RBSE Class 12th 2014 Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2014 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2014 |
| Subject | Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2014 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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How to practise with this question paper
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RBSE Class 12th 2014 Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2014
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Rajasthan Board Class 12th Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2014 2014 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014
संगीत — स्वर अथवा वाद्य
(MUSIC — VOCAL OR INSTRUMENTAL)
समय : 3 घण्टे 15 मिनट पूर्णांक : 70
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must first write his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
No. of Questions — 6 + 7 + 7
No. of Printed Pages — 7
Roll No. : ____________________
SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I)
SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I) | SS-5516 | [ Turn over ]
भाग - अ (गायन) / PART - A (VOCAL)
1. निम्नलिखित की परिभाषाएँ लिखिए :
Write definitions of the following: (1+1+1=3)
- लय (Laya)
- ताल (Tala)
- अलंकार (Alankar)
लय (Laya): संगीत में समय के नियमित अंतराल को लय कहते हैं। यह गति का माप है और तीन प्रकार की होती है – विलंबित (धीमी), मध्य (मध्यम), और द्रुत (तेज)।
ताल (Tala): ताल संगीत में समय के नियत चक्र को कहते हैं, जिसमें समान अवधि के मात्राओं का एक निश्चित समूह होता है। यह लयबद्ध संरचना प्रदान करता है।
अलंकार (Alankar): अलंकार स्वरों के क्रमबद्ध समूह को कहते हैं, जो संगीत की सुंदरता बढ़ाने और अभ्यास के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये सरगम के विभिन्न पैटर्न होते हैं।
2. गायन के किन्हीं दो घरानों की विशेषताएँ लिखिये।
Write the characteristics of any two Gharanas of Vocal music. (3)
ग्वालियर घराना: यह सबसे प्राचीन घराना है। इसकी विशेषताएँ हैं – स्वरों की स्पष्टता, सरल और सीधी रचनाएँ, खुली आवाज़ में गायन, और बोल-बांट का प्रचुर प्रयोग। इसमें आलाप और तानों पर विशेष बल दिया जाता है।
आगरा घराना: इस घराने की विशेषता है – गायन में ठुमरी और ध्रुपद का मिश्रण, गमक का प्रचुर प्रयोग, और बोल-आलाप की प्रधानता। इसमें स्वरों को खींचकर गाने और मींड का विशेष महत्व है।
3. प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के भारतीय संगीत के इतिहास की जानकारी दीजिये।
Explain the history of Indian music from ancient to modern period. (6)
प्राचीन काल: भारतीय संगीत का उद्भव वैदिक काल से माना जाता है। सामवेद में गायन का उल्लेख मिलता है। नाट्यशास्त्र (भरतमुनि) में संगीत का व्यवस्थित वर्णन है, जिसमें स्वर, ताल और रागों की नींव रखी गई।
मध्यकाल: इस काल में संगीत को राजकीय संरक्षण मिला। जयदेव (गीतगोविंद), अमीर खुसरो (ख्याल और तबले का आविष्कार), और मियाँ तानसेन (अकबर के दरबार में) प्रमुख संगीतज्ञ हुए। इसी काल में हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत का विभाजन हुआ।
आधुनिक काल: 19वीं-20वीं शताब्दी में संगीत का पुनरुत्थान हुआ। विष्णु दिगंबर पलुस्कर, विष्णु नारायण भातखंडे ने संगीत को लिपिबद्ध किया। आकाशवाणी, फिल्मों और संगीत सम्मेलनों ने इसे लोकप्रिय बनाया। आज भारतीय शास्त्रीय संगीत विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
निर्देश / Instructions
- गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। (Candidates offering Vocal Music should attempt only the questions of Part - A.)
- सितार, सरोद, वायलिन, दिलरुबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। (Candidates offering Sitar, Sarod, Violin, Dilruba or Esraj, Flute and Guitar should attempt only the questions of Part - B.)
- तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। (Candidates offering Tabla and Pakhawaj should attempt only the questions of Part - C.)
- उत्तर-पुस्तिका के मुखपृष्ठ पर विषय स्पष्ट रूप से लिखें। (Write your subject clearly on the cover page of the answer-book.)
4. दिए गए स्वरों से राग पहचानिये और उनमें से किसी एक राग का पूर्ण परिचय — आरोह, अवरोह, पकड़ सहित लिखिये :
Identify the Raga from given notes (Swaras) and write any one of these with full Parichaya — Aaroh, Avroh and Pakad: 3+3=6
- (i) ध प ग म ध प ग म रे सा (Dha Pa Ga Ma Dha Pa Ga Ma Re Sa)
- (ii) म॑ प ध प म प म सा रे सा (Ma' Pa Dha Pa Ma Pa Ma Sa Re Sa)
- (iii) प नि सां नि प ग म ग (प) ग म ग (Pa Ni Sa' Ni Pa Ga Ma Ga (Pa) Ga Ma Ga)
राग पहचान:
- (i) राग भूपाली (Raga Bhupali)
- (ii) राग यमन (Raga Yaman)
- (iii) राग बागेश्री (Raga Bageshree)
किसी एक राग का पूर्ण परिचय (उदाहरण: राग यमन):
- आरोह (Aaroh): नि॒ रे ग म॑ प ध नि॒ सां
- अवरोह (Avroh): सां नि॒ ध प म॑ ग रे सा
- पकड़ (Pakad): नि॒ रे ग म॑ प म॑ ग रे सा
- जाति (Jati): षाडव-संपूर्ण (Shadav-Sampurna)
- थाट (That): कल्याण (Kalyan)
- वादी (Vadi): ग (Ga)
- संवादी (Samvadi): नि (Ni)
- समय (Time): रात्रि का प्रथम प्रहर (First quarter of night)
5. रूपक ताल को दुगुन सहित लिखिये |
Write the Tala Rupak with Dugun. 3
रूपक ताल (Rupak Tala):
- मात्राएँ (Matras): 7
- विभाग (Vibhag): 3 (2+2+3)
- ताली-खाली (Tali-Khali): ताली (1), ताली (2), खाली (3)
दुगुन (Dugun) में लिखने पर:
धिं धिं ना | तिं तिं ना | धिं ना धिं ना |
(प्रत्येक मात्रा को दो बार बोलना)
अथवा (OR)
अपने पाठ्यक्रम की किसी एक राग में छोटे ख्याल की स्थाई की स्वरलिपि लिखिये |
Write the notation of Sthai of Chhota Khayal in any Raga of your syllabus.
उदाहरण: राग यमन में छोटा ख्याल (स्थाई) की स्वरलिपि:
स्थाई (Sthai):
नि॒ रे ग म॑ प ध नि॒ सां | सां नि॒ ध प म॑ ग रे सा ||
म॑ प ध नि॒ सां रे सां | नि॒ ध प म॑ ग रे सा ||
6. अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक संगीतज्ञ की जीवनी एवम् संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को लिखिये |
Write down the life sketch and contribution in the field of music of any one musician from your syllabus. 3
उदाहरण: पंडित भीमसेन जोशी (Pandit Bhimsen Joshi)
जीवनी (Life Sketch): पंडित भीमसेन जोशी का जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक के गडग जिले में हुआ। वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक थे। उन्होंने किराना घराने से संगीत की शिक्षा ली और अपनी अनूठी गायन शैली विकसित की।
संगीत में योगदान (Contribution): उन्होंने ख्याल, भजन और अभंग गायन में विशेष योगदान दिया। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' और 'जो भजे हरि को सदा' हैं। 2008 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
भाग-ब (PART - B)
(सितार / सरोद / वायलिन / दिलरुबा अथवा इसराज / बांसुरी / गिटार)
(Sitar / Sarod / Violin / Dilruba or Esraj / Flute / Guitar)
1. निम्न की परिभाषाएँ लिखिये :
Write definitions of the following: (1+1+1=3)
- कृन्तन (Krintan)
- ज़मज़मा (Jamjama)
- अलंकार (Alankar)
परिभाषाएँ (Definitions):
- कृन्तन (Krintan): यह एक वादन शैली है जिसमें तारों को खींचकर या दबाकर एक विशेष प्रकार का कंपन उत्पन्न किया जाता है, जिससे स्वर में एक विशिष्ट मुरकी या लहर आती है। यह मीड या गमक का एक रूप है।
- ज़मज़मा (Jamjama): यह एक अलंकारिक वादन तकनीक है जिसमें एक ही स्वर को तेजी से बार-बार बजाया जाता है, जिससे एक गुंजन या झंकार जैसा प्रभाव उत्पन्न होता है। यह प्रायः तान या लयकारी में प्रयोग होता है।
- अलंकार (Alankar): संगीत में अलंकार स्वरों के एक निश्चित क्रम को कहते हैं, जो रागदारी या वादन में सुंदरता और विविधता लाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। ये आरोही, अवरोही या मिश्रित हो सकते हैं, जैसे सा रे गा, रे गा मा आदि।
2. निम्न में से किसी एक को समझाइये :
Explain any one of the following: (3)
- थाट राग वर्गीकरण (Thata Raga Vargikaran)
- संधिप्रकाश राग (Sandhiprakash Raga)
व्याख्या (Explanation): (यहाँ दोनों में से किसी एक का चयन कर उत्तर देना है। उदाहरण के लिए 'थाट राग वर्गीकरण' लिया गया है।)
थाट राग वर्गीकरण (Thata Raga Vargikaran): पंडित विष्णु नारायण भातखंडे द्वारा प्रतिपादित यह वर्गीकरण प्रणाली भारतीय संगीत में रागों को उनके मूल स्वरूप के आधार पर 10 थाटों में विभाजित करती है। प्रत्येक थाट में 7 स्वर (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) होते हैं, जिनमें से कुछ शुद्ध, कोमल या तीव्र हो सकते हैं। यह वर्गीकरण रागों को समझने और सिखाने में सहायक है। उदाहरण के लिए, बिलावल थाट (सभी शुद्ध स्वर), कल्याण थाट (तीव्र मध्यम), भैरव थाट (कोमल रे और ध) आदि। इस प्रणाली के अनुसार, प्रत्येक राग किसी न किसी थाट से उत्पन्न होता है, जिससे रागों का एक व्यवस्थित ढांचा तैयार होता है।
3. भारतीय संगीत के प्राचीन व आधुनिक काल के इतिहास की जानकारी दीजिये ।
Explain the history of Indian music of ancient and modern period. (2+2=4)
भारतीय संगीत का इतिहास (History of Indian Music):
प्राचीन काल (Ancient Period): भारतीय संगीत का प्राचीन इतिहास वैदिक काल से शुरू होता है, जहाँ सामवेद में गायन का उल्लेख मिलता है। इस काल में संगीत मुख्यतः धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित था। बाद में, नाट्यशास्त्र (भरत मुनि) में संगीत के सिद्धांतों, रागों, तालों और वाद्यों का विस्तृत वर्णन मिलता है। गुप्त काल को संगीत का स्वर्ण युग माना जाता है, जब जयदेव, तानसेन (मध्यकाल में) जैसे विद्वानों ने इसे समृद्ध किया। प्राचीन काल में मुख्यतः ध्रुपद शैली प्रचलित थी।
आधुनिक काल (Modern Period): आधुनिक काल (लगभग 18वीं शताब्दी से वर्तमान तक) में भारतीय संगीत में कई बदलाव आए। ब्रिटिश काल में संगीत का संरक्षण कम हुआ, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसे पुनर्जीवित किया गया। पंडित विष्णु नारायण भातखंडे और पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने संगीत को व्यवस्थित करने और शिक्षा को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस काल में ख्याल, ठुमरी, ग़ज़ल जैसी शैलियाँ विकसित हुईं। आज, भारतीय संगीत शास्त्रीय, उपशास्त्रीय और लोक संगीत के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है, और इसे संगीत समारोहों, विश्वविद्यालयों और डिजिटल माध्यमों से संरक्षित किया जा रहा है।
प्रश्न 4
दिए गए स्वरों से राग पहचानकर उनमें से किसी एक राग का पूर्ण परिचय — आरोह, अवरोह, पकड़ सहित लिखिये :
- सा म म प ध प म प ध प म रे सा
- नि सा म ग प म ग रे सा
Identify the Raga from given Swaras and write any one of these with full Parichaya — Aaroh, Avroh and Pakad :
- Sa Ma Ma Pa Dha Pa Ma Pa Dha Pa Ma Re Sa
- Ni Sa Ma Ga Pa Ma Ga Re Sa
राग पहचान:
- पहला स्वर समूह (सा म म प ध प म प ध प म रे सा) — राग यमन (Yaman) का संकेत करता है।
- दूसरा स्वर समूह (नि सा म ग प म ग रे सा) — राग भूपाली (Bhoopali) का संकेत करता है।
राग यमन का पूर्ण परिचय:
- थाट: कल्याण
- जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (सात स्वर)
- वादी स्वर: गंधार (ग)
- संवादी स्वर: निषाद (नि)
- आरोह: नि रे ग म प ध नि सां
- अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा
- पकड़: नि रे ग म प ध नि सां — सां नि ध प म ग रे सा
- समय: रात्रि का प्रथम प्रहर (संधि प्रकाश)
प्रश्न 5
(a) रूपक ताल को परिचय सहित लिखिये ।
(b) अपने पाठ्यक्रम की किसी एक राग में मसीतखानी गत की स्थाई की स्वरलिपि लिखिये ।
(a) Write Tala Rupak with Parichaya.
(b) Write the notation of Sthai of Maseetkhani Gat in any Raga of your syllabus.
(a) रूपक ताल का परिचय:
- मात्राएँ: 7
- खंड: 3+2+2
- ताली/खाली: ताली पर 1, 4, 6; खाली पर कोई नहीं
- सम: पहली मात्रा
- ठेका: धिं न धिं धिं ना — तिन ना तिन तिन ना
(b) राग यमन में मसीतखानी गत की स्थाई की स्वरलिपि:
मसीतखानी गत चार मात्राओं की होती है और इसमें मध्य लय का प्रयोग होता है।
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 |
|---|---|---|---|---|
| स्वर | नि रे ग | म प ध | नि सां रे | सां नि ध |
| बोल | दा रा दा | दा रा दा | दा रा दा | दा रा दा |
नोट: यह एक सामान्य उदाहरण है। वास्तविक स्वरलिपि राग और गत के अनुसार भिन्न हो सकती है।
प्रश्न 6
अपने वाद्य का सचित्र वर्णन कीजिये ।
Describe your instrument with diagram.
उदाहरण: सितार का वर्णन
सितार एक तार वाद्य है जिसका प्रयोग हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में किया जाता है। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
- तुंबा: लौकी से बना गोलाकार भाग जो ध्वनि उत्पन्न करता है।
- डांडी: लकड़ी की लंबी गर्दन जिसमें फ्रेट (पर्दे) लगे होते हैं।
- तार: 7 मुख्य तार (3 चिकारी, 3 बाज, 1 लड़ी) और 11-13 सहायक तार (तरफदार)।
- खूंटी: तारों को कसने के लिए खूंटियाँ।
- पुल: तारों को सहारा देने वाला भाग।
(चित्र के लिए स्थान छोड़ा गया है।)
प्रश्न 7
अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक संगीतज्ञ की जीवनी लिखिये ।
Write down the life sketch of any one musician from your syllabus.
उदाहरण: तानसेन की जीवनी
तानसेन (लगभग 1500-1586) हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान संगीतज्ञ थे। उनका जन्म ग्वालियर के पास बेहटा गाँव में हुआ था। उनके बचपन का नाम रामतनु पांडे था। उन्होंने संगीत की शिक्षा स्वामी हरिदास और मुहम्मद गौस से ली। वे अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक थे। तानसेन को राग दीपक और राग मेघ मल्हार जैसे रागों को गाने की अद्भुत क्षमता थी। उन्होंने कई रागों की रचना की, जैसे राग मियाँ की तोड़ी, राग मियाँ का सारंग, आदि। उनका निधन आगरा में हुआ और उनकी समाधि ग्वालियर में स्थित है।
भाग - स ( तबला / पखावज )
PART - C ( Tabla / Pakhawaj )
-
लय की परिभाषा देते हुये तबले की विभिन्न लयकारियों के बारे में लिखिये।
Define Laya and write about the different Layakaris of Tabla.
लय की परिभाषा: लय का अर्थ है समय का नियमित अंतराल। संगीत में लय का तात्पर्य समान समयांतराल पर होने वाली क्रिया से है। यह संगीत की गति को नियंत्रित करती है।
तबले की विभिन्न लयकारियाँ:
- ठाह (Vilambit Laya): धीमी गति, जिसमें प्रति मात्रा का समय अधिक होता है।
- दुगुन (Double Laya): मूल लय से दोगुनी गति, जहाँ एक मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं।
- तिगुन (Triple Laya): मूल लय से तिगुनी गति, जहाँ एक मात्रा में तीन बोल बोले जाते हैं।
- चौगुन (Quadruple Laya): मूल लय से चौगुनी गति, जहाँ एक मात्रा में चार बोल बोले जाते हैं।
- आड़ी लय (Aadi Laya): इसमें मात्राओं का विभाजन असमान रूप से किया जाता है, जैसे 3:2 के अनुपात में।
- कुआड़ी लय (Kuadi Laya): इसमें मात्राओं का विभाजन 5:4 या 7:4 के अनुपात में किया जाता है।
- बियारी लय (Biyari Laya): इसमें मात्राओं का विभाजन 7:4 या 9:8 के अनुपात में किया जाता है।
-
दस मात्रा वाली दो तालों की तुलना करते हुये उनका ठेका लिखिये।
Write comparison and Theka of two Talas of ten Matras.
दस मात्रा वाली दो तालें: झपताल (Jhaptal) और सूलताल (Sooltal) दस मात्रा वाली प्रमुख तालें हैं।
तुलना:
- झपताल: इसमें 10 मात्राएँ होती हैं, जो 2+3+2+3 के विभागों में बँटी होती हैं। इसके 4 विभाग होते हैं। ताली-खाली का क्रम: ताली (1), खाली (3), ताली (6), ताली (8) है।
- सूलताल: इसमें भी 10 मात्राएँ होती हैं, जो 2+2+2+2+2 के विभागों में बँटी होती हैं। इसके 5 विभाग होते हैं। ताली-खाली का क्रम: ताली (1), ताली (3), खाली (5), ताली (7), ताली (9) है।
ठेका:
झपताल का ठेका:
धिं ना | धिं धिं ना | ती ना | धिं धिं ना ||
सूलताल का ठेका:
धिं धिं | धाग ती | तक धिं | धिं ती | तक ता ||
-
भरत के नाट्यशास्त्र की जानकारी दीजिये।
Write about the Natya Shastra of Bharat.
भरत मुनि द्वारा रचित 'नाट्यशास्त्र' संगीत, नृत्य और नाटक का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ग्रंथ है। इसे 'पंचम वेद' भी कहा जाता है। इस ग्रंथ में 36 अध्याय हैं, जिनमें नाट्य, संगीत, ताल, लय, रस, भाव, अभिनय, मंच-सज्जा आदि का विस्तृत वर्णन है।
नाट्यशास्त्र में संगीत के सिद्धांतों का गहन विवेचन किया गया है। इसमें स्वर, श्रुति, ग्राम, मूर्च्छना, तान, अलंकार, राग, ताल आदि की परिभाषाएँ और उनके नियम दिए गए हैं। भरत मुनि ने 22 श्रुतियों और 7 शुद्ध स्वरों का वर्णन किया है। इस ग्रंथ में नाट्य प्रयोग के लिए रस सिद्धांत (नवरस) का भी विस्तार से वर्णन है। नाट्यशास्त्र भारतीय संगीत और नाट्य कला का आधार स्तंभ है।
-
संगीत के क्षेत्र में पं० भातखण्डे जी के कार्यो का उल्लेख कीजिये।
Describe the works of Pt. Bhatkhande in the field of music.
पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे (1860-1936) भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान विद्वान और संगीतज्ञ थे। उनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- संगीत ग्रंथों का संकलन: उन्होंने 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' नामक 6 भागों में ग्रंथ लिखा, जिसमें रागों का वैज्ञानिक वर्गीकरण किया गया है।
- राग वर्गीकरण प्रणाली: उन्होंने रागों को 10 थाटों (मेलों) में वर्गीकृत किया, जो आज भी प्रचलित है।
- संगीत शिक्षण पद्धति: उन्होंने संगीत सीखने के लिए 'स्वरलिपि' (नोटेशन) प्रणाली विकसित की, जिससे संगीत को लिखित रूप में संरक्षित किया जा सके।
- संगीत विद्यालयों की स्थापना: उन्होंने लखनऊ में 'मैरिस कॉलेज ऑफ म्यूजिक' (अब भातखण्डे संगीत संस्थान) की स्थापना की।
- संगीत सम्मेलन: उन्होंने अखिल भारतीय संगीत सम्मेलनों का आयोजन किया, जिससे संगीतकारों को एक मंच मिला।
- पुस्तकें: उनकी प्रमुख पुस्तकों में 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति', 'क्रमिक पुस्तक मालिका', 'स्वर मालिका' आदि शामिल हैं।
-
ताल पहचानकर उनका नाम एवम् पूर्ण वर्णन लिखिए:
Identify Tala and write their names and description:
(i) - धिं ना | ---
०० 0
(ii) किट धा | — — — कट
YY 09 3 YY”
2(i) ताल: तीनताल (Tintal / Teental)
वर्णन: तीनताल 16 मात्राओं की ताल है। इसके 4 विभाग (4+4+4+4) होते हैं। ताली-खाली का क्रम: ताली (1), खाली (5), ताली (9), ताली (13) है। इसका ठेका: धा धिं धिं ना | धा धिं धिं ना | धा तिं तिं ना | ता धिं धिं ना ||
(ii) ताल: झपताल (Jhaptal)
वर्णन: झपताल 10 मात्राओं की ताल है। इसके 4 विभाग (2+3+2+3) होते हैं। ताली-खाली का क्रम: ताली (1), खाली (3), ताली (6), ताली (8) है। इसका ठेका: धिं ना | धिं धिं ना | ती ना | धिं धिं ना ||
प्रश्न 6
6. TAR ताल का पूर्ण विवरण देते हुये दुगुन सहित लिखिये।
Write Tala Dhamar with description and Dugun.
तार ताल (Tala Dhamar) का पूर्ण विवरण:
तार ताल (जिसे धमार ताल भी कहा जाता है) 14 मात्राओं का एक ताल है। इसके बोल निम्नलिखित हैं:
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | धा | धि | ट | ता | क | धि | ना | धा | टी | ट | ता | क | धि | ना |
| ताली/खाली | ताली 1 | ताली 2 | खाली | ताली 3 | ताली 4 | खाली |
विभाग: 4 विभाग (2+2+2+2 मात्राएँ)
सम (पहली मात्रा): धा
दुगुन (Dugun): दुगुन लय में प्रति मात्रा पर दो बोल बोले जाते हैं। उदाहरण:
धाधि टता कधि नाधा टीटता कधि ना | धाधि टता कधि नाधा टीटता कधि ना ||
यहाँ प्रत्येक मूल मात्रा के स्थान पर दो बोल आते हैं, जिससे लय दुगुनी हो जाती है।
प्रश्न 7
7. अहमद जान थिरकवा की जीवनी लिखिये।
Write the life sketch of Ahmad Jan Thirakva.
अहमद जान थिरकवा का जीवन परिचय:
अहमद जान थिरकवा (Ahmad Jan Thirakva) भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध तबला वादक थे। वे बनारस घराने से संबंधित थे। उनका जन्म 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ था। वे अपने समय के अत्यंत प्रतिभाशाली तबला वादक माने जाते थे।
उन्होंने तबला वादन में कई नई तकनीकों का विकास किया और बनारस घराने की परंपरा को समृद्ध किया। उनके शिष्यों में कई प्रसिद्ध तबला वादक शामिल हैं। उनकी वादन शैली में लयकारी और बोलों की स्पष्टता विशेष रूप से उल्लेखनीय थी।
अहमद जान थिरकवा ने तबला वादन को एक नई ऊँचाई प्रदान की और उनका योगदान भारतीय शास्त्रीय संगीत में अमूल्य है।