RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers

Agriculture-SS-84-2013 from the 2013 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.

Treat this question paper as a mock under gentle timing first, then as a marking exercise the second time. The introduction on this page is written only for this subject-and-year pair, not copied from other pages.

Bookmark the link if you coach juniors — the layout stays stable for search engines and classroom sharing.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2013
Subject Agriculture-SS-84-2013
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2013, and subject Agriculture-SS-84-2013 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the Agriculture-SS-84-2013 question paper from 2013 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013

Scroll through the Previous Year Papers pages for Agriculture-SS-84-2013 (2013).

RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2013 Agriculture-SS-84-2013 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Agriculture-SS-84-2013 2013 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2013
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2013

कृषि विज्ञान
AGRICULTURE

समय : 3 घण्टे   |   पूर्णांक : 56

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक (Roll No.) लिखें ।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं ।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें ।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS—84—AGRICULTURE [ SS - 600 ] [ Turn over

Agriculture (SS-84-2013) – Page 2

  1. ‘ट्राइकोग्रामा’ के उपयोग से किस समस्या का नियन्त्रण होता है ?

    Which problem is controlled by the use of Trichograma?

    उत्तर: ट्राइकोग्रामा एक अंड परजीवी कीट है, जिसका उपयोग फसलों में कीटों (जैसे तना छेदक, फल छेदक आदि) के अंडों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। इससे कीटों का जैविक नियंत्रण होता है।

    Answer: Trichogramma is an egg parasitoid insect used to control insect pests (e.g., stem borers, fruit borers) by destroying their eggs. It provides biological control of pest problems.

  2. कैच क्रॉप किसे कहते हैं ?

    What is catch crop?

    उत्तर: कैच क्रॉप वह फसल है जिसे मुख्य फसल के बीच या खाली समय में उगाया जाता है ताकि खेत में उपलब्ध नमी, पोषक तत्वों का उपयोग हो सके और खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सके। उदाहरण: मूंग, लोबिया आदि।

    Answer: A catch crop is a fast-growing crop grown between main crops or during fallow periods to utilize available moisture and nutrients, and to suppress weeds. Examples: mung bean, cowpea.

  3. पौधों में क्लोरीन पोषक तत्व के कोई दो कार्य लिखिये।

    Write any two functions of chlorine element in plants.

    उत्तर:

    1. क्लोरीन प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में सहायक होता है (जल के विघटन में भूमिका)।
    2. यह पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और कोशिका विभाजन में सहायता करता है।

    Answer:

    1. Chlorine aids in photosynthesis (role in water splitting).
    2. It enhances disease resistance and helps in cell division in plants.
  4. गेहूँ की फसल में किस क्रान्तिक अवधि पर आइसोप्रोट्यूरॉन खरपतवारनाशी प्रयोग किया जाता है ?

    At which critical duration is the Isoproturon weedicide used in wheat crop?

    उत्तर: गेहूँ की फसल में आइसोप्रोट्यूरॉन खरपतवारनाशी का प्रयोग बुवाई के 30-35 दिन बाद (खरपतवारों की प्रारंभिक अवस्था में) किया जाता है। यह क्रान्तिक अवधि होती है जब खरपतवार नियंत्रण आवश्यक होता है।

    Answer: Isoproturon weedicide is applied in wheat crop at 30-35 days after sowing (early stage of weeds). This is the critical period for weed control.

  5. दक्षिण भारत में प्रिक्ली पियर (Opuntia dillenii) नामक खरपतवार को नष्ट करने हेतु कौन-सा कीट काम में लिया गया ?

    Which insect was used to control prickly pear (Opuntia dillenii) weed in South India?

    उत्तर: दक्षिण भारत में प्रिक्ली पियर (Opuntia dillenii) खरपतवार को नष्ट करने के लिए कोचीनियल कीट (Dactylopius ceylonicus / Cactoblastis cactorum) का उपयोग किया गया।

    Answer: In South India, the cochineal insect (Dactylopius ceylonicus / Cactoblastis cactorum) was used to control prickly pear (Opuntia dillenii) weed.

  6. धान की चार उन्नतशील किस्में लिखिये।

    Write four improved varieties of Paddy.

    उत्तर: धान की चार उन्नतशील किस्में निम्नलिखित हैं:

    1. आईआर-36 (IR-36)
    2. पूसा बासमती-1 (Pusa Basmati-1)
    3. जया (Jaya)
    4. स्वर्णा (Swarna)

    Answer: Four improved varieties of paddy are:

    1. IR-36
    2. Pusa Basmati-1
    3. Jaya
    4. Swarna
  7. बाजरा के हरित बाली रोग का एक लक्षण एवं एक रोकथाम का उपाय लिखिये।

    Write one symptom and one control measure of green ear disease of pearl millet.

    उत्तर:

    लक्षण: रोगग्रस्त पौधों की बालियाँ हरी, पत्ती जैसी संरचनाओं (फूलों के स्थान पर) में बदल जाती हैं, जिससे दाने नहीं बनते।

    रोकथाम: रोग प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें तथा प्रभावित पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दें। बीजोपचार के लिए कार्बेन्डाजिम या थायरम का प्रयोग करें।

    Answer:

    Symptom: The earheads of infected plants transform into green, leafy structures (instead of flowers), resulting in no grain formation.

    Control measure: Use resistant varieties; remove and destroy infected plants. Treat seeds with Carbendazim or Thiram.

प्रश्न 8

भू-सौंदर्यकरण किसे कहते हैं ?

What is landscaping?

उत्तर: भू-सौंदर्यकरण (Landscaping) किसी भूमि या स्थान को सुंदर, आकर्षक और कार्यात्मक बनाने की कला और विज्ञान है। इसमें पौधों, पेड़ों, फूलों, घास, पानी, पत्थरों और अन्य प्राकृतिक तत्वों का उपयोग करके पर्यावरण को सजाया और बेहतर बनाया जाता है।

प्रश्न 9

वृक्षावली (एवन्यू) से आप क्या समझते हैं ?

What do you understand by Avenue?

उत्तर: वृक्षावली (Avenue) से तात्पर्य सड़क, मार्ग या रास्ते के दोनों ओर एक पंक्ति में लगाए गए पेड़ों से है। ये पेड़ छाया, सुंदरता और पर्यावरणीय लाभ प्रदान करते हैं।

प्रश्न 10

फल एवं सब्जियों के मानव आहार में कोई चार महत्व लिखिये।

Write any four importances of fruits and vegetables in Human diets.

उत्तर: फल एवं सब्जियों के मानव आहार में चार महत्व निम्नलिखित हैं:

  1. विटामिन और खनिज प्रदान करना: ये विटामिन A, C, E और खनिज जैसे पोटैशियम, मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना: इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को रोगों से बचाते हैं।
  3. पाचन में सहायता: फाइबर की उच्च मात्रा पाचन तंत्र को स्वस्थ रखती है और कब्ज से बचाती है।
  4. ऊर्जा प्रदान करना: ये प्राकृतिक शर्करा और कार्बोहाइड्रेट के माध्यम से तुरंत ऊर्जा देते हैं।

प्रश्न 11

सब्जियों को पकाते समय कोई दो सावधानियाँ लिखिये।

Write any two precautions to be taken during cooking vegetables.

उत्तर: सब्जियों को पकाते समय दो सावधानियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. अधिक न पकाएं: सब्जियों को अधिक देर तक पकाने से उनमें मौजूद विटामिन और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इन्हें हल्का उबालकर या भाप में पकाना चाहिए।
  2. कम पानी का उपयोग करें: सब्जियों को पकाते समय कम पानी का उपयोग करें, क्योंकि अधिक पानी में पोषक तत्व घुलकर बाहर निकल जाते हैं।

प्रश्न 12

धान की फसल में उगने वाले कोई दो खरपतवारों के नाम लिखिए।

Write the names of any two weeds grown in Paddy.

उत्तर: धान की फसल में उगने वाले दो खरपतवारों के नाम हैं:

  1. सावा (Echinochloa crus-galli)
  2. मोथा (Cyperus rotundus)

प्रश्न 13

चावल की फसल में खैरा रोग किस तत्व की कमी से होता है ?

Deficiency of which element causes the Khaira disease in rice?

उत्तर: चावल की फसल में खैरा रोग जिंक (Zinc) तत्व की कमी से होता है।

प्रश्न 14

कार्बनिक खादों के मृदा पर पड़ने वाले कोई चार प्रभाव लिखिये।

Write any four effects of organic manures on the soil.

उत्तर: कार्बनिक खादों के मृदा पर पड़ने वाले चार प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  1. मृदा की उर्वरता में वृद्धि: कार्बनिक खाद मृदा में आवश्यक पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम प्रदान करते हैं।
  2. मृदा की जल धारण क्षमता में सुधार: ये मृदा की संरचना में सुधार करके जल धारण क्षमता बढ़ाते हैं।
  3. मृदा में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि बढ़ाना: कार्बनिक पदार्थ मृदा में लाभकारी सूक्ष्मजीवों के विकास को प्रोत्साहित करते हैं।
  4. मृदा के कटाव को कम करना: कार्बनिक खाद मृदा कणों को बांधकर रखते हैं, जिससे मृदा का कटाव कम होता है।

प्रश्न 15

मृदा को परिभाषित कीजिये एवं इसके कोई चार अवयव लिखिये।

Define soil and write its any four components.

उत्तर: मृदा (Soil) पृथ्वी की ऊपरी सतह पर पाई जाने वाली प्राकृतिक संरचना है, जो खनिज कणों, कार्बनिक पदार्थों, जल, वायु और जीवों से मिलकर बनी होती है। यह पौधों को आधार और पोषण प्रदान करती है।

मृदा के चार अवयव:

  1. खनिज कण: रेत, गाद और मिट्टी जैसे अकार्बनिक पदार्थ।
  2. कार्बनिक पदार्थ: पौधों और जानवरों के अवशेषों से बना ह्यूमस।
  3. जल: मृदा के कणों के बीच उपस्थित नमी।
  4. वायु: मृदा के रिक्त स्थानों में उपस्थित ऑक्सीजन और अन्य गैसें।

प्रश्न 20 (भाग 1)

राजस्थान में पायी जाने वाली पीली भूरी मृदाएं एवं गहरी मध्यम काली मृदाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिये ।

Describe in brief the yellow-brown soils and deep medium black soil found in Rajasthan. (1+1=2)

पीली भूरी मृदाएं (Yellow-Brown Soils): ये मृदाएं राजस्थान के दक्षिणी और पूर्वी भागों में पाई जाती हैं। इनमें लौह ऑक्साइड की अधिकता के कारण पीला-भूरा रंग होता है। ये मृदाएं हल्की बनावट वाली, जल निकासी युक्त और कार्बनिक पदार्थों में मध्यम होती हैं। इनमें फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा कम होती है।

गहरी मध्यम काली मृदाएं (Deep Medium Black Soils): ये मृदाएं राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भागों (जैसे कोटा, बूंदी, झालावाड़) में पाई जाती हैं। ये गहरी, चिकनी बनावट वाली और जल धारण क्षमता अधिक होती है। इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटाश प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये कपास, गेहूं और दलहन फसलों के लिए उपयुक्त होती हैं।

प्रश्न 20 (भाग 2)

पौधों में वृद्धि की क्रान्तिक अवस्था से आप क्या समझते हैं ? गेहूँ की कोई दो क्रान्तिक अवस्थाएँ लिखिये ।

What do you understand by critical stages of plant growth ? Write any two critical stages of wheat. (1+1=2)

पौधों में वृद्धि की क्रान्तिक अवस्था: पौधों के जीवन चक्र में वे विशेष अवस्थाएं जिनमें पानी, पोषक तत्वों या प्रकाश की कमी से उपज पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, क्रान्तिक अवस्थाएं कहलाती हैं। इन अवस्थाओं में पौधों की देखभाल विशेष रूप से आवश्यक होती है।

गेहूँ की दो क्रान्तिक अवस्थाएं:

  1. शाखा निकलने की अवस्था (Tillering Stage): इस अवस्था में पौधे में पार्श्व शाखाएं निकलती हैं। पानी और नाइट्रोजन की कमी से शाखाओं की संख्या कम हो जाती है, जिससे उपज प्रभावित होती है।
  2. बाली निकलने की अवस्था (Heading Stage): इस अवस्था में बाली का निर्माण होता है। पानी की कमी से दाने भरने की प्रक्रिया बाधित होती है और उपज में कमी आती है।

प्रश्न 20 (भाग 3)

'फव्वारा सिंचाई विधि का चित्र बनाकर इसके चार भागों के नाम लिखिये ।

Draw a diagram of Sprinkler Irrigation system and write the names of its four parts. (1+[4×½]=2)

फव्वारा सिंचाई प्रणाली के चार मुख्य भाग:

  1. मुख्य पाइप लाइन (Main Pipeline): यह पानी को स्रोत से वितरण प्रणाली तक ले जाती है।
  2. शाखा पाइप लाइन (Lateral Pipeline): यह मुख्य पाइप से पानी को फव्वारों तक पहुंचाती है।
  3. फव्वारा नोजल (Sprinkler Nozzle): यह पानी को छोटी-छोटी बूंदों में बदलकर फसल पर छिड़कता है।
  4. पम्प (Pump): यह पानी को दबाव देकर पाइप लाइन में प्रवाहित करता है।

(चित्र: एक मुख्य पाइप से जुड़ी शाखा पाइपों पर फव्वारे लगे हुए, जो पानी को गोलाकार में छिड़क रहे हैं।)

प्रश्न 20 (भाग 4)

'फलोद्यान की स्थापना के समय ध्यान रखने योग्य चार बिन्दुओं का वर्णन कीजिये ।

Describe four points to be considered at the time of establishment of orchard. (4×½=2)

  1. भूमि का चयन (Land Selection): उपजाऊ, जल निकासी वाली और समतल भूमि का चयन करें। भूमि का pH मान 6.5-7.5 के बीच होना चाहिए।
  2. जल स्रोत (Water Source): पर्याप्त और गुणवत्ता युक्त सिंचाई जल की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  3. पौधों का चयन (Plant Selection): क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल उन्नत किस्मों के स्वस्थ पौधों का चयन करें।
  4. रोपण विधि (Planting Method): उचित दूरी (जैसे वर्गाकार या षट्कोणीय विधि) और समय पर रोपण करें। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें ताकि प्रकाश और वायु संचार अच्छा हो।

प्रश्न 20 (भाग 5)

मानव आहार में कैल्सियम के महत्व का वर्णन कीजिये ।

Write the importance of calcium in Human diet. (2)

कैल्सियम मानव आहार का एक आवश्यक खनिज तत्व है। इसके महत्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. हड्डियों और दांतों का निर्माण: कैल्सियम हड्डियों और दांतों की संरचना का मुख्य घटक है। यह उन्हें मजबूत और स्वस्थ बनाता है।
  2. मांसपेशियों के संकुचन में सहायक: कैल्सियम मांसपेशियों के संकुचन और विश्राम की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  3. रक्त का थक्का जमाना: यह रक्त के थक्के जमाने की प्रक्रिया में सहायता करता है, जिससे चोट लगने पर रक्तस्राव रुकता है।
  4. तंत्रिका तंत्र का कार्य: कैल्सियम तंत्रिका आवेगों के संचरण में मदद करता है और हृदय की धड़कन को नियंत्रित करता है।

कैल्सियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस, दांतों की समस्याएं और मांसपेशियों में ऐंठन हो सकती है। दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और बादाम कैल्सियम के अच्छे स्रोत हैं।

प्रश्न 20 (भाग 6)

'फलोद्यान में पौधे लगाने की वर्गाकार एवं षट्‌्भुजाकार विधि का वर्णन कीजिये ।

Describe the square and hexagonal methods of planting in orchard. (1+1=2)

वर्गाकार विधि (Square Method): इस विधि में पौधों को एक वर्ग के कोनों पर लगाया जाता है। पंक्तियों और स्तंभों के बीच समान दूरी रखी जाती है। यह विधि सरल और सुविधाजनक है, जिससे निराई-गुड़ाई और सिंचाई आसान होती है। इसमें पौधों की संख्या = (क्षेत्रफल)/(दूरी × दूरी) होती है।

षट्कोणीय विधि (Hexagonal Method): इस विधि में पौधों को समबाहु त्रिभुज के कोनों पर लगाया जाता है, जिससे एक षट्कोणीय पैटर्न बनता है। इसमें पौधों के बीच समान दूरी रखी जाती है, लेकिन पंक्तियों के बीच की दूरी कम होती है। इस विधि में वर्गाकार विधि की तुलना में लगभग 15% अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे भूमि का अधिकतम उपयोग होता है। यह विधि अधिक उपज के लिए उपयुक्त है।

प्रश्न 22

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये :

(अ) पौधों को सहारा देना
(ब) पौधों को छाया देना ।

Write short notes on the following : (1+1=2)

(a) Staking to plants
(b) Shadowing to plants.

(अ) पौधों को सहारा देना (Staking to plants): पौधों को सहारा देने का अर्थ है कमजोर तने वाले पौधों (जैसे टमाटर, बीन्स, खीरा) को खूंटी या सपोर्ट से बांधना ताकि वे सीधे बढ़ सकें। इससे पौधे टूटने से बचते हैं, फल जमीन पर नहीं गिरते, और वायु संचार बेहतर होता है जिससे रोग कम लगते हैं।

(ब) पौधों को छाया देना (Shadowing to plants): छाया देने का अर्थ है नाजुक पौधों को तेज धूप, अत्यधिक गर्मी या ठंड से बचाने के लिए कृत्रिम छाया (जैसे जाली, पत्तियां, या शेड) प्रदान करना। इससे पौधों में पानी की कमी नहीं होती, पत्तियां जलती नहीं, और अंकुरण तथा विकास सुचारू रूप से होता है।

प्रश्न 23

"टी" कलिकायन का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिये ।

Draw a labelled diagram of "T" budding and describe it. (1+1=2)

वर्णन: 'टी' कलिकायन (T-budding) एक प्रकार की ग्राफ्टिंग विधि है जिसमें रूटस्टॉक (मूलवृन्त) की छाल पर 'T' आकार का चीरा लगाया जाता है। फिर वांछित किस्म के पौधे से एक कली (स्कड) को छाल सहित निकालकर इस चीरे में डाला जाता है। इसके बाद इसे पॉलीथिन या रस्सी से बांध दिया जाता है ताकि कली रूटस्टॉक से जुड़ जाए। यह विधि गुलाब, आम, नींबू आदि में प्रचलित है।

(चित्र: एक रूटस्टॉक पर 'T' आकार का चीरा, जिसमें कली डाली गई है। चित्र में रूटस्टॉक, कली, 'T' चीरा, और बांधने की सामग्री को लेबल किया गया है।)

प्रश्न 24

मूलवृन्त का चुनाव करते समय चार सावधानियाँ लिखिये ।

Write four precautions taken at the time of root stock selection.

  1. मूलवृन्त स्वस्थ, रोगमुक्त और मजबूत होना चाहिए।
  2. यह उस क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल होना चाहिए जहां इसे लगाया जाना है।
  3. मूलवृन्त की आयु उपयुक्त होनी चाहिए (न बहुत छोटा, न बहुत पुराना) ताकि कलिकायन सफल हो।
  4. यह वांछित किस्म (स्कड) के साथ संगत (compatible) होना चाहिए, अन्यथा ग्राफ्ट असफल हो सकता है।

प्रश्न 25

खरपतवार नियन्त्रण के छः निरोधी उपाय लिखिये ।

अथवा

खरपतवार के गुणन की कोई तीन विधियों का वर्णन कीजिये ।

Write six preventive measures of weed control. (6)

OR

Describe any three methods of weed multiplication. (3×1=3)

खरपतवार नियन्त्रण के छः निरोधी उपाय:

  1. बीज बोने से पहले खेत को अच्छी तरह जोतकर खरपतवार के बीजों को नष्ट करना।
  2. स्वच्छ और प्रमाणित बीजों का उपयोग करना ताकि खरपतवार के बीज न मिलें।
  3. फसल चक्र अपनाना, जिससे एक ही प्रकार के खरपतवार न पनपें।
  4. समय पर निराई-गुड़ाई करके खरपतवार को उखाड़ना।
  5. मल्चिंग (पुआल या प्लास्टिक से ढकना) करके खरपतवार के अंकुरण को रोकना।
  6. जैविक या रासायनिक खरपतवारनाशियों का उचित मात्रा में प्रयोग करना।

अथवा - खरपतवार के गुणन की तीन विधियाँ:

  1. बीज द्वारा गुणन: अधिकांश खरपतवार बीज पैदा करते हैं जो हवा, पानी या जानवरों द्वारा फैलते हैं।
  2. प्रकंद (Rhizome) द्वारा गुणन: कुछ खरपतवार (जैसे दूब) भूमिगत तनों से फैलते हैं जो टुकड़ों में बंटकर नए पौधे बनाते हैं।
  3. जड़ चूषक (Root suckers) द्वारा गुणन: कुछ खरपतवार जड़ों से नए अंकुर निकालकर फैलते हैं, जैसे कांटेदार झाड़ियां।

प्रश्न 26

जैम बनाने की विधि का वर्णन कीजिये ।

अथवा

केचप तैयार करते समय की कोई छः सावधानियाँ लिखिये ।

Describe the method of Jam preparation. (3)

OR

Write any six precautions during ketch-up preparation.

जैम बनाने की विधि:

  1. फलों का चयन और सफाई: पके, ताजे और स्वस्थ फल (जैसे आम, स्ट्रॉबेरी, खुबानी) लें। उन्हें अच्छी तरह धोकर छीलें और बीज निकाल दें।
  2. फलों को पकाना: फलों को टुकड़ों में काटकर एक बर्तन में थोड़ा पानी डालकर नरम होने तक पकाएं।
  3. चीनी मिलाना: पके फलों में बराबर मात्रा में चीनी (1:1 अनुपात) मिलाएं और अच्छी तरह मिलाएं।
  4. गाढ़ा होने तक पकाना: मिश्रण को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। जैम की स्थिरता जांचने के लिए एक बूंद ठंडे पानी में डालें – यदि वह फैलती नहीं है तो जैम तैयार है।
  5. पैकेजिंग: गर्म जैम को साफ, सूखे और स्टरलाइज़ किए गए जार में भरें और ढक्कन कसकर बंद करें। ठंडा होने पर लेबल लगाकर स्टोर करें।

अथवा - केचप तैयार करते समय छः सावधानियाँ:

  1. टमाटर पके, ताजे और रोगमुक्त हों।
  2. सभी बर्तन और उपकरण अच्छी तरह साफ और स्टरलाइज़ हों।
  3. चीनी, नमक और मसालों की मात्रा सही माप में डालें।
  4. मिश्रण को लगातार चलाते रहें ताकि जले नहीं।
  5. पकाने के बाद केचप को तुरंत गर्म जार में भरें और सील करें।
  6. जार को ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखें।

प्रश्न 27

अस्थाई फल परिरक्षण की कोई तीन विधियों का वर्णन कीजिये।

Describe any three methods of temporary fruit preservation.

उत्तर: अस्थाई फल परिरक्षण की तीन विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. शीत भंडारण (Cold Storage): फलों को कम तापमान (0-5°C) पर रखकर उनकी श्वसन दर को कम किया जाता है, जिससे वे लंबे समय तक ताजे रहते हैं।
  2. नियंत्रित वातावरण भंडारण (Controlled Atmosphere Storage): इसमें ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के स्तर को नियंत्रित करके फलों की उम्र बढ़ाई जाती है।
  3. रासायनिक परिरक्षण (Chemical Preservation): फलों पर पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट (KMS) या सोडियम बेंजोएट जैसे रसायनों का छिड़काव करके उन्हें खराब होने से बचाया जाता है।

प्रश्न 28

सिंचाई के दो सतही जल स्रोतों का वर्णन कीजिये।

Describe two surface water sources of Irrigation.

उत्तर: सिंचाई के दो सतही जल स्रोत निम्नलिखित हैं:

  1. नदियाँ (Rivers): नदियों से नहरों के माध्यम से पानी खेतों तक पहुँचाया जाता है। यह सिंचाई का प्रमुख स्रोत है, विशेषकर उत्तर भारत में।
  2. तालाब (Ponds): वर्षा जल को तालाबों में संग्रहित करके सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। यह छोटे क्षेत्रों के लिए उपयोगी है।

अथवा

सिंचाई के दो भूमिगत जल स्रोतों का वर्णन कीजिये।

Describe two underground water sources of Irrigation.

उत्तर: सिंचाई के दो भूमिगत जल स्रोत निम्नलिखित हैं:

  1. कुएँ (Wells): पारंपरिक कुएँ खोदकर भूजल निकाला जाता है। इसमें रस्सी और बाल्टी या पंप का उपयोग होता है।
  2. ट्यूबवेल (Tube Wells): गहरे बोरिंग के माध्यम से भूजल निकाला जाता है। यह अधिक कुशल और विश्वसनीय स्रोत है।

प्रश्न 29

अरहर की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत कीजिए:

Describe the scientific cultivation of Pigeon Pea under the following points:

उत्तर:

  1. भूमि की तैयारी (Soil preparation): अरहर के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। खेत की 2-3 बार जुताई करके पाटा लगाया जाता है ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
  2. बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर (Seed rate per ha): अरहर के लिए बीज दर 12-15 किग्रा प्रति हेक्टेयर होती है। बीज को बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना लाभदायक होता है।
  3. चार उन्नतशील किस्में (Four improved varieties): अरहर की चार उन्नत किस्में हैं: UPAS-120, Pusa-9, ICPL-87119 (अशोका), और मालवीय-13
  4. एक प्रमुख कीट (One important insect): अरहर का प्रमुख कीट फली छेदक (Pod borer) है। इसके नियंत्रण के लिए नीम के तेल का छिड़काव या क्विनालफॉस का उपयोग किया जाता है।

अथवा

ज्वार की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत कीजिए:

Describe the scientific cultivation of sorghum under the following points:

उत्तर:

  1. जलवायु (Climate): ज्वार गर्म और शुष्क जलवायु की फसल है। इसके लिए 25-35°C तापमान और 40-60 सेमी वार्षिक वर्षा उपयुक्त होती है।
  2. बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर (Seed rate per ha): ज्वार के लिए बीज दर 8-10 किग्रा प्रति हेक्टेयर होती है। बीज को बुवाई से पहले फफूंदनाशक से उपचारित करना चाहिए।
  3. चार उन्नतशील किस्में (Four improved varieties): ज्वार की चार उन्नत किस्में हैं: CSH-1, CSH-5, CSV-15, और SPV-462
  4. एक प्रमुख कीट (One important insect): ज्वार का प्रमुख कीट तना छेदक (Stem borer) है। इसके नियंत्रण के लिए कार्बोफ्यूरान दानों का प्रयोग या जैविक नियंत्रण किया जाता है।

प्रश्न 30: पपीता / आलू की वैज्ञानिक खेती

पपीता की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत कीजिये :

  1. उन्नतशील चार किस्में
  2. गलन रोग (Damping off disease)
  3. पौध रोपण (Plantation)
  4. पपेन (Papain)

अथवा

आलू की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत कीजिये :

  1. उन्नतशील चार किस्में
  2. बीजोपचार (Seed treatment)
  3. खाद एवं उर्वरक (Fertilizer and manure)
  4. मोजेक रोग (Mosaic disease)

(4 अंक)

पपीता की वैज्ञानिक खेती (विकल्प 1)

(अ) उन्नतशील चार किस्में

पपीता की चार उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:

  1. पूसा ड्वार्फ – कम ऊँचाई वाली, अधिक उपज देने वाली किस्म।
  2. पूसा जाइंट – ऊँची बढ़ने वाली, फल बड़े और मीठे होते हैं।
  3. कोइलम्बोरा-1 – अधिक पपेन उत्पादन के लिए उपयुक्त।
  4. हनी ड्यू – मीठे फलों वाली, रोग प्रतिरोधी किस्म।

(ब) गलन रोग (Damping off disease)

यह रोग पौधशाला में नवजात पौधों को प्रभावित करता है। इसके कारण तने का आधार भाग काला पड़कर गल जाता है और पौधा गिर जाता है।

नियंत्रण: बीजोपचार कैप्टान या थायरम से करें, जल निकासी उचित रखें, और पौधशाला में बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें।

(स) पौध रोपण (Plantation)

पपीता के पौधों को 2×2 मीटर की दूरी पर गड्ढों में लगाया जाता है। गड्ढों में पहले से सड़ी गोबर की खाद और मिट्टी भर दी जाती है। रोपण वर्षा ऋतु के प्रारंभ में या फरवरी-मार्च में किया जाता है। प्रति हेक्टेयर लगभग 2500 पौधे लगते हैं।

(द) पपेन (Papain)

पपेन एक एंजाइम है जो कच्चे पपीते के फल से प्राप्त होता है। इसे फल पर चीरा लगाकर निकलने वाले दूधिया रस (लेटेक्स) को सुखाकर बनाया जाता है। इसका उपयोग मांस को नरम करने, दवाइयों और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है। अधिक पपेन के लिए फलों को सुबह-सुबह चीरा लगाकर रस एकत्र किया जाता है।


आलू की वैज्ञानिक खेती (विकल्प 2)

(अ) उन्नतशील चार किस्में

आलू की चार उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:

  1. कुफरी चंद्रमुखी – अधिक उपज देने वाली, पछेती झुलसा रोग प्रतिरोधी।
  2. कुफरी बादशाह – मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त, कंद बड़े होते हैं।
  3. कुफरी ज्योति – जल्दी पकने वाली, लाल रंग के कंद।
  4. कुफरी सिंदूरी – उच्च उपज, मोजेक रोग सहनशील।

(ब) बीजोपचार (Seed treatment)

बीज कंदों को रोपण से पहले उपचारित करना आवश्यक है। कंदों को 0.2% घोल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) में 15-20 मिनट डुबोकर रखें। इससे कंदों में लगे फफूंद और जीवाणु नष्ट हो जाते हैं तथा अंकुरण अच्छा होता है।

(स) खाद एवं उर्वरक (Fertilizer and manure)

आलू की फसल के लिए 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर देनी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों में 120 किग्रा नाइट्रोजन, 80 किग्रा फॉस्फोरस और 100 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर देना लाभदायक होता है। आधी नाइट्रोजन और पूरी फॉस्फोरस-पोटाश बुवाई के समय, शेष नाइट्रोजन गुड़ाई के समय दें।

(द) मोजेक रोग (Mosaic disease)

यह एक विषाणु जनित रोग है जिसमें पत्तियों पर पीले-हरे धब्बे बनते हैं और पत्तियाँ मुड़ जाती हैं। पौधे की वृद्धि रुक जाती है और कंद छोटे रह जाते हैं।

नियंत्रण: रोग प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें, प्रभावित पौधों को हटा दें, और रोग वाहक कीटों (एफिड) का नियंत्रण करें। बीज कंद स्वस्थ पौधों से ही लें।