RBSE Class 12th 2017 -SS-21-2017 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2017
Subject -SS-21-2017
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2017 -SS-21-2017

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Rajasthan Board Class 12th -SS-21-2017 2017 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2017

SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2017

हिन्दी साहित्य

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. उत्तर यथासम्भव निर्धारित शब्द-सीमा में ही सुपाठ्य लिखें।

नामांक : ___________    Roll No. : ___________

SLNo. : गा

No. of Questions : 3    SS-2-Hindi Sah.(Supp.)

No. of Printed Pages : 7

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खण्ड - '37

निम्न पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(उत्तर सीमा 30 शब्द)

छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाये,
मत झुको अनय पर भले व्योम फट जाये।
दो बार नहीं यमराज कण्ठ धरता है,
मरता है जो, एक ही बार मरता है।
तुम स्वयं मरण के मुख पर चरण धरो रे।
जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे!

उपशम को ही जो जाति धर्म कहती है,
शम, दम, विराग को श्रेष्ठ कर्म कहती है,
धृति को प्रहार, शान्ति को वर्म कहती है,
अक्रोध विनय को विजय - मर्म कहती है,
अपमान कौन, वह जिसको नहीं सहेगी ?
सब को असीस, सब का बन दास रहेगी।

  1. क) पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। [1]

    उत्तर: पद्यांश का उचित शीर्षक "आन और साहस" या "अपनी आन न छोड़ो" है।

  2. ख) शीश कटने पर भी क्या नहीं छोड़ना चाहिए? [1]

    उत्तर: शीश कटने पर भी अपनी आन (स्वाभिमान) नहीं छोड़नी चाहिए।

  3. ग) व्यक्ति जीवन में कितनी बार मरता है? [1]

    उत्तर: व्यक्ति जीवन में एक ही बार मरता है।

  4. घ) अपमान किसे सहना पड़ता है? [2]

    उत्तर: पद्यांश के अनुसार, अपमान उसे सहना पड़ता है जो अपनी आन और साहस को छोड़ देता है अर्थात जो अन्याय के सामने झुक जाता है। कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति अपनी आन नहीं छोड़ता, वह अपमान नहीं सहता।

  5. ङ) कवि ने क्या प्रेरणा दी है? [2]

    उत्तर: कवि ने प्रेरणा दी है कि जीना हो तो मरने से नहीं डरना चाहिए। अर्थात जीवन में साहस और स्वाभिमान के साथ जीने के लिए मृत्यु के भय को त्याग देना चाहिए।

SS_9]_Hindi Sah. 18

2) निम्न गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(उत्तर सीमा 20 शब्द)

हमें तो ऐसी शिक्षा चाहिए, जिससे चरित्र बने, मानसिक बल बढ़े, बुद्धि का विकास हो और जिससे मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके। हमें आवश्यकता इस बात की है कि हम विदेशी अधिकार से मुक्त होकर अपने निजी ज्ञान-भण्डार की विभिन्न शाखाओं को और उसके साथ ही अंग्रेजी भाषा और पाश्चात्य विज्ञान का अध्ययन करें। हमें यांत्रिक और ऐसी सभी शिक्षाओं की आवश्यकता है जिनसे उद्योग-धंधों की वृद्धि और विकास हो, जिससे मनुष्य नौकरी के लिए मारा-मारा फिरने के बदले अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त कमाई कर सके और आपातकाल के लिए संचय भी कर सके।

  1. गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। [4]

    उत्तर: आदर्श शिक्षा का स्वरूप

  2. हमें कैसी शिक्षा चाहिए? [2]

    उत्तर: हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र बने, मानसिक बल बढ़े, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य आत्मनिर्भर बने।

  3. हमें किस बात की आवश्यकता है? [2]

    उत्तर: हमें विदेशी अधिकार से मुक्त होकर अपने ज्ञान-भण्डार और अंग्रेजी भाषा तथा पाश्चात्य विज्ञान के अध्ययन की आवश्यकता है।

  4. उद्योग-धंधों की वृद्धि और विकास के लिए क्या चाहिए? [2]

    उत्तर: उद्योग-धंधों की वृद्धि और विकास के लिए यांत्रिक और ऐसी सभी शिक्षाओं की आवश्यकता है।

  5. हम संचय क्यों करते हैं? [2]

    उत्तर: हम आपातकाल के लिए संचय करते हैं ताकि विपत्ति के समय काम आ सके।

खण्ड - ब'

3) किसी एक विषय पर लगभग 450 शब्दों में निबंध लिखिए : [8]

  1. विद्यार्थियों में बढ़ती अनुशासन हीनता।
  2. अस्पतालों का व्यावसायीकरण।
  3. महंगी शिक्षा और रोजगार के घटते अवसर।
  4. राष्ट्रीय एकता में बाधक विदेशी प्रभाव।

4) निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 20-20 शब्दों में लिखिए : [4×2=8]

  1. नाटक का सबसे जरूरी और सशक्त माध्यम क्या है? उसका नाटक पर क्या प्रभाव पड़ता है?

    उत्तर: नाटक का सबसे जरूरी माध्यम संवाद है। संवाद नाटक को जीवंत बनाते हैं और पात्रों के भावों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करते हैं।

  2. पत्रकारीय लेखन किसे कहते हैं?

    उत्तर: पत्रकारीय लेखन वह लेखन है जो समाचारों, घटनाओं और तथ्यों को सटीक, संक्षिप्त और रोचक ढंग से प्रस्तुत करता है।

  3. कहानी के प्रमुख तत्व कौन से हैं?

    उत्तर: कहानी के प्रमुख तत्व हैं – कथानक, पात्र, संवाद, वातावरण, उद्देश्य और शैली।

  4. इंटरनेट पत्रकारिता की मुख्य विशेषता क्या है?

    उत्तर: इंटरनेट पत्रकारिता की मुख्य विशेषता त्वरित समाचार प्रसारण, वैश्विक पहुँच और पाठकों से तत्काल संवाद की सुविधा है।

5) आप बारहवीं कक्षा के छात्र हैं। कक्षा में आपके शिक्षक और आपके बीच किसी भी घटना पर एक वार्तालाप की रचना करें।

वार्तालाप (कक्षा में एक कविता पाठ प्रतियोगिता के आयोजन पर):

छात्र: गुरुजी, नमस्ते। क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूँ?

शिक्षक: हाँ, बेटा, पूछो। क्या बात है?

छात्र: गुरुजी, हमारी कक्षा में हिंदी साहित्य में रुचि रखने वाले बहुत से छात्र हैं। क्या हम एक कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन कर सकते हैं?

शिक्षक: यह तो बहुत अच्छा विचार है! इससे छात्रों की आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ेगी। तुम्हारी योजना क्या है?

छात्र: गुरुजी, हम चाहते हैं कि यह प्रतियोगिता अगले सप्ताह शुक्रवार को हो। प्रत्येक छात्र को अपनी पसंद की कोई भी कविता सुनानी होगी। हम तीन निर्णायक रख सकते हैं।

शिक्षक: बहुत अच्छा। मैं इसकी अनुमति देता हूँ। तुम प्रतियोगिता की रूपरेखा तैयार करो और कक्षा के सभी छात्रों को सूचित कर दो। मैं भी निर्णायक मंडल में शामिल रहूँगा।

छात्र: धन्यवाद गुरुजी! हम आपकी मदद से इसे सफल बनाएँगे।

खण्ड - ‘अ’

6) निम्नलिखित में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

पद्यांश:
बानी जगरानी की उदारता बखानी विग ऐसी मति उदित उदार कौन की भई।
देवता प्रसिद्ध सिद्ध रिषिराज तप बृन्द कहि कहि हारे सब अले न काहू लई।
भावी भूत वर्तमान जगत बखानत है 'केसोदास' क्यों हू ना बखानी काहू पै गई।
पति बनैं चारमुख पूत बनें पाँचमुख नाती अट घटमुख तदपि नई नई।।

सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश 'केशवदास' द्वारा रचित 'रामचंद्रिका' से लिया गया है। इसमें कवि ने माता जानकी (सीता) की उदारता और महानता का वर्णन किया है।

प्रसंग: कवि कहते हैं कि माता जानकी की उदारता का वर्णन करते-करते सभी देवता, सिद्ध और ऋषि-मुनि थक गए, परंतु उनकी उदारता की कोई सीमा नहीं पाई गई। वे भूत, भविष्य और वर्तमान में भी उनकी महिमा का गान करते हैं, फिर भी उनकी उदारता कम नहीं होती।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि माता जानकी की उदारता का वर्णन करना असंभव है। ब्रह्मा (चारमुख), शिव (पाँचमुख) और अन्य देवता भी उनकी महिमा का गान करते-करते थक गए, परंतु उनकी उदारता में कोई कमी नहीं आई। यहाँ 'नई नई' का अर्थ है कि उनकी उदारता सदा नवीन बनी रहती है, कभी पुरानी नहीं होती। कवि केशवदास ने इस पद्यांश में माता सीता के चरित्र की महानता को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है।

अथवा

पद्यांश:
जब हम सत्य को पुकारते हैं
तो वह हमसे परे हटता जाता है
जैसे गुहारते हुए युधिष्ठिर के सामने से
भागे थे विदुर और भी घने जंगलों में
सत्य शायद जानना चाहता है
कि उसके पीछे हम कितनी दूर तक भटक सकते हैं
कभी दिखता है सत्य
और कभी ओझल हो जाता है
और हम कहते रह जाते हैं कि रूको यह हम हैं
जैसे धर्मराज के बार-बार दुहाई देने पर
कि ठहरिए स्वामी विदुर
यह मैं हूँ आपका सेवक कुंतीनंदन युधिष्ठिर
वे नहीं ठिठकते

सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी के प्रसिद्ध कवि 'केदारनाथ सिंह' की कविता 'सत्य' से लिया गया है। इसमें सत्य की प्राप्ति की कठिनाई और उसके रहस्यमय स्वरूप को दर्शाया गया है।

प्रसंग: कवि कहते हैं कि सत्य को पाना बहुत कठिन है। जब हम उसे पुकारते हैं, तो वह और दूर होता जाता है। यहाँ महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कवि ने युधिष्ठिर और विदुर के बीच के संवाद को सादृश्य के रूप में प्रस्तुत किया है।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि सत्य को पुकारने पर वह हमसे दूर भागता है, जैसे युधिष्ठिर के पुकारने पर विदुर जंगलों में और भी गहरे चले गए थे। सत्य हमारी परीक्षा लेना चाहता है कि हम उसके पीछे कितनी दूर तक जा सकते हैं। कभी वह दिखता है, कभी ओझल हो जाता है। हम उसे रुकने के लिए कहते हैं, परंतु वह नहीं रुकता। यह सत्य की अप्राप्यता और उसकी निरंतर खोज की आवश्यकता को दर्शाता है। कवि ने इस कविता में सत्य की खोज को एक अंतहीन यात्रा के रूप में चित्रित किया है।

7) निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 - 50 शब्दों में लिखिए :

क) कुछ दिन रह गृह तू फिर समोद,
बैठी नानी की स्नेह-गोद।
मामा-मामी का रहा प्यार,
भर जलद धरा को ज्यों अपार;

उपर्युक्त पंक्तियों का भाव - सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए। [2]

इन पंक्तियों में नानी के घर के स्नेहिल वातावरण का वर्णन है। कवि कहता है कि तू कुछ दिन नानी की गोद में सुखपूर्वक रह, जहाँ मामा-मामी का प्यार बादलों द्वारा धरती को भरने के समान अपार है। भाव-सौन्दर्य यह है कि नानी का घर प्रेम और आत्मीयता का केंद्र है, जहाँ स्नेह की कोई कमी नहीं।

ख) तोहर बिरह दिन छन-छन तनु छिन-
चौदसि-चाँद-समान।
विद्यापति सिबसिंह नस्पति
'लखिमा देइ-रमान।।

उपर्युक्त पंक्तियों में निहित शिल्प - सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए। [2]

शिल्प-सौन्दर्य: इन पंक्तियों में 'छन-छन' और 'तनु-छिन' में अनुप्रास अलंकार है। 'चौदसि-चाँद-समान' में उपमा अलंकार है, जहाँ विरह में क्षीण शरीर की तुलना चौदस (चतुर्दशी) के चाँद से की गई है। विद्यापति की मैथिली भाषा में लिखी ये पंक्तियाँ प्रेम और विरह की गहनता को सुंदर शिल्प में प्रस्तुत करती हैं।

8) निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 - 50 शब्दों में लिखिए :

क) 'अरूण यह मधुमय देश हमारा' गीत किसने व कहाँ गाया? किस दृश्य को देखकर इस गीत का उद्भव हुआ?

यह गीत जयशंकर प्रसाद ने 'आकाशदीप' नाटक में गाया। इस गीत का उद्भव प्रातःकालीन सूर्योदय के दृश्य को देखकर हुआ, जब आकाश में लालिमा छाई थी और प्रकृति मधुरता से भरी थी। कवि ने भारत भूमि को मधुमय और सुंदर बताते हुए देशप्रेम की भावना व्यक्त की।

ख) 'गीत गाने दो' कविता में कवि निराला ने कैसे समय की ओर संकेत किया है? कवि गीत क्यों गाना चाहता है?

कवि निराला ने उस समय की ओर संकेत किया है जब समाज में शोषण, अत्याचार और दुख-दर्द व्याप्त है। कवि गीत इसलिए गाना चाहता है ताकि वह लोगों के मन में आशा और उत्साह का संचार कर सके, उन्हें संघर्ष के लिए प्रेरित कर सके और जीवन की कठिनाइयों के बीच भी सुंदरता और संगीत को बनाए रख सके।

खण्ड - ‘ef’

9) निम्न गद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : [7]

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हरगोबिन संवदिया से संबंधित है, जिसमें संवाद पहुँचाने के कार्य की महत्ता बताई गई है।

व्याख्या: लेखक कहता है कि संवाद पहुँचाने का काम सभी नहीं कर सकते। आदमी भगवान के घर से संवदिया बनकर आता है, अर्थात यह एक दिव्य कार्य है। संवाद के प्रत्येक शब्द को याद रखना और उसे सही सुर और स्वर में सुनाना आवश्यक है। यहाँ संवदिया को एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा पद बताया गया है, जो केवल विशेष व्यक्ति ही निभा सकता है।

खण्ड – 'क'

गया है, ठीक उसी ढंग से जाकर सुनाना सहज काम नहीं। गाँव के लोगों की गलत धारणा है कि निठल्ला, कामचोर और पेटू आदमी ही संवदिया का काम करता है। न आगे नाथ, न पीछे पगहा। बिना मजदूरी लिए ही जो गाँव-गाँव संवाद पहुँचावे, उसको और क्या कहेंगे? .......... औरतों का गुलाम। ज़रा-सी मीठी बोली सुनकर ही नशे में आ जाए, ऐसे मर्द को भी भला मर्द कहेंगे? किंतु गाँव में कौन ऐसा है, जिसके घर की माँ-बेटी-बहू का संवाद हरगोबिन ने नहीं पहुँचाया है? ........ लेकिन ऐसा संवाद पहली बार ले जा रहा है वह।

अथवा

भीड़ लड़के ने दिल्ली में भी देखी थी, बल्कि रोज देखता था। दफ़्तर जाती भीड़, खरीद-फ़रोख्त करती भीड़, तमाशा देखती भीड़, सड़क क्रॉस करती भीड़। लेकिन इस भीड़ का अंदाज़ निराला था। इस भीड़ में एकसूत्रता थी। न यहाँ जाति का महत्त्व था, न भाषा का, महत्त्व उद्देश्य का था और वह सबका समान था, जीवन के प्रति कल्याण की कामना। इस भीड़ में दौड़ नहीं थी, अतिक्रमण नहीं था और भी अनोखी बात यह थी कि कोई भी स्नानार्थी किसी सैलानी आनन्द में डुबकी नहीं लगा रहा था। बल्कि स्नान से ज्यादा समय ध्यान ले रहा था। दूर जलधारा के बीच एक आदमी सूर्य की ओर उन्मुख हाथ जोड़े खड़ा था। उसके चेहरे पर इतना विभोर, विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अन्दर स्व से जनित कोई हार शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतन स्वरूप, आत्माराम और निर्मलानन्द है।

10) निम्न में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

(उत्तर सीमा लगभग 50 शब्द) [2×2=4]

  1. ‘गुरु और राजा जनक के जीवन में क्या समानता बताई गई है? पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।

    गुरु और राजा जनक दोनों ही संसार में रहते हुए भी आसक्ति रहित थे। दोनों ने गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए भी आत्मज्ञान प्राप्त किया और संसार को मोह-माया से मुक्त रहने का संदेश दिया। दोनों का जीवन त्याग और ज्ञान का आदर्श उदाहरण है।

  2. शेर कहानी में लेखक ने झाड़ी के ओट से कौनसा दृश्य देखा? पाठ के आधार पर बताइये।

    लेखक ने झाड़ी के ओट से यह दृश्य देखा कि एक शेर अपने शिकार को मारने के बाद उसे खा नहीं रहा था, बल्कि उसके पास बैठकर उदास और विचारमग्न था। शेर के व्यवहार में क्रूरता नहीं, बल्कि करुणा और वैराग्य का भाव था, जो लेखक को अत्यंत अद्भुत लगा।

  3. बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन उसकी माता को नहीं सुना पाया। आप यदि बड़ी बहू का संदेश लेकर जाते तो क्या आप भी संवाद सुनाये बिना लौट आते? तर्क पूर्ण उत्तर दीजिए।

    नहीं, मैं संवाद सुनाए बिना नहीं लौटता। हरगोबिन ने बड़ी बहू के मन की बात समझी और उसकी भावनाओं का सम्मान किया, लेकिन एक संवादिया का कर्तव्य है कि वह संदेश को सही व्यक्ति तक पहुँचाए। मैं बड़ी बहू को समझाता कि माँ को सच जानने का अधिकार है, और फिर संवाद सुनाने का प्रयास करता।

11) कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला अथवा लेखक रामचन्द्र शुक्ल का साहित्यिक परिचय दीजिए।

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ हैं। इनका जन्म 1899 ई. में बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ। ये साहित्य में 'निराला' उपनाम से प्रसिद्ध हैं। इनकी रचनाओं में विद्रोह, प्रकृति-प्रेम, राष्ट्रीयता और मानवीय करुणा के भाव मिलते हैं। प्रमुख काव्य रचनाएँ: 'परिमल', 'गीतिका', 'अनामिका', 'तुलसीदास' आदि। गद्य में 'चतुरी चमार', 'बिल्लेसुर बकरिहा' आदि। निराला ने हिंदी कविता को नई दिशा दी और मुक्त छंद का प्रयोग किया।

रामचन्द्र शुक्ल हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार और इतिहासकार हैं। इनका जन्म 1884 ई. में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुआ। ये हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ: 'हिंदी साहित्य का इतिहास', 'चिंतामणि' (निबंध संग्रह), 'भारतेंदु हरिश्चंद्र' (जीवनी) आदि। शुक्ल जी ने साहित्य के मानदंडों को स्थापित किया और आलोचना को वैज्ञानिक आधार दिया।

SS_9]_Hindi Sah. i8

खण्ड – ‘अ’

2) निम्न प्रश्नों में किन्हीं चार के उत्तर (प्रत्येक को) लगभग 50 शब्दों में लिखिए : [4×2 =8]

  1. क) मालवा के राजाओं और आज के इंजीनियरों के जलप्रबन्धन सम्बन्धित कौशल में क्या अन्तर है?

    मालवा के राजाओं ने जलप्रबन्धन में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए तालाबों, बावड़ियों और नहरों का निर्माण करवाया, जो पर्यावरण के अनुकूल थे। वे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर ध्यान देते थे। आज के इंजीनियर अधिकतर आधुनिक तकनीकों, पाइपलाइनों और बड़े बाँधों पर निर्भर हैं, जो कभी-कभी पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं। राजाओं का दृष्टिकोण दीर्घकालिक और स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित था, जबकि आज का दृष्टिकोण अधिक औद्योगिक और केंद्रीकृत है।

  2. ख) पहाड़ों का जीवन अत्यन्त कठिन होता है | पहाड़ी लोगों का जीवन आपको कैसा लगता है? क्या आप ऐसा कठिन जीवन जीना पसन्द करेंगे? अपने विचार लिखिए।

    पहाड़ी लोगों का जीवन कठिन होते हुए भी सादगी, प्रकृति से निकटता और आपसी सहयोग से भरा होता है। वे कठिन परिस्थितियों में भी खुश रहना जानते हैं। मैं ऐसा कठिन जीवन जीना पसन्द नहीं करूँगा क्योंकि आधुनिक सुविधाओं की कमी और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियाँ जीवन को और अधिक मेहनत वाला बना देती हैं। हालाँकि, मैं पहाड़ी लोगों के साहस और धैर्य की प्रशंसा करता हूँ।

  3. ग) “घोीसू द्वारा मिठ़आ को चिढ़ाना – खेल में रोते हो” । इस कथन की सूरदास पर जो प्रतिक्रिया हुई उसे अपने शब्दों में लिखिए।

    जब घोीसू ने मिठ़आ को चिढ़ाते हुए कहा कि “खेल में रोते हो”, तो सूरदास को यह सुनकर बहुत दुख हुआ। वह भावुक हो गए और उन्हें अपने बचपन की याद आ गई। उन्होंने सोचा कि बच्चों को खेल में भी निराश नहीं करना चाहिए। सूरदास ने घोीसू को समझाया कि बच्चों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें चिढ़ाना उचित नहीं है।

  4. घ) बिस्कोहर में रोगों के इलाज के लिए वनस्पति का उपयोग किस तरह किया जाता था? पाठ के आधार पर बताइये।

    बिस्कोहर में रोगों के इलाज के लिए वनस्पति का पारम्परिक रूप से उपयोग किया जाता था। गाँव के लोग जड़ी-बूटियों, पत्तियों, छाल और फूलों से दवाएँ बनाते थे। वे विभिन्न पौधों के औषधीय गुणों को जानते थे और उनका उपयोग बुखार, पेट दर्द, घाव आदि के इलाज में करते थे। यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता था और आधुनिक चिकित्सा से पहले ही यहाँ के लोग प्राकृतिक उपचारों पर निर्भर थे।

  5. ङ) “सूरदास अपनी झोंपड़ी के जला दिए जाने के बाद भी किसी से प्रतिशोध लेने में विश्वास नहीं करता” आप सूरदास के इस विचार से कहाँ तक सहमत हैं?

    मैं सूरदास के इस विचार से पूरी तरह सहमत हूँ कि प्रतिशोध लेने से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि और अधिक द्वेष बढ़ता है। सूरदास का क्षमाशील और उदार स्वभाव प्रशंसनीय है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्ची शक्ति प्रतिशोध में नहीं, बल्कि क्षमा में है। हालाँकि, कुछ परिस्थितियों में न्याय की माँग करना भी आवश्यक हो सकता है, लेकिन सूरदास का दृष्टिकोण मानवीय मूल्यों की दृष्टि से सर्वोत्तम है।

3) बिसनाथ मान ही नहीं सकते कि बिस्कोहर से अच्छा कोई गाँव हो सकता है। क्या आप भी अपने गाँव या शहर के बारे में यही सोचते हैं? यदि हाँ तो क्यों ? सकारण उत्तर लिखिए। [6]

हाँ, मैं भी अपने गाँव/शहर के बारे में यही सोचता हूँ कि यह सबसे अच्छा है। इसके कई कारण हैं:

  • प्राकृतिक सौंदर्य: मेरे गाँव/शहर में हरियाली, पहाड़, नदी या झील जैसे प्राकृतिक तत्व हैं जो इसे खास बनाते हैं।
  • सामुदायिक भावना: यहाँ के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं, त्योहारों पर एक साथ मनाते हैं और मुश्किल समय में एक-दूसरे की मदद करते हैं।
  • सांस्कृतिक धरोहर: यहाँ की अपनी परम्पराएँ, रीति-रिवाज और इतिहास है जो मुझे गर्व महसूस कराते हैं।
  • सुविधाएँ: हालाँकि बड़े शहरों जैसी सुविधाएँ नहीं हैं, फिर भी यहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • बचपन की यादें: यहाँ मेरे बचपन की अनगिनत यादें जुड़ी हैं, जो इसे मेरे लिए सबसे खास बनाती हैं।

बिसनाथ की तरह मुझे भी लगता है कि हर व्यक्ति को अपने गाँव/शहर से गहरा लगाव होता है, क्योंकि यही हमारी पहचान और जड़ों का प्रतीक है।