RBSE Class 12th 2014 Typewriting Hindi-SS-34-2014 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2014
Subject Typewriting Hindi-SS-34-2014
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2014 Typewriting Hindi-SS-34-2014

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Rajasthan Board Class 12th Typewriting Hindi-SS-34-2014 2014 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014

हिन्दी टंकण लिपि (TYPEWRITING HINDI)

समय : 3 घंटे

पूर्णांक : 40


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. प्रत्येक कागज के एक तरफ टंकण करें।
  3. प्रत्येक प्रश्न को नये पृष्ठ से आरम्भ करना है।
  4. प्रत्येक लाइन के बीच में द्विगुणित अवकाश (Double Spacing) देकर टंकण करना है।
  5. प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक सजावट के निर्धारित हैं।

प्रश्नों की संख्या : 3

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 7

प्रश्न पत्र कोड : SS—34—T. W. (Hindi) | SS-5534

निम्नलिखित अवतरण को टंकित कीजिए :

अंक

टंकण- 8
सजावट -- 2
कुल — 20

कैसे हो हर कार्य में सफल ?

सफलता का रहस्य है -- कार्य कुशलता एवं समय का प्रबन्धन | जो इस रहस्य को जानते हैं, वे सफलता के शिखर पर पहुँचते हैं, परन्तु इससे अनभिज्ञ एवं इस क्षेत्र को नजर अन्दाज करनेवाले अत्यधिक श्रम के बावजूद असफल होते देखे जाते हैं | सफलता कोई अलादीन का चिराग नहीं है कि जो चाहे मिल गया और जब चाहे हाजिर हो गया | यह कुशलता पूर्वक किये जाने वाले कार्य का आत्म विश्वास, वादा एवं समय को ध्यान में रखकर किये जाने वाले कार्य का परिणाम है |

सफलता प्राप्त करने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए जिनमें सबसे पहले निशाना यानी लक्ष्य पर नजर रखनी चाहिए | सर्वप्रथम अपना लक्ष्य तैयार करना चाहिए | लक्ष्य बेशक बड़ा हो, परन्तु उसे प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाना चाहिए | लक्ष्य को क्रमश: बड़ा बनाना चाहिए और इसके लिए एक योजना की जरूरत पड़ती है, जिसे अपनी डायरी में लिख लेना चाहिए ताकि छोटी परन्तु आवश्यक बातें छूट न जायें |

SS—34—T.W. (Hindi)

बने निर्मल सोच के स्वामी

जीवन की निर्मलता का पहला मंत्र है जिसे हमें अपने जीवन में जीना है, उतारना है, आचमन करना है। पल-प्रतिपल इस मंत्र को जीना है। जीवन के कायाकल्प के लिये पहला मंत्र है -- व्यक्ति अपनी सोच को निर्मल बनाये। आपने सामायिक की या नहीं, आगम या गीता का पारायण किया या नहीं, ये सब बातें गौण हैं। पहले अपनी सोच को निर्मल बनायें। यह वह मंत्र है जो सुबह भी हमें आनन्द से भरेगा और भरी दोपहर में भी आपके मन को शान्ति देगा।

हर व्यक्ति दूसरे से महान् व श्रेष्ठ होना चाहता है, पर श्रेष्ठताएँ धन या सौन्दर्य अथवा पद से नहीं अपितु बेहतर सोच से आती हैं। अपनी सोच को निर्मल बनायें। उत्तम-जीवन जीने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपनी सोच को उत्तम बनाए। घटिया सोच रखने वाला व्यक्ति कभी भी बढ़िया जीवन नहीं जी सकता।

वर्तमान को सार्थक बनाने एवं लक्ष्य की ओर अग्रसर होने के लिए अगली महत्वपूर्ण बात है सकारात्मक सोच। सकारात्मक सोच से लक्ष्य का आधा भाग तय कर लिया जाता है। देखने का नजरिया हमारी सफलता व असफलता का दिशा निर्धारण करता है। इसके साथ ही काम को निश्चित समय एवं अवधि के अन्दर पूरा करने की आदत डालनी चाहिए। समय पर किया गया कार्य हमारे अनुशासन को दर्शाता है। हम यदि अपने कार्य को उचित ढंग से निश्चित समय में पूरा करते हैं तो हमारे साथ काम करने वाले का भी समय बचता है।

SS—34—T.W. (Hindi) { Turn over }

लक्ष्य प्राप्ति और सफलता के सूत्र

लक्ष्य के लिए चल पड़े तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। आगे आने वाली हर कठिनाई का डटकर सामना करना चाहिए। हर कार्य में चुनौती तो होगी, परन्तु उसे हम किस कुशलता के साथ पूरा कर पाते हैं, यह हमारी कार्यशैली पर निर्भर करता है। जिस काम को हमें करना है, उसे बेहतर ढंग से करने के लिए हमें अपनी कुशलता को विकसित करना चाहिए।

हमें अपने लक्ष्य को पाने के लिए सर्वाधिक महत्व की बात है वादा। वादा – अर्थात् जो हम कहते हैं, उसे निभाना आना चाहिए। वादा लक्ष्य प्राप्ति का उत्तम साधन है। जो अपने दिये गये वचन पर अडिग रहता है, वही प्रामाणिक होता है। सफलता के लिए मौलिकता का होना भी जरूरी है। मौलिकता का अर्थ है, अपनी क्षमता के अनुरूप निजी विशेषता। हमें अपने जैसा बनना चाहिए, किसी और जैसा नहीं। मौलिक क्षमता प्रबल हो तो हम उसी के अनुरूप प्रतिष्ठित व सम्मानित हो सकते हैं।

सफलता एक योजना है, जिसे चरणबद्ध ढंग से सुनियोजित तरीके से पूरा किया जाता है। उपर्युक्त ढंग से यदि कार्य किया जाए तो सफलता अवश्य ही उपलब्ध होगी। सफलता के लिए इस योजना को क्रियान्वित करना चाहिए। यदि फिर भी असफलता मिलती है तो उसके पीछे के कारणों को ढूंढकर उनका निराकरण करते हुए परिवर्तित योजनापूर्वक फिर से प्रयास करना चाहिए। इससे सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

“कैसे हो हर कार्य में सफल” इसमें सफलता प्राप्त करने के लिये उक्त बातों को अपने जीवन में अपनाने से सफलता हमारे कदम चूमेगी।

सारांश: यह पाठ लक्ष्य प्राप्ति और सफलता के लिए आवश्यक गुणों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना, कठिनाइयों का सामना करना, कुशलता विकसित करना, वादा निभाना, मौलिकता बनाए रखना और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना सफलता के प्रमुख सूत्र हैं। असफलता मिलने पर कारणों का विश्लेषण कर पुनः प्रयास करना चाहिए।

2. निम्नलिखित पत्र को यथोचित रूप देकर टंकित कीजिए :

राजकुमार एण्ड संस
(कपड़े के थोक व्यापारी)
28, रामपुरा बाजार, उज्जैन

पत्रांक : 777    दिनांक : 20 दिसम्बर, 203

सेवा में,
शाखा प्रबन्धक,
स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया,
रामपुरा - उज्जैन ।

विषय : अधिविकर्ष सुविधा प्रदान करने हेतु आग्रह ।

प्रिय महोदय,

उपरोक्त विषय में निवेदन है कि हमारी फर्म साड़ी व्यवसाय की है और गत 10 वर्षों से उज्जैन में कार्यरत है। प्रतिदिन की बिक्री लगभग 60 हजार रु० तक की होती है तथा बिक्री राशि अगले ही दिन बैंक खाते में जमा करवाने की हमारी परम्परा रही है।

भवदीय,
(राजकुमार एण्ड संस)

अंक विभाजन :

  • टंकण – 8
  • सजावट – 2
  • कुल – 10

पृष्ठ 6 का 7

हमारी फर्म का चालू खाता संख्या 094000575 आपकी शाखा में है। बैंकिंग लेनदेन इसी खाते से होता है। हमारे खाते में 1,00,000 रु० का शेष हमेशा रहता है।

14 अप्रैल, 2014 के बाद विवाह मुहूर्त आरंभ हो रहे हैं। वैवाहिक माँग की पूर्ति हेतु हम सूरत से साड़ियों की फर्मों से बड़ा स्टॉक साड़ियों का क्रय करना चाहते हैं। इस हेतु हमें 40 प्रतिशत राशि अग्रिम भेजनी है। इस उद्देश्य से हम अपने चालू खाते पर 4 लाख रु० की आपसे अधिविकर्ष की सुविधा लेना चाहते हैं। इस हेतु यदि आप अन्य किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान से हमारी गारंटी लेना चाहें तो हम इसके लिए सहमत हैं।

हमारी संस्था के पिछले 3 वर्षों का स्थिति विवरण संलग्न है। कृपया हमारे आग्रह के अनुसार अधिविकर्ष की सुविधा प्रदान कर अनुग्रहित करें।

भवदीय,
राज कुमार एण्ड संस के लिए,
राजकुमार
साझेदार।

SS—34—T.W. (Hindi) [ SS-5534 ]

3. निम्नलिखित सारणी को यथोचित रूप देकर टंकित कीजिए :

अंक: टंकण-8, सजावट-2, कुल-10

विभिन्न देशों द्वारा शक्कर का आयात (लाख किलो ग्राम में)

क्रम सं० देश 2008-2009 2009-2010 2010-2011 2011-2012
1 इंगलैण्ड 345.0 650.5 89.0 937.0
2 रूस 386.0 394.4 635.5 808.9
3 मिस्र 3.0 60.7 38.2 60.0
4 अमेरिका 6.5 22.6 257.2 324.3
5 अफगानिस्तान 253.8 302.0 495.7 678.2
6 ईरान 53.8 75.0 285.5 355.1
7 जर्मनी 4.0 254.0 349.6 450.0
8 आस्ट्रेलिया 3.6 259.0 33.5 480.8
9 इराक 62.0 255.4 44.4 632.6
10 आयरलैण्ड 82.5 53.3 25.0 9.1