RBSE Class 12th 2015 Shorthand Hindi-SS-32-2015 Previous Year Papers
Shorthand Hindi-SS-32-2015 from the 2015 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.
Treat this question paper as a mock under gentle timing first, then as a marking exercise the second time. The introduction on this page is written only for this subject-and-year pair, not copied from other pages.
Bookmark the link if you coach juniors — the layout stays stable for search engines and classroom sharing.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2015 |
| Subject | Shorthand Hindi-SS-32-2015 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2015, and subject Shorthand Hindi-SS-32-2015 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
Turning 2015 papers into insight
One Shorthand Hindi-SS-32-2015 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.
Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.
RBSE Class 12th 2015 Shorthand Hindi-SS-32-2015
Scroll through the Previous Year Papers pages for Shorthand Hindi-SS-32-2015 (2015).
Rajasthan Board Class 12th Shorthand Hindi-SS-32-2015 2015 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015
हिन्दी शीघ्रलिपि
(SHORTHAND HINDI)
समय — 3½ घण्टे
पूर्णांक — 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- तीनों खण्ड एक ही बैठक में लिखाये जायें।
- प्रथम एवं द्वितीय खण्डों तथा द्वितीय एवं तृतीय खण्डों के बीच में 5-8 मिनट का मध्यान्तर दिया जाये।
- तीनों खण्डों के संकेत लिपि श्रुतलेखों के हिन्दी अक्षरीकरण के लिए 2½ घंटे का समय दिया जाए।
- केवल निम्न विराम-चिह्न ही लगाएं : पूर्ण विराम, अर्द्ध-विराम और प्रश्न-चिह्न एवं कोष्ठक।
- संकेत लिपि पेन्सिल से लिखा जाए तथा उसका अनुवाद हिन्दी में टंकण यंत्र / कम्प्यूटर से ही टंकित किया जाय। हाथ से लिखा मान्य नहीं होगा।
- संकेत लिपि में लिखा हुआ श्रुतलेख उत्तर-पुस्तिका के साथ नत्थी कर दिया जाए।
- संकेत लिपि के 20% अंक रखे गये हैं।
- खण्ड प्रथम 4 मिनट, खण्ड द्वितीय 5 मिनट तथा खण्ड तृतीय 7 मिनट लिखवाने के रखे गए हैं। प्रत्येक खण्ड 80 शब्द प्रति मिनट की गति से बोला जाय।
SS—32—SH. HD. (Hindi) 55-6032 [ Turn over ]
प्रथम खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखाया जाए।)
सुदर्शन प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड
तार का पता : सुदर्शन 27 प्रथम चरण,
टेलीफोन सं : 2698059 लाल सागर, / नया औद्योगिक
पत्र संख्या: 5/ a0 / 54 क्षेत्र,
चर्च रोड, रायपुर।
दिनांक : 08 / दिस० 204
सर्व श्री रामदास एण्ड रामविलास कम्पनी
5/30 अग्रवाल कॉलोनी, न्यू पॉवर हाऊस के पास
महापुरा रोड / , चंडीगढ़ (पंजाब)
अति - गोपनीय
विषय : आर्थिक स्थिति की जानकारी के क्रम में
प्रिय महोदय,
आपका पत्रांक 576 दिनांक 01 दिस० 2074 का प्राप्त हुआ, एतदर्थ धन्यवाद। आपने हमारे शहर की एक प्रतिष्ठित फर्म सर्व श्री रामनारायण श्याम नारायण एण्ड कम्पनी, मैट्रो बाजार, रायपुर की, आर्थिक स्थिति की जानकारी के बारे में उल्लेख किया है। उपरोक्त संदर्भ में हमारा आपसे आग्रह है कि उक्त फर्म हमारे शहर में गत 35 वर्षों से व्यवसाय करती आ रही है। इस फर्म से हमारे पिछले 30 वर्षों से व्यावसायिक संबंध हैं। यह फर्म कपड़े के व्यवसाय में अग्रणी स्थान रखती है। इस शहर में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण प्रदेश में उपरोक्त फर्म ख़्याति प्राप्त है।
द्वितीय खण्ड
(इसे प्रति मिनट 80 शब्दों की गति से लिखाया जाए।)
हमारा इस फर्म से लाखों का कारोबार होता है। आज तक यह फर्म निर्धारित समय या उससे पूर्व ही भुगतान करती आ रही है। उक्त फर्म द्वारा प्रतिवर्ष हमारे द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण कर अथवा उससे भी अधिक कार्य करने की दशा में, हमारी नीतियों के अनुसार अतिरिक्त लाभांश व अन्य सुविधाएँ भी प्राप्त करती है।
इनका चैक कभी भी अप्रतिष्ठित नहीं हुआ है। इस फर्म द्वारा कई बार रोकड़ छूट भी हमसे प्राप्त की गई है। अतः हमारी राय में इस फर्म को 10 लाख रुपये तक का उधार माल दे सकते हैं। किन्तु इस संदर्भ में हमारी कोई व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी नहीं रहेगी। यदि आवश्यक समझें तो आप बैंक अथवा शहर की प्रतिष्ठित फर्मों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अशोक कुमार
प्रबन्धक
कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक)
शिक्षा विभाग, मुम्बई
क्रमांक : जि शि अ / मा / मु / सांख्यिकी / 204
प्रति,
प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक
राउमावि/राबाउमावि/रामावि/राबामावि
समस्त सहायता प्राप्त / गैर सहायता प्राप्त
दिनांक : 15 दिसम्बर 204
विषय : शाला समंक वर्ष 2014-15 (सन्दर्भ तिथि 30 नवम्बर 204) प्रेषित करने बावत्।
संदर्भ : निदेशक माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र मुम्बई का पत्रांक 30 दिनांक 30.1.204
विषयान्तर्गत लेख है कि शाला समंक प्रपत्र संलग्न कर प्रेषित किया जा रहा है। प्रपत्र की समस्त सूचनाओं की संदर्भ तिथि 30 नवम्बर 204 है।
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक)
SS—32—SH. HD. (Hindi) SS-6032
सारणी संख्या 7 एवं 8 के निर्देश
सारणी संख्या 7 में समस्त अध्यापकों को प्रशिक्षित/अप्रशिक्षित एवं पुरुष/महिला अनुसार दर्शाना है। सारणी संख्या 8 (ब) में पदवार अध्यापकों को अंकित करना है।
सारणी संख्या 8 (अ) के निर्देश
सारणी संख्या 8 (अ) में शामिल शारीरिक शिक्षक, उद्योग शिक्षक, संगीत शिक्षक एवं चित्रकला शिक्षकों को अंकित करना है।
सारणी संख्या 9 के निर्देश
सारणी संख्या 9 में कुल नामांकित विद्यार्थियों में से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं ओबीसी के विद्यार्थियों को दर्शाना है।
सारणी संख्या 0 के निर्देश
सारणी संख्या 0 में कक्षा एवं कक्षा 12 में अध्ययनरत विद्यार्थियों को संवर्गानुसार प्रदर्शित करना है। कुल नामांकित विद्यार्थियों को आयुवार नामांकन प्रपत्र में अंकित करना है। अतः इनमें भिन्नता न हो। एक कक्षा के विभिन्न सेक्शनों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या को जोड़कर दर्शाया जाए।
शाला समंक संधारण एवं प्रेषण
उक्त शाला समंक को संधारित कर 3 दिवस में संबंधित नोडल संलग्न शाला समंक प्रपत्र जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), शिक्षा विभाग, मुम्बई को प्रेषित करें।
क्रमांक : जिशि अ/मा/मु/सांख्यिकी/204
दिनांक : 5 दिसम्बर, 204
प्रतिलिपि एवं निर्देश
प्रतिलिपि नोडल अधिकारी एवं प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय महात्मा गांधी (मुम्बई शहर विधानसभा क्षेत्र), चर्च गेट (नरीमन विधानसभा क्षेत्र), चैतपुरा (नवी मुम्बई विधानसभा क्षेत्र), महापे, बालेसर, एसिड टाऊन, नेशनल पार्क जोन, ओरछा, भोपालगंज, जुहू विधानसभा क्षेत्र, कोलारगंज को भेजकर निर्देशित किया जाता है कि वे संबंधित कार्यालय पंचायत समिति स्थित समस्त राजकीय विद्यालयों को निर्देशित करें।
SS—32—SH. HD. (Hindi) SS-6032
तृतीय खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखाया जाए।)
आओ | करें मंगल कामना !
दीपावली पर्व दीपक का, प्रकाश का, धरती को सितारों से भरकर आकाश बना देने का, पुरुषार्थ से प्राप्त लक्ष्मी, गौमाता को समर्पित गौवर्धन, काम पर विजय का उत्सव, जीवन को मृत्यु से निर्भय करने वाली यम द्वितीया, भाई-बहिन के प्रेम का प्रतीक भाई-दूज एवं ज्ञान के प्रतीक कलम दवात की पूजा कर नई चेतना का उत्सारण करने का पर्व है। वास्तव में दीपावली पर्व नहीं, प्रकाशपुंज है क्योंकि जब प्रकाश प्रकाशित होता है तो वह छोटे-बड़े, गरीब-अमीर किसी में कोई भेद नहीं करता।
निर्देश: उच्च माध्यमिक विद्यालय, निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को वित्तीय सूचना निर्धारित प्रपत्र का वितरण एवं संग्रहित कर इस कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे।
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक)
शिक्षा विभाग, मुम्बई, महाराष्ट्र
पुनश्च: प्राथमिकता देते हुए सूचना अतिशीघ्र उपरोक्त कार्यालय में संबंधित अधिकारी को प्रेषित की जाए।
SS—32—SH, HD, (Hindi) SS-6032
दीपावली पर्व का वास्तविक अर्थ
प्रकाश पर सबका अधिकार है। केवल अपने घर के भीतर ज्योति जलाने के लिए यह पर्व नहीं है। यह त्यौहार केवल घर की सफाई का नहीं, बल्कि मन में व्याप्त निराशा, भय और आक्रोश को मिटाने का भी है। हमें तो प्रत्येक कार्यदिवस को दीपों का पर्व मनाना होगा। जीवन में व्याप्त अंधकार को हम तभी दूर कर पाएंगे, जब अपने दीपक स्वयं बनेंगे। अपने को इतना आत्मविश्वासी, सेवाभावी और मृदुभाषी बना लें कि अन्य भी हमारे आचरण से प्रेरणा ले सकें। ऐसे ही एक दीपक से दूसरा दीपक जलता जाएगा।
एक तथ्य यह भी है कि व्यक्ति इन त्यौहारों को केवल अपने व्यक्तिगत परिवार के साथ मनाने में विश्वास करता है। वस्तुतः त्यौहार तो ऐसे मौके हैं, जिनमें हम सब आपस में मन में आई कटुताओं को दूर करने का प्रयास कर सकते हैं।
यह भी कटु सत्य है कि इन त्यौहारों का सीधा संबंध अब व्यापार से होने लगा है और व्यापारी वर्ग इन पर्वों में अधिक से अधिक मुनाफा कमाने की योजना बनाते हैं। कुछ लोग इन्हें वैभव प्रदर्शन का मौका मानते हैं। दीपावली पर रंग-बिरंगी लाइटों से लेकर महँगे पटाखों का अनावश्यक प्रदर्शन समाज के कौन से हित की कामना करता है। कृषि प्रधान देश में जहाँ हमें विद्युत की कटौती से वर्षभर जूझना पड़ता है, वहीं सरकार की ओर से सजावट करने वालों को पुरस्कार देने की प्रथा चल पड़ी है। ऐसे विद्युत का भार हमारी कटौती ही बढ़ाएगा। अंधकार पर विजय प्राप्त करने के लिए हम दीप जलाते हैं। ऐसे विद्युत संसाधनों का दुरुपयोग कर कौन सी मंगलकामना करते हैं। इसी तरह वातावरण को प्रदूषित करते, कान के पर्दे हिला देने वाली आतिशबाजी, समाज के कौन से वर्ग को राहत पहुँचाती है। हमारी प्रसन्नता का आतिशी प्रदर्शन कैसी मंगल कामना है।
हिंदी - एस.एस. 32 (2015)
प्रश्न:
हमें सोचना होगा समाज के उस वर्ग के लिये भी, जिनके लिये त्यौहारों के कोई मायने नहीं हैं। वे अलग-अलग अपनी जिन्दगी मायूसी से काट रहे हैं। उनके जीवन में उन का कोई अर्थ नहीं है। क्यों न हम उनकी जिंदगी में भी खुशी का एक पल ले आएं। सच तो यह है कि यदि समाज का उच्च वर्ग, सम्पन्नता की अपनी इस अंधी दौड़ का कुछ हिस्सा उन्हें भी दे दें तो सभी के घर में दीपोत्सव का प्रकाश आ जाएगा।
मंगलकामना स्वयं के लिये न होकर सबके लिये हो और ऐसी मंगलकामना सभी रखें तो सुख समृद्धि के द्वार खुल जाएँगे।
आइये! दीपोत्सव के पर्व पर एक संकल्प धारण करें -- जन-जन के हर्ष का, सबकी मंगलकामना का, सभी के उत्सर्ग का।
प्रश्न (बहुविकल्पीय):
उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
-
लेखक के अनुसार समाज के किस वर्ग के लिए त्यौहारों का कोई अर्थ नहीं है?
- उच्च वर्ग
- मध्यम वर्ग
- निर्धन वर्ग
- सभी वर्ग
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि "समाज के उस वर्ग के लिये भी, जिनके लिये त्यौहारों के कोई मायने नहीं हैं" - यह निर्धन वर्ग की ओर संकेत करता है, जो आर्थिक तंगी के कारण त्यौहारों का आनंद नहीं ले पाता।
-
लेखक के अनुसार सभी के घर में दीपोत्सव का प्रकाश कैसे आएगा?
- अधिक दीप जलाने से
- सम्पन्न वर्ग द्वारा अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा निर्धनों को देने से
- सरकारी सहायता से
- त्यौहार मनाने से
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, "यदि समाज का उच्च वर्ग, सम्पन्नता की अपनी इस अंधी दौड़ का कुछ हिस्सा उन्हें भी दे दें तो सभी के घर में दीपोत्सव का प्रकाश आ जाएगा।"
-
लेखक ने दीपोत्सव के पर्व पर क्या संकल्प धारण करने को कहा है?
- अपने लिए सुख की कामना
- जन-जन के हर्ष, सबकी मंगलकामना और सभी के उत्सर्ग का
- धन संचय का
- त्यौहार मनाने का
व्याख्या: गद्यांश के अंत में लेखक कहता है, "आइये! दीपोत्सव के पर्व पर एक संकल्प धारण करें -- जन-जन के हर्ष का, सबकी मंगलकामना का, सभी के उत्सर्ग का।"
प्रश्न (लघु उत्तरीय):
गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने समाज के निर्धन वर्ग की पीड़ा को उजागर किया है, जिसके लिए त्यौहारों का कोई अर्थ नहीं है। वे मायूसी से जीवन काट रहे हैं। लेखक का मानना है कि यदि समाज का सम्पन्न वर्ग अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा उन्हें दे दे, तो सभी के जीवन में खुशी आ सकती है। मंगलकामना स्वयं के लिए न होकर सबके लिए होनी चाहिए। लेखक दीपोत्सव के पर्व पर जन-जन के हर्ष, सबकी मंगलकामना और सभी के उत्सर्ग का संकल्प लेने का आह्वान करता है।
प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय):
गद्यांश के आधार पर बताइए कि लेखक ने समाज के उच्च वर्ग को क्या संदेश दिया है और इससे समाज में क्या परिवर्तन आ सकता है?
उत्तर: लेखक ने समाज के उच्च वर्ग को यह संदेश दिया है कि वे अपनी सम्पन्नता की अंधी दौड़ का कुछ हिस्सा निर्धन वर्ग को देकर उनके जीवन में खुशी ला सकते हैं। इससे समाज में निम्नलिखित परिवर्तन आ सकते हैं:
- सभी वर्गों के लोग त्यौहारों का आनंद ले सकेंगे, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ेगी।
- निर्धन वर्ग की मायूसी दूर होगी और उनके जीवन में आशा का संचार होगा।
- समाज में आर्थिक असमानता कम होगी और सुख-समृद्धि का वातावरण बनेगा।
- मंगलकामना स्वयं के लिए न होकर सबके लिए होगी, जिससे सामूहिक भलाई की भावना विकसित होगी।
- दीपोत्सव का प्रकाश हर घर में पहुँचेगा, जो सच्चे उत्सव का प्रतीक होगा।
इस प्रकार, लेखक का संदेश समाज में परोपकार, सहानुभूति और सामूहिक कल्याण की भावना को प्रोत्साहित करता है, जिससे एक समृद्ध और खुशहाल समाज का निर्माण हो सकता है।
पृष्ठ 7 का 7