RBSE Class 12th 2015 Drawing-SS-17-2015 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2015 |
| Subject | Drawing-SS-17-2015 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2015 Drawing-SS-17-2015
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Rajasthan Board Class 12th Drawing-SS-17-2015 2015 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015
चित्रकला
DRAWING
समय : 3 घण्टे 15 मिनट
पूर्णांक : 70
नामांक Roll No.
No. of Questions — 30
No. of Printed Pages — 7
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
SS—17—Drawing SS-6017 [ Turn over
प्रश्न पत्र के निर्देश (Instructions)
5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
6. प्रश्न संख्या, अंक एवं प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द सीमा:
| प्रश्न संख्या (Q. Nos.) | अंक प्रति प्रश्न (Marks per question) | उत्तर की शब्द सीमा (Word limit of answer) |
|---|---|---|
| 1-2 | 2 | - |
| 3-24 | 3 | 25 |
| 25-27 | 4 | 50 |
| 28-30 | 2 | 50 |
7. प्रश्न क्रमांक 29 और 30 में आंतरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 29 and 30.
प्रश्न (Questions)
1. 'राहुल समर्पण' नामक चित्र में प्रभाविता कैसे दर्शायी गयी है?
How is the dominance expressed in ‘Rahul dedication’ painting?
उत्तर / Answer: 'राहुल समर्पण' चित्र में प्रभाविता को राजकुमार सिद्धार्थ के गंभीर और दृढ़ मुद्रा के माध्यम से दर्शाया गया है। उनके सिर पर मुकुट और हाथ में तलवार शक्ति का प्रतीक है, जबकि उनके चेहरे पर त्याग और वैराग्य का भाव प्रभाविता को व्यक्त करता है।
2. अजंता के चित्रों में किस पुष्प की प्रधानता है?
Which flower is highlighted in the Ajanta cave paintings?
उत्तर / Answer: अजंता के चित्रों में कमल पुष्प (Lotus flower) की प्रधानता है। यह पवित्रता, सौंदर्य और आध्यात्मिकता का प्रतीक है, और बौद्ध धर्म में इसका विशेष महत्व है।
कक 20 (४722) ॥ SS-607
प्रश्न 3: “शोकाकुल स्त्री” किस गुफा में चित्रित है ?
In which cave is “The Sorrowful Lady” painted?
उत्तर: “शोकाकुल स्त्री” अजंता गुफा संख्या 16 में चित्रित है।
Answer: “The Sorrowful Lady” is painted in Ajanta Cave No. 16.
प्रश्न 4: बणी-ठणी किस शैली का चित्र है ?
To which school does “Bani-Thani” painting belong?
उत्तर: बणी-ठणी किशनगढ़ शैली का चित्र है।
Answer: “Bani-Thani” painting belongs to the Kishangarh school.
प्रश्न 5: काँगड़ा को छोड़ कर अन्य दो पहाड़ी शैलियों के नाम लिखिए।
Write the names of any two Pahari schools apart from Kangra.
उत्तर: काँगड़ा को छोड़ कर दो पहाड़ी शैलियाँ हैं: (1) बसोहली शैली, (2) गुलेर शैली।
Answer: Two Pahari schools apart from Kangra are: (1) Basohli school, (2) Guler school.
प्रश्न 6: शाहबदीन और मनोहर राजस्थान की किस शैली के चित्रकार थे ?
To which art school of Rajasthan did Shahabdin and Manohar belong?
उत्तर: शाहबदीन और मनोहर राजस्थान की मुगल शैली के चित्रकार थे।
Answer: Shahabdin and Manohar belonged to the Mughal school of Rajasthan.
प्रश्न 7: नन्दलाल बसु के दो चित्रों के नाम लिखिए।
Write the names of any two paintings painted by Nanda Lal Basu.
उत्तर: नन्दलाल बसु के दो चित्र हैं: (1) “सती”, (2) “शिव-पार्वती”।
Answer: Two paintings by Nanda Lal Basu are: (1) “Sati”, (2) “Shiva-Parvati”.
प्रश्न 8: ई. बी. हेवेल और आनन्द कुमार स्वामी ने किस कला आन्दोलन को प्रारम्भ किया ?
Which art movement was started by E. B. Havel and Anand Kumar Swami?
उत्तर: ई. बी. हेवेल और आनन्द कुमार स्वामी ने बंगाल कला आन्दोलन (Bengal School of Art) को प्रारम्भ किया।
Answer: E. B. Havel and Anand Kumar Swami started the Bengal School of Art movement.
प्रश्न 9: “गरुड स्तम्भ के नीचे श्री चैतन्य” चित्र के रचयिता कौन हैं ?
Who is the creator of “Shree Chaitanya under the Garud Column” painting?
उत्तर: “गरुड स्तम्भ के नीचे श्री चैतन्य” चित्र के रचयिता नन्दलाल बसु हैं।
Answer: The creator of “Shree Chaitanya under the Garud Column” painting is Nanda Lal Basu.
प्रश्न पत्र – ड्राइंग (SS-607)
लघु उत्तरीय प्रश्न
-
"द एडॉर्नमेंट ऑफ ब्राइड" (दुल्हन का श्रृंगार) किस चित्रकार की कृति है?
Who painted “The Adornment of Bride”?
उत्तर: यह चित्र प्रसिद्ध चित्रकार अमृता शेरगिल (Amrita Sher-Gil) द्वारा चित्रित किया गया है।
-
यामिनी राय के चित्र बंगाल की किस चित्र शैली से प्रभावित हैं?
Which art style of Bengal influenced the paintings of Yamini Roy?
उत्तर: यामिनी राय के चित्र बंगाल की कालीघाट पेंटिंग शैली (Kalighat Painting style) से प्रभावित हैं।
-
चित्रकार डॉ. शैल चोयल किस शहर के निवासी हैं?
To which city does artist Dr. Shail Choyal belong?
उत्तर: डॉ. शैल चोयल उदयपुर (Udaipur), राजस्थान के निवासी हैं।
-
प्रागैतिहासिक काल के चित्रों के विषय में लिखिए।
Write on the painting of prehistoric period.
उत्तर: प्रागैतिहासिक काल के चित्र मुख्यतः गुफाओं की दीवारों और छतों पर बनाए गए थे। इनमें मुख्य विषय शिकार के दृश्य, जंगली जानवर (जैसे बाइसन, हिरण, घोड़े), और मानव आकृतियाँ थीं। ये चित्र प्राकृतिक रंगों (गेरू, कोयला, चूना) से बनाए जाते थे। इनका उद्देश्य संभवतः जादुई-धार्मिक विश्वास या शिकार की सफलता के लिए अनुष्ठान था। भारत में भीमबेटका (मध्य प्रदेश) की गुफाएँ प्रागैतिहासिक चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं।
-
प्रागैतिहासिक कला में 'क्षेपांकन पद्धति' क्या है?
What is the ‘stencil technique’ in prehistoric art?
उत्तर: 'क्षेपांकन पद्धति' (Stencil Technique) प्रागैतिहासिक कला की एक विधि है। इसमें चित्रकार अपने हाथ को गुफा की दीवार पर रखता था और फिर उसके ऊपर रंग (जैसे गेरू) फूंकता या छिड़कता था। जब हाथ हटाया जाता था, तो दीवार पर हाथ का नकारात्मक आकार (negative silhouette) बन जाता था। इस तकनीक का उपयोग हाथों के निशान और कुछ जानवरों की आकृतियाँ बनाने के लिए किया जाता था।
-
"जंगली भैंसे का शिकार" चित्र का वर्णन कीजिए।
Describe the “Hunting Bison” painting.
उत्तर: "जंगली भैंसे का शिकार" (Hunting Bison) चित्र प्रागैतिहासिक काल का एक प्रसिद्ध चित्र है, जो भीमबेटका की गुफाओं में पाया जाता है। इस चित्र में एक बड़े, शक्तिशाली भैंसे को दर्शाया गया है, जिसके चारों ओर छोटे-छोटे मानव आकृतियाँ भाले और धनुष-बाण लिए हुए हैं। भैंसा आक्रामक मुद्रा में है, जो शिकार के खतरे को दर्शाता है। चित्र में गति और ऊर्जा का भाव स्पष्ट है। रंगों में मुख्यतः लाल गेरू और सफेद रंग का प्रयोग हुआ है। यह चित्र प्रागैतिहासिक मानव के जीवन और शिकार पर निर्भरता को दर्शाता है।
-
मिर्जापुर के चित्रों का वर्णन कीजिए।
Describe the paintings of Mirjapur.
उत्तर: मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) की पहाड़ियों में स्थित गुफाओं में प्रागैतिहासिक चित्र मिलते हैं। ये चित्र मुख्यतः लाल, काले और सफेद रंगों में बने हैं। इनमें जानवरों (हाथी, बाघ, हिरण), मानव आकृतियों और ज्यामितीय आकृतियों के चित्र हैं। विशेषता यह है कि यहाँ के चित्रों में मानव आकृतियाँ अधिक स्पष्ट और विस्तृत हैं, जो नृत्य, शिकार और युद्ध जैसी गतिविधियों में दिखाई देती हैं। मिर्जापुर के चित्र प्रागैतिहासिक कला के विकास और मानव जीवन की विविधता को समझने में महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 20
“पद्म पाणि” चित्र का कलात्मक वर्णन कीजिए।
“पद्म पाणि” (Padma Paani) अजंता की गुफा संख्या 1 में स्थित एक प्रसिद्ध भित्तिचित्र है। इसमें बोधिसत्व को कमल का फूल धारण किए हुए दिखाया गया है। चित्र की कलात्मक विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- भाव-भंगिमा: बोधिसत्व के चेहरे पर करुणा और शांति का अद्भुत भाव है। उनकी आँखें अर्ध-निमीलित हैं, जो ध्यान और आंतरिक शांति का संकेत देती हैं।
- रंग संयोजन: इसमें गेरुआ, भूरा, हरा और नीले रंगों का सुंदर सामंजस्य है। त्वचा का रंग सुनहरा दिखाया गया है।
- रेखाएँ: रेखाएँ कोमल, प्रवाहमान और लयबद्ध हैं। शरीर की आकृति में लचीलापन और जीवंतता है।
- आभूषण: बोधिसत्व के गले में हार, मुकुट और बाजूबंद सुसज्जित हैं, जो उनकी दिव्यता को बढ़ाते हैं।
- पृष्ठभूमि: पृष्ठभूमि में कमल के फूल और पत्ते बने हैं, जो चित्र को एक आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करते हैं।
यह चित्र भारतीय चित्रकला की उत्कृष्ट कृति माना जाता है और इसमें बौद्ध धर्म के आदर्शों को अभिव्यक्त किया गया है।
प्रश्न 21
अजंता के सन्दर्भ में चैत्य और विहार किसे कहते हैं ? वर्णन कीजिए।
अजंता की गुफाएँ दो प्रकार की होती हैं: चैत्य और विहार।
- चैत्य (Chaitya): चैत्य एक प्रार्थना स्थल या स्तूप गृह होता है। यह एक लंबा, आयताकार हॉल होता है जिसके अंत में एक स्तूप (गोलाकार संरचना) बना होता है। इसमें भिक्षु प्रार्थना और ध्यान करते थे। चैत्य गृह में खंभों की पंक्तियाँ होती हैं और छत गुंबदाकार होती है। उदाहरण: गुफा संख्या 9, 10, 19, 26।
- विहार (Vihar): विहार भिक्षुओं के रहने के लिए बनाए गए आवास होते हैं। ये आमतौर पर वर्गाकार होते हैं और इनके चारों ओर छोटे-छोटे कक्ष (कोठरियाँ) बनी होती हैं। बीच में एक प्रांगण होता है। विहारों में भिक्षु रहते, पढ़ते और ध्यान करते थे। उदाहरण: गुफा संख्या 1, 2, 4, 6, 7, 16, 17।
अजंता की गुफाएँ मुख्यतः चैत्य और विहार के रूप में वर्गीकृत की गई हैं, जो बौद्ध धर्म के धार्मिक और सामाजिक जीवन को दर्शाती हैं।
प्रश्न 22
काँगड़ा चित्र शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिये।
काँगड़ा चित्र शैली (Kangra School of Painting) पहाड़ी चित्रकला की एक प्रमुख शैली है, जो 18वीं शताब्दी में विकसित हुई। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- प्रकृति चित्रण: प्रकृति का अत्यंत सुंदर और यथार्थवादी चित्रण किया गया है। वृक्ष, पत्ते, फूल, जलधाराएँ और पक्षी बड़ी बारीकी से बनाए गए हैं।
- नायिका-नायक: राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों का चित्रण प्रमुख है। नायिकाओं के मुखमंडल पर कोमल भाव और लालित्य दिखाया गया है।
- रंग योजना: हल्के, मुलायम और पारदर्शी रंगों का प्रयोग किया गया है। नीला, हरा, गुलाबी और पीला रंग प्रमुख हैं।
- रेखाएँ: रेखाएँ कोमल, लयबद्ध और प्रवाहमान हैं। आकृतियों में लचीलापन और गति का आभास होता है।
- वस्त्र और आभूषण: वस्त्रों में पारदर्शिता और सिलवटों का सुंदर चित्रण किया गया है। आभूषण बारीकी से उकेरे गए हैं।
- भावनात्मक अभिव्यक्ति: चेहरे के भावों में प्रेम, करुणा, श्रृंगार और वियोग जैसी भावनाओं को गहराई से व्यक्त किया गया है।
काँगड़ा शैली भारतीय लघु चित्रकला की एक अनमोल धरोहर है।
प्रश्न 23
“चाँद बीबी पोलो खेलते हुए” चित्र का वर्णन कीजिए।
“चाँद बीबी पोलो खेलते हुए” (Chand Bibi Playing Polo) एक प्रसिद्ध लघु चित्र है, जो दक्कन शैली (Deccan School) का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस चित्र का वर्णन इस प्रकार है:
- विषय: इसमें चाँद बीबी (अहमदनगर की सुल्ताना) को घोड़े पर सवार होकर पोलो खेलते हुए दिखाया गया है। वह एक साहसी और कुशल खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत की गई हैं।
- रचना: चित्र में चाँद बीबी को एक सफेद घोड़े पर बैठे दिखाया गया है, जो तेज गति से दौड़ रहा है। उनके हाथ में पोलो स्टिक है और वह गेंद को हिट करने की मुद्रा में हैं।
- रंग संयोजन: इसमें चमकीले और गहरे रंगों का प्रयोग किया गया है। पृष्ठभूमि में हरे मैदान और नीले आकाश का सुंदर चित्रण है। चाँद बीबी के वस्त्र लाल और सुनहरे रंग के हैं।
- विवरण: चाँद बीबी के सिर पर पगड़ी और शरीर पर शाही पोशाक है। घोड़े की साज-सज्जा भी बहुत सुंदर है। पृष्ठभूमि में कुछ अन्य सवार भी दिखाए गए हैं।
- भाव: चित्र में चाँद बीबी के आत्मविश्वास, साहस और शक्ति को दर्शाया गया है। यह एक महिला शासक की सक्रिय भूमिका को उजागर करता है।
यह चित्र दक्कन शैली की बहादुरी और कलात्मकता का प्रतीक है।
प्रश्न 24
अब्दुल रहमान चुगतई की राधिका के चित्रों को विशेषताएँ दर्शाइए।
अब्दुल रहमान चुगतई (Abdul Rahman Chughtai) एक प्रसिद्ध पाकिस्तानी चित्रकार थे, जिन्होंने राधिका के चित्रों में अद्वितीय शैली विकसित की। उनकी राधिका चित्रों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- शैली: चुगतई ने मुगल लघु चित्रकला, फारसी चित्रकला और आधुनिक कला का मिश्रण किया। उनकी शैली में सजावटी तत्व और रेखीय सौंदर्य प्रमुख है।
- राधिका का चित्रण: राधिका को एक आदर्श नायिका के रूप में चित्रित किया गया है। उनके चेहरे पर श्रृंगार, वियोग और प्रेम के भाव गहराई से उकेरे गए हैं।
- रंग योजना: चुगतई ने मिट्टी के रंगों (गेरुआ, भूरा, सुनहरा) का प्रयोग किया है। रंगों में गर्माहट और कोमलता है।
- वस्त्र और आभूषण: राधिका के वस्त्रों में पारदर्शिता और सिलवटों का सुंदर चित्रण है। आभूषण बारीकी से बनाए गए हैं, जो उनकी सुंदरता को बढ़ाते हैं।
- पृष्ठभूमि: पृष्ठभूमि में प्रायः फूल, पत्ते और ज्यामितीय पैटर्न बने होते हैं, जो चित्र को एक काल्पनिक और रोमांटिक वातावरण प्रदान करते हैं।
- भावनात्मक गहराई: चुगतई की राधिका में एक गहरी उदासी और आध्यात्मिकता का भाव है, जो दर्शकों को भावुक कर देता है।
चुगतई की राधिका चित्रकला में एक अनूठा योगदान है, जो पूर्वी और पश्चिमी कला का संगम प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 25
“यात्रा का अन्त” नामक चित्र में निहित भाव को व्यक्त कीजिए।
“यात्रा का अन्त” (End of the Journey) एक प्रसिद्ध चित्र है, जो जीवन की यात्रा के अंत और मृत्यु के दार्शनिक पहलू को दर्शाता है। इस चित्र में निहित भाव निम्नलिखित हैं:
- थकान और विश्राम: चित्र में एक बूढ़ा व्यक्ति अपनी यात्रा समाप्त करके थककर बैठा हुआ है। उसके चेहरे पर थकान और शांति दोनों का भाव है। यह जीवन के संघर्षों के बाद मिलने वाले विश्राम को दर्शाता है।
- एकांत और चिंतन: चित्र में व्यक्ति अकेला है, जो जीवन के अंत में आत्मचिंतन और एकांत की स्थिति को दर्शाता है। यह मृत्यु के बाद के शांतिपूर्ण एकांत का प्रतीक है।
- स्वीकृति: चित्र में व्यक्ति के चेहरे पर किसी प्रकार का दुख या पछतावा नहीं है, बल्कि जीवन के अंत को स्वीकार करने का भाव है। यह मृत्यु को एक स्वाभाविक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है।
- प्रकृति का सहयोग: पृष्ठभूमि में सूर्यास्त का दृश्य है, जो जीवन के अंत का प्रतीक है। पेड़ और पत्ते भी मुरझाए हुए हैं, जो वातावरण को उदास और शांत बनाते हैं।
यह चित्र जीवन और मृत्यु के चक्र को एक गहरे दार्शनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है, जो दर्शकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न 26
के. के. हेब्बार के चित्र “मुर्गों की लड़ाई” का वर्णन कीजिए।
के. के. हेब्बार (K. K. Hebbar) एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे। उनका चित्र “मुर्गों की लड़ाई” (Cock Fighting) भारतीय ग्रामीण जीवन का एक जीवंत चित्रण है। इसका वर्णन इस प्रकार है:
- विषय: चित्र में दो मुर्गों को आपस में लड़ते हुए दिखाया गया है। यह एक पारंपरिक ग्रामीण खेल है, जिसे हेब्बार ने बड़ी कुशलता से चित्रित किया है।
- गति और ऊर्जा: मु
प्रश्न 24
राम जैसवाल के चित्रों के कला गुणों पर प्रकाश डालिए।
Throw light on the art value of paintings done by Ram Jaiswal.
समाधान: राम जैसवाल राजस्थानी चित्रकला के प्रसिद्ध चित्रकार थे। उनके चित्रों के प्रमुख कला गुण निम्नलिखित हैं:
- पारंपरिक शैली: उन्होंने राजस्थानी लघु चित्रकला की परंपरा को आगे बढ़ाया, विशेषकर मेवाड़ और बूंदी शैली का प्रभाव दिखता है।
- रंगों का सामंजस्य: उनके चित्रों में चटकीले और गर्म रंगों (लाल, पीला, नीला) का सुंदर मेल होता है, जो भावनाओं को गहराई से व्यक्त करता है।
- रेखाओं की सफाई: रेखाएँ स्पष्ट, सुडौल और प्रवाहपूर्ण होती हैं, जो आकृतियों को जीवंत बनाती हैं।
- भावनात्मक अभिव्यक्ति: चेहरे के भाव और मुद्राएँ स्वाभाविक और भावपूर्ण होती हैं, जो दर्शकों को कहानी से जोड़ती हैं।
- विषय विविधता: उन्होंने धार्मिक, ऐतिहासिक और लोक जीवन के विषयों को चित्रित किया, जिसमें राधा-कृष्ण लीलाएँ और राजस्थानी नारी जीवन प्रमुख हैं।
इन गुणों के कारण राम जैसवाल के चित्र न केवल सौंदर्य की दृष्टि से मूल्यवान हैं, बल्कि राजस्थानी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
प्रश्न 25
प्रागैतिहासिक काल की कला के उद्भव व विकास यात्रा पर एक लेख लिखिए।
Write an essay on the origin and development of art in prehistoric period.
समाधान: प्रागैतिहासिक काल की कला मानव सभ्यता के आरंभिक चरणों में विकसित हुई। इसका उद्भव लगभग 40,000 वर्ष पूर्व पुरापाषाण काल में हुआ। प्रारंभ में मनुष्य ने गुफाओं की दीवारों पर जानवरों और शिकार के दृश्यों को चित्रित किया, जैसे फ्रांस की लास्कॉक्स गुफाएँ और भारत की भीमबेटका गुफाएँ। ये चित्र प्राकृतिक रंगों (गेरू, कोयला) से बनाए गए और इनमें जीवंतता तथा गति का भाव था।
मध्यपाषाण काल में कला का विकास हुआ, जिसमें मानव आकृतियाँ और सामूहिक गतिविधियाँ (नृत्य, शिकार) चित्रित हुईं। नवपाषाण काल में मिट्टी के बर्तनों पर ज्यामितीय डिज़ाइन और पशु-पक्षियों के चित्र बनाए गए। धीरे-धीरे कला धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों से जुड़ गई।
विकास यात्रा में मूर्तिकला भी शामिल हुई, जैसे 'विलेंडॉर्फ की वीनस' मूर्ति। प्रागैतिहासिक कला ने मानव के सौंदर्यबोध, संचार की आवश्यकता और आध्यात्मिक विश्वासों को व्यक्त किया। यह कला बाद की सभ्यताओं (मिस्र, मेसोपोटामिया) की नींव बनी।
प्रश्न 26
“दारा शिकोह को बारात” नामक चित्र का वर्णन करते हुए मुगल चित्रों की विशेषताएँ दर्शाइए।
Describe the characteristics of Mughal paintings through “The Procession of Dara Shikoh” painting.
समाधान: "दारा शिकोह को बारात" मुगल काल का एक प्रसिद्ध लघु चित्र है, जो शाहजहाँ के पुत्र दारा शिकोह के विवाह जुलूस को दर्शाता है। इस चित्र में शाही परिवार, हाथी, घोड़े और नौकर-चाकरों का विस्तृत दृश्य है।
मुगल चित्रों की विशेषताएँ:
- यथार्थवाद: चेहरों, वस्त्रों और आभूषणों का अत्यंत सूक्ष्म और यथार्थ चित्रण।
- परिप्रेक्ष्य: दूरी और गहराई का प्रभाव दिखाने के लिए परिप्रेक्ष्य का उपयोग।
- रंगों का संयम: चटकीले रंगों (सोना, लाल, नीला) का सामंजस्यपूर्ण प्रयोग।
- प्रकृति चित्रण: पेड़-पौधे, पक्षी और परिदृश्य का बारीकी से चित्रण।
- फारसी प्रभाव: फारसी लघु चित्रकला की रेखाओं और सजावट का प्रभाव।
- ऐतिहासिक दस्तावेज़ीकरण: शाही जीवन और घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण।
यह चित्र मुगल चित्रकला की उत्कृष्टता और शाही संरक्षण को दर्शाता है।
प्रश्न 27
राजस्थान की प्रमुख चित्र शैलियों और उनके विषयों का वर्णन कीजिए।
Describe the subject matter and main schools of Rajasthani paintings.
समाधान: राजस्थानी चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ और उनके विषय निम्नलिखित हैं:
- मेवाड़ शैली: विषय - राधा-कृष्ण लीलाएँ, रामायण, महाभारत, राजदरबार के दृश्य। रंगों में लाल, पीला और नीला प्रमुख।
- बूंदी शैली: विषय - प्रकृति, बाग-बगीचे, रागमाला, नायिका भेद। रंगों में हरा और सुनहरा अधिक।
- कोटा शैली: विषय - शिकार के दृश्य, राजपूत जीवन, संगीत सभाएँ। रेखाओं की सफाई और गति का भाव।
- जयपुर शैली: विषय - धार्मिक ग्रंथ (गीत गोविंद), राजदरबार, युद्ध दृश्य। विस्तृत और सजावटी शैली।
- जोधपुर शैली: विषय - देवी-देवता, लोक कथाएँ, शाही चित्र। गहरे रंग और बड़ी आकृतियाँ।
- किशनगढ़ शैली: विषय - राधा-कृष्ण (बनी-ठनी), प्रेम प्रसंग। कोमल रेखाएँ और भावपूर्ण चेहरे।
इन शैलियों में राजस्थानी संस्कृति, धर्म और प्रकृति का सुंदर चित्रण हुआ है।
प्रश्न 28
बाघ गुफा का वर्णन करते हुए “नृत्यदल” चित्र का वर्णन कीजिए।
Write on Bagh caves describing the fresco “Dancing Group”.
समाधान: बाघ गुफाएँ मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित हैं, जो 5वीं-6वीं शताब्दी (गुप्त काल) की हैं। ये नौ गुफाओं का समूह हैं, जिनमें भित्तिचित्र (फ्रेस्को) मिलते हैं। ये चित्र अजंता गुफाओं से प्रेरित हैं, लेकिन अधिक जीवंत और लोकप्रिय शैली में बने हैं।
"नृत्यदल" चित्र: यह चित्र गुफा संख्या 4 में स्थित है। इसमें नर्तकियों का एक समूह नृत्य करता दिखाया गया है। नर्तकियों के शरीर की मुद्राएँ लचीली और लयबद्ध हैं। वे हाथों में मालाएँ और वस्त्र धारण किए हैं। चेहरों पर आनंद और उत्साह का भाव है। रंगों में लाल, पीला, हरा और नीला प्रमुख हैं। पृष्ठभूमि में संगीतकार और दर्शक भी दिखाए गए हैं। यह चित्र गुप्त काल की सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।
प्रश्न 29
बंगाल शैली के बारे में आप क्या जानते हैं? दो चित्रों के माध्यम से समझाइये।
अथवा
स्पष्ट कीजिए कि विषय और अभिव्यक्ति के अनुरूप यामिनी राय एक सच्चे भारतीय चित्रकार थे।
समाधान (बंगाल शैली): बंगाल शैली (बंगाल स्कूल) 20वीं सदी की शुरुआत में अबनींद्रनाथ टैगोर के नेतृत्व में विकसित हुई। यह पश्चिमी कला के प्रभाव के विरोध में भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास था।
विशेषताएँ:
- भारतीय लघु चित्रकला (मुगल, राजस्थानी) और अजंता भित्तिचित्रों से प्रेरणा।
- कोमल रेखाएँ, मटमैले रंग (पेस्टल), और भावनात्मक अभिव्यक्ति।
- विषय - पौराणिक कथाएँ, राष्ट्रीयता, भारतीय जीवन।
दो चित्रों के माध्यम से:
- "भारत माता" (अबनींद्रनाथ टैगोर): इसमें भारत माता को चार हाथों वाली देवी के रूप में दिखाया गया है, जो पुस्तक, फल, वस्त्र और माला धारण किए हैं। यह राष्ट्रीयता और भारतीय संस्कृति का प्रतीक है।
- "शिव-पार्वती" (नंदलाल बोस): इसमें शिव और पार्वती को प्राकृतिक परिवेश में कोमल रेखाओं और मटमैले रंगों में चित्रित किया गया है, जो भारतीय पौराणिक कथाओं को जीवंत करता है।
अथवा (यामिनी राय): यामिनी राय (1887-1972) बंगाल शैली के प्रमुख चित्रकार थे। वे विषय और अभिव्यक्ति के अनुरूप सच्चे भारतीय चित्रकार थे क्योंकि:
- उन्होंने भारतीय लोक कला (कालीघाट पटचित्र, मधुबनी) से प्रेरणा ली।
- उनके चित्रों में चटकीले रंग (लाल, पीला, नीला) और मोटी रेखाएँ हैं, जो भारतीय ग्रामीण जीवन और देवी-देवताओं को दर्शाती हैं।
- उदाहरण: "कृष्ण और गोपियाँ" में उन्होंने पारंपरिक विषय को आधुनिक शैली में प्रस्तुत किया, जो भारतीयता को बनाए रखता है।
प्रश्न 30
What do you mean by Bengal school? Describe with any two paintings of it.
अथवा / OR
In the sense of subject matter and expression, Yamini Roy was truly an Indian artist.
नारायण श्रीधर बेंद्रे के किन्हीं दो चित्रों की कला की समीक्षा कीजिए।
अथवा / OR
Analyse any two works painted by Narayan Shreedhar Bendre.
अथवा / OR
Describe the important paintings painted by K. K. Hebbar.
Solution (Bengal School):
The Bengal School of Art (also known as the Bengal School of Painting) emerged in the early 20th century as a nationalist reaction against Western academic art. It sought to revive Indian artistic traditions, drawing inspiration from Mughal, Rajput, and Ajanta cave paintings, as well as Japanese wash techniques. Key figures included Abanindranath Tagore, Nandalal Bose, and Gaganendranath Tagore.
Two representative paintings:
- "Bharat Mata" (Mother India) by Abanindranath Tagore (1905): This iconic painting depicts a saffron-clad woman holding a book, sheaves of paddy, a white cloth, and a garland, symbolizing knowledge, food, clothing, and spirituality. The soft, flowing lines and muted colors reflect the Bengal School's lyrical and spiritual style.
- "Journey's End" by Abanindranath Tagore (1913): This painting shows a camel caravan resting at dusk, with a melancholic atmosphere. The use of wash technique and delicate brushwork creates a dreamlike quality, emphasizing mood over realism.
Alternative (Yamini Roy): Yamini Roy (1887–1972) was a pioneer of modern Indian art who drew from folk traditions like Kalighat painting and Bengal patachitra. His works, such as "Krishna and Radha" and "Mother and Child," use bold outlines, flat colors, and simplified forms, reflecting Indian subject matter and expression.
Solution (Narayan Shreedhar Bendre):
Narayan Shreedhar Bendre (1910–1992) was a prominent Indian painter known for his lyrical and spiritual style. Two notable works:
- "The Flute Player": This painting depicts a rural musician playing a flute, with a serene landscape in the background. Bendre uses soft, flowing lines and earthy tones to evoke a sense of harmony between man and nature.
- "Mother and Child": A tender portrayal of a mother holding her child, rendered with delicate brushwork and warm colors. The composition emphasizes the bond of love and care, reflecting Bendre's humanistic approach.
Alternative (K. K. Hebbar): K. K. Hebbar (1911–1996) was known for his realistic and socially conscious paintings. Important works include "The Last Supper" (a modern interpretation of the biblical scene) and "The Beggar," which highlight human suffering and dignity.