RBSE Class 12th 2010 Drawing (History Of Indian Painting & Sculpture)-SS-17-D&D-2010 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | Drawing (History Of Indian Painting & Sculpture)-SS-17-D&D-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2010 Drawing (History Of Indian Painting & Sculpture)-SS-17-D&D-2010
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Rajasthan Board Class 12th Drawing (History Of Indian Painting & Sculpture)-SS-17-D&D-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक (मूक-बधिर) परीक्षा, 2010
वैकल्पिक वर्ग I (OPTIONAL GROUP I – Humanities)
चित्रकला (DRAWING)
भारतीय चित्रकला एवं मूर्तिकला का इतिहास (History of Indian Painting and Sculpture)
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- प्रश्न संख्या 1 से 5 तक निबन्धात्मक प्रश्न हैं जिनके उत्तर प्रत्येक लगभग 150 शब्दों में लिखिए। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है।
- प्रश्न संख्या 6 से 15 तक लघुत्तरात्मक प्रश्न हैं जिनके उत्तर दो से तीन लाइनों में लिखिए। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है।
[ Turn over ]
लघु उत्तरीय प्रश्न
-
यामिनी राय के चित्र भारतीय आधुनिक कला का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्णन कीजिए।
यामिनी राय (1887-1972) भारतीय आधुनिक कला के अग्रणी चित्रकारों में से एक थे। उनके चित्रों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- पारंपरिक भारतीय शैली का आधुनिक प्रयोग: उन्होंने बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट से प्रभावित होकर भारतीय लोक कला (जैसे कालीघाट पटचित्र, मधुबनी, और राजस्थानी लघु चित्रकला) को आधुनिक रूप दिया।
- सरल और स्पष्ट रेखाएँ: उनके चित्रों में मोटी, स्पष्ट और बहती हुई रेखाओं का प्रयोग हुआ है, जो चित्रों को एक विशिष्ट पहचान देती हैं।
- चमकीले और सपाट रंग: उन्होंने प्राकृतिक रंगों (जैसे हरा, लाल, पीला, नीला) का प्रयोग किया, जो सपाट (flat) होते थे और उनमें छाया-प्रकाश का प्रभाव नहीं होता था।
- विषय-वस्तु: उनके चित्रों में भारतीय ग्रामीण जीवन, पौराणिक कथाएँ, देवी-देवता, और लोक जीवन के दृश्य प्रमुख रूप से चित्रित हुए हैं।
- प्रभाव: उन्होंने पश्चिमी कला के यथार्थवाद और परिप्रेक्ष्य को त्यागकर पूर्णतः भारतीय शैली को अपनाया, जिससे वे आधुनिक भारतीय कला के एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने।
इस प्रकार, यामिनी राय के चित्र भारतीय परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतिनिधित्व करते हैं।
-
रवीन्द्रनाथ टैगोर के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर लेख लिखिए।
रवीन्द्रनाथ टैगोर (1861-1941) एक महान कवि, लेखक, चित्रकार, दार्शनिक और संगीतकार थे। उनके कृतित्व और व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- साहित्यिक योगदान: उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध आदि विधाओं में रचनाएँ कीं। 'गीतांजलि' के लिए उन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।
- चित्रकला: लगभग 60 वर्ष की आयु में उन्होंने चित्रकला शुरू की। उनके चित्रों में अमूर्तता, रेखाओं का अनूठा प्रयोग, और भावनात्मक गहराई देखने को मिलती है। उन्होंने हजारों चित्र बनाए।
- संगीत: उन्होंने लगभग 2,000 से अधिक गीतों की रचना की, जिन्हें 'रवीन्द्र संगीत' के नाम से जाना जाता है। भारत और बांग्लादेश का राष्ट्रगान उन्हीं की रचना है।
- शिक्षा और दर्शन: उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्व-भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की, जहाँ प्रकृति के बीच शिक्षा पर बल दिया गया। वे मानवतावाद और सार्वभौमिक भाईचारे के पक्षधर थे।
- व्यक्तित्व: वे एक संवेदनशील, स्वतंत्र विचारक और सृजनशील व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों का विरोध किया और नए विचारों को अपनाया।
इस प्रकार, रवीन्द्रनाथ टैगोर एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, जिन्होंने भारतीय कला, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध किया।
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राम गोपाल विजयवर्गीय के जीवन एवं कला पर प्रकाश डालिए।
राम गोपाल विजयवर्गीय (1905-1999) राजस्थान के प्रसिद्ध चित्रकार और मूर्तिकार थे। उनके जीवन और कला की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- जीवन परिचय: उनका जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ। उन्होंने जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट्स और कोलकाता के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स में शिक्षा प्राप्त की।
- कला शैली: उन्होंने राजस्थानी लघु चित्रकला की परंपरा को आगे बढ़ाया। उनके चित्रों में बूंदी, कोटा और मेवाड़ शैलियों का प्रभाव दिखता है।
- विषय-वस्तु: उन्होंने पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक घटनाओं, और राजस्थानी लोक जीवन को अपने चित्रों का विषय बनाया। 'रासलीला' और 'कृष्ण लीला' उनके प्रिय विषय थे।
- योगदान: उन्होंने राजस्थानी चित्रकला को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कला शिक्षक भी रहे और उन्होंने अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित किया।
- सम्मान: उन्हें राजस्थान सरकार और कला संस्थानों द्वारा अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
इस प्रकार, राम गोपाल विजयवर्गीय ने राजस्थानी चित्रकला की परंपरा को संरक्षित और समृद्ध किया।
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शुंगकालीन मूर्तिकला का वर्णन कीजिए।
शुंगकाल (लगभग 185 ई.पू. से 73 ई.पू.) की मूर्तिकला भारतीय कला के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सामग्री: इस काल में मुख्यतः पत्थर (विशेषकर बलुआ पत्थर) और टेराकोटा (पकी मिट्टी) का प्रयोग हुआ।
- विषय-वस्तु: बौद्ध धर्म से संबंधित विषय (जैसे स्तूप, चैत्य, बोधिसत्व) प्रमुख थे, लेकिन हिंदू देवी-देवताओं और यक्ष-यक्षिणियों की मूर्तियाँ भी बनाई गईं।
- शैली: मूर्तियों में सादगी और स्वाभाविकता देखने को मिलती है। शरीर के अंगों का अनुपात सामान्यतः सही होता है, लेकिन मौर्यकालीन चमक और परिष्कार का अभाव है।
- प्रमुख उदाहरण: भरहुत स्तूप की वेदिका और तोरणद्वार पर बनी मूर्तियाँ, बोधगया का वज्रासन, और सांची स्तूप के प्रारंभिक भाग।
- अलंकरण: पुष्प, पत्तियों, और ज्यामितीय आकृतियों का प्रयोग अलंकरण के लिए किया गया।
शुंगकालीन मूर्तिकला ने मौर्य और गुप्त काल की मूर्तिकला के बीच एक सेतु का काम किया।
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निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
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दीदारगंज की यक्षिणी
दीदारगंज की यक्षिणी (लगभग 3री शताब्दी ई.पू.) मौर्यकालीन मूर्तिकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह पटना (प्राचीन पाटलिपुत्र) के दीदारगंज क्षेत्र से प्राप्त हुई थी। यह एक स्त्री आकृति है, जो अपने दाहिने हाथ में चौरी (फ्लाई व्हिस्क) धारण किए हुए है। इस मूर्ति की विशेषता इसकी चमकदार पॉलिश (मौर्यकालीन पॉलिश) और शारीरिक सौंदर्य का यथार्थवादी चित्रण है। यह मूर्ति भारतीय मूर्तिकला में स्त्री सौंदर्य के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक मानी जाती है।
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गुप्तकालीन हिंदू मूर्तियाँ
गुप्तकाल (लगभग 4री से 6ठी शताब्दी ई.) को भारतीय कला का स्वर्ण युग कहा जाता है। इस काल की हिंदू मूर्तियों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- आदर्शवादी शैली: मूर्तियों में शारीरिक सौंदर्य, संतुलन और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
- प्रमुख देवता: विष्णु, शिव, दुर्गा, सूर्य आदि देवताओं की मूर्तियाँ बनाई गईं।
- प्रभाव: इन मूर्तियों ने बाद की भारतीय मूर्तिकला को गहराई से प्रभावित किया।
- उदाहरण: देवगढ़ का दशावतार मंदिर, उदयगिरि की गुफाएँ, और मथुरा की मूर्तियाँ।
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सारनाथ के सिंह शीर्ष (स्तंभ) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
सारनाथ का सिंह शीर्ष (लगभग 250 ई.पू.) मौर्य सम्राट अशोक द्वारा स्थापित एक स्तंभ का शीर्ष भाग है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- संरचना: यह एक एकल खंड में बलुआ पत्थर से निर्मित है। इसमें चार शेर पीठ के बल बैठे हुए हैं, जो चारों दिशाओं की ओर मुख किए हुए हैं।
- आधार: शेरों के नीचे एक घंटी के आकार का कमल (पद्म) है, जो उल्टा लटका हुआ प्रतीत होता है।
- अभिकल्प: शेरों के बीच में एक धर्मचक्र (अशोक चक्र) बना हुआ है।
- प्रतीकात्मकता: यह बुद्ध के धर्मचक्र प्रवर्तन (धर्म की शुरुआत) का प्रतीक है। चार शेर बुद्ध के चार आर्य सत्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- महत्व: यह भारत का राष्ट्रीय चिह्न है और इसे भारत के राजकीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया
12. “मामल्य शैली मन्दिर” और किस नाम से जाने जाते हैं ?
उत्तर: “मामल्य शैली मन्दिर” को “रथ मन्दिर” या “पंचरथ मन्दिर” के नाम से भी जाना जाता है। यह शैली दक्षिण भारत के पल्लव वंश के राजा मामल्य (नरसिंहवर्मन प्रथम) के काल में विकसित हुई थी।
3. देलवाड़ा के जैन मन्दिर की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: देलवाड़ा के जैन मन्दिर (राजस्थान के माउंट आबू में स्थित) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- संगमरमर का अद्भुत कार्य: मन्दिर पूरी तरह सफेद संगमरमर से निर्मित है, जिस पर बारीक नक्काशी की गई है।
- गर्भगृह और मण्डप: मन्दिर में एक मुख्य गर्भगृह है जिसके चारों ओर स्तंभों से सज्जित मण्डप हैं।
- स्तंभों की सुंदरता: स्तंभों पर पुष्प, पत्तियों और ज्यामितीय आकृतियों की उत्कृष्ट नक्काशी है।
- छत की कलाकृति: छतों पर झूलते हुए पुष्पों और कलशों की आकृतियाँ बनी हैं, जो अत्यंत नाजुक दिखती हैं।
- प्रतिमाएँ: मन्दिर में तीर्थंकरों की संगमरमर की मूर्तियाँ स्थापित हैं, जो ध्यान मुद्रा में हैं।
- प्राकृतिक दृश्य: मन्दिर के चारों ओर हरियाली और पहाड़ियाँ हैं, जो इसकी सुंदरता को बढ़ाती हैं।
4. एलिफेन्टा कहाँ पर स्थित है ?
उत्तर: एलिफेन्टा (एलिफेंटा द्वीप) मुंबई (महाराष्ट्र) के तट से लगभग 10 किलोमीटर दूर अरब सागर में स्थित है। यह द्वीप अपनी गुफाओं और त्रिमूर्ति (शिव की तीन मुखों वाली मूर्ति) के लिए प्रसिद्ध है।
5. आंबानेरी (आभानेरी) में प्राप्त मूर्तियों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर: आंबानेरी (आभानेरी) राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है। यहाँ प्राप्त प्रमुख मूर्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- हर्षद माता की मूर्ति: यह एक दुर्लभ मूर्ति है जो माता के रूप में देवी की शक्ति को दर्शाती है।
- गणेश और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ: यहाँ गणेश, विष्णु और शिव की मूर्तियाँ भी मिली हैं, जो गुप्तकालीन शैली में बनी हैं।
- स्तंभों पर नक्काशी: मन्दिर के स्तंभों पर पौराणिक कथाओं और ज्यामितीय आकृतियों की नक्काशी है।
- प्राकृतिक सौंदर्य: मूर्तियाँ संगमरमर और बलुआ पत्थर से बनी हैं, जो उस समय की कला कुशलता को दर्शाती हैं।