RBSE Class 12th 2014 Hindi Sahitya-SS-21-2014 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2014 |
| Subject | Hindi Sahitya-SS-21-2014 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2014 Hindi Sahitya-SS-21-2014
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Rajasthan Board Class 12th Hindi Sahitya-SS-21-2014 2014 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014
हिन्दी साहित्य
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- उत्तर यथासम्भव निर्धारित शब्द-सीमा में ही सुपाठ्य लिखें।
प्रश्नों की संख्या : 4 प्रश्न-पत्र कोड : SS-21-2014 मुद्रित पृष्ठ : 7
नोट : यह प्रश्न-पत्र हिन्दी साहित्य विषय का है।
पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द तक)
कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया, सोई उसके पास
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त ।
दाने आये घर के अन्दर, कई दिनों के बाद
धुआँ उठा आँगन से ऊपर, कई दिनों के बाद
चमक उठी घर भर की आँखें, कई दिनों के बाद
कौए ने खुजलायी पूँछ, कई दिनों के बाद ।
-
(क) कविता का शीर्षक लिखिए ।
कविता का शीर्षक "दाने आये" या "कई दिनों के बाद" है। यह कविता अकाल या भुखमरी के बाद अनाज आने पर घर में आई खुशी का वर्णन करती है।
-
(ख) “शिकस्त' शब्द का अर्थ लिखिए ।
"शिकस्त" शब्द का अर्थ है – हार, पराजय, या टूटन। यहाँ इसका अर्थ है कि चूहों की हालत बहुत खराब हो गई थी, वे भूख से बेहाल थे।
-
(ग) “आँखें चमक उठना' मुहावरे का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए ।
अर्थ: अत्यधिक प्रसन्न होना या खुशी से भर जाना।
वाक्य प्रयोग: परीक्षा में प्रथम आने की खबर सुनते ही माता-पिता की आँखें चमक उठीं।
-
(घ) “चूल्हा रोया और चक्की रही उदास’ से क्या आशय है ?
इस पंक्ति का आशय है कि घर में अनाज न होने के कारण चूल्हा नहीं जलता था (मानो रो रहा हो) और चक्की भी बेकार पड़ी रहती थी (उदास)। यह अकाल या भुखमरी की स्थिति को दर्शाता है जब घर में खाना पकाने के लिए कुछ नहीं था।
-
(ड) घर में दाने आने के बाद क्या-क्या परिवर्तन दिखाई दिए ?
घर में दाने आने के बाद निम्नलिखित परिवर्तन दिखाई दिए:
- आँगन से धुआँ उठने लगा (चूल्हा जलने लगा)।
- घर के सभी सदस्यों की आँखें खुशी से चमक उठीं।
- कौए ने भी प्रसन्नता से अपनी पूँछ खुजलाई।
- पूरे घर में खुशी और उल्लास का माहौल बन गया।
2. निम्न गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द तक)
हमारे साहित्य और संस्कृति के मूल में यह अवलोकन रहा है कि जीव या मानव बुराई से अच्छाई की ओर, हीनता से उच्चता की ओर, असंयम से संयम की ओर, हिंसा से अहिंसा की ओर और पशुता से मनुष्यता की ओर बढ़ा है। जीवन में यदि असत् का, बुरे का बहिष्कार न हो और सत् की, अच्छे की प्रतिष्ठा न की जाय, तो उस जीवन का कोई मूल्य नहीं रहता। अतएव जीवनदायी साहित्य को सत्साहित्य कह सकते हैं और सत्साहित्य वही ठहरा जो सद्भावों, सत्शक्तियों को जगाए, हमेशा सत्प्रेरणाएँ दे और सत्क्रियाओं में हमें लगाए। और आज का हमारा, हमारे समाज का, हमारे राष्ट्र और विराट रूप में हमारे मानव-जगत का जो अभाव है, उसे दूर करना ही आज के सत्साहित्य का उद्देश्य होना चाहिए।
-
(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: सत्साहित्य का महत्व / सत्साहित्य की आवश्यकता
-
(ख) 'सत्' का पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर: 'सत्' का पर्यायवाची शब्द 'अच्छा' या 'सत्य' है।
-
(ग) "बहिष्कार" शब्द का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: 'बहिष्कार' का अर्थ है – निकाल देना, त्याग करना या अलग कर देना।
वाक्य प्रयोग: समाज में बुराइयों का बहिष्कार करना आवश्यक है। -
(घ) जीवन का महत्व बनाए रखने के लिए हमें किन-किन बातों से बचना चाहिए?
उत्तर: जीवन का महत्व बनाए रखने के लिए हमें असत् (बुराई), हीनता, असंयम, हिंसा और पशुता से बचना चाहिए। इनके बहिष्कार के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं रहता।
-
(ड) आप सत्साहित्य किसे मानेंगे?
उत्तर: सत्साहित्य वह है जो सद्भावों और सत्शक्तियों को जगाए, सत्प्रेरणाएँ दे और हमें सत्क्रियाओं में लगाए। यह जीवनदायी होता है और समाज, राष्ट्र तथा मानव-जगत के अभावों को दूर करने का उद्देश्य रखता है।
खण्ड-ब
3. किसी एक विषय पर लगभग 450 शब्दों में निबंध लिखिए : 8
- जल-संरक्षण
- राजस्थान में पर्यटन
- बेरोजगारी
- मिलावट का रोग
4. जिला शिक्षा अधिकारी, भीलवाड़ा की ओर से सचिव, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर को राजकीय माध्यमिक विद्यालय रूपगढ़, भीलवाड़ा में बोर्ड परीक्षा केन्द्र की स्वीकृति हेतु कार्यालयी पत्र लिखिए । 4
अथवा
अपने आपको सुन्दपुरा, जालौर, राजस्थान मानते हुए अपने थानाधिकारी को मोहल्ले में आये दिन होने वाली चोरियों की शिकायत करते हुए एक पत्र लिखिए ।
5. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 20-25 शब्दों में लिखिए :
-
(क) खबरें कितने प्रकार की होती हैं ?
खबरें मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं: स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय। इनके अतिरिक्त खेल, मनोरंजन, व्यापार आदि श्रेणियाँ भी होती हैं।
-
(ख) एक अच्छे और सफल साक्षात्कार के लिए क्या आवश्यक है ?
एक अच्छे साक्षात्कार के लिए प्रश्नों की स्पष्टता, साक्षात्कारकर्ता का धैर्य, सुनने की क्षमता और विषय की गहरी जानकारी आवश्यक है।
-
(ग) जनसंचार का सबसे पुराना माध्यम क्या है ?
जनसंचार का सबसे पुराना माध्यम मुद्रण (समाचार पत्र) है, जिसने सूचना को व्यापक जनता तक पहुँचाने का कार्य किया।
-
(घ) फोन-इन का क्या आशय होता है ?
फोन-इन एक कार्यक्रम शैली है जिसमें श्रोता या दर्शक फोन द्वारा सीधे प्रश्न पूछते हैं और विशेषज्ञ उत्तर देते हैं।
6. बिम्ब किसे कहते हैं ? कविता में बिम्बों के महत्व को समझाइए । (उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द) 4
बिम्ब कविता में शब्दों द्वारा चित्रात्मक प्रस्तुति है। कविता में बिम्बों का महत्व भावनाओं को सजीव बनाना, पाठक को दृश्य अनुभव देना और अर्थ को गहराई प्रदान करना है।
7. निम्न में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
(उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द)
भर गया है ज़हर से
संसार जैसे हार खाकर,
देखते हैं लोग लोगों को,
सही परिचय न पाकर,
बुझ गई है लौ पृथा की,
जल उठो फिर सींचने को ।
व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि नागार्जुन द्वारा रचित कविता 'आखिरी हथियार' से ली गई हैं। इनमें कवि कहता है कि संसार में चारों ओर द्वेष और अविश्वास का जहर भर गया है। लोग एक-दूसरे को देखते तो हैं, पर सही पहचान नहीं पाते। मानवता की लौ बुझ गई है, फिर भी कवि आशा करता है कि हमें उठकर इस लौ को फिर से जलाना चाहिए।
अथवा
पूरन प्रेम को मंत्र महा पन जा मधि सोधि सुधारि है लेख्यौ ।
ताही के चारू चरित्र विचित्रनि यों पचिकै रचि राखि बिसेख्यौ ।
ऐसो हियो हितपत्र पवित्र जो आन-कथा न कहूँ अवरेख्यौ ।
सो घन आनंद जान अजान चित टूक फट पर बाँचि न देख्यौ ।
व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियाँ घनानंद कवि द्वारा रचित हैं। इनमें कवि कहता है कि पूर्ण प्रेम का महान मंत्र उसने अपने हृदय में शोध करके लिखा है। उसी प्रेम के सुंदर और विचित्र चरित्रों को उसने संजोकर रखा है। उसका हृदय ऐसा पवित्र पत्र है जिसमें किसी और की कथा नहीं लिखी गई। वह घनानंद कहते हैं कि यह प्रेम-पत्र न जानने वाला नहीं पढ़ सकता, चाहे वह टुकड़े-टुकड़े क्यों न हो जाए।
8. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए :
(क) श्री रघुनाथ-प्रताप की बात तुम्हें दस कंठ न जानि परी ।
पंक्ति में निहित भाव सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर: इस पंक्ति में भाव सौन्दर्य यह है कि रावण (दस कंठ) श्री राम के प्रताप को नहीं समझ पाया। रावण अत्यंत बलशाली और ज्ञानी था, फिर भी वह राम के वास्तविक स्वरूप और पराक्रम को नहीं जान सका। यह अज्ञानता ही उसके विनाश का कारण बनी। कवि ने यहाँ राम की महिमा और रावण के अहंकार का सुंदर चित्रण किया है।
(ख) हेम-कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे ।
मदिर ऊँघते रहते जब -- जगकर रचनी भर तारा ।
उक्त पंक्तियों के शिल्प-सौन्दर्य को लिखिए ।
उत्तर: इन पंक्तियों का शिल्प-सौन्दर्य अत्यंत मनोहारी है। 'हेम-कुंभ' (स्वर्ण कलश) रूपक अलंकार है जो उषा की सुनहरी किरणों को दर्शाता है। 'भरती ढुलकाती सुख मेरे' में अनुप्रास अलंकार है। 'मदिर ऊँघते रहते' में मानवीकरण है। कवि ने प्रकृति के सौंदर्य को अत्यंत सजीव और कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया है।
9. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए :
(क) जो है वह खड़ा है,
बिना किसी स्तम्भ के ।
काव्य पंक्ति में चित्रित कवि के मन्तव्य को स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि का मन्तव्य है कि सत्य और आत्मविश्वास को किसी बाहरी सहारे की आवश्यकता नहीं होती। जो वास्तविक और सशक्त है, वह स्वयं ही खड़ा रहता है। यहाँ 'स्तम्भ' बाहरी आश्रय या झूठे आधार का प्रतीक है। कवि ने आत्मनिर्भरता और सत्य की शक्ति को रेखांकित किया है।
(ख) यह दीप अकेला स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो ।
पंक्तियों के प्रतीकार्थ को लिखिए ।
उत्तर: इन पंक्तियों में 'दीप' व्यक्ति का प्रतीक है जो अकेला होते हुए भी स्नेह और गर्व से भरा है। 'पंक्ति' समाज या समूह का प्रतीक है। कवि का कहना है कि अकेला व्यक्ति चाहे कितना भी आत्मनिर्भर क्यों न हो, उसे समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाहिए। यह सामूहिकता और एकता का संदेश देता है।
प्रश्न 0. निम्न गद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : (उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द)
प्रथम गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या
संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश 'संवदिया' पाठ से लिया गया है, जिसके लेखक चतुरसेन शास्त्री हैं।
प्रसंग: संवदिया हरगोबिन को बड़ी बहुरिया का संदेश सुनाकर सो गया है, लेकिन हरगोबिन उस संदेश को सही रूप में न सुनाने के कारण बेचैन है। वह सोचता है कि सुबह वह बूढ़ी माता को सच्चा संदेश सुनाएगा।
व्याख्या: हरगोबिन को नींद न आने का कारण उसकी अंतरात्मा की पीड़ा है। वह झूठ बोलने पर पछता रहा है और सच बोलने का निश्चय करता है। यह उसके चरित्र की सजगता और नैतिकता को दर्शाता है।
द्वितीय गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या
संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश 'शेर के पेट में रोज़गार का दफ्तर' पाठ से लिया गया है, जिसके लेखक हरिशंकर परसाई हैं।
प्रसंग: लेखक को पता चलता है कि शेर अहिंसा और सह-अस्तित्ववाद का समर्थक है और शिकार नहीं करता। वह शेर के पास जाकर पूछता है कि क्या उसके पेट में रोज़गार का दफ्तर है।
व्याख्या: यह गद्यांश व्यंग्यात्मक शैली में लिखा गया है। शेर के पेट में रोज़गार दफ्तर होने का अर्थ है कि शेर लोगों को नौकरी देने का झूठा वादा करता है। यह समाज में फैली बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार पर कटाक्ष है।
प्रश्न 1. निम्न में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा लगभग 50 शब्द)
(क) पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का बचपन में साहित्य के प्रति प्रेम किस प्रकार बढ़ता गया?
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का साहित्य प्रेम बचपन में धीरे-धीरे बढ़ा। उनके पिता जी के पास अनेक पुस्तकें थीं, जिन्हें पढ़कर उनकी रुचि जागृत हुई। वे पिता जी से कहानियाँ सुनते थे और स्वयं भी पढ़ते थे। इस प्रकार पुस्तकों के संपर्क में आने से उनका साहित्य प्रेम निरंतर बढ़ता गया।
(ख) “बालक बच गया!” कहानी के मूल कथ्य को स्पष्ट कीजिए।
“बालक बच गया!” कहानी का मूल कथ्य मातृ-पितृ प्रेम और बलिदान है। कहानी में एक माँ अपने बच्चे को बचाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देती है। यह कहानी माँ के असीम त्याग और बच्चे के प्रति उसके अटूट प्रेम को दर्शाती है।
(ग) दो रुपयों में प्राप्त बोधिसत्व की मूर्ति को फ्रांसीसी डीलर दस हजार रुपयों में भी लेने को क्यों उत्सुक था?
फ्रांसीसी डीलर बोधिसत्व की मूर्ति को दस हजार रुपयों में भी लेने को उत्सुक था क्योंकि वह मूर्ति प्राचीन और दुर्लभ थी। यह मूर्ति भारतीय कला और संस्कृति का अमूल्य नमूना थी। डीलर इस मूर्ति को विदेश में बेचकर अधिक लाभ कमाना चाहता था।
प्रश्न 2. सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' या हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक परिचय लगभग 80 शब्दों में लिखिए।
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' का साहित्यिक परिचय
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि हैं। उनका जन्म 1899 ई. में बंगाल में हुआ। वे स्वच्छंदतावादी कवि थे और उनकी रचनाओं में विद्रोह, प्रकृति प्रेम और मानवीय संवेदनाओं का चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं - 'परिमल', 'अनामिका', 'गीतिका' आदि। उन्होंने कविता के साथ-साथ उपन्यास, कहानी और निबंध भी लिखे। निराला जी की भाषा में ओज और प्रवाह है।
हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक परिचय
हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार और इतिहासकार हैं। उनका जन्म 1907 ई. में उत्तर प्रदेश में हुआ। वे हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में अग्रणी माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं - 'हिंदी साहित्य का आदिकाल', 'कबीर', 'सूर साहित्य' आदि। उनके निबंधों में विद्वता और सरलता का अद्भुत समन्वय है। द्विवेदी जी ने हिंदी साहित्य के इतिहास को नई दिशा दी।
खण्ड-य
3. निम्न प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर लगभग 50 शब्दों में लिखिए : 4×2=8
(क) “यह फूस की राख न थी, उसकी अभिलाषाओं की राख थी ।' सूरदास की क्या-क्या अभिलाषाएँ थीं और उनकी राख किसने की ?
उत्तर : सूरदास की अभिलाषाएँ थीं – अपनी गाय के लिए चारा जुटाना, अपनी झोपड़ी की मरम्मत करना, और अपनी पत्नी के लिए कपड़ा खरीदना। उसने जीवनभर मेहनत करके कुछ पैसे बचाए थे। उसकी इन अभिलाषाओं की राख आग ने कर दी, जिसमें उसकी सारी कमाई जलकर राख हो गई।
(ख) “पर्वतारोहण-संस्थान' से क्या आशय है ?
उत्तर : 'पर्वतारोहण-संस्थान' से आशय उस संस्था से है जो पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षण, उपकरण और मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह संस्थान पर्वतारोहियों को सुरक्षित तरीके से पहाड़ों पर चढ़ने का प्रशिक्षण देती है और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराती है।
(ग) लेखक ने विभिन्न प्रकार के फूलों की क्या-क्या उपयोगिता बताई है ?
उत्तर : लेखक ने फूलों की अनेक उपयोगिताएँ बताई हैं – गुलाब से इत्र बनता है, गेंदे से मालाएँ बनती हैं, चमेली से तेल निकलता है, और कई फूल औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। फूल सौंदर्य बढ़ाने, पूजा-अर्चना और सजावट में भी उपयोगी होते हैं।
(घ) लेखक ने वर्तमान सभ्यता को खाऊ-उजाड़ कहा है । इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर : लेखक का कहना सही है कि वर्तमान सभ्यता में मनुष्य केवल उपभोग और भोग-विलास में लिप्त है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। यह सभ्यता विनाश की ओर बढ़ रही है। मैं इससे सहमत हूँ क्योंकि आज का मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे भाग रहा है और नैतिक मूल्यों को भूलता जा रहा है।
(ड) सूरदास अपने जीवन-भर की कमाई को खोने के बाद भी अपनी आर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था ?
उत्तर : सूरदास अपनी आर्थिक हानि को गुप्त रखना चाहता था क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसकी पत्नी को पता न चल जाए। वह जानता था कि पत्नी इस हानि से बहुत दुखी होगी और उसे ताने देगी। साथ ही, वह अपनी गरीबी और असहायता को छिपाना चाहता था ताकि समाज में उसकी प्रतिष्ठा बनी रहे।
4. “भूपदादा सांप थे, छिपकली थे, बनमानुष थे या रोबोट थे ?” कथन के आधार पर भूपसिंह का चरित्र-चित्रण कीजिए । 6
उत्तर : भूपसिंह का चरित्र बहुआयामी और रहस्यमयी है। वह एक ओर साँप की तरह कुटिल और धोखेबाज है, तो दूसरी ओर छिपकली की तरह फुर्तीला और चालाक है। उसे बनमानुष कहा गया है क्योंकि वह जंगली और क्रूर स्वभाव का है। वह रोबोट की तरह यांत्रिक और भावनाहीन भी है।
भूपसिंह स्वार्थी और निर्दयी व्यक्ति है। वह अपने लाभ के लिए किसी को भी धोखा दे सकता है। उसका व्यवहार मानवीय भावनाओं से रहित है। वह केवल अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए काम करता है, चाहे इसके लिए उसे कितने भी अनैतिक कदम उठाने पड़ें। उसका चरित्र मानवता के लिए खतरा है और वह समाज के लिए एक अभिशाप के समान है।