RBSE Class 12th 2018 -SS-13-2018 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2018
Subject -SS-13-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th -SS-13-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018

इतिहास
HISTORY

समय : 3¼ घण्टेपूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.

SS-13-Hist.   7258   [Turn Over


प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER

परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)

5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।

If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

6) खण्ड, प्रश्न संख्या, अंक एवं उत्तर की शब्द सीमा:

खण्ड (Section) प्रश्न संख्या (Q.Nos.) प्रति प्रश्न अंक (Marks per question) उत्तर की शब्द सीमा (Word limit of answer)
A 1 – 7 1 0 शब्द (0 words)
B 8 – 18 2 20 शब्द (20 words)
C 9 – 27 4 60 शब्द (60 words)
D 28 – 29 6 200 शब्द (200 words)

7) प्रश्न क्रमांक 30 का उत्तर भारत के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए। यह 6 अंक का है।

Mark the answer of Question No. 30 in the outline map of India. It carries 6 marks.

8) प्रश्न क्रमांक 28 एवं 29 में आंतरिक विकल्प हैं।

There are internal choices in Question Nos. 28 and 29.

SS_3-Hist. 258

खण्ड - अ / Section - A

  1. अर्थशास्त्र की रचना किसने की?
    Who composed Arthshastra?

    उत्तर: चाणक्य (कौटिल्य) ने।
    Answer: Chanakya (Kautilya).

  2. कलिंग का युद्ध कब लड़ा गया?
    In which year the Battle of Kalinga was fought?

    उत्तर: 261 ईसा पूर्व में।
    Answer: 261 BCE.

  3. किस बौद्ध संगीति के उपरांत महायान सम्प्रदाय का उदय हुआ?
    After which Buddhist council the Mahayana sect was originated?

    उत्तर: चौथी बौद्ध संगीति (कनिष्क के संरक्षण में) के बाद।
    Answer: After the Fourth Buddhist Council (under the patronage of Kanishka).

  4. नागसेन की पुस्तक 'मिलिन्दपन्ह' किस भाषा में लिखी गई?
    In which language was Nagasena's book 'Milindpanh' written?

    उत्तर: पालि भाषा में।
    Answer: Pali language.

  5. विक्रमी संवत् का प्रारम्भ किस घटना के उपलक्ष में किया गया?
    On the occasion of which event was Vikrami Samvata initiated?

    उत्तर: विक्रमादित्य (चन्द्रगुप्त द्वितीय) द्वारा शकों पर विजय के उपलक्ष्य में।
    Answer: On the occasion of the victory of Vikramaditya (Chandragupta II) over the Shakas.

  6. भारत में मूर्तिकला की गांधार शैली का विकास किस शासक के काल में हुआ?
    During which ruler's period did the Gandhara style of sculpture flourish in India?

    उत्तर: कनिष्क के काल में।
    Answer: During the period of Kanishka.

  7. किस इमारत को "भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष" कहा जाता है?
    Which building is called the encyclopedia of Indian sculpture?

    उत्तर: कैलाश मंदिर (एलोरा) को।
    Answer: Kailash Temple (Ellora).

खण्ड - ब (Section - B)

  1. किस शासक को “प्रताप का अग्रदूत” कहा जाता है? [ ]

    Which ruler is called the forerunner of Maharana Pratap?

    उत्तर: राणा सांगा (Rana Sanga) को महाराणा प्रताप का अग्रदूत कहा जाता है। उन्होंने मेवाड़ को मजबूत किया और मुगलों के खिलाफ संघर्ष की नींव रखी।

  2. महाराणा प्रताप के समय अकबर ने शाहबाज खां को मेवाड़ पर अधिकार करने के लिए कितनी बार भेजा? [ ]

    How many times Akbar sent Shahbaz Khan to invade Mewar during Maharana Pratap's time?

    उत्तर: अकबर ने शाहबाज खां को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए तीन बार भेजा था।

  3. बाबर ने खानवा के युद्ध में किस शासक को पराजित किया? [ ]

    Which emperor was defeated by Babur in the Battle of Khanwa?

    उत्तर: बाबर ने खानवा के युद्ध (1527 ई.) में मेवाड़ के शासक राणा सांगा (Rana Sanga) को पराजित किया।


  1. धौलावीरा ऐतिहासिक दृष्टि से हमारे लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है? [1+1=2]

    Why is Dholavira historically significant for us?

    उत्तर: धौलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख स्थल है। यह हमारे लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि:

    • यहाँ से जल संचयन की उन्नत प्रणाली (बाँध, जलाशय) के प्रमाण मिले हैं।
    • यहाँ एक विशाल स्टेडियम और अद्वितीय नगर नियोजन के अवशेष मिले हैं, जो उस समय की सभ्यता के विकास को दर्शाते हैं।
  2. वेदों को संहिता क्यों कहा जाता है? [2]

    Why are the Vedas called Sanhita?

    उत्तर: वेदों को 'संहिता' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें मंत्रों और ऋचाओं का संग्रह (संहित) है। 'संहिता' का अर्थ है 'व्यवस्थित रूप से संकलित ग्रंथ'। प्रत्येक वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) की अपनी संहिता होती है, जिसमें देवताओं की स्तुति, यज्ञ विधियाँ और ज्ञान संग्रहीत है।

  3. आप कैसे कह सकते हैं कि सिंधु-सरस्वती सभ्यता के लोग घोड़े से परिचित थे? [1+1=2]

    How can you say that the people of Sindhu-Saraswati civilization were aware of the horse?

    उत्तर: सिंधु-सरस्वती सभ्यता के लोग घोड़े से परिचित थे, इसका प्रमाण निम्नलिखित है:

    • सुरकोटदा (गुजरात) और लोथल जैसे स्थलों से घोड़े की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं।
    • सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों और मिट्टी के बर्तनों पर घोड़े के चित्र मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि वे इस पशु से परिचित थे।

SS_3-Hist. 258

4) समुद्रगुप्त को भारतीय नेपोलियन' किसने और क्यों कहा है? [1+2=3]

Why and by whom Samudragupta was called ‘Indian Nepolean'?

उत्तर: समुद्रगुप्त को 'भारतीय नेपोलियन' कहने वाले इतिहासकार विंसेंट स्मिथ (Vincent Smith) थे। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि समुद्रगुप्त ने नेपोलियन की तरह अनेक राज्यों पर विजय प्राप्त की और एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया। दोनों में समानता यह भी थी कि वे महान सेनापति और विजेता थे।

5) मुद्रा के क्षेत्र में हिन्द-यूनानी शासकों की क्या देन है? [2]

What is the contribution of the Indo - Greek rulers in the field of coinage?

उत्तर: हिन्द-यूनानी शासकों ने मुद्रा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने सबसे पहले स्वर्ण मुद्राएँ (Gold coins) चलाईं। उनकी मुद्राओं पर शासक का चित्र और यूनानी तथा ब्राह्मी लिपि में नाम अंकित होता था। इसके अलावा, उन्होंने मुद्राओं पर देवी-देवताओं के चित्र भी उकेरे, जो कला की दृष्टि से उत्कृष्ट थे।

6) मानसिंह ने हल्दीघाटी के युद्ध के बाद भागती हुई मेवाड़ी सेना का पीछा क्यों नहीं किया? [2]

Why Mansingh did not pursue the Mewar army after the Battle of Haldighati?

उत्तर: मानसिंह ने हल्दीघाटी के युद्ध के बाद भागती हुई मेवाड़ी सेना का पीछा नहीं किया क्योंकि वह राजपूत परंपरा का पालन करते हुए पीछे हटने वाले शत्रु पर आक्रमण नहीं करना चाहता था। इसके अलावा, उसे डर था कि पीछा करने पर उसकी सेना पहाड़ी इलाकों में घात लगाकर बैठे शत्रु से घिर सकती है।

7) स्वामी विवेकानन्द द्वारा रामकृष्ण मिशन की स्थापना कब व कहां की गई? [1+1=2]

When and where the Ramkrishna Mission was founded by Swami Vivekanand?

उत्तर: स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1 मई 1897 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) के बेलूर मठ में की थी।

8) 25 अप्रैल 934 को कटराथल नामक स्थान पर महिला सम्मेलन का आयोजन क्यों किया गया? [2]

Why the women's conference was organized at Katrathal on 25th April 934.

उत्तर: 25 अप्रैल 934 को कटराथल (वर्तमान राजस्थान) में महिला सम्मेलन का आयोजन महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से किया गया था। इस सम्मेलन में महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार, शिक्षा और स्वावलंबन पर चर्चा की गई।

खण्ड - स / Section - C

9) सिंधु - सरस्वती सभ्यता की जल निकास प्रणाली की वर्तमान में क्या प्रासंगिकता है? [4]

What is the current relevance of the drainage system of Sindhu - Saraswati civilization?

उत्तर: सिंधु-सरस्वती सभ्यता की जल निकास प्रणाली आज भी अत्यधिक प्रासंगिक है। इसकी प्रासंगिकता निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होती है:

  1. नगर नियोजन: इस सभ्यता के नगरों (जैसे मोहनजोदड़ो) में पकी ईंटों से बनी नालियाँ और कवर्ड ड्रेनेज सिस्टम था, जो आधुनिक शहरी नियोजन के लिए प्रेरणा है।
  2. स्वच्छता: हर घर से नालियाँ मुख्य नालों से जुड़ी होती थीं, जो स्वच्छता के प्रति उच्च जागरूकता दर्शाती हैं। आज भी शहरों में जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए यह मॉडल उपयोगी है।
  3. जल प्रबंधन: बारिश के पानी को संग्रहित करने और निकासी की व्यवस्था आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों से मेल खाती है।
  4. पर्यावरण संरक्षण: यह प्रणाली पर्यावरण के अनुकूल थी, जो आज के जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ विकास के लिए मार्गदर्शक है।

10) गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल क्यों कहा जाता है? [4]

Why the Gupta period is called Golden age of Indian History?

उत्तर: गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल निम्नलिखित कारणों से कहा जाता है:

  1. राजनीतिक एकता: इस काल में उत्तर भारत में राजनीतिक एकता स्थापित हुई और शक्तिशाली केंद्रीय सरकार थी।
  2. सांस्कृतिक उन्नति: कला, साहित्य, संगीत और नृत्य का अभूतपूर्व विकास हुआ। कालिदास, विक्रमादित्य जैसे विद्वान हुए।
  3. विज्ञान और गणित: आर्यभट्ट, वराहमिहिर जैसे वैज्ञानिकों ने खगोलशास्त्र और गणित में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शून्य और दशमलव प्रणाली का विकास हुआ।
  4. व्यापार और अर्थव्यवस्था: व्यापार फला-फूला, सोने की मुद्राएँ प्रचलित थीं, और देश समृद्ध था।
  5. धार्मिक सहिष्णुता: हिंदू धर्म का पुनरुत्थान हुआ, लेकिन बौद्ध और जैन धर्म को भी संरक्षण मिला।

11) जूनागढ़ अभिलेख से रूद्रदामन के समय सुदर्शन झील के बारे में क्या जानकारी मिलती है? [4]

What the Junagarh inscription informs about the sudarshan lake during Rudradaman's period?

उत्तर: जूनागढ़ अभिलेख (शक शासक रुद्रदामन का) से सुदर्शन झील के बारे में निम्नलिखित जानकारी मिलती है:

  1. निर्माण: यह झील मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के समय बनाई गई थी, जिसे बाद में अशोक ने मरम्मत करवाई।
  2. रुद्रदामन का योगदान: रुद्रदामन ने इस झील की मरम्मत और विस्तार करवाया, जिससे सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ी।
  3. तकनीकी विवरण: अभिलेख में बताया गया है कि झील की दीवारें पत्थरों से बनी थीं और इसमें पानी का स्तर नियंत्रित करने के लिए नालियाँ थीं।
  4. प्रशासनिक क्षमता: यह अभिलेख रुद्रदामन की प्रशासनिक क्षमता और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रश्न 22

अलाऊद्दीन खिलजी द्वारा रणथम्भौर पर आक्रमण करने के कोई चार कारण लिखिए।

Write any four causes of the invasion of Ranthambhor by Allauddin Khilji.

अलाऊद्दीन खिलजी द्वारा रणथम्भौर पर आक्रमण के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  1. राजनीतिक महत्वाकांक्षा: अलाऊद्दीन खिलजी अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था और रणथम्भौर एक सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था।
  2. हमीर देव का विरोध: रणथम्भौर का शासक हमीर देव चौहान अलाऊद्दीन की अधीनता स्वीकार नहीं करता था और उसने खिलजी के विरुद्ध विद्रोहियों को शरण दी थी।
  3. धन और संपत्ति का लालच: रणथम्भौर दुर्ग में अपार धन-संपत्ति होने की खबरें थीं, जिसे लूटने का लालच अलाऊद्दीन को था।
  4. साम्राज्यवादी नीति: अलाऊद्दीन ने दक्षिण भारत पर आक्रमण से पहले उत्तर भारत के शक्तिशाली राज्यों को समाप्त करने की नीति अपनाई थी, जिसके तहत रणथम्भौर पर हमला किया गया।

प्रश्न 23

भारत में अंग्रेजों के विरूद्ध फ्रांसीसियों की असफलता के क्या कारण थे?

What were the causes of the failure of French against British in India?

भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध फ्रांसीसियों की असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  1. नौसैनिक शक्ति की कमी: अंग्रेजों के पास मजबूत नौसेना थी जबकि फ्रांसीसी नौसेना कमजोर थी, जिससे उनकी समुद्री आपूर्ति लाइनें प्रभावित हुईं।
  2. यूरोपीय युद्धों का प्रभाव: यूरोप में ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध और सात वर्षीय युद्ध में फ्रांस की हार ने भारत में उनकी स्थिति को कमजोर किया।
  3. नेतृत्व की कमी: फ्रांसीसी गवर्नर डुप्ले को 1754 में वापस बुला लिया गया, जिसके बाद फ्रांसीसियों के पास कुशल नेतृत्व नहीं रहा।
  4. स्थानीय शासकों का समर्थन न मिलना: अंग्रेजों ने स्थानीय शासकों को अपने पक्ष में करने में सफलता पाई जबकि फ्रांसीसी ऐसा नहीं कर सके।
  5. आर्थिक कमजोरी: फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी आर्थिक रूप से कमजोर थी और युद्ध के लिए पर्याप्त धन जुटा नहीं पाई।

प्रश्न 24

भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार में लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि किस प्रकार सहायक हुई ?

How the subsidiary alliance of Lord Wellesley proved helpful in the expansion of British empire in India?

लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि ने निम्नलिखित प्रकार से ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार में सहायता की:

  1. सैन्य नियंत्रण: संधि के तहत भारतीय राज्यों को अपनी सेना रखने की अनुमति नहीं थी, बल्कि उन्हें अंग्रेजों की सेना के रखरखाव के लिए धन देना पड़ता था। इससे अंग्रेजों का सैन्य नियंत्रण बढ़ा।
  2. विदेश नीति पर नियंत्रण: संधि के तहत भारतीय राज्य अपनी विदेश नीति स्वयं नहीं बना सकते थे, उन्हें अंग्रेजों की अनुमति लेनी पड़ती थी।
  3. अंग्रेजों की सर्वोच्चता: सहायक संधि ने अंग्रेजों को भारतीय राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अवसर दिया और धीरे-धीरे उन्हें अंग्रेजों के अधीन कर दिया।
  4. विस्तार की नीति: इस संधि के माध्यम से लॉर्ड वेलेजली ने कई राज्यों जैसे हैदराबाद, अवध, तंजौर, सूरत आदि को अपने नियंत्रण में ले लिया, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार हुआ।

प्रश्न 25

केबिनेट मिशन के प्रावधानों का विश्लेषण कीजिए।

Analyse the provisions of the Cabinet Mission.

केबिनेट मिशन (1946) के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण निम्नलिखित है:

  1. अखिल भारतीय संघ का गठन: मिशन ने एक अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव रखा जो ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों को शामिल करता था। संघ केवल विदेश, रक्षा और संचार जैसे विषयों पर नियंत्रण रखता था।
  2. प्रांतीय स्वायत्तता: शेष विषयों पर प्रांतों को पूर्ण स्वायत्तता दी जानी थी। प्रांतों को तीन समूहों (ग्रुप A, B, C) में विभाजित किया गया था।
  3. समूह प्रणाली: ग्रुप A में हिंदू बहुल प्रांत, ग्रुप B में मुस्लिम बहुल प्रांत (पंजाब, सिंध, NWFP, बलूचिस्तान) और ग्रुप C में बंगाल और असम शामिल थे।
  4. अंतरिम सरकार का गठन: मिशन ने एक अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा जिसमें सभी दलों को प्रतिनिधित्व मिले।
  5. संविधान सभा का गठन: एक संविधान सभा बनाने का प्रस्ताव था जो भारत का संविधान तैयार करेगी।

विश्लेषण: केबिनेट मिशन ने भारत की एकता बनाए रखने का प्रयास किया, लेकिन मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच मतभेदों के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी। मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग पर अड़ी रही, जबकि कांग्रेस समूह प्रणाली को कमजोर करना चाहती थी। अंततः यह योजना विफल रही और देश का विभाजन हुआ।

प्रश्न 26

सीकर के किसानों को संगठित करने में “जाट प्रजापति महायज्ञ” की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

Evaluate the role of "Jat Prajapati Mahayagya" in organizing the peasants of Sikar.

"जाट प्रजापति महायज्ञ" ने सीकर के किसानों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसका मूल्यांकन निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर किया जा सकता है:

  1. सांस्कृतिक मंच: यह महायज्ञ एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन था, जिसने जाट समुदाय के किसानों को एक साथ लाने का काम किया। इसने किसानों में एकता और जागरूकता पैदा की।
  2. राजनीतिक चेतना: इस महायज्ञ के माध्यम से किसानों को अपने अधिकारों और शोषण के प्रति जागरूक किया गया। यह किसान आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना।
  3. संगठन का आधार: महायज्ञ ने किसानों को संगठित करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया। इसने किसानों को अपनी समस्याओं पर चर्चा करने और सामूहिक कार्रवाई करने का अवसर दिया।
  4. शोषण के विरुद्ध संघर्ष: इस महायज्ञ ने जागीरदारों और सामंतों के शोषण के विरुद्ध किसानों को एकजुट किया और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा दी।

इस प्रकार, "जाट प्रजापति महायज्ञ" ने सीकर के किसानों को संगठित करने और उनमें राजनीतिक चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 27

1857 की क्रांति में आऊवा के ठाकुर खुशाल सिंह के योगदान का उल्लेख कीजिए।

Mention the contribution of Aauwa Thakur Khushal Singh in the revolution of 1857.

1857 की क्रांति में आऊवा के ठाकुर खुशाल सिंह का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था। उनके योगदान के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. विद्रोह का नेतृत्व: ठाकुर खुशाल सिंह ने राजस्थान में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया और अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष छेड़ा।
  2. आऊवा दुर्ग की रक्षा: उन्होंने आऊवा दुर्ग को अंग्रेजों के विरुद्ध एक मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित किया और वहां से अंग्रेजी सेना का डटकर मुकाबला किया।
  3. अन्य शासकों को प्रेरित किया: उन्होंने अन्य स्थानीय शासकों और जनता को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया।
  4. बलिदान: ठाकुर खुशाल सिंह ने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए अंतिम सांस तक संघर्ष किया और 1857 की क्रांति में अपने प्राणों की आहुति दी।

उनका योगदान राजस्थान में 1857 की क्रांति के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है।

खण्ड - द् (Section - D)

28) धर्म व ज्ञान के संरक्षक के रूप में हर्ष की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए। [6]

Describe the achievements of Harsha as a guardian of religion and Knowledge.

हर्ष की उपलब्धियाँ (धर्म व ज्ञान के संरक्षक के रूप में):

  • धार्मिक सहिष्णुता: हर्ष स्वयं शैव थे, लेकिन उन्होंने बौद्ध धर्म और जैन धर्म को भी संरक्षण दिया। उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई।
  • बौद्ध धर्म का संरक्षण: हर्ष ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को उदार दान दिया और कन्नौज में एक बड़ा बौद्ध मठ बनवाया।
  • प्रयाग का महामेला: हर पाँच वर्ष में प्रयाग में एक विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता था, जिसमें वे अपनी संपत्ति दान कर देते थे।
  • ज्ञान का संरक्षण: हर्ष स्वयं एक विद्वान और लेखक थे। उन्होंने 'नागानंद', 'रत्नावली' और 'प्रियदर्शिका' जैसे नाटकों की रचना की।
  • विद्वानों का संरक्षण: उनके दरबार में बाणभट्ट (हर्षचरित के लेखक) जैसे विद्वान रहते थे। उन्होंने शिक्षा और साहित्य को प्रोत्साहित किया।
  • नालंदा विश्वविद्यालय: हर्ष ने नालंदा विश्वविद्यालय को संरक्षण दिया, जो उस समय शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था।

अथवा / OR

गुप्तकालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का वर्णन कीजिए।

Describe the science and technology of Gupta period.

गुप्तकालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

  • गणित: आर्यभट्ट ने 'आर्यभट्टीय' ग्रंथ की रचना की, जिसमें शून्य, दशमलव प्रणाली और पाई (π) के मान का उल्लेख है। उन्होंने सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के कारणों की वैज्ञानिक व्याख्या की।
  • खगोल विज्ञान: वराहमिहिर ने 'पंचसिद्धांतिका' और 'बृहत्संहिता' लिखी। उन्होंने ग्रहों की गति और ज्योतिष पर कार्य किया।
  • चिकित्सा विज्ञान: चरक और सुश्रुत के ग्रंथों का अध्ययन जारी रहा। सर्जरी और औषधि विज्ञान में प्रगति हुई।
  • धातु विज्ञान: दिल्ली का लौह स्तंभ (गुप्तकालीन) जंग रोधी तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण है। सोने, चांदी और तांबे के सिक्के ढाले गए।
  • रसायन विज्ञान: रंग बनाने, कांच बनाने और धातुओं के शोधन में उन्नति हुई।
  • प्रौद्योगिकी: मंदिर निर्माण, मूर्तिकला और सिंचाई प्रणालियों में तकनीकी विकास हुआ। अजंता और एलोरा की गुफाएं इस काल की उत्कृष्ट कलाकृतियां हैं।

29) भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारणों का विस्तार से वर्णन कीजिये। [6]

Describe the causes of the rise of nationalism in India.

भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण:

  1. ब्रिटिश शासन का एकीकरण: अंग्रेजों ने पूरे भारत को एक प्रशासनिक इकाई में बांध दिया, जिससे एकता की भावना जागृत हुई।
  2. आधुनिक शिक्षा का प्रसार: अंग्रेजी शिक्षा ने पश्चिमी विचारों (लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता) का प्रसार किया और बुद्धिजीवियों का एक वर्ग तैयार किया।
  3. प्रेस और संचार का विकास: समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने राष्ट्रीय मुद्दों पर जागरूकता फैलाई और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।
  4. आर्थिक शोषण: ब्रिटिश नीतियों (जैसे भू-राजस्व प्रणाली, व्यापार नीति) ने भारतीयों को आर्थिक रूप से शोषित किया, जिससे असंतोष बढ़ा।
  5. सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन: राजा राम मोहन राय, स्वामी विवेकानंद आदि ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई और राष्ट्रीय चेतना जगाई।
  6. प्रशासनिक नीतियां: लॉर्ड लिटन के शासनकाल में दमनकारी नीतियों (जैसे वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट) ने विरोध को जन्म दिया।
  7. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885): इसने राष्ट्रीय आंदोलन को एक मंच प्रदान किया।

अथवा / OR

असहयोग आन्दोलन पर एक निबन्ध लिखिए।

Write an essay on Non-Cooperation movement.

असहयोग आन्दोलन (1920-1922):

असहयोग आन्दोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख आंदोलन था। यह आंदोलन अहिंसक और सविनय अवज्ञा पर आधारित था।

कारण:

  • रौलट एक्ट (1919) और जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) ने भारतीयों को आक्रोशित कर दिया।
  • खिलाफत आंदोलन (तुर्की के खलीफा के समर्थन में) ने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया।
  • गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग का आह्वान किया।

कार्यक्रम:

  • सरकारी उपाधियों और पदों का त्याग।
  • सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों का बहिष्कार।
  • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग।
  • राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों (जैसे काशी विद्यापीठ) की स्थापना।

परिणाम:

  • आंदोलन ने जनता में राष्ट्रीय चेतना जगाई।
  • चौरी-चौरा कांड (1922) के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया।
  • इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी।

30) भारत के मानचित्र में निम्नलिखित ऐतिहासिक स्थलों को अंकित कीजिए। [6×1=6]

Mark the following historical places in the outline map of India.

  1. कालीबंगा (Kalibanga)
  2. कलिंग (Kalinga)
  3. कलकत्ता (Calcutta)
  4. पूना (Poona)
  5. मथुरा (Mathura)
  6. जलियनवाला बाग (Jalianwala Bag)

(Note: The map marking is to be done on an outline map of India. The above list indicates the places to be marked.)

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