RBSE Class 12th 2013 (Supp.)-SS-16-2013 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2013
Subject (Supp.)-SS-16-2013
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th (Supp.)-SS-16-2013 2013 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2013

SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2013

संगीत — कण्ठ अथवा वाद्य
(MUSIC — VOCAL OR INSTRUMENTAL)

समय : 3 घण्टे     पूर्णाक : 24


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक Roll No. लिखें ।
    Candidate must first write his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं ।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें ।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

प्रश्न संख्या : 8 + 8 + 7     मुद्रित पृष्ठ संख्या : 7

SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I) (Supp.)

भाग - अ (गायन) / PART - A (VOCAL)

  1. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये :
    गमक, मुर्की, मूर्च्छना।

    Write short notes on the following : [1+1+1=3]

    गमक (Gamak): यह एक अलंकार है जिसमें स्वर को हिलाकर या कंपन करके गाया जाता है। यह राग की शोभा बढ़ाता है और स्वरों में लचीलापन लाता है।

    मुर्की (Murki): यह एक प्रकार का छोटा, तीव्र और सजावटी तान प्रयोग है। इसमें दो या तीन स्वरों को बहुत तेजी से और सुंदरता से गाया जाता है।

    मूर्च्छना (Murchhana): यह सप्तक के सात स्वरों के क्रम को बदलकर एक नया पैमाना बनाने की प्रक्रिया है। इसमें किसी भी स्वर से सप्तक शुरू किया जा सकता है।

  2. मध्यकालीन संगीत का संक्षिप्त इतिहास लिखिये।

    Write the brief history of music of Medieval period. [3]

    मध्यकालीन संगीत का इतिहास (लगभग 13वीं से 18वीं शताब्दी) भारतीय संगीत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस काल में संगीत ने मंदिरों से निकलकर दरबारों में प्रवेश किया। मुगल बादशाहों, विशेषकर अकबर के संरक्षण में तानसेन जैसे महान संगीतज्ञ हुए। इस काल में ख्याल, ध्रुपद, धमार जैसी गायन शैलियों का विकास हुआ। राग-रागिनी पद्धति को व्यवस्थित किया गया और संगीत ग्रंथों की रचना हुई। भक्ति आंदोलन ने संगीत को जन-जन तक पहुँचाया।

  3. राग बिहाग का सम्पूर्ण शास्त्रीय विवरण आरोह, अवरोह तथा पकड़ सहित लिखिये।

    Give the complete classical introduction of Rag Bihag with Aroha, Avaroha and Pakad. [3]

    राग बिहाग का परिचय:

    • थाट (Thaat): बिलावल
    • जाति (Jati): औड़व-संपूर्ण (आरोह में 5 स्वर, अवरोह में 7 स्वर)
    • वादी (Vadi): गंधार (G)
    • संवादी (Samvadi): निषाद (N)
    • समय (Time): रात्रि का दूसरा प्रहर
    • आरोह (Aroha): सा रे ग म प ध नि सां (स्वर: सा, रे, ग, म, प, ध, नि, सां)
    • अवरोह (Avaroha): सां नि ध प म ग रे सा (स्वर: सां, नि, ध, प, म, ग, रे, सा)
    • पकड़ (Pakad): ग म प ध नि ध प म ग रे सा
    • विशेषता: इसमें मध्यम (म) तीव्र (तेज) और शुद्ध दोनों रूपों में प्रयोग होता है। यह एक सुंदर और मधुर राग है।

निर्देश:

  • गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।
  • सितार, सरोद, वायलिन, दिलरुबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।
  • तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।

Candidates offering Vocal Music should attempt only the questions of Part - A. Candidates offering Sitar, Sarod, Violin, Dilruba or Esraj, Flute and Guitar should attempt only the questions of Part - B and candidates offering Tabla and Pakhawaj should attempt only the questions of Part-C.

उत्तर-पुस्तिका के मुखपृष्ठ पर विषय स्पष्ट रूप से लिखें।

Write your subject clearly on the cover page of the answer-book.

4. निम्नलिखित स्वर समूहों से राग पहचान कर नाम लिखें :

Identify the Rag from the given Swar Samuhas and name it :

  1. (i) सारे गम AT गम धप, मगरेसा ।
    (Sa Re Ga Ma Dha Pa, Ga Ma Dha Pa, Ma Ga Re Sa)

    राग (Rag): राग यमन (Rag Yaman)

    कारण (Reason): यह स्वर समूह राग यमन के आरोह-अवरोह (Sa Re Ga Ma Dha Pa, Ga Ma Dha Pa, Ma Ga Re Sa) से मेल खाता है, जिसमें तीव्र मध्यम (Ma) का प्रयोग होता है।

  2. (ii) साम मगप, मंपधप, मरेसा ।
    (Sa Ma Ma Ga Pa, Ma Pa Dha Pa, Ma Re Sa)

    राग (Rag): राग भूपाली (Rag Bhupali)

    कारण (Reason): यह स्वर समूह राग भूपाली के आरोह-अवरोह (Sa Re Ga Pa Dha Sa, Sa Dha Pa Ga Re Sa) से संबंधित है, जिसमें मध्यम (Ma) और निषाद (Ni) वर्जित हैं। यहाँ दिए गए स्वर (Sa Ma Ma Ga Pa, Ma Pa Dha Pa, Ma Re Sa) भूपाली के अवरोह में मध्यम के प्रयोग को दर्शाते हैं।


5. किसी राग का छोटे ख्याल का स्थायी तथा अन्तरा स्वरलिपि सहित लिखिये ।

Write the Sthai and Antara of Chhota Khyal of any Rag with notations.

राग (Rag): राग यमन (Rag Yaman) – ताल: तीनताल (Teental)

स्थायी (Sthai):

सा रे ग म प ध नि सां | सां नि ध प म ग रे सा ||
(Sa Re Ga Ma Pa Dha Ni Sa | Sa Ni Dha Pa Ma Ga Re Sa)

अन्तरा (Antara):

ग म प ध नि सां रे सां | नि ध प म ग रे सा ||
(Ga Ma Pa Dha Ni Sa Re Sa | Ni Dha Pa Ma Ga Re Sa)

बोल (Bol): स्थायी: "आज मोहे पिया मिले" | अन्तरा: "सखी री मैं तो"


6. ताल तिलवाड़ा का परिचय बोल, ठाह तथा दुगुन सहित लिपिबद्ध करें ।

Give the introduction of Tal Tilwara with Bol, Thah and Dugun.

ताल (Tal): तिलवाड़ा (Tilwara)

मात्राएँ (Matras): 16 मात्राएँ (16 beats)

विभाग (Vibhag): 4 विभाग (4+4+4+4)

ताली-खाली (Tali-Khali): ताली 1, 5, 13; खाली 9

बोल (Bol): धा ति ति कट | धा ति ति कट | धा ति ति कट | धा ति ति कट ||

ठाह (Thah): प्रति मात्रा एक बोल (धा, ति, ति, कट, ...)

दुगुन (Dugun): प्रति मात्रा दो बोल (धा-धा, ति-ति, ति-ति, कट-कट, ...)

लिपि (Notation):

मात्रा (Matra) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16
बोल (Bol) धा ति ति कट धा ति ति कट धा ति ति कट धा ति ति कट
ताली/खाली ताली ताली खाली ताली

7. उस्ताज फैयाज खां अथवा उस्ताद अब्दुल करीम खां का जीवन परिचय विस्तार से लिखें ।

Write the life sketch of Ustad Fayaj Khan OR Ustad Abdul Karim Khan in detail. [3]

उस्ताद फैयाज खां का जीवन परिचय:

उस्ताद फैयाज खां (1886-1950) आगरा घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे। उनका जन्म आगरा में हुआ था। उन्होंने अपने पिता उस्ताद नजीर खां और चाचा उस्ताद कल्लन खां से संगीत की शिक्षा ली। वे अपनी गायकी में बड़े ख्याल, तराने और ठुमरी के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी आवाज में गहराई और भावपूर्णता थी। उन्होंने कई शिष्यों को संगीत की शिक्षा दी और भारतीय शास्त्रीय संगीत को समृद्ध किया।

उस्ताद अब्दुल करीम खां का जीवन परिचय:

उस्ताद अब्दुल करीम खां (1872-1937) किराना घराने के महान गायक थे। उनका जन्म किराना, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपने पिता उस्ताद कल्लन खां और चाचा उस्ताद जहांगीर खां से संगीत सीखा। वे अपनी मीठी आवाज और सुरीली गायकी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने ठुमरी और भजन गायन में विशेष योगदान दिया। उनके शिष्यों में सवाई गंधर्व और भीमसेन जोशी प्रमुख हैं।

8. घरानों के सम्बंध में आप क्या जानते हैं ? संक्षेप में लिखें ।

What do you know about Gharanas ? Write in short. [3]

घरानों के बारे में संक्षिप्त जानकारी:

घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक परंपरा या शैली है, जो गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती है। प्रत्येक घराने की अपनी विशिष्ट गायन या वादन शैली, रागों की प्रस्तुति और तकनीक होती है। प्रमुख घरानों में आगरा, ग्वालियर, किराना, जयपुर, पंजाब, मैहर आदि शामिल हैं। घराने संगीत की शुद्धता और विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


भाग-ब (PART - B)

(सितार / सरोद / वायलिन / दिलरुबा अथवा इसराज / बांसुरी / गिटार)

1. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें :

Write short notes on the following: [1+1+1=3]

  • अलंकार (Alankar)
  • क्रिंतन (Krintan)
  • जमजमा (Jamjama)

अलंकार: अलंकार संगीत में स्वरों के क्रमबद्ध समूह को कहते हैं, जो राग के स्वरूप को स्पष्ट करने और अभ्यास के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये आरोह और अवरोह में विभिन्न पैटर्न में बजाए या गाए जाते हैं।

क्रिंतन: क्रिंतन एक वादन तकनीक है, जिसमें तार को खींचकर छोड़ा जाता है, जिससे एक विशेष प्रकार की मीठी ध्वनि उत्पन्न होती है। इसका उपयोग मुख्यतः सितार और सरोद जैसे वाद्यों में किया जाता है।

जमजमा: जमजमा एक प्रकार का अलंकार या मीड़ है, जिसमें स्वरों को एक विशेष लय और गति में बजाया जाता है। यह वादन में सुंदरता और प्रभाव उत्पन्न करता है।

2. संगीत पारिजात के संदर्भ में पंडित वी. एन. भातखण्डे का योगदान बताइये ।

Write the contribution of Pt. V. N. Bhatkhande in the context of Sangeet Parijat. [3]

पंडित वी. एन. भातखण्डे का योगदान:

पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे (1860-1936) ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 'संगीत पारिजात' नामक ग्रंथ का संपादन और प्रकाशन किया, जिसमें रागों के वर्गीकरण और सिद्धांतों को स्पष्ट किया गया। उन्होंने रागों को थाट प्रणाली में बांटा, जो आज भी प्रचलित है। उनके कार्य से संगीत शिक्षा में एकरूपता आई और संगीत के अध्ययन को वैज्ञानिक आधार मिला।

SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (ए & I) (Supp.) | SS - 4I6] - 46

3. राग भीमपलासी का पूर्ण परिचय आरोह, अवरोह तथा पकड़ सहित लिखिये।

Give the complete introduction of Rag Bhimpalasi with Aroha, Avaroha and Pakad.

राग भीमपलासी का परिचय:

  • थाट: काफी
  • जाति: षाडव-षाडव (आरोह में 6, अवरोह में 6 स्वर)
  • वादी स्वर: म (मध्यम)
  • संवादी स्वर: सा (षडज)
  • आरोह: नि सा ग म प नि सां
  • अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा
  • पकड़: नि सा ग म प, म ग रे सा
  • समय: दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक
  • विशेष: इसमें रे और ध कोमल तथा बाकी स्वर शुद्ध होते हैं। गंधार पर बहुत जोर दिया जाता है।

4. अपने वाद्य का चित्र सहित पूर्ण परिचय लिखिये।

Give complete introduction of your instrument with sketch.

वाद्य का परिचय (उदाहरण: तबला):

तबला एक प्रमुख भारतीय ताल वाद्य है। इसमें दो भाग होते हैं:

  • दायाँ तबला (दया): लकड़ी का बना होता है, जिसका मुख चमड़े से मढ़ा होता है। इसके बीच में काली स्याही (सियाही) लगी होती है।
  • बायाँ तबला (बायाँ): धातु या मिट्टी का बना होता है, जिसका मुख चौड़ा होता है।

चित्र: (यहाँ एक सरल रेखाचित्र दर्शाया गया है)

    दायाँ तबला          बायाँ तबला
    ┌─────┐              ┌─────┐
    │  ●  │              │     │
    │     │              │     │
    └─────┘              └─────┘

बोल: ता, धा, तिन, ना, कट, गे आदि।

5. निम्नलिखित स्वर समूहों से राग पहचान कर नाम लिखें:

Identify the Raag from the given Swara Samuhas and name it:

  1. (क) निसाम, मग, पम, गरेसा (NisaMa, MaGa, Pa Ma, Ga Re Sa)

    राग: भीमपलासी

    कारण: यह स्वर समूह राग भीमपलासी की पकड़ (नि सा ग म प, म ग रे सा) से मेल खाता है।

  2. (ख) गम, धप मग, रेसा (GaMa, Dha Pa Ma Ga, Re Sa)

    राग: भीमपलासी

    कारण: यह स्वर समूह भी राग भीमपलासी के अवरोह (सां नि ध प म ग रे सा) का भाग है।

6. झपताल की स्वरलिपि ठाह तथा दुगुन सहित लिखिये।

Write the notation of tal Jhaptal with Thah and Dugun.

झपताल का परिचय:

  • मात्राएँ: 10
  • विभाग: 2+3+2+3
  • ताली-खाली: ताली (1), खाली (3), ताली (5), ताली (8)
  • सम: पहली मात्रा

ठाह (थाह) स्वरलिपि:

मात्रा 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
बोल धिं ना धिं धिं ना ती ना धिं धिं ना
ताली/खाली ताली खाली ताली ताली

दुगुन स्वरलिपि (प्रति मात्रा दो बोल):

मात्रा 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10
बोल धिंना धिंधिं नाती नाधिं धिंना धिंधिं नाती नाधिं धिंना धिंधिं

स्पष्टीकरण: दुगुन में प्रत्येक मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं, जिससे ताल की गति दोगुनी हो जाती है।

7. प्रातःकालीन गायी व बजायी जाने वाली राग के आरोह, अवरोह तथा पकड़ लिखिये |

Write the Aroha, Avaroha and Pakad of a Rag sung and played in early morning.

राग भैरव (Rag Bhairav) – प्रातःकालीन राग

  • आरोह (Aroha): सा रे ग म प ध नि सां
  • अवरोह (Avaroha): सां नि ध प म ग रे सा
  • पकड़ (Pakad): ग म ध प म ग रे सा

व्याख्या: यह राग सुबह के समय गाया-बजाया जाता है। इसमें रे और ध को कोमल (क) स्वर माना जाता है, जो इसे गंभीर और भक्तिपूर्ण स्वरूप देते हैं।

8. अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक संगीतज्ञ की जीवनी व योगदान लिखिये |

Write the life sketch and contribution of any musician according to your syllabus.

तानसेन (Tansen) – जीवनी और योगदान

तानसेन (लगभग 1500–1586) मुगल सम्राट अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। उनका जन्म ग्वालियर के पास हुआ था और उनके गुरु स्वामी हरिदास थे। तानसेन को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का जनक माना जाता है। उन्होंने राग दरबारी, राग मियाँ की मल्हार, और राग मियाँ की तोड़ी जैसे कई रागों की रचना की। उनका योगदान संगीत को दरबारी कला से जन-सामान्य तक पहुँचाने में रहा।


भाग - स ( तबला / पखावज )

PART - C ( Tabla / Pakhawaj )

1. तीनताल व तिलवाड़ा में तुलना कीजिये |

Compare between Teental and Tilwara.

विशेषता तीनताल (Teental) तिलवाड़ा (Tilwara)
मात्राएँ 16 मात्राएँ (4 विभाग, प्रत्येक में 4 मात्राएँ) 16 मात्राएँ (4 विभाग, प्रत्येक में 4 मात्राएँ)
ताली-खाली ताली: 1, 5, 13; खाली: 9 ताली: 1, 5, 9, 13; कोई खाली नहीं
लय मध्यम लय में प्रचलित धीमी लय (विलंबित) में बजाया जाता है
प्रयोग अत्यधिक लोकप्रिय, अधिकांश शैलियों में मुख्यतः ध्रुपद शैली में

व्याख्या: दोनों 16 मात्राओं के ताल हैं, लेकिन तिलवाड़ा में खाली नहीं होता और यह धीमी लय में बजाया जाता है, जबकि तीनताल में खाली (9वीं मात्रा) होता है और यह मध्यम लय में प्रचलित है।

2. दुगुन व चौगुन में झपताल की लयकारी लिखिये |

Write the Layakari of Jhaptal in Dugun and Chaugun.

झपताल (Jhaptal): 10 मात्राएँ (2+3+2+3) – ताली: 1, 3, 8; खाली: 6

  • दुगुन (Dugun) – दोगुनी गति: प्रति मात्रा में 2 बोल। उदाहरण: धिन ना धिन धा धिन ना तीट किट धा धिन ना धिन धा धिन ना तीट किट धा (10 मात्राओं में 20 बोल)
  • चौगुन (Chaugun) – चौगुनी गति: प्रति मात्रा में 4 बोल। उदाहरण: धिन ना धिन धा धिन ना तीट किट धा धिन ना धिन धा धिन ना तीट किट धा (10 मात्राओं में 40 बोल)

व्याख्या: दुगुन में मूल ताल की अपेक्षा दोगुनी गति से बोल बोले जाते हैं, जबकि चौगुन में चौगुनी गति से। यह लयकारी ताल के विभिन्न प्रकारों को समझने में सहायक है।

3. प्राचीन भारतीय संगीत का इतिहास संक्षेप में लिखिये |

Write in brief the history of ancient Indian Music.

प्राचीन भारतीय संगीत का इतिहास वैदिक काल से शुरू होता है। वेदों में सामगान (सामवेद) का उल्लेख मिलता है, जहाँ स्वरों का प्रयोग किया गया। बाद में, नाट्यशास्त्र (भरतमुनि) में संगीत के सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन हुआ, जिसमें राग, ताल और स्वरों का वर्गीकरण किया गया। मध्यकाल में, संगीत रत्नाकर (शार्ङ्गदेव) जैसे ग्रंथों ने संगीत को और विकसित किया। प्राचीन भारतीय संगीत मुख्यतः धार्मिक और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग होता था, और इसमें वीणा, मृदंगम जैसे वाद्यों का प्रचलन था।

4. ताल धमार को दुगुन तथा चौगुन सहित लिखिये ।

Write tal Dhamar with dugun and chaugun. [2+2]

ताल धमार (Tal Dhamar): 14 मात्राओं का ताल है। इसके बोल इस प्रकार हैं:

ठेका: धा | धीट | तिट | कट | गदी | गेन | तेट | तिट | कट | गदी | गेन | धा | धीट | तिट | कट | गदी | गेन | तेट | तिट | कट | गदी | गेन |

दुगुन (Dugun): प्रति मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं। उदाहरण: धाधी | टतिट | कटग | दीगे | नते | टतिट | कटग | दीगे | नधा | धीट | तिट | कटग | दीगे | नते | टतिट | कटग | दीगे | न

चौगुन (Chaugun): प्रति मात्रा में चार बोल बोले जाते हैं। उदाहरण: धाधीटतिट | कटगदीगेन | तेटतिटकट | गदीगेनधा | धीटतिटकट | गदीगेनते | टतिटकटग | दीगेनधाधी | टतिटकटग | दीगेनतेट | तिटकटगदी | गेनधाधीट | तिटकटगदी | गेनतेटतिट | कटगदीगेन |

5. चौताल में दो टुकड़े लिखिये ।

Write two tukdas in Choutal. [3]

चौताल (Choutal): 12 मात्राओं का ताल है। इसके बोल: धा | धा | दी | ता | किट | धा | दी | ता | तिट | कट | गदी | गेन |

टुकड़ा 1: धा धा दी ता किट धा | दी ता तिट कट गदी गेन ||

टुकड़ा 2: ता किट धा दी ता तिट | कट गदी गेन धा धा दी ||

6. परवत सिंह अथवा नत्थन खां की जीवनी लिखिये ।

Write the life history of Parwat Singh OR Natthan Khan. [3]

परवत सिंह (Parwat Singh): प्रसिद्ध पखावज वादक थे। इनका जन्म 19वीं शताब्दी में हुआ। ये बनारस घराने से संबंधित थे। इन्होंने पखावज वादन में नई शैली विकसित की और कई शिष्य तैयार किए।

नत्थन खां (Natthan Khan): प्रसिद्ध सितार वादक थे। ये इंदौर घराने से संबंधित थे। इनका जन्म 19वीं शताब्दी में हुआ। इन्होंने सितार वादन में मीड और गमक का विशेष प्रयोग किया। इनके शिष्यों ने संगीत को आगे बढ़ाया।

7. लयकारी से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित लिखिये ।

What do you understand by layakaris ? Explain with example. [4]

लयकारी (Layakari): ताल की मात्राओं को विभिन्न गतियों (दुगुन, तिगुन, चौगुन आदि) में बांटकर बोल बोलने की कला को लयकारी कहते हैं। यह ताल वादन में लय की विविधता दिखाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

उदाहरण: तीन ताल (16 मात्राएं) में:

  • सामान्य (थाह): धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा |
  • दुगुन (दोगुनी गति): धाधिं | धिंधा | धाधिं | धिंधा | धातिं | तिंता | ताधिं | धिंधा |
  • चौगुन (चौगुनी गति): धाधिंधिंधा | धाधिंधिंधा | धातिंतिंता | ताधिंधिंधा |

इस प्रकार लयकारी में मूल बोलों को तोड़कर या जोड़कर नई लयबद्ध रचनाएं बनाई जाती हैं।