details of the material which is used to prepare Nadep compost. Who developed this method? (2+1=3)
प्रयुक्त सामग्री: नेडेप कम्पोस्ट बनाने में निम्नलिखित सामग्री का उपयोग किया जाता है:
- कार्बनिक पदार्थ: गोबर, फसल अवशेष, पत्तियां, घास, खरपतवार आदि।
- नाइट्रोजन स्रोत: हरी खाद, मूत्र, या यूरिया (वैकल्पिक)।
- पानी: नमी बनाए रखने के लिए।
- मिट्टी: ढकने के लिए।
- गड्ढा: ईंट या सीमेंट से बना 3x3x3 फीट का गड्ढा।
विकासकर्ता: इस विधि का विकास भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने किया था।
फसलों की जल मांग को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो कारकों का वर्णन कीजिए।
Describe any two factors affecting the water requirement of the crops. (1.5+1.5=3)
फसलों की जल मांग को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
- जलवायु: तापमान, आर्द्रता, वायु की गति और सूर्य के प्रकाश की तीव्रता जल मांग को प्रभावित करते हैं। उच्च तापमान और कम आर्द्रता पर वाष्पोत्सर्जन बढ़ता है, जिससे जल की आवश्यकता अधिक होती है।
- फसल का प्रकार और विकास अवस्था: विभिन्न फसलों की जल मांग अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए, धान की जल मांग अधिक होती है जबकि बाजरे की कम। फसल की विकास अवस्था भी महत्वपूर्ण है; फूल आने और दाना भरने की अवस्था में जल की मांग सबसे अधिक होती है।
8. वरणात्मक शाकनाशी व अवरणात्मक शाकनाशी में अन्तर स्पष्ट कीजिए। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण लिखिए।
Differentiate between selective herbicide and non-selective herbicide. Give one example for each.
वरणात्मक शाकनाशी (Selective Herbicide): ये शाकनाशी केवल विशिष्ट खरपतवारों को नष्ट करते हैं जबकि मुख्य फसल को कोई हानि नहीं पहुँचाते। ये फसल और खरपतवार के बीच चयनात्मकता रखते हैं।
उदाहरण: 2,4-D (चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए गेहूँ की फसल में प्रयोग)
अवरणात्मक शाकनाशी (Non-selective Herbicide): ये शाकनाशी सभी प्रकार के पौधों (फसल और खरपतवार दोनों) को नष्ट कर देते हैं। इनका उपयोग आमतौर पर बुवाई से पहले या गैर-कृषि क्षेत्रों में किया जाता है।
उदाहरण: ग्लाइफोसेट (Glyphosate)
9. मूंगफली की दो उन्नत किस्में, खाद व उर्वरक, बीज दर व उपज प्रति हैक्टर लिखिए।
Write two improved varieties, manure and fertilizers, seed rate and yield per hectare for groundnut.
- दो उन्नत किस्में: GG-2 (गुजरात ग्राउंडनट-2), TAG-24 (टीएजी-24)
- खाद व उर्वरक: गोबर की खाद 10-15 टन प्रति हैक्टर। रासायनिक उर्वरक: नाइट्रोजन 20-25 किग्रा/हैक्टर, फास्फोरस 40-50 किग्रा/हैक्टर, पोटाश 30-40 किग्रा/हैक्टर।
- बीज दर: 80-100 किग्रा प्रति हैक्टर (भूसी सहित)
- उपज प्रति हैक्टर: 20-25 क्विंटल प्रति हैक्टर (सूखी फली)
निम्न फसलों की बीज मात्रा प्रति हैक्टर लिखिए:
Write the seed rate per hectare for the following crops:
| क्रम संख्या | फसल | बीज मात्रा (किग्रा/हैक्टर) |
|---|---|---|
| (i) | चावल (Rice) | 40-50 (प्रत्यारोपण) / 80-100 (सीधी बुवाई) |
| (ii) | सरसों (Mustard) | 4-5 |
| (iii) | अरहर (Pigeon pea) | 12-15 |
| (iv) | बरसीम (Berseem) | 20-25 |
| (v) | सौंफ (Fennel) | 8-10 |
| (vi) | ज्वार (Sorghum) | 8-10 |
शुष्क खेती को परिभाषित कीजिए। शुष्क खेती के नमी संरक्षण सिद्धान्त का वर्णन कीजिए। शुष्क खेती के लिए उपयुक्त सरसों की दो उन्नत किस्में लिखिए।
Define dry farming. Explain the principle of moisture conservation of dry farming. Write two improved varieties of mustard suitable for dry farming.
शुष्क खेती की परिभाषा: शुष्क खेती (Dry Farming) वह कृषि पद्धति है जिसमें वर्षा की कमी (500 मिमी से कम) वाले क्षेत्रों में बिना सिंचाई के फसलों की खेती की जाती है। इसमें मिट्टी में नमी को संरक्षित करके फसल उगाई जाती है।
नमी संरक्षण के सिद्धान्त:
- मृदा संरक्षण: मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाकर जल धारण क्षमता बढ़ाना।
- गहरी जुताई: वर्षा के पानी को मिट्टी में अधिक गहराई तक पहुँचाना।
- मल्चिंग: फसल अवशेषों से मिट्टी को ढककर वाष्पीकरण कम करना।
- खरपतवार नियंत्रण: खरपतवारों को हटाकर पानी की बर्बादी रोकना।
- फसल चक्र: कम पानी वाली फसलों का चयन करना।
शुष्क खेती के लिए उपयुक्त सरसों की दो उन्नत किस्में: राजस्थान सरसों-1 (RGN-1), पूसा बोल्ड (Pusa Bold)
बाजरा की उन्नत खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए:
Describe the improved cultivation of pearl millet (bajra) based on the following points:
- दो उन्नत किस्में: राज बाजरा-1 (RJB-1), पूसा कम्पोजिट-383 (Pusa Composite-383)
- बुवाई का समय व बीजदर प्रति हैक्टर: बुवाई का समय: जुलाई (वर्षा ऋतु)। बीजदर: 3-4 किग्रा प्रति हैक्टर।
- खाद व उर्वरक: गोबर की खाद 10-15 टन/हैक्टर। रासायनिक उर्वरक: नाइट्रोजन 40-60 किग्रा/हैक्टर, फास्फोरस 20-30 किग्रा/हैक्टर, पोटाश 20 किग्रा/हैक्टर।
- हरित बाल (जोगिया) रोग का नियन्त्रण: यह रोग फफूंद (Sclerospora graminicola) से होता है। नियंत्रण के लिए: प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग, बीजोपचार मैंकोजेब या मेटालैक्सिल से करें, प्रभावित पौधों को हटाएँ, फसल चक्र अपनाएँ।
- कटाई व पैदावार प्रति हैक्टर: कटाई: जब बालियाँ पीली हो जाएँ (अक्टूबर-नवम्बर)। पैदावार: दाना 15-20 क्विंटल/हैक्टर, भूसा 40-50 क्विंटल/हैक्टर।
प्रश्न 19: चने की उन्नत खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :
अथवा
बाजरा की उन्नत खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :
चने की उन्नत खेती
- दो उन्नत किस्में: राजस्थान चना-1 (Rajasthan Chana-1) और देशी चना (Desi Chana) जैसी किस्में अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी होती हैं।
- बुवाई का समय व बीज दर प्रति हैक्टर: बुवाई का उपयुक्त समय अक्टूबर-नवम्बर है। बीज दर 75-80 किग्रा प्रति हैक्टर रखी जाती है।
- उर्वरक: नाइट्रोजन 20 किग्रा, फॉस्फोरस 40-50 किग्रा, पोटाश 20 किग्रा प्रति हैक्टर डालें। गोबर की खाद 10-15 टन प्रति हैक्टर भी लाभदायक है।
- उखटा रोग का नियंत्रण: उखटा रोग (Wilt) के नियंत्रण के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें, बीजोपचार कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/किग्रा बीज से करें, और फसल चक्र अपनाएँ।
- कटाई एवं उपज प्रति हैक्टर: फसल 120-140 दिनों में तैयार हो जाती है। कटाई फरवरी-मार्च में करें। औसत उपज 12-15 क्विंटल प्रति हैक्टर होती है।
बाजरा की उन्नत खेती
- दो उन्नत किस्में: राजस्थान बाजरा-1 (Rajasthan Bajra-1) और एचबी-1 (HB-1) जैसी किस्में अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी होती हैं।
- बुवाई का समय व बीज दर प्रति हैक्टर: बुवाई का उपयुक्त समय जुलाई-अगस्त है। बीज दर 4-5 किग्रा प्रति हैक्टर रखी जाती है।
- खाद-उर्वरक: नाइट्रोजन 40-50 किग्रा, फॉस्फोरस 20-25 किग्रा, पोटाश 20 किग्रा प्रति हैक्टर डालें। गोबर की खाद 10-15 टन प्रति हैक्टर भी लाभदायक है।
- हरा बाली रोग का नियंत्रण: हरा बाली रोग (Green Ear Disease) के नियंत्रण के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें, बीजोपचार थायरम 2 ग्राम/किग्रा बीज से करें, और फसल चक्र अपनाएँ।
- कटाई एवं उपज प्रति हैक्टर: फसल 80-100 दिनों में तैयार हो जाती है। कटाई अक्टूबर-नवम्बर में करें। औसत उपज 15-20 क्विंटल प्रति हैक्टर होती है।
प्रश्न 20: तिल की उन्नत खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :
- दो उन्नत किस्में: राजस्थान तिल-1 (Rajasthan Til-1) और टी-4 (T-4) जैसी किस्में अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी होती हैं।
- बुवाई का समय व बीज दर प्रति हैक्टर: बुवाई का उपयुक्त समय जुलाई-अगस्त है। बीज दर 4-5 किग्रा प्रति हैक्टर रखी जाती है।
- खाद-उर्वरक: नाइट्रोजन 30-40 किग्रा, फॉस्फोरस 20-25 किग्रा, पोटाश 20 किग्रा प्रति हैक्टर डालें। गोबर की खाद 10-15 टन प्रति हैक्टर भी लाभदायक है।
- लाल सड़न रोग का नियंत्रण: लाल सड़न रोग (Red Rot) के नियंत्रण के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें, बीजोपचार कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/किग्रा बीज से करें, और फसल चक्र अपनाएँ।
- उपज प्रति हैक्टर: औसत उपज 6-8 क्विंटल प्रति हैक्टर होती है।
तिल की उन्नत खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :
- दो उन्नत किस्में
- बुवाई का समय व बीजदर प्रति हैक्टर
- उर्वरक
- पत्ती विषाणु रोग का नियन्त्रण
- उपज प्रति हैक्टर
उत्तर:
(i) दो उन्नत किस्में: तिल की दो उन्नत किस्में हैं – आरटी-46 (RT-46) और टी-4 (T-4)। ये किस्में अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी होती हैं।
(ii) बुवाई का समय व बीजदर प्रति हैक्टर: तिल की बुवाई का उपयुक्त समय खरीफ ऋतु में जुलाई-अगस्त है। बीजदर 4-5 किग्रा प्रति हैक्टर रखी जाती है।
(iii) उर्वरक: तिल की फसल के लिए 40-60 किग्रा नाइट्रोजन, 20-30 किग्रा फॉस्फोरस और 20-30 किग्रा पोटाश प्रति हैक्टर देना चाहिए।
(iv) पत्ती विषाणु रोग का नियन्त्रण: पत्ती विषाणु रोग के नियंत्रण के लिए रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें, संक्रमित पौधों को हटा दें, और फसल चक्र अपनाएं। कीटनाशकों का छिड़काव भी किया जा सकता है।
(v) उपज प्रति हैक्टर: उन्नत किस्मों और उचित देखभाल से तिल की उपज 8-10 क्विंटल प्रति हैक्टर तक प्राप्त की जा सकती है।
Describe the improved cultivation of Sugarcane on the basis of following heads :
- Two improved varieties
- Time of sowing and seed rate per hectare
- Manure and fertilizers
- Control of red-rot disease
- Yield per hectare.
Answer:
(i) Two improved varieties: Two improved varieties of sugarcane are Co 0238 and Co 86032. These varieties are high yielding and resistant to diseases.
(ii) Time of sowing and seed rate per hectare: Sugarcane is sown in spring (February-March) or autumn (October-November). Seed rate is about 25,000-30,000 setts per hectare.
(iii) Manure and fertilizers: Apply 150-200 kg nitrogen, 60-80 kg phosphorus, and 60-80 kg potash per hectare. Farmyard manure at 10-15 tonnes per hectare is also beneficial.
(iv) Control of red-rot disease: Use disease-free setts, treat setts with fungicides (e.g., Carbendazim), follow crop rotation, and remove infected plants to control red-rot disease.
(v) Yield per hectare: With improved practices, sugarcane yield can reach 80-100 tonnes per hectare.
OR
Describe the improved cultivation of Til (Sesame) on the basis of following heads :
- Two improved varieties
- Time of sowing and seed rate per hectare
- Fertilizers
- Control of leaf virus disease
- Yield per hectare.
Answer:
(i) Two improved varieties: Two improved varieties of sesame are RT-46 and T-4. These are high yielding and disease resistant.
(ii) Time of sowing and seed rate per hectare: Sesame is sown in the kharif season (July-August). Seed rate is 4-5 kg per hectare.
(iii) Fertilizers: Apply 40-60 kg nitrogen, 20-30 kg phosphorus, and 20-30 kg potash per hectare for optimal growth.
(iv) Control of leaf virus disease: Use resistant varieties, remove infected plants, practice crop rotation, and spray insecticides to control leaf virus disease.
(v) Yield per hectare: With improved cultivation, sesame yield can be 8-10 quintals per hectare.
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