RBSE Class 12th 2011 Economics-SS-10-2-2011 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2011 |
| Subject | Economics-SS-10-2-2011 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2011 Economics-SS-10-2-2011
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Rajasthan Board Class 12th Economics-SS-10-2-2011 2011 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2011
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2011
वैकल्पिक वर्ग I — कला (OPTIONAL GROUP I — ARTS)
अर्थशास्त्र -- द्वितीय पत्र
(ECONOMICS — Second Paper)
समय : 3 घण्टे 15 मिनट पूर्णांक : 60
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं। प्रश्न क्रमांक 23 एवं 24 में आन्तरिक विकल्प हैं।
All the questions are compulsory. There are internal choices in Question Nos. 23 and 24. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंकवाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
Roll No. : _______________
No. of Questions : 24 SS—10—2—Econ. II
No. of Printed Pages : 7
SS-52-II [ Turn over ]
निर्देश / Instructions
6. प्रश्न क्रमांक 2 से 5 तक अति लघूत्तरात्मक हैं जिनके उत्तर प्रत्येक 4 से 5 शब्दों तक देने हैं। प्रश्न संख्या 6 से 13 तक के प्रत्येक उत्तर 30 शब्दों तक एवं प्रश्न संख्या 14 से 23 तक के प्रत्येक उत्तर 50 शब्दों तक देने हैं। प्रत्येक प्रश्न के अंक उसके सामने दिये गये हैं।
Question Nos. 2 to 5 are very short answer type. Their answers are to be given in 4 to 5 words each. Answers to Question Nos. 6 to 13 are to be given within 30 words each and answers to Question Nos. 14 to 23 are to be given within 50 words each. Marks of each question are given against it.
7. प्रश्न क्रमांक 4 के चार भाग (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें :
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 4. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below :
| प्रश्न क्रमांक Question No. |
सही उत्तर का क्रमाक्षर Correct letter of the Answer |
|---|---|
| (i) | |
| (ii) | |
| (iii) | |
| (iv) |
प्रश्न / Question
(ii) कपास उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में स्थान है :
In terms of cotton production, India's position in the world economy is :
- (अ) प्रथम / First
- (ब) दूसरा / Second
- (स) तीसरा / Third
- (द) चौथा / Fourth
व्याख्या / Explanation: भारत कपास उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है, जबकि चीन प्रथम स्थान पर है। / India is the second largest producer of cotton in the world, while China holds the first position.
59७5-790->-ऋटठा, II SS-5 2-II
India’s position with reference to cotton production in the world economy is
- (A) first
- (B) second
- (C) third
- (D) fourth
Correct Answer: (B) second
India is the second-largest cotton producer in the world after China.
(i) भारत में आर्थिक नियोजन हेतु योजना आयोग तथा राज्यों के बीच समन्वय बनाए रखने हेतु गठन किया गया परिषद है
- (a) राष्ट्रीय विकास परिषद
- (ब) राष्ट्रीय आयोजना परिषद
- (स) राष्ट्रीय बाल विकास परिषद
- (द) राष्ट्रीय आयोजना एवं विकास परिषद
Correct Answer: (a) राष्ट्रीय विकास परिषद
The National Development Council (NDC) was established to coordinate between the Planning Commission and state governments for economic planning.
For coordination between the states of India and Planning Commission for the purpose of economic planning, the Council constituted is
- (A) National Development Council
- (B) National Planning Council
- (C) National Child Development Council
- (D) National Planning and Development Council
Correct Answer: (A) National Development Council
The National Development Council (NDC) is the apex body for coordination between the central Planning Commission and state governments.
(४) निम्न में से औद्योगिक वित्त का बाह्य साधन है
- (अ) अंशों का निर्गमन
- (ब) ऋण पत्र
- (स) लाभ का पुनर्निवेश
- (द) सार्वजनिक जमाएँ
Correct Answer: (अ) अंशों का निर्गमन
Issue of equities (shares) is an external source of industrial finance as it involves raising funds from outside the firm.
External source of industrial finance among the following is
- (A) Issue of equities
- (B) Credit bills
- (C) Reinvestment of profits
- (D) Public deposits
Correct Answer: (A) Issue of equities
Issue of equities is an external source because it involves selling ownership shares to investors outside the company.
(iv) एच-आई-वी- पॉजिटिव का संबंध है
- (अ) क्षय से
- (ब) हैजा से
- (स) टाइफाइड से
- (द) एड्स से
Correct Answer: (द) एड्स से
HIV positive is directly related to AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome).
H.I.V. positive is related to
- (A) Tuberculosis
- (B) Cholera
- (C) Typhoid
- (D) AIDS
Correct Answer: (D) AIDS
HIV (Human Immunodeficiency Virus) causes AIDS, a condition that weakens the immune system.
भारत में कौन-सी फसल के उत्पादन में सर्वाधिक कृषि क्षेत्र का उपयोग किया जाता है ?
In India, maximum agricultural area is used in the production of which crop ?
उत्तर: चावल (Rice) के उत्पादन में सर्वाधिक कृषि क्षेत्र का उपयोग किया जाता है।
राजस्थान में चुकन्दर से चीनी कहाँ तैयार की जाती है ?
Where is sugar from sugar-beet produced in Rajasthan ?
उत्तर: राजस्थान में चुकन्दर से चीनी श्रीगंगानगर जिले में तैयार की जाती है।
विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) की स्थापना कब की गई ?
When was the World Trade Organization (W.T.O.) established ?
उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) की स्थापना 1 जनवरी, 1995 को की गई थी।
तेल उत्पादक एवं निर्यातक देशों (ओ.पी.ई.सी.) के कोई दो सदस्यों के नाम लिखिये।
Give the names of any two members of Oil Producing and Exporting Countries (O.P.E.C).
उत्तर: ओ.पी.ई.सी. के दो सदस्य देश हैं:
- सऊदी अरब (Saudi Arabia)
- ईरान (Iran)
(अन्य वैकल्पिक उत्तर: इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, वेनेजुएला आदि।)
भारत में उच्च औद्योगिक विकास की दृष्टि से उन्नत कोई तीन राज्यों के नाम लिखिये।
Write the names of any three Indian states from the view of high industrial development.
उत्तर: भारत में उच्च औद्योगिक विकास वाले तीन राज्य हैं:
- महाराष्ट्र (Maharashtra)
- गुजरात (Gujarat)
- तमिलनाडु (Tamil Nadu)
(अन्य वैकल्पिक उत्तर: कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि।)
भारत में शिक्षा के कोई तीन रिसाव प्रभाव बताइये।
Give any three trickle-down effects of education in India.
उत्तर: शिक्षा के तीन रिसाव प्रभाव (trickle-down effects) निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक विकास: शिक्षित व्यक्ति उच्च उत्पादकता और नवाचार में योगदान देते हैं, जिससे समग्र आर्थिक वृद्धि होती है।
- सामाजिक जागरूकता: शिक्षा से लोगों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ती है, जो समाज के निचले तबके तक पहुँचती है।
- गरीबी में कमी: शिक्षित व्यक्तियों को बेहतर रोजगार मिलता है, जिससे उनकी आय बढ़ती है और गरीबी कम होती है।
भारत में आर्थिक नियोजन के कोई तीन राजनैतिक उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।
Mention any three political objectives of economic planning in India.
उत्तर: भारत में आर्थिक नियोजन के तीन राजनैतिक उद्देश्य हैं:
- राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना: आर्थिक विकास के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को एक सूत्र में बाँधना।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करना: योजना प्रक्रिया में जनभागीदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देना।
- सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना: संसाधनों के समान वितरण और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए नीतियाँ बनाना।
भारत में कोई तीन भूमि सुधार कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।
Mention any three Land reform programmes in India.
उत्तर: भारत में तीन प्रमुख भूमि सुधार कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:
- बिचौलियों का उन्मूलन (Abolition of Intermediaries): जमींदारी प्रथा को समाप्त कर किसानों को सीधे भूमि का स्वामित्व देना।
- भूमि-सीमा निर्धारण (Land Ceiling): एक व्यक्ति या परिवार के पास अधिकतम भूमि की सीमा तय कर अतिरिक्त भूमि को भूमिहीनों में बाँटना।
- बटाईदारी सुधार (Tenancy Reforms): काश्तकारों को सुरक्षित अधिकार, उचित लगान और भूमि खरीदने का अवसर प्रदान करना।
भारत में सहकारी आन्दोलन की कोई तीन कमियाँ बताइये।
State any three shortcomings of cooperative movement in India.
उत्तर: भारत में सहकारी आन्दोलन की तीन प्रमुख कमियाँ निम्नलिखित हैं:
- सीमित सदस्यता और पूंजी: अधिकांश सहकारी समितियों में सदस्यता सीमित होती है और पूंजी का अभाव रहता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
- प्रबंधकीय अक्षमता: सहकारी समितियों में प्रायः प्रशिक्षित प्रबंधकों का अभाव होता है, जिससे संचालन में अक्षमता और भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ जाती है।
- राजनीतिक हस्तक्षेप: सहकारी आन्दोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप आम बात है, जो इसे अपने मूल उद्देश्यों से भटका देता है और इसकी स्वायत्तता को कमजोर करता है।
भारत में लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास हेतु कोई तीन सुझाव दीजिए।
Give any three suggestions for the development of small and cottage industries in India.
उत्तर: भारत में लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास हेतु तीन सुझाव निम्नलिखित हैं:
- वित्तीय सहायता में वृद्धि: इन उद्योगों को सस्ती और सुलभ ऋण सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए, साथ ही सरकारी योजनाओं के माध्यम से अनुदान और सब्सिडी भी दी जानी चाहिए।
- प्रशिक्षण और तकनीकी उन्नयन: कारीगरों और श्रमिकों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि उत्पादन की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार हो सके।
- विपणन सुविधाएं: इन उद्योगों के उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराए जाने चाहिए, जैसे कि सरकारी खरीद नीतियों में प्राथमिकता और निर्यात प्रोत्साहन।
भारत में जन सहभागिता के आधार पर संचालित किन्हीं तीन विकास कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।
Mention any three development programmes based on people’s participation in India.
उत्तर: भारत में जन सहभागिता के आधार पर संचालित तीन विकास कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा): यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करता है और इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी से कार्यों का चयन और निगरानी की जाती है।
- स्वच्छ भारत मिशन: इस मिशन में स्वच्छता और सफाई के लिए जनता की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है, जिसमें शौचालय निर्माण और कचरा प्रबंधन शामिल है।
- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम): यह कार्यक्रम ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय समुदायों, स्वयंसेवी संगठनों और ग्राम पंचायतों की भागीदारी पर जोर देता है।
भारत में स्वदेशी की आवश्यकता के कोई तीन आधार बताइए।
State any three bases for the need of Swadeshi in India.
उत्तर: भारत में स्वदेशी की आवश्यकता के तीन आधार निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक स्वावलंबन: स्वदेशी से देश में उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है और आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त होती है।
- रोजगार सृजन: स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से स्थानीय उद्योगों और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
- सांस्कृतिक संरक्षण: स्वदेशी आंदोलन देशी उत्पादों और परंपराओं को बढ़ावा देता है, जिससे भारतीय संस्कृति और विरासत का संरक्षण होता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के अल्पविकसित स्वरूप को दर्शाने वाली कोई तीन जनसंख्या संबंधी विशेषताओं को स्पष्ट कीजिये।
Explain any three population related features showing Indian economy as an underdeveloped economy.
उत्तर: भारतीय अर्थव्यवस्था के अल्पविकसित स्वरूप को दर्शाने वाली तीन जनसंख्या संबंधी विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- उच्च जन्म दर और मृत्यु दर: अल्पविकसित अर्थव्यवस्थाओं में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों उच्च होती हैं। भारत में अब भी कई क्षेत्रों में यह स्थिति देखी जाती है, जो विकास की कमी को दर्शाती है।
- निम्न साक्षरता दर: भारत में साक्षरता दर विकसित देशों की तुलना में कम है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं में। यह मानव पूंजी के निम्न स्तर को इंगित करता है।
- अधिक आश्रित जनसंख्या: भारत में 15 वर्ष से कम और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का अनुपात अधिक है, जो कार्यशील जनसंख्या पर बोझ बढ़ाता है और आर्थिक विकास को धीमा करता है।
भारत में राष्ट्रीय विकास परिषद के कोई तीन प्रमुख कार्यों को स्पष्ट कीजिये।
Explain any three main functions of National Development Council in India.
उत्तर: भारत में राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) के तीन प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- योजना अनुमोदन: राष्ट्रीय विकास परिषद राष्ट्रीय योजनाओं (जैसे पंचवर्षीय योजनाएं) की समीक्षा करती है और उन्हें अनुमोदित करती है, ताकि वे देश के विकास लक्ष्यों के अनुरूप हों।
- समन्वय: यह परिषद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करती है, ताकि विकास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके और संसाधनों का उचित उपयोग हो सके।
- नीति निर्देशन: राष्ट्रीय विकास परिषद आर्थिक और सामाजिक विकास से संबंधित नीतियों पर मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिसमें गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दे शामिल हैं।
राष्ट्रीय जल नीति, 1987 के तीन प्रावधान लिखिये।
Write three provisions of National Water Policy, 1987.
उत्तर: राष्ट्रीय जल नीति, 1987 के तीन प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- जल संसाधनों का समन्वित विकास: नीति में जल संसाधनों के समन्वित और बहुउद्देशीय विकास पर जोर दिया गया, जिसमें सिंचाई, पेयजल, उद्योग और ऊर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया।
- जल संरक्षण और प्रबंधन: नीति में जल के कुशल उपयोग और संरक्षण पर बल दिया गया, जिसमें वर्षा जल संचयन और भूजल के पुनर्भरण जैसे उपाय शामिल थे।
- पर्यावरणीय सुरक्षा: राष्ट्रीय जल नीति, 1987 में जल संसाधनों के विकास के दौरान पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के प्रावधान किए गए।
भारतीय कृषि की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
Describe any three features of Indian Agriculture. (1+1+1=3)
भारतीय कृषि की तीन प्रमुख विशेषताएँ:
- मानसून पर निर्भरता: भारतीय कृषि मुख्यतः मानसून पर निर्भर है। लगभग 60% कृषि क्षेत्र वर्षा पर आधारित है, जिससे उत्पादन अनिश्चित रहता है।
- लघु एवं खंडित जोतें: भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटी और बिखरी हुई भूमि होती है, जिससे आधुनिक तकनीक का उपयोग कठिन हो जाता है।
- पारंपरिक तकनीक का प्रयोग: अधिकांश किसान अभी भी पारंपरिक औजारों और विधियों का उपयोग करते हैं, जिससे उत्पादकता कम रहती है।
भारत में योजना काल में औद्योगिक विकास की किन्हीं छः प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिये।
Mention any six tendencies of industrial development during the Planning period in India. (1+1+1+1+1+1=6)
योजना काल में औद्योगिक विकास की छः प्रवृत्तियाँ:
- सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार: सरकार ने बुनियादी उद्योगों में सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना पर जोर दिया।
- निजी क्षेत्र का विकास: लाइसेंस राज के बावजूद निजी क्षेत्र का विस्तार हुआ, विशेषकर उपभोक्ता वस्तुओं में।
- भारी उद्योगों पर जोर: द्वितीय पंचवर्षीय योजना में इस्पात, मशीनरी आदि भारी उद्योगों को प्राथमिकता दी गई।
- क्षेत्रीय असंतुलन: औद्योगिक विकास मुख्यतः महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु जैसे राज्यों में केंद्रित रहा।
- लघु उद्योगों का संरक्षण: सरकार ने लघु एवं कुटीर उद्योगों को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया।
- आयात प्रतिस्थापन: विदेशी वस्तुओं के आयात को कम करने के लिए घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया गया।
आपके अनुसार भारत में लघु एवं कुटीर उद्योगों के तीन प्रमुख लाभ क्या हैं?
According to you, what are the three major benefits of small and cottage industries in India? (1+1+1=3)
लघु एवं कुटीर उद्योगों के तीन प्रमुख लाभ:
- रोजगार सृजन: ये उद्योग कम पूंजी में अधिक रोजगार प्रदान करते हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
- स्थानीय संसाधनों का उपयोग: ये स्थानीय कच्चे माल और कौशल का उपयोग करते हैं, जिससे क्षेत्रीय विकास होता है।
- आय का समान वितरण: ये उद्योग धन के केंद्रीकरण को रोकते हैं और आय का समान वितरण सुनिश्चित करते हैं।
भारत में पेय जल समस्या के समाधान हेतु तीन सुझाव दीजिये।
Give three suggestions to solve the drinking water problem in India. (1+1+1=3)
पेय जल समस्या के समाधान हेतु तीन सुझाव:
- वर्षा जल संचयन: वर्षा के पानी को संग्रहित करने के लिए तालाबों, टैंकों और रूफटॉप हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण किया जाए।
- जल संरक्षण: कृषि में ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर जैसी जल-कुशल तकनीकों को अपनाया जाए।
- भूजल प्रबंधन: भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और रिचार्जिंग को बढ़ावा दिया जाए।
जन सहभागिता की तीन प्रमुख बाधाओं का वर्णन कीजिये।
Describe the three main obstacles in people’s participation. (1+1+1=3)
जन सहभागिता की तीन प्रमुख बाधाएँ:
- जागरूकता का अभाव: लोगों में विकास कार्यक्रमों और उनके लाभों के प्रति जानकारी की कमी होती है।
- सामाजिक-आर्थिक असमानता: गरीबी, जाति, लिंग आदि के कारण कुछ वर्ग निर्णय प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं।
- नौकरशाही की बाधाएँ: सरकारी अधिकारियों की उदासीनता, भ्रष्टाचार और जटिल प्रक्रियाएँ लोगों की भागीदारी को हतोत्साहित करती हैं।
भारत के सन्दर्भ में किन्हीं चार ऊर्जा संसाधनों का वर्णन कीजिये।
Describe any four sources of energy with reference to India. (1+1+1+1=4)
भारत के चार प्रमुख ऊर्जा संसाधन:
- कोयला: भारत का सबसे प्रमुख ऊर्जा स्रोत है। झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में बड़े भंडार हैं। इसका उपयोग बिजली उत्पादन और उद्योगों में होता है।
- पेट्रोलियम: मुंबई हाई, गुजरात, असम में तेल क्षेत्र हैं। परिवहन और रासायनिक उद्योगों के लिए आवश्यक है, लेकिन भारत आयात पर निर्भर है।
- प्राकृतिक गैस: यह एक स्वच्छ ईंधन है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक और घरेलू ईंधन के रूप में होता है।
- जल विद्युत: नदियों पर बांध बनाकर बिजली उत्पादन। भाखड़ा नांगल, हीराकुंड प्रमुख परियोजनाएँ हैं। यह नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल है।
भारत में खाद्य समस्या के छः कारणों को स्पष्ट कीजिये।
Explain any six causes of food problem in India. (1+1+1+1+1+1=6)
भारत में खाद्य समस्या के छः कारण:
- जनसंख्या वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण खाद्यान्न की मांग लगातार बढ़ रही है।
- कृषि की पारंपरिक पद्धति: आधुनिक तकनीक और उर्वरकों के कम उपयोग से उत्पादकता कम है।
- भूमि का खंडित होना: जनसंख्या दबाव के कारण जोतें छोटी और बिखरी हो गई हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है।
- मानसून पर निर्भरता: अनियमित वर्षा के कारण फसल उत्पादन में अनिश्चितता रहती है।
- भंडारण और परिवहन की कमी: अनाज के भंडारण और परिवहन के अपर्याप्त साधनों के कारण बड़ी मात्रा में अनाज बर्बाद हो जाता है।
- गरीबी: अधिकांश जनसंख्या की क्रय शक्ति कम है, जिससे वे पर्याप्त भोजन नहीं खरीद पाते।
अथवा
नाबार्ड के किन्हीं चार प्रमुख कार्यों का वर्णन एवं इसकी प्रगति की समीक्षा कीजिये।
Explain any four main functions of NABARD and evaluate its progress. (1+1+1+1+2=6)
नाबार्ड (NABARD) के चार प्रमुख कार्य:
- कृषि ऋण प्रदान करना: नाबार्ड कृषि और ग्रामीण विकास के लिए वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करता है।
- ग्रामीण बुनियादी ढाँचे का विकास: यह सिंचाई, भंडारण, सड़क आदि ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए वित्तीय सहायता देता है।
- स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बढ़ावा देना: नाबार्ड ग्रामीण महिलाओं और गरीबों के लिए स्वयं सहायता समूहों के गठन और उन्हें ऋण उपलब्ध कराने में सहायता करता है।
- कृषि विपणन और प्रसंस्करण: यह कृषि उपज के विपणन और प्रसंस्करण के लिए बुनियादी ढाँचे के विकास में सहायता प्रदान करता है।
प्रगति की समीक्षा: नाबार्ड ने ग्रामीण ऋण प्रवाह को बढ़ाने और किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया है। हालांकि, अभी भी कई क्षेत्रों में ऋण वितरण में असमानता है और किसानों को ब्याज दरों की समस्या का सामना करना पड़ता है। कुल मिलाकर, नाबार्ड ने ग्रामीण विकास में सकारात्मक योगदान दिया है, लेकिन इसे और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
24. वैश्वीकरण की दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाये गये किन्हीं तीन कदमों को स्पष्ट कीजिये। वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर तीन प्रभावों का वर्णन कीजिये।
भारत सरकार द्वारा वैश्वीकरण की दिशा में उठाए गए तीन कदम:
- आयात-निर्यात नीति में उदारीकरण: सरकार ने आयात शुल्कों में कमी की और कई वस्तुओं पर लाइसेंसिंग व्यवस्था समाप्त कर दी, जिससे विदेशी व्यापार को बढ़ावा मिला।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को प्रोत्साहन: विभिन्न क्षेत्रों में FDI की सीमा बढ़ाई गई और स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति दी गई, जिससे विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ा।
- विनिमय दर का तैरता हुआ रूप: 1991 के बाद रुपये की विनिमय दर को बाजार बलों पर छोड़ दिया गया, जिससे भारतीय मुद्रा अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनी।
वैश्वीकरण के भारतीय अर्थव्यवस्था पर तीन प्रभाव:
- आर्थिक विकास में तेजी: वैश्वीकरण के कारण भारत में विदेशी निवेश और तकनीक का आगमन हुआ, जिससे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- रोजगार के अवसरों में वृद्धि: सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा क्षेत्र और विनिर्माण में नए रोजगार सृजित हुए, विशेषकर युवाओं के लिए।
- उपभोक्ता विकल्पों का विस्तार: विदेशी वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बढ़ी, जिससे उपभोक्ताओं को गुणवत्ता और कीमत में अधिक विकल्प मिले।
अथवा
विश्व व्यापार संगठन के सन्दर्भ में भारत द्वारा किये गये तीन प्रयासों को स्पष्ट कीजिये। विश्व व्यापार संगठन के भारतीय अर्थव्यवस्था पर तीन प्रभाव एवं चुनौतियों का वर्णन कीजिये।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के संदर्भ में भारत द्वारा किए गए तीन प्रयास:
- बौद्धिक संपदा अधिकारों (TRIPS) का अनुपालन: भारत ने पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क से संबंधित कानूनों में संशोधन कर WTO के मानकों को अपनाया, जिससे नवाचार और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला।
- कृषि सब्सिडी पर बातचीत: भारत ने विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए WTO में कृषि सब्सिडी और खाद्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
- सेवा क्षेत्र का उदारीकरण: भारत ने GATS (सेवाओं पर सामान्य समझौता) के तहत बैंकिंग, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विदेशी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई।
WTO के भारतीय अर्थव्यवस्था पर तीन प्रभाव एवं चुनौतियाँ:
- प्रभाव: निर्यात में वृद्धि: WTO के नियमों के कारण भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को वैश्विक बाजार में बेहतर पहुंच मिली, विशेषकर कपड़ा, आभूषण और आईटी सेवाओं में।
- चुनौती: कृषि क्षेत्र पर दबाव: विकसित देशों द्वारा दी जाने वाली भारी कृषि सब्सिडी के कारण भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा में कठिनाई होती है, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है।
- चुनौती: बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रभाव: TRIPS समझौते के कारण भारत में दवाओं और प्रौद्योगिकी की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो गई हैं।