RBSE Class 12th 2017 -SS-10-2017 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | -SS-10-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2017 -SS-10-2017
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Rajasthan Board Class 12th -SS-10-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2017
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2017
अर्थशास्त्र
ECONOMICS
समय : 3¼ घण्टे | पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड है, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 30 | SS-0-Econ. (Supp.) | No. of Printed Pages — 7
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खण्ड - अ / SECTION - A
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अर्थव्यवस्था की कोई दो केन्द्रीय समस्याएं लिखिए।
Write any Two central Problems of economy.उत्तर / Answer: अर्थव्यवस्था की दो केन्द्रीय समस्याएं निम्नलिखित हैं:
- क्या उत्पादन किया जाए? (What to produce?)
- कैसे उत्पादन किया जाए? (How to produce?)
(अन्य स्वीकार्य: किसके लिए उत्पादन किया जाए? / For whom to produce?)
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उत्पादन के कारक का अर्थ लिखिए।
Write the meaning of factors of Production.उत्तर / Answer: उत्पादन के कारक वे साधन हैं जिनका उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में किया जाता है। ये चार प्रमुख कारक हैं: भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यमशीलता।
-
कीन्स की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम लिखिए।
Write the name of Famous book of Keynes.उत्तर / Answer: कीन्स की प्रसिद्ध पुस्तक का नाम "द जनरल थ्योरी ऑफ एम्प्लॉयमेंट, इंटरेस्ट एंड मनी" (The General Theory of Employment, Interest and Money) है, जो 1936 में प्रकाशित हुई थी।
— पृष्ठ 2 का अंत —
4) अनधिमान मानचित्र से क्या अभिप्राय है? / What is meant by Indifference map.
अनधिमान मानचित्र: विभिन्न अनधिमान वक्रों के समूह को अनधिमान मानचित्र कहते हैं। यह उपभोक्ता की विभिन्न संतुष्टि स्तरों को दर्शाता है। प्रत्येक वक्र वस्तुओं के उन संयोजनों को दर्शाता है जो उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्रदान करते हैं।
Indifference Map: A set of indifference curves is called an indifference map. It shows different levels of satisfaction of a consumer. Each curve represents combinations of goods that give the consumer equal satisfaction.
5) मांग फलन को परिभाषित कीजिए। / Define the Demand function.
मांग फलन: मांग फलन किसी वस्तु की मांग और उसे प्रभावित करने वाले कारकों (जैसे कीमत, आय, स्वाद आदि) के बीच गणितीय संबंध को दर्शाता है। इसे Dx = f(Px, Y, T, Pr, ...) के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ Dx वस्तु x की मांग, Px उसकी कीमत, Y उपभोक्ता की आय, T स्वाद और Pr संबंधित वस्तुओं की कीमत है।
Demand Function: The demand function shows the mathematical relationship between the demand for a commodity and the factors affecting it (such as price, income, taste, etc.). It is expressed as Dx = f(Px, Y, T, Pr, ...), where Dx is demand for good x, Px is its price, Y is consumer's income, T is taste, and Pr is price of related goods.
6) वस्तु विनिमय किसे कहते हैं? / What is barter exchange.
वस्तु विनिमय: वस्तु विनिमय वह प्रणाली है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान सीधे अन्य वस्तुओं और सेवाओं के बदले किया जाता है, बिना मुद्रा के माध्यम के। उदाहरण: एक किसान अपने गेहूं के बदले कपड़ा प्राप्त करता है।
Barter Exchange: Barter exchange is a system where goods and services are directly exchanged for other goods and services without using money as a medium. Example: A farmer gets cloth in exchange for his wheat.
7) उत्पाद गुणक को परिभाषित कीजिए। / Define output multiplier.
उत्पाद गुणक: उत्पाद गुणक वह अनुपात है जो निवेश में परिवर्तन के कारण उत्पादन (या आय) में होने वाले परिवर्तन को मापता है। इसे K = ΔY / ΔI के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ K गुणक, ΔY उत्पादन में परिवर्तन और ΔI निवेश में परिवर्तन है।
Output Multiplier: The output multiplier is the ratio that measures the change in output (or income) resulting from a change in investment. It is expressed as K = ΔY / ΔI, where K is the multiplier, ΔY is change in output, and ΔI is change in investment.
8) अदायगी संतुलन के खातों का उल्लेख कीजिए। / Mention two accounts of balance of Payment.
अदायगी संतुलन के दो प्रमुख खाते:
- चालू खाता (Current Account): इसमें वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात-आयात, एकतरफा हस्तांतरण (जैसे प्रेषण) और आय भुगतान शामिल होते हैं।
- पूंजी खाता (Capital Account): इसमें पूंजी प्रवाह जैसे विदेशी निवेश, ऋण, और विदेशी मुद्रा भंडार में परिवर्तन शामिल होते हैं।
Two accounts of Balance of Payment:
- Current Account: It includes exports and imports of goods and services, unilateral transfers (like remittances), and income payments.
- Capital Account: It includes capital flows such as foreign investment, loans, and changes in foreign exchange reserves.
9) मुद्रा गुणक से आप क्या समझते हैं? / What do you mean by money multiplier.
मुद्रा गुणक: मुद्रा गुणक वह अनुपात है जो दर्शाता है कि आरक्षित मुद्रा (उच्च शक्ति मुद्रा) में वृद्धि से मुद्रा आपूर्ति में कितनी वृद्धि होती है। इसे m = M / H के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ m मुद्रा गुणक, M मुद्रा आपूर्ति और H आरक्षित मुद्रा है। यह बैंकिंग प्रणाली द्वारा साख सृजन की क्षमता को दर्शाता है।
Money Multiplier: The money multiplier is the ratio that shows how much the money supply increases due to an increase in reserve money (high-powered money). It is expressed as m = M / H, where m is the money multiplier, M is money supply, and H is reserve money. It reflects the credit creation capacity of the banking system.
10) आर्थिक चरों के प्रत्याशित माप को स्पष्ट कीजिए। / Clarify exante measure of economic variables.
प्रत्याशित माप (Ex-ante Measure): प्रत्याशित माप से तात्पर्य आर्थिक चरों (जैसे निवेश, बचत, मांग) के नियोजित या इच्छित स्तर से है, जो किसी अवधि की शुरुआत में होता है। यह वास्तविक (ex-post) माप से भिन्न होता है जो अवधि के अंत में वास्तविक रूप से घटित होता है। उदाहरण: प्रत्याशित निवेश वह निवेश है जो फर्में एक वर्ष की शुरुआत में करने की योजना बनाती हैं, जबकि वास्तविक निवेश वह है जो वर्ष के अंत में हुआ।
Ex-ante Measure: Ex-ante measure refers to the planned or intended level of economic variables (such as investment, savings, demand) at the beginning of a period. It differs from the actual (ex-post) measure which occurs at the end of the period. Example: Ex-ante investment is the investment that firms plan to make at the start of a year, while actual investment is what happens at the end of the year.
खण्ड - ब / SECTION - B
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सूक्ष्म एवं समष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ बताइए ।
Mention the meaning of micro and macro economics.
सूक्ष्म अर्थशास्त्र (Micro Economics): यह अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों जैसे उपभोक्ता, फर्म, उद्योग आदि के आर्थिक व्यवहार का अध्ययन करती है। इसमें व्यक्तिगत मांग, व्यक्तिगत पूर्ति, कीमत निर्धारण आदि का विश्लेषण किया जाता है।
समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics): यह अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो संपूर्ण अर्थव्यवस्था के समग्र आर्थिक व्यवहार का अध्ययन करती है। इसमें राष्ट्रीय आय, कुल रोजगार, सामान्य कीमत स्तर, कुल मांग, कुल पूर्ति आदि का विश्लेषण किया जाता है।
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बजट रेखा क्या है? चित्र की सहायता से समझाइए ।
What is budget line? Explain with help of Diagram.
बजट रेखा (Budget Line): बजट रेखा उन सभी संभावित संयोजनों को दर्शाती है जिन्हें उपभोक्ता अपनी दी गई आय और वस्तुओं की कीमतों पर खरीद सकता है। यह एक सीधी रेखा होती है जो उपभोक्ता के बजट सेट की सीमा को दर्शाती है।
चित्र द्वारा स्पष्टीकरण:
मान लीजिए एक उपभोक्ता के पास ₹100 की आय है और वह दो वस्तुएँ X और Y खरीदता है। वस्तु X की कीमत ₹10 प्रति इकाई और वस्तु Y की कीमत ₹5 प्रति इकाई है।
- यदि उपभोक्ता अपनी सारी आय वस्तु X पर खर्च करे, तो वह 10 इकाइयाँ (100/10) खरीद सकता है। यह बिंदु A (10,0) होगा।
- यदि उपभोक्ता अपनी सारी आय वस्तु Y पर खर्च करे, तो वह 20 इकाइयाँ (100/5) खरीद सकता है। यह बिंदु B (0,20) होगा।
- बिंदु A और B को मिलाने वाली सीधी रेखा बजट रेखा कहलाती है।
बजट रेखा का समीकरण: Px × X + Py × Y = M, जहाँ Px और Py क्रमशः वस्तु X और Y की कीमतें हैं, और M उपभोक्ता की आय है।
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सामान्य एवं निम्नस्तरीय वस्तुओं को समझाइए ।
Explain the normal and Inferior goods.
सामान्य वस्तुएँ (Normal Goods): वे वस्तुएँ जिनकी मांग उपभोक्ता की आय बढ़ने पर बढ़ती है और आय घटने पर घटती है, सामान्य वस्तुएँ कहलाती हैं। इनकी मांग की आय लोच धनात्मक होती है। उदाहरण: कपड़े, फर्नीचर, कार आदि।
निम्नस्तरीय वस्तुएँ (Inferior Goods): वे वस्तुएँ जिनकी मांग उपभोक्ता की आय बढ़ने पर घटती है और आय घटने पर बढ़ती है, निम्नस्तरीय वस्तुएँ कहलाती हैं। इनकी मांग की आय लोच ऋणात्मक होती है। उदाहरण: मोटा अनाज, सस्ती वस्तुएँ आदि।
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राशन के साथ वस्तु की उच्चतम कीमत के उपभोक्ताओं पर दो प्रतिकूल प्रभाव बताइए ।
Mention two adverse effects on consumers by price ceiling accompanied with rationing of the goods.
राशन के साथ वस्तु की उच्चतम कीमत (Price Ceiling) के उपभोक्ताओं पर दो प्रतिकूल प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- कालाबाजारी (Black Marketing): उच्चतम कीमत निर्धारण के कारण वस्तु की मांग अधिक होती है जबकि पूर्ति कम होती है। इस स्थिति में विक्रेता वस्तु को कालाबाजारी में ऊँची कीमत पर बेचते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
- वस्तु की गुणवत्ता में गिरावट (Deterioration in Quality): उच्चतम कीमत निर्धारण के कारण उत्पादकों को कम लाभ होता है, जिससे वे वस्तु की गुणवत्ता कम कर देते हैं या नकली वस्तुएँ बेचते हैं। इससे उपभोक्ताओं को घटिया गुणवत्ता की वस्तुएँ खरीदनी पड़ती हैं।
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कोई फर्म प्रतिवर्ष 500 रूपये मूल्य का उत्पादन करती है उस वर्ष 100 रूपये का मध्यवर्ती वस्तु का उपयोग किया जाता है फर्म के सकल मूल्यवर्धित की गणना कीजिए ।
A firm produce Rs. 500 worth of goods per year. Rs. 100 is the value of Intermediate goods used by it during the year. Calculate the gross value added of the firm.
सकल मूल्यवर्धित (Gross Value Added) की गणना:
सकल मूल्यवर्धित = उत्पादन का मूल्य - मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य
दिया गया है:
- उत्पादन का मूल्य = ₹500
- मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य = ₹100
सकल मूल्यवर्धित = ₹500 - ₹100 = ₹400
अतः फर्म का सकल मूल्यवर्धित ₹400 है।
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मांग जमा तथा आवधिक जमा को समझाइए ।
Explain demand deposit and fixed deposit.
मांग जमा (Demand Deposit): यह वह जमा है जिसे जमाकर्ता बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी समय बैंक से निकाल सकता है। इसे चालू खाता या बचत खाता भी कहा जाता है। इस पर ब्याज दर कम होती है या नहीं भी होती है। जमाकर्ता चेक या डेबिट कार्ड के माध्यम से इस राशि का उपयोग कर सकता है।
आवधिक जमा (Fixed Deposit): यह वह जमा है जिसे एक निश्चित अवधि के लिए बैंक में जमा किया जाता है। इस अवधि के दौरान जमाकर्ता बिना दंड के राशि नहीं निकाल सकता। इस पर ब्याज दर मांग जमा की तुलना में अधिक होती है। अवधि पूरी होने पर जमाकर्ता को मूलधन और ब्याज प्राप्त होता है।
7) आरक्षित नकद अनुपात तथा सांविधिक तरलता अनुपात को स्पष्ट कीजिए | [1+1=2]
Explain cash reserve ratio and statutory liquidity ratio.
आरक्षित नकद अनुपात (CRR): यह वह अनुपात है जिसे बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत केंद्रीय बैंक (RBI) के पास नकद के रूप में रखना होता है। इसका उद्देश्य बैंकों की तरलता को नियंत्रित करना और मुद्रा आपूर्ति को प्रबंधित करना है।
सांविधिक तरलता अनुपात (SLR): यह वह अनुपात है जिसे बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत सरकारी प्रतिभूतियों, सोना या अन्य स्वीकृत परिसंपत्तियों के रूप में रखना होता है। इसका उद्देश्य बैंकों की सॉल्वेंसी सुनिश्चित करना और सरकार को उधार देने में मदद करना है।
8) सरकारी बजट के दो प्रकार बताइए | [1+1=2]
Explain two types of Government budget.
सरकारी बजट के दो प्रकार निम्नलिखित हैं:
- संतुलित बजट (Balanced Budget): जब सरकार का कुल अनुमानित व्यय कुल अनुमानित आय के बराबर होता है।
- असंतुलित बजट (Unbalanced Budget): जब सरकार का कुल अनुमानित व्यय कुल अनुमानित आय से अधिक (घाटे का बजट) या कम (अधिशेष बजट) होता है।
खण्ड - स / SECTION - C
9) मांग वक्र की दिशा में गति और मांग वक्र में शिफ्ट को रेखाचित्र द्वारा समझाइए | [2+2=4]
Explain movement along the demand curve and shift of the demand curve with diagram.
मांग वक्र की दिशा में गति (Movement along the demand curve): यह तब होता है जब वस्तु की कीमत में परिवर्तन के कारण मांग की मात्रा में परिवर्तन होता है, जबकि अन्य कारक स्थिर रहते हैं। इसे मांग वक्र पर एक बिंदु से दूसरे बिंदु पर जाने के रूप में दर्शाया जाता है।
मांग वक्र में शिफ्ट (Shift of the demand curve): यह तब होता है जब कीमत के अलावा अन्य कारकों (जैसे उपभोक्ता की आय, स्वाद, संबंधित वस्तुओं की कीमत) में परिवर्तन के कारण प्रत्येक कीमत पर मांग की मात्रा में परिवर्तन होता है। इसे मांग वक्र के दाएं (वृद्धि) या बाएं (कमी) स्थानांतरित होने के रूप में दर्शाया जाता है।
(रेखाचित्र में: मांग वक्र पर बिंदु A से B तक गति = मांग की मात्रा में परिवर्तन; मांग वक्र D1 से D2 तक शिफ्ट = मांग में परिवर्तन)
20) फर्म के पूर्ति वक्र को प्रभावित करने वाले दो कारकों को समझाइए | [2+2=4]
Explain any two factors which affect the firm's supply curve.
फर्म के पूर्ति वक्र को प्रभावित करने वाले दो कारक निम्नलिखित हैं:
- उत्पादन की लागत (Cost of Production): यदि उत्पादन की लागत (जैसे कच्चे माल, मजदूरी) बढ़ती है, तो फर्म कम मात्रा में पूर्ति करेगी, जिससे पूर्ति वक्र बाईं ओर शिफ्ट होता है। लागत घटने पर पूर्ति वक्र दाईं ओर शिफ्ट होता है।
- तकनीकी परिवर्तन (Technological Change): बेहतर तकनीक से उत्पादन लागत कम होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है, जिससे पूर्ति वक्र दाईं ओर शिफ्ट होता है। पुरानी तकनीक से विपरीत प्रभाव पड़ता है।
21) सामान्य लाभ एवं अधिसामान्य लाभ को समझाइए | [2+2=4]
Explain normal profit and super normal profit.
सामान्य लाभ (Normal Profit): यह वह न्यूनतम लाभ है जो एक फर्म को उद्योग में बने रहने के लिए आवश्यक होता है। यह उद्यमी की अवसर लागत का भाग है और इसे लागत में शामिल किया जाता है। जब कुल राजस्व = कुल लागत (सामान्य लाभ सहित) होता है, तो फर्म को सामान्य लाभ प्राप्त होता है।
अधिसामान्य लाभ (Super Normal Profit): यह सामान्य लाभ से अधिक लाभ है। यह तब होता है जब कुल राजस्व कुल लागत (सामान्य लाभ सहित) से अधिक होता है। यह अल्पकाल में एकाधिकार या पूर्ण प्रतिस्पर्धा में हो सकता है, लेकिन दीर्घकाल में पूर्ण प्रतिस्पर्धा में यह शून्य हो जाता है।
22) एकाधिकारी फर्म को बाजार मांग वक्र का सामना करना पड़ता है, रेखाचित्र द्वारा समझाइए | [2+2=4]
The monopoly firm faces the market demand curve, explain it with diagram.
एकाधिकारी फर्म (Monopoly Firm) बाजार में एकमात्र विक्रेता होती है, इसलिए उसे पूरे बाजार की मांग वक्र का सामना करना पड़ता है। इसका अर्थ है कि फर्म का मांग वक्र बाजार मांग वक्र के समान होता है, जो नीचे की ओर ढलान वाला (Downward Sloping) होता है।
इसका तात्पर्य है कि एकाधिकारी फर्म अधिक मात्रा बेचने के लिए कीमत कम करनी पड़ती है, और कम मात्रा बेचने पर कीमत अधिक रख सकती है। फर्म की सीमांत आय (MR) वक्र मांग वक्र (AR) से नीचे होती है।
(रेखाचित्र में: एक नीचे की ओर ढलान वाली मांग वक्र D = AR, और उसके नीचे MR वक्र दर्शाया जाता है।)
23) उपभोग तथा पूंजीगत वस्तुओं में विभेद कीजिए | [2+2=4]
Distinguish between consumption goods and capital goods.
उपभोग वस्तुएँ (Consumption Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग उपभोक्ता अपनी आवश्यकताओं की सीधी संतुष्टि के लिए करते हैं, जैसे भोजन, वस्त्र, और आवास। ये अंतिम उपयोग के लिए होती हैं और इनका पुन: उत्पादन में उपयोग नहीं होता।
पूंजीगत वस्तुएँ (Capital Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं के उत्पादन में किया जाता है, जैसे मशीनरी, उपकरण, और कारखाने। ये उत्पादन प्रक्रिया में सहायक होती हैं और इनका उपयोग बार-बार किया जा सकता है।
मुख्य अंतर: उपभोग वस्तुएँ सीधे उपभोग के लिए होती हैं, जबकि पूंजीगत वस्तुएँ उत्पादन के साधन के रूप में काम आती हैं।
24) तरलता पाश को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए | [2+2+<- 4]
Explain the liquidity trap with help of diagram.
तरलता पाश (Liquidity Trap): यह एक ऐसी स्थिति है जब ब्याज दर बहुत कम हो जाती है और लोग ब्याज दर में और कमी की उम्मीद नहीं करते, जिससे वे नकदी (तरलता) को रखना पसंद करते हैं, भले ही मुद्रा आपूर्ति बढ़ाई जाए। इस स्थिति में मौद्रिक नीति अप्रभावी हो जाती है।
रेखाचित्र (Diagram): एक ग्राफ में X-अक्ष पर मुद्रा की मांग और Y-अक्ष पर ब्याज दर दिखाई जाती है। तरलता पाश में मुद्रा मांग वक्र (L) ब्याज दर के बहुत कम स्तर पर क्षैतिज हो जाता है, जिससे मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि का ब्याज दर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
25) स्थिर कीमत मॉडल में संतुलन निर्गत और समस्त मांग को चित्र द्वारा समझाइए | [2+2=4]
Explain equilibrium output and aggregate demand in the fixed price model with diagram.
स्थिर कीमत मॉडल (Fixed Price Model): इस मॉडल में कीमतें स्थिर मानी जाती हैं, और संतुलन निर्गत (Equilibrium Output) वह स्तर है जहाँ समस्त मांग (Aggregate Demand) समस्त पूर्ति (Aggregate Supply) के बराबर होती है। समस्त मांग में उपभोग (C), निवेश (I), और सरकारी व्यय (G) शामिल होते हैं।
चित्र (Diagram): एक ग्राफ में X-अक्ष पर निर्गत (Y) और Y-अक्ष पर समस्त मांग (AD) दिखाई जाती है। 45° रेखा समस्त पूर्ति को दर्शाती है। AD वक्र ऊपर की ओर झुका होता है। संतुलन वह बिंदु है जहाँ AD वक्र 45° रेखा को काटता है।
26) सार्वजनिक वस्तुओं एवं निजी वस्तुओं में विभेद कीजिए | [2+2=4]
Distinguish between public goods and private goods.
सार्वजनिक वस्तुएँ (Public Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जो गैर-प्रतिद्वंद्वी (non-rival) और गैर-बहिष्करणीय (non-excludable) होती हैं, जैसे राष्ट्रीय रक्षा, सड़क प्रकाश। एक व्यक्ति के उपभोग से दूसरे के उपभोग में कमी नहीं आती और किसी को उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता।
निजी वस्तुएँ (Private Goods): ये प्रतिद्वंद्वी (rival) और बहिष्करणीय (excludable) होती हैं, जैसे भोजन, कपड़े। एक व्यक्ति के उपभोग से दूसरे के लिए उपलब्धता कम हो जाती है और इन्हें केवल भुगतान करने वालों तक सीमित किया जा सकता है।
27) खुली अर्थव्यवस्था क्या है? “विश्व की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के सम्पर्क में आने से प्राय: हमारे चयन का विस्तार हुआ” इस कथन के पक्ष में कोई तीन विचार लिखिए | [1+3=4]
What is open economy? "Interaction with other economies of world widens our choice" write any three views in favour of the statement.
खुली अर्थव्यवस्था (Open Economy): यह एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जो अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और श्रम का आदान-प्रदान करती है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय प्रवाह शामिल होते हैं।
तीन विचार (Three Views):
- वस्तुओं और सेवाओं की विविधता: विभिन्न देशों से आयात से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं, जैसे विदेशी फल, इलेक्ट्रॉनिक्स, जो घरेलू बाजार में उपलब्ध नहीं होते।
- प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता: अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से घरेलू उत्पादकों को गुणवत्ता सुधारने और कीमतें कम करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होता है।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार: विदेशी निवेश और ज्ञान के आदान-प्रदान से नई तकनीकें और उत्पादन विधियाँ उपलब्ध होती हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और विकल्पों का विस्तार होता है।
खण्ड - द (SECTION - D)
28) औसत उत्पाद तथा सीमान्त उत्पाद को रेखाचित्रों की सहायता से समझाइए | [3+3+<-6]
Explain average product and marginal product with help of diagram.
औसत उत्पाद (Average Product - AP): यह कुल उत्पाद (Total Product) को उपयोग किए गए परिवर्तनशील साधन (जैसे श्रम) की इकाइयों से विभाजित करने पर प्राप्त होता है। AP = TP / L, जहाँ L श्रम की इकाइयाँ हैं।
सीमान्त उत्पाद (Marginal Product - MP): यह परिवर्तनशील साधन की एक अतिरिक्त इकाई के उपयोग से कुल उत्पाद में होने वाला परिवर्तन है। MP = ΔTP / ΔL.
रेखाचित्र (Diagram): एक ग्राफ में X-अक्ष पर श्रम (L) और Y-अक्ष पर उत्पाद दिखाया जाता है। TP वक्र पहले बढ़ता है, फिर घटता है। AP और MP वक्र घंटी के आकार के होते हैं; MP पहले बढ़ता है, फिर घटता है और AP को अधिकतम बिंदु पर काटता है।
अथवा (OR)
दीर्घकालीन लागत वक्रों को रेखाचित्रों द्वारा समझाइए | [3+3+<-6]
Explain longrun cost curves with help of diagram.
दीर्घकालीन लागत वक्र (Longrun Cost Curves): दीर्घकाल में सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं। दीर्घकालीन औसत लागत वक्र (LAC) और दीर्घकालीन सीमांत लागत वक्र (LMC) U-आकार के होते हैं। LAC वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्रों (SAC) का आवरण वक्र (envelope curve) होता है, जो प्रत्येक निर्गत स्तर पर न्यूनतम लागत दर्शाता है।
रेखाचित्र (Diagram): एक ग्राफ में X-अक्ष पर निर्गत (Q) और Y-अक्ष पर लागत दिखाई जाती है। कई SAC वक्र (SAC1, SAC2, SAC3, ...) बनाए जाते हैं, और LAC वक्र इन्हें स्पर्श करता हुआ नीचे से गुजरता है। LMC वक्र LAC वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।
29) एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा क्या है? ऐसे बाजार संरचना का विस्तार से वर्णन कीजिए। [2+4=6]
What is monopolistic competition? Describe such a market structure in detail.
परिभाषा (Definition): एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा एक ऐसी बाजार संरचना है जिसमें अनेक विक्रेता (फर्म) विभेदित उत्पाद बेचते हैं। यह पूर्ण प्रतिस्पर्धा और एकाधिकार के बीच की संरचना है।
विस्तृत विवरण (Detailed Description):
- अनेक विक्रेता (Many Sellers): बाजार में बड़ी संख्या में फर्में होती हैं, प्रत्येक का बाजार हिस्सा छोटा होता है।
- उत्पाद विभेदीकरण (Product Differentiation): फर्में समान लेकिन समरूप नहीं उत्पाद बेचती हैं। विभेदीकरण गुणवत्ता, ब्रांड, डिज़ाइन, पैकेजिंग या सेवा पर आधारित हो सकता है।
- प्रवेश और निकास की स्वतंत्रता (Free Entry and Exit): लंबे समय में नई फर्में बाजार में प्रवेश कर सकती हैं या मौजूदा फर्में बाहर निकल सकती हैं।
- गैर-मूल्य प्रतिस्पर्धा (Non-Price Competition): फर्में विज्ञापन, ब्रांडिंग और उत्पाद विभेदीकरण के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करती हैं, न कि केवल कीमत के आधार पर।
- अल्पकाल में लाभ (Short-run Profit): अल्पकाल में फर्में सामान्य से अधिक लाभ कमा सकती हैं।
- दीर्घकाल में सामान्य लाभ (Long-run Normal Profit): प्रवेश की स्वतंत्रता के कारण दीर्घकाल में फर्में केवल सामान्य लाभ कमाती हैं।
अथवा (OR)
फर्मों की स्थिर संख्या की स्थिति में बाजार संतुलन का रेखाचित्र द्वारा वर्णन कीजिए। [2+4=6]
Describe market equilibrium in situation of fixed number of firms with diagram.
व्याख्या (Explanation): जब फर्मों की संख्या स्थिर (fixed) होती है, तो बाजार संतुलन वहाँ स्थापित होता है जहाँ बाजार की कुल मांग और कुल पूर्ति बराबर होती है। चूँकि फर्मों की संख्या नहीं बदल सकती, यह अल्पकालिक संतुलन की स्थिति है।
रेखाचित्र (Diagram):
[यहाँ एक रेखाचित्र होगा जिसमें X-अक्ष पर मात्रा (Quantity) और Y-अक्ष पर कीमत (Price) दर्शाई गई है। बाजार मांग वक्र (Market Demand Curve) नीचे की ओर झुका हुआ है, और बाजार पूर्ति वक्र (Market Supply Curve) ऊपर की ओर झुका हुआ है। दोनों वक्र एक बिंदु E पर प्रतिच्छेद करते हैं, जो संतुलन बिंदु है। इस बिंदु पर संतुलन कीमत P* और संतुलन मात्रा Q* निर्धारित होती है।]
वर्णन (Description): फर्मों की स्थिर संख्या के कारण, पूर्ति वक्र अल्पकालिक होता है। संतुलन बिंदु E पर, उपभोक्ताओं द्वारा मांगी गई मात्रा और फर्मों द्वारा आपूर्ति की गई मात्रा बराबर होती है। यदि कीमत P* से अधिक होती है, तो अतिरिक्त पूर्ति होगी, जिससे कीमत गिरकर P* पर आ जाएगी। यदि कीमत P* से कम होती है, तो अतिरिक्त मांग होगी, जिससे कीमत बढ़कर P* पर आ जाएगी।
30) एक सरल अर्थव्यवस्था में आय के चक्रीय प्रवाह को रेखाचित्र द्वारा समझाइए। [2+4=6]
Explain circular flow of Income in a simple economy with diagram.
परिभाषा (Definition): आय का चक्रीय प्रवाह एक मॉडल है जो दर्शाता है कि एक सरल अर्थव्यवस्था में परिवारों और फर्मों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और धन का आदान-प्रदान कैसे होता है।
रेखाचित्र (Diagram):
[यहाँ एक रेखाचित्र होगा जिसमें दो क्षेत्र दर्शाए गए हैं: परिवार (Households) और फर्म (Firms)। एक चक्र में, परिवार फर्मों को उत्पादन के साधन (श्रम, भूमि, पूंजी) प्रदान करते हैं, और बदले में फर्म परिवारों को आय (मजदूरी, किराया, ब्याज, लाभ) का भुगतान करती हैं। दूसरे चक्र में, परिवार फर्मों से वस्तुएं और सेवाएं खरीदते हैं, और फर्म परिवारों से भुगतान प्राप्त करती हैं। यह एक सतत चक्र बनाता है।]
व्याख्या (Explanation): एक सरल दो-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में, परिवार उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं और फर्मों को ये साधन प्रदान करते हैं। इसके बदले, फर्म परिवारों को आय (मजदूरी, किराया, ब्याज, लाभ) का भुगतान करती हैं। परिवार इस आय का उपयोग फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने में करते हैं। इस प्रकार, वस्तुओं और सेवाओं का प्रवाह एक दिशा में होता है, जबकि धन का प्रवाह विपरीत दिशा में होता है, जो एक सतत चक्र बनाता है।
अथवा (OR)
राष्ट्रीय आय गणना की तीन विधियों को संक्षेप में समझाइए। [2+2+2=6]
Explain briefly the three methods for calculation of national Income.
राष्ट्रीय आय की गणना की तीन मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:
- उत्पादन विधि (Product Method / Value Added Method): इस विधि में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को जोड़ा जाता है। इसमें मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को हटाकर केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य शामिल किया जाता है। इसे मूल्य वर्धित विधि भी कहते हैं।
- आय विधि (Income Method): इस विधि में उत्पादन के सभी साधनों (श्रम, भूमि, पूंजी, उद्यम) को प्राप्त होने वाली आय को जोड़ा जाता है। इसमें मजदूरी, किराया, ब्याज, लाभ और मिश्रित आय शामिल होती है।
- व्यय विधि (Expenditure Method): इस विधि में अर्थव्यवस्था में सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए कुल व्यय को जोड़ा जाता है। इसमें निजी उपभोग व्यय, सरकारी उपभोग व्यय, सकल निवेश और शुद्ध निर्यात शामिल होते हैं।
तीनों विधियों से प्राप्त राष्ट्रीय आय का मान समान होता है, क्योंकि ये एक ही आर्थिक गतिविधि के विभिन्न पहलुओं को मापती हैं।