RBSE Class 12th 2013 -SS-01-2013 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2013 |
| Subject | -SS-01-2013 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2013 -SS-01-2013
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Rajasthan Board Class 12th -SS-01-2013 2013 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2013
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2013
हिन्दी (अनिवार्य)
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
- जिस प्रश्न के आ, ब, स, द भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
No. of Questions — 4 SS—01—Hindi (C) (Supp.)
No. of Printed Pages — 11
SS—01—Hindi (C) (Supp.) [SS—40] [Turn over
अपठित काव्यांश
देखकर बाधा विविध, बहु घबराते नहीं,
रह भरोसे भाग के, दुःख भोग पछताते नहीं
काम कितना ही कठिन हो, किन्तु उकताते नहीं
भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं ।
हो गए इक आन में, उनके बुरे दिन भी भले
सब जगह, सब काल में, वे ही मिले फूले-फले
चिलचिलाती धूप को जो चाँदनी देवे बना
काम पड़ने पर करें जो शेर का भी सामना
जो कि हँस-हँस कर चबा लेते हैं लोहे का चना
है कठिन कुछ भी नहीं जिनके है जी में यह ठना
कितने ही चले पर वे कभी थकते नहीं
कौन-सी है गाँठ जिसको खोल वे सकते नहीं ।
काम को आरम्भ करके यों नहीं जो छोड़ते
सामना करके नहीं जो, भूलकर मुँह मोड़ते
जो गगन के फूल बातों से, वृथा नहीं तोड़ते
बन गया हीरा उन्हीं के हाथ से है कारबन
काँच को करके दिखा देते हैं वे उज्ज्वल रतन ।
प्रश्न एवं उत्तर
(क) वीरों की दो विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर: वीरों की दो विशेषताएँ हैं – (1) वे विविध प्रकार की बाधाओं को देखकर भी घबराते नहीं हैं, और (2) वे कठिन से कठिन काम को भी करने से नहीं उकताते हैं।
(ख) किस प्रकार के व्यक्ति जीवन में पश्चाताप करते हैं ?
उत्तर: जो व्यक्ति भाग्य के भरोसे रहते हैं और दुःख भोगते हैं, वे जीवन में पश्चाताप करते हैं। वे अपने कर्मों पर भरोसा नहीं करते और परिस्थितियों से हार मान लेते हैं।
(ग) “कौन-सी है गाँठ जिसको खोल वे सकते नहीं” पंक्ति का आशय लिखिए ।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि वीर पुरुषों के लिए कोई भी समस्या इतनी कठिन नहीं होती जिसे वे हल न कर सकें। वे हर मुश्किल को सुलझाने में सक्षम होते हैं।
(घ) “काम को आरम्भ करके यों नहीं जो छोड़ते” इस पंक्ति में निहित सन्देश लिखिए ।
उत्तर: इस पंक्ति में निहित सन्देश है कि किसी भी कार्य को शुरू करने के बाद उसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। दृढ़ निश्चय और लगन से काम पूरा करना चाहिए, तभी सफलता मिलती है।
2. निम्न अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द)
आधुनिक मानव समाज में एक ओर विज्ञान को भी चकित कर देने वाली उपलब्धियों से निरंतर विकास हो रहा है, तो दूसरी ओर मानव मूल्यों का हास होने से समस्या उत्तरोत्तर बढ़ती जा रही है। अनेक सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का शिकार आज का मनुष्य विवेक और ईमानदारी को त्याग कर भौतिक स्तर से ऊँचा उठने का प्रयत्न कर रहा है। वह सफलता पाने की लालसा में उचित और अनुचित की चिंता नहीं करता। उसे तो बस साध्य को पाने की प्रबल इच्छा रहती है। ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए भयंकर अपराध करने में भी संकोच नहीं करता। वह इनके नित नये-नये रूपों की खोज करने में अपनी बुद्धि का अपव्यय कर रहा है। आज हमारे सामने यह प्रमुख समस्या है कि इस अपराध वृद्धि पर किस प्रकार रोक लगाई जाए।
-
मानव-जीवन में समस्याएँ किस कारण बढ़ रही हैं? (2 अंक)
मानव-जीवन में समस्याएँ मानव मूल्यों के हास के कारण बढ़ रही हैं। मनुष्य विवेक और ईमानदारी को त्यागकर केवल भौतिक उन्नति की ओर बढ़ रहा है, जिससे सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
-
भयंकर अपराध क्यों किए जा रहे हैं? (2 अंक)
भयंकर अपराध ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए किए जा रहे हैं। मनुष्य सफलता पाने की लालसा में उचित-अनुचित का विचार नहीं करता और साध्य प्राप्ति के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है।
-
"सामाजिक" में प्रयुक्त मूल शब्द व प्रत्यय लिखिए। (2 अंक)
मूल शब्द: समाज
प्रत्यय: इक -
गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। (2 अंक)
उचित शीर्षक: मानव मूल्यों का हास और अपराध वृद्धि अथवा आधुनिक समाज की समस्याएँ
3. निम्न विषयों में से किसी एक पर 450 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए :
निर्देश: निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर 450 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए।
- भ्रष्टाचार के रूप अनेक
- युवकों में बढ़ती स्वच्छन्दता
- इन्टरनेट से लाभ और हानियाँ
- समाचार पत्रों की उपयोगिता
4. अपने शहर के 'वाटर वर्क्स की दुर्दशा' अथवा 'एक आँखों देखी दुर्घटना' पर समाचार पत्र को भेजने हेतु एक रिपोर्ट लिखिए। (उत्तर-सीमा 100 शब्द)
रिपोर्ट: वाटर वर्क्स की दुर्दशा
दिनांक: 15 मार्च 2013
स्थान: जयपुर
हमारे शहर के वाटर वर्क्स की हालत अत्यंत दयनीय है। पिछले कई महीनों से यहाँ पानी की आपूर्ति अनियमित है। पाइपलाइनें टूटी हुई हैं, जिससे पानी बर्बाद हो रहा है। मशीनरी पुरानी हो चुकी है और मरम्मत नहीं हो रही है। कर्मचारियों की लापरवाही के कारण कई क्षेत्रों में पानी नहीं पहुँच रहा है। नागरिकों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। प्रशासन को तुरंत ध्यान देना चाहिए और वाटर वर्क्स की मरम्मत करवानी चाहिए ताकि लोगों को स्वच्छ पानी मिल सके।
प्रेषक: एक चिंतित नागरिक
5. निम्न में से किसी एक विषय पर आलेख लिखिए : (उत्तर-सीमा 100 शब्द)
- पारंपरिक जल स्रोत
- पेट्रोल की बढ़ती कीमतें
- जीवन में मोबाइल फोन का महत्त्व
6. निम्न विषयों में से किसी एक पर फीचर लिखिए : (उत्तर-सीमा 100 शब्द)
- महानगरों का जीवन
- विज्ञापन की दुनिया
- स्कूल का वृक्षारोपण कार्यक्रम
- गाँवों में साक्षरता अभियान
55-.--07--म्वां (C) (Supp.) [SS - 40I]
7. निम्न पठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द)
प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर
कि जैसे धुल गई हो
या पर या लाल खड़िया चाक
मल दी हो किसी ने
नील जल में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।
जादू टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है।
-
कवि ने नीले शंख की तुलना किस-से की है?
कवि ने नीले शंख की तुलना प्रातःकाल के आकाश से की है। कवि कहता है कि सुबह का आकाश बिल्कुल नीला था, जैसे कोई शंख हो।
-
चौके के गीले होने का प्रतीकार्थ लिखिए।
चौके के गीले होने का प्रतीकार्थ है कि भोर का आकाश बादलों या ओस से भीगा हुआ है, जो ताजगी और नवीनता का संकेत देता है। यह प्रकृति की सुंदरता और कोमलता को दर्शाता है।
-
कवि “काली सिल” और “लाल केसर” के माध्यम से किस दृश्य का चित्रण करना चाहता है?
कवि “काली सिल” और “लाल केसर” के माध्यम से सूर्योदय से पहले के आकाश का दृश्य चित्रित करना चाहता है। काली सिल अंधकार का प्रतीक है, जिस पर लाल केसर (सूर्य की पहली किरणें) बिखरी हुई हैं, जो प्रकाश और अंधकार के मिलन को दर्शाता है।
-
“जादू टूटता है इस उषा का अब” इस पंक्ति का आशय लिखिए।
इस पंक्ति का आशय है कि सूर्योदय होने पर भोर का मोहक और रहस्यमयी वातावरण समाप्त हो जाता है। उषा का जादू टूट जाता है क्योंकि सूर्य के प्रकाश में सब कुछ स्पष्ट हो जाता है, और वह अलौकिक सौंदर्य लुप्त हो जाता है।
अथवा
55-.-07--मावां (C) (Supp.) [SS - 467] | Turn over
निम्न पठित काव्यांश को ध्यान-पूर्वक पढ़ कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द)
सबसे तेज़ बौछारें गयीं भादो गया
सवेरा हुआ
खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा
शरद आया पुलों को पार करते हुए
अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए
घंटी बजाते हुए जोर-जोर से
चमकीले इशारों से बुलाते हुए और
आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए
कि पतंग ऊपर उठ सके --
दुनिया की सबसे हलकी और रंगीन चीज़ उड़ सके
दुनिया का सबसे पतला कागज उड़ सके -
बाँस की सबसे पतली कमानी उड़ सके -
कि शुरू हो सके सीटियों, किलकारियों और
तितलियों की इतनी नाजुक दुनिया ।
-
(अ) कवि ने प्रातःकाल की तुलना किस-से की है ?
कवि ने प्रातःकाल की तुलना खरगोश की आँखों से की है। उनके अनुसार सवेरा खरगोश की आँखों जैसा लाल होता है।
-
(ब) कवि के अनुसार शरद ऋतु का आगमन किस तरह होता है ? लिखिए।
कवि के अनुसार शरद ऋतु का आगमन पुलों को पार करते हुए, नई चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए, घंटी बजाते हुए और चमकीले इशारों से बुलाते हुए होता है।
-
(स) आकाश को इतना मुलायम किसने बनाया और क्यों ?
शरद ऋतु ने आकाश को मुलायम बनाया ताकि पतंग ऊपर उठ सके। इससे दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज़, सबसे पतला कागज और बाँस की सबसे पतली कमानी (पतंग) उड़ सके।
-
(द) “तितलियों की इतनी नाजुक दुनिया!” पंक्ति का आशय लिखिए।
इस पंक्ति का आशय है कि शरद ऋतु के आगमन पर सीटियों, किलकारियों और तितलियों की एक नाजुक, सुंदर और कोमल दुनिया शुरू होती है। यह बचपन, उल्लास और प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक है।
8. निम्न पठित काव्यांश को पढ़ कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द)
नभ में पाँती-बँधे बगुलों के पंख,
चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखें ।
कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया ।
दा दा जाती मुझे बाँध निज माया से ।
उसे कोई तनिक रोक |
वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखें
नभ में पाँती-बँधी बगुलों की पाँखें ।
(अ) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि द्वारा वर्णित भावों को समझाइए ।
कवि ने प्रकृति के सौंदर्य का मनोहारी वर्णन किया है। आकाश में पंक्तिबद्ध उड़ते बगुलों के पंख और कजरारे बादलों की छाया कवि का मन मोह लेते हैं। साँझ की श्वेत काया और प्रकृति की माया कवि को अपनी ओर खींच लेती है। कवि कहता है कि यह सौंदर्य उसकी आँखें चुरा ले जाता है, अर्थात् वह इस दृश्य को देखते ही रहना चाहता है।
(ब) उपर्युक्त काव्यांश के शिल्प-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए ।
इस काव्यांश में चित्रात्मक शैली का प्रयोग हुआ है। 'नभ में पाँती-बँधी बगुलों की पाँखें' जैसे शब्दों से सजीव चित्र उभरता है। 'कजरारे बादल', 'सतेज श्वेत काया' में विशेषणों का सुंदर प्रयोग है। 'चुराए लिए जातीं मेरी आँखें' में मानवीकरण अलंकार है। लयात्मकता और प्रवाहमयी भाषा काव्य को प्रभावशाली बनाती है।
अथवा
(उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द)
धूत कहो, अवधूत कहो, रजपूत कहो, जोलहा कहौ कोऊ ।
काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहू की जाति बिगार न सोऊ ॥
तुलसी सरनाम गुलामु है राम को, जाको रुचै सो कहै कछु ओऊ ।
माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ ॥
(अ) उपर्युक्त पंक्तियों का भाव-सौन्दर्य लिखिए ।
इन पंक्तियों में तुलसीदास जी ने समाज की संकीर्ण जाति-व्यवस्था का विरोध किया है। वे कहते हैं कि कोई उन्हें धूत, अवधूत, राजपूत या जुलाहा कहे, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वे किसी की बेटी-बेटे से विवाह नहीं करेंगे और न ही किसी की जाति बिगाड़ेंगे। वे तो केवल राम के गुलाम हैं, भिक्षा माँगकर खाएँगे और मस्जिद में सोएँगे। यह उनकी वैराग्य भावना और सामाजिक बंधनों से मुक्ति को दर्शाता है।
(ब) उपर्युक्त काव्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए ।
इस काव्यांश में सधुक्कड़ी भाषा का प्रयोग हुआ है, जो सरल और प्रभावशाली है। 'धूत', 'अवधूत', 'रजपूत', 'जोलहा' शब्दों की पुनरावृत्ति से लय उत्पन्न होती है। 'माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो' में अनुप्रास अलंकार है। तुलसीदास जी ने व्यंग्य और विनोद के माध्यम से गंभीर सामाजिक संदेश दिया है। काव्य में सहजता, स्पष्टता और भक्ति भावना का अद्भुत समन्वय है।
9. पठित कविताओं की विषय-वस्तु से सम्बन्धित निम्न प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द)
-
(अ) “लक्ष्मण-मूर्च्छा” प्रसंग में राम की व्याकुलता को लिखिए।
राम लक्ष्मण की मूर्च्छा पर अत्यधिक व्याकुल हो जाते हैं। वे विलाप करते हैं, लक्ष्मण को बार-बार पुकारते हैं और उनके बिना जीवन को अर्थहीन मानते हुए अत्यंत दुखी होते हैं।
-
(ब) “बादल राग” कविता में निराला की सहानुभूति किस वर्ग की तरफ है ? लिखिए।
निराला की सहानुभूति शोषित, पीड़ित और उत्पीड़ित वर्ग की तरफ है। वे बादल से क्रांति लाने और इन वंचितों के दुखों को दूर करने का आह्वान करते हैं।
-
(स) “कैमरे में बंद अपाहिज” कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।
इस कविता का प्रतिपाद्य मीडिया की संवेदनहीनता और मानवीय पीड़ा के प्रति उसकी उदासीनता है। कवि दिखाता है कि कैसे एक अपाहिज की पीड़ा को महज एक दृश्य बनाकर प्रस्तुत किया जाता है।
10. निम्न पठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द)
लेकिन इस बार मैंने साफ इनकार कर दिया। नहीं फेंकना है मुझे बाल्टी भर-भर कर पानी इस गंदी मेढ़क-मण्डली पर। जब जीजी बाल्टी भर कर पानी ले गई उनके बूढ़े पाँव डगमगा रहे थे, हाथ काँप रहे थे, तब भी मैं अलग मुँह फुलाए खड़ा रहा। शाम को उन्होंने लड्डू-मठरी खाने को दिए तो मैंने उन्हें हाथ से अलग खिसका दिया। मुँह फेर कर बैठ गया, जीजी से बोला भी नहीं। पहले वे भी तमतमाई, लेकिन ज्यादा देर तक उनसे गुस्सा नहीं रहा गया। पास आकर मेरा सर अपनी गोद में लेकर बोलीं, “देख भइया रूठ मत | मेरी बात सुन। यह सब अंधविश्वास नहीं है। हम इन्हें पानी नहीं देंगे तो इन्द्र भगवान हमें पानी कैसे देंगे?” मैं कुछ नहीं बोला। फिर जीजी बोली। “तू इसे पानी की बरबादी समझता है पर यह बरबादी नहीं है। यह पानी का चढ़ाना है, जो चीज मनुष्य पाना चाहता है उसे पहले देगा नहीं तो पाएगा कैसे?”
-
(अ) लेखक ने किस बात के लिए इनकार किया ?
लेखक ने मेंढकों के समूह पर बाल्टी भर-भर कर पानी फेंकने से इनकार किया। वह इसे पानी की बर्बादी और अंधविश्वास मानता था, इसलिए उसने ऐसा करने से साफ मना कर दिया।
-
(ब) “मेढ़क-मण्डली” शब्द किनके लिए प्रयुक्त हुआ है ?
“मेढ़क-मण्डली” शब्द मेंढकों के एक समूह के लिए प्रयुक्त हुआ है। लेखक ने इसे 'गंदी' कहकर अपनी अरुचि व्यक्त की है, क्योंकि वह इन पर पानी डालने को अनावश्यक समझता था।
-
(स) जीजी ने मेढ़क मण्डली पर पानी फेंकने के पक्ष में क्या तर्क दिए ?
जीजी ने तर्क दिया कि यह अंधविश्वास नहीं बल्कि एक परंपरा है। उन्होंने कहा कि यदि हम मेंढकों को पानी नहीं देंगे तो इंद्र भगवान हमें पानी नहीं देंगे। उनका मानना था कि जो चीज पानी चाहता है, उसे पहले देना पड़ता है, तभी वह प्राप्त होती है।
अथवा
55-.-07--शवां (C) (Supp.) [SS - 40I]
निम्न पठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
( उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द )
शिरीष के तरु सचमुच पक्के अवधूत की भाँति मेरे मन में ऐसी तरंगें जगा देता है जो ऊपर की ओर उठती रहती हैं । इस चिलकती धूप में इतना-इतना सरस वह कैसे बना रहता है ? क्या ये बाह्य परिवर्तन-धूप, वर्षा, आँधी, लू-अपने आप में सत्य नहीं हैं ? हमारे देश के ऊपर से जो यह मार-काट, अग्निदाह, लूट-पाट, खून-खच्चर का बवंडर बह गया है, उसके भीतर भी क्या स्थिर रहा जा सकता है ? शिरीष रह सका है । अपने देश का एक बूढ़ा रह सका था | क्यों मेरा मन पूछता है कि ऐसा क्यों संभव हुआ ? क्योंकि शिरीष भी अवधूत है । शिरीष वायुमंडल से रस खींचकर इतना कोमल और इतना कठोर है । गाँधी भी वायुमंडल से रस खींचकर इतना कोमल और इतना कठोर हो सका था । मैं जब-जब शिरीष की ओर देखता हूँ तब-तब हूक उठती है -- हाय, वह अवधूत आज कहाँ है !
-
लेखक ने शिरीष की तुलना अवधूत से क्यों की है ? (2 अंक)
लेखक ने शिरीष की तुलना अवधूत से इसलिए की है क्योंकि शिरीष वायुमंडल से रस खींचकर कोमल और कठोर दोनों गुण धारण करता है। वह प्रतिकूल परिस्थितियों (धूप, वर्षा, आँधी, लू) में भी स्थिर और सरस बना रहता है, ठीक वैसे ही जैसे अवधूत सांसारिक कष्टों से अप्रभावित रहता है।
-
शिरीष के फलों एवं फूलों में क्या अन्तर है ? (2 अंक)
गद्यांश में शिरीष के फलों और फूलों के अंतर का सीधा उल्लेख नहीं है। हालांकि, शिरीष वृक्ष के सामान्य ज्ञान के अनुसार, शिरीष के फूल कोमल, सुगंधित और गुच्छों में खिलते हैं, जबकि फल फलियों के रूप में लंबे, चपटे और कठोर होते हैं। यह कोमलता और कठोरता का विरोधाभास दर्शाता है।
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गाँधी और शिरीष में क्या समानता दिखाई गई है ? (2 अंक)
गाँधी और शिरीष में यह समानता दिखाई गई है कि दोनों वायुमंडल से रस खींचकर कोमल और कठोर दोनों गुण धारण कर सके। शिरीष प्रतिकूल परिस्थितियों में स्थिर रहता है, वैसे ही गाँधी जी भी देश की कठिन परिस्थितियों में अडिग रहे। दोनों में कोमलता (सहानुभूति) और कठोरता (दृढ़ता) का अद्भुत समन्वय है।
पठित गद्य पाठों की विषयवस्तु पर आधारित निम्न प्रश्नों में से तीन के उत्तर दीजिए :
( उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द )
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लेखक ने बाजार को मानवता-विरोधी कहा है, क्यों ? पठित पाठ के आधार पर समझाइए । (3 अंक)
लेखक ने बाजार को मानवता-विरोधी इसलिए कहा है क्योंकि बाजार मनुष्य को केवल उपभोक्ता मानता है, उसकी भावनाओं, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों की कोई कद्र नहीं करता। बाजार में सब कुछ क्रय-विक्रय की वस्तु बन जाता है, जिससे मनुष्य का शोषण होता है और वह अपनी मानवीय पहचान खो देता है। बाजार की यह निर्मम प्रवृत्ति मानवता के विपरीत है।
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“भक्तिन के ससुराल वालों का व्यवहार उसके साथ क्रूरता एवं अमानवीयता का द्योतक है।” इस कथन को समझाइए । (3 अंक)
भक्तिन के ससुराल वालों ने उसके पति की मृत्यु के बाद उसे घर से निकाल दिया और उसकी संपत्ति हड़प ली। उन्होंने उसे कोई सहारा नहीं दिया, बल्कि उसे भिखारिणी बना दिया। यह व्यवहार अत्यंत क्रूर और अमानवीय था, क्योंकि एक विधवा स्त्री के प्रति संवेदनहीनता और शोषण मानवीय मूल्यों का घोर उल्लंघन है।
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जन्मजात जाति में कार्यरत युवक कार्यकुशल क्यों नहीं बन पाते ? 'श्रम विभाजन और जाति-प्रथा' पाठ के आधार पर लिखिए । (3 अंक)
जन्मजात जाति में कार्यरत युवक कार्यकुशल नहीं बन पाते क्योंकि उन्हें अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार कार्य चुनने की स्वतंत्रता नहीं होती। जाति-प्रथा के कारण वे पारंपरिक व्यवसाय में बंधे रहते हैं, जिसमें नवाचार और प्रतिस्पर्धा का अभाव होता है। इससे उनमें कार्य के प्रति उत्साह और कुशलता विकसित नहीं हो पाती।
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भारतीयों और पाकिस्तानियों में पायी जाने वाली समानताओं को 'नमक' कहानी के आधार पर लिखिए । (3 अंक)
'नमक' कहानी में भारतीयों और पाकिस्तानियों में कई समानताएँ दिखाई गई हैं। दोनों देशों के लोगों की भाषा, खान-पान, रहन-सहन और संस्कृति एक जैसी है। विभाजन के बाद भी उनके बीच गहरे भावनात्मक संबंध हैं। कहानी में नमक का आदान-प्रदान इस बात का प्रतीक है कि दोनों देशों के लोगों के बीच मूलभूत समानताएँ हैं, जो सीमाओं से परे हैं।
खण्ड-घ
2. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर दीजिए (उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द):
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(अ) “यशोधर बाबू के व्यक्तित्व का निर्माण करने में किशन दा का अपूर्व योगदान रहा है।” समझाइए। (3 अंक)
किशन दा ने यशोधर बाबू को जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण दिया। उन्होंने यशोधर बाबू को आत्मनिर्भर बनने, कठिनाइयों का सामना करने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा दी। किशन दा के संघर्षशील जीवन ने यशोधर बाबू को सिखाया कि जीवन में सफलता के लिए मेहनत और दृढ़ संकल्प आवश्यक हैं। इस प्रकार किशन दा ने यशोधर बाबू के व्यक्तित्व को मजबूत और संघर्षशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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(ब) “जूझ” कहानी के ‘राव’ साहब की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए। (3 अंक)
राव साहब एक कठोर, अनुशासनप्रिय और व्यावहारिक व्यक्ति हैं। वे अपने काम में पूरी तरह डूबे रहते हैं और दूसरों से भी यही अपेक्षा रखते हैं। वे सीधे और स्पष्टवादी हैं, लेकिन उनमें संवेदनशीलता का अभाव है। वे अपने अधीनस्थों से कड़ी मेहनत लेते हैं और उनकी भावनाओं को ज्यादा महत्व नहीं देते। उनका व्यवहार कभी-कभी अत्याचारी जैसा लगता है, लेकिन वे अपने कर्तव्य के प्रति अत्यंत निष्ठावान हैं।
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(स) ‘वाटर’ (Water) का परिचय देते हुए उसकी डायरी की प्रसिद्धि का कारण लिखिए। (3 अंक)
‘वाटर’ एक युवा अश्वेत लड़की है जो दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करती है। उसकी डायरी इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें उसने एक बच्ची की मासूमियत और स्पष्टता से रंगभेद व्यवस्था के अमानवीय चेहरे को उजागर किया है। यह डायरी न केवल उसके व्यक्तिगत संघर्षों का दस्तावेज है, बल्कि पूरे एक समुदाय के दर्द और उम्मीदों की आवाज भी है।
3. निम्न प्रश्नों में से किन्हीं दो का उत्तर दीजिए (उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द):
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(अ) मुअनजो-दड़ो तथा हड़प्पा की ईंटों का अन्तर लिखिए। (1 अंक)
मुअनजो-दड़ो की ईंटें पकी हुई मिट्टी की हैं, जबकि हड़प्पा की ईंटें कच्ची मिट्टी की होती थीं। मुअनजो-दड़ो की ईंटें अधिक मजबूत और टिकाऊ थीं।
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(ब) स्कूल में पहुँचने पर लेखक का मन खट्टा हो गया, क्यों? ‘जूझ’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (1 अंक)
लेखक का मन इसलिए खट्टा हो गया क्योंकि उसे स्कूल में पढ़ने के बजाय काम करने के लिए कहा गया। उसे लगा कि उसकी पढ़ाई की इच्छा को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है और उसे मजदूरी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
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(स) भूषण ने अपने पिता को उपहार में गाउन लाकर क्यों दिया? “सिल्वर वैडिंग” पाठ के आधार पर लिखिए। (1 अंक)
भूषण ने अपने पिता को गाउन इसलिए उपहार में दिया क्योंकि वह चाहता था कि उसके पिता रजत जयंती समारोह में एक नए और सुंदर वस्त्र में दिखें। वह अपने पिता को सम्मानित और खुश देखना चाहता था, और यह उसके प्यार और कृतज्ञता का प्रतीक था।
4. विषयवस्तु पर आधारित निम्न निबन्धात्मक प्रश्नों में से किसी एक का उत्तर दीजिए :
(उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द)
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“युद्ध के दौरान आम जन-जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था ।” 'डायरी के पन्ने' पाठ के आधार पर समझाइए । (3 अंक)
‘डायरी के पन्ने’ पाठ में लेखिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यहूदियों पर होने वाले अत्याचारों का वर्णन किया है। युद्ध के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े, भूख और भय का सामना करना पड़ा। स्कूल बंद हो गए, बाजार सूने हो गए और हर तरफ मौत का सन्नाटा छा गया था। लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी और वे लगातार अपनी जान बचाने के लिए भागते रहते थे।
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“अतीत में दबा पाँव” पाठ के आधार पर मुअनजो-दड़ो के नगर-नियोजन की विशेषताएँ लिखिए । (3 अंक)
‘अतीत में दबा पाँव’ पाठ के अनुसार मुअनजो-दड़ो का नगर-नियोजन अत्यंत विकसित था। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- नगर दो भागों में बँटा था – ऊपरी दुर्ग और निचला नगर।
- सड़कें सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जो आयताकार खंडों में बँटी थीं।
- पकी ईंटों से बने मकान, स्नानागार और जल निकासी की उन्नत व्यवस्था थी।
- प्रत्येक घर में कुआँ और स्नानघर होता था, तथा गंदा पानी नालियों द्वारा बहता था।
- नगर में एक बड़ा स्नानागार (ग्रेट बाथ) और अन्नागार भी था।