RBSE Class 12th 2011 Hindi (Compulsory)-SS-01-2011 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2011 |
| Subject | Hindi (Compulsory)-SS-01-2011 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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Rajasthan Board Class 12th Hindi (Compulsory)-SS-01-2011 2011 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2012
अनिवार्य हिन्दी
(COMPULSORY HINDI)
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंकवाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
- प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii, iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (आ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें :
| प्रश्न क्रमांक | उत्तर का सही विकल्प |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
SS—01—Hindi (C) [55-557] [Turn over
प्रश्नपत्र – हिंदी (अनिवार्य) – 2011 (पृष्ठ 2)
प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
-
'एकैक' शब्द का सन्धि-विच्छेद है
- (अ) एक + ऐक
- (ब) ए + एक
- (स) ऐक + एक
- (द) एक + एक
व्याख्या: 'एकैक' का सन्धि-विच्छेद 'एक + एक' होता है। यहाँ 'अ + अ' का 'अ' होता है और दीर्घ सन्धि है।
-
विसर्ग सन्धि का उदाहरण है
- (अ) मनोबल
- (ब) हिमालय
- (स) नयन
- (द) सदैव
व्याख्या: 'मनोबल' में 'मनस् + बल' का विसर्ग सन्धि है। विसर्ग के बाद 'ब' आने पर 'स्' का 'ओ' हो जाता है।
-
'सत् + कल्प' शब्दों का सन्धियुक्त शब्द है
- (अ) सकल्प
- (ब) समकल्प
- (स) संकल्प
- (द) सम्कल्प
व्याख्या: 'सत् + कल्प' में 'त्' के बाद 'क' आने पर 'त्' का 'म्' हो जाता है और अनुस्वार लगता है, जिससे 'संकल्प' बनता है।
-
'देव' शब्द में सन्धि है
- (अ) व्यंजन सन्धि
- (ब) गुण सन्धि
- (स) वृद्धि सन्धि
- (द) अयादि सन्धि
व्याख्या: 'देव' शब्द 'दैव' का वृद्धि रूप है। यहाँ 'ए' को 'ऐ' में बदलना वृद्धि सन्धि है।
प्रश्न 2. 'अमृत' शब्द के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: 'अमृत' के पर्यायवाची शब्द हैं – सुधा, पीयूष, अमिय, सोम (कोई दो)।
प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों के विलोमार्थक शब्द लिखिए :
- शाश्वत – अशाश्वत / नश्वर / क्षणिक
- दिन – रात / रात्रि
प्रश्न 4. वाक्य की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: वाक्य शब्दों का वह सार्थक समूह है जो पूर्ण अर्थ प्रकट करता है और जिसमें कर्ता, क्रिया तथा कर्म (आवश्यकतानुसार) का सही प्रयोग होता है। उदाहरण: राम पुस्तक पढ़ता है।
प्रश्न 5. सर्वनाम शब्द के पद-परिचय हेतु कोई तीन बिन्दु लिखिए।
उत्तर: सर्वनाम शब्द के पद-परिचय हेतु निम्नलिखित तीन बिन्दु हैं:
- सर्वनाम का भेद (पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, प्रश्नवाचक, सम्बन्धवाचक, निजवाचक)।
- वचन (एकवचन / बहुवचन)।
- कारक (कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध, अधिकरण) तथा लिंग (पुल्लिंग / स्त्रीलिंग) – यदि लागू हो।
प्रश्न 6. निम्नलिखित शब्द-युग्मों का अर्थ भेद स्पष्ट कीजिए :
-
पाणि – पानी
उत्तर: 'पाणि' का अर्थ 'हाथ' है, जबकि 'पानी' का अर्थ 'जल' है।
-
प्रकार – प्राकार
उत्तर: 'प्रकार' का अर्थ 'भेद / तरीका' है, जबकि 'प्राकार' का अर्थ 'दीवार / परकोटा' है।
7. निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :
- जो सम्पत्ति पिता से प्राप्त हो। — पैतृक
- जिसकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी हो। — लम्बोदर (या लम्बभुज)
8.
- “खुशामद करना” के लिए सही मुहावरा लिखिए।
उत्तर: चापलूसी करना (या खुशामद करना स्वयं मुहावरा है; सामान्यतः “चाटुकारिता करना” भी प्रयुक्त होता है।) - “यथा राजा तथा प्रजा” लोकोक्ति का स्वरचित वाक्य प्रयोग कीजिए।
उत्तर: यदि राजा अन्यायी होगा तो प्रजा भी दुखी होगी, क्योंकि यथा राजा तथा प्रजा।
9. ‘समास’ की परिभाषा और उदाहरण लिखिए।
परिभाषा: दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने नए शब्द को समास कहते हैं। इसमें पहले पद को पूर्वपद और दूसरे को उत्तरपद कहते हैं।
उदाहरण: राजपुत्र = राजा का पुत्र (तत्पुरुष समास), नीलकमल = नीला है जो कमल (कर्मधारय समास)।
10. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके पुनः लिखिए :
- अस्तबल में घोड़ा चिंघाड़ रहा है। — शुद्ध रूप: अस्तबल में घोड़ा हिनहिना रहा है।
- मेरा कमीज उतार लाओ। — शुद्ध रूप: मेरी कमीज उतार लाओ।
11. निम्नलिखित शब्दों में विद्यमान उपसर्ग, प्रत्यय एवं मूल शब्द छाँटकर लिखिए :
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
|---|---|---|---|
| आर्थिक | अर्थ | अर्थ | इक |
| उपहार | उप | हार | — |
12. “आज तो यहीं बात हो गई।” वाक्य में निहित शब्द-शक्ति का नाम लिखकर उसकी परिभाषा लिखिए।
शब्द-शक्ति का नाम: लक्षणा शक्ति
परिभाषा: जब किसी शब्द का अर्थ उसके मुख्य अर्थ से भिन्न किसी अन्य अर्थ में प्रयुक्त होता है, तो वहाँ लक्षणा शक्ति होती है। यहाँ 'बात हो गई' का अर्थ 'समझौता या निर्णय हो गया' है, जो मुख्य अर्थ नहीं है।
13. “धरती कितना देती है।” कविता में कवि पंत ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर (लगभग 30 शब्द): कवि पंत ने संदेश दिया है कि धरती माँ की तरह सब कुछ देती है—अन्न, जल, वायु—बिना किसी भेदभाव के। मनुष्य को भी उदार और दानी बनना चाहिए, न कि लोभी।
4. “दासता इन्सान की करनी नहीं है । दासता भगवान की करनी नहीं है ।” कवि द्विवेदी क्या कहना चाहते हैं ? (उत्तर सीमा : लगभग 30 शब्द)
कवि द्विवेदी कहना चाहते हैं कि दासता मनुष्य को शोभा नहीं देती, क्योंकि मनुष्य स्वतंत्र प्राणी है। ईश्वर ने भी किसी को दास बनाने की आज्ञा नहीं दी है। अतः दासता एक अमानवीय एवं अधार्मिक कार्य है।
5. महाराणा प्रताप की तलवार को “अजब विषैली नागिन” किस कारण कहा गया है ? स्पष्ट कीजिए । (उत्तर सीमा : लगभग 30 शब्द)
महाराणा प्रताप की तलवार को “अजब विषैली नागिन” इसलिए कहा गया है क्योंकि वह शत्रुओं के लिए अत्यंत घातक और विष के समान प्राणहारिणी थी। जिस प्रकार नागिन के काटने से मृत्यु निश्चित होती है, उसी प्रकार उनकी तलवार का वार शत्रुओं के लिए मृत्यु समान था।
6. “कुसंग का प्रभाव सबसे भयानक होता है ।” स्पष्ट कीजिए । (उत्तर सीमा : लगभग 60 शब्द)
कुसंग का प्रभाव सबसे भयानक होता है क्योंकि यह व्यक्ति को धीरे-धीरे बुराई की ओर ले जाता है। बुरी संगति में रहने वाला व्यक्ति अपने अच्छे गुण खो बैठता है और बुरी आदतों का शिकार हो जाता है। यह उसके चरित्र, विचारों और जीवन को नष्ट कर देता है। कुसंग से दूर रहना ही मनुष्य के लिए कल्याणकारी है।
7. कथनी-करनी के अन्तर ने हमें आज कहाँ खड़ा कर दिया है ? लेखक के मन्तव्य को “सत्य की खोज” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए । (उत्तर सीमा : लगभग 60 शब्द)
“सत्य की खोज” पाठ के अनुसार, कथनी और करनी के अंतर ने हमें आज झूठ और पाखंड के गड्ढे में खड़ा कर दिया है। हम दूसरों को उपदेश तो बहुत देते हैं, परंतु स्वयं उन पर अमल नहीं करते। इसी कारण समाज में विश्वास की कमी हो गई है और मनुष्य सत्य से दूर होता जा रहा है।
8. “मेरे देशवासी मेरे परिजनों से बढ़कर हैं” अमर शहीद 'सागरमल' ने ऐसा क्यों कहा ? (उत्तर सीमा : लगभग 60 शब्द)
अमर शहीद सागरमल ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वे देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। उनके लिए देश और देशवासियों का हित सर्वोपरि था। वे मानते थे कि देश की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, और देशवासियों का कल्याण परिवार के सदस्यों की सेवा से भी अधिक महत्वपूर्ण है।
9. “लंका में भौतिकता का साम्राज्य था” कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए । (उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द)
लंका में भौतिकता का साम्राज्य था, यह कथन इसलिए सार्थक है क्योंकि वहाँ सोने-चाँदी, रत्नों और ऐश्वर्य का अत्यधिक संग्रह था। रावण ने भौतिक सुख-सुविधाओं पर ही ध्यान केंद्रित किया था। वहाँ के नागरिक विलासिता में डूबे हुए थे और आध्यात्मिक मूल्यों की उपेक्षा की गई थी। इसी कारण लंका में नैतिक पतन हुआ और अंततः उसका विनाश हुआ।
प्रश्न 20
“तीन बच्चे” कहानी बाल मनोविज्ञान को चित्रित करने वाली कहानी है ।”” कथन की पुष्टि कीजिए ।
( उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द ) 3
“तीन बच्चे” कहानी में लेखिका मन्नू भंडारी ने बच्चों की मनोवैज्ञानिक अवस्था को सजीव रूप से चित्रित किया है। कहानी के तीनों बच्चे – मुन्ना, बिट्टो और चुन्नू – अपनी-अपनी उम्र और स्वभाव के अनुसार अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देते हैं। मुन्ना का जिद्दीपन, बिट्टो का भोलापन और चुन्नू की मासूमियत बाल मनोविज्ञान के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं। बच्चों के डर, खुशी, ईर्ष्या और प्रेम जैसी भावनाओं का यथार्थ चित्रण इस कहानी को बाल मनोविज्ञान की एक सफल अभिव्यक्ति बनाता है।
प्रश्न 22
“निरापद' कहानी पुलिस व कानून की विसंगतियों पर प्रकाश डालने वाली प्रभावपूर्ण कहानी है । स्पष्ट कीजिए ।
( उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द ) 3
“निरापद” कहानी में लेखक ने पुलिस और कानून व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर किया है। कहानी का नायक एक सामान्य व्यक्ति है जो पुलिस की गिरफ्त में आ जाता है और उसे कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। पुलिस द्वारा बिना उचित कारण के परेशान करना, कानूनी प्रक्रिया में देरी और निर्दोष व्यक्ति को फँसाने की प्रवृत्ति को कहानी में प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है। यह कहानी व्यवस्था की खामियों पर एक करारा व्यंग्य है।
प्रश्न 23
‘Hered’ कहानी के शीर्षक पर प्रकाश डालिए ।
( उत्तर सीमा : लगभग 100 शब्द ) 4
“Hered” कहानी का शीर्षक अत्यंत सार्थक और प्रतीकात्मक है। ‘Hered’ शब्द का अर्थ है ‘वंशानुगत’ या ‘पैतृक’। यह शीर्षक कहानी के मूल विषय – पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही मानसिकता और परंपराओं – को इंगित करता है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे कुछ सामाजिक बुराइयाँ और रूढ़ियाँ पीढ़ियों से चली आ रही हैं और लोग उन्हें बिना प्रश्न किए स्वीकार कर लेते हैं। शीर्षक इसी वंशानुगत प्रभाव को रेखांकित करता है, जो व्यक्ति के सोच और व्यवहार को आकार देता है। यह शीर्षक कहानी के केंद्रीय संदेश को स्पष्ट करने में सफल है।
प्रश्न 24
“मैं आपसे अपनी धरोहर वापस माँगने आई हूँ ।”” यह धरोहर क्या थी ? ध्रुवश्री को कैसे प्राप्त हुई थी ?
( उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द ) 3
यह धरोहर ‘कलिंग की गद्दी’ थी, जो ध्रुवश्री के पिता की थी। ध्रुवश्री को यह धरोहर इस प्रकार प्राप्त हुई – उसके पिता कलिंग के राजा थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उसके चाचा ने सिंहासन हड़प लिया। ध्रुवश्री को अपने पिता की विरासत वापस पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। वह अपने अधिकार की माँग करने आई थी, क्योंकि वही सही उत्तराधिकारी थी। यह धरोहर उसे अपने पिता से प्राप्त हुई थी, जो कलिंग के वैध शासक थे।
प्रश्न 25
खारवेल किन गुणों के कारण * ध्रुवश्री ' नाटक का नायक बन गया ?
( उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द ) 3
खारवेल निम्नलिखित गुणों के कारण ‘ध्रुवश्री’ नाटक का नायक बना:
- साहस और वीरता: वह युद्ध में अदम्य साहस दिखाता है और अपने राज्य की रक्षा करता है।
- न्यायप्रियता: वह न्याय के प्रति समर्पित है और अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है।
- ध्रुवश्री के प्रति समर्पण: वह ध्रुवश्री के प्रति वफादार है और उसकी सहायता करता है।
- बुद्धिमत्ता: वह कूटनीतिक मामलों में चतुर है और सही निर्णय लेता है।
ये गुण उसे नाटक का केंद्रीय और प्रभावशाली पात्र बनाते हैं।
प्रश्न 26
*ध्रुवश्री' का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
( उत्तर सीमा : लगभग 100 शब्द ) 4
ध्रुवश्री नाटक की प्रमुख नारी पात्र है, जो साहस, संघर्ष और आत्मसम्मान का प्रतीक है। वह कलिंग की राजकुमारी है, जो अपने पिता की मृत्यु के बाद अपनी धरोहर वापस पाने के लिए संघर्ष करती है। उसका चरित्र दृढ़ निश्चय और स्वाभिमान से भरा है। वह अपने अधिकारों के लिए लड़ती है और किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानती। ध्रुवश्री में करुणा और ममता भी है, लेकिन वह अन्याय के सामने झुकती नहीं। उसकी बुद्धिमत्ता और नेतृत्व क्षमता उसे एक आदर्श नारी पात्र बनाती है। वह नाटक में स्त्री-शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतिनिधित्व करती है।
प्रश्न 27
स्वयं को बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामपुर की छात्रा सुनीता मानते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या को अनिवार्य विषयों के व्याख्याताओं के अभाव में नियमित अध्यापन की व्यवस्था करने के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए ।
( उत्तर सीमा : लगभग 100 शब्द ) 5
प्रार्थना-पत्र
सेवा में,
श्रीमती प्रधानाचार्या,
बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामपुर।
विषय: अनिवार्य विषयों के व्याख्याताओं के अभाव में नियमित अध्यापन की व्यवस्था हेतु प्रार्थना।
महोदया,
मैं सुनीता, आपके विद्यालय की कक्षा बारहवीं की छात्रा हूँ। मैं आपके ध्यान में यह तथ्य लाना चाहती हूँ कि हमारे विद्यालय में कई अनिवार्य विषयों जैसे गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के व्याख्याताओं की कमी है। इस कारण हमारी पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पाती है और हमें परीक्षा की तैयारी में कठिनाई हो रही है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इन विषयों के लिए योग्य व्याख्याताओं की नियुक्ति करवाकर नियमित अध्यापन की व्यवस्था करने की कृपा करें, ताकि हम अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रख सकें।
धन्यवाद।
आपकी आज्ञाकारी छात्रा,
सुनीता
कक्षा बारहवीं
बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामपुर
दिनांक: [दिनांक]
प्रश्न 27
(क) "श्वाँस ये तो समझो इतिहास बदलने वाला है।" प्रस्तुत पंक्ति का भाव विस्तार लगभग 50 शब्दों में कीजिए।
प्रस्तुत पंक्ति में कवि कहता है कि यह साँस (जीवन) इतिहास बदलने की क्षमता रखती है। अर्थात मनुष्य का प्रत्येक क्षण इतना महत्वपूर्ण है कि वह सम्पूर्ण इतिहास की दिशा बदल सकता है। यह जीवन की शक्ति और उसकी महत्ता को दर्शाता है।
(ख) निम्नलिखित अवतरण का संक्षेपण लगभग एक-तिहाई शब्दों में कीजिए:
नारी त्याग और तपस्या की मूर्ति है। नारी जीवन का मूल मंत्र है -- त्याग और उस मंत्र को सिद्ध करने की क्षमता उसे प्रदान की है, तपस्या ने। भारतीय संस्कृति में हमें नारी अनेक रूपों में क्रियाशील दिखाई देती है जिसमें कन्या रूप, पत्नी रूप, बहिन रूप, माता रूप आदि उल्लेखनीय हैं। वह अपने त्याग और तपस्या की पावन धारा सींचकर ही समाज को प्रगति के पथ पर अग्रसर करती है। उसका योगदान अवर्णनीय है। वह समाज की आधारशिला है।
संक्षेपण: नारी त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति है। वह कन्या, पत्नी, बहिन, माता आदि रूपों में समाज को त्याग की धारा से सींचकर प्रगति पथ पर ले जाती है। उसका योगदान अवर्णनीय है और वह समाज की आधारशिला है।
प्रश्न 28
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 50 शब्दों में कीजिए:
वस्तुत: मुझे और विवाह नहीं करना था। इस दृष्टि से मुझे तत्काल उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर देना चाहिए था, किन्तु मत्स्यराज जैसे राजा के प्रस्ताव का तिरस्कार मुझे प्रिय नहीं था। वैसे ही हम चाहते थे कि उनके वंश से हमारा घनिष्ठ सम्बन्ध हो। सम्बन्ध का ऐसा अवसर हम चूकना नहीं चाहते थे और तुम जानती हो कि मुझे अपनी वह शिष्या आत्मजा के समान प्रिय हो गई थी। मैं उसे स्वयं से दूर भी नहीं करना चाहता था और उसके लिए अच्छे से अच्छे वर की कामना भी करता था।
सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में वक्ता कहता है कि उसका विवाह न करने का निश्चय था, पर मत्स्यराज के प्रस्ताव को अस्वीकार करना उचित नहीं लगा। वह उनके वंश से संबंध चाहता था। साथ ही, अपनी शिष्या को पुत्रीवत् प्रिय मानने के कारण वह उसे दूर नहीं करना चाहता था और उसके लिए उत्तम वर की इच्छा रखता था।
29. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 50 शब्दों में कीजिए : (4 अंक)
श्वान के सिर हो,
चरण तो चाहता है |
भौंक ले कया सिंह
को वह डाँटता है ?
रोटियाँ खायी कि
साहस खो चुका है,
प्राणी हो पर प्राण से
वह जा चुका है ।
तुम न खेलो, ग्राम सिंहों में भवानी ।
विश्व की अभिमान मस्तानी जवानी |
सप्रसंग व्याख्या :
प्रस्तुत पद्यांश 'भवानी प्रसाद मिश्र' द्वारा रचित कविता 'ग्राम सिंहों में भवानी' से लिया गया है। इसमें कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति कुत्ते की तरह दूसरों के सामने सिर झुकाता है, वह सिंह (शक्तिशाली) को डाँटने का साहस नहीं कर सकता। रोटियाँ खाकर उसने अपना साहस खो दिया है, वह प्राणी होते हुए भी प्राणहीन हो चुका है। कवि युवाओं को ऐसे दासत्वपूर्ण जीवन से बचने की सीख देते हैं।
30. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए : (10 अंक)
- पर्यावरण प्रदूषण-कारण व निवारण
- बढ़ता भ्रष्टाचार-गिरती नैतिकता
- समाज निर्माण में नारी की भूमिका
- बेरोजगारी की समस्या
- राजस्थान के पर्यटन स्थल
नोट : विद्यार्थी उपरोक्त पाँच विषयों में से किसी एक पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखें। निबंध में प्रस्तावना, विषय-विस्तार और उपसंहार का समावेश होना चाहिए।