RBSE Class 12th 2017 Music Vocal Or Instrumental-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70-2017 Previous Year Papers
Music Vocal Or Instrumental-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70-2017 from the 2017 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | Music Vocal Or Instrumental-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2017 Music Vocal Or Instrumental-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70-2017
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Rajasthan Board Class 12th Music Vocal Or Instrumental-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2017
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2017
संगीत-कण्ठ अथवा वाद्य
(MUSIC-VOCAL OR INSTRUMENTAL)
समय : 3¼ घण्टे पूर्णाक : 24
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must first write his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
नामांक Roll No.
SLNo. :
No. of Questions — 8+9+8 — SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70-Music (V&I)
No. of Printed Pages — 07
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER
SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V&I) 817 [ Turn Over
गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के प्रश्नों के उत्तर लिखें | सितार, सरोद, वायलिन, दिलरुबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें ।
Candidates offering vocal music should attempt only the questions of Part - A. Candidates offering Sitar, Sarod, Violin, Dilruba or Israj, Flute and Guitar should attempt only the questions of Part - B and candidates offering Tabla and Pakhawaj should attempt only the questions of Part - C
उत्तर-पुस्तिका के मुखपृष्ठ पर विषय स्पष्ट रूप से लिखें |
Write your subject clearly on the cover page of the answer book.
भाग - अ (गायन)
PART - A (VOCAL)
-
निम्नलिखित को समझाइये :- [1+1+1=3]
- लय
- कण
- मूर्च्छना
Explain the following :-
- Laya
- Kana
- Moorchhana
उत्तर:
- लय (Laya): संगीत में समय के नियमित अंतराल को लय कहते हैं। यह गति का नियामक तत्व है, जो तीन प्रकार की होती है - विलंबित, मध्य और द्रुत।
- कण (Kana): यह एक अलंकार है जिसमें एक स्वर को बजाने या गाने से पहले उसके पास के किसी अन्य स्वर को बहुत ही सूक्ष्म रूप से छुआ जाता है। इसे 'स्पर्श स्वर' भी कहते हैं।
- मूर्च्छना (Moorchhana): यह सप्तक के सातों स्वरों को क्रम से एक निश्चित स्थान से आरंभ करके गाने की प्रक्रिया है। यह राग के विस्तार में सहायक होती है।
-
किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :- [2+2=4]
- पूर्वांग वादी, उत्तरांग वादी राग
- किसी एक घराने की विशेषताएँ
- थाट-राग वर्गीकरण
- अध्वदर्शक स्वर
Write brief notes on any two of the following :-
- Purvanga Vadi, Uttaranga Vadi Raga.
- Characteristics of any one Gharana.
- Thata - Raga classification.
- Adhvadarshak swar.
उत्तर (किन्हीं दो पर):
- पूर्वांग वादी, उत्तरांग वादी राग: राग के स्वरों को दो भागों में बांटा जाता है - पूर्वांग (सा से म) और उत्तरांग (प से सां)। जिस राग में वादी स्वर पूर्वांग में होता है, उसे पूर्वांग वादी राग कहते हैं, जैसे राग भैरव। जिस राग में वादी स्वर उत्तरांग में होता है, उसे उत्तरांग वादी राग कहते हैं, जैसे राग मारवा।
- किसी एक घराने की विशेषताएँ (जैसे ग्वालियर घराना): ग्वालियर घराना ख्याल गायन का सबसे प्राचीन घराना है। इसकी विशेषताएँ हैं - स्वरों की स्पष्टता, सरल और सीधी रचनाएँ, बोल-बांट का प्रचुर प्रयोग, और राग के मूड को बनाए रखना। इसमें तानों की बजाय स्थायी और अंतरे पर अधिक बल दिया जाता है।
SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V&I) 87
प्राचीन भारतीय संगीत के सन्दर्भ में आचार्य भरत के योगदान का वर्णन कीजिए | [3]
Describe the contribution of Acharya Bharat in the reference of Ancient Indian Music.
आचार्य भरत को भारतीय संगीत का जनक माना जाता है। उन्होंने 'नाट्यशास्त्र' नामक महान ग्रंथ की रचना की, जिसमें संगीत, नृत्य और नाट्य का विस्तृत वर्णन है। उन्होंने स्वर, ताल, राग, और वाद्यों के सिद्धांतों को व्यवस्थित किया। उनके द्वारा प्रतिपादित 'भरत मुनि का नाट्यशास्त्र' भारतीय संगीत का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ग्रंथ है, जिसमें 22 श्रुतियों का सिद्धांत, राग-रागिनी वर्गीकरण, और ताल प्रणाली का उल्लेख मिलता है।
निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए :- [++=3]
Answer the following questions :-
- पं. भातखण्डे का उपनाम ।
Pen name of pt. Bhatkhande.
पं. विष्णु नारायण भातखण्डे का उपनाम 'चतुर' था। - पं. भातखण्डे द्वारा रचित दो ग्रन्थ ।
Two treatise of pt. Bhatkhande.
उनके द्वारा रचित दो प्रमुख ग्रंथ हैं: (i) 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' (ii) 'संगीत शास्त्र' (या 'क्रमिक पुस्तक मालिका')। - पं. भातखण्डे द्वारा स्वीकृत शुद्ध थाट का नाम ।
The name of 'Shuddha Thata' according to pt. Bhatkhande.
पं. भातखण्डे द्वारा स्वीकृत शुद्ध थाट का नाम 'बिलावल थाट' है।
राग भैरव का सम्पूर्ण परिचय लिखिए | [3]
Write the complete introduction of 'Raga Bhairav'.
राग भैरव का परिचय:
- थाट: भैरव
- जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (सात स्वर)
- आरोह: सा रे ग म प ध नि सां
- अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा
- वादी स्वर: ध
- संवादी स्वर: रे
- समय: प्रातःकाल (सूर्योदय से पूर्व)
- पकड़: ग म ध प म ग रे सा
- स्वरूप: यह एक गंभीर और शांत राग है, जिसमें कोमल रे और कोमल ध का प्रयोग होता है।
राग पहचानिए :- [++l=3]
Identify the Ragas :-
- त्िसा,मगमगरेसा।
NiSa, Ma Ga Ma Ga Re Sa.
यह राग भैरव का स्वरूप है। - साम,मप,मंपथधप,मंरेसा।
Sa Ma, Ma Pa, Ma Pa Dha Pa, Ma Re Sa.
यह राग यमन का स्वरूप है। - साध,पधमपमगरेसा।
Sa Dha, Pa Dha Ma Pa Ma Ga Re Sa.
यह राग भूपाली का स्वरूप है।
पाठ्यक्रम की किसी एक राग में 'छोटा ख्याल' की स्वरलिपि लिखिए | [3]
Write the notation of a 'Druta Khayal' of any one Raga of the syllabus.
राग यमन में छोटा ख्याल (तेज ताल):
स्थायी:
सा नि ध प म ग रे सा | सा रे ग म प ध नि सां ||
सां नि ध प म ग रे सा | सा रे ग म प ध नि सां ||
अंतरा:
ग म प ध नि सां रे सां | नि ध प म ग रे सा नि ||
ध प म ग रे सा नि ध | प म ग रे सा नि ध प ||
तेज ताल का ठेका: धा धिं धा धिं धा धिं धा धिं | धा धिं धा धिं धा धिं धा धिं ||
अथवा
“ताल झपताल' का परिचय, ठेका व दुगुन लिखिए | [++l=3]
Write the introduction, theka and Dugun of 'Tala Jhaptala'.
ताल झपताल का परिचय:
- मात्राएँ: 10
- खंड: 2+3+2+3
- ताली: 1 (पहली मात्रा), 3 (तीसरी मात्रा), 6 (छठी मात्रा)
- खाली: 8 (आठवीं मात्रा)
- सम: पहली मात्रा
ठेका:
धिं ना धिं धिं ना | ती ना धिं धिं ना ||
दुगुन (दोगुनी गति):
धिं ना धिं धिं ना ती ना | धिं धिं ना धिं ना धिं धिं ||
ना ती ना धिं धिं ना धिं ना | धिं धिं ना ती ना धिं धिं ||
भाग - 4 (Part - 4)
प्रश्न 8
अपने पाठ्यक्रम से किसी एक संगीतज्ञ का जीवन-परिचय एवं संगीत जगत में योगदान लिखिए। [3]
Write the life sketch and contribution of any one musician of your syllabus.
उदाहरण: पंडित रविशंकर (सितार वादक)
जीवन-परिचय: पंडित रविशंकर का जन्म 7 अप्रैल 1920 को वाराणसी में हुआ। वे भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान सितार वादक थे। उन्होंने अपने गुरु बाबा अलाउद्दीन खान से संगीत की शिक्षा ली।
संगीत जगत में योगदान: रविशंकर ने सितार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने पश्चिमी संगीतकारों जैसे जॉर्ज हैरिसन के साथ मिलकर भारतीय और पश्चिमी संगीत का संगम किया। उन्हें भारत रत्न, ग्रैमी अवॉर्ड और कई अन्य सम्मान प्राप्त हुए।
भाग - 8 (Part - 8)
(सितार / सरोद / वायलिन / दिलरुबा अथवा इसराज / बांसुरी / गिटार)
(Sitar / Sarod / Violin / Dilruba or Israj / Flute / Guitar)
प्रश्न 1
निम्नलिखित को समझाइये: [1+1+1=3]
i) क्रिंतन
ii) गमक
iii) अलंकार
Explain the following:
i) Krintan
ii) Gamak
iii) Alankar
i) क्रिंतन (Krintan): यह एक प्रकार का तान है जिसमें स्वरों को तेजी से ऊपर-नीचे किया जाता है। इसमें स्वरों को खींचकर या मोड़कर गाया या बजाया जाता है।
ii) गमक (Gamak): गमक एक संगीतिक अलंकार है जिसमें स्वरों को हिलाकर या कंपन करके गाया जाता है। यह राग की शोभा बढ़ाता है और भावनाओं को व्यक्त करने में सहायक होता है।
iii) अलंकार (Alankar): अलंकार संगीत में स्वरों के विशिष्ट क्रम को कहते हैं, जो राग की सुंदरता और विशेषता को बढ़ाते हैं। ये स्वरों के आरोह-अवरोह में विभिन्न प्रकार के पैटर्न होते हैं।
प्रश्न 2
किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए: [1½+1½=3]
i) घराना क्या है?
ii) संधि प्रकाश राग
iii) पूर्व राग, उत्तर राग
iv) परमेल प्रवेशक राग
Write brief notes on any two:
i) What is Gharana?
ii) Sandhi Prakash Raga.
iii) Purva Raga, Uttar Raga.
iv) Parmel Praveshak Raga.
i) घराना (Gharana): घराना संगीत की एक परंपरा या शैली है जो गुरु-शिष्य परंपरा से चली आ रही है। प्रत्येक घराने की अपनी विशेष गायन या वादन शैली, रागों की प्रस्तुति और तकनीक होती है। उदाहरण: ग्वालियर घराना, आगरा घराना, जयपुर घराना आदि।
ii) संधि प्रकाश राग (Sandhi Prakash Raga): ये वे राग हैं जो संधि काल (सूर्योदय या सूर्यास्त के समय) में गाए या बजाए जाते हैं। इनमें कोमल स्वरों का प्रयोग अधिक होता है और ये शांत एवं गंभीर भाव उत्पन्न करते हैं। उदाहरण: राग भैरवी, राग मारवा, राग पूरिया आदि।
SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V&I) 87
निम्न प्रश्नों का उत्तर दीजिए :- [1+1=2]
-
i) भरत ने “सारणा चतुष्टयी” के लिए कितनी वीणाओं का प्रयोग किया ?
भरत ने “सारणा चतुष्टयी” के लिए दो वीणाओं का प्रयोग किया।
-
ii) भरत ने श्रुतियों की संख्या कितनी मानी हैं ?
भरत ने श्रुतियों की संख्या 22 मानी हैं।
Answer the following questions :-
-
i) How many Veenas were used by Bharat for "Sarana Chatushtayi"?
Bharat used two Veenas for "Sarana Chatushtayi".
-
ii) How many Number of Shrutis are there according to Bharat?
According to Bharat, the number of Shrutis is 22.
आधुनिक भारतीय संगीत के विकास में पं. विष्णु नारायण भातखण्डे की भूमिका का वर्णन कीजिए। [2]
पं. विष्णु नारायण भातखण्डे ने आधुनिक भारतीय संगीत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने संगीत शिक्षा के लिए 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' नामक पुस्तकों की श्रृंखला लिखी, जिसमें रागों का वर्गीकरण और स्वरलिपि पद्धति विकसित की। उन्होंने 'भातखण्डे संगीत संस्थान' की स्थापना की और संगीत को शिक्षा के मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया। उनके द्वारा संकलित 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' और 'क्रमिक पुस्तक मालिका' आज भी संगीत शिक्षा के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
Describe Pt. Vishnu Narayan Bhatkhande's contribution in the development of Modern Indian Music. [2]
Pt. Vishnu Narayan Bhatkhande made significant contributions to the development of modern Indian music. He systematized Indian classical music by developing a notation system and classification of ragas. He authored the 'Hindustani Sangeet Paddhati' series of books, which became the foundation for music education. He established the 'Bhatkhande Sangeet Sansthan' in Lucknow and worked to bring music into mainstream education. His compilations like 'Kramik Pustak Malika' are still widely used for learning and teaching Hindustani classical music.
राग भीमपलासी का सम्पूर्ण परिचय लिखिए। [2]
राग भीमपलासी का परिचय:
- थाट: काफी
- जाति: औडव-संपूर्ण (आरोह में 5 स्वर, अवरोह में 7 स्वर)
- आरोह: सा, ग, म, प, ध, नि, सां (कभी-कभी रे का प्रयोग)
- अवरोह: सां, नि, ध, प, म, ग, रे, सा
- वादी स्वर: म
- संवादी स्वर: सा
- समय: दिन का दूसरा प्रहर (लगभग 12 बजे से 3 बजे तक)
- पकड़: ग म प ध प म ग रे सा
- विशेषता: यह एक गंभीर और शांत राग है, जिसमें कोमल गंधार और कोमल निषाद का प्रयोग होता है। इसमें रे और ध का प्रयोग कम होता है।
Write the complete introduction of 'Raga Bhimpalasi'. [2]
Introduction of Raga Bhimpalasi:
- Thaat: Kafi
- Jati: Audav-Sampurna (5 notes in ascent, 7 notes in descent)
- Aroha: Sa, Ga, Ma, Pa, Dha, Ni, Sa (sometimes Re is used)
- Avaroha: Sa, Ni, Dha, Pa, Ma, Ga, Re, Sa
- Vadi Swar: Ma
- Samvadi Swar: Sa
- Time: Second quarter of the day (approximately 12 PM to 3 PM)
- Pakad: Ga Ma Pa Dha Pa Ma Ga Re Sa
- Specialty: It is a serious and calm raga, using Komal Gandhar and Komal Nishad. Re and Dha are used sparingly.
अपने वाद्य का चित्र बनाकर उसकी वादन-विधि लिखिए। [7½+2=3]
वाद्य का चित्र: (चित्र यहाँ बनाया जा सकता है - उदाहरण के लिए तबला या हारमोनियम का चित्र)
वादन-विधि (तबला के लिए):
- तबला बजाने के लिए दोनों हाथों का उपयोग किया जाता है।
- दाएँ हाथ से दायाँ तबला (दया) और बाएँ हाथ से बायाँ तबला (बायाँ) बजाया जाता है।
- उंगलियों और हथेली के विभिन्न भागों से बोल निकाले जाते हैं जैसे 'ता', 'धा', 'धिन', 'न', 'क', 'गे', 'के' आदि।
- तबले को जमीन पर रखकर बैठकर बजाया जाता है।
- बोलों के संयोजन से तालें बनाई जाती हैं, जैसे तीनताल (16 मात्राएँ), झपताल (10 मात्राएँ), एकताल (12 मात्राएँ) आदि।
Write the playing method of your instrument with its diagram. [7½+2=3]
Diagram of the instrument: (A diagram can be drawn here - for example, a diagram of Tabla or Harmonium)
Playing method (for Tabla):
- Tabla is played using both hands.
- The right hand plays the right tabla (daya) and the left hand plays the left tabla (baya).
- Different syllables like 'Ta', 'Dha', 'Dhin', 'Na', 'Ka', 'Ge', 'Ke' are produced using fingers and different parts of the palm.
- The tabla is placed on the ground and played while sitting.
- Combinations of these syllables form taals (rhythmic cycles) like Teental (16 beats), Jhaptal (10 beats), Ektaal (12 beats), etc.
राग पहचानिए :- [1+1+1=3]
-
i) सा ग म ध प, ग म रे सा।
यह स्वर समूह राग भीमपलासी का संकेत देता है।
-
ii) ग म प, ग म ग, रे सा।
यह स्वर समूह राग भीमपलासी का संकेत देता है।
-
iii) नि सा ग म प, म ग, म ग रे सा।
यह स्वर समूह राग भीमपलासी का संकेत देता है।
Identify the Ragas :- [1+1+1=3]
-
i) Sa Ga Ma Dha Pa, Ga Ma Re Sa.
This note pattern indicates Raga Bhimpalasi.
-
ii) Ga Ma Pa, Ga Ma Ga, Re Sa.
This note pattern indicates Raga Bhimpalasi.
-
iii) Ni Sa Ga Ma Pa, Ma Ga, Ma Ga Re Sa.
This note pattern indicates Raga Bhimpalasi.
प्रश्न 8
ताल तिलवाड़ा का परिचय, ठेका व दुगुन लिखिए।
Write the introduction, Theka & Dugun of Tala Tilwara.
परिचय: तिलवाड़ा ताल 16 मात्राओं का एक ताल है। इसके 4 विभाग होते हैं, प्रत्येक में 4-4 मात्राएँ होती हैं। इसका बोल इस प्रकार है: धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा |
ठेका:
| धा | धिं | धिं | धा | धा | धिं | धिं | धा | धा | तिं | तिं | ता | ता | धिं | धिं | धा |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 |
दुगुन: दुगुन लय में प्रति मात्रा पर दो बोल बोले जाते हैं। उदाहरण: धाधिं धिंधा धाधिं धिंधा धातिं तिंता ताधिं धिंधा |
प्रश्न 9
निम्नलिखित में से किसी एक संगीतज्ञ का जीवन परिचय लिखिए:
- तानसेन
- उस्ताद इनायत खाँ
Write life sketch of any one of the following musicians:
- Tansen
- Ustad Inayat Khan
उस्ताद इनायत खाँ (सितार वादक): उस्ताद इनायत खाँ (1894-1938) भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान सितार वादक थे। उनका जन्म आगरा में हुआ था और वे इमदादखानी घराने से संबंध रखते थे। उन्होंने अपने पिता उस्ताद इमदाद खाँ से संगीत की शिक्षा ली। इनायत खाँ ने सितार वादन में गायकी अंग (गायन शैली) को लोकप्रिय बनाया। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में "राग यमन", "राग भैरवी" और "राग मियाँ की मल्हार" शामिल हैं। उन्होंने कई शिष्यों को प्रशिक्षित किया, जिनमें उनके पुत्र विलायत खाँ प्रमुख हैं।
भाग - स (तबला / पखावज)
PART - C (Tabla / Pakhawaj)
प्रश्न 1
निम्नलिखित की परिभाषा लिखिए:
- रेला
- परन
Write definition of the following:
- Rela
- Paran
रेला: रेला तबला वादन की एक प्रमुख बोल-बंदी है जिसमें तीव्र गति से बोलों की पुनरावृत्ति होती है। इसमें 'धा', 'धिं', 'तिं', 'ता', 'कट', 'गदि', 'गेन' जैसे बोलों का प्रयोग किया जाता है। रेला की विशेषता है कि इसमें बोलों का एक निश्चित क्रम होता है जो ताल के विभागों में बंटा होता है।
परन: परन पखावज वादन की एक बोल-बंदी है जिसमें 'धा', 'धिं', 'ता', 'कट', 'गदि', 'गेन' जैसे बोलों का प्रयोग होता है। यह ताल के विभागों में बंटी होती है और इसमें बोलों की पुनरावृत्ति होती है। परन का प्रयोग अक्सर ताल के अंत में किया जाता है।
प्रश्न 2
ताल 'तिलवाड़ा' और ताल 'तीनताल' का तुलनात्मक विवरण लिखिए।
Write the comparison of Tala 'Tilwara' and Tala 'Teentala'.
| विशेषता | तिलवाड़ा | तीनताल |
|---|---|---|
| मात्राएँ | 16 | 16 |
| विभाग | 4 (4+4+4+4) | 4 (4+4+4+4) |
| ताली-खाली | ताली: 1, 5, 13; खाली: 9 | ताली: 1, 5, 13; खाली: 9 |
| बोल | धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा | | धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा | |
| प्रयोग | ध्रुपद, ख्याल | ख्याल, ठुमरी, गज़ल |
निष्कर्ष: तिलवाड़ा और तीनताल दोनों 16 मात्राओं के ताल हैं और इनके बोल समान हैं। अंतर केवल ताली-खाली के स्थानों में है। तिलवाड़ा में ताली 1, 5, 13 पर और खाली 9 पर होती है, जबकि तीनताल में ताली 1, 5, 13 पर और खाली 9 पर होती है। दोनों तालों का प्रयोग विभिन्न संगीत शैलियों में किया जाता है।
3. मध्यकालीन भारतीय संगीत के इतिहास को संक्षेप में लिखिए।
Write short history of Medieval Indian Music.
मध्यकालीन भारतीय संगीत का इतिहास (लगभग 12वीं से 18वीं शताब्दी):
- इस काल में संगीत पर मुगल और सूफी प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
- अमीर खुसरो (13वीं शताब्दी) ने ख्याल, तराना, कव्वाली जैसी शैलियों का विकास किया और सितार, तबला जैसे वाद्यों का आविष्कार किया।
- रागों का वर्गीकरण (राग-रागिनी पद्धति) विकसित हुआ।
- मुगल बादशाहों (अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ) के संरक्षण में तानसेन, बैजू बावरा, स्वामी हरिदास जैसे महान संगीतज्ञ हुए।
- इस काल में ध्रुपद गायन शैली का उत्कर्ष हुआ और बाद में ख्याल शैली का विकास हुआ।
- संगीत ग्रंथों की रचना हुई, जैसे 'संगीत दर्पण', 'राग तरंगिणी' आदि।
4. आधुनिक भारतीय संगीत में पं. विष्णु नारायण भातखण्डे के योगदान को समझाइये।
Explain the contribution of Pt. Vishnu Narayan Bhatkhande in Modern Indian Music.
पं. विष्णु नारायण भातखण्डे (1860-1936) का योगदान:
- संगीत का वर्गीकरण: उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को 10 थाटों (मेलों) में वर्गीकृत किया, जो आज भी प्रचलित है।
- ग्रंथ रचना: 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' (6 भागों में) और 'संगीत शास्त्र' जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे।
- स्वरलिपि पद्धति: उन्होंने एक मानक स्वरलिपि (नोटेशन) प्रणाली विकसित की, जिससे रागों को लिखना और सीखना आसान हुआ।
- शिक्षा संस्थान: लखनऊ में 'मैरिस कॉलेज ऑफ म्यूजिक' (1926) की स्थापना की, जो बाद में 'भातखण्डे संगीत संस्थान' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
- संगीत सम्मेलन: उन्होंने अखिल भारतीय संगीत सम्मेलनों का आयोजन किया, जिससे संगीतकारों को एक मंच मिला।
- रागों का संकलन: उन्होंने देशभर से लगभग 400 रागों को एकत्रित कर उन्हें व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया।
5. ताल 'झपताल' व ताल 'सूलताल' का विवरण, ठेका सहित लिखिए।
Write Tala 'Jhaptala' and 'Sooltala' with Introduction and theka.
झपताल (Jhaptala)
- मात्राएँ: 10
- विभाग: 2+3+2+3
- ताली-खाली: ताली पर 1, 3; खाली पर 5
- ठेका: धिन् ना | धिन् धिन् ना | तिन् ना | धिन् धिन् ना ||
सूलताल (Sooltala)
- मात्राएँ: 10
- विभाग: 2+2+2+2+2
- ताली-खाली: ताली पर 1, 3, 5, 7; खाली पर 9
- ठेका: धा धा | धिन् ता | तिट् कट | गदि गेन | धा धा ||
6. ताल 'एकताल' और ताल 'चौताल' को दुगुन व चौगुन सहित लिखिए।
Write Tala 'Ektala' and Tala 'Chautala' with Dugun and Chaugun.
एकताल (Ektala)
- मात्राएँ: 12
- विभाग: 2+2+2+2+2+2
- ठेका: धिन् धिन् | धागे तिरकिट | तू ना | कट ता | धागे तिरकिट | धिन् ना ||
- दुगुन (दोगुनी गति): प्रति मात्रा पर दो बोल बोले जाते हैं। उदाहरण: धिन् धिन् धागे तिरकिट तू ना कट ता धागे तिरकिट धिन् ना (प्रति मात्रा पर दो बोल)
- चौगुन (चौगुनी गति): प्रति मात्रा पर चार बोल बोले जाते हैं। उदाहरण: धिन् धिन् धागे तिरकिट तू ना कट ता धागे तिरकिट धिन् ना (प्रति मात्रा पर चार बोल)
चौताल (Chautala)
- मात्राएँ: 12
- विभाग: 4+4+4
- ठेका: धा धा | दिन् ता | किट धा | दिन् ता | तिट् कट | गदि गेन ||
- दुगुन: प्रति मात्रा पर दो बोल। उदाहरण: धा धा दिन् ता किट धा दिन् ता तिट् कट गदि गेन
- चौगुन: प्रति मात्रा पर चार बोल। उदाहरण: धा धा दिन् ता किट धा दिन् ता तिट् कट गदि गेन
7. निम्नलिखित बोलों से ताल पहचानकर नाम लिखिए।
Identify the talas from the given Bols and write their names.
- i) ग ति त (Ga Ti Ta) 0 → यह दादरा ताल (6 मात्राएँ, विभाग 3+3) के बोल हैं।
- ii) तिट् कट (Tit Kat) 3 → यह चौताल (12 मात्राएँ) के बोल हैं।
- iii) तू ना (Tu Na) 2 → यह एकताल (12 मात्राएँ) के बोल हैं।
8. 'अहमद जान थिरकवा' अथवा 'हबीबुद्दीन खाँ' का जीवन परिचय एवं योगदान लिखिए।
Write life sketch & Musical contribution of 'Ahmad Jaan Thirakwa' or 'Habibuddin Khan'.
अहमद जान थिरकवा (Ahmad Jaan Thirakwa)
- जन्म: 1855, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश)
- गुरु: पिता मियाँ कादिर बख्श (तबला वादक)
- विशेषता: तबला वादन में अद्वितीय गति और लयकारी के लिए प्रसिद्ध। 'थिरकवा' उपनाम उनकी उंगलियों की तेज गति के कारण मिला।
- योगदान: तबला वादन में 'खुला बाज' और 'बंद बाज' शैलियों का सम्मिश्रण किया। उन्होंने तबले पर कई नए बोल और कायदे विकसित किए।
- सम्मान: रियासतों (रामपुर, हैदराबाद) में संरक्षण प्राप्त।
अथवा
हबीबुद्दीन खाँ (Habibuddin Khan)
- जन्म: 1860, मुरादाबाद
- गुरु: पिता मियाँ कादिर बख्श
- विशेषता: तबला वादन में 'फर्द' (एकल) वादन के लिए प्रसिद्ध। उनकी शैली में साफ-सुथरी बोलबाजी और लयकारी थी।
- योगदान: तबले पर 'गत' और 'परन' की रचना में महारत। उन्होंने कई शिष्यों को तैयार किया जिन्होंने तबला वादन को आगे बढ़ाया।
- सम्मान: रामपुर रियासत में दरबारी संगीतज्ञ के रूप में सेवा।