RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers

Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 from the 2016 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.

Treat this question paper as a mock under gentle timing first, then as a marking exercise the second time. The introduction on this page is written only for this subject-and-year pair, not copied from other pages.

Bookmark the link if you coach juniors — the layout stays stable for search engines and classroom sharing.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2016
Subject Typewriting Hindi-SS-34-1-2016
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2016, and subject Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 question paper from 2016 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016

Scroll through the Previous Year Papers pages for Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 (2016).

RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2016 Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Typewriting Hindi-SS-34-1-2016 2016 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2016

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2016

हिन्दी टंकण लिपि

(TYPEWRITING HINDI)

समय : 1 घण्टा     पूर्णांक : 40

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
  2. प्रत्येक कागज के एक तरफ टंकण करें।
  3. प्रत्येक प्रश्न को नये पृष्ठ से आरम्भ करना है।
  4. प्रत्येक लाइन के बीच में द्विगुणित अवकाश (Double Spacing) देकर टंकण करना है।
  5. प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक सजावट के निर्धारित है।

SS--34-I-T. W. (Hindi) 429

निम्न अवतरण को टंकित कीजिए :

अंक

  • टंकण - 8
  • सजावट - 2
  • कुल - 20

“मन की शान्ति - सुख का अनुभव”

मन चंचल है। व्यक्ति को किसी विषय पर टिकने ही नहीं देता या फिर अनावश्यक ही भटकता रहता है। शुद्ध चिन्तन में प्रवेश नहीं करने देता। अत: मन में शान्ति की तलाश सबको रहती है। प्रत्येक के मन में युवावस्था में आगे बढ़ने की इच्छा होती रहती है और उम्र के उत्तरार्द्ध में एकमात्र शान्ति प्राप्त करने की ही इच्छा रहती है। जीवन के अंत में, जब व्यक्ति ईश्वर की ओर आमुख होना चाहता है, शान्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। अशान्त मन से यह सम्भव नहीं है।

शान्ति मन का विषय है। बुद्धि और इन्द्रियां सदा मन में चंचलता बनाए रखती है। इन्द्रिय सुख व्यक्ति को बाहरी विश्व में इतना लिप्त रखता है कि मन की ओर देख पाना अथवा मन की आवाज को सुन पाना उसके लिए लगभग असंभव होता है। इन्द्रियों के अनुभव ही मन पर अंकित रहते हैं और उन्हीं की कल्पना में मन लगा रहता है। मन में एक साथ अनेक विषयों का चलते रहना ही तो अशान्ति का कारण है। इन्द्रियों का सुख वर्तमान होता है।

SS-34-I-T.W. (Hindi) 429

प्रश्न पत्र – हिंदी (टाइपराइटिंग)

जब कि मन पर अंकित स्मृतियां अपना कार्य मन में करती रहती हैं। इन्हीं के आधार पर व्यक्ति अपने भविष्य की कल्पना करता है।

भारतीय दर्शन में योग का विशेष महत्व है। योग में चित्तवृत्तियों के निरोध को महत्वपूर्ण माना गया है, जबकि गीता ऐसा नहीं मानती। गीता में योग का स्वतंत्र अर्थ है। इसके अलावा शान्ति का दूसरा मार्ग व्यक्ति के सामने नहीं है। यहां तक कहा गया है कि सारी इन्द्रियों के निरोध के बाद यदि एक भी इन्द्रिय नियंत्रण के बाहर रह जाए तो भी व्यक्ति मशक के छेद की भांति बूंद-बूंद करके खाली हो जाएगा। अतः यह कार्य तो शत-प्रतिशत, पूर्ण रूप में ही सम्पादित होना आवश्यक है।

प्रश्न:

इन्द्रियों के निरोध के दो मार्ग प्रचलित हैं – एक 'शम' अथवा शमन का और दूसरा 'दम' या दमन का। शान्ति-प्राप्ति में साधक होता है और इसमें दमन हेतु बनता है। शमन मार्ग में इन्द्रिय दमन स्वतः होने लगता है। यद्यपि इसमें लम्बे अभ्यास की आवश्यकता अवश्य होती है। दूसरी ओर जीवन का लक्ष्य शान्ति प्राप्त करना नहीं है, अपितु आनन्द की प्राप्ति है। शान्ति स्वयं आनन्द स्वरूप है। आनन्द ईश्वरीय गुण है। इसमें दुःख और क्लेश का लेश भी नहीं है। यहाँ आनन्द भी समृध्यानन्द और शान्तानन्द नाम से दो विभागों में विभक्त हो रहा है।

व्याख्या: इस गद्यांश में इन्द्रिय निरोध के दो मार्गों – शमन और दमन – की चर्चा की गई है। शमन मार्ग में इन्द्रियों का दमन स्वाभाविक रूप से होता है, जबकि दमन में बलपूर्वक नियंत्रण किया जाता है। लेखक के अनुसार जीवन का अंतिम लक्ष्य शान्ति नहीं, बल्कि आनन्द की प्राप्ति है, जो ईश्वरीय गुण है और दुःख-क्लेश से रहित है। आनन्द को समृध्यानन्द और शान्तानन्द में विभाजित किया गया है।

प्रश्न-पत्र (हिंदी टाइपराइटिंग) - 2016

SS-34-I-T.W. (Hindi) 429

प्रश्न: 'ऋद्धि' शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए बताइए कि लौकिक और अलौकिक ऋद्धि में क्या अंतर है?

उत्तर: 'ऋद्धि' का अर्थ है - समृद्धि, ऐश्वर्य, वैभव। लौकिक ऋद्धि में खान-पान, मकान, वाहन आदि की उत्कृष्टता शामिल है, जो सामान्य मनुष्यों में पाई जाती है। अलौकिक ऋद्धि में सिद्धि भी जुड़ी होती है, जो केवल अवतार कोटि के पुरुषों (जैसे श्रीकृष्ण) में देखी जा सकती है।

प्रश्न: श्रीकृष्ण को 'अच्युत' क्यों कहा गया है?

उत्तर: श्रीकृष्ण को 'अच्युत' इसलिए कहा गया क्योंकि वे जीवन भर समृद्धि-आनंद में निरंतर लीन रहे और समृद्धि-आनंद की पूर्णता की रक्षा करते हुए उसे बराबर निभाते रहे। यह गुण केवल अवतार कोटि में ही संभव है।

प्रश्न: आनंद के कितने भेद हैं? उनके नाम लिखिए।

उत्तर: आनंद के दो भेद हैं - (1) शांतानंद और (2) समृद्धि-आनंद।

प्रश्न: शांतानंद और समृद्धि-आनंद में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: समृद्धि-आनंद में तरंगें उठती रहती हैं - यह कर्म क्षेत्र में धन-संपत्ति की वृद्धि करते रहने से उत्पन्न होता है। जब किसी को अचानक बड़ी संपत्ति मिलती है तो उसका समृद्धि-आनंद उछल पड़ता है। इसके विपरीत, शांतानंद में तरंगें नहीं उठतीं - यह समृद्धि की सारी चंचलता को हजम करने की स्थिति है। राम जीवन भर शांतानंद में रहे, चाहे वनवास हो या राज्यभार।

प्रश्न: समृद्धि-आनंद के उछाल को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: जब किसी व्यक्ति को अचानक बड़ी संपत्ति प्राप्त हो जाती है, तो उसका समृद्धि-आनंद उछल पड़ता है। इसके उदाहरण हैं - स्वजनों और परिजनों को आमंत्रित करना, दिव्य भोजन-पान की व्यवस्था करना, संगीत-गोष्ठियाँ आयोजित करना। शेष धन को व्यक्ति सुरक्षित रखकर शांत भाव में आ जाता है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित परिपत्र को यथोचित रूप से टंकित कीजिए:

अंक विभाजन

  • टंकण: 8 अंक
  • सजावट: 2 अंक
  • कुल: 10 अंक

उत्तर प्रदेश सरकार

वित्त - विभाग

(आय - व्ययक अनुभाग)

क्रमांक : a: 9() वित्त - (2).90. a. /205 लखनऊ, दिनांक 8 जून, 205

परिपत्र

प्रेषित :

  • समस्त शासन सचिव, उत्तर प्रदेश।
  • समस्त सम्भागीय आयुक्त, उत्तर प्रदेश।
  • समस्त विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश।
  • समस्त जिला कलेक्टर।

विषय : राजकीय व्यय में मित्तव्ययता रखने बाबत।

स्पष्टीकरण: यह परिपत्र उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी किया गया है, जिसमें सभी शासन सचिवों, आयुक्तों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को राजकीय व्यय में मितव्ययता (बचत) बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। टंकण में सजावट और सटीकता पर ध्यान देना आवश्यक है।

परिपत्र

महोदय,

राज्य में भयंकर अकाल एवं महामारी की स्थिति को देखते हुए शासन द्वारा राजकीय कार्य में किये जाने वाले व्यय में मित्तव्ययता करने तथा राजकीय कार्य में सादगी अपनाने के उद्देश्य से यह परिपत्र जारी किया जा रहा है। साथ ही महामारी को ध्यान में रखते हुए अपने कार्यालय, शहर, गांव, मोहल्लों में गन्दगी न हो इसका भी ध्यान आकृष्ट किया जाता है। निम्न निर्णय तुरन्त प्रभाव से अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेंगे -

  1. किसी भी विभाग में नई नियुक्ति से पूर्व वित्त विभाग एवं कार्मिक विभाग की सहमति की आवश्यकता होगी। बिना सहमति नियुक्ति पर प्रतिबन्ध रहेगा।
  2. समस्त विभागों में नये पदों के सृजन करने/क्रमोन्नयन करने पर प्रतिबन्ध रहेगा।
  3. वाहन, वातानुकूलित यंत्र, सैल्यूलर फोन की खरीद पर प्रतिबन्ध रहेगा।
  4. हवाई जहाज से यात्रा पर प्रतिबन्ध रहेगा।
  5. राजकीय भोज आयोजित करने पर प्रतिबन्ध रहेगा।
  6. समस्त विभागों में यात्रा व्यय में एक चौथाई कमी की जावेगी।

आज्ञा से
हस्ताक्षर
(मोहन आर.डी.)
वित्त सचिव,
वित्त विभाग

SS-34-I-T. W. (Hindi) - 429

प्रश्न 3

निम्नलिखित सारणी को यथोचित रूप देकर टंकित कीजिए :

दायित्व सम्पत्तियाँ
वास्तविक मूल्य (रुपये में) बाजार मूल्य (रुपये में) वास्तविक मूल्य (रुपये में) बाजार मूल्य (रुपये में)
देय बिल 4,000 8,000 भवन 7,000 3,000
लेनदार 10,000 10,000 फर्नीचर 7,000 5,000
पूँजी 20,000 20,000 देनदार 25,000 20,000
बैंक 10,000 10,000 बैंक 10,000 10,000
लाभ-हानि खाता 5,000
योग 59,000 48,000 योग 59,000 48,000

दिनांक: 30 जून, 2015

स्पष्टीकरण: यह सारणी एक स्थिति-विवरण (बैलेंस शीट) है जिसमें दायित्वों और सम्पत्तियों को वास्तविक मूल्य और बाजार मूल्य पर दर्शाया गया है। दोनों पक्षों का योग बराबर (59,000 रुपये वास्तविक मूल्य और 48,000 रुपये बाजार मूल्य) है।