RBSE Class 12th 2018 -SS-40-1-2018 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2018
Subject -SS-40-1-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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How to practise with this question paper

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RBSE Class 12th 2018 -SS-40-1-2018

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Rajasthan Board Class 12th -SS-40-1-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018

भौतिक विज्ञान
PHYSICS

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 56


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करना अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.

प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER

नामांक / Roll No. : _______________

SLNo. : _______________

No. of Questions : 30    No. of Printed Pages : 11

प्रश्न पत्र कोड : SS-40-1-Phy. (Supp.)

परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)

5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।

If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

6) प्रश्न संख्या एवं अंक योजना:

प्रश्न संख्या (Q. Nos.) प्रति प्रश्न अंक (Marks per question)
1-3 1
4-24 2
25-27 3
28-30 4

7) प्रश्न संख्या 22, 25 तथा 28 से 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।

There are internal choices in Q.Nos. 22, 25 and 28 to 30.

8) परीक्षा में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति नहीं है।

Use of calculator is not allowed in the examination.

77-40 -I-Phy. 272

प्रश्न 2

दो बिन्दु आवेशों के मध्य सुचालक माध्यम होने पर आवेशों के मध्य स्थिर विद्युत बल का मान कितना होगा?

What will be the value of electrostatic force between two point charges when a conducting medium is present between them?

उत्तर: जब दो बिन्दु आवेशों के मध्य सुचालक माध्यम होता है, तो स्थिर विद्युत बल का मान शून्य हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सुचालक माध्यम में मुक्त इलेक्ट्रॉन आवेशों को उदासीन कर देते हैं, जिससे बल का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 3

किसी चालक के लिए भौतिक राशियों P व Q के मान क्रमश: 4Ω व 24×10⁻⁸ Ωm है। चालक की लम्बाई एक चौथाई करने पर P व Q के नवीन मान लिखिए।

The values of physical quantities P and Q for a conductor are 4Ω and 24×10⁻⁸ Ωm respectively. Write new values of P and Q if length of conductor becomes one fourth.

उत्तर: यहाँ P प्रतिरोध (R) और Q प्रतिरोधकता (ρ) है। प्रतिरोधकता (Q) चालक के पदार्थ पर निर्भर करती है, लम्बाई पर नहीं, अतः Q का नवीन मान वही रहेगा: 24×10⁻⁸ Ωm

प्रतिरोध (P) का सूत्र R = ρL/A है। यदि लम्बाई (L) एक चौथाई हो जाए, तो नया प्रतिरोध R' = ρ(L/4)/A = R/4 = 4Ω/4 =

अतः P का नवीन मान और Q का नवीन मान 24×10⁻⁸ Ωm होगा।

प्रश्न 4

एक चल कुण्डली धारामापी को अमीटर में किस प्रकार रूपांतरित किया जाता है?

How a moving coil galvanometer is converted into an ammeter?

उत्तर: चल कुण्डली धारामापी को अमीटर में रूपांतरित करने के लिए इसके समान्तर क्रम में एक अल्प प्रतिरोध (शण्ट प्रतिरोध) जोड़ा जाता है। यह शण्ट प्रतिरोध अधिकांश धारा को अपने से होकर प्रवाहित कर देता है, जिससे धारामापी के कुण्डली में केवल सुरक्षित सीमा तक ही धारा जाती है। इस प्रकार धारामापी को बड़ी धाराओं को मापने योग्य बनाया जाता है।

प्रश्न 5

किसी छड़-चुम्बक के चुम्बकीय आघूर्ण की परिभाषा लिखिए।

Write Definition of magnetic moment for a bar magnet.

उत्तर: किसी छड़-चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण (M) उसके उत्तरी ध्रुव प्राबल्य (m) और ध्रुवों के बीच की दूरी (2l) के गुणनफल के बराबर होता है। इसे सूत्र M = m × 2l द्वारा व्यक्त किया जाता है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।

प्रश्न 6

“अन्योन्य प्रेरण गुणांक” का विमीय सूत्र लिखिए।

Write Dimensional formula for coefficient of mutual induction.

उत्तर: अन्योन्य प्रेरण गुणांक (M) का विमीय सूत्र [ML²T⁻²A⁻²] होता है।

प्रश्न 7

प्रकाश के प्रकीर्णन की परिभाषा लिखिए।

Write definition of scattering of light.

उत्तर: प्रकाश के प्रकीर्णन से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जिसमें प्रकाश तरंगें किसी माध्यम में उपस्थित छोटे-छोटे कणों (जैसे धूल, धुआँ, या अणु) से टकराकर अपने मूल पथ से विचलित हो जाती हैं और चारों दिशाओं में फैल जाती हैं।

प्रश्न 8

निरोधी विभव को परिभाषित कीजिए।

Define stopping potential.

उत्तर: निरोधी विभव (Stopping Potential) वह न्यूनतम विभवांतर है जिसे प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों के विपरीत दिशा में लगाने पर सबसे तीव्र गति वाले इलेक्ट्रॉन भी एनोड तक पहुँचने से रुक जाते हैं, जिससे प्रकाश-विद्युत धारा शून्य हो जाती है। इसे V₀ से प्रदर्शित किया जाता है।

8.

एक नैज अर्द्धचालक को N-प्रकार के अर्द्धचालक में परिवर्तित करने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली दो अशुद्धियों के नाम लिखिए।

Write the name of any two impurities used to convert an intrinsic semiconductor into N-type semiconductor.

उत्तर: N-प्रकार के अर्द्धचालक बनाने के लिए पंचसंयोजी अशुद्धियों का उपयोग किया जाता है। दो उदाहरण हैं: आर्सेनिक (As) और फॉस्फोरस (P)।

Answer: Pentavalent impurities are used to create N-type semiconductors. Two examples are: Arsenic (As) and Phosphorus (P).

9.

एक ट्रांजिस्टर के लिए उभयनिष्ठ उत्सर्जक अभिविन्यास में धारा लाभ 99 है। इसी ट्रांजिस्टर के लिए उभयनिष्ठ आधार अभिविन्यास में धारा लाभ ज्ञात कीजिए।

Current gain for a transistor in common emitter configuration is 99. Find the current gain for this transistor in common base configuration.

हल: उभयनिष्ठ उत्सर्जक धारा लाभ (β) = 99

उभयनिष्ठ आधार धारा लाभ (α) = β / (1 + β) = 99 / (1 + 99) = 99 / 100 = 0.99

Solution: Common emitter current gain (β) = 99

Common base current gain (α) = β / (1 + β) = 99 / (1 + 99) = 99 / 100 = 0.99

10.

XOR द्वार का प्रतीक चिन्ह बनाइए।

Draw the symbol diagram for XOR gate.

उत्तर: XOR गेट का प्रतीक चिन्ह नीचे दर्शाया गया है:

    ┌───┐
A ──┤   ├── Y = A ⊕ B
    │ =1│
B ──┤   │
    └───┘

Answer: The symbol for XOR gate is shown above, where the output Y = A ⊕ B.

11.

नैनो संरचनाओं का प्रेक्षण करने के लिए उपयोग में आने वाले किसी एक सूक्ष्मदर्शी का नाम लिखिए।

Write the name of any one microscope used for observations of Nano-Structures.

उत्तर: स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (SEM) या ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (TEM)।

Answer: Scanning Electron Microscope (SEM) or Transmission Electron Microscope (TEM).

12.

संचार तंत्र के विभिन्न अवयवों को ब्लॉक आरेख द्वारा दर्शाइए।

Draw Block diagram to show the various elements of Communication System.

उत्तर: संचार तंत्र के मुख्य अवयवों का ब्लॉक आरेख:

[सूचना स्रोत] → [ट्रांसमीटर] → [चैनल] → [रिसीवर] → [गंतव्य]

Answer: The block diagram of a communication system includes: Information Source → Transmitter → Channel → Receiver → Destination.

13.

एक समतल दर्पण द्वारा गोलीय तरंगाग्र के परावर्तन को चित्र में प्रदर्शित कीजिए।

Show the reflection of a spherical wavefront by a plane mirror in diagram.

उत्तर: जब एक गोलीय तरंगाग्र समतल दर्पण पर आपतित होता है, तो परावर्तित तरंगाग्र भी गोलीय होता है, लेकिन इसका वक्रता केंद्र दर्पण के पीछे होता है।

       आपतित तरंगाग्र
       ┌──────┐
       │      │
       │  ●   │ (स्रोत)
       │      │
       └──────┘
         │
    ─────┴───── समतल दर्पण
         │
       ┌──────┐
       │      │
       │  ●   │ (प्रतिबिंब)
       │      │
       └──────┘
       परावर्तित तरंगाग्र

Answer: When a spherical wavefront is incident on a plane mirror, the reflected wavefront is also spherical, with its center of curvature behind the mirror.

14.

एक गोलीय संधारित्र के बाहरी व भीतरी गोलों की त्रिज्यायें क्रमश: 1 मी. व 75 सेमी. है। दोनों गोलों के मध्य εr = 9 का माध्यम भरा हुआ हो तो संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।

The outer and inner radii of a spherical capacitor is 1m and 75cm respectively. Find the capacitance of this capacitor if the medium of εr = 9 is filled between the spheres of capacitor.

हल: दिया है: बाहरी त्रिज्या (b) = 1 मी, भीतरी त्रिज्या (a) = 75 सेमी = 0.75 मी, सापेक्षिक विद्युतशीलता (εr) = 9

गोलीय संधारित्र की धारिता का सूत्र: C = 4πε₀εr × (ab) / (b - a)

यहाँ, 4πε₀ = 1 / (9 × 10⁹) = 1.11 × 10⁻¹⁰ F/m

ab = 1 × 0.75 = 0.75 m²

b - a = 1 - 0.75 = 0.25 m

C = (1 / (9 × 10⁹)) × 9 × (0.75 / 0.25)

C = (1 / 10⁹) × 3 = 3 × 10⁻⁹ F = 3 nF

Solution: Given: Outer radius (b) = 1 m, Inner radius (a) = 75 cm = 0.75 m, Relative permittivity (εr) = 9

Formula for spherical capacitor: C = 4πε₀εr × (ab) / (b - a)

Here, 4πε₀ = 1 / (9 × 10⁹) = 1.11 × 10⁻¹⁰ F/m

ab = 1 × 0.75 = 0.75 m²

b - a = 1 - 0.75 = 0.25 m

C = (1 / (9 × 10⁹)) × 9 × (0.75 / 0.25)

C = (1 / 10⁹) × 3 = 3 × 10⁻⁹ F = 3 nF

5) विभवमापी का सिद्धान्त लिखिए। विभवमापी की सहायता से एक अल्प प्रतिरोध ज्ञात करने का परिपथ चित्र बनाइये।

Write the principle of Potentiometer. Draw the circuit diagram used for the measurement of small resistance with the help of potentiometer.

सिद्धान्त (Principle): विभवमापी का सिद्धान्त यह है कि जब किसी एकसमान अनुप्रस्थ काट वाले तार में स्थिर धारा प्रवाहित की जाती है, तो तार के किसी भी दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर उन बिन्दुओं के बीच की लम्बाई के समानुपाती होता है। अर्थात्, V ∝ l.

अल्प प्रतिरोध मापन का परिपथ चित्र (Circuit Diagram for measuring small resistance):

[चित्र: एक विभवमापी तार, एक सेल E, एक धारा नियंत्रक Rh, तथा एक कुंजी K श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। अज्ञात अल्प प्रतिरोध r और एक ज्ञात प्रतिरोध R को श्रेणीक्रम में जोड़कर इस संयोजन को एक सेल E' से जोड़ा गया है। विभवमापी के सिरे A और B के बीच तार पर दो बिन्दु P और Q चिह्नित हैं। P और Q के बीच विभवान्तर मापा जाता है।]

व्याख्या: परिपथ में, अज्ञात अल्प प्रतिरोध r और ज्ञात प्रतिरोध R को श्रेणीक्रम में जोड़कर, इनके सिरों के बीच विभवान्तर क्रमशः Vr और VR विभवमापी से मापे जाते हैं। चूँकि धारा समान है, r/R = Vr/VR से r ज्ञात किया जा सकता है।


6) किसी चालक के लिए ओम के नियम के सूक्ष्म रूप की व्युत्पत्ति कीजिए।

Deduct the microscopic form of Ohm's law for a conductor.

व्युत्पत्ति (Derivation): ओम के नियम के सूक्ष्म रूप में, किसी चालक में धारा घनत्व J और विद्युत क्षेत्र E के बीच संबंध स्थापित किया जाता है।

माना किसी चालक में इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग vd है। धारा घनत्व J = n e vd, जहाँ n इलेक्ट्रॉन घनत्व है, e आवेश है।

अपवाह वेग vd = (eEτ)/m, जहाँ τ विश्रांति काल है, m इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है।

अतः J = n e (eEτ/m) = (n e² τ/m) E

यहाँ (n e² τ/m) को चालकता σ कहते हैं। अतः J = σ E

यही ओम के नियम का सूक्ष्म रूप है। इसमें J और E के बीच सीधा समानुपातिक संबंध दर्शाया गया है।


7) दो लम्बे धारावाही तार एक दूसरे से 10 cm की दूरी पर परस्पर समान्तर रखे हुए हैं। यदि इनमें क्रमश: I एवं 4I मान की धाराएँ समान दिशा में प्रवाहित हो रही हों तो उस बिन्दु की स्थिति ज्ञात कीजिए जहाँ तारों के कारण उत्पन्न परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र का मान शून्य है।

Two long current carrying conductor wires are placed parallel to each other at a distance of 10 cm. If I and 4I currents are passing through them in same direction then find the position of the point where resultant magnetic field is zero due to wires.

हल (Solution): माना दो तारों के बीच की दूरी d = 10 cm = 0.1 m है। पहले तार में धारा I तथा दूसरे में 4I है, दोनों समान दिशा में हैं।

परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होने के लिए, दोनों तारों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होने चाहिए। चूँकि धाराएँ समान दिशा में हैं, यह स्थिति तारों के बीच में होगी।

माना पहले तार से x दूरी पर बिन्दु P है, तो दूसरे तार से दूरी (d - x) होगी।

पहले तार के कारण चुम्बकीय क्षेत्र: B₁ = μ₀I / (2πx)

दूसरे तार के कारण चुम्बकीय क्षेत्र: B₂ = μ₀(4I) / [2π(d - x)]

शून्य क्षेत्र के लिए B₁ = B₂

⇒ μ₀I / (2πx) = μ₀(4I) / [2π(d - x)]

⇒ 1/x = 4/(d - x)

⇒ d - x = 4x

⇒ d = 5x

⇒ x = d/5 = 10 cm / 5 = 2 cm

अतः अभीष्ट बिन्दु पहले तार (I धारा वाले) से 2 cm की दूरी पर, दोनों तारों के बीच स्थित है।


8) एम्पीयर के नियम की सहायता से लम्बे बेलनाकार धारावाही चालक के कारण चालक के अन्दर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात करने का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।

Derive the formula to find the magnetic field inside a long current carrying cylindrical conductor with the help of Ampere's law.

व्युत्पत्ति (Derivation): माना एक लम्बा बेलनाकार चालक है जिसकी त्रिज्या R है और इसमें धारा I प्रवाहित हो रही है। हम चालक के अन्दर, अक्ष से r दूरी (r < R) पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करना चाहते हैं।

एम्पीयर के नियम के अनुसार, ∮ B·dl = μ₀ Ienclosed

हम चालक के अक्ष के समान्तर, त्रिज्या r का एक वृत्ताकार एम्पीयरियन लूप लेते हैं। इस लूप पर चुम्बकीय क्षेत्र B सर्वत्र समान और स्पर्शरेखीय होता है।

अतः ∮ B·dl = B × (2πr)

अब, लूप द्वारा घिरी धारा Ienclosed = (धारा घनत्व) × (लूप का क्षेत्रफल)

धारा घनत्व J = I / (πR²)

लूप का क्षेत्रफल = πr²

अतः Ienclosed = (I / πR²) × πr² = I (r²/R²)

एम्पीयर के नियम से:

B × (2πr) = μ₀ I (r²/R²)

⇒ B = (μ₀ I r) / (2π R²)

यह चालक के अन्दर (r ≤ R) चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र है। यह दर्शाता है कि चालक के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र अक्ष से दूरी r के समानुपाती होता है।


9) एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखे दण्ड चुम्बक पर लगने वाले बलाघूर्ण का मान ज्ञात करने का सूत्र स्थापित कीजिए। यदि दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण 2 A·m² हो तथा यह 5 टेसला के चुम्बकीय क्षेत्र में 30° के कोण पर रखा हो तो दण्ड चुम्बक पर कार्यरत बलाघूर्ण का मान भी ज्ञात कीजिए।

Derive the formula to find the value of torque on a bar magnet placed in a uniform magnetic field. If a bar magnet of magnetic moment 2 A·m² is placed in a magnetic field of 5 Tesla at 30° angle then also calculate the value of torque working on the bar magnet.

सूत्र की स्थापना (Derivation of formula): माना एक दण्ड चुम्बक जिसका चुम्बकीय आघूर्ण M है, को एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में θ कोण पर रखा गया है। चुम्बक के उत्तरी ध्रुव (N) पर बल F = mB (क्षेत्र की दिशा में) तथा दक्षिणी ध्रुव (S) पर बल F = mB (क्षेत्र की विपरीत दिशा में) लगता है, जहाँ m ध्रुव प्रबलता है।

ये दोनों बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत हैं, अतः ये एक बलयुग्म बनाते हैं। बलयुग्म का आघूर्ण (Torque) = बल × बलों के बीच लम्बवत दूरी

लम्बवत दूरी = 2l sinθ, जहाँ 2l चुम्बक की लम्बाई है।

अतः बलाघूर्ण τ = (mB) × (2l sinθ) = (m × 2l) B sinθ = M B sinθ

अतः सूत्र: τ = M B sinθ

गणना (Calculation): दिया है: M = 2 A·m², B = 5 T, θ = 30°

τ = M B sinθ = 2 × 5 × sin30° = 10 × (1/2) = 5 N·m

अतः दण्ड चुम्बक पर कार्यरत बलाघूर्ण 5 N·m है।

20) LCR श्रेणी परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टता तथा धारा के मान निम्न हैं:

दिया गया है:

V = 20 Sin 200t

I = 7 Sin (200t - π/4)

परिपथ में निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिए:

A) प्रतिबाधा (Impedance)

B) प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति (Frequency of alternating current)

हल:

A) प्रतिबाधा (Z):

प्रतिबाधा Z = V₀ / I₀

जहाँ V₀ = 20 V (अधिकतम वोल्टता) और I₀ = 7 A (अधिकतम धारा)

Z = 20 / 7 ≈ 2.86 Ω

B) आवृत्ति (f):

दिए गए समीकरण V = 20 Sin 200t से, कोणीय आवृत्ति ω = 200 rad/s

आवृत्ति f = ω / (2π) = 200 / (2 × 3.14) = 200 / 6.28 ≈ 31.85 Hz

अतः प्रतिबाधा ≈ 2.86 Ω और आवृत्ति ≈ 31.85 Hz है।


21) a) रदरफोर्ड-सोडी का रेडियोएक्टिव क्षय का नियम लिखिए।

उत्तर: रदरफोर्ड-सोडी का रेडियोएक्टिव क्षय का नियम कहता है कि किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ में प्रति इकाई समय में क्षय होने वाले परमाणुओं की संख्या, उस समय उपस्थित परमाणुओं की कुल संख्या के समानुपाती होती है।

गणितीय रूप में: dN/dt = -λN, जहाँ N परमाणुओं की संख्या, t समय, और λ क्षय नियतांक है।

b) रेडियोएक्टिव पदार्थ के लिए चरघातांकी क्षय वक्र बनाइये।

उत्तर: रेडियोएक्टिव क्षय का वक्र चरघातांकी (exponential) होता है। इसमें समय के साथ परमाणुओं की संख्या घटती जाती है।

चरघातांकी क्षय वक्र

N₀ |          *
    |        *
    |      *
    |    *
    |  *
    |*
    +------------------→ t

N₀ = प्रारंभिक परमाणुओं की संख्या, t = समय

वक्र N = N₀ e-λt के अनुसार घटता है।

22) बोर सिद्धान्त द्वारा हाइड्रोजन वर्णक्रम में प्राप्त स्पैक्ट्रमी रेखाओं का तरंग दैर्ध्य ज्ञात करने का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। [2]

व्युत्पत्ति:

बोर के सिद्धान्त के अनुसार, जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर (n₂) से निम्न ऊर्जा स्तर (n₁) में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा होती है:

ΔE = E₂ - E₁ = hν = hc/λ

हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा:

En = -13.6/n² eV

अतः ΔE = 13.6 (1/n₁² - 1/n₂²) eV

चूँकि hc = 12400 eV·Å, तरंगदैर्ध्य λ के लिए:

1/λ = R (1/n₁² - 1/n₂²)

जहाँ R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹ (रिडबर्ग नियतांक) है। यही अभीष्ट सूत्र है।

अथवा

हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा में इलैक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। [2]

व्यंजक:

बोर मॉडल के अनुसार, nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा:

En = - (me⁴)/(8ε₀²h²) × (1/n²)

या En = -13.6/n² eV

जहाँ m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, e = आवेश, ε₀ = निर्वात की विद्युतशीलता, h = प्लांक नियतांक।

23) ड्यूट्रॉन (²H) नाभिक के लिए प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा का मान ज्ञात कीजिए। दिया है - [2]

ड्यूट्रॉन नाभिक का द्रव्यमान = 2.013 u
प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.007 u
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.008 u
तथा 1 u = 931 MeV/c²

हल:

ड्यूट्रॉन में 1 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन होता है।

द्रव्यमान क्षति (Δm) = (प्रोटॉन का द्रव्यमान + न्यूट्रॉन का द्रव्यमान) - ड्यूट्रॉन का द्रव्यमान

Δm = (1.007 + 1.008) - 2.013 = 2.015 - 2.013 = 0.002 u

बंधन ऊर्जा = Δm × 931 MeV = 0.002 × 931 = 1.862 MeV

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा = कुल बंधन ऊर्जा / न्यूक्लिऑनों की संख्या

= 1.862 / 2 = 0.931 MeV

24) विस्थापन धारा की परिभाषा लिखिए। सिद्ध कीजिए कि विस्थापन धारा चालन धारा के तुल्य होती है।

Write definition of displacement current. Prove that displacement current is equal to conduction current.

परिभाषा (Definition): विस्थापन धारा वह धारा है जो समय के साथ बदलते विद्युत क्षेत्र (या विद्युत फ्लक्स) के कारण उत्पन्न होती है। इसे मैक्सवेल ने एम्पीयर के नियम में संशोधन के लिए प्रस्तावित किया था। विस्थापन धारा का मान \( I_d = \varepsilon_0 \frac{d\phi_E}{dt} \) होता है, जहाँ \( \phi_E \) विद्युत फ्लक्स है।

सिद्ध करना (Proof): मान लीजिए कि एक संधारित्र को आवेशित किया जा रहा है। संधारित्र की प्लेटों के बीच क्षेत्र में कोई चालन धारा नहीं होती, लेकिन विद्युत क्षेत्र बदलता है।

संधारित्र की प्लेट पर आवेश \( q = CV \) होता है। प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र \( E = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} = \frac{q}{A\varepsilon_0} \) होता है, जहाँ A प्लेट का क्षेत्रफल है।

विद्युत फ्लक्स \( \phi_E = EA = \frac{q}{\varepsilon_0} \) होता है।

अतः विस्थापन धारा \( I_d = \varepsilon_0 \frac{d\phi_E}{dt} = \varepsilon_0 \frac{d}{dt}\left(\frac{q}{\varepsilon_0}\right) = \frac{dq}{dt} \)

लेकिन \( \frac{dq}{dt} \) चालन धारा \( I_c \) के बराबर है। अतः \( I_d = I_c \).

इस प्रकार सिद्ध होता है कि विस्थापन धारा चालन धारा के तुल्य होती है।

25) a) लैन्स की क्षमता की परिभाषा लिखिए।

Write definition of Power of lens.

परिभाषा (Definition): लेंस की क्षमता (Power of lens) उसकी प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता का माप है। इसे लेंस की फोकस दूरी (मीटर में) के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है। \( P = \frac{1}{f} \) (जहाँ f मीटर में है)। इसका मात्रक डायोप्टर (D) है।

25) b) एक उत्तल लैन्स की फोकस दूरी 24 cm है। कांच का अपवर्तनांक 3/2 हो तथा लैन्स के दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्या समान हो तो वक्रता त्रिज्या का मान ज्ञात कीजिए।

Focal length of a convex lens is 24 cm. If the refractive index of glass is 3/2 and radius of curvature of both the surfaces of lens are equal, then find the value of radius of curvature.

हल (Solution):

दिया गया है: फोकस दूरी \( f = 24 \) cm, अपवर्तनांक \( \mu = \frac{3}{2} \), दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्या समान है, माना \( R_1 = R \) और \( R_2 = -R \) (उत्तल लेंस के लिए चिह्न परिपाटी के अनुसार)।

लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) का उपयोग करते हैं:

\[ \frac{1}{f} = (\mu - 1) \left( \frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2} \right) \]

मान रखने पर:

\[ \frac{1}{24} = \left( \frac{3}{2} - 1 \right) \left( \frac{1}{R} - \frac{1}{-R} \right) \]

\[ \frac{1}{24} = \left( \frac{1}{2} \right) \left( \frac{1}{R} + \frac{1}{R} \right) \]

\[ \frac{1}{24} = \frac{1}{2} \times \frac{2}{R} \]

\[ \frac{1}{24} = \frac{1}{R} \]

अतः \( R = 24 \) cm.

उत्तर (Answer): वक्रता त्रिज्या 24 cm है।

25) अथवा (OR) प्रकाश के विवर्तन की परिभाषा लिखिए।

Write definition of diffraction of light.

परिभाषा (Definition): प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of light) वह घटना है जिसमें प्रकाश तरंगें किसी बाधा या स्लिट के किनारे से मुड़कर ज्यामितीय छाया क्षेत्र में प्रवेश करती हैं। यह तरंगों की प्रकृति को दर्शाता है और तब होता है जब बाधा का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के तुलनीय होता है।

25) एकल स्लिट से प्राप्त विवर्तन प्रतिरूप में 7200 Å के प्रकाश का प्रथम निम्निष्ठ, λ₁ के प्रकाश के प्रथम उच्चिष्ठ से सम्पाती होता है। λ₁ का मान ज्ञात कीजिए।

In the diffraction pattern of a single slit, the first minima for light of 7200 Å coincides with the first maxima of light of wavelength λ₁. Find the value of λ₁.

हल (Solution):

एकल स्लिट विवर्तन में, प्रथम निम्निष्ठ (first minima) की स्थिति के लिए: \( a \sin\theta = n\lambda \), जहाँ n = 1 के लिए \( a \sin\theta = \lambda \)

प्रथम उच्चिष्ठ (first maxima) की स्थिति के लिए: \( a \sin\theta = \left(n + \frac{1}{2}\right)\lambda \), जहाँ n = 1 के लिए \( a \sin\theta = \frac{3}{2}\lambda \)

दिया गया है कि 7200 Å के प्रकाश का प्रथम निम्निष्ठ, λ₁ के प्रकाश के प्रथम उच्चिष्ठ से सम्पाती है। अतः दोनों के लिए \( a \sin\theta \) समान होगा।

इसलिए: \( 7200 = \frac{3}{2} \lambda_1 \)

\[ \lambda_1 = 7200 \times \frac{2}{3} = 4800 \text{ Å} \]

उत्तर (Answer): λ₁ का मान 4800 Å है।

26) द्रव्य तरंगों से सम्बन्धित दे-ब्रागली परिकल्पना लिखिए। इसके आधार पर किसी गतिशील आवेशित कण एवं अनावेशित कण के लिए तरंग दैर्ध्य का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।

Write de-Broglie hypothesis related to matter waves. Derive the formula of wavelength for a moving charged and uncharged particle on the basis of this hypothesis.

दे-ब्रागली परिकल्पना (de-Broglie Hypothesis): दे-ब्रागली ने प्रस्तावित किया कि गतिशील कण (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि) तरंगों की तरह व्यवहार करते हैं। इन तरंगों को द्रव्य तरंगें (matter waves) कहा जाता है। किसी कण से सम्बद्ध तरंग की तरंगदैर्ध्य (λ) उसके संवेग (p) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात \( \lambda = \frac{h}{p} \), जहाँ h प्लांक नियतांक है।

सूत्र व्युत्पत्ति (Derivation of Formula):

(i) गतिशील आवेशित कण के लिए (For a moving charged particle):

मान लीजिए कि एक आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) जिसका द्रव्यमान m है और आवेश q है, V विभवांतर से त्वरित होता है।

कण द्वारा अर्जित गतिज ऊर्जा: \( K = qV = \frac{1}{2}mv^2 \)

कण का संवेग: \( p = mv = \sqrt{2mK} = \sqrt{2mqV} \)

दे-ब्रागली तरंगदैर्ध्य: \( \lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{\sqrt{2mqV}} \)

यह आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) के लिए तरंगदैर्ध्य का सूत्र है।

(ii) गतिशील अनावेशित कण के लिए (For a moving uncharged particle):

मान लीजिए कि एक अनावेशित कण (जैसे न्यूट्रॉन) जिसका द्रव्यमान m है, v वेग से गतिमान है।

कण की गतिज ऊर्जा: \( K = \frac{1}{2}mv^2 \)

कण का संवेग: \( p = mv = \sqrt{2mK} \)

दे-ब्रागली तरंगदैर्ध्य: \( \lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{\sqrt{2mK}} \)

यदि कण का ताप T पर तापीय संतुलन में है, तो \( K = \frac{3}{2}kT \) (जहाँ k बोल्ट्जमान नियतांक है), तब \( \lambda = \frac{h}{\sqrt{3mkT}} \)

यह अनावेशित कण के लिए तरंगदैर्ध्य का सामान्य सूत्र है।

27. A) नैज अर्द्धचालकों में विद्युत चालन की व्याख्या करते हुए धारा घनत्व के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।

व्याख्या: नैज (intrinsic) अर्द्धचालक शुद्ध अर्द्धचालक होते हैं जिनमें तापीय ऊर्जा के कारण इलेक्ट्रॉन-होल युग्म उत्पन्न होते हैं। इनमें इलेक्ट्रॉन और होल दोनों ही आवेश वाहक होते हैं। विद्युत क्षेत्र लगाने पर इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में और होल संयोजकता बैंड में गति करते हैं, जिससे धारा प्रवाहित होती है।

धारा घनत्व का व्यंजक:

माना कि नैज अर्द्धचालक में इलेक्ट्रॉनों का घनत्व ne और होलों का घनत्व nh है। नैज अर्द्धचालक में ne = nh = ni (आंतरिक वाहक सांद्रता)।

इलेक्ट्रॉनों के कारण धारा घनत्व: Je = ne e ve = ni e μe E

होलों के कारण धारा घनत्व: Jh = nh e vh = ni e μh E

कुल धारा घनत्व: J = Je + Jh = ni e (μe + μh) E

जहाँ e = इलेक्ट्रॉन का आवेश, μe = इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता, μh = होल की गतिशीलता, E = विद्युत क्षेत्र की तीव्रता।

27. B) एक पूर्ण तरंग दिष्टकारी के लिए निवेशी एवं निर्गत संकेतों का तरंग प्रतिरूप चित्र द्वारा दर्शाइये।

पूर्ण तरंग दिष्टकारी: यह AC वोल्टेज के दोनों अर्ध-चक्रों को DC में परिवर्तित करता है।

निवेशी संकेत (Input Signal): यह एक प्रत्यावर्ती धारा (AC) तरंग होती है जो समय के साथ धनात्मक और ऋणात्मक दोनों मान लेती है।

निर्गत संकेत (Output Signal): यह एक स्पंदित DC तरंग होती है जिसमें दोनों अर्ध-चक्र धनात्मक दिशा में होते हैं।

तरंग प्रतिरूप:

निवेशी तरंग: ~~~~/\/\/\~~~~ (AC तरंग)

निर्गत तरंग: ~~~~/\/\/\~~~~ (सभी शीर्ष ऊपर की ओर)

(चित्र में निवेशी AC तरंग और निर्गत स्पंदित DC तरंग दिखाई गई है)

28. विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा लिखिए। एक विद्युत द्विध्रुव की निरक्ष पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करने का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिये। आवश्यक चित्र बनाइये।

विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण की परिभाषा: विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (p) दो समान एवं विपरीत आवेशों (+q और -q) के बीच की दूरी (2a) और आवेश के परिमाण का गुणनफल है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर होती है।

p = q × 2a

निरक्ष पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक:

माना एक विद्युत द्विध्रुव AB है जिसके केंद्र O से निरक्ष पर r दूरी पर एक बिंदु P है।

+q आवेश के कारण P पर विद्युत क्षेत्र: E1 = (1/4πε0) × q/(r² + a²)

-q आवेश के कारण P पर विद्युत क्षेत्र: E2 = (1/4πε0) × q/(r² + a²)

E1 और E2 परिमाण में समान होते हैं लेकिन दिशा में भिन्न। इनके अभिलंब घटक निरस्त हो जाते हैं और क्षैतिज घटक जुड़ जाते हैं।

परिणामी विद्युत क्षेत्र: E = 2E1 cosθ

जहाँ cosθ = a/√(r² + a²)

E = 2 × (1/4πε0) × q/(r² + a²) × a/√(r² + a²)

E = (1/4πε0) × (2qa)/(r² + a²)3/2

चूँकि p = 2qa, अतः:

E = (1/4πε0) × p/(r² + a²)3/2

यदि r >> a, तो E = (1/4πε0) × p/r³

आवश्यक चित्र:

+q -----O----- -q

|← 2a →|

P (निरक्ष पर)

(चित्र में द्विध्रुव AB और निरक्ष पर बिंदु P दिखाया गया है)


अथवा

विद्युत विभव की परिभाषा लिखिए। एक आवेशित गोलीय कोश के कारण विभव का सूत्र व्युत्पन्न कीजिये जबकि:

विद्युत विभव की परिभाषा: किसी बिंदु पर विद्युत विभव वह कार्य है जो एकांक धनात्मक आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया जाता है।

आवेशित गोलीय कोश के कारण विभव:

माना R त्रिज्या का एक गोलीय कोश है जिस पर Q आवेश समान रूप से वितरित है।

i) जब बिंदु गोलीय कोश के बाहर स्थित हो (r > R):

गोलीय कोश के बाहर विद्युत क्षेत्र वैसा ही होता है जैसा कि केंद्र पर स्थित बिंदु आवेश Q के कारण होता है।

E = (1/4πε0) × Q/r²

विभव: V = -∫r E dr = (1/4πε0) × Q/r

ii) जब बिंदु गोलीय कोश के अंदर स्थित हो (r < R):

गोलीय कोश के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है (E = 0)।

अतः विभव स्थिर रहता है और कोश के पृष्ठ पर विभव के बराबर होता है।

V = (1/4πε0) × Q/R

दूरी के साथ विभव में परिवर्तन का ग्राफ:

V ↑

| _______

| / \

| / \

|/___________\→ r

0 R

(ग्राफ में r < R पर स्थिर विभव और r > R पर 1/r के अनुसार घटता विभव दिखाया गया है)

29)

विद्युत विभव की परिभाषा लिखिए।

विद्युत विभव: किसी बिंदु पर विद्युत विभव वह कार्य है जो एकांक धनात्मक आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया जाता है। इसे V से प्रदर्शित करते हैं तथा इसका SI मात्रक वोल्ट (Volt) है।

आवेशित गोलीय कोश के कारण विद्युत विभव का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए जब:

  1. बिंदु गोलीय कोश के बाहर स्थित हो:

माना R त्रिज्या का एक गोलीय कोश है जिस पर Q आवेश समान रूप से वितरित है। कोश के केंद्र से r दूरी पर स्थित बिंदु P पर विद्युत विभव ज्ञात करना है।

गोलीय कोश के बाहर स्थित बिंदु के लिए (r > R):

गोलीय कोश के बाहर विद्युत क्षेत्र वैसा ही होता है जैसा कि सम्पूर्ण आवेश केंद्र पर केंद्रित होने पर होता है।

विद्युत क्षेत्र: E = (1/4πε₀) × (Q/r²)

विभव: V = -∫r E·dr = -∫r (1/4πε₀) × (Q/r²) dr

V = (1/4πε₀) × (Q/r)

अतः बाह्य बिंदु के लिए विभव: V = (1/4πε₀) × (Q/r)

  1. बिंदु गोलीय कोश के अंदर स्थित हो:

गोलीय कोश के अंदर (r < R) विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।

अतः अंदर विभव नियत रहता है और कोश के पृष्ठ पर विभव के बराबर होता है।

पृष्ठ पर विभव: V = (1/4πε₀) × (Q/R)

अतः आंतरिक बिंदु के लिए विभव: V = (1/4πε₀) × (Q/R) (नियत)

विभव में परिवर्तन का वक्र दूरी के साथ बनाइए:

V बनाम r का ग्राफ:

V ↑
|        _______
|      /         \
|     /           \
|   /             \
|_____/________________\______→ r
    O    R

r < R पर V नियत (V = kQ/R), r = R पर V = kQ/R, r > R पर V ∝ 1/r


विद्युत चुम्बकीय प्रेरण से संबंधित फैराडे का द्वितीय नियम लिखिए।

फैराडे का द्वितीय नियम: किसी कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) कुंडली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के बराबर होता है।

ε = -dΦ/dt

जहाँ ε प्रेरित emf है, Φ चुम्बकीय फ्लक्स है, और ऋणात्मक चिह्न लेन्ज के नियम को दर्शाता है।

असमान चुम्बकीय क्षेत्र में एक आयताकार लूप की नियत वेग से गति के कारण उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल एवं प्रेरित धारा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।

व्युत्पत्ति:

माना एक आयताकार लूप PQRS (चौड़ाई l, लंबाई b) x-अक्ष के अनुदिश नियत वेग v से गतिमान है। चुम्बकीय क्षेत्र B असमान है, अर्थात B, x पर निर्भर करता है।

माना किसी क्षण लूप की स्थिति ऐसी है कि इसका एक किनारा PQ, x दूरी पर तथा दूसरा किनारा RS, (x + b) दूरी पर है।

लूप से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स:

Φ = ∫ B·dA = ∫xx+b B(x) · l · dx

प्रेरित emf: ε = -dΦ/dt = -d/dt [∫xx+b B(x) · l · dx]

लेबनिज नियम से:

ε = -l [B(x+b) · dx/dt - B(x) · dx/dt]

चूँकि dx/dt = v (नियत वेग):

ε = -l v [B(x+b) - B(x)]

यदि लूप का प्रतिरोध R है, तो प्रेरित धारा:

I = ε/R = -[l v (B(x+b) - B(x))]/R

यह प्रेरित emf और धारा के व्यंजक हैं।

आवश्यक चित्र:

आयताकार लूप असमान चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान:

    × × × × × × × × ×
    × × × × × × × × ×
P_________Q   → v
|             |   × × ×
|             |   × × ×
S_________R   × × ×
    × × × × × × × × ×
    ← b →                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          &

30) a)

पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की परिभाषा लिखिए।

एक गोलीय दर्पण के लिए दर्पण समीकरण व्युत्पन्न कीजिये। आवश्यक किरण चित्र बनाइये।

(1+2+1=4)

पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की परिभाषा: जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है और आपतन कोण क्रान्तिक कोण से अधिक होता है, तो प्रकाश पूर्णतः सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाता है। इस घटना को पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।

दर्पण समीकरण का व्युत्पन्न:

मान लीजिए एक अवतल दर्पण जिसका मुख्य फोकस F, वक्रता केंद्र C और ध्रुव P है। एक वस्तु AB को मुख्य अक्ष पर रखा गया है। वस्तु से निकलने वाली एक किरण मुख्य अक्ष के समानांतर दर्पण पर आपतित होती है और परावर्तन के बाद फोकस F से होकर जाती है। दूसरी किरण वक्रता केंद्र C से होकर जाती है और उसी मार्ग पर वापस लौटती है। इन दोनों परावर्तित किरणों का प्रतिच्छेदन बिंदु A'B' वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है।

त्रिभुज ABC और A'B'C समरूप हैं, अतः:

AB/A'B' = CB/CB'

त्रिभुज ABP और A'B'P भी समरूप हैं, अतः:

AB/A'B' = PB/PB'

इन दोनों से: CB/CB' = PB/PB'

चूँकि CB = PC - PB और CB' = PB' - PC, तथा PC = 2f (जहाँ f फोकस दूरी है):

(PC - PB)/(PB' - PC) = PB/PB'

माना PB = u (वस्तु दूरी), PB' = v (प्रतिबिम्ब दूरी), PC = 2f:

(2f - u)/(v - 2f) = u/v

क्रॉस गुणा करने पर: v(2f - u) = u(v - 2f)

2fv - uv = uv - 2fu

2fv + 2fu = 2uv

दोनों पक्षों को 2fuv से भाग देने पर:

1/u + 1/v = 1/f

यही अभीष्ट दर्पण समीकरण है।

किरण चित्र: (आवश्यक किरण चित्र में अवतल दर्पण, मुख्य अक्ष, वस्तु AB, फोकस F, वक्रता केंद्र C, तथा प्रतिबिम्ब A'B' को दर्शाया जाता है।)


अथवा

कला सम्बद्ध स्रोत क्या होते हैं?

गणितीय विश्लेषण द्वारा प्रकाश के सम्पोषी एवं विनाशी व्यतिकरण के लिए शर्तें प्राप्त कीजिये।

प्रकाश के व्यतिकरण की घटना में तीव्रता वितरण को वक्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

(1+2+1=4)

कला सम्बद्ध स्रोत: वे दो प्रकाश स्रोत जिनके बीच कला का अंतर समय के साथ स्थिर रहता है, कला सम्बद्ध स्रोत कहलाते हैं। इन स्रोतों से उत्सर्जित तरंगों की आवृत्ति समान होती है और इनके बीच एक निश्चित कला संबंध होता है।

सम्पोषी एवं विनाशी व्यतिकरण की शर्तें:

मान लीजिए दो कला सम्बद्ध स्रोत S₁ और S₂ से निकलने वाली तरंगों के समीकरण:

y₁ = a₁ sin(ωt) और y₂ = a₂ sin(ωt + φ)

जहाँ φ कला अंतर है।

अध्यारोपण सिद्धांत से, परिणामी विस्थापन:

y = y₁ + y₂ = a₁ sin(ωt) + a₂ sin(ωt + φ)

y = R sin(ωt + θ)

जहाँ R = √(a₁² + a₂² + 2a₁a₂ cos φ)

तीव्रता I ∝ R², अतः:

I = I₁ + I₂ + 2√(I₁I₂) cos φ

सम्पोषी व्यतिकरण की शर्त: जब cos φ = +1, अर्थात φ = 2nπ (n = 0, 1, 2, ...)

तब I_max = (√I₁ + √I₂)²

पथांतर Δ = nλ (जहाँ λ तरंगदैर्ध्य है)

विनाशी व्यतिकरण की शर्त: जब cos φ = -1, अर्थात φ = (2n+1)π (n = 0, 1, 2, ...)

तब I_min = (√I₁ - √I₂)²

पथांतर Δ = (2n+1)λ/2

तीव्रता वितरण वक्र: तीव्रता वितरण को एक कोसाइन वक्र द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जिसमें अधिकतम तीव्रता (I_max) और न्यूनतम तीव्रता (I_min) के बीच नियमित रूप से परिवर्तन होता है। x-अक्ष पर पथांतर और y-अक्ष पर तीव्रता दर्शाई जाती है।


Write definition of total internal reflection.

Derive Mirror equation for a spherical mirror. Draw necessary ray diagram.

(1+2+1=4)

Definition of Total Internal Reflection: When a light ray travels from a denser medium to a rarer medium and the angle of incidence is greater than the critical angle, the light is completely reflected back into the denser medium. This phenomenon is called total internal reflection.

Derivation of Mirror Equation:

Consider a concave mirror with principal focus F, center of curvature C, and pole P. An object AB is placed on the principal axis. A ray from the object parallel to the principal axis strikes the mirror and after reflection passes through focus F. Another ray passes through the center of curvature C and returns along the same path. The intersection of these two reflected rays forms the real image A'B'.

Triangles ABC and A'B'C are similar, so:

AB/A'B' = CB/CB'

Triangles ABP and A'B'P are also similar, so:

AB/A'B' = PB/PB'

From these: CB/CB' = PB/PB'

Since CB = PC - PB and CB' = PB' - PC, and PC = 2f (where f is focal length):

(PC - PB)/(PB' - PC) = PB/PB'

Let PB = u (object distance), PB' = v (image distance), PC = 2f:

(2f - u)/(v - 2f) = u/v

Cross-multiplying: v(2f - u) = u(v - 2f)

2fv - uv = uv - 2fu

2fv + 2fu = 2uv

Dividing both sides by 2fuv:

1/u + 1/v = 1/f

This is the required mirror equation.

Ray Diagram: (The necessary ray diagram shows the concave mirror, principal axis, object AB, focus F, center of curvature C, and image A'B'.)


OR

What are coherent sources?

Obtain the conditions for constructive and destructive interference of light by analytical treatment of interference.

Show the intensity distribution by curve in the phenomenon of interference of light.

(1+2+1=4)

Coherent Sources: Two light sources that maintain a constant phase difference over time are called coherent sources. The waves emitted from these sources have the same frequency and a fixed phase relationship.

Conditions for Constructive and Destructive Interference:

Let two coherent sources S₁ and S₂ emit waves with equations:

y₁ = a₁ sin(ωt) and y₂ = a₂ sin(ωt + φ)

where φ is the phase difference.

By the superposition principle, the resultant displacement:

y = y₁ + y₂ = a₁ sin(ωt) + a₂ sin(ωt + φ)

y = R sin(ωt + θ)

where R = √(a₁² + a₂² + 2a₁a₂ cos φ)

Intensity I ∝ R², so:

I = I₁ + I₂ + 2√(I₁I₂) cos φ

Condition for Constructive Interference: When cos φ = +1, i.e., φ = 2nπ (n = 0, 1, 2, ...)

Then I_max = (√I₁ + √I₂)²

Path difference Δ = nλ (where λ is wavelength)

Condition for Destructive Interference: When cos φ = -1, i.e., φ = (2n+1)π (n = 0, 1, 2, ...)

Then I_min = (√I₁ - √I₂)²

Path difference Δ = (2n+1)λ/2

Intensity Distribution Curve: The intensity distribution is shown by a cosine curve, where the intensity varies regularly between maximum (I_max) and minimum (I_min). The x-axis represents path difference and the y-axis represents intensity.