RBSE Class 12th 2018 (Supp.)-SS-01-2018 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2018
Subject (Supp.)-SS-01-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2018 (Supp.)-SS-01-2018

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Rajasthan Board Class 12th (Supp.)-SS-01-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018

SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018

हिन्दी (अनिवार्य)

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
  4. जिस प्रश्न के आ, ब, स, द भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।

No. of Questions — 29    No. of Printed Pages — 7

SS—01-Hindi (0) 225I   [ Turn Over

खण्ड - अ

1. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2+2=4]

(उत्तर सीमा 20 से 30 शब्द)

हम वही और वैसे ही हैं जैसा हमें समाज समझता है। समाज हमारा मूल्यांकन हमारे व्यवहार द्वारा करता है। हमारे विचारों का भी मूल्य होता है, परन्तु मुख्य है हमारा आचार-व्यवहार। मान लीजिए, हम बहुत बड़े विद्वान हैं, बहुत कुशल वक्ता हैं, उच्चकोटि के लेखक भी हैं, समस्त शास्त्र भी हमें कण्ठस्थ हैं, परन्तु यदि हम अपने सम्पर्क में आने वालों के प्रति उचित व्यवहार नहीं करते हैं अथवा अप्रिय वाणी बोलते हैं, तब न तो कोई हमसे सम्पर्क ही करना चाहेगा और न ही हमसे सम्बन्ध रखेगा। हमारे बारे में अच्छी राय किसी की भी नहीं बनेगी। भला आदमी कहलाने अथवा समझा जाने के लिए हमें भले आदमी की भाँति व्यवहार करना होगा। इसी से कहा गया है कि "आचरण सज्जनता की कसौटी है।"

(अ) समाज हमारा मूल्यांकन किस प्रकार करता है? [2]

समाज हमारा मूल्यांकन हमारे आचार-व्यवहार के आधार पर करता है। हमारे विचारों का भी मूल्य होता है, परंतु मुख्यतः हमारा व्यवहार ही हमारी पहचान तय करता है।

(ब) "आचरण सज्जनता की कसौटी है।" - इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। [2]

इस कथन का आशय है कि किसी व्यक्ति की सज्जनता उसके आचरण से ही मापी जाती है। चाहे व्यक्ति कितना भी विद्वान या कुशल वक्ता क्यों न हो, यदि उसका व्यवहार अच्छा नहीं है तो समाज उसे सज्जन नहीं मानेगा।

2. निम्नांकित अपठित पद्यांश को पढ़ कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2+2=4]

(उत्तर सीमा 20 से 30 शब्द)

अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?
तिमिर के राज का ऐसा,
कठिन आतंक छाया है,
उठा जो शीश सकते थे,
उन्होंने सिर झुकाया है,
मगर विद्रोह की ज्वाला-
जगाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?
प्रलय का सा समा बाँधे,
प्रलय की रात है छाई,
विनाशक शक्तियों की इस-
तिमिर के बीच बन आई-
मगर निर्माण की आशा
दृढ़ाए कौन बैठा है?
अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है?

(अ) पद्यांश में 'अँधेरी रात' किसे कहा गया है और उसका क्या प्रभाव है? [2]

पद्यांश में 'अँधेरी रात' अत्याचार, अन्याय और विनाशकारी शक्तियों के शासन को कहा गया है। इसका प्रभाव यह है कि जो लोग सिर उठा सकते थे, वे भी भय के कारण सिर झुकाने को मजबूर हो गए हैं।

(ब) 'दीपक जलाए कौन बैठा है?' - इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। [2]

इस पंक्ति का आशय है कि अत्याचार और अंधकार के वातावरण में भी कोई व्यक्ति विद्रोह की ज्वाला और निर्माण की आशा को जीवित रखे हुए है। यह व्यक्ति प्रतिरोध और आशा का प्रतीक है, जो अंधकार में प्रकाश फैलाने का कार्य कर रहा है।

खण्ड-अ

(अ) "उठा जो शीश सकते थे, उन्होंने सिर झुकाया है।" – इन पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। [2]

भावार्थ: इन पंक्तियों में कवि कहता है कि जो लोग कभी अपना सिर ऊँचा रखते थे और किसी के आगे झुकना नहीं जानते थे, वे ही अब विवश होकर अपना सिर झुकाने पर मजबूर हो गए हैं। यह जीवन की विडंबना और परिस्थितियों के बदलाव को दर्शाता है।

(ब) "विनाशक शक्तियों की इस – तिमिर के बीच बन आई" – उपर्युक्त पंक्तियों में 'विनाशक शक्ति' व 'तिमिर' किसे और क्यों कहा गया है? स्पष्ट कीजिए। [2]

स्पष्टीकरण: 'विनाशक शक्ति' से तात्पर्य उन नकारात्मक या विनाशकारी ताकतों से है जो समाज या व्यक्ति के लिए हानिकारक होती हैं, जैसे युद्ध, अत्याचार, या प्राकृतिक आपदाएँ। 'तिमिर' अज्ञानता, अंधकार या निराशा का प्रतीक है। कवि ने इन शब्दों का प्रयोग यह दिखाने के लिए किया है कि विनाशकारी शक्तियाँ अंधकार के बीच उत्पन्न होती हैं और समाज को संकट में डालती हैं।

खण्ड-ब

3. निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर एक-से-दो पंक्तियों में दीजिए: [1+1=2]

(अ) कोई बोली 'बोली' कब बनती है? [2]

जब कोई बोली साहित्यिक और सांस्कृतिक रूप से विकसित होकर एक निश्चित मानक रूप धारण कर लेती है और उसका प्रयोग शिक्षा, साहित्य एवं प्रशासन में होने लगता है, तब वह 'बोली' से 'भाषा' बन जाती है।

(ब) लिपि की परिभाषा दीजिए। [2]

लिपि उन लिखित चिह्नों या संकेतों का समूह है जिनके माध्यम से किसी भाषा की ध्वनियों को लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उदाहरण: देवनागरी लिपि, रोमन लिपि आदि।

4. रेखांकित शब्दों का पद-परिचय दीजिए: [1+1=2]

(अ) वह मेरा घर है। [4]

पद-परिचय: 'मेरा' – सर्वनाम (पुरुषवाचक), पुल्लिंग, एकवचन, संबंध कारक, 'घर' का विशेषण।

(ब) हमें रोज़ सवेरे प्राणायाम करना चाहिए। [4]

पद-परिचय: 'सवेरे' – क्रियाविशेषण (कालवाचक), अपादान कारक, 'प्राणायाम करना' क्रिया का विशेषण।

5. 'व्यंजना' शब्द शक्ति की परिभाषा देते हुए एक उदाहरण देकर स्पष्ट भी कीजिए। [1+1=2]

परिभाषा: व्यंजना शब्द शक्ति वह है जिसमें शब्द के अभिधा (शाब्दिक) और लक्षणा (लाक्षणिक) अर्थ के अतिरिक्त एक विशेष भाव या व्यंग्यार्थ प्रकट होता है।

उदाहरण: "सूरज डूब गया" – इसका शाब्दिक अर्थ है सूर्य का अस्त होना, लेकिन व्यंजना से यह किसी युग या आशा के समाप्त होने का संकेत देता है।

6. "अम्बर-पनघट में गत रही तारा-घट ऊषा-नागरी।" – रेखांकित शब्दों में कौनसा अलंकार है और क्यों? स्पष्ट कीजिए। [1+1=2]

अलंकार: रूपक अलंकार।

कारण: यहाँ 'अम्बर' (आकाश) को 'पनघट' (जल का घड़ा) और 'तारा' को 'घट' (बर्तन) तथा 'ऊषा' (सुबह) को 'नागरी' (स्त्री) के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें उपमेय (अम्बर, तारा, ऊषा) पर उपमान (पनघट, घट, नागरी) का आरोप होने से रूपक अलंकार है।

7. निम्नांकित शब्दों के अर्थ लिखिए: [1+1=2]

(अ) Layout

अर्थ: प्रारूप, खाका, या किसी पृष्ठ/स्थान की व्यवस्था।

(ब) Note

अर्थ: टिप्पणी, सूचना, या संक्षिप्त लेख।

8. अधिसूचना किसे कहते हैं? एक अधिसूचना का उचित प्रारूप भी बनाइए। [1+1=2]

परिभाषा: अधिसूचना एक आधिकारिक सूचना है जो सरकार या किसी संस्था द्वारा जारी की जाती है, जिसमें किसी नियम, आदेश, या घटना की जानकारी दी जाती है।

प्रारूप:

अधिसूचना
दिनांक: [तिथि]

विद्यालय के सभी छात्रों को सूचित किया जाता है कि कल दिनांक [तिथि] को विद्यालय में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। सभी छात्र अपनी-अपनी टीमों के साथ प्रातः 8 बजे मैदान पर उपस्थित रहें।

प्रधानाचार्य
[विद्यालय का नाम]

9) निम्नांकित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए :- [4]

  1. आत्मबोध: वर्तमान की आवश्यकता
  2. विधिक जागरूकता
  3. विसमुद्रीकरण: भ्रष्टाचार पर एक प्रहार
  4. लोकगीत: संस्कृति के वाहक

खण्ड - स

0) निम्नांकित पद्यांशों में से किसी एक पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :- [1+2+1=4] (उत्तर सीमा-लगभग 80 शब्द)

पद्यांश 1:

त्याग तो ऐसा कीजिए, सब कुछ एकहि बार।
सब प्रभु का मेरा नहीं, निहचे किया विचार।।
सुनिये गुण की बारता, औगुन लीजै नाहिं।
हंस छीर को गहत है, नीर सो त्यागे जाहिं।।
छोड़े जब अभिमान को, सुखी भया सब जीव।
कोई कछु कहे, मेरे हिय निज सुख है।।

पद्यांश 2:

कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना?
नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना?
फिर मूढ़ न क्या जग, जो इस पर भी सीखे ?
मैं सीख रहा हूँ, सीखा ज्ञान भुलाना।।
में ओर, और जग और, कहाँ का नाता,
में बना-बना कितने जग रोज़ मिटाता,
जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव,
मैं उस पृथ्वी को ठुकराता।।

निम्नांकित गद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :- [1+2+1=4]

(उत्तर सीमा-लगभग 80 शब्द)

चलने-फिरने वाले बच्चों में, जिनमें भाव देर तक नहीं टिकते और दुःख परिहार का ज्ञान या बल नहीं होता, भय अधिक होता है। बहुत-से बच्चे तो किसी अपरिचित आदमी को देखते ही घर के भीतर भागते हैं। पशुओं में भी भय अधिक पाया जाता है। अपरिचित के भय में जीवन का कोई गूढ़ रहस्य छिपा जान पड़ता है। प्रत्येक प्राणी भीतरी आँख खुलते ही अपने सामने मानों एक दुःख-कारण पूर्ण संसार फैला हुआ पाता है जिसे क्रमश: कुछ अपने ज्ञान बल से और कुछ बाहुबल से थोड़ा-बहुत सुखमय बनाता चलता है और बाधा का ही सामान्य आरोप करते जीवन संसार में पैर रखता है। सुख और आनंद को वह सामान्य का व्यक्तिक्रम समझता है, विरल विशेष मानता है। इस विशेष से सामान्य की और जाने का साहस उसे बहुत दिनों तक नहीं होता।

सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश 'आत्म-विश्वास' शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने बच्चों और पशुओं में पाए जाने वाले भय की प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला है। बच्चों में भाव स्थायी नहीं होते और वे दुःख से बचने का उपाय नहीं जानते, इसलिए उनमें भय अधिक होता है। अपरिचित व्यक्ति को देखकर वे घर के अंदर भाग जाते हैं। लेखक के अनुसार, प्रत्येक प्राणी जन्म लेते ही संसार को दुःखों से भरा पाता है और धीरे-धीरे ज्ञान व बल से उसे सुखमय बनाता है। सुख को वह सामान्य से हटकर विशेष मानता है, जिससे सामान्य स्थिति में लौटने का साहस नहीं जुटा पाता।


“जिन देशों में हाथ और मुँह पर मजदूरी की धूल नहीं पड़ने पाती वे धर्म और कला-कौशल में कभी उन्नति नहीं कर सकते।” – 'मजदूरी और प्रेम' इस अध्याय के आधार पर उपर्युक्त कथन को उदाहरण सहित समझाइए।

(उत्तर सीमा लगभग 80 शब्द) [4]

प्रस्तुत कथन 'मजदूरी और प्रेम' पाठ से लिया गया है। लेखक का कहना है कि जो देश शारीरिक श्रम नहीं करते, वे धर्म और कला में उन्नति नहीं कर सकते। श्रम से व्यक्ति में अनुशासन, धैर्य और सृजनशीलता आती है। उदाहरण के लिए, प्राचीन भारत में लोग खेती, बढ़ईगीरी आदि श्रम करते थे, जिससे उनकी कला और धर्म दोनों उन्नत हुए। इसके विपरीत, जो देश केवल भोग-विलास में लिप्त रहे, वे पिछड़ गए। श्रम ही मनुष्य को सच्चा धर्म और कला सिखाता है।


“अहंकार घृणा का पिता है और घृणा जीवन की संपूर्ण ऊँचाइयों की दुश्मन है।” – 'मैं और मैं' अध्याय के आधार पर मौलिक उदाहरणों के द्वारा उपर्युक्त कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।

(उत्तर सीमा लगभग 80 शब्द) [4]

प्रस्तुत कथन 'मैं और मैं' पाठ से लिया गया है। अहंकार व्यक्ति को दूसरों से घृणा करने पर उकसाता है, और घृणा उसकी प्रगति में बाधक बनती है। उदाहरण के लिए, एक विद्यार्थी यदि अपनी बुद्धि पर अहंकार करता है, तो वह दूसरों से घृणा करने लगता है और सीखने की क्षमता खो देता है। इसी प्रकार, एक नेता यदि अहंकारी है, तो वह जनता से घृणा करता है और अपने पद की ऊँचाई को गिरा देता है। अहंकार और घृणा मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं।


“कवि भूषण की रचनाओं में राष्ट्रीयता की भावना, वीरता के उद्गार और ओजगुण का वैशिष्ट्य है।” – इस कथन की व्याख्या 'वीररस के कवित्त: भूषण' अध्याय के आधार पर कीजिए।

(उत्तर सीमा लगभग 80 शब्द) [4]

प्रस्तुत कथन 'वीररस के कवित्त: भूषण' पाठ से लिया गया है। कवि भूषण की रचनाओं में राष्ट्रीयता, वीरता और ओजगुण प्रमुख हैं। उन्होंने शिवाजी महाराज के शौर्य का वर्णन करते हुए राष्ट्रप्रेम जगाया। उदाहरण के लिए, उनका कवित्त "भूषण भाषा भनत..." में शिवाजी की वीरता का ऐसा चित्रण है कि पाठक में देशभक्ति और साहस जागृत होता है। उनकी भाषा में ओज और प्रवाह है, जो वीररस को प्रभावी बनाता है। इस प्रकार, भूषण की कविताएँ राष्ट्रीय चेतना और वीरता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।


“सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखित 'मेरा नया बचपन' 'बचपन' पर लिखी गई अपनी तरह की दुर्लभ कविता है।” – इस कथन को पठित कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

(उत्तर सीमा लगभग 80 शब्द) [4]

प्रस्तुत कथन 'मेरा नया बचपन' कविता के संदर्भ में है। सुभद्रा कुमारी चौहान ने इस कविता में बचपन की मासूमियत और उसकी दुर्लभता को चित्रित किया है। कवयित्री कहती हैं कि बचपन में मनुष्य निर्दोष और निश्चिंत होता है, लेकिन बड़ा होने पर वह संसार के झंझटों में फँस जाता है। वे बचपन को एक ऐसा समय मानती हैं जो लौटकर नहीं आता, इसलिए यह दुर्लभ है। कविता में बचपन की स्मृतियों को संजोने का संदेश है, जो इसे अन्य बचपन-संबंधी कविताओं से अलग बनाता है।

4) रहीम के दोहों के द्वारा हमें क्या शिक्षा प्राप्त होती है? संक्षेप में लिखिए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

रहीम के दोहे हमें नीति, विनम्रता, परोपकार, और सहनशीलता की शिक्षा देते हैं। वे बताते हैं कि बड़प्पन दिखावे से नहीं, बल्कि गुणों और व्यवहार से आता है। जीवन में संतोष और दूसरों की भलाई करना ही सच्ची सफलता है।

5) 'कविता की उड़ान सीमातीत है', कविता के बहाने! कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

कविता की उड़ान सीमातीत है, क्योंकि वह कल्पना और भावनाओं के माध्यम से असीमित संसार में विचरण करती है। कविता के बहाने कवि ने दिखाया है कि कविता समय, स्थान और सीमाओं से परे जाकर मानव मन को छूती है और नई ऊंचाइयों तक ले जाती है।

6) 'विधान-सम्बन्धी नैतिकता का पालन' प्रजातन्त्रवाद के सफल संचालन के लिए किस प्रकार आवश्यक है? (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

विधान-सम्बन्धी नैतिकता का पालन प्रजातन्त्रवाद के सफल संचालन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि शासक और जनता दोनों संविधान के नियमों का पालन करें। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित होता है, जो लोकतंत्र की नींव हैं।

7) एकांकी 'तोलिए' में शिष्टाचार, सभ्यता व तहजीब के नाम पर फैल रहे आडम्बर व खोखलेपन को अभिव्यक्त किया गया है। कैसे? स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

एकांकी 'तोलिए' में दिखाया गया है कि लोग शिष्टाचार और सभ्यता के नाम पर दिखावा करते हैं, जबकि उनके व्यवहार में खोखलापन है। पात्रों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि बाहरी तहजीब के पीछे स्वार्थ और पाखंड छिपा है, जो समाज में आडम्बर को बढ़ावा देता है।

8) कवि कृपाराम खिड़िया अथवा बहुमुखी प्रतिमा के धनी जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक परिचय दीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 80 शब्द) [4]

जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि, नाटककार और उपन्यासकार थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना, प्रकृति प्रेम और दार्शनिकता का गहरा प्रभाव है। प्रमुख कृतियाँ: काव्य- 'कामायनी', 'आंसू', 'लहर'; नाटक- 'चंद्रगुप्त', 'स्कंदगुप्त'; उपन्यास- 'तितली', 'कंकाल'। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ और भावपूर्ण है। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, जिन्होंने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया।

9) 'वेम वा कूप' तुलसीदास जी ने ऐसा क्यों कहा है? (उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द) [2]

तुलसीदास जी ने 'वेम वा कूप' (बिना वेद के कुआँ) कहा है, क्योंकि वेद ज्ञान के स्रोत हैं, और उनके बिना जीवन अंधकारमय है।

20) कुछ विदेशियों ने हिमालय की बर्फ को चिरंतन (एटर्नल स्नो) क्यों कहा है? (उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द) [2]

कुछ विदेशियों ने हिमालय की बर्फ को चिरंतन इसलिए कहा है क्योंकि यह सदियों से पिघलती नहीं और हमेशा बनी रहती है।

खण्ड - द्

2) महात्मा गांधी ने 'सभ्यता सीखने का अपनी सामर्थ्य से परे का और छिछला' किसे कहा है? (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

महात्मा गांधी ने पश्चिमी सभ्यता को 'सभ्यता सीखने का अपनी सामर्थ्य से परे का और छिछला' कहा है, क्योंकि वह भौतिक सुखों पर केंद्रित है और आध्यात्मिक मूल्यों से रहित है, जिससे मानवता का पतन होता है।

22) “अब हमारे घर में मानो दुग्ध-महोत्सव आरम्भ हुआ।' महादेवी जी के इस कथन को संक्षेप में समझाइए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

महादेवी जी के इस कथन का अर्थ है कि उनके घर में दूध की प्रचुरता से खुशी और उत्सव का माहौल बन गया। यह आर्थिक समृद्धि और परिवार में संतोष का प्रतीक है, जहाँ दूध की बहुतायत ने जीवन को आनंदमय बना दिया।

23) “बोधिसत्त्व पद्म-पाणि” चित्र की विशेषताएँ बताइए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

उत्तर: “बोधिसत्त्व पद्म-पाणि” चित्र अजंता की गुफा संख्या 1 में स्थित है। इसमें बोधिसत्त्व को करुणा और सौंदर्य का प्रतीक दर्शाया गया है। चित्र में रेखाओं की कोमलता, रंगों का सामंजस्य और भाव-भंगिमा की सजीवता उल्लेखनीय है। यह भारतीय चित्रकला का उत्कृष्ट नमूना है।

अथवा

“प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण” हेतु इमरता देवी के योगदान का वर्णन कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

उत्तर: इमरता देवी ने चिपको आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने पेड़ों को काटने से बचाने के लिए पेड़ों से चिपककर विरोध किया। उनका योगदान पर्यावरण संरक्षण और वनों की रक्षा के लिए प्रेरणादायक है।

24) “उसने कहा था” कहानी की कथावस्तु प्रेम, त्याग और कर्त्तव्यनिष्ठा की त्रिवेणी को बतलाने वाली है।” उपयुक्त उदाहरण सहित कथन को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 से 100 शब्द) [6]

उत्तर: “उसने कहा था” कहानी में प्रेम, त्याग और कर्त्तव्यनिष्ठा का अद्भुत समन्वय है। लहना सिंह और सूबेदारनी का प्रेम त्यागपूर्ण है। लहना सिंह अपने कर्तव्य का पालन करते हुए युद्ध में जाता है और सूबेदारनी उसके लिए नारियल भेजती है। अंत में लहना सिंह घायल होने पर भी अपने कर्तव्य का निर्वाह करता है। यह प्रेम, त्याग और कर्त्तव्यनिष्ठा की त्रिवेणी को दर्शाता है।

अथवा

“मानस का हंस” उपन्यास के संकलित अंश में तुलसीदास का अन्तर्द्वन्द्व, तत्कालीन समाज की मन:स्थिति तथा रत्नावली की त्यागमयी प्रतिमूर्ति के दिग्दर्शन होते हैं। उक्त कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 से 100 शब्द) [6]

उत्तर: “मानस का हंस” उपन्यास में तुलसीदास का अन्तर्द्वन्द्व उनके संन्यास और गृहस्थ जीवन के बीच दिखता है। तत्कालीन समाज में धार्मिक कट्टरता और अंधविश्वास था। रत्नावली त्याग की मूर्ति हैं, जो तुलसीदास को प्रेरित करती हैं। उदाहरण के लिए, रत्नावली का तुलसीदास के प्रति समर्पण और त्याग उनके चरित्र को उजागर करता है।

खण्ड - य

25) समाचार लेखन में 'स्टोरी' को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

उत्तर: समाचार लेखन में 'स्टोरी' का अर्थ किसी घटना या विषय की संपूर्ण जानकारी को रोचक और तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत करना है। इसमें मुख्य तथ्य, पृष्ठभूमि और प्रभाव शामिल होते हैं। यह पाठकों को घटना की स्पष्ट समझ प्रदान करती है।

26) पत्रकार पी. डी. टण्डन ने फीचर का विश्लेषण किस प्रकार किया है? (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

उत्तर: पत्रकार पी. डी. टण्डन ने फीचर को समाचार से भिन्न माना। उनके अनुसार फीचर में घटना के मानवीय पक्ष, भावनाओं और विवरणों पर जोर दिया जाता है। यह पाठकों को गहराई से जोड़ता है और रोचकता बढ़ाता है।

27) किसी प्रसिद्ध खिलाड़ी का टेलीविजन पर प्रसारण हेतु साक्षात्कार लेने के लिए एक प्रश्नावली का निर्माण कीजिए; जिसमें साक्षात्कार के तत्वों का समावेश हो। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]

उत्तर: प्रश्नावली:

  1. आपने अपने करियर की शुरुआत कैसे की?
  2. आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?
  3. आप चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं?
  4. आपके प्रेरणास्रोत कौन हैं?
  5. युवा खिलाड़ियों को आप क्या संदेश देंगे?

28) स्वतन्त्रता से पूर्व व स्वतन्त्रता के पश्चात् फिल्मी पत्रकारिता पर एक टिप्पणी लिखिए। (उत्तर सीमा 40 से 80 शब्द) [3]

उत्तर: स्वतंत्रता से पूर्व फिल्मी पत्रकारिता सीमित थी और मुख्यतः फिल्मों के प्रचार तक सीमित रही। स्वतंत्रता के बाद इसमें विस्तार हुआ और फिल्म समीक्षा, कलाकारों के साक्षात्कार और उद्योग की खबरें शामिल हुईं। आज यह एक प्रभावशाली माध्यम बन गया है जो फिल्म उद्योग को जनता से जोड़ता है।

29) “डायरी लेखन का हमारे व्यक्तित्व को सुधारने एवं सँवारने में अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।” – इस कथन के परिप्रेक्ष्य में डायरी लेखन की विशेषताएँ लिखिए। (उत्तर सीमा 40 से 80 शब्द) [3]

उत्तर: डायरी लेखन की विशेषताएँ:

  • यह आत्मचिंतन का माध्यम है, जो व्यक्ति को अपने विचारों और भावनाओं को समझने में मदद करता है।
  • यह नियमित लेखन की आदत विकसित करता है, जिससे लेखन कौशल में सुधार होता है।
  • यह तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है।
  • यह व्यक्तिगत विकास और आत्म-सुधार को प्रोत्साहित करता है।