RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers

Class 12th students hunting authentic previous year papers for Business Studies-SS-31-2017 (2017) land here for a reason: the paper below matches how RBSE assessments are remembered from that year. RBSE Solution does not mix years on one page; each combination gets its own notes.

Skim the overview sections, then work through the scanned pages. Pair this practice with RBSE books and solutions when you need to relearn a concept a question exposed.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2017
Subject Business Studies-SS-31-2017
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2017, and subject Business Studies-SS-31-2017 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the Business Studies-SS-31-2017 question paper from 2017 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017

Scroll through the Previous Year Papers pages for Business Studies-SS-31-2017 (2017).

RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2017 Business Studies-SS-31-2017 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Business Studies-SS-31-2017 2017 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2017

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2017

व्यवसाय अध्ययन (BUSINESS STUDIES)

समय : 3¼ घण्टे   |   पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें |
    Candidate must write first of all his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं |
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें |
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.

No. of Questions : 30    SS-3-Bus. Studies

No. of Printed Pages : 07

प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER

SS-3I—Bus. Studies 830   [ Turn Over

Section – A

Note: प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।

If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

खण्ड (Section) प्रश्न संख्या (Q. Nos.) अंक प्रत्येक प्रश्न (Marks per question) उत्तर की शब्द/पृष्ठ सीमा (Word/Page limit of answer)
A 1 – 10 1 20 शब्द (20 words)
B 11 – 18 2 आधे पृष्ठ (Half page)
C 19 – 27 4 एक पृष्ठ (One page)
D 28 – 30 6 तीन पृष्ठ (Three pages)

Note: प्रश्न क्रमांक 28 से 30 में आन्तरिक विकल्प हैं। Question Nos. 28 to 30 have internal choices.

प्रश्न 1 (Question 1)

“नियोजन अतिव्यापित तथा अपव्ययी क्रियाओं को कम करता है।” कैसे?

"Planning reduces overlapping and wasteful activities." How?

उत्तर / Answer: नियोजन पूर्व निर्धारित लक्ष्यों और कार्यविधियों को स्पष्ट करता है, जिससे अनावश्यक दोहराव और संसाधनों की बर्बादी कम होती है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी गतिविधियाँ एकीकृत और समन्वित हों, जिससे अतिव्यापन (overlapping) और अपव्यय (waste) न्यूनतम हो।

Planning clarifies pre-determined goals and procedures, reducing unnecessary duplication and wastage of resources. It ensures all activities are integrated and coordinated, minimizing overlapping and waste.

प्रश्न 3 से 8 (लघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 3

"स्थानबद्ध प्रशिक्षण विधि को समझाइये।"

Explain the "Internship Training" method.

उत्तर: स्थानबद्ध प्रशिक्षण (Internship Training) एक ऐसी प्रशिक्षण विधि है जिसमें प्रशिक्षु को कार्यस्थल पर ही व्यावहारिक अनुभव दिया जाता है। इसमें प्रशिक्षु कुछ समय के लिए किसी संगठन में कार्य करता है और वास्तविक कार्य परिस्थितियों में सीखता है। यह विधि सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक रूप देने में सहायक होती है, जैसे इंजीनियरिंग या मेडिकल के छात्रों का प्रशिक्षण।

प्रश्न 4

"प्रबन्ध एक अमूर्त शक्ति है।" स्पष्ट कीजिये।

"Management is an intangible force." Explain.

उत्तर: प्रबन्ध एक अमूर्त शक्ति है क्योंकि इसे देखा या छुआ नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को महसूस किया जा सकता है। प्रबन्ध की उपस्थिति संगठन में समन्वय, दक्षता और लक्ष्य प्राप्ति के रूप में दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, एक सफल संगठन में प्रबन्ध की गुणवत्ता कर्मचारियों के मनोबल और उत्पादकता में परिलक्षित होती है, भले ही प्रबन्ध को भौतिक रूप से न देखा जा सके।

प्रश्न 5

"समन्वय प्रबन्ध का सार है।" समझाइये।

"Coordination is the essence of management." Explain.

उत्तर: समन्वय प्रबन्ध का सार है क्योंकि यह सभी प्रबन्धकीय कार्यों (नियोजन, संगठन, निर्देशन, नियंत्रण) को एक सूत्र में बांधता है। बिना समन्वय के विभिन्न विभागों के कार्य असंगठित हो जाते हैं और संगठन के लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाते। उदाहरण के लिए, उत्पादन और बिक्री विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है ताकि उत्पादन बिक्री की मांग के अनुसार हो।

प्रश्न 6

वैज्ञानिक प्रबन्ध के शब्द "जस्ट इन टाइम मैन्युफैक्चरिंग" से आपका क्या आशय है?

What do you mean by the term "Just in time manufacturing" of Scientific Management?

उत्तर: जस्ट इन टाइम (JIT) मैन्युफैक्चरिंग एक उत्पादन प्रणाली है जिसमें सामग्री और भागों को उत्पादन प्रक्रिया में ठीक उसी समय पहुंचाया जाता है जब उनकी आवश्यकता होती है। इसका उद्देश्य इन्वेंट्री को न्यूनतम करना, लागत कम करना और अपशिष्ट को समाप्त करना है। यह वैज्ञानिक प्रबन्ध के दक्षता सिद्धांत पर आधारित है।

प्रश्न 7

नियोजन-प्रक्रिया में "विकल्पों का मूल्यांकन" को समझाइये।

Explain the "Evaluating alternative course" in planning process.

उत्तर: नियोजन प्रक्रिया में "विकल्पों का मूल्यांकन" का अर्थ है विभिन्न संभावित कार्ययोजनाओं का विश्लेषण करना ताकि सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन किया जा सके। इसमें प्रत्येक विकल्प के लाभ, हानि, लागत, जोखिम और संभावित परिणामों का आकलन किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक कंपनी नए उत्पाद के लिए विभिन्न विपणन रणनीतियों का मूल्यांकन कर सकती है।

प्रश्न 8

प्रबन्धकीय नियन्त्रण की कोई दो आधुनिक तकनीकों के नाम लिखिये।

Write the names of any two modern techniques of managerial control.

उत्तर: प्रबन्धकीय नियन्त्रण की दो आधुनिक तकनीकें निम्नलिखित हैं:

  1. प्रबन्ध सूचना प्रणाली (MIS): यह कम्प्यूटर आधारित प्रणाली है जो प्रबन्धकों को निर्णय लेने के लिए समय पर सटीक जानकारी प्रदान करती है।
  2. बजटीय नियन्त्रण (Budgetary Control): इसमें विभिन्न विभागों के लिए बजट तैयार किए जाते हैं और वास्तविक प्रदर्शन की तुलना बजट से की जाती है।

प्रश्न 9

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की स्थापना भारत सरकार द्वारा एक अंतरिम प्रशासनिक निकाय के रूप में कब की गई?

When did Government of India established the Securities and Exchange Board of India (SEBI) as an interim administrative body?

उत्तर: भारत सरकार ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की स्थापना एक अंतरिम प्रशासनिक निकाय के रूप में 12 अप्रैल, 1988 को की थी। बाद में इसे 1992 में संसद के अधिनियम द्वारा एक वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया।

9) उद्यमिता व प्रबन्ध में कोई एक अन्तर बताइये।

Mention any one difference between "Entrepreneurship and Management".

उत्तर / Answer:

एक अन्तर: उद्यमिता (Entrepreneurship) एक नए व्यवसाय की स्थापना और नवाचार पर केंद्रित है, जबकि प्रबन्ध (Management) मौजूदा संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करके संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने पर केंद्रित है।

One difference: Entrepreneurship focuses on starting a new business and innovation, while Management focuses on efficiently using existing resources to achieve organizational goals.

0) प्रबन्ध की तकनीक कार्य पद्धति अध्ययन का उद्देश्य स्पष्ट कीजिये।

Explain the objective of "Method Study Technique" of scientific management.

उत्तर / Answer:

कार्य पद्धति अध्ययन (Method Study) का उद्देश्य कार्य करने की सबसे कुशल और सरल विधि का पता लगाना है। इसके तहत कार्य के प्रत्येक चरण का विश्लेषण करके अनावश्यक गतिविधियों को हटाया जाता है, जिससे समय, श्रम और लागत की बचत होती है तथा उत्पादकता बढ़ती है।

The objective of Method Study is to find the most efficient and simplest way of doing a job. It involves analyzing each step of a task to eliminate unnecessary movements, thereby saving time, labor, and cost, and increasing productivity.

खण्ड - ब / SECTION - B

1) निम्नलिखित का अर्थ बताइये -

What is the meaning of the following :

  1. स्थायी सम्पति (Fixed Assets)
  2. वित्तीय नियोजन (Financial Planning)

उत्तर / Answer:

I) स्थायी सम्पति (Fixed Assets): ये दीर्घकालिक भौतिक संपत्तियाँ हैं जिनका उपयोग व्यवसाय में एक वर्ष से अधिक समय तक किया जाता है, जैसे भूमि, भवन, मशीनरी, और फर्नीचर। इन्हें पुनर्विक्रय के लिए नहीं खरीदा जाता।

II) वित्तीय नियोजन (Financial Planning): यह एक प्रक्रिया है जिसमें किसी संगठन के लिए आवश्यक पूंजी की मात्रा, उसके स्रोतों और उपयोग का निर्धारण किया जाता है, ताकि व्यावसायिक लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सके।

I) Fixed Assets: These are long-term physical assets used in a business for more than one year, such as land, buildings, machinery, and furniture. They are not purchased for resale.

II) Financial Planning: It is a process of determining the amount of capital required, its sources, and its utilization in an organization to achieve business goals effectively.

2) कार्यात्मक संगठन ढांचा किन संस्थानों के लिए उपयुक्त है?

The functional structure is suitable for which type of organisations?

उत्तर / Answer:

कार्यात्मक संगठन ढांचा (Functional Structure) उन संस्थानों के लिए उपयुक्त है जो एक ही प्रकार के उत्पाद या सेवा का उत्पादन करते हैं और जिनका आकार छोटा या मध्यम होता है। यह उन संगठनों के लिए भी उपयुक्त है जहाँ विशेषज्ञता और कार्यों का विभाजन आवश्यक होता है।

The functional structure is suitable for organisations that produce a single type of product or service and are small or medium in size. It is also suitable for organisations where specialisation and division of work are required.

3) नियुक्तिकरण प्रक्रिया में 'पारिश्रमिक' को समझाइये।

Explain the "Compensation" in staffing process.

उत्तर / Answer:

नियुक्तिकरण प्रक्रिया में 'पारिश्रमिक' (Compensation) का अर्थ है कर्मचारियों को उनके कार्य के बदले दिया जाने वाला सभी प्रकार का भुगतान और लाभ। इसमें मूल वेतन, महंगाई भत्ता, बोनस, कमीशन, और अन्य गैर-मौद्रिक लाभ (जैसे चिकित्सा सुविधा, आवास) शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को प्रेरित करना और उनकी सेवाओं को बनाए रखना है।

In the staffing process, 'Compensation' refers to all types of payments and benefits given to employees in exchange for their work. It includes basic salary, dearness allowance, bonus, commission, and other non-monetary benefits (such as medical facilities, housing). Its objective is to motivate employees and retain their services.

4) रौजर्स के अनुसार संप्रेषण की परिभाषा दीजिये। [2]

Define "Communication" according to Rogers.

रौजर्स के अनुसार संप्रेषण की परिभाषा: रौजर्स के अनुसार, "संप्रेषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा विचारों को एक स्रोत से एक या अधिक प्राप्तकर्ताओं तक पहुँचाया जाता है, जिससे उनके व्यवहार में परिवर्तन आता है।"

According to Rogers: "Communication is a process by which ideas are transmitted from a source to one or more receivers, with the intent to change their behavior."

5) “उद्यमिता-विकास" को चार्ट द्वारा प्रदर्शित कीजिये। [2]

Show the "Entrepreneurship-development" with the help of a chart.

उद्यमिता-विकास का चार्ट:

उद्यमिता-विकास
      |
      ├── उद्यमी (Entrepreneur)
      │       ├── नवाचार (Innovation)
      │       ├── जोखिम उठाना (Risk-taking)
      │       └── संगठन (Organization)
      │
      ├── उद्यम (Enterprise)
      │       ├── उत्पादन (Production)
      │       ├── विपणन (Marketing)
      │       └── वित्त (Finance)
      │
      └── विकास (Development)
              ├── आर्थिक विकास (Economic Growth)
              ├── रोजगार सृजन (Employment Generation)
              └── सामाजिक परिवर्तन (Social Change)

6) सुरक्षा के आधार पर पूँजी बाजार व मुद्रा बाजार में अन्तर बताइये। [2]

Differentiate between Capital Market and Money Market on the basis of "Safety".

आधार (Basis) पूँजी बाजार (Capital Market) मुद्रा बाजार (Money Market)
सुरक्षा (Safety) अपेक्षाकृत कम सुरक्षित, क्योंकि दीर्घकालिक निवेश में जोखिम अधिक होता है। अधिक सुरक्षित, क्योंकि अल्पकालिक प्रतिभूतियों में डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है।

7) “आपके विचार में, क्या उद्यमिता विधि-सम्मत तथा उद्देश्यपूर्ण क्रिया है ?" कैसे ? [2]

"In your opinion, Is Entrepreneurship a lawful and purposeful Activity?" How?

हाँ, उद्यमिता विधि-सम्मत तथा उद्देश्यपूर्ण क्रिया है।

  • विधि-सम्मत (Lawful): उद्यमिता कानूनी ढाँचे के अंतर्गत कार्य करती है, जैसे कंपनी पंजीकरण, कर भुगतान, श्रम कानूनों का पालन आदि।
  • उद्देश्यपूर्ण (Purposeful): इसका उद्देश्य लाभ कमाना, रोजगार सृजन, नवाचार और सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।

8) वितरण-माध्य के प्रकार को चार्ट द्वारा प्रदर्शित कीजिये। [2]

Show the types of channels with the help of a chart.

वितरण-माध्य के प्रकार:

वितरण-माध्य (Channels of Distribution)
      |
      ├── प्रत्यक्ष वितरण (Direct Channel)
      │       └── निर्माता → उपभोक्ता
      │
      └── अप्रत्यक्ष वितरण (Indirect Channel)
              ├── एक-स्तरीय: निर्माता → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता
              ├── दो-स्तरीय: निर्माता → थोक विक्रेता → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता
              └── तीन-स्तरीय: निर्माता → एजेंट → थोक विक्रेता → खुदरा विक्रेता → उपभोक्ता

खण्ड - C (SECTION - C)

9) किसी भी उपयुक्त उपभोक्ता फोरम के समक्ष शिकायत कौन कर सकते हैं? 'राष्ट्रीय कमीशन' पर संक्षिप्त में टिप्पणी कीजिये। [4]

Who can file a complaint before the appropriate consumer forum? Write a short note on "National Commission."

शिकायत करने वाले व्यक्ति (Who can file a complaint):

  • कोई उपभोक्ता (Consumer)
  • उपभोक्ता का कोई प्रतिनिधि (Representative of consumer)
  • एक या अधिक उपभोक्ता, यदि उनके हित समान हों (One or more consumers with common interest)
  • पंजीकृत उपभोक्ता संघ (Registered consumer association)
  • केंद्र या राज्य सरकार (Central or State Government)

राष्ट्रीय कमीशन पर टिप्पणी (Note on National Commission):

  • स्थापना: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत सर्वोच्च उपभोक्ता न्यायालय के रूप में स्थापित।
  • अधिकार क्षेत्र: 1 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के दावों की सुनवाई करता है।
  • अपील: राज्य आयोग के आदेशों के विरुद्ध अपील सुनता है।
  • सदस्य: एक अध्यक्ष और अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
  • कार्य: उपभोक्ता शिकायतों का निवारण, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक, और मुआवजा प्रदान करना।

20) निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर प्रबन्ध का महत्व समझाइये - [4]

I) प्रबन्ध गतिशील संगठन का निर्माण करता है।

II) प्रबन्ध व्यक्तिगत उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होता है।

Explain the importance of management on the basis of following points:

I) Management creates a dynamic organisation.

II) Management helps in achieving personal objectives.

प्रबन्ध का महत्व (Importance of Management):

I) प्रबन्ध गतिशील संगठन का निर्माण करता है (Management creates a dynamic organisation):

  • प्रबन्ध संगठन को बदलते परिवेश के अनुकूल बनाता है, जैसे नई तकनीक, बाजार की माँग, और प्रतिस्पर्धा।
  • यह नवाचार और परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है, जिससे संगठन स्थिर न रहकर लगातार विकास करता है।
  • प्रबन्ध कर्मचारियों को प्रशिक्षण और विकास के अवसर प्रदान करता है, जिससे वे बदलती परिस्थितियों में प्रभावी रहते हैं।
  • उदाहरण: कोई कंपनी नई तकनीक अपनाकर अपने उत्पादन को अधिक कुशल बनाती है, यह प्रबन्ध की गतिशीलता को दर्शाता है।

II) प्रबन्ध व्यक्तिगत उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होता है (Management helps in achieving personal objectives):

  • प्रबन्ध कर्मचारियों को उनके व्यक्तिगत लक्ष्यों, जैसे वेतन वृद्धि, पदोन्नति, और कार्य संतुष्टि, को प्राप्त करने में मदद करता है।
  • यह कार्यों का उचित विभाजन और अधिकारों का विकेंद्रीकरण करता है, जिससे कर्मचारियों को आत्म-विकास के अवसर मिलते हैं।
  • प्रबन्ध प्रेरणा और नेतृत्व के माध्यम से कर्मचारियों को संगठन के लक्ष्यों के साथ अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को जोड़ने में सहायता करता है।
  • उदाहरण: एक कर्मचारी जो कड़ी मेहनत करता है, प्रबन्ध उसे पदोन्नति देकर उसके व्यक्तिगत उद्देश्य को पूरा करने में मदद करता है।

21) एक प्रबन्धक के रूप में, नियोजन-प्रक्रिया के प्रथम दो चरणों को समझाइये। [4]

As a manager, explain the first two steps of planning process.

नियोजन-प्रक्रिया के प्रथम दो चरण:

  1. उद्देश्यों का निर्धारण (Setting Objectives): प्रबन्धक सबसे पहले संगठन के लक्ष्यों और उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। ये उद्देश्य स्पष्ट, मापने योग्य और प्राप्त करने योग्य होने चाहिए। उदाहरण के लिए, बिक्री में 20% की वृद्धि करना।
  2. पूर्वानुमान लगाना (Forecasting): दूसरे चरण में, प्रबन्धक भविष्य की परिस्थितियों का अनुमान लगाता है। इसमें आंतरिक और बाह्य कारकों (जैसे बाजार की मांग, प्रतिस्पर्धा, संसाधनों की उपलब्धता) का विश्लेषण किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियोजन यथार्थवादी और प्रभावी हो।

22) हेनरी फेयोल द्वारा प्रतिपादित निम्नलिखित सिद्धान्तों को समझाइये :- [4]

I) पहल क्षमता
II) कर्मचारियों को प्रतिफल

Explain the following principles propounded by Henri Fayol :-
I) Initiative
II) Remuneration of employees

I) पहल क्षमता (Initiative): इस सिद्धांत के अनुसार, कर्मचारियों को अपने कार्यों में स्वतंत्रता और रचनात्मकता दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। प्रबन्धकों को चाहिए कि वे कर्मचारियों को नए विचारों और योजनाओं को लागू करने का अवसर दें, जिससे उनकी कार्यक्षमता और संतुष्टि बढ़ती है।

II) कर्मचारियों को प्रतिफल (Remuneration of Employees): यह सिद्धांत कहता है कि कर्मचारियों को उनके कार्य के अनुरूप उचित और न्यायसंगत वेतन या पारिश्रमिक मिलना चाहिए। प्रतिफल में वित्तीय (वेतन, बोनस) और गैर-वित्तीय (प्रशंसा, पदोन्नति) दोनों पहलू शामिल हो सकते हैं, ताकि कर्मचारी प्रेरित रहें और संगठन के प्रति वफादार बने रहें।

23) भर्ती के बाह्य स्त्रोतों के प्रयोग से होने वाले किन्हीं चार लाभों को समझाइये । [4]

Explain any four merits of using external sources of recruitment.

बाह्य स्रोतों से भर्ती के चार लाभ:

  1. नई प्रतिभा और नवीन विचार: बाहरी भर्ती से संगठन में नए कौशल, अनुभव और दृष्टिकोण आते हैं, जो नवाचार को बढ़ावा देते हैं।
  2. व्यापक चयन: बाहरी स्रोतों से बड़ी संख्या में उम्मीदवार उपलब्ध होते हैं, जिससे सबसे योग्य व्यक्ति का चयन करना आसान हो जाता है।
  3. प्रशिक्षण लागत में कमी: बाहर से अनुभवी कर्मचारियों को लाने पर प्रशिक्षण पर खर्च कम होता है, क्योंकि वे पहले से ही कार्य के लिए तैयार होते हैं।
  4. आंतरिक प्रतिस्पर्धा: बाहरी भर्ती से मौजूदा कर्मचारियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, जिससे वे अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए प्रेरित होते हैं।

24) निम्नलिखित कारकों को समझाइये जो लाभांश निर्णय को प्रभावित करते हैं - [4]

I) लाभांश का स्थायित्व
II) करारोपण नीति

Explain the following factors affecting dividend decision :-
I) Stability of Dividends
II) Taxation policy

I) लाभांश का स्थायित्व (Stability of Dividends): निवेशक अक्सर उन कंपनियों को पसंद करते हैं जो नियमित और स्थिर लाभांश देती हैं। यदि कंपनी लगातार लाभांश देती है, तो निवेशकों का विश्वास बढ़ता है और शेयरों की बाजार कीमत स्थिर रहती है। प्रबन्धन को लाभांश नीति बनाते समय इस स्थिरता को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।

II) करारोपण नीति (Taxation Policy): सरकार द्वारा लाभांश पर लगाए गए कर (जैसे लाभांश वितरण कर या आयकर) कंपनी के लाभांश निर्णय को प्रभावित करते हैं। यदि लाभांश पर कर अधिक है, तो कंपनी कम लाभांश देने का निर्णय ले सकती है और अधिक लाभ को पुनर्निवेशित कर सकती है। इसके विपरीत, कम कर दरें अधिक लाभांश वितरण को प्रोत्साहित कर सकती हैं।

25) प्रबन्ध - सूचना पद्धति से प्रबन्धकों को होने वाले कोई चार लाभों को बताइये। [4]

Mention any four advantages of "Management Information System" to Managers.

प्रबन्ध-सूचना पद्धति (MIS) के प्रबन्धकों को चार लाभ:

  1. समय पर सूचना: MIS प्रबन्धकों को सही समय पर आवश्यक डेटा और रिपोर्ट प्रदान करता है, जिससे त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने में मदद मिलती है।
  2. निर्णय लेने में सुधार: यह प्रबन्धकों को सटीक और विश्लेषणात्मक जानकारी देता है, जिससे वे बेहतर रणनीतिक और परिचालन निर्णय ले सकते हैं।
  3. समन्वय में वृद्धि: MIS विभिन्न विभागों के बीच सूचना के प्रवाह को सुगम बनाता है, जिससे संगठन में बेहतर समन्वय और सहयोग होता है।
  4. नियंत्रण और निगरानी: यह प्रबन्धकों को संगठन के प्रदर्शन की निगरानी करने और मानकों से विचलन को तुरंत पकड़ने में सक्षम बनाता है, जिससे प्रभावी नियंत्रण संभव होता है।

26) व्यावसायिक पर्यावरण के तत्वों को चार्ट द्वारा प्रदर्शित कीजिये | [4]

Show "the elements of Business Environment" with the help of a chart.

व्यावसायिक पर्यावरण के तत्व:

व्यावसायिक पर्यावरण
  • आंतरिक पर्यावरण (Internal Environment)
    • मूल्य प्रणाली (Value System)
    • मिशन और उद्देश्य (Mission & Objectives)
    • प्रबन्धन संरचना (Management Structure)
    • संसाधन (Resources)
  • बाह्य पर्यावरण (External Environment)
    • सूक्ष्म पर्यावरण (Micro Environment)
      • ग्राहक (Customers)
      • आपूर्तिकर्ता (Suppliers)
      • प्रतिस्पर्धी (Competitors)
      • बिचौलिए (Intermediaries)
    • स्थूल पर्यावरण (Macro Environment)
      • आर्थिक (Economic)
      • सामाजिक-सांस्कृतिक (Socio-Cultural)
      • राजनीतिक-कानूनी (Political-Legal)
      • तकनीकी (Technological)
      • वैश्विक (Global)

27) ओ.टी.सी. बाजार के कोई चार लाभ बताइये। [4]

State any four advantages of O.T.C. Market.

ओ.टी.सी. (Over-the-Counter) बाजार के चार लाभ:

  1. लचीलापन: OTC बाजार में व्यापार का समय और शर्तें लचीली होती हैं, जिससे खरीदार और विक्रेता आपसी सहमति से लेन-देन कर सकते हैं।
  2. गुमनामी: इसमें लेन-देन गुमनाम रूप से किया जा सकता है, जो बड़े निवेशकों के लिए लाभदायक होता है क्योंकि वे बाजार पर प्रभाव डाले बिना बड़ी मात्रा में शेयर खरीद या बेच सकते हैं।
  3. कम लागत: OTC बाजार में लेन-देन की लागत (ब्रोकरेज शुल्क) आमतौर पर संगठित एक्सचेंजों की तुलना में कम होती है।
  4. विविधता: यह बाजार उन कंपनियों के शेयरों में व्यापार की सुविधा प्रदान करता है जो मुख्य एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं हैं, जिससे निवेशकों को अधिक विकल्प मिलते हैं।

खण्ड - द (SECTION - D)

28.

उपभोक्ता उत्पादों की श्रेणी के अन्तर्गत विशिष्ट उत्पाद का अर्थ बताइये। इसकी विशेषताएँ बताइये। [6]

अर्थ: विशिष्ट उत्पाद वे उपभोक्ता उत्पाद होते हैं जिनमें अद्वितीय विशेषताएँ या ब्रांड पहचान होती है और जिनके लिए उपभोक्ता विशेष प्रयास करने को तैयार रहते हैं। उदाहरण: लक्जरी कारें, डिजाइनर कपड़े, महंगे आभूषण।

विशेषताएँ:

  • उपभोक्ता इन उत्पादों की खरीद के लिए अधिक समय और प्रयास करते हैं।
  • इनकी कीमत अधिक होती है।
  • ये उत्पाद सीमित स्थानों पर ही उपलब्ध होते हैं।
  • इनमें ब्रांड निष्ठा अधिक पाई जाती है।
  • इनकी मांग सीमित होती है।
  • इन उत्पादों की खरीद में व्यक्तिगत विक्रय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

अथवा

ब्राण्ड के नाम का चयन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? (कोई 6)

ब्रांड नाम चयन में ध्यान देने योग्य बातें:

  1. ब्रांड नाम छोटा, सरल और उच्चारण में आसान होना चाहिए।
  2. यह याद रखने में आसान होना चाहिए।
  3. ब्रांड नाम उत्पाद की गुणवत्ता और विशेषताओं को दर्शाने वाला होना चाहिए।
  4. यह अद्वितीय और विशिष्ट होना चाहिए ताकि प्रतिस्पर्धियों से अलग पहचान बने।
  5. ब्रांड नाम कानूनी रूप से पंजीकृत होने योग्य होना चाहिए।
  6. यह सभी बाजारों और संस्कृतियों में सकारात्मक अर्थ रखता हो।

29.

कार्यात्मक संगठन ढांचे से आपका क्या आशय है? इसके गुणों का वर्णन करिये। (कोई पाँच) [6]

आशय: कार्यात्मक संगठन ढांचा वह संगठनात्मक संरचना है जिसमें संगठन को विभिन्न कार्यों (जैसे उत्पादन, विपणन, वित्त, मानव संसाधन) के आधार पर विभाजित किया जाता है। प्रत्येक विभाग का अपना विशेषज्ञ प्रमुख होता है जो उस क्षेत्र के कार्यों का निरीक्षण करता है।

गुण (पाँच):

  1. विशेषज्ञता: प्रत्येक कार्य क्षेत्र में विशेषज्ञों की नियुक्ति से कार्य कुशलता बढ़ती है।
  2. स्पष्टता: कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट समझ होती है।
  3. नियंत्रण: प्रबंधन के लिए नियंत्रण आसान हो जाता है क्योंकि प्रत्येक विभाग का एक प्रमुख होता है।
  4. प्रशिक्षण: कर्मचारियों को उनके कार्य क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
  5. लागत कम: संसाधनों का कुशल उपयोग होने से परिचालन लागत कम होती है।

अथवा

अधिकार, उत्तरदायित्व व उत्तरदेयता के मध्य आप किस प्रकार अन्तर करेंगे ?

आधार अधिकार (Authority) उत्तरदायित्व (Responsibility) उत्तरदेयता (Accountability)
अर्थ आदेश देने और निर्णय लेने का अधिकार कार्य करने का दायित्व परिणामों के लिए जवाबदेही
उत्पत्ति पद से प्राप्त होता है अधिकार से उत्पन्न होता है उत्तरदायित्व से उत्पन्न होती है
प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर नीचे से ऊपर की ओर नीचे से ऊपर की ओर
हस्तांतरण हस्तांतरित किया जा सकता है हस्तांतरित नहीं किया जा सकता हस्तांतरित नहीं की जा सकती
समाप्ति पद छोड़ने पर समाप्त कार्य पूरा होने पर समाप्त परिणामों के मूल्यांकन तक बनी रहती है

30.

प्रभावी संप्रेषण की बाधाओं को दूर करने के लिए आप किन उपायों को अपनायेंगे ? (कोई 6) [6]

प्रभावी संप्रेषण की बाधाओं को दूर करने के उपाय:

  1. स्पष्टता: संदेश सरल और स्पष्ट भाषा में होना चाहिए।
  2. प्रतिपुष्टि: संदेश प्राप्त करने के बाद प्रतिपुष्टि लेनी चाहिए।
  3. उपयुक्त माध्यम: संदेश के अनुसार सही माध्यम (मौखिक, लिखित, इलेक्ट्रॉनिक) का चयन करें।
  4. सक्रिय श्रवण: संदेश प्राप्त करते समय ध्यानपूर्वक सुनें और समझें।
  5. भावनात्मक नियंत्रण: संप्रेषण के दौरान भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
  6. सांस्कृतिक संवेदनशीलता: विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों का सम्मान करें।

अथवा

प्रबन्ध में संप्रेषण के महत्व को आप किस प्रकार स्पष्ट करेंगे ? (कोई 6)

प्रबंध में संप्रेषण का महत्व:

  1. योजना निर्माण: प्रभावी संप्रेषण से योजनाओं को स्पष्ट रूप से समझाया जा सकता है।
  2. निर्णय लेना: सूचनाओं के आदान-प्रदान से बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।
  3. समन्वय: विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में सहायक।
  4. नियंत्रण: प्रबंधकों को कर्मचारियों के प्रदर्शन की जानकारी मिलती है।
  5. प्रेरणा: कर्मचारियों को प्रेरित करने और उनका मनोबल बढ़ाने में सहायक।
  6. संघर्ष समाधान: गलतफहमियों को दूर कर संघर्षों का समाधान करता है।