RBSE Class 12th 2016 Shorthand Hindi-SS-32-2016 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2016
Subject Shorthand Hindi-SS-32-2016
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2016 Shorthand Hindi-SS-32-2016

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Rajasthan Board Class 12th Shorthand Hindi-SS-32-2016 2016 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2016

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2016

हिन्दी शीघ्रलिपि

(SHORTHAND HINDI)

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 40


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. तीनों खण्ड एक ही बैठक में लिखाये जायें।
  3. प्रथम एवं द्वितीय खण्डों तथा द्वितीय एवं तृतीय खण्डों के बीच में 5-5 मिनट का मध्यान्तर दिया जाये। तीनों खण्डों के संकेत लिपि श्रुतलेखों के हिन्दी अक्षरीकरण के लिए 2¾ घंटे का समय दिया जाए।
  4. केवल निम्न विराम-चिह्न ही लगाएं : पूर्ण विराम, अर्द्ध-विराम और प्रश्न-चिह्न एवं कोष्ठक।
  5. संकेत लिपि पेन्सिल से लिखा जाए तथा उसका अनुवाद हिन्दी में टंकण यंत्र / कम्प्यूटर से ही टंकित किया जाय। हाथ से लिखा मान्य नहीं होगा।
  6. संकेत लिपि में लिखा हुआ श्रुतलेख उत्तर-पुस्तिका के साथ नत्थी कर दिया जाए।
  7. संकेत लिपि के 20% अंक रखे गये हैं।
  8. खण्ड प्रथम 4 मिनट, खण्ड द्वितीय 5 मिनट तथा खण्ड तृतीय 7 मिनट लिखवाने के रखे गए हैं। प्रत्येक खण्ड 80 शब्द प्रति मिनट की गति से बोला जाय।

नामांक (Roll No.) : ____________________

SLNo. : ____________________

No. of Sections : 3   SS-32-SH. HD. (Hindi)

No. of Printed Pages : 07

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प्रथम खण्ड

(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखा जाए)

रामदास एण्ड फतेहचन्द कम्पनी
क्रॉकरी के विक्रेता
तार का पता : राम 28, गांधी मार्ग,
टेलीफोन नं. : 2727632 कनॉट प्लेस,
कोड नं. : आर. ए. एफ. सूरत

पत्र क्रमांक : 736/454
दिनांक : 5 फरवरी, 20..

सेवा में,
सर्व श्री अरविन्द गुड्स सर्विसेज,
गोविन्द मार्ग,
बड़ोदा।

विषय : माल की क्षतिपूर्ति हेतु

प्रिय महोदय,

आपके द्वारा प्रेषित 2 जनवरी, 20.. का माल हमें प्राप्त हुआ। हमें खेद के साथ लिखना पड़ रहा है कि जब हमने पेटियां खोलीं तो बहुत सारा माल टूटा हुआ मिला। टूटे हुए सामान का विस्तृत विवरण हमने ट्रांसपोर्ट कम्पनी को बता दिया था। क्षतिग्रस्त माल की सम्पूर्ण सूचना आपको भी भिजवा दी थी। अपनी व्यापारिक शर्तों के अनुसार 0% साला के साथ टूटे हुए माल की क्षतिपूर्ति हेतु निवेदन किया था।

भवदीय,
रामदास एण्ड फतेहचन्द कम्पनी

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पत्र लेखन (व्यापारिक पत्र)

किन्तु आपके द्वारा अभी तक कोई प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। हमने माल की आपूर्ति के साथ क्षतिपूर्ति के शीघ्र भुगतान का भी आग्रह किया था, ताकि भविष्य में अपने व्यापारिक संबंध मधुर बने रहें। आपकी उदासीनता से ऐसा प्रतीत होता है कि आप माल की आपूर्ति नहीं करना चाहते हैं।

त्योहारी मांग को देखते हुए हमें व्यापार में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्राहकों की मांग के अनुसार हमें अन्यत्र स्थान से ज्यादा कीमतों पर माल मंगाना पड़ा है।

अतः हमें दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है कि आप या तो आने वाले 5 दिनों में माल की आपूर्ति कर दें अन्यथा मजबूर होकर हमें कानूनी कार्यवाही करना पड़ेगी। आपकी सुविधा के लिये क्षतिग्रस्त माल की एक कॉपी पुनः प्रेषित कर रहे हैं।

संलग्न : क्षतिग्रस्त माल की प्रतिलिपि तथा ट्रांसपोर्ट कम्पनी की रिपोर्ट एवम् हस्ताक्षर, बीजक की प्रति

भवदीय,
रामदास एण्ड फतेहचन्द
(साझेदार)

व्याख्या:

यह एक व्यापारिक पत्र है जिसमें प्रेषक (रामदास एण्ड फतेहचन्द) ने प्राप्तकर्ता को क्षतिग्रस्त माल की आपूर्ति और क्षतिपूर्ति भुगतान के लिए पुनः अनुरोध किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि 5 दिनों में माल की आपूर्ति नहीं की गई तो कानूनी कार्यवाही की जाएगी। पत्र के साथ क्षतिग्रस्त माल की प्रतिलिपि, ट्रांसपोर्ट कम्पनी की रिपोर्ट और बीजक की प्रति संलग्न की गई है।

द्वितीय खण्ड

(इसे प्रति मिनट 80 शब्दों की गति से लिखा जाए)

क्रमांक : 222    दिनांक : 3 मार्च, 206

प्रति,
अधीक्षण अभियन्ता,
जल संसाधन विभाग,
इन्दौर।

प्रसंग : आपका पत्रांक लेखा 735 दिनांक 0.0.206

महोदय,

उपरोक्त प्रासंगिक पत्र के सन्दर्भ में निवेदन है कि आपके द्वारा प्रदत्त कार्य की स्वीकृति पश्चात् एवं निर्देशानुसार मैसर्स राजधानी कॉन्ट्रेक्टर, पुरानी चुंगी के पीछे जेबी रोड, भोपाल को कार्य आदेश जारी किये गये। कार्य आदेशानुसार 0.0.205 से 0.02.206 को पूर्ण किया जाना था। संवेदक द्वारा कार्य की स्पान वाईज प्रगति रखी गई थी।

निर्देशानुसार है कि उक्त कार्य अलग प्रवृत्ति का है जिसमें विभाग एवं संवेदक को राजस्व विभाग के पटवारियों पर निर्भर रहना होता है। मुटाम लगाने के लिये चिन्हीकरण हल्का पटवारियों को दिया जाता है। उक्त कार्य हेतु विभाग द्वारा समय-समय पर निवेदन करने के फलस्वरूप सम्बन्धित हल्का पटवारियों द्वारा सहयोग प्रदान करने हेतु मुटाम लगाने हेतु स्थान चिन्हीकरण में यथासम्भव सहयोग दिया जाता रहा है, जिसके फलस्वरूप संवेदक ने कार्य आदेश राशि रूपये 46,28,2[5 के विरूद्ध राशि रूपये 32,75,49/- का कार्य सम्पादित कर लिया था तथा कार्य की प्रगति के अनुसार कार्य निर्धारित समय तक पूर्ण हो जाना था, परन्तु अचानक मौसम परिवर्तन के कारण सम्बन्धित क्षेत्र में कार्य प्रभावित हुआ।

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प्रश्न 3

व पूरे राज्य में आंधी, वर्षा एवं ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसलों को भारी नुकसान होने के कारण राज्य सरकार ने सभी पटवारियों को किसानों को हुए नुकसान के आंकलन में नियुक्त कर तुरन्त रिपोर्ट देने के निर्देश देने के कारण मुटाम लगाने का कार्य प्रभावित हुआ एवं सम्बन्धित हल्का पटवारी फसलों के नुकसान के आंकलन में व्यस्त हो गये हैं। कारण संवेदन को उसके द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को लगाने हेतु चिन्हित स्थान यथा समय उपलब्ध नहीं हो सके। इस कारण कार्य प्रभावित हुआ है।

निवेदन है कि चूंकि कार्य की भौतिक प्रगति अनुसार लगभग 90 प्रतिशत तक कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष कार्य दिनांक 25.03.2016 तक पूर्ण कर लिये जाने की पूर्ण संभावना है। अतः श्रीमान् से इस कार्यालय के पत्रांक 203 द्वारा अनुरोध किया गया था कि कार्य पूर्ण करने एवं अनुबंध को जीवित रखने हेतु कार्य की समयावधि 25.03.2016 तक बढ़ाने की अनुशंसा की गई है।

व्याख्या: यह एक औपचारिक पत्र का अंश है जिसमें कार्य में विलंब के कारणों का उल्लेख किया गया है। पटवारियों को फसल नुकसान आकलन में लगाए जाने के कारण मुटाम लगाने का कार्य प्रभावित हुआ। कार्य लगभग 90% पूर्ण हो चुका है और शेष 25.03.2016 तक पूरा होने की संभावना है, इसलिए समयावधि बढ़ाने की अनुशंसा की गई है।

(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखा जाए)


स्वतंत्रता संग्राम की अमरनायिका: रानी अवंति बाई

भारतीय नारियों ने इस पुरूष प्रधान समाज में अपना एक अलग मुकाम बनाया। देश का स्वर्णिम इतिहास भी महिलाओं की शौर्य गाथाओं से भरा पड़ा है, चाहे वे दुर्गावती, लक्ष्मीबाई, झलकारीबाई, अजीजन बी या कल्पनादत्ता ही क्यों न हों? इनमें तो बहुत सी महिलाओं को हम जानते भी नहीं जो आज भी गुमनामी के अंधेरे में खोई हुई हैं।

व्याख्या: यह पाठ स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी अवंति बाई के योगदान को रेखांकित करता है। इसमें बताया गया है कि भारतीय महिलाओं ने पुरुष प्रधान समाज में अपनी अलग पहचान बनाई और देश के इतिहास में वीरता की गाथाएं लिखीं। कई महिलाएं आज भी अज्ञात हैं जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।

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अवन्तीबाई का शौर्य और पराक्रम

अवन्तीबाई का शौर्य पराक्रम अपने आप में अद्वितीय है। भारत की माटी में पलकर बड़ी होने वाली यह सिंहनी गुलामी की निराशा के तिमिर में एक ज्वाला थी। अवन्तीबाई ऐसा नाम है जिससे अंग्रेजी सेनापति वालिंगटन और उसकी सेना ठीक ऐसे कांपती थी जैसे शेरनी के आगे हिरण। वीरता और त्याग की पर्याय इस देवी का जन्म 6 अगस्त सन्‌ 1831 शिवनी जिले के मनकेड़ी नामक ग्रामीण राज्य में हुआ था। माता का नाम कृष्णा बाई और पिता का नाम जुझारूसिंह मनकेड़ी के राजा थे। इस चन्द्रमुखी बेटी को पाकर वे धन्य हो गये। बचपन में इस बालिका ने अपने पिता को वचन दिया था कि वह अपना नाम बेटों की तरह रोशन करेगी। तलवारों की झनझनाहट और घोड़ों की हिनहिनाहट, परिवार के संस्कारों, बंदूक को गोलियों बारूद की गंध तथा बलिदान, शान और पराक्रम के परिवेश में पली बढ़ी यह बालिका आज़ादी की पहली लड़ाई में अमर नायिका बन गई।

अवन्ती बाई का विवाह रामगढ़ के राजा लक्ष्मणसिंह के पुत्र विक्रमादित्य के साथ सम्पन्न हुआ। सन्‌ 1855 में पिता राजसिंह की मृत्यु के बाद विक्रमादित्य सिंहासन पर बैठे। किन्तु कुछ समय बाद ही विक्षिप्त हो गये और असमय ही 1858 में मृत्यु हो गई। यह घटना रानी के लिये वज्रपात समान थी। उनके दो बेटे थे अमानसिंह और शेरसिंह। नाबालिग अमानसिंह की ओर से उत्तराधिकारी के रूप में रानी ने राज्य की कमान सम्भाली। किन्तु अंग्रेज शासकों ने अमानसिंह को नाबालिग करार देकर रामगढ़ की रियासत कोर्ट ऑफ बोर्ड से ले ली।

एक सामन्त के विश्वासघात के कारण जब गढ़ा के राजा शंकरशाह और उनके पुत्र रघुनाथशाह को अंग्रेजों द्वारा तोप के मुंह में बाँधकर उड़ा देने की खबर रानी अवन्ती बाई ने सुनी तो विद्रोह की आग उनके अन्दर फूट पड़ी। सन्‌ 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में समूचे उत्तर भारत में क्रांति में शामिल होने का आव्हान करने के लिये, कमल का फूल और रोटी भेजी गई थी। यह सन्देश रानी अवन्ती को मिला। रानी ने जागीरदारों और मालगुजारों को एकत्रित करने के लिये अपने हाथ से लिखा कागज का पुर्ज़ा भिजवाया। संदेश यह था- “कि देश के लिये लड़ो या चूड़ियां पहनकर बैठ जाओ”।

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