RBSE Class 12th 2015 History-13-2015 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2015 |
| Subject | History-13-2015 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2015 History-13-2015
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Rajasthan Board Class 12th History-13-2015 2015 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015
इतिहास
(HISTORY)
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
55--73-- Hist. SS-603 [ Turn over
खण्ड - अ / Part - A
1. शासकों की प्रतिमा और नाम के सिक्के सर्वप्रथम किस राजवंश के राजाओं ने जारी किये थे?
The rulers of which dynasty first issued coins with names and images?
उत्तर: कुषाण राजवंश के राजाओं ने सर्वप्रथम शासकों की प्रतिमा और नाम वाले सिक्के जारी किए।
Answer: The Kushan dynasty rulers first issued coins with the images and names of rulers.
2. किस राजवंश में राजाओं के नाम से पूर्व माताओं के नाम लिखा जाता था?
By which dynasty the names of the mothers were being written prior to the names of the kings?
उत्तर: सातवाहन राजवंश में राजाओं के नाम से पूर्व माताओं के नाम लिखे जाते थे।
Answer: In the Satavahana dynasty, the names of the mothers were written before the names of the kings.
3. जैन दर्शन की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा क्या है?
What is the most important concept of Jain philosophy?
उत्तर: जैन दर्शन की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा 'अहिंसा' है।
Answer: The most important concept of Jain philosophy is 'Ahimsa' (non-violence).
प्रश्न संरचना / Question Structure
| भाग / Part | प्रश्न संख्या / Q. Nos. | प्रति प्रश्न अंक / Marks per question | उत्तर की शब्द सीमा / Word limit of answer |
|---|---|---|---|
| खण्ड अ / Part A | 1 | 0 | - |
| खण्ड ब / Part B | 2-8 | 2 | 20 शब्द / 20 words |
| खण्ड स / Part C | 9-26 | 4 | 60 शब्द / 60 words |
| खण्ड द / Part D | 27-29 | 6 | 200 शब्द / 200 words |
7. प्रश्न क्रमांक 30 का उत्तर भारत के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए। यह 5 अंक का है।
Mark the answer of Question No. 30 in the outline map of India. It carries 5 marks.
8. प्रश्न क्रमांक 27, 28 एवं 29 में आंतरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 27, 28 and 29.
खण्ड - अ (Part - A)
-
अगर आप अजमेर की यात्रा करेंगे, तो वहाँ स्थित किस सूफी संत के दरगाह की जियारत करेंगे?
If you travel to Ajmer, the Dargah of which Sufi saint would you like to offer Ziyarat?
उत्तर: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) की दरगाह। -
स्वयं को विष्णु की प्रेयसी मानकर अपनी प्रेम भावना को पदों में व्यक्त करने वाली प्रथम अलवार स्त्री भक्त का नाम लिखिए।
Who was the first known Alwar woman devotee who expressed her emotions in verses, considering herself a beloved of Vishnu?
उत्तर: अंडाल (Andal)। -
कौन-सा किला सफावियों और मुगलों के बीच झगड़े का कारण रहा था?
Which fort was the cause of dispute between Safavis and Mughals?
उत्तर: कंधार का किला (Kandahar Fort)। -
बादशाहनामा के दरबारी दृश्य में अंकित शांतिपूर्वक चिपटकर बैठे हुए शेर एवं बकरी क्या संदेश देते हैं?
What does the message that the lion and goat are giving sitting embracing each other in the court scene of Badshahnama indicate?
उत्तर: यह दृश्य मुगल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल में साम्राज्य में व्याप्त शांति और न्याय का प्रतीक है। शेर और बकरी का एक साथ शांतिपूर्वक बैठना यह संदेश देता है कि सम्राट के न्यायपूर्ण शासन में कमजोर और ताकतवर सभी सुरक्षित हैं, और राज्य में पूर्ण शांति स्थापित है। -
मुगल दरबार में प्रचलित अभिवादन के दो तरीकों का उल्लेख कीजिए।
Mention the two ways of salutation which were prevalent in the Mughal court.
उत्तर: (1) तस्लीम (Taslim) – झुककर सलाम करना, (2) कोर्निश (Kornish) – हाथ जोड़कर या सिर झुकाकर अभिवादन करना। -
गेटवे ऑफ इंडिया कब एवं कहाँ बनाया गया?
When and where was the Gateway of India built?
उत्तर: गेटवे ऑफ इंडिया का निर्माण 1924 में मुंबई (बॉम्बे) में किया गया था। -
सीमांत गाँधी किसे कहा जाता है?
Who is known as Frontier Gandhi?
उत्तर: खान अब्दुल गफ्फार खान (Khan Abdul Ghaffar Khan) को सीमांत गाँधी कहा जाता है। -
सर्वप्रथम उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में मुस्लिम राज्य की माँग किसने की थी?
Who first demanded Muslim state in the north-west region?
उत्तर: चौधरी रहमत अली (Chaudhry Rehmat Ali) ने सर्वप्रथम उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में मुस्लिम राज्य की माँग की थी।
खण्ड - ब (Part - B)
-
गोत्र प्रणाली के दो नियमों का उल्लेख कीजिए।
Mention the two rules of Gotra system.
उत्तर: (1) एक ही गोत्र के सदस्यों के बीच विवाह वर्जित था (गोत्र बहिर्विवाह)। (2) गोत्र पितृवंशीय होता था, अर्थात् बच्चे अपने पिता का गोत्र धारण करते थे। -
मनुस्मृति के अनुसार पुरुषों के लिए सम्पत्ति अर्जन के चार तरीके बताइए।
Mention four ways of earning wealth for males according to Manusmriti.
उत्तर: मनुस्मृति के अनुसार पुरुषों के लिए सम्पत्ति अर्जन के चार तरीके हैं: (1) विरासत (पैतृक सम्पत्ति), (2) युद्ध में प्राप्त लूट, (3) व्यापार और वाणिज्य, (4) वेतन या मजदूरी (सेवा के बदले)।
20.
आपकी दृष्टि में बौद्ध धर्म के तेजी से प्रसार के क्या कारण थे ? कोई दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
What were the causes of the fast spreading of Buddhism according to your view? Mention any two causes.
उत्तर: बौद्ध धर्म के तेजी से प्रसार के दो प्रमुख कारण थे:
- सरल एवं व्यावहारिक सिद्धांत: बुद्ध ने जाति-पाति और कर्मकांडों से मुक्त एक सरल मार्ग बताया, जिसमें अष्टांगिक मार्ग और चार आर्य सत्यों पर बल दिया गया। यह आम जनता के लिए सहज और समझने योग्य था।
- सम्राट अशोक का संरक्षण: सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को राजकीय संरक्षण दिया और अपने धर्मलेखों तथा दूतों के माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार किया, जिससे यह तेजी से फैला।
बुद्ध के संदेश भारत के बाहर किन-किन देशों में फैले ? नाम लिखिए।
In which countries did the message of Buddhism spread out of India? Mention the names.
उत्तर: बुद्ध के संदेश भारत के बाहर निम्नलिखित देशों में फैले:
- श्रीलंका (सीलोन)
- म्यांमार (बर्मा)
- थाईलैंड
- कंबोडिया
- लाओस
- चीन
- जापान
- कोरिया
- नेपाल
- तिब्बत
अबुल फजल के अनुसार मुगल बादशाह प्रजा के किन-किन तत्वों की रक्षा करते थे ?
According to Abul Fazl which essences of the subjects the Mughal emperor used to protect?
उत्तर: अबुल फजल के अनुसार, मुगल बादशाह प्रजा के निम्नलिखित चार तत्वों की रक्षा करते थे:
- प्राण (जीवन): प्रजा के जीवन की रक्षा करना।
- माल (संपत्ति): प्रजा की संपत्ति की सुरक्षा करना।
- मान (सम्मान): प्रजा के सम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा करना।
- धर्म (धार्मिक स्वतंत्रता): प्रजा को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देना।
इस्तमरारी बन्दोबस्त कब एवं किस क्षेत्र में लागू किया गया ?
When and in which region was the Permanent Settlement introduced?
उत्तर: इस्तमरारी बन्दोबस्त (Permanent Settlement) 1793 ई. में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा क्षेत्रों में लागू किया गया था।
कुदाल एवं हल किन लोगों के जीवन का प्रतीक माना जाता है ?
Of which people the hoe and the plough were the symbols of life?
उत्तर: कुदाल एवं हल किसानों (कृषकों) के जीवन का प्रतीक माना जाता है। ये उपकरण कृषि कार्य के मुख्य साधन हैं और किसानों की आजीविका का आधार हैं।
खण्ड - C
Part - C
अशोक द्वारा अपने अधिकारियों और प्रजा को दिये गये संदेशों को वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता सिद्ध कीजिए।
Prove the relevance of Ashoka's messages given to his officials and subjects in present context.
उत्तर: सम्राट अशोक के संदेश आज भी अत्यधिक प्रासंगिक हैं। उनके धर्मलेखों में निहित सिद्धांत वर्तमान समय में भी मार्गदर्शक का कार्य करते हैं:
- अहिंसा और शांति: अशोक ने युद्धों का त्याग कर अहिंसा का मार्ग अपनाया। आज के समय में विश्व शांति और संघर्ष समाधान के लिए यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- धार्मिक सहिष्णुता: अशोक ने सभी धर्मों का सम्मान करने का आदेश दिया। वर्तमान में सांप्रदायिक सद्भाव और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए यह आवश्यक है।
- प्रशासनिक नैतिकता: उन्होंने अधिकारियों को न्यायपूर्ण और करुणापूर्ण व्यवहार करने का निर्देश दिया। आज के प्रशासन में भ्रष्टाचार मुक्त और जनहितकारी शासन के लिए यह प्रेरणादायक है।
- जनकल्याण: अशोक ने चिकित्सा, सड़क, कुएं आदि जनसुविधाओं पर बल दिया। आज के विकास मॉडल में भी जनकल्याण को प्राथमिकता दी जाती है।
- पर्यावरण संरक्षण: उन्होंने वृक्षारोपण और पशु संरक्षण पर जोर दिया, जो आज जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है।
इस प्रकार, अशोक के संदेश न केवल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं, बल्कि वर्तमान समय में भी एक आदर्श समाज और शासन व्यवस्था के लिए मार्गदर्शक हैं।
इब्न बतूता ने भारतीय शहरों के सम्बन्ध में जो लिखा है, उस पर प्रकाश डालिए।
Throw light on the writings of Ibn Batuta regarding the Indian cities.
उत्तर: मोरक्को के यात्री इब्न बतूता (14वीं शताब्दी) ने अपनी यात्रा वृत्तांत 'रिहला' में भारतीय शहरों का विस्तृत वर्णन किया है। उनके लेखन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- शहरों की समृद्धि: इब्न बतूता ने दिल्ली, दौलताबाद, कालीकट आदि शहरों को अत्यंत समृद्ध और व्यापारिक केंद्र बताया। उन्होंने बाजारों, सरायों और भवनों की भव्यता का उल्लेख किया।
- जनसंख्या और विविधता: उन्होंने भारतीय शहरों में विभिन्न जातियों, धर्मों और संस्कृतियों के लोगों के सह-अस्तित्व का वर्णन किया।
- प्रशासनिक व्यवस्था: उन्होंने सुल्तानों द्वारा शहरों के प्रबंधन, न्याय व्यवस्था और डाक प्रणाली (बारीद) की प्रशंसा की।
- सामाजिक जीवन: उन्होंने भोजन, वस्त्र, रीति-रिवाजों और त्योहारों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने नारियल, पान, गन्ना आदि का उल्लेख किया जो भारत में प्रचुर मात्रा में पाए जाते थे।
- बंदरगाह शहर: कालीकट (कोझिकोड) जैसे बंदरगाह शहरों को उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र बताया, जहाँ चीन, यमन, फारस आदि के व्यापारी आते थे।
इब्न बतूता का वर्णन 14वीं शताब्दी के भारतीय शहरी जीवन, अर्थव्यवस्था और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।
21.
इतिहासकार धार्मिक परंपरा के इतिहास का पुनर्निर्माण करने के लिए किन-किन स्रोतों का उपयोग करते हैं?
Write the sources which are used by the historians in reconstructing the history of religious traditions.
उत्तर / Answer:
इतिहासकार धार्मिक परंपरा के इतिहास का पुनर्निर्माण करने के लिए निम्नलिखित स्रोतों का उपयोग करते हैं:
- धार्मिक ग्रंथ: वेद, उपनिषद, पुराण, बौद्ध जातक, जैन आगम आदि।
- शिलालेख और अभिलेख: मंदिरों, स्तूपों और गुफाओं पर उत्कीर्ण लेख।
- सिक्के और मुद्राएँ: धार्मिक प्रतीकों और देवताओं के चित्र वाले सिक्के।
- पुरातात्विक अवशेष: मंदिर, मूर्तियाँ, चित्रकारी और अन्य कलाकृतियाँ।
- विदेशी यात्रियों के वृत्तांत: मेगस्थनीज, फाह्यान, ह्वेनसांग आदि के लेख।
- लोक परंपराएँ और मौखिक साहित्य: लोकगीत, किंवदंतियाँ और रीति-रिवाज।
22.
विजयनगर के प्रशासन में अमर नायक प्रणाली की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
Analyse the role of Amar Nayak system in the administration of Vijayanagar.
उत्तर / Answer:
अमर नायक प्रणाली विजयनगर साम्राज्य की एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था थी। इसकी भूमिका निम्नलिखित थी:
- सैन्य प्रबंधन: अमर नायक राजा को एक निश्चित संख्या में घुड़सवार और पैदल सैनिक प्रदान करते थे।
- राजस्व संग्रह: वे अपने क्षेत्रों से कर वसूल करते थे और उसका एक हिस्सा राजकोष में जमा करते थे।
- प्रशासनिक नियंत्रण: वे अपने अधीन क्षेत्रों में शांति और व्यवस्था बनाए रखते थे।
- केंद्रीय नियंत्रण: राजा उन्हें भूमि अनुदान देता था, लेकिन वे पूर्ण स्वतंत्र नहीं थे और राजा के प्रति वफादार रहते थे।
- आर्थिक योगदान: वे कृषि और व्यापार को प्रोत्साहित करते थे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होती थी।
23.
कला और साहित्य ने 1857 की स्मृति को जीवित रखने में किस प्रकार योगदान दिया? उल्लेख कीजिए।
How did art and literature contribute in keeping the memories of 1857 live? Explain.
उत्तर / Answer:
1857 के विद्रोह की स्मृति को जीवित रखने में कला और साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा:
- साहित्य: कवियों और लेखकों ने विद्रोह के नायकों जैसे रानी लक्ष्मीबाई, बहादुर शाह जफर, और मंगल पांडे की वीरता का वर्णन किया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के 'आनंदमठ' और वीर सावरकर के '1857 का स्वतंत्रता संग्राम' जैसे ग्रंथों ने राष्ट्रीय चेतना जगाई।
- कला: चित्रकारों ने विद्रोह के दृश्यों को चित्रित किया, जैसे झाँसी की रानी का युद्ध में नेतृत्व। लोकगीतों और नाटकों ने विद्रोह की कहानियों को जन-जन तक पहुँचाया।
- प्रभाव: इन कृतियों ने स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया और 1857 को भारतीय स्वतंत्रता के पहले संग्राम के रूप में स्थापित किया।
24.
कलकत्ता नगर नियोजन में लॉटरी कमेटी के कार्यों की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
Explain the relevance of the working of Lottery Committee in the town planning of Calcutta in the present times.
उत्तर / Answer:
लॉटरी कमेटी (1817) ने कलकत्ता के नगर नियोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसकी वर्तमान प्रासंगिकता निम्नलिखित है:
- सार्वजनिक स्वास्थ्य: कमेटी ने सड़कों की सफाई, जल निकासी और कचरा प्रबंधन पर ध्यान दिया, जो आज भी शहरी नियोजन का मुख्य मुद्दा है।
- बुनियादी ढाँचा: इसने सड़कों का विस्तार और नए मार्गों का निर्माण किया, जो आधुनिक शहरों में यातायात प्रबंधन के लिए प्रासंगिक है।
- वित्तीय मॉडल: लॉटरी के माध्यम से धन जुटाना आज भी सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए एक विकल्प हो सकता है।
- नियोजन दृष्टिकोण: इसने शहर के विस्तार को नियंत्रित करने और अव्यवस्थित निर्माण को रोकने का प्रयास किया, जो आज के शहरी फैलाव की समस्या से निपटने में सहायक है।
25.
कैबिनेट मिशन के त्रिस्तरीय महासंघ सुझावों का मूल्यांकन कीजिए।
Evaluate the recommendations of the Cabinet Mission regarding three-tier confederation.
उत्तर / Answer:
कैबिनेट मिशन (1946) ने भारत के लिए त्रिस्तरीय महासंघ का सुझाव दिया। इसका मूल्यांकन निम्नलिखित है:
- प्रांतीय स्तर: प्रांतों को स्वायत्तता दी गई, जिससे क्षेत्रीय आवश्यकताओं का ध्यान रखा जा सके।
- प्रांतीय समूह: प्रांतों को तीन समूहों (A, B, C) में बाँटा गया, जिससे सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को संरक्षित किया जा सके।
- केंद्रीय स्तर: केंद्र को रक्षा, विदेश मामले और संचार जैसे विषयों का अधिकार दिया गया।
- सकारात्मक पहलू: इसने भारत की एकता बनाए रखने का प्रयास किया और मुस्लिम लीग की पाकिस्तान की माँग को अस्वीकार किया।
- नकारात्मक पहलू: समूह प्रणाली ने सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया और कांग्रेस व मुस्लिम लीग के बीच मतभेद गहरे किए, जिससे यह योजना असफल रही।
26.
भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले त्रिगुट का वर्णन कीजिए।
Describe the role of the trio in the framing of the Constitution of India.
उत्तर / Answer:
भारतीय संविधान के निर्माण में तीन प्रमुख व्यक्तियों (त्रिगुट) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
- डॉ. भीमराव अंबेडकर: वे मसौदा समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने संविधान का मसौदा तैयार किया। उन्होंने मौलिक अधिकारों, अस्पृश्यता उन्मूलन और सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
- पंडित जवाहरलाल नेहरू: उन्होंने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जो संविधान की आत्मा बना। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और समाजवाद के सिद्धांतों को शामिल करने में योगदान दिया।
- सरदार वल्लभभाई पटेल: उन्होंने संविधान सभा में प्रांतीय समिति और मौलिक अधिकारों पर चर्चा का नेतृत्व किया। उन्होंने रियासतों के विलय और एकीकृत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन तीनों ने मिलकर संविधान को एक मजबूत, लोकतांत्रिक और समावेशी दस्तावेज बनाने में योगदान दिया।
27.
मोहनजोदड़ो सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
अथवा
800 ई. पू. तक हड़प्पाई सभ्यता का अंत किन कारणों से हुआ ? उल्लेख कीजिए।
Describe the main characteristics of the Mohenjodaro civilization. 6
OR
Describe the factors responsible for the decline of Harappan civilization up to 800 B.C. 6
उत्तर (मोहनजोदड़ो सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ):
- नगर योजना: मोहनजोदड़ो की सड़कें सीधी और समकोण पर काटती थीं, जो ग्रिड प्रणाली पर आधारित थीं। नगर दो भागों में विभाजित था – ऊपरी दुर्ग (गढ़ी) और निचला नगर।
- जल निकासी व्यवस्था: प्रत्येक घर में स्नानागार और शौचालय थे, जो ढकी हुई नालियों से जुड़े थे। यह विश्व की सबसे प्राचीन जल निकासी प्रणालियों में से एक है।
- विशाल स्नानागार: यह एक बड़ा तालाब था (लगभग 12 मीटर × 7 मीटर), जो ईंटों से बना था और इसमें पानी भरने तथा निकालने की व्यवस्था थी। इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए होता था।
- कृषि एवं व्यापार: गेहूँ, जौ, कपास आदि की खेती होती थी। मोहनजोदड़ो के लोग मेसोपोटामिया (ईराक) तक व्यापार करते थे, जहाँ से मुहरें और मनके मिले हैं।
- कला एवं शिल्प: पत्थर, धातु और मिट्टी की मूर्तियाँ बनाई जाती थीं। प्रसिद्ध "नर्तकी की मूर्ति" (कांस्य) और "पशुपति मुहर" इसके उदाहरण हैं।
- लिपि: हड़प्पाई लिपि (चित्रात्मक) का उपयोग होता था, जो अभी तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है।
अथवा (हड़प्पाई सभ्यता के पतन के कारण):
- जलवायु परिवर्तन: लगभग 2000 ई.पू. के बाद वर्षा में कमी आई, जिससे सिंधु नदी का जलस्तर घटा और कृषि प्रभावित हुई।
- नदियों का सूखना या मार्ग बदलना: सरस्वती (घग्घर) नदी सूख गई, जिससे कई बस्तियाँ छोड़ दी गईं।
- बाढ़ एवं भूकंप: मोहनजोदड़ो में बार-बार बाढ़ आने से शहर कई बार बसा और उजड़ा। भूकंप ने भी नुकसान पहुँचाया।
- व्यापार का पतन: मेसोपोटामिया के साथ व्यापार घटने से आर्थिक गतिविधियाँ ठप हो गईं।
- आक्रमण का सिद्धांत: कुछ विद्वान मानते हैं कि आर्यों या अन्य जातियों के आक्रमण से सभ्यता नष्ट हुई, परंतु इसके पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
- पारिस्थितिक असंतुलन: अत्यधिक वनों की कटाई और मिट्टी का लवणीकरण (खारापन) भी पतन के कारण हो सकते हैं।
28.
आईन-ए-अकबरी के महत्व एवं सीमाओं की विवेचना कीजिए।
अथवा
मुगलकालीन भू-राजस्व प्रणाली की विवेचना कीजिए।
Enumerate the importance and limitations of Ain-i-Akbari. 6
OR
Analyse the Land Revenue system of Mughals. 6
उत्तर (आईन-ए-अकबरी का महत्व एवं सीमाएँ):
महत्व:
- यह अकबर के शासनकाल का विस्तृत प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक विवरण प्रस्तुत करता है।
- इसमें भू-राजस्व प्रणाली (दहसाला प्रणाली) का विस्तृत वर्णन है, जो मुगल अर्थव्यवस्था को समझने में सहायक है।
- यह मुगल साम्राज्य के प्रांतों, जनसंख्या, फसलों, मूल्यों और सैन्य संगठन का आँकड़ा प्रदान करता है।
- इसमें हिंदू दर्शन, विज्ञान और कला के बारे में भी जानकारी मिलती है, जो सांस्कृतिक इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
सीमाएँ:
- यह केवल अकबर के शासनकाल तक सीमित है, बाद के मुगल शासकों के बारे में जानकारी नहीं देता।
- इसमें दिए गए आँकड़े कभी-कभी अतिशयोक्तिपूर्ण या आदर्शित हो सकते हैं, क्योंकि यह शाही प्रशंसा के उद्देश्य से लिखा गया था।
- यह मुख्यतः प्रशासनिक दृष्टिकोण से लिखा गया है, जिसमें आम जनता के जीवन का विस्तृत चित्रण नहीं है।
- कुछ विद्वान इसे अबुल फजल का व्यक्तिगत दृष्टिकोण मानते हैं, जो पूर्णतः तटस्थ नहीं है।
अथवा (मुगलकालीन भू-राजस्व प्रणाली):
- दहसाला प्रणाली (टोडरमल बंदोबस्त): अकबर के राजस्व मंत्री राजा टोडरमल ने इसे लागू किया। इसमें भूमि को चार श्रेणियों (पोलज, परौती, चाचर, बंजर) में बाँटा गया।
- भूमि का मापन: प्रत्येक जिले में भूमि को बीघों में मापा जाता था और उपज का दसवाँ भाग (दहसाला) राजस्व के रूप में लिया जाता था।
- नकद या फसल में भुगतान: किसान फसल का एक हिस्सा (आमतौर पर 1/3 से 1/2) नकद या अनाज के रूप में देते थे।
- जमीन की पैमाइश: हर 10 वर्ष में भूमि का पुनर्मापण होता था, ताकि उपज के अनुसार राजस्व निर्धारित किया जा सके।
- मनसबदारी प्रणाली से संबंध: राजस्व का एक बड़ा हिस्सा मनसबदारों (सैन्य अधिकारियों) को वेतन के रूप में दिया जाता था, जो साम्राज्य की सैन्य शक्ति को बनाए रखता था।
- दोष: किसानों पर अत्यधिक कर का बोझ था, और बिचौलियों (जमींदारों) के कारण शोषण होता था। बाद के मुगल शासकों में यह प्रणाली कमजोर पड़ गई।
29.
आपकी दृष्टि में दाण्डी यात्रा क्यों उल्लेखनीय थी ? इसके परिणाम स्वरूप अंग्रेजों के साथ संवादों की समीक्षा कीजिए।
अथवा
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए :
i) रॉलेट एक्ट
ii) खिलाफत आन्दोलन।
उत्तर (दाण्डी यात्रा का महत्व एवं अंग्रेजों से संवाद):
दाण्डी यात्रा क्यों उल्लेखनीय थी?
- 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दाण्डी (गुजरात) तक 24 दिनों की पदयात्रा शुरू की, जो नमक सत्याग्रह का हिस्सा थी।
- यह ब्रिटिश नमक कानून (जो भारतीयों को नमक बनाने से रोकता था) के खिलाफ एक सीधी चुनौती थी।
- इस यात्रा ने पूरे भारत में जनजागरण फैलाया और अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन को एक नई दिशा दी।
- यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि इसमें महिलाओं और आम जनता ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
अंग्रेजों के साथ संवादों की समीक्षा:
- दाण्डी यात्रा के बाद गांधीजी ने वायसराय लॉर्ड इरविन को पत्र लिखकर 11 माँगें रखीं, जिनमें नमक कर हटाना, भू-राजस्व में कमी, और राजनीतिक बंदियों की रिहाई शामिल थी।
- ब्रिटिश सरकार ने इन माँगों को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद गांधीजी ने 6 अप्रैल 1930 को दाण्डी में नमक बनाकर कानून तोड़ा।
- इसके परिणामस्वरूप गांधीजी सहित हजारों लोग गिरफ्तार हुए। लेकिन इस आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश साम्राज्य की छवि को धूमिल किया।
- अंततः 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ, जिसमें सरकार ने राजनीतिक बंदियों को रिहा किया और नमक कर में ढील दी, हालाँकि यह समझौता अस्थायी था।
अथवा (संक्षिप्त टिप्पणियाँ):
i) रॉलेट एक्ट (1919):
- यह एक काला कानून था, जिसने सरकार को बिना मुकदमा किसी भी भारतीय को गिरफ्तार करने और निर्वासित करने का अधिकार दिया।
- इसके विरोध में गांधीजी ने रॉलेट सत्याग्रह शुरू किया, जिसने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक नया मोड़ दिया।
- इस कानून के कारण
30.
Why was the Dandi March a notable event in your opinion? Analyse the dialogues with the British caused by it. 6
Answer: The Dandi March (March 12 – April 6, 1930) was a notable event because it was a direct, non-violent challenge to British authority and the salt tax, which affected all Indians. It mobilized mass civil disobedience across the country.
Dialogues with the British caused by it:
- The march forced the British government to negotiate with the Indian National Congress. It led to the Gandhi-Irwin Pact (1931), where the British agreed to release political prisoners and allow salt production for personal use.
- It also led to the Round Table Conferences in London, where Congress participated to discuss constitutional reforms.
- The march exposed British repression globally, as the British arrested thousands, including Gandhi, which drew international criticism.
OR
Write short notes on the following: 3+3
i) Rowlatt Act
Answer: The Rowlatt Act (1919) was a law passed by the British government that allowed political prisoners to be tried without juries and permitted detention without trial. It was widely opposed by Indians as it violated civil liberties, leading to protests and the Jallianwala Bagh massacre.
ii) Khilafat Movement
Answer: The Khilafat Movement (1919-1924) was a pan-Islamic protest by Indian Muslims against the British treatment of the Ottoman Caliphate after World War I. It was led by the Ali brothers and merged with the Non-Cooperation Movement under Gandhi, strengthening Hindu-Muslim unity against British rule.
भारत के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित ऐतिहासिक स्थलों को अंकित कीजिये :
i) लोथल ii) मगध iii) कलिंग iv) बम्बई v) कलकत्ता
Mark the following historical places in the outline map of India:
1+1+1+1+1
- i) Lothal – Located in present-day Gujarat, on the banks of the Sabarmati River (ancient Indus Valley site).
- ii) Magadha – Located in present-day Bihar, south of the Ganges River (ancient kingdom).
- iii) Kalinga – Located in present-day Odisha, along the eastern coast (site of the Kalinga War).
- iv) Bombay – Present-day Mumbai, on the western coast of India.
- v) Calcutta – Present-day Kolkata, on the eastern coast of India, along the Hooghly River.
5.5-73-- Hist. SS-603
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015
Subject : HISTORY
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