RBSE Class 12th 2013 Hindi (Compulsory)-SS-01-2013 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2013
Subject Hindi (Compulsory)-SS-01-2013
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2013 Hindi (Compulsory)-SS-01-2013

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Rajasthan Board Class 12th Hindi (Compulsory)-SS-01-2013 2013 solved Previous Year Question Papers

नामांक Roll No.

No. of Questions — 4 SsS—O—Hindi (C)

No. of Printed Pages — 1

जा माध्यमिक परीक्षा, 2013

SENIOR Secondary Examination, 2013

हिन्दी (अनिवार्य)

समय: 3 घण्टे
पूर्णांक: 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
  4. जिस प्रश्न के आ, ब, स, द भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।

55-.-07--फावां (0) [55-5067] [ Turn over

खण्ड-क

1. निम्न अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

यह अवसर है, स्वर्णिम सुयुग है,
खो न इसे नादानी में,
रंगरेलियों में, छेड़छाड़ में,
मस्ती में, मनमानी में ।
तरुण, विश्व की बागडोर ले
तू अपने कठोर कर में,
स्थापित कर रे मानवता
बर्बर नृशंस के उर में ।
दंभी को कर ध्वस्त धरा पर
अस्त-त्रस्त पाखंडों को,
करुणा शान्ति स्नेह सुख भर दे
बाहर में, अपने घर में ।
यौवन की ज्वाला वाले
दे अभयदान पद दलितों को,
तेरे चरण शरण में आहत
जग आश्वासन-श्वास गहे ॥

(क) “यह अवसर है, स्वर्णिम सुयुग है” कवि ने किस अवसर को स्वर्णिम सुयुग कहा है?

कवि ने युवावस्था के अवसर को स्वर्णिम सुयुग कहा है। यह वह समय है जब युवा अपनी ऊर्जा और शक्ति से समाज और विश्व में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। कवि युवाओं को इस सुनहरे अवसर को व्यर्थ न गँवाने की सलाह देता है।

(ख) विश्व की बागडोर किसके हाथों में शोभा पाती है? क्यों?

विश्व की बागडोर युवाओं के हाथों में शोभा पाती है। कवि के अनुसार, युवाओं में यौवन की ज्वाला, साहस और कठोर परिश्रम करने की क्षमता होती है। वे मानवता की स्थापना कर सकते हैं और समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर कर सकते हैं।

(ग) “बाहर में, अपने घर में” क्या भरने के लिए कहा गया है?

कवि ने “बाहर में, अपने घर में” करुणा, शान्ति, स्नेह और सुख भरने के लिए कहा है। अर्थात् युवाओं को चाहिए कि वे अपने व्यक्तिगत जीवन और समाज दोनों में इन मानवीय मूल्यों का प्रसार करें।

(घ) “दे अभयदान पद दलितों को” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति का आशय है कि युवाओं को दलितों, पीड़ितों और शोषितों को निर्भयता का वरदान देना चाहिए। उन्हें अपने चरणों की शरण में आकर आश्वासन और सुरक्षा प्राप्त करनी चाहिए। युवाओं का कर्तव्य है कि वे कमजोर वर्गों की रक्षा करें और उन्हें साहस प्रदान करें।

अपठित गद्यांश

धर्म का वास्तविक गुण तब प्रकट होता है जब हम जीवन का सत्य जानने के लिए और इस दुनिया की दया और क्षमा योग्य वस्तुओं में वृद्धि के लिए निरन्तर खोज करते हैं और सतत अनुसंधान करते हैं। अनुसंधान या खोज की लगन और उन उद्देश्यों का विस्तार जिन्हें हम प्रेम अर्पण करते हैं, — ये वास्तविक रूप में आध्यात्मिक मनुष्य के दो पक्ष होते हैं। हमें सत्य की खोज तब तक करते रहना चाहिए जब तक हम उसे पा न लें और उससे हमारा साक्षात्कार न हो। जो कुछ भी हो, हर मनुष्य में वही तत्त्व मौजूद है, अतः वह हमारे प्यार और हमारी सद्भावना का अधिकारी है। समाज और सारी सभ्यता केवल इस बात का प्रयास है कि मनुष्य आपस में सद्भाव के साथ रह सकें। हम इस प्रयास को तब तक बनाए रखते हैं जब तक सारी दुनिया हमारा अपना परिवार न बन जाए।

प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

  1. (अ) धर्म का वास्तविक गुण कब प्रकट होता है?

    धर्म का वास्तविक गुण तब प्रकट होता है जब हम जीवन के सत्य को जानने और दुनिया में दया व क्षमा जैसी वस्तुओं की वृद्धि के लिए निरंतर खोज और अनुसंधान करते हैं।

  2. (ब) आध्यात्मिक मनुष्य के दो पक्ष कौन-से हैं?

    आध्यात्मिक मनुष्य के दो पक्ष हैं – (1) अनुसंधान या खोज की लगन, और (2) उन उद्देश्यों का विस्तार जिन्हें हम प्रेम अर्पण करते हैं।

  3. (स) हर मनुष्य में कौन-सा तत्त्व मौजूद है?

    हर मनुष्य में वही तत्त्व मौजूद है जो सत्य की खोज और प्रेम का पात्र है, अतः वह हमारे प्यार और सद्भावना का अधिकारी है।

  4. (द) मनुष्यों को आपस में सद्भाव का प्रयास कब तक करते रहना चाहिए?

    मनुष्यों को आपस में सद्भाव का प्रयास तब तक करते रहना चाहिए जब तक सारी दुनिया हमारा अपना परिवार न बन जाए।

3. निम्न विषयों में से किसी एक पर लगभग 450 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए :

  1. (अ) अति सुख का वह दिन
  2. (ब) भ्रष्टाचार का महादानव
  3. (स) इंटरनेट – सूचना क्रान्ति
  4. (द) पर्यावरण संरक्षण और युवा

4. अपने विद्यालय में आयोजित “बाल दिवस-समारोह” अथवा “वन-महोत्सव” पर समाचार पत्र को प्रेषित करने के लिए एक रिपोर्ट लिखिए। (उत्तर-सीमा 100 शब्द)

5. निम्न में से किसी एक विषय पर आलेख लिखिए : (उत्तर-सीमा 100 शब्द)

  1. (अ) आतंकवाद
  2. (ब) स्त्री-शिक्षा की महत्ता
  3. (स) परीक्षा के दिन

6. निम्न विषयों में से किसी एक पर फीचर लिखिए : (उत्तर-सीमा 100 शब्द)

  1. (अ) उपभोक्तावाद और मध्यम वर्ग
  2. (ब) राष्ट्र उत्थान में युवाओं की भूमिका
  3. (स) जंगल-घटते मंगल

SS—OI—Hindi (C) [डड-हठा]

7. निम्न पठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 4×2=8

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है।)

जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास
पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास
जब वे दौड़ते हैं बेसुध
छतों को भी नरम बनाते हुए
दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए
जब वे पेंग भरते हुए चले आते हैं
डाल की तरह लचीले वेग से अकसर
छतों के खतरनाक किनारों तक
उस समय गिरने से बचाता है उन्हें
सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत
पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं महज एक धागे के सहारे
पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं
अपने रंध्रों के सहारे
अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से
और बच जाते हैं तब तो
और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं।

(A) बच्चे जन्म से ही अपने साथ कपास कैसे लाते हैं ? समझाइए।

बच्चे जन्म से ही अपने साथ कोमलता और लचीलापन लेकर आते हैं, जिसे कवि ने 'कपास' के रूप में चित्रित किया है। उनका शरीर स्वाभाविक रूप से मुलायम और लचीला होता है, जो उन्हें खेलने-कूदने और छतों पर दौड़ने में सहायता करता है। यह कपास उनकी सहजता और बचपन की कोमलता का प्रतीक है।

(ब) “दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए” से कवि का क्या तात्पर्य है ?

इस पंक्ति में कवि का तात्पर्य है कि बच्चे अपनी कल्पना और उत्साह से चारों ओर फैली दिशाओं को मृदंग (एक वाद्य यंत्र) की तरह बजाते हुए प्रतीत होते हैं। यह उनकी निर्मल, मस्त और स्वच्छंद मानसिकता को दर्शाता है, जहाँ वे अपने खेल-कूद और क्रियाकलापों से पूरे वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं।

(स) बच्चों को छतों से गिरने से कौन बचाता है ?

बच्चों को छतों से गिरने से उनकी माँ बचाती है। माँ अपने बच्चों की हर गतिविधि पर नज़र रखती है और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखती है। वह बच्चों को खतरों से आगाह करती है और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए सदैव तत्पर रहती है।

(द) “पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए ।

इस पंक्ति का आशय है कि बच्चे पतंग उड़ाते समय इतने तन्मय हो जाते हैं कि वे स्वयं को पतंगों के साथ उड़ता हुआ महसूस करते हैं। यह बच्चों की कल्पनाशीलता और उनके खेल में पूर्ण रूप से डूब जाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। वे अपनी कल्पना में पतंगों के साथ आकाश में विचरण करने लगते हैं।


अथवा

निम्न पठित काव्यांश को ध्यान-पूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

उहाँ राम लछिमनहि निहारी । बोले बचन मनुज अनुसारी ॥
अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ । राम उठाइ अनुज उर लायऊ ॥
सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ । बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ ॥
मम हित तुम्ह सहेउ बन माता । सहेहु बिपिन हिम आतप बाता ॥
सो अनुराग कहाँ अब भाई । उठहु न सुनि मम बचन बिकलाई ॥
जौं जनतेऊँ बन बंधु बिछोहू । पितु बचन तुम्ह नहिं ओहू ॥
सुत बित नारि भवन परिवारा । होंहि जाहिं जग बारहिं बारा ॥
अस बिचारि जागहु ताता । मिलइ न जगत सहोदर भ्राता ॥

(अ) “राम उठाइ अनुज उर लायऊ।” राम अनुज को हृदय से लगाकर क्यों विलाप कर रहे हैं ?

राम अनुज लक्ष्मण को हृदय से लगाकर विलाप कर रहे हैं क्योंकि लक्ष्मण मूर्छित हो गए हैं। राम को लगता है कि लक्ष्मण ने उनके लिए अनेक कष्ट सहे हैं और अब वे उनकी पीड़ा देखकर व्याकुल हैं। वे लक्ष्मण के प्रति अपने प्रेम और चिंता को प्रकट कर रहे हैं।

(ब) लक्ष्मण ने भाई राम के लिए क्या-क्या कष्ट सहे ?

लक्ष्मण ने भाई राम के लिए वनवास के दौरान अनेक कष्ट सहे। उन्होंने वन की ठंड, धूप और हवा को सहन किया। वे राम के हित के लिए सदैव तत्पर रहे और उनकी सेवा में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने राम के साथ वन में रहकर सभी कठिनाइयों का सामना किया।

(स) “जौं जनतेऊँ बन बंधु बिछोहू। पितु बचन तुम्ह नहिं ओहू।” राम के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए ।

राम के इस कथन का आशय है कि यदि उन्हें पहले से पता होता कि वन में भाई से बिछोह होगा, तो वे पिता के वचन का पालन नहीं करते। राम यह कहकर लक्ष्मण के प्रति अपने अगाध प्रेम और उनके बिछोह की पीड़ा को व्यक्त कर रहे हैं। वे लक्ष्मण के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते।

(द) संसार में बार-बार क्या-क्या मिलना सुलभ है, और क्या नहीं ? लिखिए ।

संसार में पुत्र, धन, स्त्री, भवन और परिवार बार-बार मिलना सुलभ है, अर्थात् ये सब पुनः प्राप्त किए जा सकते हैं। लेकिन सहोदर भाई (सगा भाई) बार-बार नहीं मिलता, अर्थात् भाई का स्नेह और संबंध अद्वितीय और अपूर्व है, जो दोबारा नहीं मिल सकता।

प्रश्न 8

निम्न पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

काव्यांश :

मुझसे मिलने को कौन विकल ?
मैं होऊँ किसके हित चंचल ?
यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विहलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है ।

(अ) उपर्युक्त पंक्तियों में निहित भाव-सौन्दर्य समझाइए।

उत्तर : इन पंक्तियों में कवि ने जीवन की नश्वरता और समय के तीव्र गति से बीतने का भाव व्यक्त किया है। कवि पूछता है कि उससे मिलने को कौन व्याकुल है और वह किसके लिए चंचल हो। यह प्रश्न उसके पैरों को शिथिल कर देता है और हृदय में व्याकुलता भर देता है, क्योंकि दिन तेजी से ढल रहा है। यहाँ जीवन की क्षणभंगुरता और अकेलेपन का मार्मिक चित्रण है।

(ब) उपर्युक्त पंक्तियों में निहित शिल्प-सौन्दर्य समझाइए।

उत्तर : शिल्प-सौन्दर्य की दृष्टि से इन पंक्तियों में प्रश्नात्मक शैली का प्रयोग किया गया है, जो आत्ममंथन को उजागर करती है। 'विकल', 'चंचल', 'शिथिल', 'विहलता' जैसे शब्दों की अनुप्रास योजना से लयात्मकता आई है। 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' पंक्ति की पुनरावृत्ति से भाव की गहराई बढ़ी है। भाषा सरल, प्रवाहमयी और भावानुकूल है।


अथवा

निम्न पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

काव्यांश :

दीवाली की शाम घर पुते और सजे
चीनी के खिलौने जगमगाते लावे
वो रूपवती मुखड़े पै इक नर्म दमक
बच्चे के हाथ में जलाती है दिए ।

(अ) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि द्वारा वर्णित भावों को समझाइए।

उत्तर : इन पंक्तियों में कवि ने दीवाली की शाम का सजीव चित्रण किया है। घर की सफेदी और सजावट, चीनी के खिलौनों की जगमगाहट, और स्त्री के मुख पर नर्म चमक का वर्णन है। अंत में बच्चे के हाथ में दीया जलाने का भाव दीवाली के उल्लास और पारिवारिक स्नेह को दर्शाता है। यहाँ उत्सव का आनंद और सौंदर्य स्पष्ट है।

(ब) उपर्युक्त पंक्तियों के शिल्प-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।

उत्तर : शिल्प-सौन्दर्य की दृष्टि से इन पंक्तियों में चित्रात्मकता प्रमुख है। 'पुते और सजे', 'जगमगाते लावे', 'नर्म दमक' जैसे शब्द-चित्र दृश्य को जीवंत बनाते हैं। अनुप्रास अलंकार (जैसे 'जगमगाते') और माधुर्य गुण है। भाषा सरल, सहज और भावपूर्ण है, जो दीवाली के माहौल को सजीव करती है।

प्रश्न 9

कविताओं की विषय-वस्तु से सम्बन्धित दिए गए तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द है)

  1. “कविता एक खेल है बच्चों के बहाने” “कविता के बहाने” पाठ में कविता और बच्चे मानव-समाज को क्या संदेश देते हैं ?

    कविता और बच्चे मानव-समाज को सरलता, सहजता और मासूमियत का संदेश देते हैं। वे बताते हैं कि जीवन में खेल-भावना और निश्छलता होनी चाहिए, न कि जटिलता और दिखावा।

  2. “तुझे बुलाता कृषक अधीर, ऐ विप्लव के वीर” कवि निराला ने विप्लव का वीर किसे कहा है ? और क्यों ?

    कवि निराला ने किसान को 'विप्लव का वीर' कहा है, क्योंकि किसान अपनी मेहनत और संघर्ष से समाज में क्रांति लाने की शक्ति रखता है। वह अधीर होकर बदलाव का आह्वान करता है।

  3. कवि उमाशंकर जोशी ने कागज के पन्ने को 'रस का अक्षयपात्र' क्यों कहा है ?

    कवि उमाशंकर जोशी ने कागज के पन्ने को 'रस का अक्षयपात्र' इसलिए कहा है क्योंकि यह कविता के माध्यम से अनंत रस (आनंद) प्रदान करता है। यह रस कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि हर बार पढ़ने पर नया अनुभव देता है।

प्रश्न 10

निम्न पठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

भक्तिन और मेरे बीच में सेवक-स्वामी का सम्बन्ध है, यह कहना कठिन है; क्योंकि ऐसा कोई स्वामी नहीं हो सकता, जो इच्छा होने पर भी सेवक को अपनी सेवा से हटा न सके और ऐसा कोई सेवक भी नहीं सुना गया, जो स्वामी के चले जाने का आदेश पाकर अवज्ञा से हँस दे। भक्तिन को नौकर कहना उतना ही असंगत है, जितना अपने घर में बारी-बारी से आने-जाने वाले अँधेरे-उजाले और आँगन में फूलने वाले गुलाब और आम को सेवक मानना। वे जिस प्रकार एक अस्तित्व रखते हैं, जिसे सार्थकता देने के लिए ही हमें सुख-दुख देते हैं, उसी प्रकार भक्तिन का स्वतंत्र व्यक्तित्व अपने विकास के परिचय के लिए ही मेरे जीवन को घेरे हुए है।

  1. भक्तिन और महादेवी वर्मा में सम्बन्ध क्या है ?

    भक्तिन और महादेवी वर्मा के बीच सेवक-स्वामी का सामान्य सम्बन्ध नहीं है। यह एक विशेष सम्बन्ध है जहाँ भक्तिन का स्वतंत्र व्यक्तित्व है और वह महादेवी के जीवन को अपने विकास के लिए घेरे हुए है।

  2. स्वामी के चले जाने का आदेश पाकर भक्तिन क्या प्रतिक्रिया करती है ?

    स्वामी के चले जाने का आदेश पाकर भक्तिन अवज्ञा से हँस देती है। वह आदेश का पालन नहीं करती, बल्कि उसकी उपेक्षा करती है, जो दर्शाता है कि उनके सम्बन्ध में कोई बंधन नहीं है।

  3. भक्तिन को नौकर कहना असंगत क्यों है ?

    भक्तिन को नौकर कहना असंगत है क्योंकि उसका स्वतंत्र व्यक्तित्व है, ठीक वैसे ही जैसे अँधेरा-उजाला या गुलाब-आम सेवक नहीं होते। वह अपने अस्तित्व को सार्थकता देने के लिए महादेवी के जीवन में है, न कि सेवा के बंधन में।

पठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न

निम्न पठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : 3x2=6

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

'शेर के बच्चे' का असल नाम था चाँद सिंह। वह अपने गुरु पहलवान बादल सिंह के साथ, पंजाब से पहले-पहल श्यामनगर मेले में आया था। सुंदर जवान, अंग प्रत्यंग से सुन्दरता टपक पड़ती थी। तीन दिनों में ही पंजाबी और पठान पहलवानों के गिरोह के अपनी जोड़ी और उम्र के सभी पहलवानों को पछाड़कर उसने 'शेर के बच्चे' की टाइटिल प्राप्त कर ली थी। इसलिए वह दंगल के मैदान में लंगोट लगाकर एक अजीब किलकारी भरकर छोटी दुलकी लगाया करता था। देशी नौजवान पहलवान, उससे लड़ने की कल्पना से भी घबराते थे। अपनी टाइटिल को सत्य प्रमाणित करने के लिए ही चाँद सिंह बीच-बीच में दहाड़ता फिरता था।
  1. “शेर के बच्चे” का असल नाम बताते हुए उसके गुरु का नाम बताइए।
    'शेर के बच्चे' का असल नाम चाँद सिंह था। उसके गुरु का नाम पहलवान बादल सिंह था। वह अपने गुरु के साथ पंजाब से श्यामनगर मेले में आया था।
  2. उसने 'शेर के बच्चे' की 'टाइटिल' कैसे प्राप्त की?
    चाँद सिंह ने तीन दिनों में पंजाबी और पठान पहलवानों के गिरोह के अपनी जोड़ी और उम्र के सभी पहलवानों को पछाड़कर 'शेर के बच्चे' की टाइटिल प्राप्त की थी।
  3. चाँद सिंह अपनी 'टाइटिल' को सत्य प्रमाणित कैसे करता था?
    चाँद सिंह अपनी टाइटिल को सत्य प्रमाणित करने के लिए बीच-बीच में दहाड़ता फिरता था। वह दंगल के मैदान में लंगोट लगाकर अजीब किलकारी भरकर छोटी दुलकी लगाता था।

पठित गद्यांश की विषयवस्तु पर आधारित प्रश्न

पठित गद्यांश की विषयवस्तु पर आधारित निम्न चार प्रश्नों में से तीन के उत्तर दीजिए : 3x3=9

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द है)

  1. “जो लोग बाज़ार से लाभ नहीं उठा सकते और न ही बाज़ार को सच्चा लाभ दे सकते हैं, वे लोग बाज़ार का बाज़ारूपन ही बढ़ाते हैं।” कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
    इस कथन का आशय है कि बाज़ार में केवल वे लोग सार्थक भूमिका निभाते हैं जो लाभ उठाने और देने में सक्षम हैं। जो लोग न तो बाज़ार से कुछ प्राप्त कर पाते हैं और न ही बाज़ार को कोई वास्तविक लाभ पहुँचा पाते हैं, वे केवल बाज़ार की भीड़ और अव्यवस्था को बढ़ाते हैं, उसकी गुणवत्ता या उपयोगिता में वृद्धि नहीं करते।
  2. “चार्ली” की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? संक्षेप में लिखिए।
    चार्ली की प्रमुख विशेषताएँ हैं: वह एक साहसी और स्वतंत्र व्यक्ति है। वह अपने निर्णय स्वयं लेता है और किसी के दबाव में नहीं आता। वह मानवीय मूल्यों को महत्व देता है और दूसरों की मदद करने में विश्वास रखता है। उसका व्यवहार सरल और स्पष्ट है, और वह जीवन की चुनौतियों का सामना बहादुरी से करता है।
  3. शिरीष को एक अद्भुत अवधूत क्यों कहा है? पाठ 'शिरीष के फूल' के आधार पर समझाइए।
    शिरीष को अद्भुत अवधूत इसलिए कहा गया है क्योंकि यह वृक्ष सभी मौसमों और परिस्थितियों में अपनी स्थिरता बनाए रखता है। यह गर्मी, सर्दी, वर्षा सभी में समान रहता है। इसके फूल बिना किसी आडंबर के खिलते हैं और बिना पछतावे के झड़ जाते हैं। यह संसार के प्रति अनासक्त भाव रखता है, जो एक अवधूत (संन्यासी) का लक्षण है।
  4. मनुष्य की क्षमता किन बातों पर निर्भर करती है? बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के “मेरी कल्पना का आदर्श-समाज” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
    बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के अनुसार, मनुष्य की क्षमता शिक्षा, स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक न्याय पर निर्भर करती है। जब समाज में सभी को समान अवसर मिलते हैं और कोई भेदभाव नहीं होता, तब मनुष्य अपनी पूरी क्षमता विकसित कर सकता है। आदर्श समाज में जाति, धर्म और लिंग के आधार पर कोई बंधन नहीं होना चाहिए।

खण्ड-घ

2. पाठ्यपुस्तक की विषय वस्तु पर आधारित निम्न तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो के उत्तर दीजिए :

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द है) 2×3=6

(a) “यशोधर बाबू की पत्नी मूल संस्कारों से किसी भी तरह आधुनिक नहीं है, फिर भी बच्चों की तरफदारी ने उन्हें माँठ बना डाला है।” कथन के समर्थन में अपने विचार लिखिए।

यह कथन सत्य है कि यशोधर बाबू की पत्नी पारंपरिक संस्कारों में पली-बढ़ी हैं और आधुनिक नहीं हैं। लेकिन बच्चों के प्रति अत्यधिक मोह और तरफदारी ने उन्हें मूर्ख (माँठ) बना दिया है। वे बच्चों की हर बात मान लेती हैं और उनके गलत कामों का समर्थन करती हैं, जिससे उनका विवेक खत्म हो गया है। यह अंधा प्रेम ही उन्हें माँठ बनाता है।

(ब) “अब तो ऐसा लगने लगा कि जितना अकेला रहूँ उतना अच्छा।” कथन के अनुसार आनन्द यादव को अकेला रहना कब से अच्छा लगने लगा? स्पष्ट कीजिए।

आनन्द यादव को अकेला रहना तब से अच्छा लगने लगा जब उन्होंने देखा कि लोग उनसे केवल स्वार्थ के लिए मिलते हैं। उनके साथी और परिचित उनका उपयोग करके चले जाते हैं। इससे उन्हें निराशा हुई और उन्हें लगा कि अकेले रहना ही बेहतर है, क्योंकि इससे झूठे रिश्तों और धोखे से बचा जा सकता है।

(स) “अतीत में दबे पाँव” पाठ के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता में खेती का वर्णन कीजिए।

सिंधु घाटी सभ्यता में खेती का विकसित रूप था। लोग गेहूँ, जौ, कपास, खजूर और तरबूज जैसी फसलें उगाते थे। वे बैलों से हल चलाते थे और सिंचाई के लिए नहरों का उपयोग करते थे। खेती उनकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार थी और वे अधिशेष अनाज को भंडारित करते थे।

3. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो का उत्तर दीजिए :

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द है) 2×1½=3

(अ) आनन्द यादव का पाठशाला में विश्वास क्यों बढ़ने लगा?

आनन्द यादव का पाठशाला में विश्वास इसलिए बढ़ने लगा क्योंकि वहाँ उन्हें ज्ञान मिलता था और शिक्षक उन्हें प्रोत्साहित करते थे। पाठशाला उनके लिए एक सुरक्षित और सीखने का स्थान बन गई थी।

(ब) मुअनजो-दड़ो के प्रसिद्ध जल कुंड की विशेषताएँ लिखिए।

मुअनजो-दड़ो का जल कुंड बहुत बड़ा और पकी ईंटों से बना था। इसमें सीढ़ियाँ थीं और पानी को साफ रखने के लिए तल पर चूना पत्थर का लेप किया गया था। यह सिंधु सभ्यता की उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली का प्रमाण है।

(स) पुरुषों ने औरतों पर किस आधार पर शासन किया है? 'डायरी के पन्ने' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

पुरुषों ने औरतों पर शारीरिक बल और सामाजिक परंपराओं के आधार पर शासन किया है। वे महिलाओं को कमजोर मानते थे और उन्हें घर तक सीमित रखा। पाठ में यह दिखाया गया है कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को अधिकार नहीं दिए गए।

4. विषयवस्तु पर आधारित दिए गए दो प्रश्नों में से किसी एक निबन्धात्मक प्रश्न का उत्तर दीजिए :

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द है)

(क) “आधुनिकता की ओर बढ़ता हमारा समाज एक ओर कई नयी उपलब्धियों को समेटे हुए है तो दूसरी ओर मनुष्य को मनुष्य बनाए रखने वाले मूल्य कहीं घिसते चले गए हैं।” 'सिल्वर वैडिंग' कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'सिल्वर वैडिंग' कहानी में आधुनिकता के प्रभाव को दर्शाया गया है। एक ओर समाज ने भौतिक सुख-सुविधाएँ और आर्थिक प्रगति पाई है, लेकिन दूसरी ओर पारिवारिक संबंधों, त्याग, प्रेम और सम्मान जैसे मानवीय मूल्य कमज़ोर पड़ गए हैं। कहानी में पति-पत्नी के बीच की दूरी और भावनात्मक अलगाव इसी मूल्यह्रास को दर्शाता है।

(ख) “युद्ध के चलते इतिहास बनते हैं, बदलते हैं और बिगड़ते भी हैं। युद्ध का दंश कई पीढ़ियों को भी झेलना पड़ता है।” 'डायरी के पन्ने' पाठ के आधार पर समझाइए।

उत्तर: 'डायरी के पन्ने' पाठ में युद्ध की भयावहता और उसके दीर्घकालिक प्रभावों को दर्शाया गया है। युद्ध न केवल इतिहास की दिशा बदलता है, बल्कि उसकी पीड़ा पीढ़ियों तक बनी रहती है। पाठ में युद्ध के कारण हुई तबाही, मानसिक आघात और जीवन की अनिश्चितता को स्पष्ट किया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करती है।