RBSE Class 12th 2013 Economics-SS-10-2013 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2013
Subject Economics-SS-10-2013
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2013 Economics-SS-10-2013

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Rajasthan Board Class 12th Economics-SS-10-2013 2013 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2013
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2013

अर्थशास्त्र
ECONOMICS

समय : 3¼ घण्टे     पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

No. of Questions — 30    No. of Printed Pages — 7

55-70--607. [88-570] [Turn over

खण्ड - अ (Section - A)

1. समष्टि अर्थशास्त्र में निर्णय कर्त्ता कौन होते हैं ?

Who are the macroeconomic decision makers?

उत्तर: समष्टि अर्थशास्त्र में निर्णय कर्त्ता सरकार, केंद्रीय बैंक (जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक), और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ (जैसे IMF, World Bank) होते हैं। ये समग्र अर्थव्यवस्था के स्तर पर नीतियाँ बनाते हैं, जैसे मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, और विनिमय दर नीति।

Answer: In macroeconomics, decision makers are the government, central bank (e.g., Reserve Bank of India), and international institutions (e.g., IMF, World Bank). They formulate policies at the aggregate level of the economy, such as monetary policy, fiscal policy, and exchange rate policy.

2. बजट रेखा क्या है ?

What is budget-line?

उत्तर: बजट रेखा (Budget Line) एक ऐसी रेखा है जो उपभोक्ता की आय और दो वस्तुओं की कीमतों को देखते हुए उन सभी संभावित संयोजनों को दर्शाती है जिन्हें उपभोक्ता अपनी पूरी आय खर्च करके खरीद सकता है। यह उपभोक्ता के बजट सेट की सीमा को दर्शाती है।

Answer: A budget line is a line that shows all possible combinations of two goods that a consumer can purchase by spending his entire income, given the prices of the goods and his income. It represents the boundary of the consumer's budget set.

3. वस्तु की कीमत में परिवर्तन के प्रतिस्थापन प्रभाव को परिभाषित कीजिए।

Define the substitution effect of a change in price of a good.

उत्तर: प्रतिस्थापन प्रभाव (Substitution Effect) वह परिवर्तन है जो किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर उपभोक्ता की वास्तविक आय को स्थिर रखते हुए उस वस्तु की मांग की मात्रा में होता है। जब किसी वस्तु की कीमत गिरती है, तो वह अन्य वस्तुओं की तुलना में सस्ती हो जाती है, जिससे उपभोक्ता उस वस्तु की अधिक खपत करता है और अन्य वस्तुओं की कम।

Answer: The substitution effect is the change in the quantity demanded of a good due to a change in its relative price, keeping the consumer's real income constant. When the price of a good falls, it becomes cheaper relative to other goods, leading the consumer to substitute it for other goods, thus increasing its demand.

4. उत्पादन फलन क्या है ?

What is production function?

उत्तर: उत्पादन फलन (Production Function) एक तकनीकी संबंध है जो किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन में प्रयुक्त आगतों (जैसे श्रम, पूंजी, भूमि) और प्राप्त निर्गत (उत्पादन) के बीच संबंध को दर्शाता है। इसे गणितीय रूप में Q = f(L, K) के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ Q उत्पादन, L श्रम, और K पूंजी है।

Answer: A production function is a technical relationship that shows the relationship between the inputs (such as labor, capital, land) used in the production of a good or service and the output produced. It is mathematically expressed as Q = f(L, K), where Q is output, L is labor, and K is capital.

राष्ट्रीय प्रयोज्य आय को स्पष्ट कीजिए।

Explain the National Disposable Income.

राष्ट्रीय प्रयोज्य आय (National Disposable Income): यह वह आय है जो किसी देश के निवासी वस्तुओं और सेवाओं पर उपभोग और बचत के लिए उपयोग कर सकते हैं। इसे निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है:

राष्ट्रीय प्रयोज्य आय = राष्ट्रीय आय (NNP at factor cost) + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (Net Indirect Taxes) + शेष विश्व से शुद्ध चालू अंतरण (Net Current Transfers from Rest of the World)

यह देश की कुल उपलब्ध आय को दर्शाता है जिसका उपयोग उपभोग और बचत के लिए किया जा सकता है।

तरलता अधिमान का क्या अभिप्राय है?

What is meant by liquidity preference?

तरलता अधिमान (Liquidity Preference): यह कीन्स के मुद्रा सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण भाग है। तरलता अधिमान से अभिप्राय लोगों की मुद्रा (नकदी) को अपने पास रखने की इच्छा से है। लोग तीन उद्देश्यों से मुद्रा रखते हैं:

  1. लेन-देन का उद्देश्य (Transaction Motive): दैनिक क्रय-विक्रय के लिए।
  2. सावधानी का उद्देश्य (Precautionary Motive): अप्रत्याशित खर्चों के लिए।
  3. सट्टेबाजी का उद्देश्य (Speculative Motive): ब्याज दर में परिवर्तन से लाभ कमाने के लिए।

मुद्रा की पूर्ति M₃ माप क्या है?

What is M₃ measure of money supply?

M₃ मुद्रा पूर्ति का माप: यह मुद्रा पूर्ति का एक व्यापक माप है। इसे निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है:

M₃ = M₁ + बैंकों की सावधि जमाएँ (Time Deposits with Banks)

जहाँ M₁ = करेंसी (नोट + सिक्के) + बैंकों में माँग जमाएँ + RBI के पास अन्य जमाएँ।

M₃ को कुल मुद्रा पूर्ति (Aggregate Monetary Resources) भी कहा जाता है।

यथार्थ माप को परिभाषित कीजिए।

Define ex post measure.

यथार्थ माप (Ex Post Measure): यह किसी आर्थिक चर का वास्तविक या प्राप्त मूल्य होता है जो किसी निश्चित अवधि के बाद मापा जाता है। यह पूर्वानुमान या योजना के विपरीत, वास्तविक घटित आंकड़ों पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, वास्तविक निवेश (Actual Investment) एक यथार्थ माप है।

विनियोग का क्या अभिप्राय है?

What is meant by investment?

विनियोग (Investment): अर्थशास्त्र में विनियोग से अभिप्राय पूंजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी, भवन, पुल, कारखाने) के स्टॉक में वृद्धि से है। यह भौतिक पूंजी निर्माण को दर्शाता है। इसे दो भागों में बांटा जाता है:

  1. स्थूल विनियोग (Gross Investment): कुल नई पूंजीगत वस्तुओं का निर्माण।
  2. शुद्ध विनियोग (Net Investment): स्थूल विनियोग - मूल्यह्रास (Depreciation)।

व्यापार अधिशेष क्या है?

What is trade surplus?

व्यापार अधिशेष (Trade Surplus): यह तब होता है जब किसी देश का निर्यात (Exports) उसके आयात (Imports) से अधिक होता है। इसे सकारात्मक व्यापार संतुलन (Positive Balance of Trade) भी कहा जाता है।

व्यापार अधिशेष = निर्यात का मूल्य - आयात का मूल्य (जब यह धनात्मक हो)


खण्ड - ब (Section - B)

11. सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण तथा आदर्शक आर्थिक विश्लेषण के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Differentiate between positive economic analysis and normative economic analysis.

आधार (Basis) सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण (Positive Analysis) आदर्शक आर्थिक विश्लेषण (Normative Analysis)
अर्थ (Meaning) यह "क्या है" (What is) का अध्ययन करता है। यह तथ्यों पर आधारित होता है। यह "क्या होना चाहिए" (What ought to be) का अध्ययन करता है। यह मूल्य निर्णयों पर आधारित होता है।
प्रकृति (Nature) वस्तुनिष्ठ (Objective) और वैज्ञानिक (Scientific) व्यक्तिपरक (Subjective) और नैतिक (Ethical)
परीक्षण (Testing) इसे तथ्यों द्वारा सत्य या असत्य सिद्ध किया जा सकता है। इसे तथ्यों द्वारा सत्य या असत्य सिद्ध नहीं किया जा सकता।
उदाहरण (Example) "भारत में बेरोजगारी दर 5% है।" "सरकार को बेरोजगारी कम करनी चाहिए।"

12. सामान्य वस्तुओं एवं निम्न स्तरीय वस्तुओं के बीच अन्तर कीजिए।

Distinguish between normal goods and inferior goods.

आधार (Basis) सामान्य वस्तुएँ (Normal Goods) निम्न स्तरीय वस्तुएँ (Inferior Goods)
आय प्रभाव (Income Effect) जब आय बढ़ती है, तो इन वस्तुओं की माँग बढ़ती है। (धनात्मक आय प्रभाव) जब आय बढ़ती है, तो इन वस्तुओं की माँग घटती है। (ऋणात्मक आय प्रभाव)
आय लोच (Income Elasticity) आय लोच धनात्मक (Positive) होती है (Ey > 0)। आय लोच ऋणात्मक (Negative) होती है (Ey < 0)।
उदाहरण (Example) गेहूँ, दूध, कपड़े, कारें आदि। मोटा अनाज (जैसे ज्वार, बाजरा), सेकंड-हैंड कपड़े आदि।
गुणवत्ता (Quality) सामान्यतः उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुएँ। निम्न गुणवत्ता वाली वस्तुएँ जिनका उपयोग आय कम होने पर किया जाता है।

खण्ड - स (Section - C)

20. अनधिमान वक्र का एक रेखाचित्र बनाइए।

Draw a diagram of an indifference curve.

उत्तर: अनधिमान वक्र (Indifference Curve) एक ऐसा वक्र है जो उपभोक्ता की उन सभी वस्तुओं के संयोजनों को दर्शाता है जो उसे समान संतुष्टि प्रदान करते हैं। यह वक्र मूल बिंदु की ओर उत्तल (convex to the origin) होता है।

(रेखाचित्र: एक नीचे की ओर झुका हुआ वक्र जो मूल बिंदु की ओर उत्तल है। X-अक्ष पर वस्तु X और Y-अक्ष पर वस्तु Y दर्शाई गई है।)

21. माँग की कीमत लोच को स्पष्ट कीजिए।

Explain the price elasticity of demand.

उत्तर: माँग की कीमत लोच (Price Elasticity of Demand) किसी वस्तु की माँग में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन और उसकी कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के अनुपात को कहते हैं। इसे निम्न सूत्र द्वारा मापा जाता है:

कीमत लोच = (माँग में प्रतिशत परिवर्तन) / (कीमत में प्रतिशत परिवर्तन)

यह लोच पाँच प्रकार की होती है: पूर्णतः लोचदार, अपेक्षाकृत लोचदार, इकाई लोचदार, अपेक्षाकृत बेलोचदार, और पूर्णतः बेलोचदार।

22. उपभोग वस्तुओं तथा पूँजीगत वस्तुओं के प्रत्येक के कोई दो उदाहरण दीजिए।

Give any two examples each of consumer goods and capital goods.

उत्तर:

  • उपभोग वस्तुएँ (Consumer Goods): (i) भोजन (Food), (ii) कपड़े (Clothes)
  • पूँजीगत वस्तुएँ (Capital Goods): (i) मशीनरी (Machinery), (ii) कारखाना (Factory)

23. वस्तु विनिमय के दो दोष लिखिए।

Write two drawbacks of barter system.

उत्तर: वस्तु विनिमय प्रणाली के दो प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं:

  • आवश्यकताओं का दोहरा संयोग (Double Coincidence of Wants): विनिमय के लिए दोनों पक्षों की आवश्यकताओं का एक-दूसरे से मेल खाना आवश्यक है, जो कठिन है।
  • मूल्य का सामान्य मापक का अभाव (Lack of Common Measure of Value): विभिन्न वस्तुओं के मूल्य की तुलना करने के लिए कोई सामान्य इकाई नहीं होती।

24. मुद्रा के दो कार्य उल्लेखित कीजिए।

Mention any two functions of money.

उत्तर: मुद्रा के दो प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

  • विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange): मुद्रा का उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।
  • मूल्य का मापक (Measure of Value): मुद्रा सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने का एक सामान्य पैमाना प्रदान करती है।

25. राजस्व घाटे की गणना कैसे की जाती है?

How is the revenue deficit calculated?

उत्तर: राजस्व घाटा (Revenue Deficit) की गणना निम्न सूत्र द्वारा की जाती है:

राजस्व घाटा = राजस्व व्यय - राजस्व प्राप्तियाँ

जहाँ राजस्व व्यय में सरकार के वर्तमान खर्च (जैसे वेतन, ब्याज भुगतान) शामिल हैं, और राजस्व प्राप्तियों में कर राजस्व और गैर-कर राजस्व (जैसे शुल्क, जुर्माना) शामिल हैं।

खण्ड - स (Section - C)

26. माँग वक्र के शिफ्ट को स्पष्ट कीजिए।

Explain the shifts in a demand curve.

उत्तर: माँग वक्र में शिफ्ट (Shift in Demand Curve) का अर्थ है कि वस्तु की कीमत में परिवर्तन के अलावा अन्य कारकों (जैसे उपभोक्ता की आय, स्वाद, संबंधित वस्तुओं की कीमत) के कारण माँग वक्र का बाएँ या दाएँ स्थानांतरित होना।

  • दाएँ शिफ्ट (Rightward Shift): जब माँग बढ़ती है (जैसे आय बढ़ने पर), तो वक्र दाएँ ओर खिसकता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक कीमत पर माँग अधिक होती है।
  • बाएँ शिफ्ट (Leftward Shift): जब माँग घटती है (जैसे आय घटने पर), तो वक्र बाएँ ओर खिसकता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक कीमत पर माँग कम होती है।

(रेखाचित्र: दो माँग वक्र D1 और D2 दर्शाए गए हैं, जहाँ D2 दाएँ शिफ्ट को और D1 बाएँ शिफ्ट को दर्शाता है।)

27. दीर्घकालीन लागत वक्रों को रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

Explain the long run cost curves with the help of a diagram.

उत्तर: दीर्घकाल में सभी उत्पादन के साधन परिवर्तनशील होते हैं। दीर्घकालीन लागत वक्रों में मुख्यतः दीर्घकालीन कुल लागत (LTC), दीर्घकालीन औसत लागत (LAC), और दीर्घकालीन सीमांत लागत (LMC) शामिल हैं।

  • दीर्घकालीन औसत लागत वक्र (LAC): यह U-आकार का होता है, जो पैमाने के बचत (Economies of Scale) और पैमाने के अबचत (Diseconomies of Scale) को दर्शाता है। प्रारंभ में उत्पादन बढ़ने पर लागत घटती है, फिर स्थिर होती है, और अंत में बढ़ने लगती है।
  • दीर्घकालीन सीमांत लागत वक्र (LMC): यह LAC वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।

(रेखाचित्र: X-अक्ष पर उत्पादन और Y-अक्ष पर लागत दर्शाई गई है। LAC एक U-आकार का वक्र है, और LMC इसे न्यूनतम बिंदु पर काटता है।)

22. तालिका में दी गई निर्गत एवं कुल उत्पादन के आधार पर सीमान्त उत्पादन व औसत उत्पादन की गणना कीजिए :

Calculate Marginal Product and Average Product on the basis of output and total product given in the table :

निर्गत (इकाइयाँ)
Output (units)
कुल उत्पादन
Total Product
सीमान्त उत्पादन
Marginal Product
औसत उत्पादन
Average Product
1 35 35 35.00
2 50 15 25.00
3 69 19 23.00
4 92 23 23.00

गणना स्पष्टीकरण:

  • सीमान्त उत्पादन (MP) = कुल उत्पादन में परिवर्तन / निर्गत में परिवर्तन
  • औसत उत्पादन (AP) = कुल उत्पादन / निर्गत की इकाइयाँ

गणना:

  • निर्गत 1: MP = 35 (प्रथम इकाई), AP = 35/1 = 35.00
  • निर्गत 2: MP = 50 - 35 = 15, AP = 50/2 = 25.00
  • निर्गत 3: MP = 69 - 50 = 19, AP = 69/3 = 23.00
  • निर्गत 4: MP = 92 - 69 = 23, AP = 92/4 = 23.00

22. औसत और सीमान्त वक्र के पदों में एकाधिकारी का सन्तुलन रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।

Explain the equilibrium of the monopolist in terms of the average and the marginal curve.

उत्तर: एकाधिकारी का सन्तुलन उस बिन्दु पर होता है जहाँ सीमान्त आय (MR) = सीमान्त लागत (MC) होती है और MC वक्र MR वक्र को नीचे से काटता है।

रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण:

  • X-अक्ष पर उत्पादन की मात्रा और Y-अक्ष पर आय/लागत दर्शाई जाती है।
  • औसत आय (AR) वक्र नीचे की ओर झुका होता है (क्योंकि एकाधिकारी अधिक बेचने के लिए कीमत घटाता है)।
  • सीमान्त आय (MR) वक्र AR वक्र से नीचे होता है और तेजी से झुकता है।
  • MC वक्र सामान्य U-आकार का होता है।
  • सन्तुलन बिन्दु E पर MR = MC होता है। इस बिन्दु पर उत्पादन स्तर OQ निर्धारित होता है।
  • कीमत (P) सन्तुलन उत्पादन पर AR वक्र से निर्धारित होती है (बिन्दु A पर)।
  • एकाधिकारी को कुल लाभ = (कीमत - औसत लागत) × उत्पादन मात्रा के बराबर होता है।

निष्कर्ष: एकाधिकारी का सन्तुलन MR = MC की शर्त पर आधारित होता है, जहाँ वह अधिकतम लाभ कमाता है।

23. आय के वर्तुल प्रवाह का वर्णन कीजिए।

Describe the circular flow of income.

उत्तर: आय का वर्तुल प्रवाह एक आर्थिक मॉडल है जो दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था में वस्तुओं, सेवाओं, और धन का प्रवाह किस प्रकार होता है।

मुख्य बिन्दु:

  • दो क्षेत्रीय मॉडल: इसमें परिवार और फर्म शामिल होते हैं।
  • परिवार फर्मों को उत्पादन के साधन (श्रम, भूमि, पूँजी) प्रदान करते हैं और बदले में आय (मजदूरी, लगान, ब्याज, लाभ) प्राप्त करते हैं।
  • फर्म परिवारों से प्राप्त साधनों का उपयोग कर वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न करती हैं और उन्हें परिवारों को बेचती हैं।
  • परिवार अपनी आय से फर्मों से वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदते हैं, जिससे धन का प्रवाह वापस फर्मों को होता है।
  • यह प्रक्रिया निरन्तर चलती रहती है, जिसे वर्तुल प्रवाह कहा जाता है।
  • तीन क्षेत्रीय मॉडल: इसमें सरकार भी शामिल होती है, जो कर लगाती है और व्यय करती है।
  • चार क्षेत्रीय मॉडल: इसमें विदेशी क्षेत्र (निर्यात और आयात) भी जुड़ता है।

महत्व: यह मॉडल राष्ट्रीय आय, उत्पादन, और व्यय के बीच सम्बन्ध को समझने में मदद करता है।

24. करेंसी जमा अनुपात को स्पष्ट कीजिए।

Explain the Currency Deposit Ratio.

उत्तर: करेंसी जमा अनुपात (Currency Deposit Ratio - CDR) वह अनुपात है जो जनता द्वारा रखी गई मुद्रा (करेंसी) और बैंकों में जमा राशि (डिपॉजिट) के बीच सम्बन्ध को दर्शाता है।

सूत्र: CDR = जनता के पास मुद्रा / बैंकों में माँग जमा

व्याख्या:

  • यह अनुपात बताता है कि जनता अपनी कुल तरल सम्पत्ति का कितना भाग नकद (करेंसी) के रूप में रखना पसंद करती है और कितना भाग बैंकों में जमा कराती है।
  • उच्च CDR का अर्थ है कि जनता अधिक नकद रखना पसंद करती है, जिससे बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम धन बचता है।
  • निम्न CDR का अर्थ है कि जनता बैंकों में अधिक जमा कराती है, जिससे बैंक अधिक ऋण दे सकते हैं और मुद्रा आपूर्ति बढ़ती है।
  • यह अनुपात मौद्रिक नीति और मुद्रा आपूर्ति के नियन्त्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उदाहरण: यदि जनता के पास ₹1000 करेंसी है और बैंकों में ₹2000 जमा है, तो CDR = 1000/2000 = 0.5 या 50%।

25. प्रभावी माँग का सिद्धान्त क्या है ?

What is the principle of effective demand ?

उत्तर: प्रभावी माँग का सिद्धान्त जॉन मेनार्ड कीन्स द्वारा प्रतिपादित किया गया था। यह सिद्धान्त बताता है कि किसी अर्थव्यवस्था में रोजगार और उत्पादन का स्तर समग्र माँग (Aggregate Demand) द्वारा निर्धारित होता है।

मुख्य बिन्दु:

  • प्रभावी माँग: वह माँग जो वास्तव में वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में परिणत होती है, प्रभावी माँग कहलाती है। यह समग्र माँग और समग्र पूर्ति के सन्तुलन बिन्दु पर निर्धारित होती है।
  • समग्र माँग (AD): अर्थव्यवस्था में सभी क्षेत्रों (उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय, शुद्ध निर्यात) द्वारा की गई कुल माँग।
  • समग्र पूर्ति (AS): अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य।
  • जब AD = AS होता है, तो अर्थव्यवस्था सन्तुलन में होती है और इस बिन्दु पर रोजगार का स्तर निर्धारित होता है।
  • यदि प्रभावी माँग कम है, तो बेरोजगारी होती है; यदि अधिक है, तो मुद्रास्फीति हो सकती है।
  • कीन्स के अनुसार, मन्दी के समय सरकार को सार्वजनिक व्यय बढ़ाकर प्रभावी माँग को बढ़ाना चाहिए।

निष्कर्ष: प्रभावी माँग का सिद्धान्त बताता है कि रोजगार और उत्पादन का निर्धारण माँग पक्ष से होता है, न कि पूर्ति पक्ष से।

26. सरकार को पूंजीगत प्राप्तियाँ एवं पूंजीगत व्यय को स्पष्ट कीजिए।

Explain the Capital Receipts and Capital Expenditure of the Government. (2+2)

पूंजीगत प्राप्तियाँ (Capital Receipts): ये वे प्राप्तियाँ हैं जो सरकार की देनदारियों (liabilities) को बढ़ाती हैं या सरकार की संपत्तियों (assets) को कम करती हैं। इनमें ऋण (loans), विनिवेश (disinvestment), और पूंजीगत संपत्तियों की बिक्री शामिल हैं। ये गैर-नियमित (non-recurring) होती हैं और सरकार के बजट में पूंजीगत खाते में दर्ज की जाती हैं।

पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): यह वह व्यय है जो सरकार की संपत्तियों (जैसे भवन, सड़क, मशीनरी) के निर्माण या अधिग्रहण पर किया जाता है, या जो सरकार की देनदारियों को कम करता है (जैसे ऋण चुकाना)। यह दीर्घकालिक (long-term) होता है और देश की उत्पादक क्षमता को बढ़ाता है।

27. नम्य विनिमय दर प्रणाली में विनिमय दर के निर्धारण को स्पष्ट कीजिए।

Explain the determination of exchange rate in a system of flexible exchange rates. (4)

नम्य विनिमय दर प्रणाली (Flexible Exchange Rate System) में विनिमय दर का निर्धारण मुद्रा की मांग और पूर्ति द्वारा होता है। इसे फ्लोटिंग विनिमय दर भी कहते हैं।

  • मांग (Demand): विदेशी मुद्रा की मांग आयात, विदेश यात्रा, विदेशी निवेश आदि के लिए होती है।
  • पूर्ति (Supply): विदेशी मुद्रा की पूर्ति निर्यात, विदेशी निवेश, प्रेषण (remittances) आदि से होती है।

जब मांग और पूर्ति बराबर होती है, तो संतुलन विनिमय दर (equilibrium exchange rate) निर्धारित होती है। यदि मांग बढ़ती है, तो विनिमय दर बढ़ती है (मुद्रा का अवमूल्यन), और यदि पूर्ति बढ़ती है, तो विनिमय दर घटती है (मुद्रा का मूल्यवृद्धि)। सरकार इस प्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करती।

खण्ड - D (Section - D)

28. परिवर्तनशील अनुपातों के नियम की व्याख्या रेखाचित्र की सहायता से कीजिए।

Discuss the law of variable proportions with the help of a diagram. (2+4)

अथवा (OR)

अल्पकाल एवं दीर्घकाल की अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए। औसत उत्पाद एवं सीमांत उत्पाद के मध्य सम्बन्ध की व्याख्या रेखाचित्र की सहायता से कीजिए।

Explain the concepts of short run and long run. Discuss the relationship between average product and marginal product with the help of a diagram. (2+2+2)

परिवर्तनशील अनुपातों का नियम (Law of Variable Proportions): यह नियम बताता है कि जब एक साधन (जैसे श्रम) को स्थिर साधन (जैसे भूमि) के साथ बढ़ाया जाता है, तो सीमांत उत्पाद (MP) और औसत उत्पाद (AP) में तीन चरण होते हैं:

  1. बढ़ते प्रतिफल (Increasing Returns): MP और AP दोनों बढ़ते हैं।
  2. घटते प्रतिफल (Diminishing Returns): MP घटने लगता है, AP अधिकतम होता है और फिर घटता है।
  3. ऋणात्मक प्रतिफल (Negative Returns): MP ऋणात्मक हो जाता है, AP घटता रहता है।

रेखाचित्र (Diagram): एक ग्राफ में X-अक्ष पर श्रम (श्रम इकाइयाँ) और Y-अक्ष पर उत्पाद (TP, AP, MP) दिखाएँ। TP पहले तेजी से बढ़ता है, फिर धीमी गति से, और अंत में गिरता है। AP और MP पहले बढ़ते हैं, फिर घटते हैं, और MP शून्य होकर ऋणात्मक हो जाता है।


अल्पकाल (Short Run): वह अवधि जिसमें कम से कम एक साधन स्थिर (fixed) होता है, जबकि अन्य साधन परिवर्तनशील (variable) होते हैं। फर्म केवल उत्पादन की मात्रा बदल सकती है, लेकिन पैमाना (scale) नहीं बदल सकती।

दीर्घकाल (Long Run): वह अवधि जिसमें सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं। फर्म उत्पादन का पैमाना बदल सकती है और नई तकनीक अपना सकती है।

औसत उत्पाद (AP) और सीमांत उत्पाद (MP) के बीच संबंध:

  • जब MP > AP, तो AP बढ़ता है।
  • जब MP = AP, तो AP अधिकतम होता है।
  • जब MP < AP, तो AP घटता है।
  • MP शून्य होने पर कुल उत्पाद (TP) अधिकतम होता है, और MP ऋणात्मक होने पर TP घटता है।

रेखाचित्र (Diagram): एक ग्राफ में X-अक्ष पर साधन इकाइयाँ और Y-अक्ष पर AP और MP दिखाएँ। AP वक्र उल्टे U आकार का होता है, और MP वक्र AP को उसके अधिकतम बिंदु पर काटता है।

29. फर्म के पूर्ति वक्र के निर्धारक तत्वों को स्पष्ट कीजिए।

Explain the determinants of supply curve of a firm. (4)

अथवा (OR)

उच्चतम निर्धारित कीमत को व्याख्या रेखाचित्र की सहायता से कीजिए।

Explain the price ceiling with the help of a diagram. (4)

फर्म के पूर्ति वक्र के निर्धारक तत्व (Determinants of Supply Curve):

  1. वस्तु की कीमत (Price of the good): कीमत बढ़ने पर पूर्ति बढ़ती है (धनात्मक संबंध)।
  2. उत्पादन की लागत (Cost of production): लागत बढ़ने पर पूर्ति घटती है (ऋणात्मक संबंध)।
  3. तकनीक (Technology): बेहतर तकनीक से पूर्ति बढ़ती है।
  4. सरकारी नीतियाँ (Government policies): कर, सब्सिडी, और नियम पूर्ति को प्रभावित करते हैं।
  5. अन्य वस्तुओं की कीमतें (Prices of other goods): यदि वैकल्पिक वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो फर्म उसका उत्पादन बढ़ा सकती है।
  6. फर्मों की संख्या (Number of firms): बाजार में अधिक फर्मों से कुल पूर्ति बढ़ती है।

उच्चतम निर्धारित कीमत (Price Ceiling): यह सरकार द्वारा निर्धारित वह अधिकतम कीमत है जो किसी वस्तु के लिए ली जा सकती है। यह संतुलन कीमत (equilibrium price) से कम होती है।

रेखाचित्र (Diagram): एक ग्राफ में X-अक्ष पर मात्रा और Y-अक्ष पर कीमत दिखाएँ। मांग वक्र (D) और पूर्ति वक्र (S) को दर्शाएँ। संतुलन बिंदु E पर कीमत Pe और मात्रा Qe होती है। उच्चतम निर्धारित कीमत Pc (Pe से कम) पर, मांग (Qd) पूर्ति (Qs) से अधिक होती है, जिससे अभाव (shortage) उत्पन्न होता है।

प्रश्न 30

भाग (क)

t किसी फर्म के पूर्ति वक्र के निर्धारकों की व्याख्या कीजिए।

(6 अंक)

फर्म के पूर्ति वक्र के निर्धारक:

  1. उत्पादन की लागत: कच्चे माल, श्रम, पूंजी आदि की कीमतें बढ़ने पर पूर्ति घटती है और घटने पर बढ़ती है।
  2. तकनीकी स्तर: उन्नत तकनीक से उत्पादन लागत कम होती है, जिससे पूर्ति बढ़ती है।
  3. वस्तु की कीमत: कीमत बढ़ने पर फर्म अधिक मात्रा में पूर्ति करती है (पूर्ति का नियम)।
  4. संबंधित वस्तुओं की कीमतें: स्थानापन्न वस्तुओं की कीमत बढ़ने पर फर्म उनका उत्पादन बढ़ा सकती है, जिससे मूल वस्तु की पूर्ति घटती है।
  5. फर्म के लक्ष्य: लाभ अधिकतमीकरण या बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने जैसे लक्ष्य पूर्ति को प्रभावित करते हैं।
  6. सरकारी नीतियां: कर, सब्सिडी, और नियम पूर्ति को प्रभावित करते हैं।

भाग (ख) – अथवा

t आरेख की सहायता से मूल्य-सीमा (Price Ceiling) की विवेचना कीजिए।

(2+4 अंक)

मूल्य-सीमा (Price Ceiling): यह सरकार द्वारा निर्धारित वह अधिकतम कीमत है जिससे अधिक पर कोई वस्तु नहीं बेची जा सकती। यह सामान्यतः संतुलन कीमत से कम होती है।

प्रभाव:

  • मांग (D) बढ़ जाती है, लेकिन पूर्ति (S) घट जाती है।
  • अतिरिक्त मांग (Excess Demand) उत्पन्न होती है।
  • कालाबाजारी और राशनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

आरेख: (एक सामान्य मांग-पूर्ति वक्र में, संतुलन बिंदु E पर कीमत Pe और मात्रा Qe होती है। मूल्य-सीमा Pc (< Pe) पर मांग Qd और पूर्ति Qs होती है, जहां Qd > Qs।)


भाग (ग)

राष्ट्रीय आय की गणना की मूल्य-वृद्धि विधि को संख्यात्मक उदाहरण की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

(4+2 अंक)

मूल्य-वृद्धि विधि (Value Added Method): इस विधि में प्रत्येक उत्पादन इकाई द्वारा उत्पादन के मूल्य में जोड़े गए मूल्य को जोड़कर राष्ट्रीय आय ज्ञात की जाती है। मूल्य-वृद्धि = उत्पादन का मूल्य – मध्यवर्ती उपभोग (कच्चा माल आदि)।

संख्यात्मक उदाहरण:

उत्पादन चरण बिक्री मूल्य (₹) मध्यवर्ती उपभोग (₹) मूल्य-वृद्धि (₹)
किसान (गेहूं) 500 0 500
मिल मालिक (आटा) 800 500 300
बेकरी (ब्रेड) 1200 800 400
कुल 1200

यहां कुल मूल्य-वृद्धि ₹1200 है, जो राष्ट्रीय आय में योगदान दर्शाती है।

भाग (घ) – अथवा

स्थिर चर एवं प्रवाह चर के मध्य अन्तर कीजिए। माल-सूची की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।

(2+4 अंक)

स्थिर चर (Stock Variable) और प्रवाह चर (Flow Variable) में अंतर:

आधार स्थिर चर प्रवाह चर
समय संदर्भ किसी विशेष समय बिंदु पर मापा जाता है एक समय अवधि में मापा जाता है
उदाहरण धन का स्टॉक, जनसंख्या, माल-सूची आय, व्यय, उत्पादन
प्रकृति स्थिर, समय के साथ बदल सकता है गतिशील, समय के साथ बदलता रहता है

माल-सूची (Inventory) की अवधारणा: माल-सूची से तात्पर्य किसी फर्म द्वारा उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग के लिए या बिक्री के लिए रखे गए कच्चे माल, अर्ध-निर्मित माल, और तैयार माल के स्टॉक से है। यह एक स्थिर चर है। माल-सूची में परिवर्तन (प्रारंभिक स्टॉक – अंतिम स्टॉक) को राष्ट्रीय आय गणना में पूंजी निर्माण के भाग के रूप में शामिल किया जाता है।