RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers

Class 12th students hunting authentic previous year papers for Economics-SS-10-2015 (2015) land here for a reason: the paper below matches how RBSE assessments are remembered from that year. RBSE Solution does not mix years on one page; each combination gets its own notes.

Skim the overview sections, then work through the scanned pages. Pair this practice with RBSE books and solutions when you need to relearn a concept a question exposed.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2015
Subject Economics-SS-10-2015
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2015, and subject Economics-SS-10-2015 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the Economics-SS-10-2015 question paper from 2015 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015

Scroll through the Previous Year Papers pages for Economics-SS-10-2015 (2015).

RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Economics-SS-10-2015 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Economics-SS-10-2015 2015 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015

अर्थशास्त्र
ECONOMICS

समय : 3 घण्टे     पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

No. of Questions — 30     No. of Printed Pages — 7

Roll No. : ____________________

SS—10—Econ

खण्ड - अ / Section - A

1. विस्थापन दर का आशय लिखिए।

Write the meaning of diminishing rate of substitution.

उत्तर: विस्थापन दर (Diminishing Rate of Substitution) का आशय है कि जब उपभोक्ता एक वस्तु की अधिक से अधिक इकाइयों का त्याग करके दूसरी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई प्राप्त करता है, तो त्यागी गई वस्तु की सीमांत उपयोगिता घटती जाती है। इस प्रकार, एक वस्तु को दूसरी वस्तु से बदलने की दर घटती जाती है।

Answer: The diminishing rate of substitution means that as a consumer gives up more and more units of one good to obtain additional units of another good, the marginal utility of the sacrificed good decreases. Thus, the rate at which one good is substituted for another diminishes.

2. माँग फलन क्या है ?

What is demand function ?

उत्तर: माँग फलन (Demand Function) वह गणितीय संबंध है जो किसी वस्तु की माँगी गई मात्रा और उसे प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों (जैसे कीमत, उपभोक्ता की आय, संबंधित वस्तुओं की कीमत, स्वाद आदि) के बीच संबंध को दर्शाता है। इसे सामान्यतः Dx = f(Px, Y, Pr, T, ...) के रूप में लिखा जाता है।

Answer: Demand function is a mathematical relationship that shows the relationship between the quantity demanded of a commodity and the various factors affecting it (such as price, consumer income, prices of related goods, tastes, etc.). It is generally expressed as Dx = f(Px, Y, Pr, T, ...).

3. बाजार अर्थव्यवस्था का एक उदाहरण बताइए।

Give an example of market economy.

उत्तर: बाजार अर्थव्यवस्था का एक उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) है, जहाँ अधिकांश आर्थिक निर्णय बाजार की शक्तियों (माँग और पूर्ति) द्वारा निर्धारित होते हैं और सरकार का हस्तक्षेप सीमित होता है।

Answer: An example of a market economy is the United States of America (USA), where most economic decisions are determined by market forces (demand and supply) and government intervention is limited.

4. दीर्घकाल से क्या तात्पर्य है ?

What is meant by long run period ?

उत्तर: दीर्घकाल (Long Run) से तात्पर्य उस समय अवधि से है जिसमें उत्पादन के सभी साधन (श्रम, पूँजी, भूमि, उद्यम) परिवर्तनशील होते हैं। इस अवधि में फर्म अपने उत्पादन स्तर को पूरी तरह से बदल सकती है और नई फर्में उद्योग में प्रवेश कर सकती हैं या पुरानी फर्में बाहर निकल सकती हैं।

Answer: Long run refers to the time period in which all factors of production (labour, capital, land, entrepreneurship) are variable. In this period, a firm can completely change its production level, and new firms can enter the industry or existing firms can exit.

5. कीन्स की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम लिखिए।

Write the name of Keynes's famous book.

उत्तर: जॉन मेनार्ड कीन्स की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम "द जनरल थ्योरी ऑफ एम्प्लॉयमेंट, इंटरेस्ट एंड मनी" (The General Theory of Employment, Interest and Money) है, जो 1936 में प्रकाशित हुई थी।

Answer: The famous book of John Maynard Keynes is "The General Theory of Employment, Interest and Money", published in 1936.

6. मुद्रा के संचलन वेग का आशय बताइए।

Give the meaning of velocity of circulation of money.

उत्तर: मुद्रा के संचलन वेग (Velocity of Circulation of Money) से आशय है कि एक निश्चित समय अवधि में मुद्रा की एक इकाई का उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के क्रय-विक्रय में कितनी बार होता है। इसे सामान्यतः V = (P × T) / M के रूप में मापा जाता है, जहाँ P कीमत स्तर, T लेन-देन की मात्रा और M मुद्रा की आपूर्ति है।

Answer: The velocity of circulation of money refers to the number of times a unit of money is used in the purchase and sale of goods and services during a given period of time. It is generally measured as V = (P × T) / M, where P is the price level, T is the volume of transactions, and M is the money supply.

SS— 2--#607. SS-600

भारत के केन्द्रीय बैंक का नाम लिखिए।

Write the name of central bank of India.

उत्तर: भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है।

सरकारी बजट से क्या तात्पर्य है ?

What is meant by Government budget ?

उत्तर: सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय (प्राप्तियों) और व्यय का एक विस्तृत विवरण है। यह सरकार की आर्थिक नीतियों और प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

मुद्रा की सट्टा माँग को कौन-सा कारक निर्धारित करता है ?

Which factor determines speculation demand for money ?

उत्तर: मुद्रा की सट्टा माँग को ब्याज दर (Rate of Interest) निर्धारित करती है। ब्याज दर कम होने पर सट्टा माँग बढ़ती है और ब्याज दर अधिक होने पर घटती है।

राजकोषीय घाटा किसे कहते हैं ?

What is fiscal deficit ?

उत्तर: राजकोषीय घाटा किसी वित्तीय वर्ष में सरकार के कुल व्यय और उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर है। यह सरकार की कुल उधारी आवश्यकता को दर्शाता है।


खण्ड - ब

Section - B

व्यष्टि एवं समष्टि अर्थशास्त्र में कोई दो अन्तर बताइए।

Give any two differences between Micro- and Macro-economics.

उत्तर: व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र में दो अंतर निम्नलिखित हैं:

  1. अध्ययन का क्षेत्र: व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों (जैसे उपभोक्ता, फर्म) का अध्ययन करता है, जबकि समष्टि अर्थशास्त्र संपूर्ण अर्थव्यवस्था (जैसे राष्ट्रीय आय, रोजगार) का अध्ययन करता है।
  2. केंद्रीय समस्या: व्यष्टि अर्थशास्त्र मूल्य निर्धारण और संसाधन आवंटन पर केंद्रित है, जबकि समष्टि अर्थशास्त्र आय, उत्पादन और रोजगार के स्तर पर केंद्रित है।

उपभोक्ता का इष्टतम संयोग को दर्शाने वाला रेखाचित्र बनाइए।

Draw a diagram showing optimum combination of consumer.

उत्तर: उपभोक्ता का इष्टतम संयोग वह बिंदु है जहाँ बजट रेखा (Budget Line) उच्चतम संभव तटस्थता वक्र (Indifference Curve) को स्पर्श करती है। इस बिंदु पर, तटस्थता वक्र और बजट रेखा की ढलान बराबर होती है, जो उपभोक्ता की अधिकतम संतुष्टि को दर्शाता है।

[रेखाचित्र: एक ग्राफ जिसमें X-अक्ष पर वस्तु X और Y-अक्ष पर वस्तु Y है। एक नीचे की ओर झुकी हुई सीधी रेखा (बजट रेखा) और तीन उत्तल तटस्थता वक्र (IC1, IC2, IC3) दिखाए गए हैं। बजट रेखा IC2 को बिंदु E पर स्पर्श करती है, जो इष्टतम संयोग है।]

अल्पाधिकार बाजार की कोई दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

Mention any two characteristics of oligopoly market.

उत्तर: अल्पाधिकार बाजार की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. कुछ विक्रेता: इस बाजार में कुछ बड़ी फर्में होती हैं जो बाजार के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित करती हैं।
  2. प्रतिस्पर्धा पर निर्भरता: प्रत्येक फर्म के निर्णय (जैसे मूल्य निर्धारण) अन्य फर्मों के निर्णयों पर निर्भर करते हैं, जिससे आपसी निर्भरता होती है।

औसत सम्प्राप्ति एवं सीमान्त सम्प्राप्ति में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Clarify the difference between average revenue and marginal revenue.

उत्तर: औसत सम्प्राप्ति (AR) प्रति इकाई बेची गई वस्तु से प्राप्त आय है, जबकि सीमान्त सम्प्राप्ति (MR) एक अतिरिक्त इकाई बेचने से कुल आय में होने वाली वृद्धि है। AR = कुल आय / बेची गई इकाइयाँ, जबकि MR = कुल आय में परिवर्तन / बेची गई इकाइयों में परिवर्तन। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में AR = MR होता है, जबकि अपूर्ण प्रतिस्पर्धा में MR, AR से कम होता है।

सकल राष्ट्रीय उत्पाद एवं सकल घरेलू उत्पाद की अवधारणाओं को समझाइए।

Discuss the concepts of Gross National Product and Gross Domestic Product.

उत्तर: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य है। सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) किसी देश के निवासियों द्वारा एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य है, चाहे वे देश के अंदर या बाहर उत्पादित हों। GNP = GDP + विदेशों से शुद्ध कारक आय।

व्यावसायिक बैंकों के किन्हीं दो मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।

Describe any two main functions of commercial banks.

उत्तर: व्यावसायिक बैंकों के दो मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. जमा स्वीकार करना: बैंक जनता से बचत, चालू और सावधि जमा के रूप में धन स्वीकार करते हैं और उस पर ब्याज देते हैं।
  2. ऋण देना: बैंक जमा किए गए धन का उपयोग करके व्यक्तियों और व्यवसायों को ऋण, अग्रिम और नकद ऋण के रूप में धन उधार देते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।

आरक्षित जमा अनुपात क्या है ? समझाइए।

What is reserve deposit ratio ? Explain.

उत्तर: आरक्षित जमा अनुपात (Reserve Deposit Ratio) वह अनुपात है जो बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत केन्द्रीय बैंक (RBI) के पास आरक्षित रखना होता है। यह दो प्रकार का होता है: नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)। यह अनुपात बैंकों की ऋण देने की क्षमता और मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करता है।

निवेश गुणक की प्रक्रिया को संक्षेप में समझाइए।

Explain briefly the process of investment multiplier.

उत्तर: निवेश गुणक (Investment Multiplier) यह दर्शाता है कि निवेश में वृद्धि से राष्ट्रीय आय में कितनी गुना वृद्धि होती है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है: जब निवेश बढ़ता है, तो इससे आय में वृद्धि होती है। यह अतिरिक्त आय उपभोग पर खर्च की जाती है, जिससे दूसरों की आय बढ़ती है। यह प्रक्रिया चक्रीय रूप से चलती रहती है, जिससे कुल आय में प्रारंभिक निवेश से कई गुना वृद्धि होती है। गुणक का मान = 1 / (1 - MPC) या 1 / MPS, जहाँ MPC सीमांत उपभोग प्रवृत्ति है।

Section – C

9. परिवर्ती अनुपात नियम की व्याख्या कीजिए।

Explain the law of variable proportions.

उत्तर: परिवर्ती अनुपात नियम (Law of Variable Proportions) के अनुसार, जब उत्पादन के एक साधन (जैसे श्रम) को स्थिर साधनों (जैसे भूमि) के साथ बढ़ाया जाता है, तो सीमांत उत्पाद (Marginal Product) पहले बढ़ता है, फिर घटने लगता है, और अंत में ऋणात्मक हो जाता है। यह नियम तीन अवस्थाओं में कार्य करता है:

  1. वर्धमान प्रतिफल (Increasing Returns): जब सीमांत उत्पाद बढ़ता है।
  2. ह्रासमान प्रतिफल (Diminishing Returns): जब सीमांत उत्पाद घटने लगता है लेकिन धनात्मक रहता है।
  3. ऋणात्मक प्रतिफल (Negative Returns): जब सीमांत उत्पाद ऋणात्मक हो जाता है।

यह नियम अल्पकाल में लागू होता है जब कम से कम एक साधन स्थिर होता है।

20. सारणी में दी गई उत्पादन इकाइयों एवं कुल परिवर्ती लागत के आधार पर अल्पकालीन औसत लागत एवं अल्पकालीन सीमान्त लागत की गणना कीजिए:

Calculate short run average cost and short run marginal cost on the basis of units of output and total variable cost in the given table:

निर्गत (इकाइयाँ)
Output (units)
कुल परिवर्ती लागत (रु०)
Total Variable Cost (Rs.)
अल्पकालीन औसत लागत (रु०)
Short Run Average Cost (Rs.)
अल्पकालीन सीमान्त लागत (रु०)
Short Run Marginal Cost (Rs.)
1 30 30 30
2 40 20 10
3 48 16 8
4 52 13 4

गणना विधि:

  • अल्पकालीन औसत लागत (SAC) = कुल परिवर्ती लागत / निर्गत इकाइयाँ
  • अल्पकालीन सीमान्त लागत (SMC) = कुल परिवर्ती लागत में परिवर्तन / निर्गत में परिवर्तन

उदाहरण: निर्गत 2 इकाई पर SAC = 40/2 = 20 रु०; SMC = (40-30)/(2-1) = 10 रु०। इसी प्रकार अन्य मान निकाले गए हैं।

21. पूर्ति वक्र क्या है? एक फर्म के पूर्ति वक्र को निर्धारित करने वाले कोई तीन तत्व सुझाइए।

What is supply curve? Suggest any three elements which determine supply curve of a firm.

उत्तर: पूर्ति वक्र (Supply Curve) एक रेखीय चित्रण है जो विभिन्न कीमतों पर एक फर्म द्वारा बेची जाने वाली वस्तु की मात्रा को दर्शाता है। यह सामान्यतः ऊपर की ओर ढलान वाला होता है, जो कीमत और पूर्ति के बीच सीधा संबंध दर्शाता है।

एक फर्म के पूर्ति वक्र को निर्धारित करने वाले तीन तत्व:

  1. उत्पादन लागत (Cost of Production): यदि उत्पादन लागत बढ़ती है, तो पूर्ति कम हो जाती है, जिससे पूर्ति वक्र बाईं ओर खिसक जाता है।
  2. तकनीकी प्रगति (Technological Progress): बेहतर तकनीक से उत्पादन लागत घटती है और पूर्ति बढ़ती है, जिससे पूर्ति वक्र दाईं ओर खिसकता है।
  3. वस्तु की कीमत (Price of the Good): वस्तु की कीमत बढ़ने पर फर्म अधिक मात्रा में पूर्ति करती है, जो पूर्ति वक्र पर गति (movement) दर्शाता है।

22. एकाधिकार को परिभाषित कीजिए। एकाधिकारी की कोई तीन शर्तें समझाइए।

Define monopoly. Describe any three conditions of a monopolist.

उत्तर: एकाधिकार (Monopoly) एक बाजार संरचना है जिसमें एक ही विक्रेता (एकाधिकारी) किसी वस्तु या सेवा का उत्पादन और विक्रय करता है, जिसका कोई निकट विकल्प नहीं होता।

एकाधिकारी की तीन शर्तें:

  1. एकमात्र विक्रेता (Single Seller): बाजार में केवल एक फर्म होती है जो पूरी पूर्ति को नियंत्रित करती है।
  2. कोई निकट विकल्प नहीं (No Close Substitutes): वस्तु का कोई निकट विकल्प उपलब्ध नहीं होता, जिससे एकाधिकारी को कीमत निर्धारण की शक्ति मिलती है।
  3. प्रवेश में बाधाएं (Barriers to Entry): नई फर्मों के बाजार में प्रवेश पर कानूनी, तकनीकी या प्राकृतिक बाधाएं होती हैं, जैसे पेटेंट या सरकारी लाइसेंस।

प्रश्न 23

निम्नांकित समंकों की सहायता से राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए :

  1. बाजार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद = 1,000 करोड़ रु.
  2. मूल्य ह्रास = 200 करोड़ रु.
  3. अप्रत्यक्ष कर = 50 करोड़ रु.
  4. अनुदान = 250 करोड़ रु.

Calculate national income with the help of following data :

  1. Gross National Product at market price = Rs. 1,000 crore
  2. Depreciation = Rs. 200 crore
  3. Indirect Taxes = Rs. 50 crore
  4. Subsidy = Rs. 250 crore

हल:

राष्ट्रीय आय (NNPFC) = GNPMP – मूल्य ह्रास – अप्रत्यक्ष कर + अनुदान

= 1,000 – 200 – 50 + 250

= 1,000 – 200 – 50 + 250 = 1,000 करोड़ रु.

उत्तर: राष्ट्रीय आय = 1,000 करोड़ रु.

प्रश्न 24

केन्द्रीय बैंक को व्यावसायिक बैंकों का अंतिम ऋणदाता क्यों माना जाता है ? 2 कारण स्पष्ट कीजिए।

Why is central bank treated as lender of last resort for commercial banks ? Clarify with reason.

उत्तर:

केन्द्रीय बैंक को व्यावसायिक बैंकों का अंतिम ऋणदाता इसलिए माना जाता है क्योंकि जब व्यावसायिक बैंकों को नकदी संकट का सामना करना पड़ता है और वे अन्य स्रोतों से ऋण प्राप्त नहीं कर पाते, तब केन्द्रीय बैंक उन्हें ऋण प्रदान करता है।

कारण:

  1. बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बनाए रखना – यदि कोई बैंक दिवालिया हो जाता है, तो पूरे बैंकिंग तंत्र पर संकट आ सकता है। केन्द्रीय बैंक ऋण देकर इस संकट को रोकता है।
  2. वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना – केन्द्रीय बैंक अंतिम ऋणदाता के रूप में कार्य करके अर्थव्यवस्था में तरलता बनाए रखता है और बैंकों को पतन से बचाता है।

प्रश्न 26

पैरामेट्रिक शिफ्ट से आप क्या समझते हैं ?

What do you understand by parametric shift ?

उत्तर:

पैरामेट्रिक शिफ्ट का अर्थ है किसी आर्थिक फलन (जैसे उपभोग फलन, बचत फलन, या निवेश फलन) के प्राचलों (parameters) में परिवर्तन होना। उदाहरण के लिए, यदि उपभोग फलन C = a + bY में a या b का मान बदल जाता है, तो इसे पैरामेट्रिक शिफ्ट कहते हैं। यह परिवर्तन स्वायत्त व्यय, प्रवृत्ति, या नीतिगत बदलावों के कारण हो सकता है।

प्रश्न 27

पूँजीगत प्राप्तियों से क्या अभिप्राय है ? पूँजीगत प्राप्तियों की कोई दो मदों का उल्लेख कीजिए।

What are meant by capital receipts ? Mention any two items of capital receipts.

उत्तर:

पूँजीगत प्राप्तियाँ वे प्राप्तियाँ हैं जो सरकार की देनदारियों (liabilities) को बढ़ाती हैं या उसकी संपत्तियों (assets) को घटाती हैं। ये प्राप्तियाँ सरकार के बजट में पूँजीगत खाते के अंतर्गत आती हैं।

पूँजीगत प्राप्तियों की दो मदें:

  1. बाजार से लिए गए ऋण (Market borrowings)
  2. विदेशी सरकारों या संस्थाओं से प्राप्त ऋण (Loans from foreign governments or institutions)

प्रश्न 28

अदायगी संतुलन एवं व्यापार संतुलन के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

Clarify the difference between balance of payments and balance of trade.

उत्तर:

आधार अदायगी संतुलन (Balance of Payments) व्यापार संतुलन (Balance of Trade)
अर्थ यह किसी देश के निवासियों और शेष विश्व के बीच सभी आर्थिक लेन-देन (वस्तु, सेवा, पूँजी, हस्तांतरण) का लेखा है। यह केवल दृश्य वस्तुओं (visible goods) के निर्यात और आयात के अंतर को दर्शाता है।
व्यापकता व्यापक – इसमें वस्तु, सेवा, आय, हस्तांतरण, और पूँजी लेन-देन शामिल हैं। संकीर्ण – केवल वस्तु व्यापार शामिल है।
संतुलन हमेशा संतुलित होता है (लेखांकन दृष्टि से) क्योंकि चालू खाता + पूँजी खाता = 0। असंतुलित हो सकता है – अधिशेष या घाटा।
उदाहरण निर्यात, आयात, विदेशी निवेश, विदेशी ऋण, प्रेषण (remittances) आदि। केवल वस्तुओं का निर्यात और आयात।

खण्ड - द (Section - D)

प्रश्न 28.

माँग की कीमत लोच का क्या अभिप्राय है? माँग की कीमत लोच की चार श्रेणियों को समझाइए।

अथवा

माँग की कीमत लोच की ज्यामितीय विधि को सचित्र समझाइए।

What is meant by price elasticity of demand? Explain any four categories of price elasticity of demand. (2+4)

OR

Explain the geometric method of price elasticity of demand with diagram. (6)

उत्तर (विकल्प 1):

माँग की कीमत लोच का अभिप्राय: माँग की कीमत लोच (Price Elasticity of Demand) किसी वस्तु की माँग की मात्रा में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन और उस वस्तु की कीमत में होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के अनुपात को कहते हैं। यह मापता है कि कीमत में परिवर्तन होने पर माँग कितनी संवेदनशील है।

माँग की कीमत लोच की चार श्रेणियाँ:

  1. पूर्णतः लोचदार माँग (Perfectly Elastic Demand): जब कीमत में बहुत छोटे परिवर्तन पर माँग में अनंत परिवर्तन होता है। इस स्थिति में लोच अनंत (∞) होती है। माँग वक्र क्षैतिज रेखा होती है।
  2. पूर्णतः बेलोचदार माँग (Perfectly Inelastic Demand): जब कीमत में कितना भी परिवर्तन हो, माँग में कोई परिवर्तन नहीं होता। इस स्थिति में लोच शून्य (0) होती है। माँग वक्र ऊर्ध्वाधर रेखा होती है।
  3. इकाई लोचदार माँग (Unitary Elastic Demand): जब कीमत में प्रतिशत परिवर्तन और माँग में प्रतिशत परिवर्तन बराबर होता है। इस स्थिति में लोच 1 के बराबर होती है।
  4. अपेक्षाकृत लोचदार माँग (Relatively Elastic Demand): जब माँग में प्रतिशत परिवर्तन, कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से अधिक होता है। इस स्थिति में लोच 1 से अधिक (E>1) होती है।

या

उत्तर (विकल्प 2):

माँग की कीमत लोच की ज्यामितीय विधि: इस विधि में माँग वक्र पर किसी बिंदु पर लोच ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है:

बिंदु लोच = (माँग वक्र के निचले भाग की लंबाई) / (माँग वक्र के ऊपरी भाग की लंबाई)

एक सीधी रेखीय माँग वक्र पर, मध्य बिंदु पर लोच 1 होती है। मध्य बिंदु से ऊपर लोच 1 से अधिक और नीचे लोच 1 से कम होती है। (चित्र में दर्शाया जा सकता है कि कैसे विभिन्न बिंदुओं पर लोच का मान बदलता है।)

प्रश्न 29.

अल्पकालीन औसत लागत एवं दीर्घकालीन औसत लागत की सचित्र व्याख्या कीजिए।

अथवा

अल्पकालीन सीमान्त लागत एवं दीर्घकालीन सीमान्त लागत की सचित्र व्याख्या कीजिए।

Explain short run average cost and long run average cost with diagram. (2+2+2)

OR

Explain short run marginal cost and long run marginal cost with diagram. (2+2+2)

उत्तर (विकल्प 1):

अल्पकालीन औसत लागत (Short Run Average Cost - SAC): अल्पकाल में कम से कम एक साधन स्थिर होता है। SAC वक्र U-आकार का होता है। प्रारंभ में उत्पादन बढ़ने पर SAC घटती है, फिर एक न्यूनतम बिंदु पर पहुँचती है, और उसके बाद बढ़ने लगती है। यह घटते और बढ़ते प्रतिफल के नियम के कारण होता है।

दीर्घकालीन औसत लागत (Long Run Average Cost - LAC): दीर्घकाल में सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं। LAC वक्र भी U-आकार का होता है, लेकिन यह SAC वक्रों की तुलना में चापलूस (flatter) होता है। LAC वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्रों का आवरण (envelope) होता है। यह पैमाने के बचत (economies of scale) और पैमाने की अबचत (diseconomies of scale) के कारण U-आकार का बनता है।

(चित्र में SAC और LAC वक्रों को U-आकार में दर्शाया जा सकता है, जहाँ LAC सभी SAC वक्रों को नीचे से स्पर्श करता है।)

या

उत्तर (विकल्प 2):

अल्पकालीन सीमान्त लागत (Short Run Marginal Cost - SMC): SMC उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई बढ़ाने पर कुल लागत में होने वाली वृद्धि है। SMC वक्र भी U-आकार का होता है। यह SAC वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।

दीर्घकालीन सीमान्त लागत (Long Run Marginal Cost - LMC): LMC दीर्घकाल में उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई बढ़ाने पर कुल लागत में होने वाली वृद्धि है। LMC वक्र भी U-आकार का होता है और यह LAC वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।

(चित्र में SMC और LMC वक्रों को U-आकार में दर्शाया जा सकता है, जहाँ SMC, SAC को और LMC, LAC को न्यूनतम बिंदु पर काटता है।)

प्रश्न 30.

"सकल घरेलू उत्पाद में प्रत्येक वृद्धि कल्याण का सूचक नहीं होती है।" कथन को कोई तीन कारणों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

अथवा

निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए:

  1. उपभोग वस्तुएँ एवं पूँजीगत वस्तुएँ
  2. मध्यवर्ती वस्तुएँ एवं अंतिम वस्तुएँ
  3. सकल निवेश एवं निवल निवेश

उत्तर (विकल्प 1):

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि हमेशा कल्याण में वृद्धि का संकेत नहीं देती, क्योंकि:

  1. आय का असमान वितरण: यदि GDP बढ़ती है लेकिन आय का वितरण असमान है, तो अमीर और अमीर होते जाएँगे जबकि गरीब और गरीब होते जाएँगे। इससे समाज का समग्र कल्याण नहीं बढ़ता।
  2. गैर-आर्थिक कारक: GDP में वृद्धि प्रदूषण, पर्यावरण क्षति, या स्वास्थ्य समस्याओं की कीमत पर हो सकती है। उदाहरण के लिए, एक कारखाना अधिक उत्पादन कर सकता है लेकिन प्रदूषण फैलाकर लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे कल्याण घटता है।
  3. गैर-बाजार गतिविधियाँ: GDP केवल बाजार में होने वाली गतिविधियों को मापता है। घरेलू काम, स्वयंसेवा, या अवैतनिक कार्य जैसी गतिविधियाँ GDP में शामिल नहीं होतीं, लेकिन ये कल्याण में योगदान देती हैं।

या

उत्तर (विकल्प 2):

  1. उपभोग वस्तुएँ एवं पूँजीगत वस्तुएँ:
    • उपभोग वस्तुएँ (Consumption Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग सीधे मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए किया जाता है, जैसे भोजन, कपड़े, आदि।
    • पूँजीगत वस्तुएँ (Capital Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं के उत्पादन में किया जाता है, जैसे मशीनरी, कारखाने, आदि।
  2. मध्यवर्ती वस्तुएँ एवं अंतिम वस्तुएँ:
    • मध्यवर्ती वस्तुएँ (Intermediate Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग आगे के उत्पादन में कच्चे माल के रूप में किया जाता है, जैसे गेहूँ (आटा बनाने के लिए)।
    • अंतिम वस्तुएँ (Final Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जो अंतिम उपभोग या निवेश के लिए तैयार होती हैं, जैसे ब्रेड (उपभोग के लिए) या मशीन (निवेश के लिए)।
  3. सकल निवेश एवं निवल निवेश:
    • सकल निवेश (Gross Investment): यह किसी अवधि में पूँजीगत वस्तुओं पर किया गया कुल व्यय है, जिसमें मूल्यह्रास भी शामिल है।
    • निवल निवेश (Net Investment): यह सकल निवेश में से मूल्यह्रास घटाने के बाद प्राप्त होता है। निवल निवेश = सकल निवेश - मूल्यह्रास।

प्रश्न

"सकल घरेलू उत्पाद में प्रत्येक वृद्धि कल्याण का सूचक नहीं होती।" कथन को तीन तर्कों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

(2+2+2)

व्याख्या: यह कथन सही है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि हमेशा कल्याण में वृद्धि का संकेत नहीं देती। इसके तीन मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:

  1. असमान वितरण: GDP वृद्धि से देश की कुल आय बढ़ सकती है, लेकिन यदि यह वृद्धि कुछ ही लोगों तक सीमित रहती है और अधिकांश जनसंख्या इससे वंचित रहती है, तो समग्र कल्याण में वृद्धि नहीं होती।
  2. गैर-आर्थिक गतिविधियाँ: GDP में केवल बाजार में होने वाली आर्थिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं। घरेलू कार्य, स्वयंसेवा, या अवैतनिक सेवाएँ (जैसे माँ द्वारा बच्चों की देखभाल) GDP में शामिल नहीं होतीं, जबकि ये कल्याण में योगदान देती हैं।
  3. पर्यावरणीय क्षति: GDP वृद्धि के लिए अक्सर प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और प्रदूषण बढ़ता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे कल्याण घटता है।

अथवा

निम्नलिखित अवधारणाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए:

  1. उपभोक्ता वस्तुएँ और पूँजीगत वस्तुएँ
  2. मध्यवर्ती वस्तुएँ और अंतिम वस्तुएँ
  3. सकल निवेश और शुद्ध निवेश

(2+2+2)

व्याख्या:

  1. उपभोक्ता वस्तुएँ और पूँजीगत वस्तुएँ: उपभोक्ता वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग सीधे उपभोग के लिए किया जाता है (जैसे भोजन, कपड़े), जबकि पूँजीगत वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं के उत्पादन में किया जाता है (जैसे मशीनरी, कारखाने)।
  2. मध्यवर्ती वस्तुएँ और अंतिम वस्तुएँ: मध्यवर्ती वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग उत्पादन प्रक्रिया में कच्चे माल या अर्ध-निर्मित वस्तुओं के रूप में किया जाता है (जैसे लोहा, चीनी), जबकि अंतिम वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जो अंतिम उपभोग या निवेश के लिए तैयार होती हैं (जैसे कार, ब्रेड)।
  3. सकल निवेश और शुद्ध निवेश: सकल निवेश किसी अवधि में अर्थव्यवस्था में किए गए कुल निवेश को दर्शाता है (जिसमें मूल्यह्रास शामिल है), जबकि शुद्ध निवेश सकल निवेश में से मूल्यह्रास घटाकर प्राप्त किया जाता है। शुद्ध निवेश = सकल निवेश - मूल्यह्रास।

SS—0—Econ. SS-600