RBSE Class 12th 2017 -SS-13-2017 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | -SS-13-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2017 -SS-13-2017
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Rajasthan Board Class 12th -SS-13-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2017
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2017
इतिहास / HISTORY
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 30 SS-3-Hist. (Supp.)
No. of Printed Pages — 07 + India Outline Map
SS-13-Hist. [ Turn Over ]
General Instructions (Continued)
5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी संस्करण में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
6) खण्ड, प्रश्न संख्या, अंक एवं प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शब्द सीमा:
| खण्ड (Section) | प्रश्न संख्या (Q. Nos.) | अंक प्रति प्रश्न (Marks per question) | उत्तर की शब्द सीमा (Word limit of answer) |
|---|---|---|---|
| A | 1 - 1 | 1 | 10 शब्द (10 words) |
| B | 2 - 8 | 2 | 20 शब्द (20 words) |
| C | 9 - 26 | 4 | 60 शब्द (60 words) |
| D | 27 - 29 | 6 | 200 शब्द (200 words) |
7) प्रश्न क्रमांक 30 का उत्तर भारत के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए। यह 5 अंक का है।
Mark the answer of Question No. 30 in the outline map of India. It carries 5 marks.
8) प्रश्न क्रमांक 27, 28 एवं 29 में आंतरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 27, 28 and 29.
SS_3-Hist.
खण्ड - अ (SECTION - A)
-
मौर्य साम्राज्य के संस्थापक कौन थे?
Who was founder of the Maurya empire?
उत्तर: चन्द्रगुप्त मौर्य।
Answer: Chandragupta Maurya.
-
गोत्र प्रणाली के दो नियमों का उल्लेख कीजिए।
Write down the two rules of Gotra system.
उत्तर:
- एक ही गोत्र के सदस्यों के बीच विवाह वर्जित था (गोत्र बहिर्विवाह)।
- गोत्र पितृवंशीय होता था, अर्थात् बच्चे अपने पिता का गोत्र धारण करते थे।
Answer:
- Marriage was prohibited between members of the same gotra (gotra exogamy).
- Gotra was patrilineal, meaning children inherited their father's gotra.
-
किसके आग्रह पर महात्मा बुद्ध ने महिलाओं के संघ में आने की अनुमति प्रदान की?
Who persuaded Mahatma Buddha to allow women into the Sangha?
उत्तर: आनंद (बुद्ध के प्रिय शिष्य) के आग्रह पर।
Answer: Ananda (Buddha's beloved disciple).
-
जैन धर्म का वह सिद्धान्त लिखिए जिसने संपूर्ण भारतीय चिंतन परम्परा को प्रभावित किया।
Write the most important principle of Jainism that impacts on whole Indian thinking.
उत्तर: अहिंसा (अहिंसा परमो धर्मः) का सिद्धान्त।
Answer: The principle of Ahimsa (non-violence).
-
बुद्ध के अनुसार निर्वाण का क्या अर्थ है?
What is the meaning of "nibbana" according to Mahatma Buddha?
उत्तर: निर्वाण का अर्थ है तृष्णा, द्वेष और अज्ञान का पूर्ण क्षय तथा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति।
Answer: Nibbana means the complete extinction of craving, hatred, and ignorance, leading to liberation from the cycle of birth and death.
-
इब्नबतूता का यात्रा वृतांत किस नाम से जाना जाता है?
The Ibn Battuta's Journey known as?
उत्तर: रिहला (Rihla) या "मेरी यात्राएँ" (The Travels of Ibn Battuta)।
Answer: Rihla (or "The Travels of Ibn Battuta").
-
किस विदेशी यात्री ने मुगलकालीन शहरों को "शिविर नगर" कहा है?
Which traveller described Mughal cities as "camp towns"?
उत्तर: फ्रांसीसी यात्री फ्रांस्वा बर्नियर (François Bernier) ने।
Answer: The French traveller François Bernier.
8) विजयनगर साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक कौन था?
Who was the greatest ruler of the Vijayanagar emperors?
- कृष्णदेवराय (Krishnadevaraya)
Explanation: कृष्णदेवराय विजयनगर साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली शासक थे, जिन्होंने 1509-1529 ई. तक शासन किया और साम्राज्य को अपने चरम पर पहुँचाया।
9) विजयनगर काल में घोड़ों के व्यापारियों के स्थानीय समूह को क्या कहा जाता था?
In Vijayanagar local communities of horse merchants known as?
- कुदिरै चेट्टियार (Kudirai Chettiyar)
Explanation: विजयनगर साम्राज्य में घोड़ों के व्यापारियों के स्थानीय समूह को 'कुदिरै चेट्टियार' कहा जाता था, जो मुख्यतः अरब और फारस से घोड़े लाते थे।
0) अकबर ने गुजरात विजय की याद में कौनसी इमारत बनवाई?
Which monument was built by Akbar in the memory of Gujarat Victory?
- बुलंद दरवाजा (Buland Darwaza)
Explanation: अकबर ने 1573 ई. में गुजरात विजय की स्मृति में फतेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा का निर्माण करवाया था।
l) “फोर्ट विलियम” कहाँ स्थित है?
Where is the Fort William situated?
- कोलकाता (Kolkata)
Explanation: फोर्ट विलियम पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित है।
खण्ड - ब (SECTION - B)
2) हड़प्पा सभ्यता के पतन के कोई दो कारण बताइए।
Mention any two factors responsible for the decline of Harappan civilization.
- बाढ़ और जलवायु परिवर्तन: सिंधु नदी में बार-बार आई बाढ़ और जलवायु में सूखे की स्थिति ने कृषि और जीवन को प्रभावित किया।
- व्यापार का पतन: मेसोपोटामिया जैसे क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंधों में गिरावट आई, जिससे आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ।
3) सम्राट अशोक द्वारा धारण की गई दो उपाधियाँ बताइए।
Name the two titles adopted by Ashoka.
- देवानांप्रिय (Devanampriya) – अर्थात 'देवताओं का प्रिय'।
- प्रियदर्शी (Priyadarshi) – अर्थात 'सबको प्रिय दिखने वाला'।
4) मौर्य साम्राज्य के कोई दो प्रमुख राजनीतिक केन्द्रों के नाम बताइए।
Mention any two major political centres of Mauryan Empire.
- पाटलिपुत्र (Pataliputra) – वर्तमान पटना, मौर्य साम्राज्य की राजधानी।
- तक्षशिला (Taxila) – उत्तर-पश्चिमी भाग का प्रमुख प्रशासनिक और शैक्षिक केंद्र।
5) सिद्धार्थ ने संन्यास का रास्ता अपनाने का निश्चय क्यों किया? कारण लिखिए।
Why did Siddhartha decide to adopt the path of mendicancy? Write the causes.
सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) ने संन्यास का रास्ता अपनाने का निर्णय निम्नलिखित कारणों से लिया:
- चार दृश्य (Four Sights): एक बूढ़ा व्यक्ति, एक बीमार व्यक्ति, एक मृत शरीर और एक संन्यासी को देखकर उन्हें जीवन की अनित्यता और दुख का बोध हुआ।
- दुख से मुक्ति की खोज: उन्होंने महसूस किया कि राजसी सुख-सुविधाएँ जन्म, बुढ़ापा, बीमारी और मृत्यु के दुख से मुक्ति नहीं दिला सकतीं, इसलिए उन्होंने सत्य और मोक्ष की खोज में संन्यास ग्रहण किया।
6) “उलुक” एवं “दावा” में अंतर स्पष्ट कीजिए। [2]
Describe the main difference between "Uluq" and "Dawa".
उत्तर: “उलुक” (Uluq) और “दावा” (Dawa) दोनों मुगल प्रशासनिक शब्द हैं। इनमें मुख्य अंतर यह है कि उलुक एक प्रकार का भू-राजस्व मूल्यांकन या कर निर्धारण था, जबकि दावा भू-राजस्व वसूली या संग्रह की प्रक्रिया को संदर्भित करता था। सरल शब्दों में, उलुक कर की दर तय करना था और दावा उस कर को वसूलना।
7) विजयनगर शासकों के लिए मंदिरों और संप्रदायों को प्रश्रय देना क्यों महत्वपूर्ण था? [1+1=2]
Why the patronage of temples and cults was important for Vijayanagara rulers?
उत्तर: विजयनगर शासकों के लिए मंदिरों और संप्रदायों को प्रश्रय देना निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण था:
- धार्मिक वैधता: मंदिरों को संरक्षण देकर शासक अपनी धार्मिक निष्ठा और दैवीय शक्ति का प्रदर्शन करते थे, जिससे उनकी सत्ता को वैधता मिलती थी।
- राजनीतिक एकीकरण: विभिन्न संप्रदायों और मंदिरों को समर्थन देकर वे साम्राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को एकजुट रखते थे, जिससे राजनीतिक स्थिरता बनी रहती थी।
8) जर्मन होलोकास्ट और भारत के विभाजन में क्या अंतर था? [2]
What was the difference between German Holocaust and the partition of India?
उत्तर: जर्मन होलोकास्ट और भारत के विभाजन में मुख्य अंतर यह था कि होलोकास्ट नाजी जर्मनी द्वारा यहूदियों और अन्य अल्पसंख्यकों की व्यवस्थित, औद्योगिक हत्या (लगभग 60 लाख यहूदी) थी, जो नस्लीय श्रेष्ठता के विचार पर आधारित थी। इसके विपरीत, भारत का विभाजन (1947) एक राजनीतिक निर्णय था जिसमें धार्मिक आधार पर देश का बंटवारा हुआ, जिसमें बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे, पलायन और हिंसा हुई, लेकिन यह एक संगठित नरसंहार नहीं था। होलोकास्ट में राज्य द्वारा नियोजित विनाश था, जबकि विभाजन में हिंसा मुख्यतः सामुदायिक संघर्ष और राजनीतिक असफलता का परिणाम थी।
खण्ड - स
SECTION - C
9) “मोहनजोदड़ो” सभ्यता के विशाल स्नानागार (ग्रेट बाथ) की चार विशेषताएं बताइए। [1+1+1+1=4]
Explain any four characteristics of the Great Bath of Mohenjodaro Civilisation?
उत्तर: मोहनजोदड़ो के विशाल स्नानागार (ग्रेट बाथ) की चार प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- निर्माण सामग्री: यह पकी हुई ईंटों से बना था और इसकी दीवारों पर प्राकृतिक टार (बिटुमेन) का लेप किया गया था ताकि पानी रिसाव न हो।
- आकार और संरचना: यह लगभग 12 मीटर लंबा, 7 मीटर चौड़ा और 2.4 मीटर गहरा था। इसमें उतरने के लिए दोनों ओर सीढ़ियाँ बनी थीं।
- जल निकासी व्यवस्था: इसमें पानी निकालने के लिए एक बड़ा नाला था, जो शहर की उन्नत जल निकासी प्रणाली का हिस्सा था।
- उपयोग: यह संभवतः धार्मिक अनुष्ठानों या सार्वजनिक स्नान के लिए उपयोग किया जाता था, जो हड़प्पा सभ्यता की जल-केंद्रित संस्कृति को दर्शाता है।
10) किसी ग्रंथ का विश्लेषण करते समय आप किन पहलुओं पर विचार करेंगे? [1+1+1+1=4]
On which elements do you notice when analyse texts?
उत्तर: किसी ग्रंथ का विश्लेषण करते समय निम्नलिखित पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए:
- लेखक और उद्देश्य: ग्रंथ किसने लिखा, उसकी पृष्ठभूमि क्या थी, और उसने यह ग्रंथ क्यों लिखा (राजनीतिक, धार्मिक, या सामाजिक उद्देश्य)।
- भाषा और शैली: ग्रंथ की भाषा (संस्कृत, फारसी, आदि) और लेखन शैली (पद्य, गद्य, संवाद) क्या है, जो उसके समय और संदर्भ को समझने में मदद करती है।
- सामग्री और विषयवस्तु: ग्रंथ में किन विषयों पर चर्चा की गई है (इतिहास, धर्म, प्रशासन) और यह उस काल के समाज का क्या चित्रण करता है।
- दर्शक और प्रभाव: यह ग्रंथ किसके लिए लिखा गया था (शासक, विद्वान, आम जनता) और इसका समकालीन या बाद के समाज पर क्या प्रभाव पड़ा।
11) सुलह-ए-कुल को लागू करने के लिए सम्राट अकबर द्वारा किए गए प्रयासों को वर्गीकृत कीजिए। [1+1+1+1=4]
Classified the effort made by emperor Akbar for introducing of Sulh-i-Kul.
उत्तर: सुलह-ए-कुल (सार्वभौमिक शांति) की नीति को लागू करने के लिए सम्राट अकबर द्वारा किए गए प्रयासों को निम्नलिखित रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- धार्मिक सहिष्णुता: अकबर ने सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता अपनाई, जैसे जजिया कर समाप्त करना, हिंदू मंदिरों के निर्माण की अनुमति देना, और विभिन्न धर्मों के त्योहारों में भाग लेना।
- इबादतखाना और दीन-ए-इलाही: उन्होंने फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना (प्रार्थना गृह) की स्थापना की, जहाँ विभिन्न धर्मों के विद्वानों के बीच धार्मिक चर्चाएँ होती थीं। बाद में उन्होंने दीन-ए-इलाही नामक एक नया धर्म चलाया, जो विभिन्न धर्मों के अच्छे तत्वों को मिलाकर बनाया गया था।
- प्रशासनिक सुधार: अकबर ने योग्यता के आधार पर सभी धर्मों के लोगों को उच्च पदों पर नियुक्त किया, जैसे राजा मान सिंह और राजा टोडरमल, जिससे साम्राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ा।
- वैवाहिक संबंध: उन्होंने राजपूत राजकुमारियों से विवाह करके हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया और राजपूत शासकों को मुगल प्रशासन में शामिल किया।
12) अगर आप ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी होते तो बंगाल में जमींदारों की शक्ति को नियंत्रित व विनियमित करने के लिए क्या प्रयास करते? [1+1+1+1=4]
What would you do to control and regulate the power of zamindar if you were an officer of East India Company?
उत्तर: यदि मैं ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकारी होता, तो बंगाल में जमींदारों की शक्ति को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए निम्नलिखित प्रयास करता:
- स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) में संशोधन: मैं स्थायी बंदोबस्त (1793) की शर्तों को सख्ती से लागू करता, जिसमें जमींदारों को समय पर राजस्व जमा करना अनिवार्य होता। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो उनकी जमीनें नीलाम कर दी जातीं।
- नियमित निरीक्षण: मैं जमींदारों के कामकाज की निगरानी के लिए कंपनी के अधिकारियों की एक टीम बनाता, जो समय-समय पर गाँवों का दौरा करती और किसानों से शिकायतें सुनती।
- किसानों के अधिकारों की रक्षा: मैं जमींदारों द्वारा किसानों से अत्यधिक लगान वसूलने या उन्हें जबरन बेदखल करने पर रोक लगाने के लिए कानून बनाता, ताकि किसानों का शोषण न हो।
- जमींदारी विरासत पर नियंत्रण: मैं यह सुनिश्चित करता कि जमींदारी केवल उसी उत्तराधिकारी को मिले जो कंपनी के प्रति वफादार हो और राजस्व नियमों का पालन करे, तथा विद्रोही जमींदारों की जमीनें जब्त कर ली जातीं।
23. 1857 ई. की क्रांति में शाहमल के कार्यों का मूल्यांकन कीजिए। [4]
Evaluate Shah Mal's role in the revolt of 1857?
शाहमल का मूल्यांकन: शाहमल 1857 के विद्रोह में एक प्रमुख किसान नेता थे, जिन्होंने बिहार के बरह क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। उनके कार्यों का मूल्यांकन निम्नलिखित बिंदुओं में किया जा सकता है:
- किसानों का नेतृत्व: उन्होंने स्थानीय किसानों को संगठित कर अंग्रेजों के दमनकारी नीतियों (जैसे भू-राजस्व वृद्धि) के खिलाफ विद्रोह खड़ा किया।
- गुरिल्ला युद्ध: शाहमल ने छापामार शैली में अंग्रेजी सेना को कई बार पराजित किया, जिससे अंग्रेजों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
- प्रतीकात्मक भूमिका: वे स्थानीय प्रतिरोध के प्रतीक बन गए, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जनजागरण किया।
- सीमाएं: हालांकि, उनके पास आधुनिक हथियारों और संगठित सेना का अभाव था, जिसके कारण अंततः अंग्रेजों ने उन्हें पराजित कर दिया।
निष्कर्ष: शाहमल का योगदान 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण था, विशेषकर किसान वर्ग के प्रतिरोध को मजबूत करने में।
24. औपनिवेशिक सरकार ने शहरों के मानचित्र तैयार करने पर क्यों ध्यान दिया? वर्तमान में इनकी प्रासंगिकता का उल्लेख कीजिए। [4]
Why was Colonial Government keen on mapping of cities? Mention the relevance of them in the context to present times.
औपनिवेशिक सरकार के मानचित्रण के कारण:
- प्रशासनिक नियंत्रण: मानचित्रों के माध्यम से शहरों की भौगोलिक संरचना को समझकर प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत किया जा सकता था।
- कर संग्रहण: भूमि और संपत्ति के मानचित्रण से कर संग्रहण को सुव्यवस्थित किया जा सकता था।
- सैन्य रणनीति: शहरों के मानचित्र सैन्य अभियानों और विद्रोहों को दबाने में सहायक थे।
- संसाधन दोहन: प्राकृतिक संसाधनों और व्यापारिक केंद्रों की पहचान के लिए मानचित्र आवश्यक थे।
वर्तमान प्रासंगिकता:
- शहरी नियोजन: आज मानचित्रों का उपयोग शहरी विकास, यातायात प्रबंधन और आपदा प्रबंधन में किया जाता है।
- डिजिटल मैपिंग: गूगल मैप्स जैसी सेवाएं नेविगेशन और स्थान-आधारित सेवाओं में सहायक हैं।
- ऐतिहासिक अध्ययन: पुराने मानचित्र शहरों के ऐतिहासिक विकास को समझने में मदद करते हैं।
25. केबिनेट मिशन के प्रावधानों का विश्लेषण कीजिए। [4]
Analyse the provisions of Cabinet Mission.
केबिनेट मिशन (1946) के प्रमुख प्रावधान:
- अखिल भारतीय संघ: एक कमजोर केंद्र के साथ अखिल भारतीय संघ का गठन, जो केवल विदेश, रक्षा और संचार जैसे विषयों को नियंत्रित करेगा।
- प्रांतीय स्वायत्तता: प्रांतों को व्यापक स्वायत्तता दी जाएगी, और वे अपने विषयों पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेंगे।
- समूह प्रणाली: प्रांतों को तीन समूहों (A, B, C) में विभाजित किया गया, जिनमें मुस्लिम बहुल प्रांतों को समूह B और C में रखा गया।
- अंतरिम सरकार: एक अंतरिम सरकार का गठन, जिसमें सभी दलों को शामिल किया जाएगा।
- संविधान सभा: संविधान निर्माण के लिए एक संविधान सभा का गठन, जिसके सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से किया जाएगा।
विश्लेषण: केबिनेट मिशन ने भारत की एकता बनाए रखने का प्रयास किया, लेकिन मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच मतभेदों के कारण यह योजना असफल रही। इसने अंततः विभाजन का मार्ग प्रशस्त किया।
26. भारतीय संविधान में विषयों की तीन सूचियों और अनुच्छेद 356 का उल्लेख कीजिए। [4+4+4=12]
Explain the three lists of subjects and Article 356 of the Constitution of India.
तीन सूचियाँ: भारतीय संविधान में शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है:
- संघ सूची (Union List): इसमें 100 विषय (मूल रूप से 97) शामिल हैं, जिन पर केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है, जैसे रक्षा, विदेश मामले, परमाणु ऊर्जा, रेलवे, आदि।
- राज्य सूची (State List): इसमें 61 विषय (मूल रूप से 66) शामिल हैं, जिन पर केवल राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं, जैसे पुलिस, कृषि, स्थानीय सरकार, आदि।
- समवर्ती सूची (Concurrent List): इसमें 52 विषय (मूल रूप से 47) शामिल हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, जैसे शिक्षा, वन, श्रम कल्याण, आदि। संघर्ष की स्थिति में केंद्र का कानून प्रभावी होगा।
अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन): यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को राज्य में संवैधानिक तंत्र के विफल होने पर राज्य सरकार को निलंबित करने और राज्य का प्रशासन अपने हाथ में लेने का अधिकार देता है। यह प्रावधान राज्यपाल की रिपोर्ट पर या स्वतः लागू किया जा सकता है, और इसे संसद की मंजूरी आवश्यक है। यह छह महीने तक प्रभावी रहता है, जिसे अधिकतम तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
खण्ड - द (Section - D)
27. आज भी भारत में चिश्ती सिलसिला सबसे अधिक प्रभावशाली है। चिश्ती सूफी संतों के खानकाह जीवन व उपासना पद्धति के आधार पर उक्त कथन की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए। [6]
Chishti Silsila is most influential in India today. Explain the relevance of this statement on the basis of the life and worshiping practices of Chishti Khanqah.
चिश्ती सिलसिले की प्रासंगिकता: चिश्ती सिलसिला आज भी भारत में सबसे प्रभावशाली सूफी परंपरा है, जिसका कारण इसके खानकाह जीवन और उपासना पद्धति में निहित है:
- खानकाह जीवन: चिश्ती संतों ने खानकाहों (आश्रमों) की स्थापना की, जहां सभी धर्मों और जातियों के लोगों का स्वागत किया जाता था। ये केंद्र सामाजिक समरसता, शिक्षा और दान के केंद्र बने।
- उपासना पद्धति: चिश्ती संतों ने संगीत (कव्वाली), ध्यान और सामूहिक प्रार्थना पर जोर दिया, जिससे आम जनता आसानी से जुड़ सकी। उन्होंने इस्लामी रूढ़ियों को त्यागकर स्थानीय परंपराओं को अपनाया।
- समावेशी दृष्टिकोण: उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म के भेदभाव को नकारा, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में लोकप्रियता मिली।
- वर्तमान प्रभाव: आज भी अजमेर शरीफ, निजामुद्दीन दरगाह जैसे केंद्रों पर लाखों श्रद्धालु आते हैं, जो चिश्ती परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है।
निष्कर्ष: चिश्ती सिलसिले की सादगी, समावेशिता और सामाजिक सेवा ने इसे भारत में सबसे प्रभावशाली सूफी परंपरा बनाए रखा है।
अथवा
प्रारंभिक भक्ति परंपराओं को स्पष्ट करते हुए इनका जाति व राज्य के प्रति दृष्टिकोण का भी उल्लेख कीजिए। [6]
Explain the early tradition of Bhakti and also mention their attitude towards the caste and state.
प्रारंभिक भक्ति परंपराएं: प्रारंभिक भक्ति आंदोलन (लगभग 6वीं-12वीं शताब्दी) में दक्षिण भारत के आलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों का योगदान महत्वपूर्ण था। इन्होंने मंदिरों और भक्ति गीतों के माध्यम से ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण पर जोर दिया।
जाति के प्रति दृष्टिकोण:
- भक्ति संतों ने जाति व्यवस्था की निंदा की और सभी को समान माना। उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति में जाति का कोई महत्व नहीं है।
- उदाहरण: नंदनार (एक दलित संत) को शिव की भक्ति में उच्च स्थान दिया गया।
- इसने सामाजिक समानता का संदेश दिया, हालांकि व्यवहार में जाति व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
राज्य के प्रति दृष्टिकोण:
- भक्ति संतों ने राज्य की शक्ति को चुनौती नहीं दी, बल्कि राजाओं को धार्मिक सहिष्णुता और न्याय का पालन करने की सलाह दी।
- वे राज्य के हस्तक्षेप से मुक्त रहना चाहते थे और अपने धार्मिक कार्यों में स्वतंत्रता चाहते थे।
- कुछ संतों (जैसे बसवन्ना) ने राज्य की नीतियों की आलोचना की, लेकिन अधिकांश ने राज्य को सामाजिक व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया।
निष्कर्ष: प्रारंभिक भक्ति परंपराओं ने जाति भेदभाव को कम करने और राज्य के प्रति एक सहिष्णु दृष्टिकोण अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
28) “आइन ए अकबरी” मुगल शासन की सूचनाओं की खान है। कथन के आधार पर आइन ए अकबरी का मूल्यांकन कीजिए। [6]
The Ain-I-Akbari is therefore, a mine of information for us about the Mughal empire. On the basis of the statement evaluate the Ain-I-Akbari.
मूल्यांकन: आइन-ए-अकबरी मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल का एक विस्तृत प्रशासनिक दस्तावेज है, जिसे अबुल फजल ने लिखा था। यह ग्रंथ मुगल साम्राज्य के बारे में जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
- प्रशासनिक जानकारी: इसमें शाही दरबार, सेना, राजस्व प्रणाली, और प्रांतों (सूबों) का विस्तृत विवरण मिलता है।
- सामाजिक और आर्थिक जीवन: कृषि, व्यापार, मूल्य निर्धारण, और विभिन्न जातियों एवं व्यवसायों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
- सांस्कृतिक पहलू: अकबर के धार्मिक विचारों, फारसी साहित्य, और कला के विकास पर प्रकाश डालता है।
- सीमाएँ: यह मुख्यतः शाही दृष्टिकोण से लिखा गया है और इसमें आम जनता की आवाज़ का अभाव है। फिर भी, यह मुगल साम्राज्य की संरचना को समझने के लिए एक अपरिहार्य स्रोत है।
इस प्रकार, यह कथन सही है कि आइन-ए-अकबरी मुगल शासन की सूचनाओं की खान है, क्योंकि यह प्रशासन, समाज और अर्थव्यवस्था का व्यापक चित्र प्रस्तुत करता है।
अथवा
पंचायत और गाँव का मुखिया किस तरह से ग्रामीण समाज का नियमन करते थे? विवेचना कीजिए।
Discuss the way in which panchayats and village headmen regulated rural society.
विवेचना: मुगल काल में ग्रामीण समाज का नियमन मुख्यतः पंचायतों और गाँव के मुखिया (मुकद्दम या चौधरी) द्वारा किया जाता था।
- पंचायत की भूमिका:
- यह गाँव के बुजुर्गों की एक समिति होती थी जो विवादों का निपटारा करती थी।
- सामाजिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना, जैसे विवाह, तलाक, और जातिगत मामले।
- सामूहिक निर्णय लेना, जैसे कि सिंचाई, चरागाह, और सार्वजनिक कार्यों का प्रबंधन।
- गाँव के मुखिया की भूमिका:
- वह राजस्व संग्रह के लिए जिम्मेदार होता था और सरकार से गाँव का प्रतिनिधित्व करता था।
- कानून-व्यवस्था बनाए रखना और छोटे-मोटे अपराधों पर नियंत्रण रखना।
- पंचायत के साथ मिलकर सामाजिक अनुशासन बनाए रखना।
इस प्रकार, पंचायत और मुखिया मिलकर ग्रामीण समाज के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं का नियमन करते थे, जिससे गाँव स्वायत्त रूप से कार्य कर सके।
29) “भारत छोडो आंदोलन सही मायने मे एक जन आंदोलन था।” कथन की व्याख्या कीजिए। [6]
"Quit India Movement was genuinely a mass movement" Explain the statement.
व्याख्या: भारत छोड़ो आंदोलन (1942) को सही मायने में जन आंदोलन इसलिए कहा गया क्योंकि इसमें समाज के सभी वर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
- व्यापक भागीदारी: इसमें किसान, मजदूर, छात्र, महिलाएँ, और यहाँ तक कि सरकारी कर्मचारी भी शामिल हुए।
- स्वतःस्फूर्त विद्रोह: नेताओं की गिरफ्तारी के बाद भी जनता ने स्वयं आंदोलन का नेतृत्व किया, जैसे कि बम विस्फोट, तार काटना, और सरकारी भवनों पर कब्जा।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्र: यह आंदोलन केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गाँवों में भी जोरदार विरोध हुआ।
- महिलाओं की भूमिका: अरुणा आसफ अली जैसी महिलाओं ने भूमिगत गतिविधियों का नेतृत्व किया और जन जागरण फैलाया।
हालाँकि ब्रिटिश सरकार ने इसे क्रूरता से दबाया, लेकिन इसने यह साबित कर दिया कि भारतीय जनता स्वतंत्रता के लिए एकजुट थी। इसलिए यह एक सच्चा जन आंदोलन था।
अथवा
“गाँधीजी एक सच्चे जननेता थे।” कथन की व्याख्या कीजिए।
"Gandhiji was a people's true leader" Explain the statement.
व्याख्या: महात्मा गाँधी को सच्चा जननेता इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने आम जनता से सीधा जुड़ाव स्थापित किया और उनकी समस्याओं को समझा।
- सादगी और जीवनशैली: वे सादा जीवन जीते थे और खुद को गरीबों के बराबर रखते थे, जिससे जनता उन्हें अपना मानती थी।
- अहिंसा और सत्याग्रह: उन्होंने अहिंसक तरीकों से आंदोलन चलाए, जिसमें आम लोग आसानी से भाग ले सकते थे, जैसे असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह।
- सामाजिक सुधार: उन्होंने छुआछूत, महिला उत्थान, और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों को उठाया, जो जनता के जीवन से जुड़े थे।
- जनता की आवाज: वे हमेशा जनता की भावनाओं को प्राथमिकता देते थे और उनके साथ संवाद करते थे, जैसे कि चरखा और स्वदेशी का प्रचार।
इस प्रकार, गाँधीजी ने न केवल राजनीतिक नेतृत्व किया, बल्कि जनता के बीच रहकर उन्हें प्रेरित किया, जिससे वे एक सच्चे जननेता बने।
30) भारत के मानचित्र मे निम्नलिखित ऐतिहासिक स्थानों को अंकित कीजिए। [5]
Mark the following places in the outline map of India.
- दिल्ली (Delhi) – उत्तर भारत में, यमुना नदी के किनारे।
- बम्बई (Bombay/Mumbai) – पश्चिमी भारत में, अरब सागर के तट पर।
- लोथल (Lothal) – गुजरात में, साबरमती नदी के पास (सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल)।
- मगध (Magadha) – बिहार क्षेत्र में, गंगा नदी के दक्षिण में (प्राचीन साम्राज्य)।
- सांची (Sanchi) – मध्य प्रदेश में, भोपाल के पास (स्तूप के लिए प्रसिद्ध)।
नोट: छात्रों को भारत के रेखा मानचित्र में इन स्थानों को सही स्थान पर अंकित करना चाहिए। उपरोक्त सूची में स्थानों का भौगोलिक विवरण दिया गया है।
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