RBSE Class 12th 2010 Physics-SS-40-2-2010 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2010
Subject Physics-SS-40-2-2010
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Physics-SS-40-2-2010 2010 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010

वैकल्पिक II (OPTIONAL GROUP II – SCIENCE)

भौतिक विज्ञान — द्वितीय पत्र (PHYSICS — Second Paper)

समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 40

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें ।
    Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
    If there is any error/difference/contradiction in Hindi and English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
  3. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं । प्रश्न क्रमांक 23 व 24 में आन्तरिक विकल्प हैं ।
    All questions are compulsory. Question Nos. 23 and 24 have internal choices.
  4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  5. प्रश्न क्रमांक 2 से 5 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं ।
    Question Nos. 2 to 5 are Very Short Answer type questions.
No. of Questions — 24 SS—40-2—Phy. II No. of Printed Pages — 7
SS—40-2—Phy. II   35 ह82-ा   [ Turn over

प्रश्न 1 (i)

समान तीव्रता I₀ के दो कला-संबद्ध स्रोतों से प्राप्त व्यतिकरण प्रतिरूप में माध्य तीव्रता होगी:

  • (अ) I₀
  • (ब) 2I₀
  • (स) 4I₀
  • (द) 0

व्याख्या: दो कला-संबद्ध स्रोतों से व्यतिकरण में, अधिकतम तीव्रता 4I₀ और न्यूनतम तीव्रता 0 होती है। माध्य तीव्रता = (अधिकतम + न्यूनतम)/2 = (4I₀ + 0)/2 = 2I₀। लेकिन यहाँ प्रश्न में "माध्य तीव्रता" से तात्पर्य समस्त प्रतिरूप की औसत तीव्रता से है, जो 2I₀ होती है। हालाँकि, दिए गए विकल्पों में 2I₀ (ब) है, परंतु सामान्यतः व्यतिकरण प्रतिरूप में माध्य तीव्रता 2I₀ ही होती है। यहाँ विकल्प (स) 4I₀ अधिकतम तीव्रता है। प्रश्न के अनुसार सही उत्तर (स) 4I₀ है।


निर्देश:

  • जहाँ आवश्यक हो, चित्र में विद्युत धारा, विद्युत क्षेत्र एवं प्रकाश किरण की दिशा दिखाइये।
  • जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ लिखें।

प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii, iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स, द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:

प्रश्न उत्तर
1. (i)
1. (ii)
1. (iii)
1. (iv)

खंड – अ (Section – A)

  1. l उपकोश में इलेक्ट्रॉन के कक्षीय कोणीय संवेग का व्यंजक होगा / The expression for orbital angular momentum in l subshell of an electron will be

    • (A) \(\sqrt{l(l+1)}\frac{h}{2\pi}\)
    • (B) \(\sqrt{l(l+1)}\frac{h}{2\pi}\)
    • (C) \(\sqrt{l(l+1)}\frac{h}{2\pi}\)
    • (D) \(\sqrt{l(l+1)}\frac{h}{2\pi}\)

    सही उत्तर: (A) \(\sqrt{l(l+1)}\frac{h}{2\pi}\)

    व्याख्या: कक्षीय कोणीय संवेग का मान \(\sqrt{l(l+1)}\frac{h}{2\pi}\) होता है, जहाँ l दिगंशी क्वांटम संख्या है।

  2. अर्द्ध-चालकों में चालन होता है / Conduction in semiconductor is

    • (A) एकल ध्रुवीय (unipolar)
    • (B) द्विध्रुवीय (bipolar)
    • (C) त्रिध्रुवीय (tripolar)
    • (D) अध्रुवीय (non-polar)

    सही उत्तर: (B) द्विध्रुवीय (bipolar)

    व्याख्या: अर्द्ध-चालकों में चालन इलेक्ट्रॉनों और होलों दोनों के कारण होता है, अतः यह द्विध्रुवीय होता है।

  3. उच्चतम वेधन क्षमता की तरंग है / Wave of the highest penetration power is

    • (A) अवरक्त तरंग (infrared wave)
    • (B) पराबैंगनी तरंग (ultraviolet wave)
    • (C) एक्स-किरण (X-ray)
    • (D) गामा किरण (gamma ray)

    सही उत्तर: (D) गामा किरण (gamma ray)

    व्याख्या: गामा किरणों की तरंगदैर्ध्य सबसे कम और ऊर्जा सबसे अधिक होती है, जिससे इनकी वेधन क्षमता सर्वाधिक होती है।


खंड – ब (Section – B)

  1. ध्वनि तरंगों में ध्रुवण प्रेक्षित क्यों नहीं होता है? / Why is the phenomenon of polarisation not observed in sound waves?

    उत्तर: ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होता है, जबकि ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं। अनुदैर्ध्य तरंगों में कंपन की दिशा संचरण की दिशा के समानांतर होती है, इसलिए उनमें ध्रुवण की घटना नहीं देखी जाती।

  2. हाइड्रोजन परमाणु की तृतीय कक्षा की त्रिज्या 4.77 Å है, तो प्रथम कक्षा की त्रिज्या ज्ञात कीजिए। / Radius of third orbit of hydrogen atom is 4.77 Å. Find the radius of its first orbit.

    हल: बोर मॉडल के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा की त्रिज्या \(r_n = n^2 r_1\) होती है, जहाँ \(r_1\) प्रथम कक्षा की त्रिज्या है।

    दिया है: तृतीय कक्षा (n=3) की त्रिज्या \(r_3 = 4.77\) Å

    सूत्र से: \(r_3 = 3^2 \times r_1 = 9r_1\)

    अतः \(r_1 = \frac{r_3}{9} = \frac{4.77}{9} = 0.53\) Å

    प्रथम कक्षा की त्रिज्या 0.53 Å है।

प्रश्न पत्र – भौतिकी (SS–40-2–Phy. II) – पृष्ठ 4

  1. नैज अर्द्धचालक की क्रिस्टल संरचना का नाम लिखिए।
    Write the name of crystal structure of intrinsic semiconductor.

    उत्तर: नैज अर्द्धचालक की क्रिस्टल संरचना डायमंड क्यूबिक (Diamond Cubic) होती है। इसमें प्रत्येक परमाणु चार अन्य परमाणुओं से सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है, जो एक नियमित चतुष्फलकीय (tetrahedral) जालक बनाता है।

  2. आकाश तरंग संचरण में सूक्ष्म तरंग क्यों अधिक उपयुक्त है?
    Why are microwaves more suitable for sky wave propagation?

    उत्तर: सूक्ष्म तरंगों (microwaves) की आवृत्ति अधिक (लगभग 1 GHz से 300 GHz) होती है, जिसके कारण ये आयनमंडल से परावर्तित होकर पृथ्वी पर वापस आ सकती हैं। इसके विपरीत, निम्न आवृत्ति की तरंगें आयनमंडल द्वारा अवशोषित हो जाती हैं या उनमें से गुज़र जाती हैं। अतः सूक्ष्म तरंगें आकाश तरंग संचरण (sky wave propagation) के लिए अधिक उपयुक्त हैं।

  3. प्रकाश के व्यतिकरण एवं विवर्तन में कोई दो अन्तर लिखिए।
    Write any two differences between diffraction and interference of light.

    उत्तर:

    1. उत्पत्ति: व्यतिकरण (interference) दो अलग-अलग सुसंगत स्रोतों से आने वाली तरंगों के अध्यारोपण से उत्पन्न होता है, जबकि विवर्तन (diffraction) एक ही तरंगाग्र के विभिन्न भागों से आने वाली तरंगों के अध्यारोपण से होता है।
    2. फ्रिंजों की तीव्रता: व्यतिकरण में सभी दीप्त फ्रिंजों की तीव्रता समान होती है, जबकि विवर्तन में केंद्रीय फ्रिंज अधिकतम तीव्रता की होती है और अन्य फ्रिंजों की तीव्रता क्रमशः घटती जाती है।
  4. इलेक्ट्रॉन के विशिष्ट आवेश ज्ञात करने की थामसन विधि में प्रयुक्त उपकरण का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए।
    Draw neat and labelled diagram of an apparatus used in Thomson’s method to determine specific charge of an electron.

    उत्तर: थॉमसन के प्रयोग में प्रयुक्त उपकरण का नामांकित चित्र निम्नलिखित है:

            +-------------------+
            |   कैथोड (C)       |
            |   (Cathode)        |
            +--------+----------+
                     |
                     | (इलेक्ट्रॉन पुंज)
                     v
            +--------+----------+
            |   एनोड (A)        |
            |   (Anode)          |
            +--------+----------+
                     |
                     v
            +--------+----------+
            |   संधारित्र प्लेटें |
            |   (P1, P2)         |
            |   (विद्युत क्षेत्र)|
            +--------+----------+
                     |
                     v
            +--------+----------+
            |   चुंबकीय क्षेत्र  |
            |   (B)              |
            +--------+----------+
                     |
                     v
            +--------+----------+
            |   फ्लोरोसेंट पर्दा |
            |   (Fluorescent     |
            |    Screen)         |
            +-------------------+
    

    व्याख्या: कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन एनोड द्वारा त्वरित होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन संधारित्र प्लेटों (P1, P2) के बीच से गुज़रते हैं, जहाँ विद्युत क्षेत्र लगाया जाता है। बाहर से चुंबकीय क्षेत्र (B) भी लगाया जाता है। विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों को संतुलित करके इलेक्ट्रॉन के वेग का मान ज्ञात किया जाता है, और फिर विशिष्ट आवेश (e/m) की गणना की जाती है।

  5. समान दी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य के लिए अल्फा कण एवं प्रोटॉन को त्वरित करने के विद्युत विभव Vα और Vp का अनुपात ज्ञात कीजिए।
    Find out the ratio of accelerating electric potential Vα and Vp for equal de Broglie wavelength of alpha particle and proton.

    उत्तर: दी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य λ = h / p, जहाँ p संवेग है। त्वरित कण के लिए गतिज ऊर्जा K = qV, जहाँ q आवेश और V विभव है। संवेग p = √(2mK) = √(2mqV).

    समान तरंगदैर्ध्य के लिए: λα = λp ⇒ h / √(2mαqαVα) = h / √(2mpqpVp)

    ⇒ √(mαqαVα) = √(mpqpVp) ⇒ mαqαVα = mpqpVp

    अल्फा कण (α) का द्रव्यमान mα = 4mp (प्रोटॉन द्रव्यमान का 4 गुना) और आवेश qα = 2e (प्रोटॉन आवेश का 2 गुना) होता है। प्रोटॉन का आवेश qp = e.

    ⇒ (4mp)(2e)Vα = (mp)(e)Vp ⇒ 8 mp e Vα = mp e Vp

    ⇒ Vα / Vp = 1/8

    अतः अभीष्ट अनुपात Vα : Vp = 1 : 8 है।

  6. प्रकाश विद्युत सेल से प्लांक नियतांक का मान ज्ञात करने का नामांकित चित्र तथा निरोधी विभव एवं आपतित प्रकाश की आवृत्ति के मध्य वक्र बनाइए।
    Draw labelled diagram to determine the value of Planck’s constant using photocell and the curve between stopping potential and frequency of incident light.

    उत्तर: प्रकाश विद्युत सेल द्वारा प्लांक नियतांक ज्ञात करने का नामांकित चित्र:

            +-------------------+
            |   प्रकाश स्रोत    |
            |   (Light Source)   |
            +--------+----------+
                     |
                     v (आपतित प्रकाश)
            +--------+----------+
            |   फोटोकैथोड (C)   |
            |   (Photocathode)   |
            +--------+----------+
                     |
                     v (इलेक्ट्रॉन)
            +--------+----------+
            |   एनोड (A)        |
            |   (Anode)          |
            +--------+----------+
                     |
                     v
            +--------+----------+
            |   वोल्टमीटर (V)   |
            |   (Voltmeter)      |
            +--------+----------+
    

    निरोधी विभव (V0) और आवृत्ति (f) के मध्य वक्र:

            V0 (वोल्ट)
            ^
            |        /
            |       /
            |      /
            |     /
            |    /
            |   /
            |  /
            | /
            |/________________> f (आवृत्ति)
            f0 (देहली आवृत्ति)
    

    व्याख्या: विभिन्न आवृत्तियों के लिए निरोधी विभव (V0) मापा जाता है। V0 और f के मध्य ग्राफ एक सरल रेखा होती है। इस रेखा की ढलान (slope) = h/e होती है, जहाँ e इलेक्ट्रॉन का आवेश है। ढलान से h = e × slope ज्ञात किया जाता है।

  7. नाभिकीय बल की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
    Write any two properties of nuclear force.

    उत्तर: नाभिकीय बल की दो प्रमुख विशेषताएँ:

    1. अल्प परासी (Short range): नाभिकीय बल केवल अत्यंत कम दूरी (लगभग 10−15 मीटर या 1 फर्मी) तक प्रभावी होता है। इस दूरी से अधिक पर यह बल नगण्य हो जाता है।
    2. आवेश स्वतंत्र (Charge independent): नाभिकीय बल प्रोटॉन-प्रोटॉन, प्रोटॉन-न्यूट्रॉन और न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन के बीच समान रूप से कार्य करता है। यह आवेश पर निर्भर नहीं करता।
  8. विद्युत दोलित्र को परिभाषित कीजिए। आवृत्ति परास के आधार पर दोलित्रों के नाम लिखिए।
    Define electric oscillator. Write the names of oscillators on the basis of frequency range.

    उत्तर: विद्युत दोलित्र एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ है जो बिना किसी बाह्य उत्तेजना के नियत आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा (AC) या वोल्टेज उत्पन्न करता है। यह DC ऊर्जा को AC ऊर्जा में परिवर्तित करता है।

    आवृत्ति परास के आधार पर दोलित्रों के नाम:

    • निम्न आवृत्ति दोलित्र (Low Frequency Oscillator): लगभग 20 Hz से 100 kHz तक। उदाहरण: RC दोलित्र (वीन ब्रिज दोलित्र)।
    • उच्च आवृत्ति दोलित्र (High Frequency Oscillator): लगभग 100 kHz से 100 MHz तक। उदाहरण: LC दोलित्र (हार्टले दोलित्र, कोल्पिट्स दोलित्र)।
    • अति उच्च आवृत्ति दोलित्र (Very High Frequency Oscillator): 100 MHz से ऊपर। उदाहरण: क्रिस्टल दोलित्र, क्लैप दोलित्र।
  9. द्वि-निवेशी OR गेट तथा द्वि-निवेशी AND गेट के प्रयोग में एक निर्गत है। निवेशी संकेतों की दो अवस्थाएँ लिखिए, जब दोनों द्वार में निर्गत संकेत समान प्राप्त हो।
    Two-input OR gate and two-input AND gate experiments have one output. Write the two stages of input signals when output signal is same for both the gates.

    उत्तर: दो-निवेशी OR गेट और AND गेट के लिए, निर्गत समान होने की दो

3. आयन मण्डल का निर्माण किस प्रकार होता है? इसका क्या उपयोग है?
How is ionosphere formed? What is its use?

निर्माण (Formation): सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें और उच्च ऊर्जा विकिरण वायुमंडल के ऊपरी भाग (लगभग 60 किमी से 1000 किमी ऊँचाई) में उपस्थित गैसों (जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन) के अणुओं को आयनित कर देते हैं। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉन और धन आयन उत्पन्न होते हैं, जिससे आवेशित कणों का एक क्षेत्र बनता है जिसे आयन मण्डल कहते हैं।

उपयोग (Use): आयन मण्डल रेडियो तरंगों को परावर्तित करता है, जिससे लंबी दूरी पर रेडियो संचार संभव होता है। यह आकाशीय तरंग प्रसारण में सहायक होता है।

4. हाइगन्स के तरंग सिद्धान्त से प्रकाश के परावर्तन की व्याख्या कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
Explain the reflection of light by Huygens' wave theory. Give necessary diagram.

व्याख्या (Explanation): हाइगन्स के सिद्धांत के अनुसार, प्रकाश तरंगों के रूप में संचरित होता है। जब एक समतल तरंगाग्र AB एक परावर्तक सतह (दर्पण) पर आपतित होता है, तो सतह पर प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का स्रोत बन जाता है।

  • मान लीजिए तरंगाग्र AB समय t = 0 पर सतह पर बिंदु A पर पहुँचता है।
  • जब तरंगाग्र का बिंदु B, सतह पर बिंदु C पर पहुँचता है, तब तक A से उत्पन्न द्वितीयक तरंगिका AA' दूरी तय करती है, जहाँ AA' = BC (चूँकि चाल समान है)।
  • इसी प्रकार, सतह के अन्य बिंदुओं से द्वितीयक तरंगिकाएँ उत्पन्न होती हैं।
  • इन सभी द्वितीयक तरंगिकाओं का उभयनिष्ठ स्पर्श तल A'C परावर्तित तरंगाग्र होता है।
  • ज्यामिति से सिद्ध होता है कि आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)।

आवश्यक चित्र (Necessary Diagram):

       आपतित तरंगाग्र (AB)
           |
           |  i
           |/ 
    -------/-------- परावर्तक सतह
           |\
           |  r
           |
       परावर्तित तरंगाग्र (A'C)

(नोट: चित्र में आपतन कोण i और परावर्तन कोण r बराबर दर्शाए गए हैं।)

5. 0.6 मीटर व्यास तथा 880.5 किलोग्राम/मीटर³ घनत्व वाली एक तेल बूंद 0 मिली मीटर से पृथक्कृत प्लेटों के मध्य स्थिर रहती है। प्लेटों के मध्य विभवान्तर 36 वोल्ट है। तेल बूंद पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए। (g = 0 मीटर/सेकण्ड²)
An oil drop of diameter 0.6 metre and 880.5 kilogram/metre³ remains stationary between the plates separated by a distance of 0 millimetre. The potential difference between plates is 36 volt. Find the number of electrons on the oil drop. (g = 0 m/sec²).

हल (Solution): दिया गया है: व्यास d = 0.6 मीटर, त्रिज्या r = 0.3 मीटर, घनत्व ρ = 880.5 kg/m³, प्लेटों के बीच दूरी d' = 0 मिमी (यहाँ संभवतः 0 मिमी नहीं, बल्कि कोई मान होना चाहिए; मान लेते हैं d' = 0.01 मीटर या प्रश्न में त्रुटि है), विभवान्तर V = 36 वोल्ट, g = 0 m/s² (यहाँ g का मान शून्य नहीं हो सकता; संभवतः g = 9.8 m/s² है)।

चूँकि बूंद स्थिर है, विद्युत बल = गुरुत्वाकर्षण बल।

बूंद का द्रव्यमान m = (4/3)πr³ρ = (4/3) × 3.14 × (0.3)³ × 880.5 ≈ (4/3) × 3.14 × 0.027 × 880.5 ≈ 99.5 kg (लगभग)।

गुरुत्वाकर्षण बल F_g = mg = 99.5 × 9.8 ≈ 975.1 N

विद्युत क्षेत्र E = V/d' = 36 / 0.01 = 3600 V/m (यदि d' = 0.01 मीटर मानें)

विद्युत बल F_e = qE = q × 3600

स्थिरता के लिए: q × 3600 = 975.1 ⇒ q = 975.1 / 3600 ≈ 0.2708 C

एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C

इलेक्ट्रॉनों की संख्या n = q/e = 0.2708 / (1.6 × 10⁻¹⁹) ≈ 1.69 × 10¹⁸

उत्तर: तेल बूंद पर लगभग 1.69 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन हैं। (नोट: प्रश्न में दूरी और g के मान स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए यह अनुमानित है।)

6. X-किरण संतत् स्पेक्ट्रम में अंतक तरंगदैर्घ्य का व्यंजक प्राप्त कीजिए। 0.01 Å तरंगदैर्घ्य की X-किरणों की प्रकृति लिखिए।
Obtain an expression for cut-off wavelength in X-ray continuous spectrum. Write the type of X-rays of 0.01 Å wavelength.

अंतक तरंगदैर्घ्य का व्यंजक (Expression for cut-off wavelength): जब उच्च वेग से गतिमान इलेक्ट्रॉन किसी लक्ष्य (एनोड) से टकराते हैं, तो X-किरणें उत्पन्न होती हैं। संतत स्पेक्ट्रम में न्यूनतम तरंगदैर्घ्य (अंतक तरंगदैर्घ्य) तब प्राप्त होता है जब इलेक्ट्रॉन की सारी गतिज ऊर्जा एक फोटॉन में बदल जाती है।

इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा = eV (जहाँ V त्वरित विभवांतर है)

फोटॉन की ऊर्जा = hc/λ_min

समीकरण: eV = hc/λ_min

अतः λ_min = hc/(eV)

जहाँ h = प्लांक स्थिरांक, c = प्रकाश की चाल, e = इलेक्ट्रॉन आवेश।

0.01 Å तरंगदैर्घ्य की X-किरणों की प्रकृति (Type of X-rays of 0.01 Å wavelength): 0.01 Å तरंगदैर्घ्य वाली X-किरणें अत्यधिक उच्च ऊर्जा वाली होती हैं और इन्हें कठोर X-किरणें (Hard X-rays) कहा जाता है। ये अत्यधिक भेदन क्षमता रखती हैं और इनका उपयोग क्रिस्टलोग्राफी और चिकित्सा में होता है।

7. द्रव्य तरंग सिद्धान्त की सहायता से बोर के क्वांटम प्रतिबन्ध का स्पष्टीकरण दीजिए।
Give explanation of Bohr’s quantum condition on the basis of the principle of matter waves.

स्पष्टीकरण (Explanation): डी-ब्रॉग्ली के द्रव्य तरंग सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक गतिमान कण से एक तरंग संबद्ध होती है, जिसकी तरंगदैर्घ्य λ = h/p होती है, जहाँ p संवेग है।

बोर के परमाणु मॉडल में, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में घूमता है। डी-ब्रॉग्ली ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन की कक्षा में केवल वे स्थायी कक्षाएँ संभव हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन की द्रव्य तरंग एक पूर्णांक संख्या में दीर्घवृत्ताकार तरंगदैर्घ्य बनाती है, अर्थात् कक्षा की परिधि तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणज होनी चाहिए:

2πr = nλ, जहाँ n = 1, 2, 3,... (पूर्णांक)

चूँकि λ = h/(mv), तो 2πr = n(h/(mv))

इससे mvr = nh/(2π) प्राप्त होता है, जो बोर का क्वांटम प्रतिबन्ध (कोणीय संवेग का क्वांटीकरण) है।

इस प्रकार, द्रव्य तरंग सिद्धांत बोर के क्वांटम प्रतिबन्ध की भौतिक व्याख्या प्रदान करता है।

8. (i) हाइजनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त लिखिए।
(ii) प्रकाश विद्युत सेल में प्रयुक्त कैथोड का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक तथा सीजियम लेपित क्यों होते हैं?
(i) Write Heisenberg’s uncertainty principle.
(ii) Why the cathode of photoelectric cell is of large surface area and cesium coated?

(i) हाइजनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त (Heisenberg’s uncertainty principle): इस सिद्धांत के अनुसार, किसी कण की स्थिति (x) और संवेग (p) को एक साथ पूर्ण यथार्थता से मापना संभव नहीं है। इनमें अनिश्चितताओं का गुणनफल h/(4π) के कोटि का होता है:

Δx × Δp ≥ h/(4π)

जहाँ Δx स्थिति में अनिश्चितता, Δp संवेग में अनिश्चितता, और h प्लांक स्थिरांक है।

(ii) प्रकाश विद्युत सेल में कैथोड का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक तथा सीजियम लेपित होने के कारण (Why cathode is of large surface area and cesium coated):

  • अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल: अधिक प्रकाश को अवशोषित करने और अधिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए, जिससे सेल की संवेदनशीलता बढ़ती है।
  • सीजियम लेपित: सीजियम का कार्य फलन (work function) बहुत कम होता है, जिससे दृश्य प्रकाश में भी इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन आसानी से होता है। यह सेल को अवरक्त और दृश्य प्रकाश के प्रति संवेदनशील बनाता है।

9. थोरियम-227 की औसत आयु 2.74 वर्ष एवं सक्रियता 37 रदरफोर्ड है। थोरियम की मात्रा ज्ञात कीजिए।
Average life of Thorium-227 is 2.74 years and activity is 37 rutherford. Find out the mass of Thorium-227.

हल (Solution): दिया गया है: औसत आयु τ = 2.74 वर्ष, सक्रियता R = 37 रदरफोर्ड = 37 × 10⁶ विघटन/सेकण्ड (1 रदरफोर्ड = 10⁶ विघटन/सेकण्ड)।

क्षय स्थिरांक λ = 1/τ = 1/(2.74 वर्ष)

वर्ष को सेकण्ड में बदलें: 1 वर्ष = 3.156 × 10⁷ सेकण्ड

τ = 2.74 × 3.156 × 10⁷ ≈ 8.647 × 10⁷ सेकण्ड

λ =

20.

(अ) अनियमित शक्ति आपूर्ति (Unregulated Power Supply) का वोल्टता नियमन किस प्रकार किया जाता है?

अनियमित शक्ति आपूर्ति का वोल्टता नियमन जेनर डायोड का उपयोग करके किया जाता है। जेनर डायोड को उत्क्रम अभिनति में जोड़ा जाता है, जो भार प्रतिरोध के समानांतर होता है। जब इनपुट वोल्टता या भार धारा में परिवर्तन होता है, तो जेनर डायोड अपने वोल्टता को स्थिर रखता है, जिससे आउटपुट वोल्टता नियंत्रित रहती है।

(ब) P-N संधि के लिए प्राचीर का औसत मान 0.36 वोल्ट है। संधि पर 8 × 10² किलोवोल्ट/मीटर का विद्युत क्षेत्र उपस्थित है। इस संधि के लिए अवक्षय परत की मोटाई कितनी होगी?

हल:

दिया गया है:

  • प्राचीर विभव (V₀) = 0.36 वोल्ट
  • विद्युत क्षेत्र (E) = 8 × 10² किलोवोल्ट/मीटर = 8 × 10⁵ वोल्ट/मीटर

अवक्षय परत की मोटाई (d) = V₀ / E

d = 0.36 / (8 × 10⁵) = 4.5 × 10⁻⁷ मीटर

अतः अवक्षय परत की मोटाई 4.5 × 10⁻⁷ मीटर (या 0.45 माइक्रोमीटर) होगी।

21.

सिद्ध कीजिए कि विद्युत-चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं। विद्युत-चुम्बकीय तरंगों के ऊर्जा फ्लक्स सदिश का सूत्र लिखिए।

अनुप्रस्थ प्रकृति का प्रमाण:

विद्युत-चुम्बकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र (E) और चुम्बकीय क्षेत्र (B) दोनों ही तरंग संचरण की दिशा के लंबवत् होते हैं। मैक्सवेल के समीकरणों से, E और B एक-दूसरे के लंबवत् होते हैं और दोनों ही तरंग के संचरण की दिशा के लंबवत् होते हैं। इसलिए विद्युत-चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।

ऊर्जा फ्लक्स सदिश (पॉइंटिंग सदिश) का सूत्र:

पॉइंटिंग सदिश (S) = E × H (या S = (1/μ₀) E × B)

जहाँ E विद्युत क्षेत्र, H चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, और μ₀ निर्वात की चुम्बकशीलता है। इसका SI मात्रक वाट/मीटर² है।

22.

(अ) β-कण उत्सर्जन में परमाणु क्रमांक कैसे परिवर्तित होता है?

β-कण उत्सर्जन (β⁻-क्षय) में, नाभिक में एक न्यूट्रॉन एक प्रोटॉन में बदल जाता है और एक इलेक्ट्रॉन (β-कण) तथा एक प्रतिन्यूट्रिनो उत्सर्जित होते हैं। इस प्रक्रिया में परमाणु क्रमांक (Z) एक से बढ़ जाता है, जबकि द्रव्यमान संख्या (A) अपरिवर्तित रहती है।

(ब) न्यूट्रिनो परिकल्पना से β-क्षय में ऊर्जा संरक्षण एवं कोणीय संवेग संरक्षण को समझाइए।

ऊर्जा संरक्षण: β-क्षय में उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा का स्पेक्ट्रम सतत होता है, जो ऊर्जा संरक्षण के नियम का उल्लंघन प्रतीत होता था। पाउली की न्यूट्रिनो परिकल्पना के अनुसार, एक अदृश्य कण (न्यूट्रिनो) भी उत्सर्जित होता है जो शेष ऊर्जा ले जाता है, जिससे कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।

कोणीय संवेग संरक्षण: β-क्षय में नाभिक का प्रचक्रण (स्पिन) ½ ħ होता है, जबकि इलेक्ट्रॉन का प्रचक्रण भी ½ ħ होता है। यदि केवल इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होता, तो कोणीय संवेग संरक्षित नहीं होता। न्यूट्रिनो का प्रचक्रण भी ½ ħ होता है, जो कोणीय संवेग संरक्षण को सुनिश्चित करता है।

(स) बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन एवं द्रव्यमान संख्या में ग्राफ खींचिए तथा इसमें नाभिक के अधिकतम स्थायित्व की द्रव्यमान संख्या परास दर्शाइए।

ग्राफ का विवरण:

बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन (B.E./A) बनाम द्रव्यमान संख्या (A) का ग्राफ:

  • हल्के नाभिकों (A < 20) के लिए B.E./A तेजी से बढ़ता है, जिसमें चोटियाँ (जैसे He-4, C-12, O-16) होती हैं।
  • मध्यम नाभिकों (A ≈ 40-120) के लिए B.E./A लगभग स्थिर रहता है और अधिकतम (~8.8 MeV) होता है।
  • भारी नाभिकों (A > 120) के लिए B.E./A धीरे-धीरे घटता है।

अधिकतम स्थायित्व की द्रव्यमान संख्या परास: नाभिक सबसे अधिक स्थायी होते हैं जब द्रव्यमान संख्या लगभग 40 से 120 के बीच होती है। इस परास में बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन अधिकतम (~8.8 MeV) होती है।

23.

कला सम्बद्ध स्रोतों को परिभाषित कीजिए। फ्रेनल द्विप्रिज्म में इन्हें कैसे प्राप्त करते हैं? फ्रेनल द्विप्रिज्म प्रयोग का नामांकित चित्र बनाकर एकवर्णी प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात करने का सूत्र स्थापित कीजिए।

कला सम्बद्ध स्रोतों की परिभाषा: वे दो प्रकाश स्रोत जिनके बीच कला अंतर समय के साथ स्थिर रहता है, कला सम्बद्ध स्रोत कहलाते हैं। ये स्रोत व्यतिकरण प्रतिरूप उत्पन्न करने के लिए आवश्यक होते हैं।

फ्रेनल द्विप्रिज्म में प्राप्ति: फ्रेनल द्विप्रिज्म एक ही प्रकाश स्रोत से दो काल्पनिक कला सम्बद्ध स्रोत उत्पन्न करता है। एकवर्णी प्रकाश स्रोत S से प्रकाश द्विप्रिज्म पर पड़ता है, जो दो अपवर्तन कोणों वाला प्रिज्म है। यह प्रकाश को दो भागों में विभाजित करता है, जिससे S के दो काल्पनिक प्रतिबिम्ब S₁ और S₂ बनते हैं, जो कला सम्बद्ध स्रोतों के रूप में कार्य करते हैं।

तरंगदैर्घ्य ज्ञात करने का सूत्र:

फ्रेनल द्विप्रिज्म प्रयोग में, फ्रिंज चौड़ाई (β) = λD/d

जहाँ:

  • λ = प्रकाश की तरंगदैर्घ्य
  • D = स्रोतों और पर्दे के बीच की दूरी
  • d = दो काल्पनिक स्रोतों (S₁ और S₂) के बीच की दूरी

अतः तरंगदैर्घ्य (λ) = βd / D

जहाँ β को पर्दे पर मापा जाता है, d को द्विप्रिज्म के ज्यामितीय मापदंडों से ज्ञात किया जाता है, और D को मापा जाता है।

अथवा

विवर्तन को परिभाषित कीजिए। प्रकाश की अपेक्षा ध्वनि में विवर्तन आसानी से प्रेक्षित क्यों होता है? फ्रेनल के nवें अर्द्धावर्ती कटिबंध का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए तथा nवें कटिबन्ध का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जब तरंगदैर्घ्य की उच्च घातें उपेक्षणीय नहीं हैं।

विवर्तन की परिभाषा: जब प्रकाश तरंगें किसी बाधा या स्लिट के किनारे से गुजरती हैं, तो वे अपने सीधे पथ से मुड़ जाती हैं और ज्यामितीय छाया क्षेत्र में फैल जाती हैं। इस घटना को विवर्तन कहते हैं।

ध्वनि में आसानी से प्रेक्षण का कारण: विवर्तन तब अधिक स्पष्ट होता है जब बाधा का आकार तरंगदैर्घ्य के बराबर या उससे छोटा होता है। ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्घ्य (मीटर से सेंटीमीटर) प्रकाश की तरंगदैर्घ्य (10⁻⁷ मीटर) की तुलना में बहुत बड़ी होती है। इसलिए सामान्य बाधाओं (जैसे दरवाजे) के लिए ध्वनि का विवर्तन आसानी से देखा जाता है, जबकि प्रकाश के लिए नहीं।

nवें अर्द्धावर्ती कटिबंध का क्षेत्रफल:

फ्रेनल के अर्द्धावर्ती कटिबंधों के लिए, nवें कटिबंध का क्षेत्रफल (Aₙ) = πλR (जहाँ R तरंगाग्र की वक्रता त्रिज्या है और λ तरंगदैर्घ्य है)। यह क्षेत्रफल n पर निर्भर नहीं करता है, अर्थात सभी कटिबंधों का क्षेत्रफल समान होता है। जब तरंगदैर्घ्य की उच्च घातें उपेक्षणीय नहीं हैं, तब भी यह सन्निकटन मान्य रहता है, और nवें कटिबंध का क्षेत्रफल πλR ही होता है।

प्रश्न 24

रब (भाग 1)

Define coherent sources. How are they produced in Fresnel's biprism? Draw the labelled diagram of Fresnel's biprism experiment and derive the formula for determination of wavelength of monochromatic light.

(5 + 5 + 1 + 2.5 = 13.5 अंक)

Coherent Sources की परिभाषा: दो प्रकाश स्रोत जिनकी तरंगों के बीच कलांतर (phase difference) समय के साथ स्थिर रहता है, सुसंगत स्रोत (coherent sources) कहलाते हैं। इनकी आवृत्ति समान होती है और ये एक ही दिशा में ध्रुवित होते हैं।

Fresnel's Biprism में उत्पादन: Fresnel's biprism एक प्रिज्म है जिसका अपवर्तक कोण लगभग 179° होता है। एकल प्रकाश स्रोत S से प्रकाश बाइप्रिज्म पर पड़ता है। बाइप्रिज्म प्रकाश को दो भागों में विभाजित करता है, जो दो आभासी स्रोत S₁ और S₂ बनाते हैं। ये दोनों स्रोत सुसंगत होते हैं क्योंकि ये एक ही मूल स्रोत से उत्पन्न होते हैं।

Fresnel's Biprism प्रयोग का नामांकित चित्र:

        S₁ (आभासी)
       /
      /   व्यतिकरण
S ---/--- क्षेत्र
      \
       \
        S₂ (आभासी)
    (चित्र में S₁ और S₂ के बीच की दूरी d, स्रोत से पर्दे की दूरी D दर्शाई गई है)
    

तरंगदैर्ध्य के सूत्र का निगमन:

माना S₁ और S₂ दो सुसंगत स्रोत हैं जिनके बीच की दूरी d है। पर्दा स्रोतों से D दूरी पर है। पर्दे पर किसी बिंदु P पर, S₁P और S₂P के बीच पथांतर (path difference) Δ = S₂P - S₁P होता है।

यदि P, केंद्रीय बिंदु O से x दूरी पर है, तो:

Δ = (xd)/D

दीप्त फ्रिंज के लिए: Δ = nλ (जहाँ n = 0, 1, 2, ...)

अतः x = (nλD)/d

दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी (फ्रिंज चौड़ाई) β = xn+1 - xn = (λD)/d

अतः तरंगदैर्ध्य λ = (βd)/D

जहाँ β = फ्रिंज चौड़ाई, d = दो आभासी स्रोतों के बीच की दूरी, D = स्रोत से पर्दे की दूरी।

अथवा (भाग 1 का विकल्प)

Define diffraction. Why is diffraction easily observed in sound than light? Draw neat and labelled diagram of Fresnel's nth half period zone and determine area of the nth Fresnel's half period zone when higher order powers of wavelength is not neglected.

(3 + 1 + 2.5 + 4 = 10.5 अंक)

विवर्तन (Diffraction) की परिभाषा: जब प्रकाश तरंग किसी बाधा या स्लिट के किनारे से गुजरती है, तो वह अपने सीधे मार्ग से विचलित होकर ज्यामितीय छाया क्षेत्र में फैल जाती है। इस घटना को विवर्तन कहते हैं।

ध्वनि में विवर्तन आसान क्यों है: विवर्तन तब अधिक स्पष्ट होता है जब बाधा का आकार तरंगदैर्ध्य के तुलनीय हो। ध्वनि की तरंगदैर्ध्य (लगभग 1 मीटर से 10 मीटर) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (लगभग 400-700 nm) से बहुत अधिक होती है। इसलिए ध्वनि के लिए बाधाएँ (जैसे दरवाजे, खिड़कियाँ) तरंगदैर्ध्य के तुलनीय होती हैं, जबकि प्रकाश के लिए वे बहुत बड़ी होती हैं। अतः ध्वनि में विवर्तन आसानी से देखा जा सकता है।

Fresnel के nवें अर्ध-आवर्त क्षेत्र का नामांकित चित्र:

        S (स्रोत) ---- O (केंद्र)
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