RBSE Class 12th 2018 Shorthand Hindi-SS-32-2018 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | Shorthand Hindi-SS-32-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2018 Shorthand Hindi-SS-32-2018
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Rajasthan Board Class 12th Shorthand Hindi-SS-32-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2018
हिन्दी शीघ्रलिपि (SHORTHAND HINDI)
समय : 3½ घण्टे पूर्णांक : 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- तीनों खण्ड एक ही बैठक में लिखाये जायें।
- प्रथम एवं द्वितीय खण्डों तथा द्वितीय एवं तृतीय खण्डों के बीच में 5-5 मिनट का मध्यान्तर दिया जाये। तीनों खण्डों के संकेत लिपि श्रुतलेखों के हिन्दी अक्षरीकरण के लिए 2¾ घंटे का समय दिया जाए।
- केवल निम्न विराम-चिह्न ही लगाएं : पूर्ण विराम, अर्द्ध-विराम और प्रश्न-चिह्न एवं कोष्ठक।
- संकेत लिपि पेन्सिल से लिखा जाए तथा उसका अनुवाद हिन्दी में टंकण यंत्र / कम्प्यूटर से ही टंकित किया जाय। हाथ से लिखा मान्य नहीं होगा।
- संकेत लिपि में लिखा हुआ श्रुतलेख उत्तर-पुस्तिका के साथ नत्थी कर दिया जाए।
- संकेत लिपि के 20% अंक रखे गये हैं।
- खण्ड प्रथम 4 मिनट, खण्ड द्वितीय 5 मिनट तथा खण्ड तृतीय 7 मिनट लिखवाने के रखे गए हैं। प्रत्येक खण्ड 80 शब्द प्रति मिनट की गति से बोला जाय।
नोट : प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें।
पृष्ठ संख्या : 1 of 7 | प्रश्न पत्र कोड : SS-32-SH. HD. (Hindi)
प्रथम-खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखाया जाए)
सेवा में,
श्रीमान् चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री महोदय
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग,
मध्य-प्रदेश सरकार, भोपाल (म.प्र.)
विषय: अल्पवेतन भोगी कार्मिक का पद स्थापन करवाने के संबंध में
महोदयजी,
उपरोक्त विषयान्तर्गत निवेदन है कि मैं एक संविदा कर्मी लेखाकार के पद पर रतलाम जिले में कार्यरत था लेकिन श्रीमान् निदेशक एन. आर. एच. एम./चिकित्सा विभाग के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रतलाम के पत्रांक 566-72 दिनांक 8.1.2016 के अग्रिम आदेश हेतु भोपाल मुख्यालय कार्यालय में उपस्थिति दिए जाने के अनुसरण में दिनांक 24.1.2016 को भोपाल मुख्यालय में उपस्थिति दी गई। पुनः अवकाश आवेदन प्रस्तुत करते हुए रतलाम आ गया था।
मैं एक अल्प वेतन संविदा कार्मिक हूँ तथा मेरा कुल वेतन मात्र ₹ 2000 है तथा मुझे पिछले 4 माह से वेतन भी नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में मैंने रतलाम जिले में पदस्थापन का निवेदन किया था।
SS-32-SH. HD. (Hindi) 065
पत्र-लेखन (आवेदन पत्र)
प्रश्न: निम्नलिखित पत्र को पढ़कर उसके आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पुन: मुख्यालय भोपाल में सम्पर्क करने पर यह अवगत करवाया गया कि मेरा पदस्थापन दिनांक 6.2./6 को स्वास्थ्य केन्द्र मनासा जिला मन्दसोर में कर दिया गया है। हालांकि मुझे अधिकारिक रूप से स्थानान्तरण/पदस्थापन आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं, लेकिन मैं मूल रूप से रतलाम जिले का निवासी हूँ तथा अल्प वेतन में परिवार सहित इतना दूर पदस्थापन करने से जीवन निर्वहन दुश्वर हो जाता है।
ऐसी स्थिति में श्रीमान् के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सादर निवेदन है कि अल्प वेतन में परिवार सहित दूर स्थान पर रहना अत्यन्त ही कठिन है। साथ ही रतलाम जिले के विभिन्न स्थानों पर संविदा लेखाकर्मी के पद रिक्त हैं। ऐसे में मेरा पदस्थापन रतलाम स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, ओखला रिक्त पद पर करवाने की अनुकम्पा करें।
धन्यवाद।
विकास राठी
लेखाकार, एन.आर.एच.एम.
दिनांक: 26.0.7
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ओखला
प्रश्न 1: प्रस्तुत पत्र किसने लिखा है?
- (क) विकास राठी
- (ख) अखेराम अनन्तराम
- (ग) मुख्यालय भोपाल
- (घ) स्वास्थ्य केन्द्र मनासा
व्याख्या: पत्र के अंत में लेखक का नाम 'विकास राठी' और पद 'लेखाकार, एन.आर.एच.एम.' दिया गया है।
प्रश्न 2: विकास राठी का मूल निवास कहाँ है?
- (क) भोपाल
- (ख) मन्दसोर
- (ग) रतलाम
- (घ) जामनगर
व्याख्या: पत्र में स्पष्ट लिखा है कि "मैं मूल रूप से रतलाम जिले का निवासी हूँ"।
प्रश्न 3: विकास राठी का पद क्या है?
- (क) लेखाकार
- (ख) प्रबंधक
- (ग) चिकित्सक
- (घ) कमीशन एजेन्ट
व्याख्या: पत्र के अंत में 'लेखाकार, एन.आर.एच.एम.' लिखा है, जो उनके पद को दर्शाता है।
प्रश्न 4: विकास राठी ने अपने पदस्थापन के लिए किस स्थान का अनुरोध किया है?
- (क) स्वास्थ्य केन्द्र मनासा
- (ख) प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ओखला
- (ग) मुख्यालय भोपाल
- (घ) जामनगर
व्याख्या: पत्र में लिखा है "मेरा पदस्थापन रतलाम स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, ओखला रिक्त पद पर करवाने की अनुकम्पा करें"।
प्रश्न 5: पत्र में 'दुश्वर' शब्द का क्या अर्थ है?
- (क) सरल
- (ख) कठिन
- (ग) सुखद
- (घ) संभव
व्याख्या: 'दुश्वर' का अर्थ कठिन या मुश्किल होता है। पत्र में जीवन निर्वहन को दुश्वर बताया गया है, अर्थात कठिन।
द्वितीय-खण्ड (व्यावसायिक पत्र)
प्रश्न: निम्नलिखित व्यावसायिक पत्र को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मेसर्स अखेराम अनन्तराम एण्ड संस
(कपड़े के थोक व्यापारी एवं कमीशन एजेन्ट)
मो.सं.: 09764746700
पता सं.: 774/4 शोभा पार्क के सामने,
लाल लाजपत राय रोड,
पत्र सं.: 945 चोपट हिल, नयापुरा,
कोड/सं.: ए बी सी /3/9
जामनगर (गुजरात)
दिनांक: 6-0-7
प्रश्न 6: इस पत्र का प्रेषक कौन है?
- (क) विकास राठी
- (ख) अखेराम अनन्तराम एण्ड संस
- (ग) प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ओखला
- (घ) मुख्यालय भोपाल
व्याख्या: पत्र के शीर्ष पर 'मेसर्स अखेराम अनन्तराम एण्ड संस' लिखा है, जो प्रेषक का नाम है।
प्रश्न 7: इस फर्म का व्यवसाय क्या है?
- (क) कपड़े का थोक व्यापार एवं कमीशन एजेन्ट
- (ख) स्वास्थ्य सेवा
- (ग) शिक्षा
- (घ) परिवहन
व्याख्या: पत्र में स्पष्ट लिखा है "कपड़े के थोक व्यापारी एवं कमीशन एजेन्ट"।
प्रश्न 8: फर्म का पता कहाँ है?
- (क) भोपाल
- (ख) रतलाम
- (ग) जामनगर (गुजरात)
- (घ) मन्दसोर
व्याख्या: पत्र के अंत में 'जामनगर (गुजरात)' लिखा है, जो फर्म का स्थान है।
प्रश्न 9: फर्म का मोबाइल नंबर क्या है?
- (क) 09764746700
- (ख) 774/4
- (ग) 945
- (घ) 75/69875
पत्र लेखन (व्यावसायिक पत्र)
सेवा में,
सर्वश्री मोतीराम मोजीराम एण्ड कम्पनी,
रामभक्त मन्दिर के सामने,
रिंग रोड़,
बनारस (उ.प्र.)
विषय: माल की शिकायत के क्रम में।
प्रिय महोदय,
निवेदन है कि हमने आपको दिनांक 6-9-2017 को पत्र सं. 885 के अनुसार माल का आदेश दिया था। आपने उस माल की पूर्ति 25-9-2017 तक करने का वादा किया था। हमने इस संबंध में ₹75,000/- का ड्राफ्ट सं. 754 दिनांक 24-9-2017 का बनाकर अग्रिम में भेजा था। परन्तु खेद इस बात का है कि बार-बार टेलिफोन करने के पश्चात् आपने हमारा माल 10-10-2017 को रेलवे बिल्टी के माध्यम से भेजा था।
माल प्राप्ति के पश्चात् कुछ माल क्षतिग्रस्त पाई गई थी। जिसकी हमने टेलिफोन के माध्यम से तुरन्त ही सूचना भेज दी थी। आपने कहा था कि हमारा कर्मचारी आकर माल का निरीक्षण कर लेगा। परन्तु न तो आपका कर्मचारी आया एवं न ही आप द्वारा संतोषजनक जबाब दिया गया।
क्षतिग्रस्त माल का विवरण इस प्रकार है:
- एक गांठ का माल ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह पूर्ण रूप से द्वितीय श्रेणी का है।
SS-32-SH. HD. (Hindi) 065
व्याख्या: यह एक व्यावसायिक शिकायत पत्र है जिसमें ग्राहक ने विक्रेता को माल की देरी से प्राप्ति और क्षतिग्रस्त माल की शिकायत की है। पत्र में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया गया है:
- आदेश दिनांक और पत्र संख्या का उल्लेख
- अग्रिम भुगतान का विवरण (ड्राफ्ट संख्या और राशि)
- माल प्राप्ति में देरी (वादे के अनुसार 25 सितंबर के बजाय 10 अक्टूबर)
- क्षतिग्रस्त माल की सूचना और विक्रेता द्वारा कोई कार्रवाई न करना
- क्षतिग्रस्त माल का विवरण (एक गांठ द्वितीय श्रेणी का)
सुझाव: इस प्रकार के पत्र में स्पष्टता, तथ्यात्मक जानकारी और विनम्र भाषा का प्रयोग आवश्यक है।
तृतीय खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखा जाय) [20]
प्रश्न: वह ज्योति जलाओं जिसमें तेल नहीं डालना पड़ता
व्याख्या: बिरहिनी मंदिर दियना बार। बिन बाती बिन तेल जुगति सो, बिन दीप उजियार। मंदिर है देह, ज्योति है आत्मा। इस मंदिर में तो परमात्मा विराजमान है। कहां भागे जाते हो? किसे खोजने निकले हो? कितने समय से तो खोज रहे हो, परन्तु मिला नहीं। जरूर कोई बुनियादी चूक हो रही है। जो भीतर हो, उसे बाहर कैसे खोजोगे, उसे कैसे पाओगे। मंदिर हो या योग तैयार करता है।
सारांश: यह पंक्ति आध्यात्मिक ज्ञान की ओर संकेत करती है कि सच्ची ज्योति (आत्मा) को बाहर नहीं, बल्कि अपने भीतर (देह रूपी मंदिर में) खोजना चाहिए। बिना बाहरी साधनों (तेल, बाती) के भी यह ज्योति स्वयं प्रकाशित होती है।
पत्र (भाग 2)
2. दूसरी गांठ के माल से आधी से ज्यादा साड़ियों का माल अन्दर से कटा फटा पाया गया। ग्राहकों ने [374] माल वापस लाकर हमारी दुकान पर पटक कर चले गए। इससे हमें शर्मीन्दगी महसूस हुई एवं इस [4] कारण हमारी ख्याति पर पहली बार कुप्रभाव पड़ा है। [44]
आपके कर्मचारियों की लापरवाही के कारण दीपावली जैसे त्योहार पर हमें बहुत ही धक्का लगा है। इस संबंध में आपसे निवेदन है कि आप स्वयं अथवा आपका कर्मचारी हमारे यहाँ आकर इस [402] मामले को तुरन्त ही निपटाने का कष्ट करें। [4%]
धन्यवाद।
हम है आपके,
अखेराम अनन्तराम एण्ड संस के लिए,
सही
(अनन्तराम)
साझेदार। [5]
व्याख्या: यह एक शिकायती पत्र है जिसमें व्यापारी ने बताया है कि दूसरी गांठ के माल में आधी से अधिक साड़ियाँ अन्दर से कटी-फटी मिलीं। ग्राहकों ने माल वापस कर दिया और दुकान पर पटक कर चले गए, जिससे व्यापारी को शर्मिन्दगी हुई और उसकी प्रतिष्ठा पर बुरा प्रभाव पड़ा। दीपावली जैसे त्योहार पर यह घटना हुई, जिससे व्यापारी को बहुत धक्का लगा। पत्र में आपूर्तिकर्ता से अनुरोध किया गया है कि वह स्वयं या अपना कर्मचारी भेजकर इस मामले को तुरंत निपटाए।
पाठ्यांश पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1. ध्यान क्या सिखाता है? इसके महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ध्यान देह के भीतर बैठने की कला सिखाता है। यह व्यक्ति को अपनी देह के द्वार खोलने और आत्म-ज्योति को पहचानने में सहायता करता है। जिसने योग और ध्यान के माध्यम से भीतर बैठने की कला सीख ली, उसने परमात्मा को पा लिया है। ध्यान का महत्व यह है कि यह हमें अपने अंतर्गृह (हृदय) तक पहुँचने और अमृत के स्रोत को खोजने में मार्गदर्शन करता है, जिसके बिना जीवन उदास और विषादपूर्ण है।
प्रश्न 2. लेखक के अनुसार वर्तमान दुनिया की क्या स्थिति है? पाठ्यांश के आधार पर लिखिए।
उत्तर: लेखक के अनुसार वर्तमान दुनिया में चारों ओर गहन हताशा व्याप्त है। लोगों के दिलों ने धड़कना बंद कर दिया है, आँखों में मस्ती नहीं है, प्राणों में कोई गीत नहीं है और पैरों में कोई नृत्य नहीं है। परिणामस्वरूप मनुष्य थका-माँदा और धक्के खाता हुआ अपनी गति से बढ़ता है। आकाश में कोई तारा दिखाई नहीं देता, लेकिन जब भीतर की ज्योति दिखाई देने लगती है, तब आकाश तारों से भर जाता है। सही यात्रा भीतर की ज्योति को देखने से शुरू होती है।
प्रश्न 3. "भीतर एक ज्योति जलती है" – इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। यह ज्योति सामान्य दीपक से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: इस कथन का आशय है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर आत्म-ज्योति (आध्यात्मिक प्रकाश) पहले से ही विद्यमान है। यह ज्योति सामान्य दीपक से इस प्रकार भिन्न है:
- इसमें तेल नहीं डालना पड़ता – यह स्वयंप्रकाशित है।
- इसमें बाती नहीं लगानी पड़ती – यह निरंतर जलती रहती है।
- यह कभी बुझती नहीं – जबकि सामान्य दीपक तेल समाप्त होने पर बुझ जाते हैं।
- यह मिट्टी का दीपक नहीं – जो कभी भी टूट सकता है, बल्कि यह अविनाशी है।
लेखक कहता है कि यह कहना ठीक नहीं कि वहाँ कोई दीपक है, परंतु उजियारा और रोशनी बहुत है।
प्रश्न 4. लेखक किस प्रकार की यात्रा को 'सही यात्रा' मानता है और क्यों?
उत्तर: लेखक उस यात्रा को 'सही यात्रा' मानता है जो भीतर की ज्योति को देखने से शुरू होती है। कारण यह है कि जिसने भीतर की ज्योति देख ली, उसे चारों ओर ज्योतिर्मय के दर्शन होने लगते हैं। यह यात्रा व्यक्ति को देह की सीढ़ियों से उतरकर हृदय (अंतर्गृह) तक ले जाती है, और फिर हृदय की सीढ़ियों से उतरकर अमृत के स्रोत तक पहुँचाती है। यही सच्चा आध्यात्मिक मार्ग है जो जीवन को सार्थक बनाता है।
प्रश्न 5. "तुम्हारा विरह मुझे छूता है, तुम्हारा दुःख मुझे छूता है।" – इस पंक्ति में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पंक्ति में लेखक (या गुरु) अपने शिष्य/पाठक के प्रति गहरी सहानुभूति और करुणा व्यक्त करता है। 'विरह' का अर्थ है अलगाव या वियोग – यहाँ आत्मा का परमात्मा से वियोग। लेखक कहता है कि वह दूसरों के दुःख और वियोग को अनुभव करता है और उन्हें एक ऐसा चमत्कार देना चाहता है जो उसके अपने भीतर घटित हुआ है – अर्थात आत्म-ज्योति का दर्शन। यह भाव बताता है कि आध्यात्मिक गुरु अपने शिष्यों के कष्टों को अपना कष्ट मानता है और उन्हें मुक्ति का मार्ग दिखाना चाहता है।
SS-32-SH. HD. (Hindi) 065
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