RBSE Class 12th 2010 Animal Husbandry & Dairying-SS-88-2010 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | Animal Husbandry & Dairying-SS-88-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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How to practise with this question paper
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RBSE Class 12th 2010 Animal Husbandry & Dairying-SS-88-2010
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Rajasthan Board Class 12th Animal Husbandry & Dairying-SS-88-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010
वैकल्पिक वर्ग IV – कृषि (OPTIONAL GROUP IV – AGRICULTURE)
पशुपालन एवं दुग्धविज्ञान (ANIMAL HUSBANDRY AND DAIRYING)
समय : 3½ घण्टे पूर्णांक : 48
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें ।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं । प्रश्न क्रमांक 8 में आंतरिक विकल्प है ।
All the questions are compulsory. There is an internal choice in Question No. 8. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें ।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
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प्रश्न संख्या 2 से 85 तक अति लघूत्तरात्मक हैं जिनके प्रत्येक उत्तर एक शब्द से 5 शब्दों में देने हैं।
Question Nos. 2 to 5 are very short answer type. The answers of these questions should be given in one word to fifteen words each.
प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii, iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:
| प्रश्न क्रमांक Question No. |
सही उत्तर का क्रमाक्षर Correct letter of the Answer |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
1. (i) भैंस के दूध में लगभग छेना प्रतिशत पाया जाता है:
The percentage of Chhana in the milk of Buffalo is about:
- (अ) 5
- (ब) 20
- (स) 25
- (द) 30
Alternatives (English):
- (A) 5
- (B) 20
- (C) 25
- (D) 30
सही उत्तर / Correct Answer: (स) 25 / (C) 25
व्याख्या / Explanation: भैंस के दूध में छेना (वसा और प्रोटीन) की मात्रा लगभग 25% होती है, जो गाय के दूध से अधिक होती है।
SS—88—Ani. Hus. & Dairy SS-604
Multiple Choice Questions
(0) घोड़ी के दूध में प्रोटीन की प्रतिशत मात्रा पाई जाती है
- (अ) 5.9%
- (ब) 2.69%
- (स) 3.69%
- (द) 4.29%
The percentage of protein in the milk of Mare is
- (A) 5.9%
- (B) 2.69%
- (C) 3.69%
- (D) 4.29%
Correct Answer: (ब) / (B) 2.69%
Explanation: Mare's milk typically contains about 2.5–2.7% protein, making 2.69% the correct option.
(ii) दूध का आपेक्षिक घनत्व होता है
- (अ) 2.022 से 2.026
- (ब) 0.011 से 0.06
- (स) 1.028 से 1.032
- (द) 3.06 से 3.08
The specific density of milk is
- (A) 2.022 to 2.026
- (B) 0.011 to 0.06
- (C) 1.028 to 1.032
- (D) 3.06 to 3.08
Correct Answer: (स) / (C) 1.028 to 1.032
Explanation: The specific density (relative density) of milk is normally between 1.028 and 1.032 at 15°C.
(iv) गाय के दूध के खीस में लेक्टोस की प्रतिशत मात्रा पाई जाती है
- (अ) 0.9%
- (ब) 4.9%
- (स) 2.9%
- (द) 3.9%
The percentage of lactose in the colostrum of cow's milk is
- (A) 0.9%
- (B) 4.9%
- (C) 2.9%
- (D) 3.9%
Correct Answer: (स) / (C) 2.9%
Explanation: Colostrum (first milk) of cows has lower lactose content, typically around 2.7–3.0%, so 2.9% is correct.
Note: The original text had minor OCR errors (e.g., "खीस" means colostrum, "लेक्टोस" is lactose). The correct options have been identified based on standard animal husbandry knowledge.
प्रश्न पत्र – पृष्ठ 4
-
व्हाइट लेगहार्न कितने माह में अण्डे देना प्रारंभ कर देती है ?
In how many months does white Leghorn start laying ?
उत्तर: व्हाइट लेगहार्न मुर्गी लगभग 5 से 6 माह (20-24 सप्ताह) की आयु में अण्डे देना प्रारंभ कर देती है।
-
यूरोपियन देशों में A, O और C विषाणु द्वारा कौन-सी बीमारी फैलती है ?
Which disease is spread by A, O and C virus in European countries ?
उत्तर: यूरोपियन देशों में A, O और C विषाणु द्वारा पैर और मुंह का रोग (Foot and Mouth Disease – FMD) फैलता है। यह एक अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग है जो पशुओं में होता है।
-
लंगड़ी रोग का रोगकारक क्या है ?
Which is the causal organism of Black quarter disease ?
उत्तर: लंगड़ी रोग (Black Quarter) का रोगकारक Clostridium chauvoei नामक जीवाणु है। यह एक अवायवीय जीवाणु है जो मिट्टी में पाया जाता है।
-
निश्चेतक औषधियों के दो उदाहरण लिखिए।
Write two examples of Anaesthetics.
उत्तर: निश्चेतक औषधियों (Anaesthetics) के दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- लिग्नोकेन (Lignocaine) – स्थानीय निश्चेतक
- थायोपेंटल सोडियम (Thiopental Sodium) – सामान्य निश्चेतक
-
प्राकृतिक जामन एवं सामान्य जामन में अन्तर लिखिए।
Differentiate between the natural starters and common starters.
उत्तर: प्राकृतिक जामन (Natural Starters) और सामान्य जामन (Common Starters) में निम्नलिखित अंतर हैं:
प्राकृतिक जामन सामान्य जामन यह प्राकृतिक रूप से दूध में उपस्थित सूक्ष्मजीवों से तैयार किया जाता है। यह प्रयोगशाला में शुद्ध संवर्धित सूक्ष्मजीवों से तैयार किया जाता है। इसमें सूक्ष्मजीवों की संरचना अनिश्चित होती है। इसमें सूक्ष्मजीवों की संरचना निश्चित और नियंत्रित होती है। इसकी गुणवत्ता और स्थिरता कम होती है। इसकी गुणवत्ता और स्थिरता अधिक होती है। -
पशु प्रजनन प्रबंध के कोई चार बिन्दु लिखिए।
Write any four points of animal breeding management.
उत्तर: पशु प्रजनन प्रबंध के चार महत्वपूर्ण बिन्दु निम्नलिखित हैं:
- उत्तम नस्ल का चयन: उच्च उत्पादन क्षमता वाले नर और मादा पशुओं का चयन करना।
- प्रजनन काल का निर्धारण: मादा पशु में गर्मी (मद) चक्र की पहचान कर सही समय पर गर्भाधान कराना।
- संतुलित आहार: प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए पशुओं को पौष्टिक और संतुलित आहार देना।
- रोग नियंत्रण: प्रजनन संबंधी रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण और स्वच्छता का ध्यान रखना।
-
एक से बीस सप्ताह तक की आयु की सौ पक्षियों के लिये नाँद आकार के दाने के पात्रों का आकार लिखिए।
Write the size of leaner type of feeder for 1 to 20 weeks age of 100 birds.
उत्तर: एक से बीस सप्ताह तक की आयु की 100 पक्षियों के लिए नाँद आकार के दाने के पात्र (feeder) का आकार लगभग 2.5 से 3 मीटर लंबा होना चाहिए। प्रति पक्षी लगभग 2.5 से 3 सेमी स्थान की आवश्यकता होती है।
SS—88—Ani. Hus. & Dairy SS-604
9. घी को परिभाषित करते हुए घी का महत्व लिखिए |
Define Ghee and write its importance.
घी की परिभाषा (Definition of Ghee): घी एक शुद्ध वसा (fat) है जो दूध से मक्खन या क्रीम को गर्म करके प्राप्त किया जाता है। इसमें नमी की मात्रा बहुत कम (0.5% से कम) होती है और यह लंबे समय तक खराब नहीं होता।
घी का महत्व (Importance of Ghee):
- यह ऊर्जा का एक समृद्ध स्रोत है और शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है।
- इसमें वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, E, K) पाए जाते हैं जो शरीर के विकास और प्रतिरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
- यह भोजन का स्वाद बढ़ाता है और पाचन में सहायक होता है।
- आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे घाव भरने और त्वचा के लिए लाभदायक।
- डेयरी उद्योग में इसका आर्थिक महत्व है क्योंकि यह एक मूल्यवान उत्पाद है।
10. एक अच्छे धावन के कोई पाँच गुण लिखिए ।
Write any five characteristics of a good cleaner.
एक अच्छे धावन (cleaner) के पाँच गुण निम्नलिखित हैं:
- इसमें उच्च सफाई क्षमता होनी चाहिए, अर्थात यह गंदगी और चिकनाई को आसानी से हटा सके।
- यह पानी में पूरी तरह घुलनशील होना चाहिए ताकि कोई अवशेष न बचे।
- यह सतहों या उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए (गैर-संक्षारक होना चाहिए)।
- इसमें जीवाणुरोधी गुण होने चाहिए ताकि रोगाणुओं को नष्ट किया जा सके।
- यह पर्यावरण के अनुकूल और बायोडिग्रेडेबल होना चाहिए, साथ ही उपयोग में सुरक्षित हो।
11. कार्बोलिक एसिड का उपयोग एवं प्रयोग विधि लिखिए ।
Write the uses and method of administration of Carbolic acid.
उपयोग (Uses):
- कार्बोलिक एसिड (फिनोल) एक शक्तिशाली कीटाणुनाशक है जिसका उपयोग घावों, उपकरणों और पर्यावरण की सफाई के लिए किया जाता है।
- इसका उपयोग पशुओं में त्वचा संक्रमण और खुजली के उपचार में किया जाता है।
- यह जीवाणु, कवक और वायरस को नष्ट करने में प्रभावी है।
प्रयोग विधि (Method of Administration):
- इसे आमतौर पर 2-5% जलीय घोल के रूप में उपयोग किया जाता है।
- घावों पर लगाने के लिए, इसे रुई या कपड़े से सीधे प्रभावित क्षेत्र पर लगाया जाता है।
- उपकरणों को कीटाणुरहित करने के लिए, उन्हें घोल में 10-15 मिनट तक भिगोया जाता है।
- ध्यान रखें कि यह त्वचा पर अधिक मात्रा में न लगे क्योंकि यह जलन पैदा कर सकता है।
12. मैगसल्फ की पहचान एवं उपयोग लिखिए |
Write the identification and uses of Magsulf.
पहचान (Identification): मैगसल्फ (मैग्नीशियम सल्फेट) एक सफेद, क्रिस्टलीय पाउडर या रंगहीन क्रिस्टल के रूप में होता है। इसका स्वाद कड़वा होता है और यह पानी में आसानी से घुल जाता है।
उपयोग (Uses):
- इसका उपयोग पशुओं में रेचक (laxative) के रूप में किया जाता है, विशेषकर कब्ज के उपचार में।
- यह मैग्नीशियम की कमी को पूरा करने के लिए दिया जाता है।
- इसका उपयोग सूजन और मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने के लिए भी किया जाता है।
- बाहरी उपयोग में, इसे घावों पर लगाने के लिए घोल के रूप में तैयार किया जाता है।
13. खुरपका-मुँहपका रोग के लक्षण व उपचार लिखिए |
Write the symptoms and treatment of foot and mouth disease.
लक्षण (Symptoms):
- पशु के मुंह, जीभ, मसूड़ों और खुरों पर छाले (blisters) बन जाते हैं।
- अत्यधिक लार बहना (drooling) और मुंह से झाग निकलना।
- लंगड़ापन (lameness) और खुरों में दर्द के कारण चलने में कठिनाई।
- बुखार (104-106°F) और भूख में कमी।
- दूध उत्पादन में अचानक गिरावट।
उपचार (Treatment):
- कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है; रोगसूचक उपचार दिया जाता है।
- मुंह और खुरों के छालों को एंटीसेप्टिक घोल (जैसे पोटैशियम परमैंगनेट) से धोना चाहिए।
- पशु को नरम और पौष्टिक आहार दें ताकि वह खा सके।
- बुखार के लिए ज्वरनाशक दवाएं (जैसे पैरासिटामोल) दी जा सकती हैं।
- रोग फैलने से रोकने के लिए संक्रमित पशु को अलग रखें और टीकाकरण करें।
14. चीचड़ी ज्वर के कारक एवं इसके कोई दो उपचार लिखिए |
Write the causal organism of Taxax fever and give any two treatments.
कारक (Causal Organism): चीचड़ी ज्वर (Tick fever) का कारक एक प्रोटोजोआ परजीवी है, जिसे Theileria annulata या Babesia bigemina कहा जाता है। यह रोग चीचड़ी (tick) के काटने से फैलता है।
दो उपचार (Two Treatments):
- औषधीय उपचार: ब्यूपार्वाक्वोन (Buparvaquone) या इमिडोकार्ब डिप्रोपियोनेट (Imidocarb dipropionate) जैसी दवाओं का इंजेक्शन दिया जाता है, जो परजीवी को नष्ट करती हैं।
- सहायक उपचार: पशु को आराम दें, तरल पदार्थ दें और बुखार कम करने के लिए ज्वरनाशक दवाएं दें। चीचड़ी नियंत्रण के लिए पशुशाला में कीटनाशक का छिड़काव करें।
5. केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर, मालपुरा से भेड़ की कौन-सी दो नल्लें निकाली गयीं ? किसी एक नस्ल का वर्णन कीजिए।
Write the names of two sheep breeds, which are developed by CSWRI, Avikanagar, Malpura. Describe about any one breed.
उत्तर: केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर, मालपुरा द्वारा विकसित दो भेड़ नस्लें हैं:
- अविकालिन (Avikalin)
- मालपुरा (Malpura)
अविकालिन नस्ल का वर्णन:
- उत्पत्ति स्थान: राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में विकसित की गई।
- शारीरिक विशेषताएँ: यह मध्यम आकार की भेड़ है, जिसका शरीर सफेद या हल्के भूरे रंग का होता है। इसके कान लंबे और लटकते हुए होते हैं। पूंछ मोटी और लंबी होती है।
- उपयोगिता: यह दोहरे उद्देश्य (मांस और ऊन) के लिए पाली जाती है। इसकी ऊन मोटी और मजबूत होती है, जो कालीन बनाने के लिए उपयुक्त है।
6. GIFT रोग के कारक एवं कोई दो उपचार लिखिए।
Write the causal organism and any two treatments of Anthrax disease.
उत्तर: एंथ्रेक्स (GIFT) रोग एक गंभीर जीवाणुजन्य रोग है।
- कारक (Causal Organism): बैसिलस एंथ्रेसिस (Bacillus anthracis) नामक जीवाणु।
- दो उपचार:
- एंटीबायोटिक दवाएँ जैसे पेनिसिलिन या टेट्रासाइक्लिन का प्रयोग।
- रोगग्रस्त पशु को पृथक करना और उसके शव को गहरा गाड़ना या जलाना ताकि संक्रमण न फैले।
7. तालिका बनाकर भैंस के खीस का संगठन प्रतिशत मात्रा में लिखिए।
Write the composition in percentage of the Buffalo’s colostrum by making a table.
उत्तर: भैंस के खीस (कोलोस्ट्रम) का संगठन प्रतिशत में निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है:
| घटक (Component) | प्रतिशत मात्रा (%) |
|---|---|
| जल (Water) | लगभग 75-80% |
| प्रोटीन (Protein) | लगभग 15-20% |
| वसा (Fat) | लगभग 5-7% |
| लैक्टोज (Lactose) | लगभग 2-3% |
| खनिज (Minerals) | लगभग 1-2% |
8. बकरी की बीटल नस्ल का मूल स्थान, शारीरिक विशेषताएँ एवं उपयोगिता लिखिए।
अथवा
जैसलमेरी भेड़ नस्ल का मूल स्थान, विशेषताएँ एवं उपयोगिता लिखिए।
Write the origin place, physical characteristics and uses of Goat’s Beetal breed. OR Write the origin place, characteristics and use of Jaisalmeri sheep breeds.
उत्तर (बीटल नस्ल):
- मूल स्थान: पंजाब (भारत) का गुरदासपुर और अमृतसर क्षेत्र।
- शारीरिक विशेषताएँ: यह बड़े आकार की बकरी है, जिसका शरीर मजबूत और लंबा होता है। इसके कान लंबे और लटकते हुए होते हैं। रंग आमतौर पर काला, भूरा या सफेद होता है। नर के सींग मोटे और मुड़े हुए होते हैं, जबकि मादा के छोटे होते हैं।
- उपयोगिता: यह मुख्यतः दूध उत्पादन के लिए पाली जाती है। इसका दूध वसा से भरपूर होता है। इसके अलावा मांस के लिए भी उपयोगी है।
अथवा (जैसलमेरी नस्ल):
- मूल स्थान: राजस्थान का जैसलमेर जिला।
- विशेषताएँ: यह मध्यम आकार की भेड़ है, जिसका शरीर सफेद या हल्के भूरे रंग का होता है। इसके कान छोटे और सीधे होते हैं। पूंछ पतली और छोटी होती है। यह शुष्क और गर्म जलवायु में पनपने में सक्षम है।
- उपयोगिता: यह मुख्यतः ऊन उत्पादन के लिए पाली जाती है। इसकी ऊन मोटी और मजबूत होती है, जो कालीन और रजाई बनाने के लिए उपयुक्त है। मांस के लिए भी उपयोगी है।
9. धावन पदार्थों का वर्गीकरण विस्तार से लिखिए।
Write in detail the classification of cleaner materials. [5]
धावन पदार्थों का वर्गीकरण (Classification of Cleaner Materials):
धावन पदार्थों को मुख्यतः निम्नलिखित वर्गों में बांटा गया है:
- डिटर्जेंट (Detergents): ये सिंथेटिक पदार्थ होते हैं जो वसा और गंदगी को हटाने में सहायक होते हैं। इनमें सर्फेक्टेंट (Surfactants) पाए जाते हैं जो पानी के पृष्ठ तनाव को कम करते हैं।
- साबुन (Soaps): ये प्राकृतिक वसा या तेलों से बनाए जाते हैं। ये क्षारीय माध्यम में अच्छी तरह काम करते हैं लेकिन कठोर जल में अवक्षेप बना सकते हैं।
- क्षारीय पदार्थ (Alkaline Cleaners): जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड, सोडियम कार्बोनेट आदि। ये प्रोटीन और वसा को तोड़ने में प्रभावी होते हैं।
- अम्लीय पदार्थ (Acid Cleaners): जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, फॉस्फोरिक अम्ल आदि। ये खनिज जमा (जैसे चूना) और जंग हटाने में उपयोग होते हैं।
- एंजाइमी क्लीनर (Enzymatic Cleaners): इनमें प्रोटीज, लाइपेज जैसे एंजाइम होते हैं जो जैविक गंदगी (जैसे रक्त, दूध) को तोड़ते हैं।
- सैनिटाइज़र (Sanitizers): ये सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए उपयोग होते हैं, जैसे क्लोरीन यौगिक, आयोडोफोर आदि।
वर्गीकरण का आधार: धावन पदार्थों को उनकी रासायनिक प्रकृति, क्रियाविधि और उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
20. हावर ब्रूडर का सचित्र वर्णन कीजिए। हावर ब्रूडर में चूजों की स्थिति एवं व्यवहार के आधार पर उचित तापमान का कैसे पता लगाया जा सकता है?
Describe Hover Brooder with diagram. How do you find the suitable temperature in Hover brooder by chicks' position and behaviour? [5]
हावर ब्रूडर का वर्णन (Description of Hover Brooder):
हावर ब्रूडर एक प्रकार का कृत्रिम ऊष्मायन उपकरण है जिसका उपयोग चूजों को प्रारंभिक अवस्था में गर्मी प्रदान करने के लिए किया जाता है। यह एक छत्राकार (umbrella-shaped) या शंक्वाकार संरचना होती है जो चूजों के ऊपर लटकाई जाती है। इसमें निम्नलिखित भाग होते हैं:
- हीटर (Heater): ब्रूडर के केंद्र में विद्युत या गैस से चलने वाला हीटर लगा होता है जो ऊष्मा उत्पन्न करता है।
- छत्र (Hover/Canopy): यह धातु या अन्य सामग्री से बना होता है जो ऊष्मा को नीचे की ओर परावर्तित करता है और चूजों के लिए एक गर्म क्षेत्र बनाता है।
- थर्मोस्टेट (Thermostat): तापमान को नियंत्रित करने के लिए लगाया जाता है।
- पर्दे (Curtains): ब्रूडर के चारों ओर पर्दे लगाए जाते हैं ताकि गर्मी बाहर न जाए और चूजे सुरक्षित रहें।
चित्र (Diagram): [यहाँ एक सरल चित्र का वर्णन किया गया है - एक शंक्वाकार छत्र जिसके नीचे हीटर लगा है, और चारों ओर पर्दे हैं। चूजे नीचे बैठे हुए दिखाए गए हैं।]
चूजों की स्थिति एवं व्यवहार के आधार पर उचित तापमान का पता लगाना:
चूजों के व्यवहार को देखकर हावर ब्रूडर में उचित तापमान का अनुमान लगाया जा सकता है:
- यदि तापमान उपयुक्त है: चूजे ब्रूडर के नीचे समान रूप से फैलकर बैठते हैं। वे सक्रिय रहते हैं, खाते-पीते हैं और आराम से आवाज करते हैं।
- यदि तापमान बहुत अधिक है: चूजे ब्रूडर के किनारों की ओर चले जाते हैं, दूर हट जाते हैं, पंख फैलाते हैं, पानी अधिक पीते हैं और हांफते हैं।
- यदि तापमान बहुत कम है: चूजे हीटर के पास इकट्ठा हो जाते हैं, एक-दूसरे से चिपक जाते हैं, आवाज करते हैं और सुस्त दिखते हैं।
- यदि ड्राफ्ट (हवा का झोंका) है: चूजे एक तरफ इकट्ठा हो जाते हैं, ड्राफ्ट से बचने की कोशिश करते हैं।
निष्कर्ष: चूजों के व्यवहार का अवलोकन करके तापमान को समायोजित किया जा सकता है। सामान्यतः पहले सप्ताह में 95°F (35°C) तापमान रखा जाता है, फिर प्रति सप्ताह 5°F कम किया जाता है।
SS—88—Ani. Hus. & Dairy SS-604