RBSE Class 12th 2018 -SS-42-2018 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | -SS-42-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2018 -SS-42-2018
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Rajasthan Board Class 12th -SS-42-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018
जीव विज्ञान
BIOLOGY
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 56
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
SLNo. : FLT. 5
No. of Questions - 30 No. of Printed Pages - 1
SS-42-Bio. (Supp.)
SS-42-Bio. 274 [ Turn Over
5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
| खण्ड (Section) | प्रश्न संख्या (Q. Nos.) | अंक प्रति प्रश्न (Marks per question) |
|---|---|---|
| A | 1 – 3 | 1 |
| B | 4 – 24 | 2 |
| C | 25 – 27 | 3 |
| D | 28 – 30 | 4 |
7) प्रश्न संख्या 24, 27, 28, 29 और 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 24, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.
SS—42-Bio. 274
खण्ड - अ / SECTION - A
-
बहुभ्रुणता की परिभाषा बताइये। [4]
Define Polyembryony.उत्तर: बहुभ्रुणता वह घटना है जिसमें एक बीज में एक से अधिक भ्रूण विकसित होते हैं। यह सामान्यतः नारंगी, नीबू, आम आदि पादपों में पाई जाती है।
Polyembryony is the phenomenon in which more than one embryo develops inside a single seed. It is commonly found in plants like orange, lemon, and mango. -
अंडजनन किसे कहते हैं? [ ]
What is Oogenesis?उत्तर: अंडजनन वह प्रक्रिया है जिसमें मादा जनन कोशिकाओं (अंडाणु) का निर्माण होता है। यह अंडाशय में होता है और इसमें अंडाणु जनक कोशिकाओं से परिपक्व अंडाणु बनते हैं।
Oogenesis is the process of formation of female gametes (eggs). It occurs in the ovaries and involves the development of mature eggs from oogonia. -
एकल संकर संकरण की परिभाषा बताइये। [ ]
Define monohybrid cross.उत्तर: एकल संकर संकरण वह क्रॉस है जिसमें केवल एक जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले माता-पिता के बीच संकरण कराया जाता है। उदाहरण: लम्बे और बौने मटर के पौधों के बीच क्रॉस।
A monohybrid cross is a cross between parents that differ in only one pair of contrasting traits. Example: cross between tall and dwarf pea plants. -
लिंग निधरिण की प्रक्रिया जिसमें नर दो प्रकार के युग्मक पैदा करते हैं कहलाती है। [ ]
Method of Sex determination in which male produce two types of gametes is called.उत्तर: इसे नर विषमयुग्मकता (Male Heterogamety) कहते हैं। इसमें नर दो प्रकार के युग्मक (X और Y) उत्पन्न करता है, जबकि मादा एक प्रकार के (X) युग्मक उत्पन्न करती है। उदाहरण: मनुष्य, ड्रोसोफिला।
This is called Male Heterogamety. In this, males produce two types of gametes (X and Y), while females produce only one type (X). Example: Humans, Drosophila. -
अनुकूली विकिरण का एक उदाहरण दीजिये। [ ]
Give one example of adaptive radiation.उत्तर: डार्विन की फिंच चिड़ियाँ (Galapagos finches) अनुकूली विकिरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ये सभी एक सामान्य पूर्वज से उत्पन्न हुईं और विभिन्न आहारों के अनुकूल होने के लिए विभिन्न प्रकार की चोंच विकसित कीं।
Darwin's finches (Galapagos finches) are a classic example of adaptive radiation. They all evolved from a common ancestor and developed different beak shapes to adapt to different food sources. -
ऊतक संवर्धन द्वारा हजारों की संख्या में पादपों का उत्पन्न करने की विधि क्या कहलाती है? [ ]
Method of producing thousands of plants through tissue culture is called.उत्तर: इस विधि को सूक्ष्मप्रवर्धन (Micropropagation) कहते हैं। इसमें पादप के एक छोटे से भाग (जैसे कैलस, कली, या मेरिस्टेम) को संवर्धित करके बड़ी संख्या में पादप उत्पन्न किए जाते हैं।
This method is called Micropropagation. In this, a small part of a plant (such as callus, bud, or meristem) is cultured to produce a large number of plants.
SS-42-Bio. वठ74 [ Turn Over ]
7) कवक का नाम लिखिये जिसका उपयोग पादप रोगों के उपचार में किया जाता है।
Name the fungus which is used in the treatment of plant disease.
8) सामान्यतः किसे "बीयर यीस्ट" कहते हैं?
Which is commonly called brewer's yeast?
9) किसे "आणविक कैंची" भी कहा जाता है?
Which is also called as 'molecular scissors'?
10) आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीव (GMO) की परिभाषा दीजिये।
Define Genetically Modified Organisms (GMO).
11) आनुवंशिक रोगों के उपचार की विधि का नाम लिखिये।
Name the method which is used to cure hereditary disease.
12) बी.ओ.डी. का पूरा नाम लिखिये।
Write the full form of BOD.
13) जैव आवर्धन की परिभाषा दीजिये।
Define Biomagnification.
खण्ड - ब / SECTION - B
4) लैंगिक जनन, जनन की अच्छी विधि है, दो कारण देकर समझाइये। [1+1=2]
अथवा / OR
पेनिसिलियम व क्लैमिडोमोनास की अलैंगिक जनन संरचनाओं के नाम बताइये।
Sexual reproduction is best method of reproduction. Explain with two reasons.
OR
Give the name of asexual reproductive structures of Penicillium and Chlamydomonas.
उत्तर / Answer:
लैंगिक जनन सर्वोत्तम विधि है, क्योंकि:
- आनुवंशिक विविधता: इसमें दो भिन्न जनकों के युग्मकों के संलयन से नई संतति में आनुवंशिक पुनर्संयोजन होता है, जिससे विविधता उत्पन्न होती है। यह विविधता पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अनुकूलन में सहायक होती है।
- उत्परिवर्तनों का निवारण: लैंगिक जनन में हानिकारक उत्परिवर्तनों को समाप्त करने की क्षमता होती है, जिससे प्रजाति दीर्घकाल तक स्वस्थ बनी रहती है।
अथवा / OR:
- पेनिसिलियम (Penicillium): कोनिडिया (Conidia) – यह बाह्य रूप से बनने वाली अलैंगिक बीजाणु संरचना है।
- क्लैमिडोमोनास (Chlamydomonas): जूस्पोर (Zoospores) – यह गतिशील अलैंगिक बीजाणु हैं।
5) अपरा के दो कार्य समझाइये। [1+1=2]
Explain two functions of placenta.
उत्तर / Answer:
- पोषण प्रदान करना: अपरा माता के रक्त से ऑक्सीजन, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, विटामिन और खनिज लवणों को भ्रूण तक पहुँचाती है।
- उत्सर्जन: भ्रूण द्वारा उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड, यूरिया आदि अपशिष्ट पदार्थों को अपरा के माध्यम से माता के रक्त में भेजकर निष्कासित किया जाता है।
6) कोई दो सहायक जनन प्रौद्योगिकियों को समझाइये। [1+1=2]
Explain any two assisted reproductive technologies.
उत्तर / Answer:
- इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF): इस विधि में अंडाशय से अंडाणु निकालकर प्रयोगशाला में शुक्राणु से निषेचित किया जाता है। निषेचित अंडाणु (भ्रूण) को कुछ दिनों तक संवर्धित करके गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है। यह फैलोपियन ट्यूब बंद होने या शुक्राणु की कमी जैसी समस्याओं में उपयोगी है।
- अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (IUI): इसमें शुक्राणुओं को प्रयोगशाला में धोकर सक्रिय शुक्राणुओं को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है। यह तब किया जाता है जब शुक्राणुओं की संख्या कम हो या गर्भाशय ग्रीवा में समस्या हो।
प्रश्न 7: हार्डी-वेनवर्ग साम्यता को प्रभावित करने वाले चार घटकों के नाम लिखिये।
Write the name of any four factors which affect the Hardy Weinberg equilibrium.
उत्तर / Answer: हार्डी-वेनवर्ग साम्यता को प्रभावित करने वाले चार घटक निम्नलिखित हैं:
- जीन प्रवाह (Gene flow) / जीन स्थानांतरण
- आनुवंशिक विचलन (Genetic drift)
- उत्परिवर्तन (Mutation)
- प्राकृतिक चयन (Natural selection)
(अन्य वैकल्पिक घटक: यादृच्छिक संगमन न होना, जीन पुनर्संयोजन)
प्रश्न 8: पशुप्रजनन के उद्देश्य बताइये। संकरण को समझाइये।
Mention the aims of animal breeding. Explain cross-breeding.
उत्तर / Answer:
पशुप्रजनन के उद्देश्य (Aims of animal breeding):
- दूध, मांस, अंडे, ऊन आदि उत्पादों की मात्रा और गुणवत्ता में वृद्धि करना।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले पशुओं का विकास करना।
- स्थानीय जलवायु के अनुकूल नस्लों का निर्माण करना।
- उच्च उत्पादन क्षमता वाले पशुओं की संख्या बढ़ाना।
संकरण (Cross-breeding) की व्याख्या: संकरण एक प्रजनन विधि है जिसमें दो अलग-अलग नस्लों के नर और मादा पशुओं के बीच प्रजनन कराया जाता है। इसका उद्देश्य दोनों नस्लों के वांछनीय गुणों (जैसे उच्च उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्थानीय अनुकूलन) को संयोजित करना होता है। उदाहरण के लिए, हिसारडेल नस्ल का विकास मैरिनो (ऊन के लिए) और बीकानेरी (स्थानीय अनुकूलन) नस्लों के संकरण से किया गया।
प्रश्न 9: घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीवों के दो उपयोग बताइये।
Mention the two uses of microbes in household products.
उत्तर / Answer: घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीवों के दो प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:
- दही (Yogurt) का निर्माण: लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) जीवाणु दूध को दही में बदलता है।
- रोटी/ब्रेड (Bread) का बनाना: यीस्ट (Saccharomyces cerevisiae) का उपयोग आटे को फुलाने (किण्वन) के लिए किया जाता है।
(अन्य उदाहरण: पनीर, इडली, डोसा, अचार का किण्वन)
प्रश्न 20: बैसीलस थुरीनजिएंसिस द्वारा उत्पन्न जीवविष बैसीलस थुरीनजिएंसिस को क्यों नहीं मारता है? कारण बताइये।
Why does toxin produced by Bacillus thuringiensis does not kill the Bacillus thuringiensis itself? Give reason.
उत्तर / Answer: बैसीलस थुरीनजिएंसिस (Bt) द्वारा उत्पन्न जीवविष (Cry प्रोटीन) एक प्रोटॉक्सिन (निष्क्रिय अग्रदूत) के रूप में होता है। यह विष केवल क्षारीय pH (जैसे कीटों की आंत में) पर सक्रिय होता है। बैसीलस थुरीनजिएंसिस के स्वयं के कोशिका में अम्लीय वातावरण होता है, जहाँ यह प्रोटॉक्सिन सक्रिय नहीं हो पाता। इसके अतिरिक्त, जीवाणु में विशेष रिसेप्टर नहीं होते जो सक्रिय विष को बांध सकें। इसलिए यह विष अपने उत्पादक जीवाणु को नहीं मारता।
प्रश्न 21: अजीविय कारकों के प्रति होने वाली अनुक्रियाओं को चार उदाहरण देकर समझाइये।
Explain responses to abiotic factors by giving four examples.
उत्तर / Answer: अजीविय कारकों (जैसे तापमान, जल, प्रकाश, मृदा) के प्रति जीवों की चार अनुक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:
- नियमन (Regulation): कुछ जीव (जैसे मनुष्य, पक्षी) अपने आंतरिक वातावरण (जैसे शरीर का तापमान) को स्थिर बनाए रखते हैं, चाहे बाहरी वातावरण बदले। उदाहरण: मनुष्य का शरीर 37°C तापमान बनाए रखता है।
- अनुपालन (Conformity): अधिकांश जीव (जैसे मछली, उभयचर) अपने शरीर का तापमान या जल संतुलन बाहरी वातावरण के अनुसार बदल लेते हैं। उदाहरण: मेंढक का शरीर का तापमान परिवेश के तापमान के साथ बदलता है।
- पलायन (Migration): कुछ जीव प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए स्थानांतरित हो जाते हैं। उदाहरण: साइबेरियन पक्षी सर्दियों में भारत आते हैं।
- सुषुप्ति (Suspension/Dormancy): कुछ जीव प्रतिकूल परिस्थितियों में अपनी चयापचय क्रिया को कम कर देते हैं या रोक देते हैं। उदाहरण: बीज सूखे में निष्क्रिय रहते हैं, या भालू शीतनिद्रा (hibernation) में चले जाते हैं।
22) कारण स्पष्ट कीजिये / Give reason:
(a) समुद्रों के जलीय स्तनधारी जैसे सील में त्वचा के नीचे वसा की मोटी परत का पाया जाना।
(A) Aquatic mammals of polar seas like seals have a thick layer of fat below the skin.
कारण / Reason: ध्रुवीय समुद्रों में पानी अत्यधिक ठंडा होता है। वसा की मोटी परत (ब्लबर) एक उत्कृष्ट ऊष्मारोधी (insulator) का काम करती है, जो शरीर की गर्मी को बाहर नहीं जाने देती और जानवर को ठंड से बचाती है। साथ ही, यह वसा ऊर्जा का भंडार भी प्रदान करती है।
(b) मरूस्थलीय पौधों की पत्तियों की सतह पर मोटी उपत्वचा (cuticle) का पाया जाना तथा रंध्रों (stomata) का गहरे गड्ढों में व्यवस्थित होना।
(B) Desert plants have a thick cuticle on their leaf surfaces and have their stomata arranged in deep pits.
कारण / Reason: मरुस्थलों में पानी की बहुत कमी होती है। मोटी उपत्वचा (cuticle) पत्तियों से पानी के वाष्पोत्सर्जन (transpiration) को कम करती है। रंध्रों का गहरे गड्ढों में होना भी वाष्पोत्सर्जन की दर को घटाता है, क्योंकि गड्ढों के अंदर नमी बनी रहती है और हवा का सीधा प्रभाव कम होता है। ये दोनों अनुकूलन पौधे को पानी बचाने में मदद करते हैं।
23) दोहरा कार्य करने वाले आनुवंशिक कूट (genetic code) को लिखते हुए उसके दो कार्य भी बताइये। [I+=2]
Write the genetic code which has dual function and also write its two functions.
दोहरा कार्य करने वाला आनुवंशिक कूट / Genetic code with dual function: AUG
दो कार्य / Two functions:
- प्रारंभ कूट (Start Codon): AUG प्रोटीन संश्लेषण की शुरुआत (initiation) का संकेत देता है। यह mRNA पर पहला कोडन होता है जिससे अनुवाद (translation) प्रारंभ होता है।
- मेथियोनीन (Methionine) के लिए कूट: AUG अमीनो अम्ल मेथियोनीन (Met) को भी कूटबद्ध (code) करता है। इस प्रकार, यह एक साथ प्रारंभ और एक विशिष्ट अमीनो अम्ल के लिए कार्य करता है।
24) हमें जैव विविधता को क्यों संरक्षित करना चाहिए? दो कारणों से समझाइये। [l4+=2]
Why should we conserve biodiversity? Explain by giving two reasons.
जैव विविधता संरक्षण के दो प्रमुख कारण / Two reasons for conserving biodiversity:
- पारिस्थितिकी संतुलन (Ecological Balance): जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) की स्थिरता बनाए रखती है। विभिन्न प्रजातियाँ खाद्य श्रृंखला (food chain), पोषक चक्र (nutrient cycle), जल शुद्धिकरण और जलवायु नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एक प्रजाति के विलुप्त होने से पूरा तंत्र प्रभावित हो सकता है।
- आर्थिक एवं वैज्ञानिक महत्व (Economic and Scientific Importance): जैव विविधता मनुष्य को भोजन, दवाइयाँ, ईंधन, लकड़ी और अन्य संसाधन प्रदान करती है। कई औषधियाँ (जैसे कुनैन, मॉर्फिन) पौधों से प्राप्त होती हैं। इसके अलावा, विभिन्न प्रजातियों का अध्ययन वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास में सहायक होता है।
25.
भ्रुणपोष का निर्माण किस कोशिका द्वारा होता है? गैरएल्बुमिनियस व एल्बुमिनियस बीजो के बनने के कारण को स्पष्ट करते हुए प्रत्येक के उदाहरण दीजिये।
Which cell develops into the endosperm. Why seed develop into non-albuminous and albuminous explain with suitable examples of each.
उत्तर: भ्रुणपोष (endosperm) का निर्माण द्वितीयक नाभिक (secondary nucleus) या केंद्रीय कोशिका (central cell) के निषेचन से होता है। यह त्रिगुणित (3n) होता है।
गैरएल्बुमिनियस बीज (Non-albuminous seeds): इनमें भ्रुणपोष का पूरा उपयोग भ्रूण द्वारा कर लिया जाता है, अतः परिपक्व बीज में भ्रुणपोष नहीं होता। उदाहरण: मटर, चना, सेम।
एल्बुमिनियस बीज (Albuminous seeds): इनमें भ्रुणपोष का कुछ भाग परिपक्व बीज में बचा रहता है। उदाहरण: मक्का, गेहूँ, अरंडी।
अथवा / OR
गुरूबीजाणुजनन किसे कहते है? आवृत्तबीजी में एक प्रारूपिक बीजाण्ड की संरचना का वर्णन कीजिए।
What is megasporogenesis? Describe the structure of typical angiosperm ovule.
उत्तर:
गुरूबीजाणुजनन (Megasporogenesis): यह वह प्रक्रिया है जिसमें बीजाण्ड के न्यूसेलस (nucellus) में उपस्थित एक गुरूबीजाणु मातृ कोशिका (megaspore mother cell) अर्धसूत्री विभाजन द्वारा चार अगुणित गुरूबीजाणु (megaspores) बनाती है।
प्रारूपिक बीजाण्ड की संरचना (Structure of typical angiosperm ovule):
- वृन्त (Funicle): बीजाण्ड को अंडाशय की भित्ति से जोड़ने वाला डंठल।
- चोल (Integuments): बीजाण्ड के चारों ओर दो सुरक्षात्मक आवरण (बाह्य एवं अंत:चोल)।
- न्यूसेलस (Nucellus): चोलों के अंदर स्थित पोषक ऊतक।
- बीजाण्डद्वार (Micropyle): चोलों के शीर्ष पर एक छोटा छिद्र।
- चोलमुख (Chalaza): वह भाग जहाँ चोल और न्यूसेलस मिलते हैं।
- भ्रूणकोष (Embryo sac): न्यूसेलस के अंदर स्थित मादा युग्मकोद्भिद्, जिसमें अंड कोशिका, सहायक कोशिकाएँ, प्रतिवर्ती कोशिकाएँ और द्वितीयक नाभिक होते हैं।
26.
स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम लिखिये। पनेट वर्ग बनाते हुए गोल पीले व झुर्रीदार हरे बीजों की वंशागति को दर्शाइये।
Write law of Independent Assortment. Show the inheritance of round yellow and wrinkled green seeds using a punnett square.
उत्तर:
स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): इस नियम के अनुसार, जब दो या दो से अधिक लक्षणों के युग्मविकल्पी एक साथ वंशागत होते हैं, तो प्रत्येक लक्षण का युग्मविकल्पी दूसरे लक्षण के युग्मविकल्पी से स्वतंत्र रूप से पृथक होता है और यादृच्छिक रूप से संयोजित होता है।
पनेट वर्ग (Punnett Square): गोल पीले (RRYY) और झुर्रीदार हरे (rryy) बीजों के बीच संकरण:
| ♂ / ♀ | RY | Ry | rY | ry |
|---|---|---|---|---|
| RY | RRYY (गोल पीला) | RRYy (गोल पीला) | RrYY (गोल पीला) | RrYy (गोल पीला) |
| Ry | RRYy (गोल पीला) | RRyy (गोल हरा) | RrYy (गोल पीला) | Rryy (गोल हरा) |
| rY | RrYY (गोल पीला) | RrYy (गोल पीला) | rrYY (झुर्रीदार पीला) | rrYy (झुर्रीदार पीला) |
| ry | RrYy (गोल पीला) | Rryy (गोल हरा) | rrYy (झुर्रीदार पीला) | rryy (झुर्रीदार हरा) |
फेनोटाइप अनुपात: 9 गोल पीला : 3 गोल हरा : 3 झुर्रीदार पीला : 1 झुर्रीदार हरा।
27.
पुनर्योगज डी एन ए को परिभाषित कीजिये। DNA खंड के पृथक्करण व विलगन की जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस विधि को समझाइये।
Define recombinant DNA. Explain gel electrophoresis method of separation and isolation of DNA fragments.
उत्तर:
पुनर्योगज डीएनए (Recombinant DNA): यह वह डीएनए अणु है जो दो भिन्न स्रोतों (जैसे विभिन्न जीवों) से प्राप्त डीएनए खंडों को जोड़कर कृत्रिम रूप से बनाया जाता है। इसमें एक वाहक (जैसे प्लाज्मिड) और एक विदेशी डीएनए खंड शामिल होता है।
जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस (Gel Electrophoresis): यह डीएनए खंडों को उनके आकार के आधार पर पृथक करने की एक विधि है।
- सिद्धांत: डीएनए ऋणावेशित होता है, इसलिए यह विद्युत क्षेत्र में धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर गति करता है। छोटे खंड बड़े खंडों की तुलना में तेजी से चलते हैं।
- विधि:
- एगारोज जेल तैयार करके उसे बफर घोल में रखा जाता है।
- जेल में कुओं (wells) बनाए जाते हैं जिनमें डीएनए के नमूने डाले जाते हैं।
- विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे डीएनए खंड जेल में गति करते हैं।
- गति के बाद जेल को एथिडियम ब्रोमाइड जैसे रंग से रंगा जाता है और UV प्रकाश में देखा जाता है।
- डीएनए खंडों को जेल से काटकर अलग किया जा सकता है और शुद्ध किया जा सकता है।
खण्ड - द
SECTION - D
-
a) आनुवंशिक पदार्थ के दो मापदंड लिखिए।
आनुवंशिक पदार्थ के दो मापदंड (criteria) निम्नलिखित हैं:
- इसे स्वयं की प्रतिकृति (self-replication) बनाने में सक्षम होना चाहिए।
- इसे स्थिर होना चाहिए लेकिन उत्परिवर्तन (mutation) के लिए सक्षम होना चाहिए, ताकि विकास संभव हो सके।
b) जेम्स वाट्सन व फ्रांसिस क्रीक के DNA द्विकुंडली मॉडल को संक्षिप्त में समझाइये।
वाट्सन और क्रीक के DNA द्विकुंडली मॉडल की मुख्य विशेषताएँ:
- DNA दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बना होता है जो एक-दूसरे के चारों ओर कुंडलित होकर द्विकुंडली (double helix) बनाती हैं।
- दोनों श्रृंखलाएँ समानांतर (antiparallel) होती हैं, अर्थात एक 5'→3' दिशा में और दूसरी 3'→5' दिशा में चलती है।
- नाइट्रोजन क्षार (bases) आपस में हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े होते हैं: एडेनिन (A) थाइमिन (T) से दो हाइड्रोजन बंधों से और गुआनिन (G) साइटोसिन (C) से तीन हाइड्रोजन बंधों से जुड़ता है।
- प्रत्येक श्रृंखला का कंकाल (backbone) डीऑक्सीराइबोज शर्करा और फॉस्फेट समूहों से बना होता है।
- द्विकुंडली का व्यास लगभग 20 Å (2 nm) होता है, और प्रत्येक पूर्ण घुमाव में लगभग 10 क्षार युग्म (base pairs) होते हैं।
c) द्विरज्जुकीय पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला का चित्र बनाइये।
द्विरज्जुकीय पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला का चित्र नीचे दर्शाया गया है (यह एक योजनाबद्ध प्रतिनिधित्व है):
5' - P - S - A = T - S - P - 3' | | P P | | 3' - P - S - T = A - S - P - 5' | | P P | | 5' - P - S - G ≡ C - S - P - 3' | | P P | | 3' - P - S - C ≡ G - S - P - 5'यहाँ: P = फॉस्फेट समूह, S = शर्करा (डीऑक्सीराइबोज), A, T, G, C = नाइट्रोजन क्षार। (=) दो हाइड्रोजन बंध, (≡) तीन हाइड्रोजन बंध दर्शाता है। दोनों श्रृंखलाएँ समानांतर (antiparallel) हैं।
अथवा (OR)
a) डीएनए व आरएनए में कोई दो अंतर लिखिये।
क्रमांक DNA RNA 1. इसमें डीऑक्सीराइबोज शर्करा पाई जाती है। इसमें राइबोज शर्करा पाई जाती है। 2. इसमें थाइमिन (T) क्षार पाया जाता है, यूरेसिल (U) नहीं। इसमें यूरेसिल (U) क्षार पाया जाता है, थाइमिन (T) नहीं। b) DNA कुंडली का पैकेजिंग संक्षिप्त में समझाइये।
यूकैरियोटिक कोशिकाओं में DNA का पैकेजिंग निम्नलिखित चरणों में होता है:
- DNA हिस्टोन प्रोटीन (H1, H2A, H2B, H3, H4) के चारों ओर कुंडलित होकर न्यूक्लियोसोम बनाता है। प्रत्येक न्यूक्लियोसोम में DNA के लगभग 146 क्षार युग्म हिस्टोन कोर के चारों ओर लिपटे होते हैं।
- न्यूक्लियोसोम एक "मोतियों की माला" (beads on a string) जैसी संरचना बनाते हैं, जो लगभग 10 nm मोटी होती है।
- यह संरचना और अधिक कुंडलित होकर 30 nm मोटी क्रोमैटिन फाइबर बनाती है।
- अंततः, यह फाइबर और अधिक संघनित होकर गुणसूत्र (chromosome) का निर्माण करता है।
c) न्यूक्लियोसोम का चित्र बनाइये।
न्यूक्लियोसोम का योजनाबद्ध चित्र:
DNA (लगभग 146 bp) ╔═══════════════════════╗ ║ ╭─────────────────╮ ║ ║ │ हिस्टोन कोर │ ║ ║ │ (H2A, H2B, H3, │ ║ ║ │ H4 प्रत्येक │ ║ ║ │ के दो-दो) │ ║ ║ ╰─────────────────╯ ║ ╚═══════════════════════╝ लिंकर DNA (लगभग 54 bp)न्यूक्लियोसोम में हिस्टोन प्रोटीन का एक अष्टक (octamer) होता है, जिसके चारों ओर DNA कुंडलित होता है। यह क्रोमैटिन की मूलभूत इकाई है।
प्रश्न 29
अ) प्रतिरक्षा किसे कहते हैं?
a) सहज प्रतिरक्षा के कोई दो रोधों को समझाइये।
a) एक प्रतिरक्षी अणु की संरचना का चित्र बनाइये।
[1+2+4=7]
उत्तर:
अ) प्रतिरक्षा (Immunity): प्रतिरक्षा वह क्षमता है जिसके द्वारा शरीर रोगजनक सूक्ष्मजीवों और विषाक्त पदार्थों से अपनी रक्षा करता है। यह शरीर की रोगों से लड़ने की जन्मजात या अर्जित क्षमता है।
a) सहज प्रतिरक्षा के दो रोध (Barriers of Innate Immunity):
- भौतिक रोध (Physical Barrier): त्वचा (skin) शरीर का प्रमुख भौतिक रोध है जो रोगजनकों को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है। श्लेष्मा झिल्ली (mucous membrane) भी एक भौतिक रोध है जो आंतरिक अंगों को ढकती है और रोगजनकों को फँसाती है।
- रासायनिक रोध (Chemical Barrier): आँसू, लार और पसीने में लाइसोजाइम (lysozyme) नामक एंजाइम पाया जाता है जो जीवाणुओं की कोशिका भित्ति को नष्ट कर देता है। आमाशय में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) भी रोगजनकों को नष्ट करता है।
a) एक प्रतिरक्षी अणु (एंटीबॉडी) की संरचना:
प्रतिरक्षी अणु (IgG) की संरचना 'Y' आकार की होती है। इसमें चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ होती हैं - दो भारी श्रृंखलाएँ (heavy chains) और दो हल्की श्रृंखलाएँ (light chains)। ये श्रृंखलाएँ डाइसल्फ़ाइड बंधों (disulfide bonds) द्वारा जुड़ी होती हैं। प्रतिरक्षी अणु के दो मुख्य भाग होते हैं:
- परिवर्तनशील क्षेत्र (Variable region): यह एंटीजन को पहचानने और बाँधने का कार्य करता है।
- स्थिर क्षेत्र (Constant region): यह प्रतिरक्षी के अन्य कार्यों जैसे फैगोसाइटोसिस में सहायता करता है।
(चित्र में Y आकार की संरचना दर्शाएँ जिसमें भारी और हल्की श्रृंखलाएँ, डाइसल्फ़ाइड बंध, परिवर्तनशील और स्थिर क्षेत्र अंकित हों।)
अथवा
अ) मलेरिया रोग के रोगजनक का नाम लिखिये।
a) मलेरिया परजीवी के जीवनचक्र को संक्षिप्त में समझाइये।
स) मलेरिया परजीवी के जीवनचक्र का नामांकित चित्र बनाइये।
उत्तर:
अ) मलेरिया रोग का रोगजनक: मलेरिया रोग का रोगजनक प्लाज़्मोडियम (Plasmodium) नामक प्रोटोज़ोआ परजीवी है। मनुष्यों में मलेरिया मुख्यतः प्लाज़्मोडियम विवैक्स (P. vivax), प्लाज़्मोडियम फैल्सीपेरम (P. falciparum), प्लाज़्मोडियम मलेरिया (P. malariae) और प्लाज़्मोडियम ओवेल (P. ovale) के कारण होता है।
a) मलेरिया परजीवी के जीवनचक्र की संक्षिप्त व्याख्या:
मलेरिया परजीवी का जीवनचक्र दो पोषकों में पूरा होता है:
- मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर में (यौन जनन): जब मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का रक्त पीता है, तो परजीवी के युग्मक (gametocytes) मच्छर की आंत में पहुँचते हैं। यहाँ नर और मादा युग्मक मिलकर युग्मनज (zygote) बनाते हैं, जो ओकाइनेट (ookinete) में बदलता है। ओकाइनेट मच्छर की आंत की भित्ति में प्रवेश कर ओसिस्ट (oocyst) बनाता है। ओसिस्ट में अनेक स्पोरोज़ोइट (sporozoites) बनते हैं, जो मच्छर की लार ग्रंथियों में पहुँच जाते हैं।
- मनुष्य में (अलैंगिक जनन): जब संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो स्पोरोज़ोइट रक्त में प्रवेश कर यकृत (liver) की कोशिकाओं में पहुँचते हैं। यहाँ वे मेरोज़ोइट (merozoites) में बदलते हैं। मेरोज़ोइट रक्त कोशिकाओं (RBCs) में प्रवेश करते हैं और वहाँ बढ़ते-बढ़ते ट्रॉफ़ोज़ोइट (trophozoite), फिर स्किज़ोंट (schizont) और अंत में अनेक मेरोज़ोइट बनाते हैं। RBCs फटने पर मेरोज़ोइट बाहर आते हैं और नई RBCs को संक्रमित करते हैं। कुछ मेरोज़ोइट युग्मक (gametocytes) में बदल जाते हैं, जो मच्छर द्वारा ग्रहण किए जाते हैं और चक्र पुनः शुरू होता है।
स) मलेरिया परजीवी के जीवनचक्र का नामांकित चित्र:
(चित्र में मनुष्य और मच्छर में होने वाले चरणों को दर्शाएँ। मुख्य भाग: स्पोरोज़ोइट, यकृत में मेरोज़ोइट निर्माण, RBC में स्किज़ोगोनी, युग्मक निर्माण, मच्छर की आंत में युग्मनज, ओकाइनेट, ओसिस्ट और स्पोरोज़ोइट। सभी भागों को नामांकित करें।)
English Version
a) What is Immunity?
b) Explain two barriers of Innate Immunity.
c) Draw the structure of an antibody molecule.
Answer:
a) Immunity: Immunity is the ability of the body to protect itself against pathogenic microorganisms and toxic substances. It is the innate or acquired capacity of the body to fight diseases.
b) Two barriers of Innate Immunity:
- Physical Barrier: Skin is the primary physical barrier that prevents pathogens from entering the body. Mucous membranes also act as physical barriers lining internal organs and trapping pathogens.
- Chemical Barrier: Tears, saliva, and sweat contain the enzyme lysozyme which destroys bacterial cell walls. Hydrochloric acid (HCl) present in the stomach also destroys pathogens.
c) Structure of an antibody molecule:
The antibody molecule (IgG) has a 'Y' shaped structure. It consists of four polypeptide chains - two heavy chains and two light chains. These chains are joined by disulfide bonds. The antibody has two main regions:
- Variable region: Responsible for recognizing and binding to the antigen.
- Constant region: Helps in other functions like phagocytosis.
(Draw a Y-shaped structure showing heavy and light chains, disulfide bonds, variable and constant regions.)
OR
a) Write the name of pathogen which causes malaria.
b) Explain the life cycle of malarial parasite in brief.
c) Draw a labelled diagram of life cycle of the malarial parasite.
Answer:
a) Pathogen causing malaria: The pathogen causing malaria is a protozoan parasite called Plasmodium. In humans, malaria is mainly caused by Plasmodium vivax, P. falciparum, P. malariae, and P. ovale.
b) Life cycle of malarial parasite in brief:
The life cycle of the malarial parasite is completed in two hosts:
- In female Anopheles mosquito (Sexual reproduction): When the mosquito bites an infected person, gametocytes enter the mosquito's gut. Male and female gametes fuse to form a zygote, which develops into an ookinete. The ookinete penetrates the gut wall and forms an oocyst. The oocyst produces numerous sporozoites that migrate to the mosquito's salivary glands.
- In humans (Asexual reproduction): When an infected mosquito bites a healthy person, sporozoites enter the blood and reach liver cells. Here they develop into merozoites. Merozoites enter red blood cells (RBCs) and grow into trophozoites, then schizonts, and finally produce many merozoites. When RBCs burst, merozoites are released and infect new RBCs. Some merozoites develop into gametocytes, which are taken up by mosquitoes, completing the cycle.
c) Labelled diagram of life cycle:
(Draw a diagram showing stages in humans and mosquitoes. Label: sporozoites, merozoite formation in liver, schizogony in RBC, gametocyte formation, zygote in mosquito gut, ookinete, oocyst, and sporozoites.)
SS-42-Bio. 274
प्रश्न 30
अ) पोषकचक्र किसे कहते हैं?
उत्तर: पोषकचक्र (Nutrient Cycling) वह प्रक्रिया है जिसमें पारितंत्र में विभिन्न पोषक तत्व (जैसे कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस) जीवों और पर्यावरण के बीच चक्रीय रूप से गतिमान रहते हैं। यह पारितंत्र की उर्वरता और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
ब) पारितंत्र में फॉस्फोरस चक्र का वर्णन कीजिए।
फॉस्फोरस चक्र: फॉस्फोरस चक्र एक धीमा और मुख्यतः स्थलीय चक्र है। इसमें फॉस्फोरस का भंडार चट्टानों में फॉस्फेट के रूप में होता है।
- अपक्षय: चट्टानों के अपक्षय से फॉस्फेट मिट्टी में मुक्त होता है।
- अवशोषण: पौधे मिट्टी से फॉस्फेट को अवशोषित करते हैं और इसे कार्बनिक यौगिकों में बदलते हैं।
- खाद्य श्रृंखला: शाकाहारी और मांसाहारी जीव पौधों और अन्य जीवों से फॉस्फोरस प्राप्त करते हैं।
- अपघटन: मृत जीवों और अपशिष्टों के अपघटन से फॉस्फेट पुनः मिट्टी में लौटता है।
- अवसादन: कुछ फॉस्फेट जल निकायों में पहुँचकर अवसादों में जमा हो जाता है, जो लाखों वर्षों बाद चट्टानों में परिवर्तित होता है।
यह चक्र वायुमंडलीय चरण से रहित होता है, इसलिए इसे अवसादी चक्र कहा जाता है।
स) एक स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र में फॉस्फोरस चक्र के सरलीकृत मॉडल का चित्र बनाइए।
नीचे एक स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र में फॉस्फोरस चक्र का सरलीकृत मॉडल दर्शाया गया है:
वायुमंडल (कोई फॉस्फोरस नहीं)
|
| (अपक्षय)
चट्टानें (फॉस्फेट) -----→ मिट्टी (फॉस्फेट)
| |
| | (अवशोषण)
| ↓
| पौधे (कार्बनिक फॉस्फोरस)
| |
| | (भोजन)
| ↓
| शाकाहारी जीव
| |
| | (भोजन)
| ↓
| मांसाहारी जीव
| |
| | (मृत्यु/अपशिष्ट)
| ↓
| अपघटक (बैक्टीरिया, कवक)
| |
| | (अपघटन)
| ↓
| मिट्टी (फॉस्फेट) ←---- (पुनर्चक्रण)
|
| (अवसादन)
↓
जल निकाय (अवसाद) → चट्टानें (लाखों वर्ष)
यह चित्र फॉस्फोरस के चक्रीय प्रवाह को दर्शाता है, जिसमें यह चट्टानों से मिट्टी, पौधों, जीवों और पुनः मिट्टी में लौटता है।
अथवा
अ) पारितंत्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: पारितंत्र (Ecosystem) एक जैविक इकाई है जिसमें सजीव जीव (पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव) और उनके अजैविक पर्यावरण (मिट्टी, जल, वायु, प्रकाश) परस्पर क्रिया करते हैं और ऊर्जा प्रवाह तथा पोषक चक्र के माध्यम से एक संतुलित तंत्र का निर्माण करते हैं।
ब) पारिस्थितिक पिरैमिड को समझाइए।
पारिस्थितिक पिरैमिड: यह एक ग्राफिकल निरूपण है जो पारितंत्र में विभिन्न पोषी स्तरों (Trophic Levels) के बीच संबंधों को दर्शाता है। यह तीन प्रकार के होते हैं:
- संख्या का पिरैमिड: प्रत्येक पोषी स्तर पर जीवों की संख्या दर्शाता है।
- बायोमास का पिरैमिड: प्रत्येक पोषी स्तर पर कुल जैविक द्रव्यमान (बायोमास) दर्शाता है।
- ऊर्जा का पिरैमिड: प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा की मात्रा दर्शाता है। यह हमेशा सीधा (अपराइट) होता है क्योंकि ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय होता है और प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा कम होती जाती है।
पारिस्थितिक पिरैमिड पारितंत्र की संरचना और कार्यप्रणाली को समझने में सहायक होते हैं।
स) ऊर्जा के एक आदर्श पिरैमिड का चित्र बनाइए।
नीचे ऊर्जा के एक आदर्श पिरैमिड का चित्र दर्शाया गया है:
शीर्ष परभक्षी (0.1 किलो कैलोरी)
/\
/ \
/ \
/ \
/ \
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/________________\
मांसाहारी (1 किलो कैलोरी)
/\
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/ \
/ \
/ \
/____________\
शाकाहारी (10 किलो कैलोरी)
/\
/ \
/ \
/______\
उत्पादक (100 किलो कैलोरी)
यह पिरैमिड दर्शाता है कि प्रत्येक पोषी स्तर पर ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है (10% नियम के अनुसार), जिससे पिरैमिड का आकार सीधा (अपराइट) बनता है।
a) What is Nutrient cycling?
Answer: Nutrient cycling is the process by which nutrients (such as carbon, nitrogen, phosphorus) move in a cyclic manner between living organisms and the environment in an ecosystem. It helps maintain the fertility and balance of the ecosystem.
b) Describe phosphorus cycle in ecosystem.
Phosphorus Cycle: It is a slow, sedimentary cycle. The main reservoir of phosphorus is in rocks as phosphates.
- Weathering: Weathering of rocks releases phosphates into the soil.
- Absorption: Plants absorb phosphates from soil and convert them into organic compounds.
- Food Chain: Herbivores and carnivores obtain phosphorus from plants and other animals.
- Decomposition: Decomposition of dead organisms and waste returns phosphates to the soil.
- Sedimentation: Some phosphates reach water bodies and get deposited as sediments, which over millions of years form rocks.
This cycle lacks an atmospheric phase, hence it is called a sedimentary cycle.
c) Draw a diagram to show the simplified model of phosphorus cycle in a terrestrial ecosystem.
Below is a simplified model of the phosphorus cycle in a terrestrial ecosystem:
Atmosphere (No phosphorus)
|
| (Weathering)
Rocks (Phosphate) -----→ Soil (Phosphate)
| |
| | (Absorption)
| ↓
| Plants (Organic phosphorus)
| |
| | (Food)
| ↓
| Herbivores
| |
| | (Food)
| ↓
| Carnivores
| |
| | (Death/Waste)
| ↓
| Decomposers (Bacteria, Fungi)
| |
| | (Decomposition)
| ↓
| Soil (Phosphate) ←---- (Recycling)
|
| (Sedimentation)
↓
Water bodies (Sediments) → Rocks (Millions of years)
This diagram shows the cyclic flow of phosphorus from rocks to soil, plants, animals, and back to soil.
OR
a) Define ecosystem.
Answer: An ecosystem is a biological unit consisting of living organisms (plants, animals, microorganisms) and their abiotic environment (soil, water, air, light) interacting with each other, forming a balanced system through energy flow and nutrient cycling.
b) Explain ecological pyramids.
Ecological Pyramids: These are graphical representations showing relationships between different trophic levels in an ecosystem. There are three types:
- Pyramid of Numbers: Shows the number of organisms at each trophic level.
- Pyramid of Biomass: Shows the total biological mass at each trophic level.
- Pyramid of Energy: Shows the amount of energy available at each trophic level. It is always upright because energy flow is unidirectional and decreases at each level.
Ecological pyramids help understand the structure and functioning of an ecosystem.
c) Draw a diagram of an ideal pyramid of energy.
Below is a diagram of an ideal pyramid of energy:
Top Carnivores (0.1 kcal)
/\
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/ \
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/ \
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/________________\
Carnivores (1 kcal)
/\
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