RBSE Class 12th 2015 Public Administration-SS-06-2015 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2015
Subject Public Administration-SS-06-2015
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Public Administration-SS-06-2015 2015 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015

लोक प्रशासन
PUBLIC ADMINISTRATION

समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS—06—Pub. Adm.   SS_6006   [Turn over

खण्ड - अ / PART - A

1. लोक प्रशासन का जनक किसे कहा जाता है ?

Who is known as the father of Public Administration ?

उत्तर: वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) को लोक प्रशासन का जनक कहा जाता है।

Answer: Woodrow Wilson is known as the father of Public Administration.

2. मिन्नोब्रुक सम्मेलन (प्रथम) किस वर्ष हुआ ?

Minnowbrook Conference (first) was held in which year ?

उत्तर: प्रथम मिन्नोब्रुक सम्मेलन वर्ष 1968 में हुआ था।

Answer: The first Minnowbrook Conference was held in the year 1968.

3. गेंग प्लांक का सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया ?

Who is the propounder of the theory of Gang Plank ?

उत्तर: गेंग प्लांक (Gang Plank) का सिद्धान्त हेनरी फेयोल (Henri Fayol) ने प्रतिपादित किया।

Answer: The theory of Gang Plank was propounded by Henri Fayol.


प्रश्न संख्या / Q. Nos.: 1-8, 9-27, 28-30

अंक प्रत्येक प्रश्न / Marks per question: क्रमशः 1, 3, 5 (अनुमानित)

नोट: प्रश्न क्रमांक 28 से 30 में आंतरिक विकल्प हैं।

Note: There are internal choices in Question Nos. 28 to 30.

SS—06—Pub, Adm. / SS-6006

लोक प्रशासन में संगठन के सम्बन्ध में प्रचलित प्रथम व्यवस्थित सैद्धान्तिक विचारधारा का नाम बताइये।

State the name of the first organised theory of principles of organisation in Public Administration.

उत्तर: प्रशासनिक सिद्धांतों की शास्त्रीय विचारधारा (Classical Theory of Administration) या वैज्ञानिक प्रबंधन सिद्धांत (Scientific Management Theory) को प्रथम व्यवस्थित सैद्धान्तिक विचारधारा माना जाता है।

Answer: The Classical Theory of Administration (or Scientific Management Theory) is considered the first organised theoretical ideology regarding principles of organisation in Public Administration.


भारत की संघीय व्यवस्था में केन्द्र एवं राज्यों के मध्य शक्तियों का वितरण संविधान की किस अनुसूची द्वारा किया गया है ?

Which schedule of the constitution provides the distribution of powers between Centre and States in Indian Federal system?

उत्तर: भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) के द्वारा केन्द्र और राज्यों के मध्य शक्तियों का वितरण किया गया है। इसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची का उल्लेख है।

Answer: The Seventh Schedule of the Constitution of India provides the distribution of powers between the Centre and States. It contains the Union List, State List, and Concurrent List.


विधि के शासन की अवधारणा किस देश से ली गई है ?

From which country is the concept of Rule of Law adopted?

उत्तर: विधि के शासन (Rule of Law) की अवधारणा इंग्लैण्ड (England) से ली गई है। इसका प्रतिपादन प्रसिद्ध विधिवेत्ता ए.वी. डाइसी (A.V. Dicey) ने किया था।

Answer: The concept of Rule of Law has been adopted from England. It was propounded by the renowned jurist A.V. Dicey.


बजट को संक्षेप में परिभाषित कीजिये।

Define Budget in brief.

उत्तर: बजट एक वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय और व्यय का एक विस्तृत विवरण है। यह सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को दर्शाता है तथा संसद द्वारा अनुमोदित किया जाता है।

Answer: A budget is a detailed statement of the estimated receipts and expenditure of the government for a financial year. It reflects the policies and priorities of the government and is approved by the Parliament.


भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत और किसके द्वारा की जाती है ?

Under which Article of the Constitution is the Comptroller & Auditor General of India appointed and by whom?

उत्तर: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 148 (Article 148) के अन्तर्गत भारत के राष्ट्रपति (President of India) द्वारा की जाती है।

Answer: The Comptroller and Auditor General (CAG) of India is appointed under Article 148 of the Constitution by the President of India.


“भर्ती सम्पूर्ण कार्मिक प्रशासन के ढाँचे की आधार शिला है।” यह कथन किस विद्वान का है ?

‘The Recruitment is the corner stone of the whole structure of personnel administration.’ This statement belongs to which scholar?

उत्तर: यह कथन प्रसिद्ध प्रशासनिक विद्वान ओ. ग्लेन स्टाल (O. Glenn Stahl) का है।

Answer: This statement belongs to the renowned administrative scholar O. Glenn Stahl.


नवीन निरंकुशता को परिभाषित कीजिये।

Define New Despotism.

उत्तर: नवीन निरंकुशता (New Despotism) की अवधारणा लॉर्ड ह्यूवार्ट (Lord Hewart) ने दी थी। इसके अनुसार, आधुनिक कल्याणकारी राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों को विधायी, कार्यपालिका एवं न्यायिक शक्तियाँ प्रदान कर दी जाती हैं, जिससे वे निरंकुश हो जाते हैं और नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है। यह विधि के शासन के लिए खतरा है।

Answer: The concept of New Despotism was given by Lord Hewart. According to it, in a modern welfare state, administrative authorities are vested with legislative, executive, and judicial powers, making them despotic and leading to the violation of citizens' rights. It is a threat to the rule of law.

खण्ड - ब / PART - B

2. लोक प्रशासन के विज्ञान होने में बाधक दो महत्वपूर्ण समस्याएँ बताइये।

Identify two major problems in the development of Public Administration as a science. [2]

उत्तर: लोक प्रशासन को विज्ञान मानने में दो प्रमुख बाधाएँ हैं:

  1. मानवीय व्यवहार की जटिलता: प्रशासन मनुष्यों द्वारा संचालित होता है, जिसका व्यवहार पूर्वानुमेय नहीं होता, जबकि विज्ञान में निश्चितता और पूर्वानुमेयता आवश्यक है।
  2. सार्वभौमिक सिद्धांतों का अभाव: प्राकृतिक विज्ञानों के समान लोक प्रशासन में सार्वभौमिक रूप से लागू होने वाले नियम और सिद्धांत विकसित नहीं हो पाए हैं, क्योंकि प्रशासनिक परिस्थितियाँ समय और स्थान के अनुसार बदलती रहती हैं।

3. लोक प्रशासन के विकास में 1927-1937 के काल को 'सिद्धान्तों का स्वर्ण-युग' क्यों कहा जाता है?

Why the period of 1927-1937 in the development of Public Administration is considered as the ‘golden era of principles’? [2]

उत्तर: सन् 1927-1937 के काल को 'सिद्धान्तों का स्वर्ण-युग' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दशक में प्रशासनिक सिद्धांतों का व्यवस्थित विकास हुआ। इस अवधि में गुलिक और उर्विक (1937) ने 'पेपर्स ऑन द साइंस ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' प्रकाशित किया, जिसमें प्रशासन के सार्वभौमिक सिद्धांत प्रतिपादित किए गए। इसके अलावा, मूनी और रेली (1931) ने 'द प्रिंसिपल्स ऑफ ऑर्गनाइजेशन' में संगठन के सिद्धांतों को स्पष्ट किया। इस काल में प्रशासन को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित करने के प्रयास तीव्र हुए और अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन हुआ।

4. “निर्णय” की सटीक परिभाषा दीजिये।

Present the exact definition of ‘Decision’. [2]

उत्तर: निर्णय (Decision) से आशय किसी समस्या के समाधान हेतु उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में से किसी एक सर्वोत्तम विकल्प का चयन करना है। हर्बर्ट साइमन के अनुसार, "निर्णय वह प्रक्रिया है जिसमें किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न विकल्पों में से एक को चुना जाता है।" यह प्रशासनिक प्रक्रिया का केंद्रबिंदु है, जिसमें तर्कसंगत विश्लेषण और मूल्यांकन के आधार पर कार्यवाही का मार्ग निर्धारित किया जाता है।

5. प्रशासनिक विकास से आपका क्या अभिप्राय है?

What do you understand by Administrative Development? [2]

उत्तर: प्रशासनिक विकास (Administrative Development) से अभिप्राय प्रशासनिक तंत्र की क्षमता, दक्षता और प्रभावशीलता में सतत सुधार की प्रक्रिया से है। इसमें प्रशासनिक संरचना, प्रक्रियाओं, कार्यपद्धतियों और मानव संसाधनों का आधुनिकीकरण एवं उन्नयन शामिल है, ताकि संगठन अपने लक्ष्यों को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सके। यह विकास प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नयन, संगठनात्मक पुनर्गठन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से होता है।

6. सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने वाले किन्हीं दो नीति-निदेशक तत्वों का उल्लेख कीजिये।

Refer any two Directive Principles which ensure Social Justice. [2]

उत्तर: भारतीय संविधान के नीति-निदेशक तत्वों में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने वाले दो प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं:

  1. अनुच्छेद 38: राज्य एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करेगा जो जनता के कल्याण को बढ़ावा दे और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करे।
  2. अनुच्छेद 39 (क): राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त हों और समाज के संसाधनों का वितरण इस प्रकार हो कि सामान्य कल्याण को बढ़ावा मिले।

7. मंत्री-लोक सेवक सम्बन्धों को प्रभावित करने वाले किन्हीं चार तत्वों का उल्लेख कीजिये।

Refer any four elements influencing the Minister-Civil Servant relationship. [2]

उत्तर: मंत्री-लोक सेवक संबंधों को प्रभावित करने वाले चार प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं:

  1. राजनीतिक तटस्थता: लोक सेवकों की राजनीतिक तटस्थता और निष्पक्षता संबंधों को प्रभावित करती है।
  2. गोपनीयता और जवाबदेही: लोक सेवकों द्वारा सूचना की गोपनीयता बनाए रखना और मंत्री के प्रति जवाबदेह होना।
  3. पेशेवर सलाह: लोक सेवकों द्वारा तकनीकी और पेशेवर सलाह देना, जिसे मंत्री स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।
  4. नियंत्रण और निर्देशन: मंत्री द्वारा नीतिगत निर्देशन और लोक सेवकों द्वारा उसका कार्यान्वयन, जिसमें संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

8. प्रशासनिक सुधार की प्रमुख चार समस्याओं की परिगणना कीजिये।

Enumerate four major problems of Administrative reforms. [2]

उत्तर: प्रशासनिक सुधारों की चार प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

  1. राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव: सुधारों को लागू करने के लिए आवश्यक राजनीतिक समर्थन और प्रतिबद्धता का न होना।
  2. नौकरशाही का प्रतिरोध: मौजूदा प्रशासनिक तंत्र में बदलाव के प्रति लोक सेवकों का विरोध और अनिच्छा।
  3. संसाधनों की कमी: सुधारों के कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय, मानवीय और तकनीकी संसाधनों का अभाव।
  4. समन्वय की समस्या: विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय का न होना, जिससे सुधार प्रक्रिया बाधित होती है।

9. द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा प्रस्तुत किसी एक प्रतिवेदन का सटीक नाम लिखिये।

Write exact name of any one report submitted by second Administrative Reforms Commission. [2]

उत्तर: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2005-2009) द्वारा प्रस्तुत एक प्रतिवेदन का सटीक नाम है: "राज्य में लोकतंत्र का सशक्तिकरण - नागरिक-केंद्रित प्रशासन" (Empowering the Citizen - Citizen-Centric Administration) - यह आयोग की दूसरी रिपोर्ट है।

खण्ड - स (PART - C)

20. मैक्स वेबर के आदर्श-रूप नौकरशाही संगठन की विशेषताओं का संक्षेप में विवरण दीजिये।

Delineate in brief the features of ideal type of Bureaucracy by Max Weber.

उत्तर: मैक्स वेबर के अनुसार आदर्श-रूप नौकरशाही की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • पदानुक्रम (Hierarchy): संगठन में स्पष्ट पदानुक्रम होता है, जहाँ प्रत्येक अधिकारी अपने उच्च अधिकारी के प्रति उत्तरदायी होता है।
  • नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन: कार्य निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किए जाते हैं, जो निर्णयों में एकरूपता और पूर्वानुमान सुनिश्चित करते हैं।
  • विशेषज्ञता (Specialization): कर्मचारियों को उनकी योग्यता और विशेषज्ञता के आधार पर कार्य सौंपे जाते हैं।
  • अवैयक्तिकता (Impersonality): निर्णय व्यक्तिगत भावनाओं या पक्षपात से मुक्त होकर, केवल नियमों और तथ्यों पर आधारित होते हैं।
  • लिखित दस्तावेजीकरण: सभी कार्यों और निर्णयों का लिखित रिकॉर्ड रखा जाता है।
  • योग्यता के आधार पर नियुक्ति: नियुक्तियाँ और पदोन्नति योग्यता और प्रशिक्षण के आधार पर होती हैं, न कि व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर।

21. “निर्णय' की विशेषताएँ बताइये।

Explain the characteristics of ‘Decision’.

उत्तर: निर्णय की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • उद्देश्यपूर्णता: प्रत्येक निर्णय किसी विशिष्ट उद्देश्य या लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लिया जाता है।
  • विकल्पों का चयन: निर्णय में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में से सर्वोत्तम विकल्प का चयन किया जाता है।
  • बौद्धिक प्रक्रिया: यह एक मानसिक प्रक्रिया है जिसमें तर्क, विश्लेषण और विवेक का उपयोग होता है।
  • भविष्योन्मुखी: निर्णय भविष्य में होने वाली कार्रवाइयों से संबंधित होता है।
  • क्रियान्वयन की आवश्यकता: एक अच्छा निर्णय वही है जिसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
  • समस्या समाधान: निर्णय किसी समस्या के समाधान या अवसर का लाभ उठाने के लिए लिया जाता है।

22. सम्प्रेषण की बाधाओं की संक्षेप में विवेचना कीजिये।

Discuss in brief the hindrances of communication.

उत्तर: सम्प्रेषण की प्रमुख बाधाएँ निम्नलिखित हैं:

  • भाषा संबंधी बाधाएँ: अलग-अलग भाषाओं, शब्दजाल या अस्पष्ट भाषा के कारण संदेश गलत समझा जा सकता है।
  • मनोवैज्ञानिक बाधाएँ: पूर्वाग्रह, भावनाएँ, रुचि की कमी या धारणा में अंतर संचार में बाधा डालते हैं।
  • संगठनात्मक बाधाएँ: अत्यधिक पदानुक्रम, नियमों की अधिकता या संचार के अपर्याप्त माध्यम बाधा उत्पन्न करते हैं।
  • भौतिक बाधाएँ: शोर, दूरी, या तकनीकी खराबी जैसी भौतिक बाधाएँ संदेश के प्रवाह को प्रभावित करती हैं।
  • सांस्कृतिक बाधाएँ: विभिन्न संस्कृतियों के मूल्यों, मान्यताओं और रीति-रिवाजों में अंतर संचार को कठिन बना सकता है।

23. तुलनात्मक लोक प्रशासन के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं ?

What are the main objectives of comparative Public Administration ?

उत्तर: तुलनात्मक लोक प्रशासन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • सिद्धांतों का विकास: विभिन्न देशों की प्रशासनिक प्रणालियों की तुलना करके सार्वभौमिक प्रशासनिक सिद्धांतों का निर्माण करना।
  • प्रशासनिक व्यवहार को समझना: विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संदर्भों में प्रशासनिक व्यवहार को समझना।
  • सुधार के लिए सीखना: अन्य देशों की सफल नीतियों और प्रथाओं से सीखकर अपने देश में प्रशासनिक सुधार लाना।
  • सार्वभौमिकता की खोज: यह पता लगाना कि क्या प्रशासन के कुछ ऐसे सिद्धांत हैं जो सभी देशों पर लागू होते हैं।
  • विकासशील देशों की समस्याओं का अध्ययन: विकासशील देशों की प्रशासनिक समस्याओं का विश्लेषण करना और उनके समाधान सुझाना।

24. विकास प्रशासन के क्षेत्र के कतिपय बिन्दु रेखांकित कीजिये।

Identify few points of scope of Development Administration.

उत्तर: विकास प्रशासन के क्षेत्र के कुछ प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैं:

  • योजना निर्माण एवं क्रियान्वयन: आर्थिक और सामाजिक विकास योजनाओं का निर्माण और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना।
  • संसाधन जुटाना: विकास कार्यक्रमों के लिए वित्तीय, मानवीय और भौतिक संसाधनों को जुटाना।
  • संस्थागत क्षमता निर्माण: विकास कार्यों को संचालित करने के लिए संस्थानों की क्षमता का विकास करना।
  • जन भागीदारी: विकास प्रक्रिया में लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • नवाचार और परिवर्तन प्रबंधन: नई तकनीकों और प्रक्रियाओं को अपनाना और परिवर्तन को प्रबंधित करना।
  • मूल्यांकन और निगरानी: विकास कार्यक्रमों की प्रगति और प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना।

25. राज्य स्तर पर नीति निरूपण प्रकिया में मंत्रिमंडल की भूमिका को संक्षेप में बताइये।

Bring out in brief the role played by Cabinet in the process of policy formulation at the State level.

उत्तर: राज्य स्तर पर नीति निरूपण में मंत्रिमंडल की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:

  • नीति का अंतिम निर्धारण: मंत्रिमंडल राज्य की सभी प्रमुख नीतियों पर अंतिम निर्णय लेता है।
  • प्राथमिकता निर्धारण: यह तय करता है कि किन क्षेत्रों में नीतियाँ बनाई जाएँ और उनकी प्राथमिकता क्या होगी।
  • समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है ताकि नीतियाँ एकीकृत हों।
  • अनुमोदन: मंत्रिमंडल विभिन्न मंत्रियों द्वारा प्रस्तावित नीतियों को अनुमोदित करता है।
  • संसदीय उत्तरदायित्व: मंत्रिमंडल सामूहिक रूप से राज्य विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी होता है और नीतियों का बचाव करता है।
  • संकट प्रबंधन: आपातकालीन स्थितियों में त्वरित नीतिगत निर्णय लेना।

26. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की शक्तियों के मुख्य बिन्दु रेखांकित कीजिये।

Identify the main points of the powers of the Comptroller and Auditor General of India.

उत्तर: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की प्रमुख शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:

  • लेखा परीक्षा की शक्ति: CAG को केंद्र और राज्य सरकारों के सभी खातों की लेखा परीक्षा करने का अधिकार है।
  • रिपोर्ट प्रस्तुत करना: वह अपनी लेखा परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति और राज्यपालों को प्रस्तुत करता है, जो संसद और विधानमंडलों में रखी जाती हैं।
  • लेखा प्रणाली का निर्धारण: CAG सरकारी लेखांकन के सिद्धांतों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है।
  • अनुपालन और प्रदर्शन लेखा परीक्षा: वह यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी व्यय नियमों और कानूनों के अनुसार हुआ है, साथ ही कार्यक्रमों की दक्षता की भी जाँच करता है।
  • स्वतंत्रता: CAG अपने कार्यों में पूर्णतः स्वतंत्र है और किसी भी सरकारी नियंत्रण के अधीन नहीं है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की लेखा परीक्षा: उसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निगमों के खातों की भी लेखा परीक्षा करने का अधिकार है।

27. लोक सेवकों के लिए प्रशिक्षण क्यों आवश्यक है ?

Why is training essential for civil servants ?

उत्तर: लोक सेवकों के लिए प्रशिक्षण निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है:

  • दक्षता में वृद्धि: प्रशिक्षण से लोक सेवकों के कौशल और ज्ञान में वृद्धि होती है, जिससे वे अपने कार्यों को अधिक कुशलता से कर पाते हैं।
  • बदलती परिस्थितियों के अनुकूलन: नई नीतियों, तकनीकों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में मदद मिलती है।
  • नैतिकता और अनुशासन: प्रशिक्षण लोक सेवकों में नैतिक मूल्यों, ईमानदारी और अनुशासन का विकास करता है।
  • सेवा वितरण में सुधार: प्रशिक्षित कर्मचारी जनता को बेहतर और त्वरित सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।
  • कैरियर व

27. आप किन कारकों को भारत में प्रशासनिक नैतिकता के पतन के लिए उत्तरदायी मानते हैं ?

In your opinion, what factors are responsible for degradation of administrative ethics in India?

उत्तर: भारत में प्रशासनिक नैतिकता के पतन के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं:

  • राजनीतिक हस्तक्षेप: नीतियों और नियुक्तियों में राजनीतिक दबाव के कारण नैतिक मूल्यों का ह्रास होता है।
  • भ्रष्टाचार: रिश्वतखोरी और भाई-भतीजावाद प्रशासनिक नैतिकता को कमजोर करते हैं।
  • पारदर्शिता का अभाव: निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने से जवाबदेही कम हो जाती है।
  • कमजोर निगरानी तंत्र: नैतिक उल्लंघनों की जांच और दंड की व्यवस्था प्रभावी नहीं है।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक कारक: समाज में नैतिक मूल्यों का पतन और उपभोक्तावादी प्रवृत्ति भी प्रभाव डालती है।
  • व्यक्तिगत लाभ की प्रवृत्ति: अधिकारियों में सार्वजनिक हित से अधिक व्यक्तिगत लाभ की चाह नैतिकता को कमजोर करती है।

खण्ड - द / PART - D

28. एफ.डब्ल्यू. टेलर के वैज्ञानिक प्रबन्ध के सिद्धान्तों को विवेचना कीजिए।

Discuss the principles of Scientific Management of F.W. Taylor.

अथवा / OR

हेनरी फेयोल द्वारा बताये गये प्रबन्ध के सिद्धान्तों की व्याख्या कीजिए।

Explain the principles of Management as propounded by Henri Fayol.

उत्तर (टेलर के सिद्धान्त): एफ.डब्ल्यू. टेलर ने वैज्ञानिक प्रबन्ध के चार मुख्य सिद्धान्त दिए:

  1. वैज्ञानिक कार्य पद्धति (Scientific Task Setting): कार्य को छोटे-छोटे भागों में बांटकर समय और गति का अध्ययन करना।
  2. वैज्ञानिक चयन एवं प्रशिक्षण (Scientific Selection and Training): कर्मचारियों का वैज्ञानिक तरीके से चयन और प्रशिक्षण देना।
  3. सहयोग का सिद्धान्त (Principle of Cooperation): प्रबन्धकों और श्रमिकों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना।
  4. कार्य का समान वितरण (Division of Work): कार्य को समान रूप से बांटना और प्रबन्धकों व श्रमिकों की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट करना।

अथवा (फेयोल के सिद्धान्त): हेनरी फेयोल ने प्रबन्ध के 14 सिद्धान्त दिए, जिनमें प्रमुख हैं:

  • कार्य विभाजन (Division of Work): विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए कार्य का विभाजन।
  • अधिकार और उत्तरदायित्व (Authority and Responsibility): अधिकार के साथ उत्तरदायित्व भी होना चाहिए।
  • अनुशासन (Discipline): नियमों और आदेशों का पालन।
  • आदेश की एकता (Unity of Command): प्रत्येक कर्मचारी को केवल एक ही वरिष्ठ से आदेश मिलना चाहिए।
  • दिशा की एकता (Unity of Direction): एक ही उद्देश्य के लिए एक ही योजना।
  • व्यक्तिगत हित का सामान्य हित के प्रति समर्पण (Subordination of Individual Interest to General Interest): संगठन का हित व्यक्तिगत हित से ऊपर।
  • पारिश्रमिक (Remuneration): उचित और न्यायसंगत वेतन।
  • केन्द्रीकरण (Centralization): निर्णय लेने की शक्ति का उचित स्तर पर केन्द्रीकरण।
  • स्केलर श्रृंखला (Scalar Chain): अधिकार की एक श्रृंखला।
  • व्यवस्था (Order): सही व्यक्ति को सही स्थान पर रखना।
  • समानता (Equity): सभी के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार।
  • कर्मचारियों की स्थिरता (Stability of Tenure): कर्मचारियों को स्थायित्व देना।
  • पहल (Initiative): कर्मचारियों को नए विचारों को लागू करने की स्वतंत्रता।
  • एस्प्रिट डी कॉर्प्स (Esprit de Corps): टीम भावना को बढ़ावा देना।

29. जिला आयोजन समिति की शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिये।

Describe the powers and functions of District Planning Committees.

अथवा / OR

राजस्थान राज्य में अपनाई गई योजना प्रक्रिया का विवरण दीजिए।

Present the planning process adopted in Rajasthan.

उत्तर (जिला आयोजन समिति): जिला आयोजन समिति (DPC) की शक्तियाँ एवं कार्य निम्नलिखित हैं:

  • योजना तैयार करना: जिला स्तर पर विकास योजनाओं का मसौदा तैयार करना और उन्हें राज्य सरकार को प्रस्तुत करना।
  • संसाधनों का आवंटन: जिले में उपलब्ध संसाधनों (वित्तीय, मानवीय, प्राकृतिक) का समुचित आवंटन सुनिश्चित करना।
  • समन्वय: विभिन्न विभागों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि) के बीच समन्वय स्थापित करना।
  • निगरानी एवं मूल्यांकन: योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना और उनका मूल्यांकन करना।
  • स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान: जिले की विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को चिन्हित करना।
  • सार्वजनिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों और जनप्रतिनिधियों को योजना निर्माण में शामिल करना।

अथवा (राजस्थान की योजना प्रक्रिया): राजस्थान राज्य में अपनाई गई योजना प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल हैं:

  1. ग्राम सभा स्तर: ग्राम सभाओं में आवश्यकताओं की पहचान और प्रस्ताव तैयार करना।
  2. पंचायत समिति स्तर: ग्राम पंचायतों के प्रस्तावों को समेकित करना और ब्लॉक स्तर पर योजना बनाना।
  3. जिला परिषद स्तर: जिला परिषद द्वारा जिला योजना का मसौदा तैयार करना।
  4. जिला आयोजन समिति: DPC द्वारा योजना को अंतिम रूप देना और राज्य सरकार को भेजना।
  5. राज्य स्तर: राज्य योजना आयोग द्वारा जिला योजनाओं का समन्वय और बजट आवंटन।
  6. क्रियान्वयन और निगरानी: योजनाओं का क्रियान्वयन और नियमित निगरानी।

30. सामान्यज्ञों तथा विशेषज्ञों के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिये तथा उनके मध्य विवादों के कारणों पर प्रकाश डालिए।

सामान्यज्ञ (Generalists) और विशेषज्ञ (Specialists) में अंतर:

  • सामान्यज्ञ: ये वे प्रशासक होते हैं जिनके पास प्रशासन के विभिन्न क्षेत्रों का व्यापक ज्ञान होता है। ये आईएएस, आईपीएस जैसी सामान्य प्रशासनिक सेवाओं से आते हैं और नीति निर्माण, समन्वय, और सामान्य प्रबंधन में दक्ष होते हैं।
  • विशेषज्ञ: ये वे अधिकारी होते हैं जिनके पास किसी विशिष्ट क्षेत्र (जैसे इंजीनियरिंग, चिकित्सा, वित्त) का गहन तकनीकी ज्ञान होता है। ये तकनीकी सेवाओं (जैसे आईईएस, आईएफएस) से आते हैं और अपने विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं।

विवादों के कारण:

  • वर्चस्व का मुद्दा: सामान्यज्ञों का प्रशासन में वर्चस्व रहा है, जिससे विशेषज्ञों में असंतोष है।
  • नीति निर्माण में भूमिका: सामान्यज्ञ नीति निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाते हैं, जबकि विशेषज्ञों को केवल तकनीकी सलाहकार की भूमिका मिलती है।
  • पदोन्नति और कैरियर: सामान्यज्ञों को तेजी से पदोन्नति मिलती है, जबकि विशेषज्ञों के कैरियर में सीमित अवसर होते हैं।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया: सामान्यज्ञ अक्सर विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह को अनदेखा कर देते हैं, जिससे विवाद उत्पन्न होता है।
  • वेतन और स्थिति: सामान्यज्ञों को उच्च वेतन और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, जबकि विशेषज्ञों को कम महत्व दिया जाता है।

अथवा

भारत में स्वतंत्रता के पश्चात् हुए प्रशासनिक सुधारों पर एक निबन्ध तैयार कीजिये।

भारत में स्वतंत्रता के पश्चात् प्रशासनिक सुधार:

स्वतंत्रता के बाद भारत में प्रशासनिक सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की गई, जिसका उद्देश्य प्रशासन को अधिक कुशल, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाना था। प्रमुख सुधार निम्नलिखित हैं:

  • प्रशासनिक सुधार आयोग (1966-1970): मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित इस आयोग ने प्रशासनिक ढांचे, कार्यपद्धति और कर्मचारी प्रबंधन में व्यापक सुधारों की सिफारिश की।
  • लोक प्रशासन में विकेंद्रीकरण: 1992 के 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर शासन सशक्त हुआ।
  • सूचना का अधिकार अधिनियम (2005): इस अधिनियम ने नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक पहुंच का अधिकार दिया, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी।
  • लोक सेवा गारंटी अधिनियम: विभिन्न राज्यों में लागू इस अधिनियम ने नागरिकों को निर्धारित समय में सेवाएं प्रदान करने की गारंटी दी।
  • ई-गवर्नेंस: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन किया गया, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल और पारदर्शी हुईं।
  • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2005-2009): वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में इस आयोग ने शासन सुधारों पर 15 रिपोर्टें प्रस्तुत कीं, जिनमें लोकपाल, नागरिक चार्टर और प्रशासनिक न्यायाधिकरणों पर जोर दिया गया।
  • सिविल सेवा सुधार: सिविल सेवाओं में प्रदर्शन मूल्यांकन, प्रशिक्षण और कैरियर विकास के लिए नई नीतियां लागू की गईं।

इन सुधारों ने भारतीय प्रशासन को अधिक लोकतांत्रिक, पारदर्शी और जन-उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Differentiate between Generalists and Specialists and discuss the reasons of controversy between them.

Difference between Generalists and Specialists:

  • Generalists: These are administrators with broad knowledge of various administrative fields. They come from general administrative services like IAS, IPS and are skilled in policy-making, coordination, and general management.
  • Specialists: These are officers with deep technical knowledge in a specific field (e.g., engineering, medicine, finance). They come from technical services (like IES, IFS) and possess expertise in their particular domain.

Reasons for controversy:

  • Dominance issue: Generalists have traditionally dominated administration, causing dissatisfaction among specialists.
  • Role in policy-making: Generalists play a leading role in policy-making, while specialists are often relegated to advisory roles.
  • Promotion and career: Generalists get faster promotions, while specialists have limited career opportunities.
  • Decision-making process: Generalists often ignore technical advice from specialists, leading to conflicts.
  • Salary and status: Generalists enjoy higher salaries and prestige, while specialists are undervalued.

OR

Prepare an essay on the Administrative Reforms undertaken after independence in India.

Administrative Reforms after Independence in India:

After independence, India initiated a series of administrative reforms aimed at making the administration more efficient, accountable, and citizen-centric. Key reforms include:

  • Administrative Reforms Commission (1966-1970): Chaired by Morarji Desai, this commission recommended comprehensive reforms in administrative structure, procedures, and personnel management.
  • Decentralization in Public Administration: The 73rd and 74th Constitutional Amendments (1992) gave constitutional status to Panchayati Raj and municipalities, empowering local governance.
  • Right to Information Act (2005): This act gave citizens the right to access government information, enhancing transparency and accountability.
  • Public Service Guarantee Acts: Enacted by various states, these acts guaranteed timely delivery of services to citizens.
  • E-Governance: Under the Digital India program, government services were made online, simplifying and making administrative processes transparent.
  • Second Administrative Reforms Commission (2005-2009): Chaired by Veerappa Moily, this commission submitted 15 reports on governance reforms, emphasizing Lokpal, citizen charters, and administrative tribunals.
  • Civil Service Reforms: New policies for performance evaluation, training, and career development were implemented in civil services.

These reforms have played a significant role in making Indian administration more democratic, transparent, and people-oriented.