RBSE Class 12th 2013 -SS-84-2013 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2013
Subject -SS-84-2013
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th -SS-84-2013 2013 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2013
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2013

कृषि विज्ञान
AGRICULTURE

समय : 3 घण्टे   |   पूर्णांक : 56

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें ।
    Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं ।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें ।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS—84— AGRICULTURE (Supp.) [ 55—484 ] [ Turn over

प्रश्न 1

पूसा संस्थान द्वारा विकसित विश्वविख्यात दुधारू गाय की नस्ल का नाम लिखिए।

Write the name of world famous breed of milch cow developed by Pusa Institute.

उत्तर / Answer: पूसा संस्थान द्वारा विकसित विश्वविख्यात दुधारू गाय की नस्ल करण स्विस (Karan Swiss) है। यह स्विस ब्राउन और साहीवाल नस्लों के संकरण से विकसित की गई है।

प्रश्न 2

रेशा फसलों के नाम लिखिए।

Write the names of two fibre crops.

उत्तर / Answer: दो प्रमुख रेशा फसलें हैं:
  1. कपास (Cotton)
  2. जूट (Jute)

प्रश्न 3

पौधों में पोटेशियम पोषक तत्त्व के कोई दो महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।

Write any two important functions of potassium nutrient element in plants.

उत्तर / Answer: पोटेशियम के दो महत्त्वपूर्ण कार्य:
  1. यह प्रकाश-संश्लेषण में सहायक एंजाइमों को सक्रिय करता है तथा कार्बोहाइड्रेट के संचलन में मदद करता है।
  2. यह रंध्रों के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करता है, जिससे जल संतुलन बना रहता है तथा पौधे सूखा सहन कर पाते हैं।

प्रश्न 4

पौधों में कॉपर पोषक तत्त्व की कमी के कोई दो मुख्य लक्षण लिखिए।

Write any two important deficiency symptoms of copper nutrient element in plants.

उत्तर / Answer: कॉपर की कमी के दो मुख्य लक्षण:
  1. नई पत्तियों का मुड़ना तथा उनका सिरा सफेद या पीला पड़ जाना (डाइ-बैक)।
  2. फलों और अनाजों में दाने नहीं बनते या बहुत कम बनते हैं, तथा पौधे की वृद्धि रुक जाती है।

प्रश्न 5

फ्लूक्लोरलीन खरपतवारनाशी का सूरजमुखी की फसल में प्रयोग की क्रान्तिक अवधि (अवस्था) लिखिए।

Write the critical period (stage) of using 'Fluchloroline' weedicide in sunflower crop.

उत्तर / Answer: फ्लूक्लोरलीन खरपतवारनाशी का प्रयोग सूरजमुखी की फसल में बुवाई से पहले मिट्टी में मिलाकर (Pre-plant incorporation) किया जाता है। यह खरपतवारों के अंकुरण को रोकने के लिए बुवाई के तुरंत बाद की अवस्था में प्रभावी होता है।

प्रश्न 6

‘एग्रोमाइज़ा लैंटाना’ कीट द्वारा किस खरपतवार का नियन्त्रण किया जाता है?

Which weed is controlled by Agromyza lantana insect?

उत्तर / Answer: Agromyza lantana कीट द्वारा लैंटाना (Lantana camara) नामक खरपतवार का जैविक नियंत्रण किया जाता है।

प्रश्न 7

मक्का की फसल में उगने वाले दो महत्त्वपूर्ण खरपतवारों के नाम लिखिए।

Write the names of two important weeds grown in maize crop.

उत्तर / Answer: मक्का की फसल में उगने वाले दो महत्त्वपूर्ण खरपतवार:
  1. मोथा (Cyperus rotundus) – नागरमोथा
  2. सावा (Echinochloa colonum) – जंगली चावल

— पृष्ठ 2 समाप्त —

प्रश्न 1

संकर धान की उपज प्रति हैक्टर लिखिए ।
Write per hectare yield of hybrid paddy.

संकर धान की उपज सामान्यतः 60 से 80 क्विंटल प्रति हैक्टर होती है।

The per hectare yield of hybrid paddy is generally 60 to 80 quintals.

प्रश्न 2

बाजरे के अरगट रोग का एक लक्षण एवं रोकथाम का एक उपाय लिखिए ।
Write one symptom and one control measure of Ergot disease of pearl millet.

लक्षण: बालियों में दानों के स्थान पर गुलाबी या भूरे रंग की चिपचिपी बूंदें (हनीड्यू) निकलती हैं, जो बाद में सख्त होकर काले रंग के स्क्लेरोशिया में बदल जाती हैं।

रोकथाम: रोग प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें और बीज को कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम/किग्रा बीज) से उपचारित करें।

Symptom: Pink or brown sticky honeydew droplets appear on the earheads instead of grains, which later harden into black sclerotia.

Control measure: Use resistant varieties and treat seeds with Carbendazim (2 g/kg seed).

प्रश्न 3

अलंकृत बागवानी की परिभाषा लिखिए ।
Write the definition of ornamental gardening.

अलंकृत बागवानी (ऑर्नामेंटल गार्डनिंग) कला और विज्ञान की वह शाखा है जिसमें सुंदरता, सौंदर्य और मनोरंजन के उद्देश्य से सजावटी पौधों, फूलों, झाड़ियों और वृक्षों का उगाना, डिजाइन करना और रखरखाव किया जाता है।

Ornamental gardening is the branch of art and science that involves growing, designing, and maintaining decorative plants, flowers, shrubs, and trees for beauty, aesthetics, and recreation.

प्रश्न 4

उद्यान के दो प्रकारों के नाम लिखिए ।
Write the names of two types of garden.

  1. औपचारिक उद्यान (Formal Garden)
  2. अनौपचारिक उद्यान (Informal Garden)

प्रश्न 5

रतौंधी रोग किस विटामिन की कमी के कारण होता है ?
The deficiency of which vitamin causes night blindness disease?

रतौंधी रोग विटामिन A की कमी के कारण होता है।

Night blindness is caused by the deficiency of Vitamin A.

प्रश्न 6

आहार विशेषज्ञों के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन कितनी मात्रा में सब्जियों की आवश्यकता होती है ?
How much quantity of vegetables is required by an adult person per day according to dietitian?

आहार विशेषज्ञों के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 300 ग्राम सब्जियों की आवश्यकता होती है।

According to dietitians, an adult person requires about 300 grams of vegetables per day.

प्रश्न 7

केंचुआ खाद की कोई चार विशेषताएँ लिखिए ।
Write any four characteristics of vermicompost.

  1. यह पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) से भरपूर होता है।
  2. यह मृदा की जल धारण क्षमता को बढ़ाता है।
  3. यह मृदा में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाता है।
  4. यह पौधों को रोगों से प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है।

Four characteristics of vermicompost:

  1. It is rich in nutrients (nitrogen, phosphorus, potassium).
  2. It increases the water holding capacity of soil.
  3. It increases the number of beneficial microorganisms in the soil.
  4. It provides disease resistance to plants.

प्रश्न 8

मृदा उर्वरता को परिभाषित कीजिए एवं इसको प्रभावित करने वाले कोई चार प्राकृतिक कारक लिखिए ।
Define soil fertility and write any four natural factors affecting it.

परिभाषा: मृदा उर्वरता मृदा की वह क्षमता है जिसके द्वारा वह पौधों को आवश्यक पोषक तत्व, जल और वायु प्रदान करके स्वस्थ वृद्धि और अच्छी उपज सुनिश्चित करती है।

मृदा उर्वरता को प्रभावित करने वाले चार प्राकृतिक कारक:

  1. जलवायु (तापमान, वर्षा)
  2. मूल चट्टान (पैरेंट रॉक)
  3. स्थलाकृति (भू-आकृति)
  4. समय (मृदा निर्माण की अवधि)

Definition: Soil fertility is the ability of soil to provide essential nutrients, water, and air to plants for healthy growth and good yield.

Four natural factors affecting soil fertility:

  1. Climate (temperature, rainfall)
  2. Parent rock
  3. Topography (landform)
  4. Time (duration of soil formation)

20.

भारत में पायी जाने वाली निम्नलिखित मृदाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :

  1. (अ) मरुस्थलीय मृदायें (Desert soils)
  2. (ब) डेल्टा जलोढ़ मृदायें (Delta Alluvium soils)

Write short notes on the following soils that are found in India:

  1. (a) Desert soils
  2. (b) Delta Alluvium soils.

उत्तर:

(अ) मरुस्थलीय मृदायें (Desert Soils): ये मृदाएँ राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इनमें रेत का अंश अधिक होता है, जल धारण क्षमता कम होती है, तथा इनमें नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी पाई जाती है। ये मृदाएँ क्षारीय प्रकृति की होती हैं और इनमें कैल्शियम कार्बोनेट की मात्रा अधिक होती है।

(ब) डेल्टा जलोढ़ मृदायें (Delta Alluvium Soils): ये मृदाएँ नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों में पाई जाती हैं, जैसे गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा। ये नदियों द्वारा लाए गए निक्षेपों से बनी होती हैं और अत्यधिक उपजाऊ होती हैं। इनमें पोटाश और चूने की मात्रा पर्याप्त होती है, तथा ये धान, गन्ना और जूट जैसी फसलों के लिए उपयुक्त होती हैं।

2.

'फसल वृद्धि की क्रान्तिक अवस्था' से आप क्या समझते हैं? मक्का की फसल में दो क्रान्तिक अवस्थाएँ लिखिए।

What do you mean by critical growth stage of crop? Write two critical stages of maize crop.

उत्तर:

फसल वृद्धि की क्रान्तिक अवस्था: फसल वृद्धि की क्रान्तिक अवस्था वह समय होता है जब पौधे को पानी और पोषक तत्वों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इस अवस्था में पानी या पोषक तत्वों की कमी से फसल की उपज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

मक्का की फसल में दो क्रान्तिक अवस्थाएँ:

  1. पुष्पन अवस्था (Flowering stage): जब मक्का में नर और मादा पुष्पक्रम (सिल्क और टैसल) निकलते हैं।
  2. दाना भरने की अवस्था (Grain filling stage): जब दाने दूधिया अवस्था से पकने की ओर बढ़ते हैं।

4.

मृदा में नमी की मात्रा ज्ञात करने की कोई चार विधियाँ लिखिए।

Write any four methods of determining moisture in soil.

उत्तर: मृदा में नमी की मात्रा ज्ञात करने की चार विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. ओवन सुखाने की विधि (Oven drying method): मृदा के नमूने को 105°C पर ओवन में सुखाकर नमी की मात्रा ज्ञात की जाती है।
  2. टेन्सियोमीटर विधि (Tensiometer method): मृदा में जल तनाव मापकर नमी की मात्रा ज्ञात की जाती है।
  3. ग्रैविमीट्रिक विधि (Gravimetric method): मृदा के नमूने का गीला और सूखा भार मापकर नमी प्रतिशत ज्ञात किया जाता है।
  4. न्यूट्रॉन प्रॉब विधि (Neutron probe method): न्यूट्रॉन विकिरण के माध्यम से मृदा में जल की मात्रा मापी जाती है।

2.

उद्यान विन्यास के चार अंगों का वर्णन कीजिए।

Describe four parts of garden layout.

उत्तर: उद्यान विन्यास के चार प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:

  1. प्रवेश द्वार (Entrance): उद्यान का मुख्य द्वार जो आगंतुकों का स्वागत करता है और उद्यान की शोभा बढ़ाता है।
  2. पथ (Paths): उद्यान में चलने के लिए बनाए गए रास्ते जो विभिन्न भागों को जोड़ते हैं।
  3. फूलों की क्यारियाँ (Flower beds): सजावटी पौधों और फूलों के लिए निर्धारित क्षेत्र।
  4. लॉन (Lawn): हरी घास से ढका खुला क्षेत्र जो उद्यान की सुंदरता बढ़ाता है और विश्राम के लिए उपयोग होता है।

2.

मानव आहार में विटामिन 'D' एवं कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व समझाइये।

Write the importance of Vitamin D and carbohydrates in human diet.

उत्तर:

विटामिन D का महत्त्व: विटामिन D कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण में सहायक होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है और शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करता है।

कार्बोहाइड्रेट्स का महत्त्व: कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का मुख्य स्रोत हैं। ये मस्तिष्क और मांसपेशियों के कार्य के लिए आवश्यक ग्लूकोज प्रदान करते हैं। फाइबर युक्त कार्बोहाइड्रेट्स पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

2.

'फलोद्यान में पौधे लगाने की पूरक एवं समोच्च रेखा विधि' का वर्णन कीजिए।

Describe the quincunx and contour system of planting in an orchard.

उत्तर:

पूरक विधि (Quincunx system): इस विधि में पौधों को वर्गाकार पद्धति में लगाया जाता है, लेकिन प्रत्येक वर्ग के केंद्र में एक अतिरिक्त पौधा लगाया जाता है। इससे प्रति हेक्टेयर पौधों की संख्या बढ़ जाती है। यह विधि भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है और फलों की अधिक पैदावार देती है।

समोच्च रेखा विधि (Contour system): इस विधि में पौधों को ढलान पर समान ऊँचाई की रेखाओं (समोच्च रेखाओं) के अनुदिश लगाया जाता है। यह विधि मृदा अपरदन को रोकने में सहायक होती है और पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक उपयोगी है। इससे वर्षा जल का संरक्षण होता है और पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है।

प्रश्न 22

फलों में सधाई की दो विधियों का वर्णन कीजिए।

Describe two methods of training in fruit trees.

सधाई की दो विधियाँ:

  1. केंद्रीय नेता प्रणाली (Central Leader System): इसमें मुख्य तने को बढ़ने दिया जाता है और शाखाएँ इसके चारों ओर समान रूप से विकसित होती हैं। यह विधि सेब, नाशपाती जैसे फलों के लिए उपयुक्त है।
  2. खुले केंद्र प्रणाली (Open Center System): इसमें मुख्य तने को काट दिया जाता है और शाखाएँ बाहर की ओर फैलती हैं, जिससे केंद्र खुला रहता है। यह आड़ू, प्लम जैसे फलों के लिए उपयुक्त है।

प्रश्न 23

कलिकायन विधि का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।

Describe ring budding method along with labelled diagram.

कलिकायन विधि (Ring Budding): इस विधि में प्रवर्धन के लिए छाल की एक अंगूठी के आकार की पट्टी का उपयोग किया जाता है।

विधि के चरण:

  1. प्रवर्धन के लिए एक स्वस्थ वंशज पौधे से छाल की एक अंगूठी काट ली जाती है जिसमें एक कली होती है।
  2. मूल पौधे की शाखा से भी उतनी ही चौड़ी छाल की अंगूठी हटा दी जाती है।
  3. वंशज की छाल की अंगूठी को मूल पौधे के खुले भाग पर रखा जाता है और अच्छी तरह बांध दिया जाता है।
  4. कुछ समय बाद कली विकसित होने लगती है और नया पौधा तैयार हो जाता है।

चित्र: (नामांकित चित्र में मूल पौधा, वंशज कली, छाल की अंगूठी, और बंधन दिखाया जाता है।)

प्रश्न 24

ग्राफ्टिंग के लिए सांकुर डाली के चयन की चार विशेषताएँ लिखिए।

Write four characteristics of selection of scion for grafting.

सांकुर डाली (Scion) के चयन की चार विशेषताएँ:

  1. सांकुर डाली स्वस्थ एवं रोगमुक्त होनी चाहिए।
  2. यह एक वर्ष पुरानी और अच्छी तरह से परिपक्व होनी चाहिए।
  3. इसमें कम से कम 2-3 स्वस्थ कलियाँ होनी चाहिए।
  4. यह उसी प्रजाति या संबंधित प्रजाति के पौधे से ली गई होनी चाहिए जिस पर ग्राफ्ट किया जाना है।

प्रश्न 25

खरपतवार नियन्त्रण की तीन कृषि विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

अथवा

खरपतवार नियन्त्रण की तीन यांत्रिक विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Describe in brief three agricultural methods of weed control.

OR

Describe in brief three mechanical methods of weed control.

कृषि विधियाँ (Agricultural Methods):

  1. फसल चक्र (Crop Rotation): विभिन्न प्रकार की फसलें बारी-बारी से उगाने से खरपतवारों का जीवन चक्र टूट जाता है।
  2. प्रतिस्पर्धी फसलें (Competitive Crops): घनी बुवाई वाली फसलें जैसे गेहूँ, ज्वार खरपतवारों को प्रकाश और पोषक तत्वों से वंचित करती हैं।
  3. गहरी जुताई (Deep Ploughing): गर्मियों में गहरी जुताई करने से खरपतवार के बीज सतह पर आ जाते हैं और पक्षियों द्वारा खा लिए जाते हैं या धूप में नष्ट हो जाते हैं।

यांत्रिक विधियाँ (Mechanical Methods):

  1. हाथ से निराई (Hand Weeding): खरपतवारों को हाथ या छोटे औजारों से निकालना।
  2. कुदाल या खुरपी से निराई (Hoeing): कुदाल या खुरपी से मिट्टी को खोदकर खरपतवार निकालना।
  3. ट्रैक्टर चालित निराई (Tractor-operated Weeding): बड़े खेतों में ट्रैक्टर से चलने वाली निराई मशीनों का उपयोग।

प्रश्न 26

डिब्बाबंदी प्रक्रिया के तीन चरणों का वर्णन कीजिए।

अथवा

जेली बनाने में कोई छः सावधानियाँ लिखिए।

Describe three steps of canning process.

OR

Write any six precautions in Jelly preparation.

डिब्बाबंदी प्रक्रिया के तीन चरण:

  1. तैयारी (Preparation): फलों या सब्जियों को धोना, छीलना, काटना और बीज निकालना।
  2. प्रसंस्करण (Processing): तैयार उत्पाद को डिब्बों में भरना और उच्च तापमान पर गर्म करना ताकि सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाएँ।
  3. सील करना और ठंडा करना (Sealing and Cooling): डिब्बों को वायुरोधी रूप से सील करना और फिर ठंडा करना ताकि वैक्यूम बन जाए।

अथवा

जेली बनाने में छः सावधानियाँ:

  1. फल पूरी तरह पके हुए हों, कच्चे या अधिक पके न हों।
  2. चीनी और फलों के रस का सही अनुपात होना चाहिए।
  3. पेक्टिन की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए।
  4. उबालने के दौरान लगातार हिलाते रहना चाहिए ताकि जले नहीं।
  5. जेली को साफ और सूखे बर्तनों में भरना चाहिए।
  6. भरने के बाद बर्तनों को तुरंत सील कर देना चाहिए।

प्रश्न 27

फलों के ऊष्मा परिरक्षण से आप क्या समझते हैं? इसकी दो विधियों का वर्णन कीजिए।

What do you mean by heat preservation of fruits? Describe any two methods of it.

ऊष्मा परिरक्षण (Heat Preservation): फलों को उच्च तापमान पर गर्म करके सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने की प्रक्रिया को ऊष्मा परिरक्षण कहते हैं। इससे फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

दो विधियाँ:

  1. पाश्चुरीकरण (Pasteurization): फलों के रस को 60-85°C तक गर्म करके फिर तुरंत ठंडा किया जाता है। इससे हानिकारक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं लेकिन फल का स्वाद और पोषक तत्व बने रहते हैं।
  2. डिब्बाबंदी (Canning): फलों को डिब्बों में भरकर 100°C से अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है। इससे सभी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और डिब्बे को वायुरोधी रूप से सील कर दिया जाता है।

प्रश्न 28

सतह सिंचाई की कोई चार विधियों का वर्णन कीजिए।

अथवा

सिंचाई के चार सतही जल स्रोतों का वर्णन कीजिए।

Describe any four methods of surface irrigation.

OR

Describe four surface water sources of irrigation.

सतह सिंचाई की चार विधियाँ (Four Methods of Surface Irrigation):

  1. बाढ़ सिंचाई (Flood Irrigation): इसमें खेत को पूरी तरह पानी से भर दिया जाता है। यह सबसे सरल विधि है, लेकिन इसमें पानी की अधिक हानि होती है।
  2. नाली सिंचाई (Furrow Irrigation): फसल की पंक्तियों के बीच छोटी-छोटी नालियाँ बनाकर उनमें पानी बहाया जाता है। यह विधि पंक्तिबद्ध फसलों के लिए उपयुक्त है।
  3. सीमा सिंचाई (Border Irrigation): खेत को छोटे-छोटे सीमाओं (बॉर्डर) में बाँटकर प्रत्येक सीमा में पानी छोड़ा जाता है। यह विधि घनी बुआई वाली फसलों के लिए अच्छी है।
  4. बेसिन सिंचाई (Basin Irrigation): पेड़ों या विशेष फसलों के चारों ओर छोटे-छोटे गड्ढे (बेसिन) बनाकर उनमें पानी भरा जाता है। यह विधि बागवानी फसलों के लिए उपयुक्त है।

सिंचाई के चार सतही जल स्रोत (Four Surface Water Sources of Irrigation):

  1. नदियाँ (Rivers): नदियों से नहरों या सीधे पंपिंग द्वारा पानी लेकर सिंचाई की जाती है।
  2. तालाब (Ponds): वर्षा जल को तालाबों में संग्रहित करके सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।
  3. झीलें (Lakes): प्राकृतिक या कृत्रिम झीलों से पानी लेकर सिंचाई की जाती है।
  4. नहरें (Canals): नदियों या बाँधों से निकाली गई नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाया जाता है।

प्रश्न 29

ज्वार की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के आधार पर कीजिए:

(अ) जलवायु (ब) बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर (स) खाद एवं उर्वरक (द) उन्नतशील चार किस्में।

अथवा

बरसीम की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के आधार पर कीजिए:

(अ) जलवायु (ब) बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर (स) खाद एवं उर्वरक (द) उन्नतशील चार किस्में।

Describe the scientific cultivation of Sorghum on the basis of following heads:

(a) Climate (b) Seed rate per hectare (c) Fertilizer and manure (d) Four improved varieties.

OR

Describe the scientific cultivation of Barseem on the basis of following heads:

(a) Climate (b) Seed rate per hectare (c) Fertilizer and manure (d) Four improved varieties.

ज्वार की वैज्ञानिक खेती (Scientific Cultivation of Sorghum):

  1. जलवायु (Climate): ज्वार गर्म और शुष्क जलवायु की फसल है। इसके लिए 25°C से 35°C तापमान उपयुक्त रहता है। यह कम वर्षा (40-60 सेमी) वाले क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार देती है।
  2. बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर (Seed rate per hectare): बीज की मात्रा 8-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होती है। बुवाई से पहले बीज को कवकनाशी से उपचारित करना चाहिए।
  3. खाद एवं उर्वरक (Fertilizer and manure): गोबर की खाद 10-15 टन प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों में नाइट्रोजन 60-80 किग्रा, फास्फोरस 40-50 किग्रा और पोटाश 30-40 किग्रा प्रति हेक्टेयर देना चाहिए।
  4. उन्नतशील चार किस्में (Four improved varieties): ज्वार की चार उन्नत किस्में हैं: CSH-1, CSH-5, CSV-15 और CSV-20। ये किस्में अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी हैं।

बरसीम की वैज्ञानिक खेती (Scientific Cultivation of Barseem):

  1. जलवायु (Climate): बरसीम ठंडी जलवायु की फसल है। इसके लिए 15°C से 25°C तापमान उपयुक्त रहता है। यह सर्दियों में अच्छी पैदावार देती है और हल्की पाला सहन कर सकती है।
  2. बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर (Seed rate per hectare): बीज की मात्रा 25-30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होती है। बीज को बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए।
  3. खाद एवं उर्वरक (Fertilizer and manure): गोबर की खाद 10-15 टन प्रति हेक्टेयर डालनी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों में नाइट्रोजन 20-30 किग्रा, फास्फोरस 60-80 किग्रा और पोटाश 30-40 किग्रा प्रति हेक्टेयर देना चाहिए।
  4. उन्नतशील चार किस्में (Four improved varieties): बरसीम की चार उन्नत किस्में हैं: मस्कावी, वार्डन, बीएल-1 और बीएल-2। ये किस्में अधिक हरा चारा देने वाली और रोग प्रतिरोधी हैं।

30. अमरूद की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के आधार पर कीजिए :

(अ) जलवायु (Climate)

अमरूद उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु का फल है। इसके लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु उपयुक्त रहती है। यह 20°C से 30°C तापमान में अच्छी वृद्धि करता है। पाले से यह फसल प्रभावित होती है, अतः पाले से बचाव आवश्यक है।

(ब) पादप प्रवर्धन (Plant Propagation)

अमरूद का प्रवर्धन प्रायः बीज द्वारा किया जाता है, किंतु व्यावसायिक खेती के लिए कलम (ग्राफ्टिंग) या लेयरिंग विधि अपनाई जाती है। एयर लेयरिंग (गूटी) विधि सर्वोत्तम मानी जाती है।

(स) पौध रोपण (Planting)

पौध रोपण के लिए 6×6 मीटर या 7×7 मीटर की दूरी रखी जाती है। गड्ढे 1×1×1 मीटर आकार के खोदे जाते हैं। प्रति गड्ढे में 10-15 किग्रा गोबर की खाद मिलाकर भरा जाता है। रोपण का उपयुक्त समय वर्षा ऋतु (जुलाई-अगस्त) है।

(द) अंथ्रैक्नोज रोग (Anthracnose Disease)

यह एक प्रमुख कवक जनित रोग है, जो फलों, पत्तियों एवं तनों पर काले धब्बे उत्पन्न करता है। नियंत्रण के लिए बोर्डो मिश्रण (1%) या कार्बेन्डाजिम (0.1%) का छिड़काव करना चाहिए। प्रभावित भागों को काटकर नष्ट कर देना चाहिए।

अथवा

टमाटर की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के आधार पर कीजिए :

(अ) जलवायु (Climate)

टमाटर गर्म जलवायु की फसल है। इसके लिए 20°C से 25°C तापमान उपयुक्त रहता है। अधिक गर्मी या पाला फसल को नुकसान पहुँचाता है। हल्की जलोढ़ मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम होती है।

(ब) पौध (नर्सरी) तैयार करना (Nursery Preparation)

टमाटर की पौध नर्सरी में तैयार की जाती है। बीज को उपचारित करके क्यारियों में बोया जाता है। नर्सरी में 4-6 सप्ताह में पौध रोपण योग्य हो जाती है। रोपण के समय पौधों की ऊँचाई 15-20 सेमी होनी चाहिए।

(स) उन्नतशील चार किस्में (Four Improved Varieties)

टमाटर की चार उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:

  • पूसा रूबी – अधिक उपज देने वाली, फल गोल एवं लाल।
  • पूसा गौरव – फल बड़े, मांसल एवं रोग प्रतिरोधी।
  • अर्का विकास – फल अंडाकार, अधिक उपज।
  • पूसा शीतल – गर्मी सहन करने वाली, फल मध्यम आकार के।

(द) खाद एवं उर्वरक (Fertilizer and Manure)

रोपण के समय प्रति हेक्टेयर 20-25 टन गोबर की खाद देनी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों में नाइट्रोजन (N) 100 किग्रा, फॉस्फोरस (P) 60 किग्रा एवं पोटाश (K) 60 किग्रा प्रति हेक्टेयर देना चाहिए। नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय तथा शेष दो बार (30 एवं 60 दिन बाद) टॉप ड्रेसिंग के रूप में दी जाती है।