RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers

You opened the RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.

Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for -SS-41-2018 (2018).

Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2018 are linked later on this page.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2018
Subject -SS-41-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2018, and subject -SS-41-2018 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

Turning 2018 papers into insight

One -SS-41-2018 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.

Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.

RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018

Scroll through the Previous Year Papers pages for -SS-41-2018 (2018).

RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 7
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 8
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 9
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 10
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 11
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 12
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 13
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-41-2018 Previous Year Papers 14
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th -SS-41-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018

SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018

रसायन विज्ञान
CHEMISTRY

समय : 3¼ घण्टे
पूर्णांक : 56

नोट: समीकरणों को आवश्यक शर्तों सहित संतुलित रूप में लिखिए।

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.

Tear Here
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER

SS-4-Chem. 273 [Turn Over

खण्ड - अ / SECTION - A

1. समूह-12 एवं 16 के तत्वों के संयोजन से बने किसी ऐसे यौगिक का रासायनिक सूत्र लिखिए जो अर्धचालक के रूप में प्रयुक्त होता है।

Write chemical formula of any compound formed by the combination of group-12 and group-16 element which is used as semiconductor.

उत्तर / Answer:

ZnS (जिंक सल्फाइड) या CdS (कैडमियम सल्फाइड) या ZnSe (जिंक सेलेनाइड) — इनमें से कोई एक।

ZnS (Zinc Sulphide) or CdS (Cadmium Sulphide) or ZnSe (Zinc Selenide) — any one of these.

व्याख्या / Explanation: समूह-12 (IIB) और समूह-16 (VIA) के तत्वों के संयोजन से बने यौगिक (जैसे ZnS, CdS, ZnSe) अर्धचालक गुण प्रदर्शित करते हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग होते हैं।


नोट / Note: प्रश्न संख्या 2, 27, 28, 29 और 30 में आन्तरिक विकल्प हैं। Question Nos. 2, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.

प्रश्न 2 से 7 (लघु उत्तरीय प्रश्न)

2. स्थिरक्वाथी मिश्रण की परिभाषा लिखिए। [1]

Write definition of Azeotropic Mixture.

उत्तर: स्थिरक्वाथी मिश्रण (Azeotropic Mixture) वह मिश्रण होता है जिसका क्वथनांक स्थिर होता है और जिसे साधारण आसवन द्वारा उसके अवयवों में पृथक नहीं किया जा सकता। इस मिश्रण का वाष्प और द्रव अवस्था में समान संघटन होता है।

3. वैद्युत अपोहन का नामांकित चित्र बनाइए। [2]

Draw a labelled diagram of Electrodialysis.

उत्तर: वैद्युत अपोहन (Electrodialysis) एक प्रक्रिया है जिसमें विद्युत क्षेत्र की सहायता से आयनों को अर्ध-पारगम्य झिल्लियों के माध्यम से अलग किया जाता है। चित्र में निम्नलिखित भाग दर्शाए जाते हैं:

  • एनोड और कैथोड (धनात्मक और ऋणात्मक इलेक्ट्रोड)
  • धनायन विनिमय झिल्ली (Cation Exchange Membrane)
  • ऋणायन विनिमय झिल्ली (Anion Exchange Membrane)
  • विद्युत अपोहन कक्ष (Dialysis Chamber)
  • आयनों का प्रवाह (Flow of Ions)

(चित्र में एनोड और कैथोड के बीच झिल्लियाँ लगी होती हैं, जो आयनों को चुनिंदा रूप से पार करती हैं।)

4. संक्रमण तत्वों में चक्रण चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए। [1]

Write spin only formula for calculating magnetic moment of transition element.

उत्तर: चक्रण चुम्बकीय आघूर्ण (Spin Only Magnetic Moment) का सूत्र है:

μs = √[n(n+2)] B.M.

जहाँ n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है, और μs बोर मैग्नेटॉन (B.M.) में व्यक्त किया जाता है।

5. एक्टिनियम (Z = 89) का इलैक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। [2]

Write electronic configuration of Actinium (Z = 89).

उत्तर: एक्टिनियम (Actinium) का परमाणु क्रमांक 89 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है:

[Rn] 6d1 7s2

या विस्तार में: 1s2 2s2 2p6 3s2 3p6 3d10 4s2 4p6 4d10 4f14 5s2 5p6 5d10 6s2 6p6 6d1 7s2

6. प्रथम संक्रमण श्रेणी में +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने वाले तत्वों के नाम लिखिए। [1]

Write names of the elements, which shows +1 oxidation states in first transition series.

उत्तर: प्रथम संक्रमण श्रेणी (Sc से Zn) में +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने वाले तत्व हैं:

  • कॉपर (Cu) – Cu+ (क्यूप्रस आयन)
  • क्रोमियम (Cr) – Cr+ (अस्थायी)

कॉपर सबसे स्थायी +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है।

7. निम्नलिखित संकुल यौगिक का IUPAC नाम लिखिए। [2]

Write IUPAC name of the following complex compound.

K3[Fe(CN)6]

उत्तर: दिए गए संकुल यौगिक K3[Fe(CN)6] का IUPAC नाम है:

पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट(III)

(Potassium Hexacyanoferrate(III))

व्याख्या: यहाँ Fe +3 ऑक्सीकरण अवस्था में है, CN- लिगैंड है, और K+ बाह्य गोलक में है।

प्रश्न 8

हुन्सडीकर अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए। [2]

Write chemical equation of Hunsdiecker reaction.

हल: हुन्सडीकर अभिक्रिया में, सिल्वर कार्बोक्सिलेट को ब्रोमीन के साथ अभिकृत करने पर एल्किल हैलाइड प्राप्त होता है।

रासायनिक समीकरण:

R–COOAg + Br2 → R–Br + CO2 + AgBr

उदाहरण: CH3COOAg + Br2 → CH3Br + CO2 + AgBr

प्रश्न 9

टिल्डेन अभिकर्मक का रासायनिक सूत्र व नाम लिखिए। [1]

Write the chemical formula and name of Tilden Reagent.

हल: टिल्डेन अभिकर्मक का रासायनिक सूत्र OsO4 (ऑस्मियम टेट्राऑक्साइड) है। इसका नाम ऑस्मियम टेट्राऑक्साइड है।

प्रश्न 10

सक्सिनिक अम्ल का रासायनिक सूत्र एवं IUPAC नाम लिखिए। [1]

Write IUPAC name and chemical formula of Succinic acid.

हल: सक्सिनिक अम्ल का रासायनिक सूत्र HOOC–CH2–CH2–COOH है। इसका IUPAC नाम ब्यूटेन-1,4-डाइओइक अम्ल (Butane-1,4-dioic acid) है।

प्रश्न 11

किसी बहुलक के भार औसत अणुभार एवं संख्या औसत अणुभार का अनुपात क्या कहलाता है? [1]

The ratio of weight average molecular weight and number average molecular weight of any polymer is called as?

हल: इस अनुपात को बहुलक विषमता सूचकांक (Polydispersity Index, PDI) कहा जाता है।

प्रश्न 12

मैलिक अम्ल एवं फ्यूमेरिक अम्ल दोनों ज्यामिति समावयवी हैं। इनमें समपक्ष व विपक्ष समावयवी को पहचानिए। [1]

Maleic acid and Fumaric acid both are geometrical isomers. Identify cis and trans isomer.

हल: मैलिक अम्ल (Maleic acid) समपक्ष (cis) समावयवी है, जबकि फ्यूमेरिक अम्ल (Fumaric acid) विपक्ष (trans) समावयवी है।

प्रश्न 13

मिश्रित प्रणोदक में प्रयुक्त ईंधन एवं ऑक्सीकारक का उदाहरण दीजिए। [1]

Give example of fuels and oxidising agent used in mixed propellants.

हल: मिश्रित प्रणोदक में प्रयुक्त ईंधन का उदाहरण: एल्युमिनियम चूर्ण (Aluminium powder) तथा ऑक्सीकारक का उदाहरण: अमोनियम परक्लोरेट (Ammonium perchlorate) है।

खण्ड - ब / SECTION - B

5)

झाग प्लवन विधि का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए।

Draw a neat and labelled diagram of froth flotation method.

चित्र (Diagram): (यहाँ एक स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाएँ जिसमें निम्नलिखित भाग दर्शाए गए हों:)

  • पानी और तेल का मिश्रण (Water and oil mixture)
  • वायु प्रवाह (Air inlet)
  • झाग की परत (Froth layer)
  • अयस्क कण (Ore particles)
  • गैंग (Gangue)
  • संग्राहक (Collector) – जैसे पाइन तेल
  • स्थिरक (Stabilizer) – जैसे क्रेसोल
  • अपमार्जक (Depressant) – जैसे NaCN (सोडियम सायनाइड)

व्याख्या: इस विधि में चूर्णित अयस्क को जल और तेल के मिश्रण में डाला जाता है। वायु प्रवाहित करने पर झाग बनता है, जिसमें अयस्क के कण तैरते हैं और गैंग नीचे बैठ जाता है।

6)

निस्तापन एवं गर्जन में कोई दो अंतर लिखिए।

Write any two differences between Calcination and Roasting.

क्रमांक निस्तापन (Calcination) गर्जन (Roasting)
1. यह वायु की अनुपस्थिति में किया जाता है। यह वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति में किया जाता है।
2. इसमें कार्बोनेट अयस्कों को गर्म किया जाता है, जिससे CO₂ निकलती है। इसमें सल्फाइड अयस्कों को गर्म किया जाता है, जिससे SO₂ निकलती है और ऑक्साइड बनता है।

b)

एक घनीय ठोस A व B दो परमाणुओ से मिलकर बना है। A परमाणु घन के कोनों पर तथा B परमाणु प्रत्येक फलक के केंद्र पर स्थित है तो ठोस यौगिक का सूत्र ज्ञात कीजिए।

उपर्युक्त घन की एकक कोष्ठिका का चित्र बनाइए।

A cubic solid is made by A and B atoms. Atoms of A is at the corners of cube and atoms of B is at the centre of each faces. Calculate the formula of solid compound.

Draw the diagram of unit cell of the above cube.

हल:

  • परमाणु A घन के कोनों पर हैं। प्रत्येक कोने का परमाणु 8 कोष्ठिकाओं में साझा होता है, अतः A परमाणुओं की संख्या = 8 × (1/8) = 1
  • परमाणु B प्रत्येक फलक के केंद्र पर हैं। प्रत्येक फलक का परमाणु 2 कोष्ठिकाओं में साझा होता है, अतः B परमाणुओं की संख्या = 6 × (1/2) = 3
  • अतः ठोस यौगिक का सूत्र = AB₃

चित्र: (यहाँ एक घन बनाएँ जिसमें कोनों पर A और फलकों के केंद्र पर B दर्शाए गए हों।)

c)

नीचे दिये गये समान मोलर सांद्रताओं वाले विलयनों को उनके क्वथनांक के आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

NaCl, AlCl₃, यूरिया, MgCl₂

Arrange the following solutions of equimolar concentration in ascending order of their boiling point: NaCl, AlCl₃, Urea, MgCl₂.

हल: क्वथनांक में उन्नयन वान्ट हॉफ गुणांक (i) पर निर्भर करता है। i का मान जितना अधिक होगा, क्वथनांक उतना ही अधिक होगा।

  • यूरिया (अविघटनशील): i = 1
  • NaCl (Na⁺ + Cl⁻): i = 2
  • MgCl₂ (Mg²⁺ + 2Cl⁻): i = 3
  • AlCl₃ (Al³⁺ + 3Cl⁻): i = 4

आरोही क्रम: यूरिया < NaCl < MgCl₂ < AlCl₃

d)

22 g ऑक्सेलिक अम्ल से 1000 mL विलयन बनाया गया। यदि विलयन का घनत्व 1.1 g/mL हो तो ऑक्सेलिक अम्ल की विलयन में द्रव्यमान प्रतिशतता ज्ञात कीजिए।

22g of oxalic acid is dissolved in 1000 mL solution. If the density of solution is 1.1 g/mL, then find out the mass percentage of the oxalic acid.

हल:

विलयन का द्रव्यमान = आयतन × घनत्व = 1000 mL × 1.1 g/mL = 1100 g

ऑक्सेलिक अम्ल का द्रव्यमान = 22 g

द्रव्यमान प्रतिशतता = (विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान) × 100

= (22 g / 1100 g) × 100 = 2%

उत्तर: ऑक्सेलिक अम्ल की द्रव्यमान प्रतिशतता 2% है।

प्रश्न 7

(अ) शुष्क सेल का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए।

शुष्क सेल का नामांकित चित्र:

(चित्र में निम्नलिखित भाग दर्शाएँ: जस्ता (Zn) का बाहरी आवरण (एनोड), कार्बन की छड़ (कैथोड), MnO₂ और कार्बन का पेस्ट (डिपोलराइज़र), NH₄Cl और ZnCl₂ का पेस्ट (इलेक्ट्रोलाइट), तथा शीर्ष पर सीलिंग।)

व्याख्या: शुष्क सेल में जस्ता का बाहरी आवरण एनोड का कार्य करता है, जबकि बीच में कार्बन की छड़ कैथोड होती है। MnO₂ और कार्बन का पेस्ट डिपोलराइज़र के रूप में कार्य करता है, जो उत्पन्न H₂ गैस को ऑक्सीकृत करता है। NH₄Cl और ZnCl₂ का पेस्ट इलेक्ट्रोलाइट का कार्य करता है।

(ब) तनुता बढ़ाने पर विशिष्ट चालकत्व घटता है जबकि मोलर चालकता बढ़ती है। समझाइए।

व्याख्या:

  • विशिष्ट चालकत्व (Specific Conductance): यह 1 सेमी³ विलयन की चालकता है। तनुता बढ़ाने पर प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घट जाती है, जिससे विशिष्ट चालकत्व घटता है।
  • मोलर चालकता (Molar Conductivity): यह 1 मोल इलेक्ट्रोलाइट वाले विलयन की चालकता है। तनुता बढ़ाने पर आयनों के मध्य अंतर-आयनिक आकर्षण कम हो जाता है, जिससे आयनों की गतिशीलता बढ़ जाती है, और इस प्रकार मोलर चालकता बढ़ती है।

प्रश्न 8

(अ) [Ni(CN)₄]²⁻ वर्गसमतलीय संकुल है जबकि [Ni(Cl)₄]²⁻ चतुष्फलकीय संकुल होता है। संयोजकता बंध सिद्धान्त के आधार पर समझाइए।

व्याख्या (संयोजकता बंध सिद्धान्त के आधार पर):

  • [Ni(CN)₄]²⁻: Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। Ni²⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d⁸ है। CN⁻ एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है, जो 3d इलेक्ट्रॉनों के युग्मन का कारण बनता है। इस प्रकार, Ni²⁺ में एक 3d ऑर्बिटल खाली हो जाता है, और संकरण dsp² होता है, जिससे वर्गसमतलीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
  • [Ni(Cl)₄]²⁻: Ni²⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d⁸ है। Cl⁻ एक दुर्बल क्षेत्र लिगैंड है, जो इलेक्ट्रॉनों के युग्मन में सक्षम नहीं है। इसलिए, संकरण sp³ होता है, जिससे चतुष्फलकीय ज्यामिति प्राप्त होती है।

(ब) क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि चतुष्फलकीय संकुल हमेशा उच्च चक्रण वाले क्यों होते हैं?

व्याख्या (क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के आधार पर):

चतुष्फलकीय संकुलों में, क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा (Δt) अष्टफलकीय संकुलों की तुलना में बहुत कम होती है (लगभग 4/9 गुना)। चूँकि Δt छोटा होता है, यह इलेक्ट्रॉनों के युग्मन ऊर्जा (P) से कम होता है। इसलिए, इलेक्ट्रॉन हुंड के नियम का पालन करते हुए अयुग्मित रहते हैं, जिससे चतुष्फलकीय संकुल हमेशा उच्च चक्रण वाले होते हैं।

प्रश्न 9

रासायनिक समीकरण की सहायता से समझाइए:

(अ) क्या होता है जब क्लोरोफॉर्म प्रकाश की उपस्थिति में वायुमंडलीय ऑक्सीजन से क्रिया करता है?

उत्तर: क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) प्रकाश की उपस्थिति में वायुमंडलीय ऑक्सीजन से क्रिया करके फॉस्जीन (COCl₂) बनाता है, जो एक अत्यधिक विषैली गैस है।

रासायनिक समीकरण:

2CHCl₃ + O₂ → 2COCl₂ + 2HCl

(प्रकाश की उपस्थिति में)

(ब) क्या होता है जब क्लोरोबेंजीन को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में क्लोरल के साथ गर्म किया जाता है?

उत्तर: क्लोरोबेंजीन (C₆H₅Cl) को सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में क्लोरल (CCl₃CHO) के साथ गर्म करने पर DDT (डाइक्लोरोडाइफेनिलट्राइक्लोरोएथेन) बनता है। यह एक प्रसिद्ध कीटनाशक है।

रासायनिक समीकरण:

2C₆H₅Cl + CCl₃CHO → (C₆H₄Cl)₂CHCCl₃ + H₂O

(सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में, गर्म करने पर)

प्रश्न 20

एक विद्युत रासायनिक सेल दो धातु इलैक्ट्रोडो Zn व Ag से मिलकर बना है जिनके मानक अपचयन विभव के मान क्रमश: –0.76 V एवं 0.80 V है। तो बताइए:

  1. एनोड का नाम
  2. कैथोड का नाम
  3. मानक सेल विभव (E°cell) का मान
  4. सेल आरेख का निरूपण

हल:

a) एनोड का नाम: जिंक (Zn) – क्योंकि इसका मानक अपचयन विभव कम है (–0.76 V), यह ऑक्सीकृत होगा।

b) कैथोड का नाम: सिल्वर (Ag) – क्योंकि इसका मानक अपचयन विभव अधिक है (0.80 V), यह अपचयित होगा।

c) मानक सेल विभव (E°cell):
cell = E°कैथोड – E°एनोड = 0.80 V – (–0.76 V) = 1.56 V

d) सेल आरेख:
Zn(s) | Zn2+(aq) || Ag+(aq) | Ag(s)

प्रश्न 21

निम्नलिखित यौगिकों को क्वथनांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
ब्यूटेनैल, ब्यूटेनॉल, ब्यूटेनॉइक अम्ल

हल: क्वथनांक का बढ़ता क्रम:
ब्यूटेनैल < ब्यूटेनॉल < ब्यूटेनॉइक अम्ल

कारण: ब्यूटेनैल में केवल द्विध्रुव-द्विध्रुव बल होते हैं, ब्यूटेनॉल में हाइड्रोजन बंध होते हैं, और ब्यूटेनॉइक अम्ल में द्विगुणित हाइड्रोजन बंध (डाइमर) बनने के कारण सबसे अधिक क्वथनांक होता है।

प्रश्न 22

कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल से अधिक अम्लीय होते हैं। समझाइए।

हल: कार्बोक्सिलिक अम्ल (RCOOH) में कार्बोक्सिलेट आयन (RCOO) पर ऋणावेश दो ऑक्सीजन परमाणुओं पर अनुनाद द्वारा विस्थापित होता है, जिससे यह अधिक स्थायी होता है। फीनॉल (C6H5OH) में फीनॉक्साइड आयन (C6H5O) पर ऋणावेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु पर केंद्रित होता है, जिससे यह कम स्थायी होता है। अतः कार्बोक्सिलिक अम्ल अधिक अम्लीय होते हैं।

अथवा

प्रश्न 22 (वैकल्पिक)

निम्नलिखित अम्लों को अम्लता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
फार्मिक अम्ल, एसीटिक अम्ल, प्रोपिओनिक अम्ल

हल: अम्लता का बढ़ता क्रम:
प्रोपिओनिक अम्ल < एसीटिक अम्ल < फार्मिक अम्ल

कारण: फार्मिक अम्ल (HCOOH) में कोई +I प्रभाव देने वाला समूह नहीं है, जबकि एसीटिक अम्ल (CH3COOH) में मिथाइल समूह (+I प्रभाव) और प्रोपिओनिक अम्ल (C2H5COOH) में एथिल समूह (+I प्रभाव) अम्लता को कम करते हैं। +I प्रभाव बढ़ने से अम्लता घटती है।

प्रश्न 23

एल्डिहाइड नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन क्रियाओं के प्रति कीटोन से अधिक क्रियाशील होते हैं। कारण समझाइए।

हल: एल्डिहाइड में कार्बोनिल कार्बन से एक हाइड्रोजन परमाणु जुड़ा होता है, जबकि कीटोन में दो एल्किल समूह जुड़े होते हैं। एल्किल समूह +I प्रभाव द्वारा कार्बोनिल कार्बन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे नाभिक स्नेही आक्रमण के प्रति क्रियाशीलता कम हो जाती है। इसके अलावा, एल्डिहाइड में स्टेरिक बाधा भी कम होती है। अतः एल्डिहाइड नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन में कीटोन से अधिक क्रियाशील होते हैं।

6.

a) Arrange the following compounds in increasing order of their boiling points.
Butanal, Butanol, n-Pentane

Answer: n-Pentane < Butanal < Butanol

Explanation: Boiling point depends on intermolecular forces. n-Pentane (non-polar) has only weak van der Waals forces. Butanal (polar) has dipole-dipole interactions. Butanol has strong hydrogen bonding, giving it the highest boiling point.

b) Carboxylic acids are more acidic than phenol. Explain.

Answer: Carboxylic acids are more acidic than phenol because the carboxylate ion (RCOO⁻) formed after losing a proton is stabilized by resonance delocalization of the negative charge over two oxygen atoms. In contrast, the phenoxide ion (C₆H₅O⁻) has the negative charge delocalized over the benzene ring, which is less effective. Additionally, the electron-withdrawing effect of the carbonyl group in carboxylic acids further stabilizes the conjugate base.


OR

a) Arrange the following compounds in increasing order of their acidity.
Formic acid, Acetic acid, Propionic acid

Answer: Propionic acid < Acetic acid < Formic acid

Explanation: Acidity of carboxylic acids decreases with increase in alkyl chain length due to the +I effect (electron-donating) of alkyl groups, which destabilizes the carboxylate ion. Formic acid has no alkyl group, so it is the strongest. Acetic acid (CH₃) is stronger than propionic acid (C₂H₅) because the ethyl group donates more electrons than methyl.

b) Aldehydes are more reactive than ketones towards nucleophilic substitution reaction. Explain.

Answer: Aldehydes are more reactive than ketones towards nucleophilic addition reactions (not substitution) because:

  • Steric factor: In aldehydes, the carbonyl carbon has one alkyl group (or H) attached, while in ketones it has two alkyl groups. The bulky alkyl groups in ketones hinder the approach of the nucleophile.
  • Electronic factor: Alkyl groups are electron-donating (+I effect), which reduces the partial positive charge on the carbonyl carbon in ketones, making them less electrophilic. In aldehydes (especially with H), the carbonyl carbon is more electrophilic.

22) निम्नलिखित बहुलको के एकलक लिखिए |

A) पॉली विनाइल क्लोराइड (PVC)

B) टेफ्लॉन

C) ब्युना-N

[2+½+½=3]

Write the monomers of following polymers.

a) Poly vinyl chloride (PVC)

b) Teflon

c) Buna-N

Answer:

  • a) Poly vinyl chloride (PVC): Monomer is Vinyl chloride (CH₂=CHCl).
  • b) Teflon: Monomer is Tetrafluoroethene (CF₂=CF₂).
  • c) Buna-N: Monomers are 1,3-Butadiene (CH₂=CH-CH=CH₂) and Acrylonitrile (CH₂=CH-CN).

SS_41-Chem. 273

23. अ) ऐथेन के न्यूमेन प्रक्षेपण सूत्र में से कौनसे संरूप की ऊर्जा अधिक होती है और क्यों?

ऐथेन के न्यूमेन प्रक्षेपण में अस्पष्टित (eclipsed) संरूप की ऊर्जा अधिक होती है। इसका कारण यह है कि इस संरूप में दोनों कार्बन परमाणुओं पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणु एक-दूसरे के सबसे निकट होते हैं, जिससे उनके बीच प्रतिकर्षण बल (वैन डर वाल्स प्रतिकर्षण) अधिकतम होता है। इसके विपरीत, विच्छेदित (staggered) संरूप में हाइड्रोजन परमाणु अधिकतम दूरी पर होते हैं, जिससे ऊर्जा न्यूनतम होती है।

23. ब) यद्यपि मीसोटार्टरिक अम्ल में दो असममित कार्बन हैं फिर भी यह प्रकाशिक समावयवता प्रदर्शित नहीं करता। कारण दीजिए।

कारण: मीसोटार्टरिक अम्ल में दो असममित कार्बन परमाणु होते हैं, लेकिन इसमें एक सममिति तल (plane of symmetry) उपस्थित होता है। इस सममिति तल के कारण अणु अपने प्रतिबिंब पर आरोपित हो जाता है, अर्थात यह अणु अप्रकाशिक सक्रिय (optically inactive) होता है। चूँकि यह अपने प्रतिबिंब से भिन्न नहीं है, इसलिए यह प्रकाशिक समावयवता नहीं दर्शाता।


24. अ) वर्णमूलक (क्रोमोफोर) एवं वर्णवर्धक (ऑक्सोक्रोम) में कोई दो अंतर लिखिए।

क्रमांक वर्णमूलक (क्रोमोफोर) वर्णवर्धक (ऑक्सोक्रोम)
1. यह अणु में रंग उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी समूह होता है। यह स्वयं रंग उत्पन्न नहीं करता, बल्कि क्रोमोफोर के रंग को गहरा करता है।
2. उदाहरण: -NO₂ (नाइट्रो), -C=O (कार्बोनिल), -N=N- (एज़ो) आदि। उदाहरण: -OH (हाइड्रॉक्सिल), -NH₂ (एमीनो), -OCH₃ (मेथॉक्सी) आदि।

24. ब) अपमार्जक, साबुन रहित साबुन कहलाते हैं, क्यों?

कारण: अपमार्जक (डिटर्जेंट) को "साबुन रहित साबुन" इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये साबुन की तरह सफाई का कार्य करते हैं, लेकिन इनमें साबुन बनाने में प्रयुक्त होने वाले वसा या तेल (जो साबुन का मुख्य घटक होते हैं) का उपयोग नहीं होता। अपमार्जक लंबी श्रृंखला वाले सल्फोनिक अम्लों के सोडियम लवण होते हैं, जो कठोर जल में भी झाग उत्पन्न करते हैं और साबुन की तुलना में अधिक प्रभावी होते हैं।


खण्ड - स (SECTION - C)

25. दिये गये उद्धरण को पढ़कर अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

कणों के आकार के आधार पर विलयन तीन प्रकार के होते हैं - (1) वास्तविक विलयन (2) निलम्बन (3) कोलॉइड। कोलॉइडों को प्रावस्थाओं के मध्य आकर्षण बल एवं कणों के आकार के आधार पर पुनः वर्गीकृत किया गया है। कोलॉइडी विलयन अनेक महत्वपूर्ण गुणधर्म दर्शाते हैं, जिसके कारण कोलॉइड दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

(उपरोक्त उद्धरण के आधार पर प्रश्नों के उत्तर अपेक्षित हैं। कृपया संबंधित प्रश्न प्रदान करें।)

26)

A) कोलॉइड एवं वास्तविक विलयन में कोई दो अंतर लिखिए।

a) बहुआण्विक एवं वृहदआण्विक कोलॉइड के एक-एक उदाहरण लिखिए।

स) क्या होता है जब एक प्रकाश पुंज को कोलाइडी विलयन से गुजारा जाता है?

(1+1+1=3)

Read the given paragraph and write answers of the following questions.

On the basis of size of particles, solutions are of three types: (1) True solution, (2) Suspension, (3) Colloid. Colloids are further classified on the basis of attraction force between phases and the size of particles. Colloidal solution shows many important properties due to which colloids play an important role in daily life.

a) Write any two differences between colloid and true solution.

b) Write one example of both multimolecular colloid and macromolecular colloid.

c) What happen when a beam of light is passed through the colloidal solution?

a) कोलॉइड एवं वास्तविक विलयन में दो अंतर:

  1. कणों का आकार: कोलॉइडी कणों का आकार 1 nm से 100 nm के बीच होता है, जबकि वास्तविक विलयन में कणों का आकार 1 nm से छोटा होता है।
  2. टिंडल प्रभाव: कोलॉइडी विलयन टिंडल प्रभाव दर्शाता है (प्रकाश का प्रकीर्णन), जबकि वास्तविक विलयन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाता।

b) उदाहरण:

  • बहुआण्विक कोलॉइड: सल्फर कोलॉइड (सल्फर के अणुओं का समूह)
  • वृहदआण्विक कोलॉइड: स्टार्च कोलॉइड (बड़े अणु जैसे स्टार्च)

c) जब प्रकाश पुंज को कोलाइडी विलयन से गुजारा जाता है: प्रकाश का प्रकीर्णन होता है, जिसे टिंडल प्रभाव कहते हैं। कोलॉइडी कण प्रकाश को बिखेरते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देता है।


दिये गये उद्धरण को पढ़कर अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

कोशिका सजीवों की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। सजीव कोशिकाओं में जैव अणु महत्वपूर्ण संघटक के रूप में उपस्थित रहते हैं। जैव अणुओं द्वारा विभिन्न जैवरासायनिक क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं जिससे ऊर्जा प्राप्त होती है। कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन एवं वसा ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं। कार्बोहाइड्रेट्स को आण्विक आकार, स्वाद एवं अपचायक क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। हावर्थ ने कार्बोहाइड्रेट्स की चक्रीय संरचनाएँ प्रस्तुत की।

A) सुक्रोस एक अनअपचायी शर्करा है। समझाइए।

a) एनोमर से आप क्या समझते हैं? उदाहरण दीजिए।

स) स्टार्च के आवश्यक घटकों के नाम लिखिए।

(1+1+1=3)

A) सुक्रोस एक अनअपचायी शर्करा है: सुक्रोस में ग्लूकोज और फ्रक्टोज के मोनोसैकेराइड इकाइयाँ ग्लाइकोसिडिक बंध (α-1,2-ग्लाइकोसिडिक बंध) द्वारा जुड़ी होती हैं। इस बंध में दोनों मोनोसैकेराइड के एनोमेरिक कार्बन (C1 और C2) बंध में शामिल होते हैं, जिससे कोई मुक्त एल्डिहाइड या कीटोन समूह नहीं बचता। इसलिए सुक्रोस किसी भी अपचायक एजेंट (जैसे फेलिंग विलयन या टॉलेन अभिकर्मक) को अपचायित नहीं कर सकता, और इसे अनअपचायी शर्करा कहते हैं।

a) एनोमर: एनोमर वे स्टीरियोआइसोमर होते हैं जो चक्रीय संरचना में एनोमेरिक कार्बन (हेमीएसीटल या हेमीकीटल कार्बन) पर भिन्न होते हैं। ये केवल चक्रीय रूप में पाए जाते हैं। उदाहरण: α-D-ग्लूकोज और β-D-ग्लूकोज। इनमें एनोमेरिक कार्बन (C1) पर -OH समूह की स्थिति भिन्न होती है: α में -OH नीचे की ओर और β में -OH ऊपर की ओर होता है।

स) स्टार्च के आवश्यक घटक: स्टार्च दो मुख्य घटकों से मिलकर बना होता है:

  • एमाइलोज: यह रैखिक बहुलक है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ α-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ी होती हैं।
  • एमाइलोपेक्टिन: यह शाखित बहुलक है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ α-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंध (मुख्य श्रृंखला) और α-1,6-ग्लाइकोसिडिक बंध (शाखा बिंदु) द्वारा जुड़ी होती हैं।

SS_41-Chem. 273

27) Read the given paragraph and write answers of the following questions.

Cell is the structural and functional unit of living bodies. Biomolecules are present as an important constituent in the living cells. Energy is obtained by the various biochemical reaction occurred by the biomolecules. Carbohydrates, Protein and Fats are the main sources of energy. Carbohydrates are classified on the basis of molecular size, taste and reducing capacity. 'Hawarth' proposed the cyclic structures of Carbohydrates.

  1. Sucrose is a non-reducing sugar. Explain.

    Sucrose is a disaccharide composed of glucose and fructose linked by an α-1,β-2 glycosidic bond. In this bond, the reducing ends (anomeric carbons) of both monosaccharides are involved, so neither free aldehyde nor ketone group is available to reduce Fehling's or Benedict's reagent. Hence, sucrose is a non-reducing sugar.

  2. What do you mean by 'anomer'? Give Example.

    Anomers are cyclic monosaccharides that differ in configuration at the anomeric carbon (the carbonyl carbon after cyclization). For example, α-D-glucose and β-D-glucose are anomers; in α-D-glucose, the -OH at C1 is on the opposite side of the -CH₂OH group, while in β-D-glucose, it is on the same side.

  3. Write essential components of starch.

    Starch consists of two components: Amylose (a linear polymer of α-D-glucose units linked by α-1,4 glycosidic bonds) and Amylopectin (a branched polymer with α-1,4 linkages and α-1,6 linkages at branch points).

निम्नलिखित यौगिकों को क्षारकता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

(CH₃)₂NH, (CH₃)₃N, CH₃NH₂, NH₃ (जलीय प्रावस्था में)

जलीय प्रावस्था में क्षारकता का बढ़ता क्रम: NH₃ < CH₃NH₂ < (CH₃)₃N < (CH₃)₂NH। यह क्रम हाइड्रोजन बंध और इलेक्ट्रॉनदाता प्रभाव पर निर्भर करता है; (CH₃)₂NH में दो मिथाइल समूहों के कारण सबसे अधिक क्षारकता होती है।

रासायनिक समीकरण की सहायता से समझाइए:

क्या होता है जब नाइट्रोबेंजीन का अपचयन Zn व HCl की उपस्थिति में कराया जाता है?

जब नाइट्रोबेंजीन का अपचयन Zn और HCl (सांद्र) की उपस्थिति में किया जाता है, तो एनीलीन (aniline) प्राप्त होता है। रासायनिक समीकरण:

C₆H₅NO₂ + 3Zn + 6HCl → C₆H₅NH₂ + 3ZnCl₂ + 2H₂O

यह एक अपचयन अभिक्रिया है जिसमें नाइट्रो समूह (-NO₂) अमीनो समूह (-NH₂) में परिवर्तित हो जाता है।

एनीलीन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।

एनीलीन (C₆H₅NH₂) में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है। प्रमुख अनुनादी संरचनाएँ:

  1. मूल संरचना: बेंजीन वलय पर -NH₂ समूह (नाइट्रोजन पर ऋणात्मक आवेश नहीं)
  2. अनुनादी संरचना I: नाइट्रोजन का एकाकी युग्म वलय में स्थानांतरित होकर C=N बंध बनाता है, नाइट्रोजन पर धनात्मक आवेश, ऑर्थो स्थान पर ऋणात्मक आवेश
  3. अनुनादी संरचना II: ऑर्थो स्थान से पैरा स्थान पर ऋणात्मक आवेश स्थानांतरण
  4. अनुनादी संरचना III: पैरा स्थान पर ऋणात्मक आवेश के साथ C=C बंध पुनर्व्यवस्था

इन अनुनाद संरचनाओं के कारण एनीलीन में N का एकाकी युग्म वलय के साथ संयुग्मित होता है, जिससे इसकी क्षारकता कम हो जाती है।

[1+1+1=3]

अथवा

एल्केन एमीन, एनीलीन से अधिक क्षारकीय होते हैं, समझाइए।

एल्केन एमीन (जैसे मेथिलामीन, CH₃NH₂) एनीलीन (C₆H₅NH₂) से अधिक क्षारकीय होते हैं क्योंकि:

  • एल्केन एमीन में एल्किल समूह (+I प्रभाव) नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे प्रोटॉन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है।
  • एनीलीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है, जिससे यह प्रोटॉन ग्रहण करने के लिए कम उपलब्ध होता है।
  • एनीलीन में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन पर आंशिक धनात्मक आवेश आ जाता है, जिससे इसकी क्षारकता कम हो जाती है।

इस प्रकार, एल्केन एमीन एनीलीन से अधिक प्रबल क्षार होते हैं।

क्या होता है जब यूरिया के दो अणुओं को 55°C ताप पर गर्म किया जाता है? (आवश्यक समीकरण दीजिए)

जब यूरिया के दो अणुओं को 55°C ताप पर गर्म किया जाता है, तो एक अणु अमोनिया (NH₃) निकल जाता है और बायूरेट (biuret) बनता है। रासायनिक समीकरण:

2 NH₂CONH₂ → NH₂CONHCONH₂ + NH₃

यह अभिक्रिया बायूरेट परीक्षण में उपयोग होती है, जहाँ बायूरेट क्षारीय माध्यम में Cu²⁺ आयनों के साथ बैंगनी रंग का संकुल बनाता है।

नाइट्रोबेंजीन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।

नाइट्रोबेंजीन (C₆H₅NO₂) में नाइट्रो समूह (-NO₂) बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है। प्रमुख अनुनादी संरचनाएँ:

  1. मूल संरचना: बेंजीन वलय से जुड़ा -NO₂ समूह (N पर धनात्मक आवेश, O पर ऋणात्मक आवेश)
  2. अनुनादी संरचना I: नाइट्रोजन का एकाकी युग्म वलय में स्थानांतरित होकर C=N बंध बनाता है, ऑर्थो स्थान पर ऋणात्मक आवेश
  3. अनुनादी संरचना II: ऑर्थो स्थान से पैरा स्थान पर ऋणात्मक आवेश स्थानांतरण
  4. अनुनादी संरचना III: पैरा स्थान पर ऋणात्मक आवेश के साथ C=C बंध पुनर्व्यवस्था

इन अनुनाद संरचनाओं के कारण नाइट्रो समूह बेंजीन वलय से इलेक्ट्रॉन खींचता है, जिससे वलय इलेक्ट्रॉन-न्यून हो जाता है और नाइट्रोबेंजीन इलेक्ट्रॉन-आकर्षी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में कम सक्रिय होता है।

प्रश्न 28

निम्नलिखित यौगिकों को उनकी क्षारकता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए (जलीय माध्यम में):

(CH₃)₂NH, (CH₃)₃N, CH₃NH₂, NH₃

उत्तर: जलीय माध्यम में क्षारकता का क्रम निम्न प्रकार है:

NH₃ < (CH₃)₃N < CH₃NH₂ < (CH₃)₂NH

व्याख्या: जलीय माध्यम में क्षारकता न केवल +I प्रभाव पर निर्भर करती है, बल्कि जलयोजन (हाइड्रेशन) और स्टेरिक बाधा पर भी निर्भर करती है। (CH₃)₂NH में दो मिथाइल समूहों का +I प्रभाव और उचित जलयोजन के कारण यह सबसे अधिक क्षारकीय है। (CH₃)₃N में तीन मिथाइल समूहों के कारण स्टेरिक बाधा बढ़ जाती है, जिससे जलयोजन कम होता है और क्षारकता घट जाती है।


प्रश्न 29

रासायनिक समीकरण सहित समझाइए - जब नाइट्रोबेंजीन का अपचयन Zn और NH₄Cl की उपस्थिति में किया जाता है तो क्या होता है?

उत्तर: जब नाइट्रोबेंजीन का अपचयन Zn (जिंक) और NH₄Cl (अमोनियम क्लोराइड) की उपस्थिति में किया जाता है, तो यह फेनिलहाइड्रॉक्सिलमाइन (C₆H₅NHOH) में अपचयित हो जाता है।

रासायनिक समीकरण:

C₆H₅NO₂ + 2Zn + 4NH₄Cl → C₆H₅NHOH + 2ZnCl₂ + 4NH₃ + H₂O

नोट: यह अभिक्रिया तटस्थ माध्यम में होती है और इसका उपयोग फेनिलहाइड्रॉक्सिलमाइन के संश्लेषण में किया जाता है।


प्रश्न 30

एनिलीन के अनुनादी (रेज़ोनेंस) संरचनाएँ बनाइए।

अथवा

एल्किल ऐमीन, एनिलीन की तुलना में अधिक क्षारकीय होते हैं। व्याख्या कीजिए।

उत्तर (विकल्प 1): एनिलीन की अनुनादी संरचनाएँ निम्न प्रकार हैं:

एनिलीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है, जिससे निम्नलिखित संरचनाएँ बनती हैं:

  1. C₆H₅-NH₂ (मूल संरचना)
  2. C₆H₅=NH₂⁺ (जहाँ धनावेश नाइट्रोजन पर होता है और ऋणावेश बेंजीन वलय पर स्थानांतरित होता है)
  3. अन्य अनुनादी संरचनाएँ जहाँ ऋणावेश बेंजीन वलय के विभिन्न कार्बन परमाणुओं पर स्थित होता है (ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर)।

उत्तर (विकल्प 2): एल्किल ऐमीन, एनिलीन की तुलना में अधिक क्षारकीय होते हैं क्योंकि:

  • एनिलीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों की उपलब्धता कम हो जाती है और क्षारकता घट जाती है।
  • एल्किल ऐमीन में एल्किल समूह (+I प्रभाव) नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे क्षारकता बढ़ जाती है।
  • एनिलीन में नाइट्रोजन का एकाकी युग्म अनुनाद के कारण प्रोटॉन ग्रहण करने के लिए कम उपलब्ध होता है।

प्रश्न 31

जब यूरिया के दो अणुओं को 55°C पर गर्म किया जाता है तो क्या होता है? (आवश्यक समीकरण दीजिए)।

उत्तर: जब यूरिया के दो अणुओं को 55°C पर गर्म किया जाता है, तो वे संघनन अभिक्रिया द्वारा बाइयूरेट (Biuret) बनाते हैं।

रासायनिक समीकरण:

2 NH₂CONH₂ → NH₂CONHCONH₂ + NH₃

व्याख्या: इस अभिक्रिया में अमोनिया (NH₃) गैस निकलती है और बाइयूरेट का निर्माण होता है। यह अभिक्रिया बाइयूरेट परीक्षण का आधार है।


प्रश्न 32

नाइट्रोबेंजीन की अनुनादी (रेज़ोनेंस) संरचनाएँ बनाइए।

उत्तर: नाइट्रोबेंजीन की अनुनादी संरचनाएँ निम्न प्रकार हैं:

  1. C₆H₅-NO₂ (मूल संरचना)
  2. C₆H₅=NO₂⁻ (जहाँ ऋणावेश ऑक्सीजन पर और धनावेश नाइट्रोजन पर होता है)
  3. अन्य संरचनाएँ जहाँ धनावेश बेंजीन वलय के ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर स्थानांतरित होता है, जिससे नाइट्रो समूह -M प्रभाव (इलेक्ट्रॉन अपनेयक) प्रदर्शित करता है।

नोट: नाइट्रो समूह एक प्रबल इलेक्ट्रॉन अपनेयक समूह है, जो बेंजीन वलय से इलेक्ट्रॉन खींचता है और मेटा-निर्देशक होता है।


खण्ड - द (SECTION - D)

प्रश्न 33

विशिष्ट अभिक्रिया वेग की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: विशिष्ट अभिक्रिया वेग (Specific Reaction Rate) या वेग स्थिरांक (Rate Constant) वह वेग है जब अभिकारकों की सांद्रता एक-एक मोल प्रति लीटर होती है। इसे 'k' से प्रदर्शित किया जाता है। यह किसी निश्चित ताप पर स्थिर रहता है और अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करता।


प्रश्न 34

एक अभिक्रिया के लिए वेग नियतांक का मान 1.0 × 10⁻³ s⁻¹ पाया गया। अभिक्रिया की कोटि ज्ञात कीजिए।

उत्तर: वेग नियतांक (k) की इकाई s⁻¹ है।

प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग नियतांक की इकाई s⁻¹ होती है।

अतः, अभिक्रिया की कोटि = प्रथम कोटि (First Order) है।


प्रश्न 35

एक प्रथम कोटि अभिक्रिया 30 मिनट में 50% पूर्ण होती है, वेग स्थिरांक की गणना कीजिए। (1+2=4)

उत्तर: प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अर्ध-आयु काल (t₁/₂) = 30 मिनट

प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक (k) का सूत्र:

k = 0.693 / t₁/₂

k = 0.693 / 30

k = 0.0231 मिनट⁻¹

अतः, वेग स्थिरांक (k) = 0.0231 मिनट⁻¹


प्रश्न 35 (अथवा)

शून्य कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई लिखिए।

अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले कोई दो कारकों के नाम लिखिए।

उत्तर:

(i) शून्य कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई: मोल लीटर⁻¹ समय⁻¹ (mol L⁻¹ s⁻¹ या mol L⁻¹ min⁻¹)

(ii) अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले दो कारक:

  1. तापमान (Temperature): तापमान बढ़ने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।
  2. अभिकारकों की सांद्रता (Concentration of Reactants): सांद्रता बढ़ने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

29.

किसी अभिक्रिया में अभिक्रिया की कोटि A के प्रति दो एवं अभिकारक B के प्रति एक है तो:

  1. वेग नियम लिखिए।
  2. A की सांद्रता आधी तथा B की सांद्रता को दुगुनी कर देने पर अभिक्रिया का वेग क्या होगा?

हल:

i) वेग नियम (Rate Law):

चूँकि अभिक्रिया की कोटि A के सापेक्ष 2 तथा B के सापेक्ष 1 है, अतः वेग नियम होगा:

वेग = k [A]2 [B]1

जहाँ k वेग स्थिरांक है।

ii) वेग में परिवर्तन:

प्रारंभिक वेग (r0) = k [A]02 [B]0

नई सांद्रताएँ: [A'] = [A]0/2, [B'] = 2[B]0

नया वेग (r') = k ( [A]0/2 )2 × (2[B]0)

r' = k × ([A]02/4) × 2[B]0

r' = (1/2) × k [A]02 [B]0

r' = r0/2

अतः अभिक्रिया का वेग आधा हो जाएगा।


प्रश्न:

विशिष्ट अभिक्रिया दर की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: विशिष्ट अभिक्रिया दर (Specific Reaction Rate) या वेग स्थिरांक (Rate Constant) वह दर है जब अभिकारकों की सांद्रता एकांक (1 mol/L) होती है। यह केवल ताप पर निर्भर करता है, अभिकारकों की सांद्रता पर नहीं।


प्रश्न:

एक अभिक्रिया का वेग स्थिरांक 1 × 10-3 s-1 पाया गया। अभिक्रिया की कोटि ज्ञात कीजिए।

उत्तर: वेग स्थिरांक का मात्रक s-1 है, जो प्रथम कोटि की अभिक्रिया का मात्रक होता है। अतः अभिक्रिया की कोटि प्रथम (1) है।


प्रश्न:

एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया 50% पूर्ण होने में 30 मिनट लेती है। वेग स्थिरांक ज्ञात कीजिए।

हल:

प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु काल (t1/2) = 30 मिनट

वेग स्थिरांक (k) = 0.693 / t1/2

k = 0.693 / 30

k = 0.0231 मिनट-1

अतः वेग स्थिरांक 0.0231 मिनट-1 है।


अथवा

शून्य कोटि की अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का मात्रक लिखिए।

उत्तर: शून्य कोटि की अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का मात्रक mol L-1 s-1 (या mol L-1 समय-1) होता है।


प्रश्न:

अभिक्रिया की दर को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक लिखिए।

उत्तर: अभिक्रिया की दर को प्रभावित करने वाले दो कारक हैं:

  1. तापमान (Temperature): तापमान बढ़ाने पर अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
  2. अभिकारकों की सांद्रता (Concentration of Reactants): सांद्रता बढ़ाने पर अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।

प्रश्न:

PCI5 बनता है जबकि NCI5 नहीं, क्यों?

उत्तर: फॉस्फोरस (P) के पास d-कक्षक उपलब्ध होते हैं, जिससे यह अपने संयोजकता कोश का विस्तार कर 5 सहसंयोजक बंध बना सकता है (sp3d संकरण)। इसलिए PCI5 स्थायी है। जबकि नाइट्रोजन (N) के पास d-कक्षक नहीं होते, यह केवल sp3 संकरण कर अधिकतम 3 सहसंयोजक बंध बना सकता है। अतः NCI5 नहीं बनता।


प्रश्न:

रासायनिक समीकरण द्वारा समझाइए - क्या होता है जब SO2 चारकोल की उपस्थिति में Cl2 से क्रिया करती है?

उत्तर: जब सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) को चारकोल (C) की उपस्थिति में क्लोरीन (Cl2) से अभिकृत किया जाता है, तो सल्फ्यूरिल क्लोराइड (SO2Cl2) बनता है। चारकोल उत्प्रेरक का कार्य करता है।

रासायनिक समीकरण:

SO2 + Cl2C (उत्प्रेरक) SO2Cl2


प्रश्न:

अन्तर हैलोजन यौगिक, हैलोजन यौगिकों से अधिक क्रियाशील होते हैं, क्यों?

उत्तर: अन्तर हैलोजन यौगिकों (Interhalogen compounds) में दो भिन्न हैलोजन परमाणुओं के बीच बंध (जैसे I-Cl) समान हैलोजन परमाणुओं के बीच बंध (जैसे Cl-Cl) की तुलना में कमजोर होता है। इसके अलावा, अन्तर हैलोजन यौगिकों में ध्रुवता (Polarity) अधिक होती है, जिससे वे अधिक अभिक्रियाशील हो जाते हैं।


प्रश्न:

XeF2 की संरचना बनाइए।

उत्तर: XeF2 की संरचना रैखिक (Linear) होती है। इसमें क्सीनन (Xe) sp3d संकरण में होता है, जिसमें 3 एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pairs) और 2 बंध युग्म (Bond pairs) होते हैं। VSEPR सिद्धांत के अनुसार, यह त्रिकोणीय द्विपिरामिडी (Trigonal bipyramidal) ज्यामिति में एकाकी युग्म भूमध्य रेखीय स्थानों पर होते हैं, जिससे अणु रैखिक होता है।

संरचना:

F — Xe — F

(Xe के ऊपर और नीचे तीन एकाकी युग्म)


अथवा

क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी फ्लोरीन से अधिक होती है, क्यों?

उत्तर: फ्लोरीन का परमाणु आकार बहुत छोटा होता है, जिससे इसमें इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है और इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अधिक होता है। जब एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन जोड़ा जाता है, तो यह प्रतिकर्षण ऊर्जा मुक्त करने में बाधा डालता है। क्लोरीन का आकार बड़ा होता है, जिसमें प्रतिकर्षण कम होता है और नया इलेक्ट्रॉन अधिक आसानी से स्वीकार किया जाता है, जिससे अधिक ऊर्जा मुक्त होती है। इसलिए क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (अधिक ऋणात्मक) फ्लोरीन से अधिक होती है।


प्रश्न:

आवश्यक समीकरण दीजिए - क्या होता है जब पोटेशियम क्लोरेट को MnO2 की उपस्थिति में गर्म किया जाता है?

उत्तर: जब पोटेशियम क्लोरेट (KClO3) को मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO2) की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो यह विघटित होकर पोटेशियम क्लोराइड (KCl) और ऑक्सीजन (O2) गैस देता है। MnO2 उत्प्रेरक का कार्य करता है।

रासायनिक समीकरण:

2KClO3MnO2, Δ 2KCl + 3O2

30)

द) निम्नलिखित समीकरण को पूर्ण कीजिए:

Cu + HNO3 (सांद्र) →

XeF4 की संरचना बनाइए।

PCI5 exists while NCI5 does not, why?

उत्तर: फॉस्फोरस (P) के पास खाली 3d ऑर्बिटल होते हैं, जिससे यह 5 क्लोरीन परमाणुओं से बंध बना सकता है। नाइट्रोजन (N) के पास d-ऑर्बिटल नहीं होते, इसलिए यह 5 बंध नहीं बना सकता।

Explain with chemical equation - What happens when SO2 is reacted with Cl2(g) in presence of Charcoal?

उत्तर: जब SO2 को कोयले (Charcoal) की उपस्थिति में Cl2 गैस से अभिकृत किया जाता है, तो सल्फ्यूरिल क्लोराइड (SO2Cl2) बनता है।

रासायनिक समीकरण: SO2 + Cl2 → SO2Cl2

Interhalogen compounds are more reactive than halogen compounds. Why?

उत्तर: अंतर-हैलोजन यौगिकों में बंध (X–Y) हैलोजन अणुओं (X–X) की तुलना में कमजोर होता है, क्योंकि परमाणुओं के आकार में अंतर होता है। इसलिए ये अधिक अभिक्रियाशील होते हैं।

Draw structure of XeF4.

उत्तर: XeF4 की संरचना वर्ग समतलीय (Square Planar) होती है। इसमें Xe केंद्र में है, चार F परमाणु वर्ग के कोनों पर हैं, और दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pairs) ऊपर और नीचे स्थित होते हैं।

OR

Electron gain enthalpy of chlorine is higher than fluorine. Why?

उत्तर: फ्लोरीन का परमाणु आकार बहुत छोटा होता है, जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉन के प्रति प्रबल प्रतिकर्षण होता है। क्लोरीन का आकार बड़ा होने से यह प्रतिकर्षण कम होता है, इसलिए इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक (अधिक ऋणात्मक) होती है।

Give required equation - What happens when potassium chlorate is heated in presence of MnO2?

उत्तर: पोटैशियम क्लोरेट (KClO3) को MnO2 की उपस्थिति में गर्म करने पर यह विघटित होकर पोटैशियम क्लोराइड (KCl) और ऑक्सीजन (O2) देता है।

समीकरण: 2KClO3 → 2KCl + 3O2 (MnO2 उत्प्रेरक)

Complete the following reaction - Cu + HNO3 (conc.) →

उत्तर: Cu + 4HNO3 (सांद्र) → Cu(NO3)2 + 2NO2 + 2H2O

Draw structure of XeF4.

उत्तर: XeF4 की संरचना वर्ग समतलीय (Square Planar) होती है।

फॉर्मेएल्डिहाइड की ग्रीन्यार अभिकर्मक से क्रिया का समीकरण लिखिए।

उत्तर: HCHO + CH3MgBr → H–C–(OMgBr)–CH3 → जल अपघटन पर H–C–OH–CH3 (एथेनॉल) प्राप्त होता है।

समीकरण: HCHO + CH3MgBr → CH3CH2OMgBr → CH3CH2OH

SOR का क्वथनांक एल्कोहॉल से कम होता है। समझाइए।

उत्तर: एल्कोहॉल में अंतर-आण्विक हाइड्रोजन बंध होते हैं, जबकि SOR (संभवतः ईथर) में नहीं होते। हाइड्रोजन बंध के कारण एल्कोहॉल के अणु अधिक मजबूती से जुड़े रहते हैं, जिससे उनका क्वथनांक ऊँचा होता है। ईथर में केवल दुर्बल वान डर वाल्स बल होते हैं, इसलिए क्वथनांक कम होता है।

रासायनिक अभिक्रिया द्वारा समझाइए - क्या होता है जब प्राथमिक एल्कोहॉल को Cu धातु की उपस्थिति में 573 K पर गर्म किया जाता है?

उत्तर: प्राथमिक एल्कोहॉल (जैसे एथेनॉल) को Cu की उपस्थिति में 573 K पर गर्म करने पर निर्जलीकरण (dehydrogenation) होता है और एल्डिहाइड बनता है।

समीकरण: CH3CH2OH → CH3CHO + H2 (Cu, 573 K)

फीनॉल से एस्प्रिन कैसे प्राप्त करेंगे?

उत्तर: फीनॉल को सबसे पहले सैलिसिलिक अम्ल में बदला जाता है, फिर इसका एसिटिलीकरण करके एस्प्रिन (एसिटिलसैलिसिलिक अम्ल) प्राप्त किया जाता है।

प्रमुख चरण:

  1. फीनॉल + NaOH → सोडियम फीनॉक्साइड
  2. सोडियम फीनॉक्साइड + CO2 (उच्च दाब) → सैलिसिलिक अम्ल
  3. सैलिसिलिक अम्ल + एसिटिक एनहाइड्राइड → एस्प्रिन + एसिटिक अम्ल

(l+4++=4]

अथवा

SS_4]—-Chem. 273

खण्ड - स (Section - C)

प्रश्न (Question):

  1. (a) फीनॉल बनाने की रासायनिक समीकरण लिखिए।

    (b) रासायनिक समीकरण द्वारा समझाइए - क्या होता है जब डाईएथिल ईथर, सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन से क्रिया करता है?

    (c) क्या होता है जब फीनॉल की क्रिया Br₂ जल के साथ कराई जाती है? (केवल समीकरण दीजिए)

    (d) ल्यूकॉस अभिकर्मक द्वारा 1°, 2° एवं 3° एल्कोहॉल में विभेद कीजिए।

  2. (a) Write the chemical equation of reaction of formaldehyde with Grignard reagent.

    (b) The boiling point of ether is less than Alcohol. Explain.

    (c) Explain with chemical reaction - What happens when primary alcohol is heated at 573 K in presence of Cu metal?

    (d) How will you obtain Aspirin from phenol?

अथवा (OR)

  1. (a) Write the chemical equation to prepare phenol from cumene.

    (b) Explain with chemical reaction - What happen when Diethyl ether is reacted with chlorine in presence of sunlight?

    (c) What happens when phenol reacts with bromine water? (Write only equation)

    (d) Differentiate 1°, 2° and 3° Alcohol by Lucas reagent.


उत्तर (Answers)

1. (a) फीनॉल बनाने की रासायनिक समीकरण:

क्यूमीन (आइसोप्रोपिल बेंजीन) से फीनॉल का निर्माण (क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड विधि):

C₆H₅CH(CH₃)₂ + O₂ → C₆H₅C(CH₃)₂OOH (क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड)

C₆H₅C(CH₃)₂OOH + H₂O → C₆H₅OH + (CH₃)₂CO (एसीटोन)

1. (b) डाईएथिल ईथर + क्लोरीन (सूर्य प्रकाश में):

डाईएथिल ईथर (C₂H₅OC₂H₅) सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन से क्रिया करके क्लोरीन प्रतिस्थापन उत्पाद देता है।

C₂H₅OC₂H₅ + Cl₂ → C₂H₅OC₂H₄Cl + HCl (मोनोक्लोरोडाईएथिल ईथर)

अधिक क्लोरीन से पूर्ण क्लोरीनीकरण हो सकता है।

1. (c) फीनॉल + Br₂ जल:

फीनॉल ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके 2,4,6-ट्राइब्रोमोफीनॉल का सफेद अवक्षेप देता है।

C₆H₅OH + 3Br₂ → C₆H₂Br₃OH + 3HBr

1. (d) ल्यूकॉस अभिकर्मक द्वारा एल्कोहॉल का विभेद:

ल्यूकॉस अभिकर्मक (ZnCl₂ + HCl) का उपयोग करके:

  • 1° एल्कोहॉल: कमरे के ताप पर कोई अभिक्रिया नहीं होती (धुंधलापन नहीं आता)।
  • 2° एल्कोहॉल: 5-10 मिनट में धुंधलापन आ जाता है (एल्किल क्लोराइड बनता है)।
  • 3° एल्कोहॉल: तुरंत धुंधलापन आ जाता है (तेजी से एल्किल क्लोराइड बनता है)।

2. (a) Formaldehyde + Grignard reagent:

Formaldehyde (HCHO) reacts with Grignard reagent (RMgX) to form a primary alcohol after hydrolysis.

HCHO + RMgX → RCH₂OMgX

RCH₂OMgX + H₂O → RCH₂OH + Mg(OH)X

2. (b) Boiling point of ether is less than alcohol:

Alcohols have higher boiling points than ethers because alcohols can form intermolecular hydrogen bonds due to the presence of -OH group. Ethers cannot form hydrogen bonds with each other (only weak dipole-dipole interactions), so they have lower boiling points.

2. (c) Primary alcohol heated at 573 K with Cu:

When primary alcohol is heated at 573 K in presence of Cu metal, it undergoes dehydrogenation to form an aldehyde.

RCH₂OH → RCHO + H₂ (Cu, 573 K)

2. (d) Aspirin from phenol:

Phenol is first converted to sodium phenoxide, then reacted with CO₂ to form salicylic acid (Kolbe-Schmitt reaction). Salicylic acid is then acetylated with acetic anhydride to form aspirin (acetylsalicylic acid).

C₆H₅OH + NaOH → C₆H₅ONa + H₂O

C₆H₅ONa + CO₂ → C₆H₄(OH)COONa (sodium salicylate)

C₆H₄(OH)COONa + H⁺ → C₆H₄(OH)COOH (salicylic acid)

C₆H₄(OH)COOH + (CH₃CO)₂O → C₆H₄(OCOCH₃)COOH + CH₃COOH (aspirin)


अथवा (OR) के उत्तर

OR (a) Phenol from cumene:

C₆H₅CH(CH₃)₂ + O₂ → C₆H₅C(CH₃)₂OOH (cumene hydroperoxide)

C₆H₅C(CH₃)₂OOH + H₂O → C₆H₅OH + (CH₃)₂CO

OR (b) Diethyl ether + Chlorine (sunlight):

Same as answer 1(b) above.

OR (c) Phenol + Bromine water:

Same as answer 1(c) above.

OR (d) Lucas test for alcohols:

Same as answer 1(d) above.

SS_41-Chem. 273