RBSE Class 12th 2011 Chemistry-SS-41-2-2011 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2011 |
| Subject | Chemistry-SS-41-2-2011 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2011 Chemistry-SS-41-2-2011
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Rajasthan Board Class 12th Chemistry-SS-41-2-2011 2011 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2012
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2012
वैकल्पिक वर्ग पा (OPTIONAL GROUP II – SCIENCES)
रसायन विज्ञान — द्वितीय पत्र
(CHEMISTRY — Second Paper)
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 40
नोट : समीकरणों को आवश्यक शर्तों सहित संतुलित रूप में लिखिए।
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error/difference/contradiction in Hindi and English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रश्न क्रमांक 23 व 24 में आन्तरिक विकल्प हैं।
All questions are compulsory. Question Nos. 23 and 24 have internal choices. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only.
No. of Questions — 24 No. of Printed Pages — 11
SS—4—2—Chem. II | SS-586-I
प्रश्न क्रमांक 1 (i)
निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया द्वारा एथिल ऐमीन प्राप्त नहीं होता है ?
- (A) मेण्डियस अभिक्रिया (Mendius reaction)
- (B) फार्मेल्डॉक्सिम का अपचयन (Reduction of formaldoxime)
- (C) कर्टियस अभिक्रिया (Curtius reaction)
- (D) हॉफमान अभिक्रिया (Hofmann reaction)
सही उत्तर: (B) फार्मेल्डॉक्सिम का अपचयन
व्याख्या: फार्मेल्डॉक्सिम (H₂C=N-OH) के अपचयन से मेथिल ऐमीन (CH₃NH₂) प्राप्त होता है, एथिल ऐमीन (C₂H₅NH₂) नहीं। मेण्डियस अभिक्रिया (नाइट्राइल का अपचयन), कर्टियस अभिक्रिया (एसिड एजाइड का अपचयन), और हॉफमान अभिक्रिया (एमाइड का अपचयन) सभी एथिल ऐमीन दे सकते हैं।
निर्देश (प्रश्न क्रमांक 1 के लिए)
प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii, iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (A, B, C, D) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
| प्रश्न क्रमांक | सही उत्तर का क्रमाक्षर |
|---|---|
| 1. (i) | B |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
नोट: जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
प्रश्न (४) ऐमीनो समूह की अम्लीय प्रकृति दर्शाने वाली अभिक्रिया है
The reaction showing acidic nature of amino group is:
- (A) RNH₂ + NOCl → RCl + N₂ + H₂O
- (B) RCH₂NH₂ + HNO₂ → RCH₂OH + N₂ + H₂O
- (C) RNH₂ + HOH → RNH₃OH
- (D) RNH₂ + 2Na → 2RNHNa + H₂
सही उत्तर: (D) RNH₂ + 2Na → 2RNHNa + H₂
व्याख्या: ऐमीनो समूह (-NH₂) में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण यह प्रकृति में क्षारीय होता है, लेकिन यह अम्लीय प्रकृति भी दर्शा सकता है। अभिक्रिया (D) में, RNH₂ सोडियम धातु (Na) से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H₂) मुक्त करता है, जो ऐमीनो समूह के अम्लीय व्यवहार को दर्शाता है (जैसे अम्ल धातु से अभिक्रिया करके H₂ मुक्त करते हैं)। अन्य विकल्पों में (A) और (B) डायज़ोटीकरण अभिक्रियाएँ हैं, जबकि (C) जलयोजन अभिक्रिया है।
(ii) न्यूट्रॉन के उत्सर्जन से प्राप्त नाभिकीय अभिक्रिया है
Nuclear reaction accompanied with emission of neutron is:
- (A) ₁₃Al²⁷ + ₂He⁴ → ₁₅P³⁰ + ₀n¹
- (B) ₆C¹² + ₁H¹ → ₇N¹³ + γ
- (C) ₁₄Si²⁸ + ₀n¹ → ₁₃Al²⁸ + ₁H¹
- (D) ₁₁Na²³ → ₁₂Mg²³ + ₋₁e⁰
सही उत्तर: (A) ₁₃Al²⁷ + ₂He⁴ → ₁₅P³⁰ + ₀n¹
व्याख्या: इस अभिक्रिया में, एल्युमिनियम-27 (Al-27) अल्फा कण (₂He⁴) से बमबारी करने पर फॉस्फोरस-30 (P-30) और एक न्यूट्रॉन (₀n¹) उत्पन्न होता है। यह न्यूट्रॉन उत्सर्जन के साथ होने वाली नाभिकीय अभिक्रिया का उदाहरण है। अन्य विकल्पों में (B) गामा उत्सर्जन, (C) प्रोटॉन उत्सर्जन, और (D) बीटा क्षय (इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन) दर्शाते हैं।
(iv) निम्नलिखित में से सबसे अधिक अस्थाई नाभिक है
Which of the following nuclei is most unstable?
- (A) ₄Be⁸
- (B) ₄Be⁹
- (C) ₇N¹⁴
- (D) ₈O¹⁶
सही उत्तर: (A) ₄Be⁸
व्याख्या: बेरिलियम-8 (Be-8) अत्यधिक अस्थायी होता है और यह लगभग तुरंत दो अल्फा कणों में विघटित हो जाता है। इसका अर्धायु काल बहुत कम (लगभग 10⁻¹⁶ सेकंड) होता है। इसके विपरीत, Be-9, N-14 और O-16 स्थायी समस्थानिक हैं। Be-8 में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की संख्या समान (4 प्रोटॉन, 4 न्यूट्रॉन) होने के बावजूद, यह नाभिकीय बलों के कारण अस्थायी है।
प्रश्न 2
प्राथमिक एल्कोहॉल का ऑक्सीकरण ऐल्डिहाइड में करने हेतु प्रयुक्त अभिकर्मकों के नाम बताइए।
Name the reagents used in the oxidation of primary alcohol to an aldehyde.
उत्तर: प्राथमिक एल्कोहॉल को ऐल्डिहाइड में ऑक्सीकृत करने के लिए निम्नलिखित अभिकर्मकों का उपयोग किया जाता है:
- पाइरीडीन (C5H5N) की उपस्थिति में क्रोमियम ट्राइऑक्साइड (CrO3) – इसे कोलिन्स अभिकर्मक भी कहते हैं।
- पीसीसी (पाइरीडीनियम क्लोरोक्रोमेट) – यह एक हल्का ऑक्सीकरण अभिकर्मक है।
- सिल्वर ऑक्साइड (Ag2O) या कॉपर (II) ऑक्साइड (CuO) – ये भी ऐल्डिहाइड बनाने में सहायक होते हैं।
Answer: The reagents used for the oxidation of primary alcohol to an aldehyde are:
- Chromium trioxide (CrO3) in the presence of pyridine (C5H5N) – also known as Collins reagent.
- PCC (Pyridinium Chlorochromate) – a mild oxidizing agent.
- Silver oxide (Ag2O) or Copper (II) oxide (CuO) – also used to form aldehydes.
प्रश्न 3
ल्यूकास अभिकर्मक क्या है?
What is Lucas reagent?
उत्तर: ल्यूकास अभिकर्मक निर्जल जिंक क्लोराइड (ZnCl2) का सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) में संतृप्त विलयन है। इसका उपयोग एल्कोहॉलों के वर्गीकरण (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) में किया जाता है। तृतीयक एल्कोहॉल तुरंत धुंधलापन देते हैं, द्वितीयक कुछ मिनटों में, जबकि प्राथमिक एल्कोहॉल कमरे के ताप पर अभिक्रिया नहीं करते।
Answer: Lucas reagent is a saturated solution of anhydrous zinc chloride (ZnCl2) in concentrated hydrochloric acid (HCl). It is used to classify alcohols into primary, secondary, and tertiary. Tertiary alcohols give immediate turbidity, secondary alcohols react within a few minutes, while primary alcohols do not react at room temperature.
प्रश्न 4
कोलॉइडी विलयन में उपस्थित कोलॉइडी कण अच्छे अधिशोषक होते हैं। क्यों?
Colloidal particles present in colloidal solution are good adsorbers. Why?
उत्तर: कोलॉइडी कण अच्छे अधिशोषक होते हैं क्योंकि इनका आकार बहुत छोटा (1-100 nm) होता है, जिसके कारण इनका पृष्ठीय क्षेत्रफल बहुत अधिक होता है। बड़े पृष्ठीय क्षेत्रफल के कारण ये कण अपनी सतह पर अन्य अणुओं या आयनों को अधिशोषित कर सकते हैं।
Answer: Colloidal particles are good adsorbers because they have a very small size (1-100 nm), which gives them a large surface area. Due to this large surface area, these particles can adsorb other molecules or ions on their surface.
प्रश्न 5
पनीर किस प्रकार का कोलॉइड है?
Name the type of colloid of cheese.
उत्तर: पनीर एक जेल प्रकार का कोलॉइड है। इसमें तरल (दूध) को ठोस अवस्था में परिवर्तित किया जाता है, जहाँ ठोस कण एक सतत नेटवर्क बनाते हैं और तरल उसमें फँसा रहता है।
Answer: Cheese is a gel type of colloid. In this, the liquid (milk) is converted into a solid state, where solid particles form a continuous network and the liquid is trapped inside.
प्रश्न 6
14C का क्षय किस प्रकार होता है? नाभिकीय अभिक्रिया दीजिए एवं उत्सर्जित कण का नाम बताइए।
How does 14C decay? Give nuclear reaction and the name of emitted particle.
उत्तर: कार्बन-14 (14C) बीटा क्षय (β⁻ क्षय) द्वारा क्षय होता है। इसमें एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में परिवर्तित हो जाता है, जिससे एक इलेक्ट्रॉन (β⁻ कण) और एक एंटीन्यूट्रिनो उत्सर्जित होते हैं।
नाभिकीय अभिक्रिया:
14C → 14N + β⁻ + ν̄
उत्सर्जित कण: बीटा कण (β⁻) या इलेक्ट्रॉन।
Answer: Carbon-14 (14C) decays by beta decay (β⁻ decay). In this, a neutron is converted into a proton, emitting an electron (β⁻ particle) and an antineutrino.
Nuclear reaction:
14C → 14N + β⁻ + ν̄
Emitted particle: Beta particle (β⁻) or electron.
प्रश्न 7
समूह प्रतिस्थापन नियम क्या है? आवर्त सारणी के समूह I का एक तत्व β कण उत्सर्जन करता है। संतति तत्व का संबंध किस समूह से होगा?
What is the group displacement law? An element belonging to group I of periodic table decays by emission of β particle. To which group will the daughter element belong?
उत्तर: समूह प्रतिस्थापन नियम के अनुसार, जब कोई नाभिक α-कण उत्सर्जित करता है, तो संतति तत्व मूल तत्व से दो समूह पीछे चला जाता है (परमाणु संख्या 2 कम हो जाती है)। जब कोई नाभिक β-कण उत्सर्जित करता है, तो संतति तत्व मूल तत्व से एक समूह आगे बढ़ जाता है (परमाणु संख्या 1 बढ़ जाती है)।
यदि समूह I का एक तत्व β-कण उत्सर्जित करता है, तो संतति तत्व का परमाणु क्रमांक एक बढ़ जाएगा, अतः वह आवर्त सारणी के समूह II से संबंधित होगा।
Answer: According to the group displacement law, when a nucleus emits an α-particle, the daughter element moves two groups back (atomic number decreases by 2). When a nucleus emits a β-particle, the daughter element moves one group forward (atomic number increases by 1).
If an element belonging to group I emits a β-particle, the atomic number of the daughter element will increase by one, so it will belong to group II of the periodic table.
8. कॉन-इंगोल्ड-प्रेलागण के अनुक्रम नियम द्वारा C₃H₆O अणु सूत्र के E/Z ज्यामितीय समावयवियों के संरचना सूत्र आरेखित कीजिए एवं पहचानिए।
Employing Cahn-Ingold-Prelog sequence rule, draw structural formula of E/Z geometrical isomers of molecular formula C₃H₆O.
व्याख्या: C₃H₆O अणु सूत्र के लिए, एक संभावित यौगिक जो ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है, वह प्रोपेनल का एक व्युत्पन्न है, जैसे कि 2-प्रोपेन-1-ऑल (एक एल्डिहाइड या कीटोन नहीं, बल्कि एक असंतृप्त अल्कोहल)। वास्तव में, C₃H₆O के लिए एक सामान्य यौगिक जो E/Z समावयवता दर्शाता है, वह प्रोपेनल ऑक्सीम (C₃H₆O = C₃H₆=NOH) या मिथाइल विनाइल ईथर (CH₃-O-CH=CH₂) हो सकता है। लेकिन सबसे सरल उदाहरण 2-ब्यूटेनल (C₄H₆O) नहीं है। C₃H₆O के लिए, एक यौगिक जो E/Z समावयवता दर्शाता है, वह प्रोपेनल (CH₃CH₂CHO) नहीं है क्योंकि इसमें द्विबंध नहीं है। वास्तव में, C₃H₆O के लिए एक संभावित यौगिक एक्रिलेल्डिहाइड (CH₂=CH-CHO) है, लेकिन इसका अणु सूत्र C₃H₄O है। C₃H₆O के लिए, मिथाइल विनाइल ईथर (CH₃-O-CH=CH₂) E/Z समावयवता दर्शाता है।
E/Z समावयवी:
- E-समावयवी: उच्च प्राथमिकता वाले समूह (OCH₃ और H) द्विबंध के विपरीत दिशा में होते हैं।
- Z-समावयवी: उच्च प्राथमिकता वाले समूह (OCH₃ और H) द्विबंध के एक ही दिशा में होते हैं।
संरचना सूत्र:
E-समावयवी: Z-समावयवी:
H₃C-O H₃C-O
\ /
C = C C = C
/ \
H H
(H) (H)
पहचान: Cahn-Ingold-Prelog नियम के अनुसार, OCH₃ समूह की परमाणु संख्या (O=8) H (1) से अधिक है, इसलिए OCH₃ को उच्च प्राथमिकता दी जाती है। दूसरी ओर, द्विबंध के दूसरे कार्बन पर, H और H समान हैं, इसलिए कोई E/Z समावयवता नहीं होगी। वास्तव में, C₃H₆O के लिए एक बेहतर उदाहरण 2-ब्यूटेनल (C₄H₆O) नहीं है। C₃H₆O के लिए, प्रोपेनल ऑक्सीम (CH₃CH₂CH=NOH) E/Z समावयवता दर्शाता है, जहाँ N पर एकाकी युग्म और OH समूह के सापेक्ष व्यवस्था होती है।
9. 2-क्लोरोब्यूटेन के प्रतिबिम्ब समावयवियों का R और S विन्यास निर्धारित कीजिए।
Assign the R and S configuration to the enantiomers of 2-chlorobutane.
व्याख्या: 2-क्लोरोब्यूटेन (CH₃CHClCH₂CH₃) में एक किरैल केंद्र (C-2) है, जो चार भिन्न समूहों से जुड़ा है: Cl, CH₃, H, और CH₂CH₃।
प्राथमिकता क्रम (Cahn-Ingold-Prelog नियम):
- Cl (परमाणु संख्या 17) – उच्चतम प्राथमिकता
- CH₂CH₃ (C, फिर H,H,H) – दूसरी प्राथमिकता
- CH₃ (C, फिर H,H,H) – तीसरी प्राथमिकता
- H (परमाणु संख्या 1) – निम्नतम प्राथमिकता
R विन्यास: जब निम्नतम प्राथमिकता वाला समूह (H) पीछे की ओर हो, तो शेष तीन समूहों (Cl → CH₂CH₃ → CH₃) का क्रम दक्षिणावर्त (clockwise) होता है।
S विन्यास: जब निम्नतम प्राथमिकता वाला समूह (H) पीछे की ओर हो, तो शेष तीन समूहों का क्रम वामावर्त (anticlockwise) होता है।
संरचना:
R-2-क्लोरोब्यूटेन: S-2-क्लोरोब्यूटेन:
CH₃ CH₃
| |
Cl—C—H H—C—Cl
| |
CH₂CH₃ CH₂CH₃
(दक्षिणावर्त क्रम) (वामावर्त क्रम)
10. निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC पद्धति के नाम लिखिए:
Name the following compounds according to IUPAC system:
(i) CH₃OOCCH₂CH(OCH₃)CH₂CHO
(ii) CH₃CH(NH₂)CH₂CH(CHO)CN
(i) CH₃OOCCH₂CH(OCH₃)CH₂CHO
- मुख्य श्रृंखला: 5 कार्बन वाली एल्डिहाइड श्रृंखला (पेंटेनल)
- प्रतिस्थापी: C-3 पर मेथॉक्सी (OCH₃) और C-1 पर एल्डिहाइड समूह, तथा C-5 पर एस्टर समूह (मेथॉक्सीकार्बोनिल)
- IUPAC नाम: मेथिल 3-मेथॉक्सी-5-ऑक्सोपेंटेनोएट (या मेथिल 3-मेथॉक्सी-5-फॉर्मिलपेंटेनोएट)
(ii) CH₃CH(NH₂)CH₂CH(CHO)CN
- मुख्य श्रृंखला: 5 कार्बन वाली श्रृंखला जिसमें एल्डिहाइड और सायनो समूह हैं
- प्रतिस्थापी: C-2 पर अमीनो (NH₂), C-4 पर फॉर्मिल (CHO), और C-5 पर सायनो (CN)
- IUPAC नाम: 2-अमीनो-4-फॉर्मिलपेंटेननाइट्रिल (या 2-अमीनो-4-ऑक्सोपेंटेननाइट्रिल)
11. आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल और लैक्टिक अम्ल के संरचना सूत्र बनाइए। यह भी सत्यापित कीजिए कि पहला यौगिक अकिरेल तथा दूसरा किरेल है।
Draw structural formulae of isopropyl alcohol and lactic acid. Also verify that the former is achiral and later is chiral.
आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल (प्रोपेन-2-ऑल):
CH₃
|
H—C—OH
|
CH₃
सत्यापन: आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल में केंद्रीय कार्बन (C-2) दो समान मिथाइल समूहों (CH₃) से जुड़ा है, इसलिए यह किरैल केंद्र नहीं है। यौगिक में कोई असममित कार्बन नहीं है, अतः यह अकिरेल है।
लैक्टिक अम्ल (2-हाइड्रॉक्सीप्रोपेनोइक अम्ल):
COOH
|
H—C—OH
|
CH₃
सत्यापन: लैक्टिक अम्ल में केंद्रीय कार्बन (C-2) चार भिन्न समूहों से जुड़ा है: COOH, OH, H, और CH₃। यह एक असममित कार्बन है, अतः यौगिक किरेल है और दो प्रतिबिम्ब समावयवी (R और S) बनाता है।
12. फीनॉल की अम्लता की तुलना एथेनॉल की अम्लता से कीजिए।
Compare acidity of phenol with the acidity of ethanol.
व्याख्या: फीनॉल (C₆H₅OH) एथेनॉल (C₂H₅OH) की तुलना में अधिक अम्लीय होता है। इसका कारण फीनॉल के ऋणायन (फीनॉक्साइड आयन) का अनुनाद स्थायीकरण है।
- फीनॉल: फीनॉल में OH समूह बेंजीन वलय से जुड़ा होता है। फीनॉल के आयनित होने पर बनने वाला फीनॉक्साइड आयन (C₆H₅O⁻) अनुनाद द्वारा स्थायी होता है, जहाँ ऋणात्मक आवेश बेंजीन वलय पर विस्थानीकृत हो जाता है। यह स्थायीकरण फीनॉल को अधिक अम्लीय बनाता है।
- एथेनॉल: एथेनॉल में OH समूह एल्किल समूह से जुड़ा होता है। एथेनॉल के आयनित होने पर बनने वाला एथॉक्साइड आयन (C₂H₅O⁻) अनुनाद द्वारा स्थायी नहीं होता, केवल प्रेरणिक प्रभाव (इलेक्ट्रॉन दान करने वाला एथिल समूह) के कारण यह कम स्थायी होता है।
निष्कर्ष: फीनॉल का pKa मान लगभग 10 होता है, जबकि एथेनॉल का pKa मान लगभग 16 होता है। कम pKa मान अधिक अम्लता को दर्शाता है, अतः फीनॉल एथेनॉल से अधिक अम्लीय है।
3. निम्नलिखित से डाइएथिल ईथर कैसे बनायेंगे ? प्रत्येक के लिये रासायनिक समीकरण लिखिए :
How can diethyl ether be prepared from the following ? Write chemical reaction in each case:
(i) एथिल आयोडाइड (Ethyl iodide)
विलियमसन संश्लेषण (Williamson's synthesis): एथिल आयोडाइड को सोडियम एथॉक्साइड के साथ अभिकृत करने पर डाइएथिल ईथर प्राप्त होता है।
रासायनिक समीकरण:
C2H5I + C2H5ONa → C2H5–O–C2H5 + NaI
(एथिल आयोडाइड + सोडियम एथॉक्साइड → डाइएथिल ईथर + सोडियम आयोडाइड)
(ii) एथिल ऐल्कोहॉल (Ethyl alcohol)
निर्जलीकरण (Dehydration): एथिल ऐल्कोहॉल को सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में 140°C पर गर्म करने पर डाइएथिल ईथर प्राप्त होता है।
रासायनिक समीकरण:
2C2H5OH सांद्र H2SO4, 140°C→ C2H5–O–C2H5 + H2O
(एथिल ऐल्कोहॉल → डाइएथिल ईथर + जल)
4. बहु-आणविक एवं वृहद-आणविक कोलॉइडों में क्या अन्तर है ? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
What is the difference between multimolecular and macromolecular colloids ? Give one example of each.
| क्रम | बहु-आणविक कोलॉइड (Multimolecular Colloids) | वृहद-आणविक कोलॉइड (Macromolecular Colloids) |
|---|---|---|
| 1. | छोटे अणुओं या आयनों के एकत्रित होने से बनते हैं। | बड़े आकार के अणु (मैक्रोमोलिक्यूल) स्वयं कोलॉइडी कणों के रूप में होते हैं। |
| 2. | कणों का आकार 1-100 nm होता है। | अणु स्वयं कोलॉइडी आकार (1-100 nm) के होते हैं। |
| 3. | ये अस्थायी होते हैं और वापस छोटे अणुओं में टूट सकते हैं। | ये स्थायी होते हैं क्योंकि अणु सहसंयोजक बंधों से जुड़े होते हैं। |
| 4. | उदाहरण: सल्फर कोलॉइड (जल में सल्फर के कण) | उदाहरण: स्टार्च, जिलेटिन, प्रोटीन |
5. निम्नलिखित रूपांतरणों में प्रयुक्त अभिकर्मकों के नाम बताइए :
Name the reagents used in the following conversions :
-
(i) फीनॉल से क्वीनॉल (Phenol to quinol)
अभिकर्मक: पोटैशियम परसल्फेट (K2S2O8) क्षारीय माध्यम में (एल्कोहॉलिक KOH) – एल्कोहॉलिक KOH में K2S2O8 द्वारा ऑक्सीकरण (एल्कोहॉलिक KOH में K2S2O8 द्वारा ऑक्सीकरण)
-
(ii) फीनॉल का 2, 4, 6:-ट्राइब्रोमोफीनॉल में ब्रोमीनीकरण (Bromination of phenol to 2,4,6-tribromophenol)
अभिकर्मक: ब्रोमीन जल (Br2/H2O) – जलीय ब्रोमीन (ब्रोमीन जल) द्वारा अभिक्रिया
-
(iii) फीनॉल से ट्राइफेनिल फॉस्फेट (Phenol to triphenyl phosphate)
अभिकर्मक: फॉस्फोरस ऑक्सीक्लोराइड (POCl3) – फीनॉल को POCl3 के साथ गर्म करने पर ट्राइफेनिल फॉस्फेट बनता है
-
(iv) फीनॉल से क्लोरऐनिल (Phenol to chloranil)
अभिकर्मक: पोटैशियम क्लोरेट (KClO3) और सांद्र HCl – फीनॉल को KClO3 और सांद्र HCl के साथ गर्म करने पर क्लोरऐनिल प्राप्त होता है
6. प्रोपेनल एवं प्रोपेनोन में विभेद करने के लिये दो सरल रासायनिक परीक्षण रासायनिक समीकरणों सहित दीजिए।
Give two simple chemical tests to distinguish between propanal and propanone along with chemical equations.
Test 1: Tollen's Test (Silver Mirror Test)
- Propanal (an aldehyde) reduces Tollen's reagent (ammoniacal silver nitrate) to form a silver mirror, while propanone (a ketone) does not react.
Reaction:
CH3CH2CHO + 2[Ag(NH3)2]+ + 2OH– → CH3CH2COO– + 2Ag↓ + 4NH3 + 2H2O
Test 2: Fehling's Test
- Propanal reduces Fehling's solution (Cu2+ in alkaline tartrate) to give a red precipitate of cuprous oxide (Cu2O), whereas propanone does not react.
Reaction:
CH3CH2CHO + 2Cu2+ + 5OH– → CH3CH2COO– + Cu2O↓ + 3H2O
7. आप निम्नलिखित रूपांतरणों को अधिकतम एक पद में किस प्रकार से सम्पन्न करेंगे?
How will you bring about the following conversions in one step?
- Acetyl chloride to acetaldehyde: Reduction with hydrogen in presence of palladium on barium sulfate (Rosenmund reduction).
Equation: CH3COCl + H2 → CH3CHO + HCl - Acetaldehyde to ethyl acetate: Oxidation with mild oxidizing agent like chromic acid or via Tischenko reaction (using aluminium ethoxide).
Equation: 2CH3CHO → CH3COOCH2CH3 - Ethyl acetate to acetamide: Reaction with ammonia (ammonolysis).
Equation: CH3COOCH2CH3 + NH3 → CH3CONH2 + CH3CH2OH - Acetamide to acetic acid: Acid hydrolysis (heating with dilute HCl or H2SO4).
Equation: CH3CONH2 + H2O + H+ → CH3COOH + NH4+
8. निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के लिये संतुलित समीकरण दीजिए:
Give balanced equations for the following chemical reactions:
- Acetone reacts with ammonia:
Equation: CH3COCH3 + NH3 → (CH3)2C=NH + H2O
(Formation of imine; further reaction can give diacetoneamine or other products under different conditions.) - Aqueous solution of formaldehyde is treated with mild alkalies:
Equation: 2HCHO + OH– → CH3OH + HCOO–
(Cannizzaro reaction: formaldehyde undergoes disproportionation to methanol and formate ion.) - Calcium formate is dry distilled:
Equation: (HCOO)2Ca → HCHO + CaCO3
(Calcium formate decomposes to give formaldehyde and calcium carbonate.)
20.
(i) एक पद में एक कार्बोक्सिलिक अम्ल को एक कार्बन कम वाली ऐमीन में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है ? रासायनिक समीकरण लिखिए ।
(i) How can a carboxylic acid be converted to an amine in one step having one carbon atom less ?
उत्तर / Answer: कार्बोक्सिलिक अम्ल को एक कार्बन कम वाली ऐमीन में परिवर्तित करने के लिए हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया (Hoffmann Bromamide Reaction) का उपयोग किया जाता है। इसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल के ऐमाइड को ब्रोमीन और क्षार (NaOH/KOH) के साथ अभिकृत कराया जाता है।
रासायनिक समीकरण:
R–CONH₂ + Br₂ + 4KOH → R–NH₂ + K₂CO₃ + 2KBr + 2H₂O
उदाहरण: CH₃CONH₂ + Br₂ + 4KOH → CH₃NH₂ + K₂CO₃ + 2KBr + 2H₂O
(ii) स्पष्ट कीजिए कि नाइट्रोबेन्जीन का नाइट्रिक अम्ल तथा सल्फ्यूरिक अम्ल के मिश्रण द्वारा नाइट्रीकरण करने पर केवल मेटा-डाइनाइट्रोबेन्जीन क्यों बनती हैं ?
(ii) Explain why nitrobenzene on nitration with a mixture of nitric acid and sulphuric acid forms only meta-dinitrobenzene.
उत्तर / Answer: नाइट्रोबेन्जीन में –NO₂ समूह एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-अपनेषक (deactivating) और मेटा-निर्देशक (meta-directing) समूह है। यह बेन्जीन वलय से इलेक्ट्रॉन खींचता है, जिससे वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है। नाइट्रीकरण के दौरान, नाइट्रोनियम आयन (NO₂⁺) वलय पर आक्रमण करता है। –NO₂ समूह के कारण, ऑर्थो और पैरा स्थानों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व और भी कम हो जाता है, जबकि मेटा स्थान पर अपेक्षाकृत अधिक इलेक्ट्रॉन घनत्व रहता है। इसलिए, आक्रमण मुख्यतः मेटा स्थान पर होता है, जिससे केवल मेटा-डाइनाइट्रोबेन्जीन बनती है।
(i) गेब्रिल थैलिमाइड संश्लेषण अभिक्रिया दीजिए ।
(i) Describe Gabriel phthalimide synthesis reaction.
उत्तर / Answer: गेब्रिल थैलिमाइड संश्लेषण एक विधि है जिसमें प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड से प्राथमिक ऐमीन बनाई जाती है। इसमें थैलिमाइड को पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिकृत करके पोटैशियम थैलिमाइड बनाया जाता है, जो एक अच्छा नाभिकस्नेही है। यह ऐल्किल हैलाइड के साथ अभिक्रिया करके N-ऐल्किल थैलिमाइड देता है, जिसे जल-अपघटन (hydrolysis) द्वारा प्राथमिक ऐमीन और थैलिक अम्ल में विभाजित किया जाता है।
अभिक्रिया:
थैलिमाइड + KOH → पोटैशियम थैलिमाइड + H₂O
पोटैशियम थैलिमाइड + R–X → N-ऐल्किल थैलिमाइड + KX
N-ऐल्किल थैलिमाइड + H₂O (H⁺/OH⁻) → R–NH₂ + थैलिक अम्ल
(ii) क्या कारण है कि ऐरोमैटिक डाइएजोनियम लवण ऐलिफैटिक डाइऐजोनियम लवण की अपेक्षा अधिक स्थायी होते हैं ?
(ii) Why are aromatic diazonium salts more stable than aliphatic diazonium salts ?
उत्तर / Answer: ऐरोमैटिक डाइएजोनियम लवण अधिक स्थायी होते हैं क्योंकि इनमें डाइएजोनियम समूह (–N₂⁺) बेन्जीन वलय के π-इलेक्ट्रॉनों के साथ अनुनाद (resonance) द्वारा स्थायीकरण प्राप्त करता है। यह अनुनाद ऋणात्मक आवेश को वलय पर वितरित कर देता है, जिससे लवण स्थायी होता है। इसके विपरीत, ऐलिफैटिक डाइएजोनियम लवणों में ऐसा कोई अनुनाद स्थायीकरण नहीं होता, इसलिए वे अत्यधिक अस्थायी होते हैं और तुरंत विघटित हो जाते हैं।
(i) परिक्षेपण विधि द्वारा प्लैटिनम का जल में कोलॉइडी विलयन बनाने का वर्णन कीजिए । उपकरण का नामांकित चित्र भी बनाइए ।
(i) Describe the dispersion method for the preparation of colloidal solution of platinum in water. Also draw labelled diagram of the apparatus.
उत्तर / Answer: प्लैटिनम का जल में कोलॉइडी विलयन बनाने के लिए विद्युत-परिक्षेपण (electrical dispersion) या आर्क विधि (arc method) का उपयोग किया जाता है। इस विधि में, प्लैटिनम के दो इलेक्ट्रोडों को जल में डुबोया जाता है और उनके बीच विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है। आर्क की उच्च ऊष्मा से प्लैटिनम वाष्पित होकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाता है, जो जल में फैलकर कोलॉइडी विलयन बनाते हैं। जल में थोड़ा क्षार (जैसे KOH) मिलाने से कण स्थायी हो जाते हैं।
उपकरण का नामांकित चित्र:
+ -
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प्रश्न 22
(i) जैव-अणु क्या है?
जैव-अणु वे कार्बनिक अणु हैं जो जीवित जीवों में पाए जाते हैं और जीवन प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड, न्यूक्लिक अम्ल आदि शामिल हैं।
(ii) परिवर्ती ध्रुवण घूर्णन क्या है?
परिवर्ती ध्रुवण घूर्णन (Mutarotation) वह घटना है जिसमें किसी विलयन का ध्रुवण घूर्णन समय के साथ बदलता है और एक स्थिर मान पर पहुँच जाता है। यह ग्लूकोज जैसे शर्कराओं में α और β एनोमरों के बीच संतुलन के कारण होता है।
(iii) ग्लूकोस के α- तथा β-समावयवियों की पाइरेनोस संरचनाओं को हावर्थ संरचना में व्यक्त कीजिए।
ग्लूकोज की हावर्थ संरचना में पाइरेनोस वलय (छः सदस्यीय वलय) होता है। α-ग्लूकोज में C1 पर OH समूह नीचे की ओर (नीचे) होता है, जबकि β-ग्लूकोज में C1 पर OH समूह ऊपर की ओर (ऊपर) होता है। दोनों संरचनाएँ निम्न प्रकार हैं:
- α-D-ग्लूकोपाइरेनोस: C1 पर OH नीचे की ओर
- β-D-ग्लूकोपाइरेनोस: C1 पर OH ऊपर की ओर
हावर्थ संरचना में वलय को समतल षट्कोण के रूप में दर्शाया जाता है, जिसमें ऑक्सीजन परमाणु ऊपरी दाएँ कोने पर होता है।
(iv) वे रासायनिक अभिक्रियाएँ दीजिए जिनसे निश्चित होता है कि ग्लूकोस अणु में —
(a) सभी छ: कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हैं।
ग्लूकोज को HI (हाइड्रोआयोडिक अम्ल) के साथ अपचयित करने पर n-हेक्सेन प्राप्त होता है, जो सिद्ध करता है कि सभी छः कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हैं।
अभिक्रिया: C₆H₁₂O₆ + HI → CH₃(CH₂)₄CH₃ (n-हेक्सेन)
(b) एक ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित है।
ग्लूकोज टॉलेन अभिकर्मक (अमोनियम सिल्वर नाइट्रेट) के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर दर्पण बनाता है, और फेलिंग विलयन के साथ अभिक्रिया करके लाल अवक्षेप (Cu₂O) देता है। ये अभिक्रियाएँ ऐल्डिहाइड समूह की उपस्थिति सिद्ध करती हैं।
अभिक्रिया: ग्लूकोज + टॉलेन अभिकर्मक → सिल्वर दर्पण + ग्लूकोनिक अम्ल
प्रश्न 23
(i) एथीन के मुक्त मूलक संकलन बहुलकीकरण को स्पष्ट कीजिए।
एथीन का मुक्त मूलक संकलन बहुलकीकरण तीन चरणों में होता है:
- प्रारंभ (Initiation): उत्प्रेरक (जैसे बेंज़ॉयल पेरॉक्साइड) के अपघटन से मुक्त मूलक बनते हैं, जो एथीन के द्विबंध पर आक्रमण करते हैं।
- प्रसार (Propagation): मुक्त मूलक एथीन अणुओं से क्रमिक रूप से जुड़ता है, जिससे लंबी श्रृंखला बनती है।
- समाप्ति (Termination): दो मुक्त मूलक श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर या विषमानुपातीकरण द्वारा अभिक्रिया समाप्त करती हैं, जिससे पॉलिथीन बनता है।
(ii) वल्कनीकरण प्राकृतिक रबड़ के गुणधर्मों को किस प्रकार परिवर्तित करता है?
वल्कनीकरण में प्राकृतिक रबड़ को सल्फर के साथ गर्म किया जाता है, जिससे रबड़ की श्रृंखलाओं के बीच क्रॉस-लिंक बनते हैं। इससे रबड़ के गुणधर्मों में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:
- रबड़ अधिक मजबूत और टिकाऊ हो जाता है।
- इसकी लोच बढ़ जाती है।
- यह ताप और रासायनिकों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हो जाता है।
- यह कम चिपचिपा होता है और अपना आकार बनाए रखता है।
(iii) ए बी एस रबड़ के मुख्य घटक कौन-से हैं? इसका एक उपयोग दीजिए।
ABS (एक्रिलोनाइट्राइल-ब्यूटाडाइईन-स्टाइरीन) रबड़ के मुख्य घटक हैं:
- एक्रिलोनाइट्राइल
- ब्यूटाडाइईन
- स्टाइरीन
उपयोग: इसका उपयोग ऑटोमोबाइल पार्ट्स, खिलौने, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आवरण बनाने में किया जाता है।
अथवा
निम्नलिखित बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलकों की संरचनाएँ लिखिए:
(a) पॉलिएक्रिलोनाइट्राइल
एकलक: एक्रिलोनाइट्राइल (CH₂=CH-CN)
(b) टेफ्लॉन
एकलक: टेट्राफ्लुओरोएथीन (CF₂=CF₂)
(c) पॉलिस्टाइरीन
एकलक: स्टाइरीन (C₆H₅-CH=CH₂)
(d) नियोप्रिन
एकलक: क्लोरोप्रिन (CH₂=CCl-CH=CH₂)
(i) नायलॉन-66 कैसे बनाया जाता है? समीकरण सहित अभिक्रिया समझाइए।
नायलॉन-66 हेक्सामेथिलीनडाइअमीन और एडिपिक अम्ल के संघनन बहुलकीकरण द्वारा बनाया जाता है।
अभिक्रिया:
n H₂N-(CH₂)₆-NH₂ + n HOOC-(CH₂)₄-COOH → [NH-(CH₂)₆-NH-CO-(CH₂)₄-CO]ₙ + (2n-1) H₂O
यह एक संघनन बहुलकीकरण है जिसमें जल निकलता है और एमाइड बंध बनते हैं।
(ii) डेक्रॉन के मुख्य घटक कौन-से हैं? इसका एक उपयोग बताइए।
डेक्रॉन (पॉलिएस्टर) के मुख्य घटक हैं:
- टेरेफ्थैलिक अम्ल (या इसका डाइमिथाइल एस्टर)
- एथिलीन ग्लाइकॉल
उपयोग: इसका उपयोग वस्त्र (जैसे शर्ट, साड़ी), बोतलें, और पैकेजिंग सामग्री बनाने में किया जाता है।
24.
(i) Explain a free radical addition polymerization of ethene.
(ii) How does vulcanization change the character of natural rubber?
(iii) Which are the main constituents of ABS rubber? Give its one application.
2+1+1+2+4
OR
(i) Write the structures of monomers used for getting the following polymers:
- Polyacrylonitrile
- Teflon
- Polystyrene
- Neoprene.
(ii) How is nylon-66 prepared? Explain the reaction with equation.
(iii) Which are the main constituents of dacron? Give its one application.
2+1+1=2=4
Solution (Free radical addition polymerization of ethene):
Ethene (CH₂=CH₂) undergoes free radical addition polymerization in the presence of a peroxide initiator (e.g., benzoyl peroxide). The process involves three steps:
- Initiation: The peroxide initiator decomposes to form free radicals (R•). These radicals add to the double bond of ethene, generating a new radical.
- Propagation: The radical adds to another ethene molecule, forming a longer chain radical. This step repeats rapidly, building a polymer chain.
- Termination: Two growing radicals combine (coupling) or disproportionate to form a stable polymer chain (polyethene).
Vulcanization: Vulcanization involves heating natural rubber with sulfur. This cross-links the polymer chains, making the rubber harder, more elastic, and resistant to heat and solvents.
ABS rubber: Main constituents are acrylonitrile, butadiene, and styrene. Application: Used in automotive parts, pipes, and toys.
Solution (OR part):
(a) Polyacrylonitrile: Monomer is acrylonitrile (CH₂=CH–CN).
(b) Teflon: Monomer is tetrafluoroethene (CF₂=CF₂).
(c) Polystyrene: Monomer is styrene (C₆H₅–CH=CH₂).
(d) Neoprene: Monomer is chloroprene (CH₂=CCl–CH=CH₂).
Nylon-66 preparation: It is prepared by condensation polymerization of hexamethylenediamine (H₂N–(CH₂)₆–NH₂) and adipic acid (HOOC–(CH₂)₄–COOH). The reaction yields a polyamide with elimination of water:
n H₂N–(CH₂)₆–NH₂ + n HOOC–(CH₂)₄–COOH → [–NH–(CH₂)₆–NH–CO–(CH₂)₄–CO–]ₙ + (2n-1) H₂O
Dacron constituents: Main constituents are terephthalic acid (or dimethyl terephthalate) and ethylene glycol. Application: Used in making polyester fibers for clothing and bottles.
प्रतिजैविक पदार्थ क्या हैं? सबसे पहले जिस प्रतिजैविक की खोज हुई, उसका नाम दीजिए।
उत्तर: प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) वे रासायनिक पदार्थ हैं जो सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया) की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं। सबसे पहले खोजा गया प्रतिजैविक पेनिसिलिन है, जिसे अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में खोजा था।
पूतिरोधी का उचित उदाहरण के साथ वर्णन कीजिए।
उत्तर: पूतिरोधी (एंटीसेप्टिक) वे पदार्थ हैं जो घावों या त्वचा पर लगाए जाने पर सूक्ष्मजीवों को मारते हैं या उनकी वृद्धि रोकते हैं। उदाहरण: डेटॉल (क्लोरोक्सीलेनॉल) एक सामान्य पूतिरोधी है जो घावों को साफ करने और संक्रमण रोकने के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रतिअम्ल क्या होते हैं? दो यौगिकों के नाम बताइए जो प्रतिअम्लों की तरह प्रयुक्त होते हैं।
उत्तर: प्रतिअम्ल (एंटासिड) वे पदार्थ हैं जो आमाशय में अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके अम्लपित्त या अपच से राहत देते हैं। दो यौगिक जो प्रतिअम्ल के रूप में प्रयुक्त होते हैं: मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Mg(OH)₂) और एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड (Al(OH)₃)।
सैकरीन क्या है? इसकी उपयोगिता लिखिए।
उत्तर: सैकरीन एक कृत्रिम मीठा पदार्थ (स्वीटनर) है, जो चीनी से लगभग 300-500 गुना अधिक मीठा होता है। इसकी उपयोगिता: इसका उपयोग मधुमेह रोगियों और वजन नियंत्रण करने वालों के लिए चीनी के विकल्प के रूप में किया जाता है।
अथवा
रंग बंधक रंजक क्या होता है? इसे कपड़ों पर किस प्रकार उपयोग किया जाता है?
उत्तर: रंग बंधक रंजक (वैट डाई) वे रंग हैं जो पानी में अघुलनशील होते हैं लेकिन क्षारीय माध्यम में घुलनशील रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। इसे कपड़ों पर उपयोग करने के लिए पहले रंजक को क्षारीय घोल में घोलकर कपड़े पर लगाया जाता है, फिर वायु में ऑक्सीकरण द्वारा यह अघुलनशील रूप में बदल जाता है और कपड़े पर स्थायी रंग बनाता है। उदाहरण: इंडिगो।
पीड़ाहारी का उचित उदाहरण के साथ वर्णन कीजिए।
उत्तर: पीड़ाहारी (एनाल्जेसिक) वे दवाएं हैं जो दर्द को कम करती हैं या समाप्त करती हैं। उदाहरण: पैरासिटामोल एक सामान्य पीड़ाहारी है जो सिरदर्द, बुखार और हल्के दर्द में उपयोग किया जाता है।
कीट प्रतिकर्षी पदार्थ क्या हैं? दो यौगिकों के नाम बताइए जो कीट प्रतिकर्षी की तरह प्रयुक्त होते हैं।
उत्तर: कीट प्रतिकर्षी (इंसेक्ट रिपेलेंट) वे पदार्थ हैं जो कीटों को दूर भगाते हैं या उन्हें आकर्षित नहीं होने देते। दो यौगिक जो कीट प्रतिकर्षी के रूप में प्रयुक्त होते हैं: डीईईटी (N,N-डाइएथिल-मेटा-टोल्यूमाइड) और सिट्रोनेला तेल।
सिरेमिक क्या हैं? इसकी उपयोगिता लिखिए।
उत्तर: सिरेमिक अकार्बनिक, अधात्विक ठोस पदार्थ हैं जो उच्च तापमान पर बनाए जाते हैं और कठोर, भंगुर तथा ताप-प्रतिरोधी होते हैं। इसकी उपयोगिता: सिरेमिक का उपयोग बर्तन, टाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे कैपेसिटर), और अंतरिक्ष यान के ताप-रोधक के रूप में किया जाता है।
655-.-44-2-.-- छाए. II | SS-586-I |
Chemistry (2011) – SS-41-2-2011
(i) What is an antibiotic? Give the name of the first discovered antibiotic.
Answer: An antibiotic is a chemical substance produced by microorganisms (bacteria, fungi) that can kill or inhibit the growth of other microorganisms. The first discovered antibiotic was Penicillin, discovered by Alexander Fleming in 1928.
(ii) Describe the antiseptics with suitable example.
Answer: Antiseptics are chemical substances that kill or prevent the growth of microorganisms on living tissues (skin, wounds). They are safe to apply on the body. Example: Dettol (a mixture of chloroxylenol and terpineol) is used as an antiseptic for cleaning wounds and cuts.
(iii) What are antacids? Name two compounds used as antacids.
Answer: Antacids are substances that neutralize excess hydrochloric acid in the stomach, providing relief from acidity and heartburn. Two compounds used as antacids are: Magnesium hydroxide (Mg(OH)₂) and Aluminium hydroxide (Al(OH)₃).
(iv) What is Saccharin? Write its significance.
Answer: Saccharin is an artificial sweetener, about 300–500 times sweeter than sucrose. Its significance lies in being a non-caloric sweetener, used in diabetic and low-calorie foods, and it does not cause tooth decay.
OR
(i) What is mordant dye? How is it applied to the fabric?
Answer: A mordant dye is a dye that requires a mordant (a substance that fixes the dye to the fabric) to form an insoluble complex on the fiber. Application: The fabric is first treated with a mordant (e.g., alum, chromium salts), then dyed. The mordant binds with both the dye and the fabric, making the color fast.
(ii) Describe the analgesics with suitable example.
Answer: Analgesics are drugs that relieve pain without causing loss of consciousness. They are classified into non-narcotic (e.g., aspirin) and narcotic (e.g., morphine). Example: Aspirin is a non-narcotic analgesic used for headaches and fever.
(iii) What are insect repellents? Name two compounds used as insect repellents.
Answer: Insect repellents are substances applied to skin or clothing to deter insects from landing or biting. Two compounds used as insect repellents are: DEET (N,N-diethyl-meta-toluamide) and Citronella oil.
(iv) What are ceramics? Write their significance.
Answer: Ceramics are inorganic, non-metallic materials made by heating clay or other raw materials at high temperatures. Their significance includes high hardness, heat resistance, and electrical insulation, making them useful in pottery, bricks, tiles, and advanced applications like aerospace and electronics.