RBSE Class 12th 2014 Economics-SS-10-2014 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2014
Subject Economics-SS-10-2014
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2014 Economics-SS-10-2014

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Rajasthan Board Class 12th Economics-SS-10-2014 2014 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014

अर्थशास्त्र
ECONOMICS

समय : 3 घण्टे 15 मिनट     पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

No. of Questions — 30     No. of Printed Pages — 7

SS—550     [ Turn over

खण्ड - a / Section - A

1. केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था का अर्थ लिखिए।
Write the meaning of Centrally Planned Economy.

उत्तर: केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जिसमें सरकार या केन्द्रीय प्राधिकरण सभी आर्थिक निर्णय लेता है, जैसे कि क्या उत्पादन करना है, कैसे उत्पादन करना है, और किसके लिए उत्पादन करना है। इसमें संसाधनों का आवंटन योजना के अनुसार होता है, न कि बाजार तंत्र द्वारा।

2. अल्पकाल क्या है?
What is the short run period?

उत्तर: अल्पकाल वह समयावधि है जिसमें कम से कम एक उत्पादन का साधन (जैसे पूंजी, भूमि) स्थिर होता है, जबकि अन्य साधन (जैसे श्रम) परिवर्तनशील होते हैं। इस अवधि में फर्म अपनी उत्पादन क्षमता को पूरी तरह से नहीं बदल सकती।

3. अल्पाधिकार को परिभाषित कीजिए।
Define Oligopoly.

उत्तर: अल्पाधिकार वह बाजार संरचना है जिसमें कुछ ही बड़ी फर्में होती हैं, जो एक-दूसरे के निर्णयों पर निर्भर करती हैं। इसमें प्रवेश में बाधाएं होती हैं और उत्पाद विभेदीकरण या समरूप हो सकता है।

4. शून्य अधिमाँग एवं शून्य अधिपूर्ति की स्थिति स्पष्ट कीजिए।
Explain the situation of zero excess demand and zero excess supply.

उत्तर: शून्य अधिमाँग और शून्य अधिपूर्ति की स्थिति तब होती है जब बाजार में माँग और पूर्ति बराबर होती है, अर्थात् संतुलन की स्थिति। इसमें न तो अतिरिक्त माँग होती है और न ही अतिरिक्त पूर्ति; बाजार साफ हो जाता है और कीमत स्थिर रहती है।

5. मानवीय श्रम का पारिश्रमिक क्या है?
What is the remuneration of human labour?

उत्तर: मानवीय श्रम का पारिश्रमिक मजदूरी (Wages) है। यह श्रमिकों को उनकी सेवाओं के बदले में दिया जाने वाला भुगतान है, जो समय या उत्पादन के आधार पर निर्धारित होता है।

6. तरलता अधिमान का क्या तात्पर्य है?
What is meant by liquidity preference?

उत्तर: तरलता अधिमान का तात्पर्य लोगों की नकदी (तरल संपत्ति) रखने की इच्छा से है। कीन्स के अनुसार, लोग तीन कारणों से नकदी रखना पसंद करते हैं: लेन-देन का उद्देश्य, सावधानी का उद्देश्य, और सट्टेबाजी का उद्देश्य।

7. वस्तु विनिमय के कोई दो दोष बताइए।
Give any two deficiencies of barter system.

उत्तर: वस्तु विनिमय प्रणाली के दो प्रमुख दोष हैं:

  1. आवश्यकताओं का दोहरा संयोग (Double Coincidence of Wants): विनिमय के लिए दोनों पक्षों की एक-दूसरे की वस्तु की आवश्यकता होती है, जो हमेशा संभव नहीं होता।
  2. मूल्य का सामान्य मापक का अभाव (Lack of Common Measure of Value): विभिन्न वस्तुओं के मूल्य की तुलना करना कठिन होता है, क्योंकि कोई मानक इकाई नहीं होती।

बन्द अर्थव्यवस्था क्या है ?

What is a closed economy?

उत्तर: बन्द अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जो विदेशी व्यापार (निर्यात और आयात) में संलग्न नहीं होती है। इसमें केवल घरेलू उत्पादन, उपभोग और निवेश होता है, तथा अर्थव्यवस्था के सभी लेन-देन देश की सीमाओं के भीतर ही होते हैं।

यदि किसी अर्थव्यवस्था में अप्रत्यक्ष कर 25 करोड़ रु० एवं उपदान 5 करोड़ रु० हैं, तो निवल अप्रत्यक्ष कर की गणना कीजिए।

If indirect taxes and subsidies amounted to Rs. 25 Cr. and Rs. 5 Cr. respectively in an economy, calculate the net indirect taxes.

हल: निवल अप्रत्यक्ष कर = अप्रत्यक्ष कर – उपदान

निवल अप्रत्यक्ष कर = 25 करोड़ रु० – 5 करोड़ रु० = 20 करोड़ रु०

उत्तर: निवल अप्रत्यक्ष कर = 20 करोड़ रु०

टेलीविजन, ट्रैक्टर, पम्प सेट एवं भोजन में से कौन-सी पूँजीगत वस्तुएँ हैं ?

Which are the capital goods among television, tractor, pump set and food?

उत्तर: ट्रैक्टर और पम्प सेट पूँजीगत वस्तुएँ हैं, क्योंकि इनका उपयोग अन्य वस्तुओं के उत्पादन में किया जाता है। टेलीविजन उपभोक्ता वस्तु है और भोजन उपभोग की वस्तु है।


खण्ड - ब / Section - B

अर्थव्यवस्था की कोई दो केन्द्रीय समस्याएँ लिखिए।

Write any two central problems of an economy.

उत्तर: अर्थव्यवस्था की दो केन्द्रीय समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

  1. क्या उत्पादन करें? (What to produce?) – यह समस्या यह तय करने से संबंधित है कि सीमित संसाधनों के साथ कौन-सी वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पादित की जाएँ और कितनी मात्रा में।
  2. किसके लिए उत्पादन करें? (For whom to produce?) – यह समस्या उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के वितरण से संबंधित है, अर्थात् समाज के विभिन्न वर्गों में इनका बँटवारा कैसे किया जाए।

प्रत्यक्ष कर एवं अप्रत्यक्ष कर का क्या अभिप्राय है ?

What are meant by direct taxes and indirect taxes?

उत्तर:

  • प्रत्यक्ष कर (Direct Tax): वह कर जिसका भार उसी व्यक्ति पर पड़ता है जिस पर इसे लगाया जाता है, और इसे दूसरे पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। उदाहरण: आयकर, निगम कर।
  • अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax): वह कर जिसका भार एक व्यक्ति पर लगाया जाता है, लेकिन वह इसे दूसरे व्यक्ति पर स्थानांतरित कर सकता है। उदाहरण: वस्तु एवं सेवा कर (GST), बिक्री कर।

हासमान विस्थापन की दर समझाइए।

Explain the diminishing rate of substitution.

उत्तर: हासमान विस्थापन की दर (Diminishing Rate of Substitution) का अर्थ है कि जैसे-जैसे उपभोक्ता एक वस्तु की अधिक इकाइयों का उपभोग करता है, वह दूसरी वस्तु की कम इकाइयों का त्याग करने को तैयार होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी उपभोक्ता के पास सेब अधिक हैं और संतरे कम, तो वह एक अतिरिक्त सेब पाने के लिए कम संतरे छोड़ेगा। जैसे-जैसे सेब की मात्रा बढ़ती है, वह प्रत्येक अतिरिक्त सेब के लिए और भी कम संतरे छोड़ने को तैयार होगा। यह सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम पर आधारित है।

दिए गए रैखिक माँग वक्र AB पर बिन्दु A एवं B पर माँग की लोच क्या है ?

What is the elasticity of demand at the points A and B on the given linear demand curve AB?

चित्र: एक रैखिक माँग वक्र AB, जहाँ A ऊपरी सिरे पर और B निचले सिरे पर है। मूल्य अक्ष (Price) पर K अंकित है और मात्रा अक्ष (Quantity) पर O अंकित है।

उत्तर: रैखिक माँग वक्र पर, माँग की लोच बिन्दु के स्थान पर निर्भर करती है:

  • बिन्दु A पर: माँग की लोच > 1 (इकाई से अधिक लोचदार) होती है, क्योंकि यह वक्र के ऊपरी भाग पर स्थित है।
  • बिन्दु B पर: माँग की लोच < 1 (इकाई से कम लोचदार) होती है, क्योंकि यह वक्र के निचले भाग पर स्थित है।

स्पष्टीकरण: रैखिक माँग वक्र पर, मध्य बिन्दु पर लोच = 1 होती है। मध्य बिन्दु से ऊपर लोच > 1 और नीचे लोच < 1 होती है।

प्रश्न 20

दी गई सारणी में बेची गई मात्रा, कीमत एवं कुल सम्प्राप्ति के आधार पर औसत सम्प्राप्ति एवं सीमान्त सम्प्राप्ति की गणना कीजिए :

बेची गई मात्रा कीमत कुल सम्प्राप्ति औसत सम्प्राप्ति सीमान्त सम्प्राप्ति
1 9 9 9
2 8 16 8 7

Calculate the marginal revenue and average revenue on the basis of quantity sold, price and total revenue given in the table :

हल / Solution:

औसत सम्प्राप्ति (Average Revenue) = कुल सम्प्राप्ति / बेची गई मात्रा

  • जब मात्रा = 1: AR = 9 / 1 = 9
  • जब मात्रा = 2: AR = 16 / 2 = 8

सीमान्त सम्प्राप्ति (Marginal Revenue) = कुल सम्प्राप्ति में परिवर्तन / मात्रा में परिवर्तन

  • जब मात्रा = 1: MR = 9 - 0 = 9 (प्रारंभिक)
  • जब मात्रा = 2: MR = (16 - 9) / (2 - 1) = 7

अतः सारणी में औसत सम्प्राप्ति क्रमशः 9 और 8 है, तथा सीमान्त सम्प्राप्ति क्रमशः 9 और 7 है।

प्रश्न 21

सरकार रहित अर्थव्यवस्था में अन्तिम वस्तु की कुल प्रत्याशित उपभोग व्यय 250 करोड़ एवं कुल प्रत्याशित निवेश व्यय 100 करोड़ हैं तो प्रत्याशित कुल माँग ज्ञात कीजिए।

Calculate the ex-ante aggregate demand, when ex-ante consumption expenditure is Rs. 250 Cr. and the ex-ante investment expenditure is Rs. 100 Cr. in an economy without a government.

हल / Solution:

सरकार रहित अर्थव्यवस्था में प्रत्याशित कुल माँग (Ex-ante Aggregate Demand) = प्रत्याशित उपभोग व्यय + प्रत्याशित निवेश व्यय

AD = C + I = 250 करोड़ + 100 करोड़ = 350 करोड़

अतः प्रत्याशित कुल माँग 350 करोड़ रुपये है।

प्रश्न 22

विदेशी व्यापार आधिक्य एवं व्यापार घाटे में अंतर समझाइए।

Differentiate between foreign trade surplus and trade deficit.

उत्तर / Answer:

क्र. विदेशी व्यापार आधिक्य (Trade Surplus) व्यापार घाटा (Trade Deficit)
1. निर्यात का मूल्य आयात के मूल्य से अधिक होता है। आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक होता है।
2. व्यापार संतुलन धनात्मक होता है। व्यापार संतुलन ऋणात्मक होता है।
3. देश की विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है। देश की विदेशी मुद्रा भंडार में कमी होती है।

प्रश्न 23

विदेशी विनिमय बाजार का अर्थ समझाइए। इस बाजार के कोई दो प्रतिभागियों का उल्लेख कीजिए।

Explain the meaning of foreign exchange market. Mention any two participants of the market.

उत्तर / Answer:

विदेशी विनिमय बाजार (Foreign Exchange Market): यह वह बाजार है जहाँ विभिन्न देशों की मुद्राओं का क्रय-विक्रय किया जाता है। इसमें डॉलर, यूरो, पाउंड, येन आदि मुद्राओं का आदान-प्रदान होता है। यह बाजार वैश्विक स्तर पर कार्य करता है और विनिमय दर निर्धारित करता है।

दो प्रतिभागी (Two Participants):

  1. वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks): ये विदेशी मुद्रा के क्रय-विक्रय में मुख्य भूमिका निभाते हैं और ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करते हैं।
  2. केन्द्रीय बैंक (Central Bank): यह विनिमय दर को स्थिर रखने और विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करता है।

खण्ड - स (Section - C)

प्रश्न 24

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के चार उपकरण बताइए।

Write four instruments of monetary policy of Reserve Bank of India.

उत्तर / Answer:

  1. बैंक दर (Bank Rate): वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालिक ऋण प्रदान करता है।
  2. नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio - CRR): वह अनुपात जो बैंकों को अपनी कुल जमा का एक निश्चित भाग RBI के पास रखना अनिवार्य है।
  3. वैधानिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio - SLR): वह अनुपात जो बैंकों को अपनी कुल जमा का एक निश्चित भाग तरल संपत्तियों (जैसे सरकारी प्रतिभूतियाँ) में रखना अनिवार्य है।
  4. खुले बाजार की क्रियाएँ (Open Market Operations - OMO): RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय करके अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करना।

प्रश्न 25

सरकारी घाटे को कम करने के कोई दो उपायों का वर्णन कीजिए।

Describe any two measures to reduce the Government Deficit.

उत्तर / Answer:

  1. सरकारी व्यय में कमी (Reduction in Government Expenditure): सरकार अनावश्यक खर्चों जैसे सब्सिडी, प्रशासनिक व्यय, और गैर-योजनागत व्यय को कम कर सकती है। इससे घाटा कम होगा।
  2. कर राजस्व में वृद्धि (Increase in Tax Revenue): सरकार कर दरों में वृद्धि करके या कर दायरे का विस्तार करके अधिक राजस्व एकत्र कर सकती है। इससे सरकारी आय बढ़ेगी और घाटा कम होगा।

21. निवेश का अर्थ उदाहरण सहित समझाइए। उत्पादक के निवेश सम्बन्धी निर्णय का निर्धारक कारक क्या है ?

Explain the meaning of investment with an example. What is the deciding factor of investment decision ?

निवेश का अर्थ (Meaning of Investment): निवेश से तात्पर्य उस व्यय से है जो पूँजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी, भवन, उपकरण) की खरीद या सृजन पर किया जाता है, ताकि भविष्य में अधिक उत्पादन और आय अर्जित की जा सके। यह मौजूदा उपभोग को स्थगित करके भविष्य की उत्पादन क्षमता बढ़ाने का कार्य है।

उदाहरण (Example): एक किसान द्वारा नई ट्रैक्टर खरीदना निवेश है, क्योंकि इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और भविष्य में अधिक फसल प्राप्त होगी।

निवेश निर्णय का निर्धारक कारक (Deciding Factor of Investment Decision): उत्पादक के निवेश सम्बन्धी निर्णय का मुख्य निर्धारक कारक पूँजी की सीमान्त उत्पादकता (Marginal Efficiency of Capital - MEC) और ब्याज दर (Rate of Interest) की तुलना है। यदि पूँजी की सीमान्त उत्पादकता ब्याज दर से अधिक है, तो निवेश लाभदायक होगा; अन्यथा नहीं।

22. तरलता पाश क्या है ? रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

What is liquidity trap ? Explain with the help of a diagram.

तरलता पाश (Liquidity Trap): तरलता पाश एक ऐसी स्थिति है जिसमें ब्याज दर बहुत नीचे (लगभग शून्य) होने के कारण लोग मुद्रा (नकदी) को ही अपने पास रखना पसंद करते हैं, चाहे मुद्रा की आपूर्ति कितनी भी बढ़ा दी जाए। इस स्थिति में मौद्रिक नीति अप्रभावी हो जाती है क्योंकि लोग अतिरिक्त मुद्रा को बॉण्ड या अन्य परिसंपत्तियों में निवेश नहीं करते।

रेखाचित्र (Diagram): (एक सरल रेखाचित्र का वर्णन) — एक ग्राफ लें जिसमें X-अक्ष पर मुद्रा की मात्रा (Money Supply) और Y-अक्ष पर ब्याज दर (Rate of Interest) हो। मुद्रा की माँग वक्र (Liquidity Preference Curve) नीचे की ओर झुका होता है। जब ब्याज दर बहुत कम (जैसे r0) पर पहुँच जाती है, तो मुद्रा माँग वक्र पूर्णतः लोचदार (क्षैतिज) हो जाता है। इस क्षैतिज भाग को तरलता पाश कहते हैं। मुद्रा आपूर्ति बढ़ाने पर भी ब्याज दर में कोई कमी नहीं आती।

23. सकल घरेलू उत्पाद को तीन विधियों — व्यय, आय एवं उत्पाद द्वारा आरेखीय चित्रण कीजिए।

Give a diagrammatic representation of Gross Domestic Product by the three methods — Expenditure, Income and Product.

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तीन विधियाँ:

  • व्यय विधि (Expenditure Method): GDP = C + I + G + (X - M), जहाँ C = निजी उपभोग व्यय, I = निजी निवेश व्यय, G = सरकारी व्यय, X = निर्यात, M = आयात।
  • आय विधि (Income Method): GDP = कर्मचारियों का पारिश्रमिक + परिचालन अधिशेष (लाभ, किराया, ब्याज) + मिश्रित आय + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर।
  • उत्पाद विधि (Product Method): GDP = सभी उद्योगों के सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added) का योग।

आरेखीय चित्रण (Diagrammatic Representation): (एक वृत्त आरेख या तीन अतिव्यापी वृत्तों का वर्णन) — तीनों विधियाँ एक ही GDP के विभिन्न पहलुओं को मापती हैं। एक सरल आरेख में तीन वृत्त बनाएँ: पहले वृत्त में "व्यय विधि (C+I+G+X-M)", दूसरे में "आय विधि (कारक भुगतान)", तीसरे में "उत्पाद विधि (मूल्य वर्धन)" लिखें। तीनों वृत्त एक केंद्रीय बिंदु "GDP" को घेरे हुए हों, जो दर्शाता है कि तीनों विधियाँ समान GDP का मापन करती हैं।

24. पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार की कोई चार शर्तें लिखिए।

Write any four conditions of perfectly competitive market.

  1. बड़ी संख्या में क्रेता और विक्रेता (Large number of buyers and sellers): बाजार में इतने अधिक क्रेता और विक्रेता होते हैं कि कोई एक व्यक्तिगत रूप से बाजार मूल्य को प्रभावित नहीं कर सकता।
  2. समरूप उत्पाद (Homogeneous product): सभी फर्मों द्वारा बेचा जाने वाला उत्पाद एक-दूसरे का पूर्ण स्थानापन्न होता है; गुणवत्ता, आकार, रंग आदि में कोई अंतर नहीं होता।
  3. मुक्त प्रवेश और निकास (Free entry and exit): कोई भी फर्म बिना किसी बाधा के बाजार में प्रवेश कर सकती है या बाजार से बाहर निकल सकती है।
  4. पूर्ण जानकारी (Perfect knowledge): सभी क्रेताओं और विक्रेताओं को बाजार की स्थितियों, कीमतों और उत्पादों की पूर्ण जानकारी होती है।

25. दी गई सारणी में अज्ञात औसत स्थिर लागत, औसत परिवर्ती लागत, अल्पकालीन औसत लागत एवं अल्पकालीन सीमान्त लागत मूल्यों की गणना कीजिए :

Calculate the missing values of average fixed cost, average variable cost, short run period average cost and short run period marginal cost in the given table :

निर्गत (इकाइयाँ) कुल स्थिर लागत कुल परिवर्ती लागत कुल लागत औसत स्थिर लागत औसत परिवर्ती लागत अल्पकालीन औसत लागत अल्पकालीन सीमान्त लागत
0 40 40
1 40 20 60 ? 20 60 20
2 40 36 76 20 ? ? ?
3 40 48 88 3.33 ? 29.33 ?

गणना (Calculation):

  • निर्गत 1 इकाई पर:
    • औसत स्थिर लागत (AFC) = कुल स्थिर लागत / निर्गत = 40 / 1 = 40
    • औसत परिवर्ती लागत (AVC) = 20 (दिया है)
    • अल्पकालीन औसत लागत (SAC) = 60 (दिया है)
    • अल्पकालीन सीमान्त लागत (SMC) = 20 (दिया है)
  • निर्गत 2 इकाई पर:
    • औसत स्थिर लागत (AFC) = 40 / 2 = 20 (दिया है)
    • औसत परिवर्ती लागत (AVC) = कुल परिवर्ती लागत / निर्गत = 36 / 2 = 18
    • अल्पकालीन औसत लागत (SAC) = कुल लागत / निर्गत = 76 / 2 = 38
    • अल्पकालीन सीमान्त लागत (SMC) = (कुल लागत में परिवर्तन) / (निर्गत में परिवर्तन) = (76 - 60) / (2 - 1) = 16
  • निर्गत 3 इकाई पर:
    • औसत स्थिर लागत (AFC) = 40 / 3 ≈ 13.33 (दिया गया 3.33 गलत है; सही मान 13.33 है)
    • औसत परिवर्ती लागत (AVC) = कुल परिवर्ती लागत / निर्गत = 48 / 3 = 16
    • अल्पकालीन औसत लागत (SAC) = कुल लागत / निर्गत = 88 / 3 ≈ 29.33 (दिया है)
    • अल्पकालीन सीमान्त लागत (SMC) = (88 - 76) / (3 - 2) = 12

पूर्ण सारणी (Completed Table):

निर्गत TFC TVC TC AFC AVC SAC SMC
0 40 0 40
1 40 20 60 40 20 60 20
2 40 36 76 20 18 38 16
3 40 48 88 13.33 16 29.33 12

प्रश्न 26

एक वस्तु की कीमत ₹0 है एवं पूर्ति 00 इकाइयाँ हैं। कीमत बढ़कर ₹12 होने पर पूर्ति बढ़कर 50 इकाइयाँ हो जाती हैं। पूर्ति की कीमत लोच ज्ञात कीजिए।

The price of a commodity is Rs. 0 and the supply is 00 units. If the price increases to Rs. 12 and supply increases to 50 units, calculate the price elasticity of supply.

हल: पूर्ति की कीमत लोच (Es) = (ΔQ / ΔP) × (P / Q)

यहाँ, प्रारंभिक कीमत (P) = ₹0, प्रारंभिक पूर्ति (Q) = 0 इकाइयाँ

नई कीमत (P₁) = ₹12, नई पूर्ति (Q₁) = 50 इकाइयाँ

ΔP = 12 - 0 = 12, ΔQ = 50 - 0 = 50

चूँकि प्रारंभिक कीमत शून्य है, पूर्ति की कीमत लोच अपरिभाषित है। हालांकि, यदि हम प्रतिशत परिवर्तन विधि का उपयोग करें:

Es = (ΔQ / Q) / (ΔP / P) = (50/0) / (12/0) → अनंत (∞)

उत्तर: पूर्ति की कीमत लोच अनंत (∞) है।

प्रश्न 27

यदि पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में एक वस्तु की कीमत ₹20 प्रति इकाई है, तो दी हुई सारणी में कुल संप्राप्ति एवं सीमांत संप्राप्ति अनुसूचियों की गणना कीजिए:

If the price of a good in a perfectly competitive market is Rs. 20 per unit, compute the total revenue and marginal revenue schedules in the given table.

बेची गई मात्रा (Sold quantity) कुल संप्राप्ति (Total revenue) सीमांत संप्राप्ति (Marginal revenue)
0 0 -
1 20 20
2 40 20
3 60 20

व्याख्या: पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में कीमत स्थिर (₹20) होती है। कुल संप्राप्ति (TR) = कीमत × मात्रा। सीमांत संप्राप्ति (MR) = TR में परिवर्तन / मात्रा में परिवर्तन। चूँकि कीमत स्थिर है, MR = कीमत = ₹20 प्रति इकाई।

प्रश्न 28 (खण्ड-द / Section-D)

माँग वक्र में शिफ्ट तथा माँग वक्र की दिशा में गति को रेखाचित्रों की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

Explain shift in the demand curve and movement along the demand curve with the help of diagrams.

अथवा / OR

बजट रेखा एवं अनधिमान वक्र से आपका क्या अभिप्राय है? अनधिमान मानचित्र को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।

What do you mean by the budget line and indifference curve? Explain the indifference map with the help of a diagram.

माँग वक्र में शिफ्ट तथा माँग वक्र की दिशा में गति

माँग वक्र की दिशा में गति (Movement along the demand curve): यह तब होता है जब वस्तु की कीमत में परिवर्तन होता है, जबकि अन्य कारक स्थिर रहते हैं। कीमत घटने पर माँग बढ़ती है (नीचे की ओर गति) और कीमत बढ़ने पर माँग घटती है (ऊपर की ओर गति)।

माँग वक्र में शिफ्ट (Shift in the demand curve): यह तब होता है जब कीमत के अलावा अन्य कारक (जैसे आय, स्वाद, संबंधित वस्तुओं की कीमत) बदलते हैं। दाईं ओर शिफ्ट (माँग में वृद्धि) और बाईं ओर शिफ्ट (माँग में कमी) हो सकती है।

(रेखाचित्र: एक ग्राफ में दो वक्र दिखाएँ - एक मूल माँग वक्र D1 और दूसरा शिफ्ट के बाद D2। कीमत में परिवर्तन को एक ही वक्र पर बिंदु A से B तक गति के रूप में दिखाएँ।)


बजट रेखा एवं अनधिमान वक्र

बजट रेखा (Budget Line): यह उन सभी संयोजनों को दर्शाती है जो उपभोक्ता अपनी आय से दी गई कीमतों पर खरीद सकता है। यह एक सीधी रेखा होती है जो दो वस्तुओं के बीच व्यापार-बंद (trade-off) दिखाती है।

अनधिमान वक्र (Indifference Curve): यह उन सभी संयोजनों को दर्शाता है जो उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्रदान करते हैं। यह मूल बिंदु की ओर उत्तल (convex) होता है।

अनधिमान मानचित्र (Indifference Map): यह विभिन्न अनधिमान वक्रों का एक समूह है, जहाँ उच्च वक्र अधिक संतुष्टि दर्शाता है। उपभोक्ता का संतुलन बजट रेखा और उच्चतम संभव अनधिमान वक्र के स्पर्श बिंदु पर होता है।

(रेखाचित्र: एक ग्राफ में तीन अनधिमान वक्र (IC1, IC2, IC3) और एक बजट रेखा दिखाएँ। संतुलन बिंदु E पर बजट रेखा IC2 को स्पर्श करती है।)

प्रश्न 29

स्थिर आगत एवं परिवर्त आगत में अन्तर बताइए। हासमान सीमान्त उत्पाद नियम को स्पष्ट कीजिए।

अथवा

अल्पकालीन लागत वक्रों को रेखाचित्रों की सहायता से व्याख्या कीजिए।


Differentiate between fixed input and variable input. Explain the law of Diminishing Marginal Product. (1+2+2)

OR

Discuss the short run cost curves with the help of diagrams. (6)

समाधान (Solution)

स्थिर आगत (Fixed Input) और परिवर्त आगत (Variable Input) में अंतर:

  • स्थिर आगत: वे आगत जिनकी मात्रा अल्पकाल में नहीं बदली जा सकती, जैसे—भूमि, भवन, मशीनरी। इन पर व्यय स्थिर रहता है, चाहे उत्पादन शून्य हो या अधिक।
  • परिवर्त आगत: वे आगत जिनकी मात्रा उत्पादन स्तर के अनुसार बदली जा सकती है, जैसे—कच्चा माल, श्रम, बिजली। इन पर व्यय उत्पादन के साथ बदलता है।

हासमान सीमान्त उत्पाद नियम (Law of Diminishing Marginal Product): यह नियम बताता है कि जब एक स्थिर आगत (जैसे मशीन) के साथ एक परिवर्त आगत (जैसे श्रम) की अतिरिक्त इकाइयाँ लगाई जाती हैं, तो एक बिंदु के बाद सीमान्त उत्पाद (अतिरिक्त उत्पादन) घटने लगता है। उदाहरण: एक किसान एक निश्चित भूमि पर अधिक मजदूर लगाता है, तो प्रारंभ में उत्पादन बढ़ता है, लेकिन बाद में प्रत्येक अतिरिक्त मजदूर का योगदान कम हो जाता है।

अथवा (OR) के लिए:

अल्पकालीन लागत वक्र (Short Run Cost Curves): अल्पकाल में कम से कम एक आगत स्थिर होती है। मुख्य लागत वक्र हैं:

  • कुल स्थिर लागत (TFC): क्षैतिज रेखा, उत्पादन के साथ नहीं बदलती।
  • कुल परिवर्त लागत (TVC): उत्पादन बढ़ने पर बढ़ती है, पहले धीमी गति से, फिर तेजी से।
  • कुल लागत (TC): TFC + TVC, TVC के समान आकार लेकिन TFC ऊपर शुरू होती है।
  • औसत स्थिर लागत (AFC): उत्पादन बढ़ने पर घटती है, आयताकार अतिपरवलय।
  • औसत परिवर्त लागत (AVC): U-आकार, पहले घटती है फिर बढ़ती है।
  • औसत कुल लागत (ATC): U-आकार, AVC से ऊपर, न्यूनतम बिंदु पर AVC से मिलती है।
  • सीमान्त लागत (MC): U-आकार, ATC और AVC के न्यूनतम बिंदुओं को काटती है।

(रेखाचित्र स्वयं बनाएँ: X-अक्ष पर उत्पादन, Y-अक्ष पर लागत। TFC क्षैतिज, TVC और TC ऊपर की ओर, AFC नीचे की ओर, AVC, ATC, MC U-आकार।)

प्रश्न 30

सकल घरेलू उत्पाद एवं कल्याण में सम्बन्ध की व्याख्या कीजिए।

अथवा

निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए:

  1. सकल घरेलू उत्पाद
  2. सकल राष्ट्रीय उत्पाद
  3. निवल राष्ट्रीय उत्पाद
  4. कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद
  5. वैयक्तिक आय
  6. व्यक्तिगत प्रयोज्य आय

Discuss the relationship between Gross Domestic Product and Welfare. (6)

OR

Explain the following concepts: (6×1)

  1. Gross Domestic Product
  2. Gross National Product
  3. Net National Product
  4. Net National Product at Factor Cost
  5. Personal Income
  6. Personal Disposable Income

समाधान (Solution)

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और कल्याण (Welfare) में सम्बन्ध:

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का बाजार मूल्य है। सामान्यतः GDP बढ़ने से कल्याण बढ़ता है, क्योंकि अधिक वस्तुएँ और सेवाएँ उपलब्ध होती हैं। लेकिन यह सम्बन्ध पूर्ण नहीं है:

  • सकारात्मक पहलू: GDP वृद्धि से रोजगार, आय, और उपभोग बढ़ता है, जिससे जीवन स्तर सुधरता है।
  • सीमाएँ:
    • GDP असमान वितरण को नहीं दर्शाता—यदि आय केवल कुछ लोगों तक सीमित है, तो कल्याण नहीं बढ़ता।
    • GDP में गैर-बाजार गतिविधियाँ (जैसे गृहिणी का कार्य) शामिल नहीं हैं।
    • प्रदूषण, अपराध, या तनाव जैसे नकारात्मक पहलू GDP बढ़ा सकते हैं लेकिन कल्याण घटा सकते हैं।
    • GDP मानव विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, या पर्यावरणीय स्थिरता को नहीं मापता।

अतः GDP और कल्याण में सकारात्मक सम्बन्ध है, लेकिन यह अपूर्ण है। कल्याण के लिए GDP के साथ-साथ अन्य संकेतकों (जैसे HDI, Gini गुणांक) पर भी ध्यान देना चाहिए।


अथवा (OR) के लिए:

अवधारणाओं की व्याख्या:

  1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP): किसी देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य। इसमें देशी और विदेशी दोनों कंपनियाँ शामिल हैं।
  2. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP): किसी देश के निवासियों द्वारा एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य। GNP = GDP + विदेशों से शुद्ध कारक आय।
  3. निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP): GNP में से मूल्यह्रास (पूंजी की घिसावट) घटाने पर प्राप्त मूल्य। NNP = GNP - मूल्यह्रास।
  4. कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP at Factor Cost): NNP को बाजार मूल्य के बजाय उत्पादन के कारकों (भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) को दिए गए भुगतान के रूप में मापा जाता है। NNP at Factor Cost = NNP at Market Price - अप्रत्यक्ष कर + सब्सिडी।
  5. वैयक्तिक आय (Personal Income): व्यक्तियों और परिवारों द्वारा सभी स्रोतों से प्राप्त कुल आय, जिसमें मजदूरी, लाभांश, ब्याज, किराया, और सरकारी हस्तांतरण शामिल हैं। यह राष्ट्रीय आय से कॉर्पोरेट कर, अवितरित लाभ, और सामाजिक सुरक्षा योगदान घटाकर तथा हस्तांतरण जोड़कर प्राप्त किया जाता है।
  6. व्यक्तिगत प्रयोज्य आय (Personal Disposable Income): वैयक्तिक आय में से व्यक्तिगत कर (जैसे आयकर) और गैर-कर भुगतान (जैसे जुर्माना) घटाने के बाद बची आय, जिसे व्यक्ति उपभोग या बचत पर खर्च कर सकता है।